ट्रक ने बाइक सवार को मारी टक्कर, युवक की हुई मौत, ग्रामीणों व परिजनों का फूटा गुस्सा, सड़क किया जाम


शहडोल 

जिले के धनपुरी थाना क्षेत्र अंतर्गत बेम्हौरी बस स्टैंड के पास कोयला परिवहन में लगी हाइवा की टक्कर से 20 वर्षीय युवक राजेंद्र कोल की दर्दनाक मौत हो गई। हादसे के बाद परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और कई घंटों तक सड़क जाम रही। लोगों का कहना है कि क्षेत्र में कोयला परिवहन में लगे भारी वाहनों की तेज रफ्तार लगातार लोगों की जान ले रही है।

हाइवा क्रमांक CG 10 BL 9095 दामिनी कोल माइंस से कोयला लेकर संगमा कोल साइडिंग जा रही थी। बेम्हौरी हनुमान मंदिर के सामने बाइक सवार राजेंद्र कोल उसकी चपेट में आ गया। टक्कर इतनी भीषण थी कि युवक की मौके पर ही मौत हो गई और शव हाइवा के नीचे फंस गया।

हादसे के बाद आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने सड़क जाम कर एसईसीएल के महाप्रबंधक एवं उपक्षेत्रीय प्रबंधक को मौके पर बुलाने की मांग की। ग्रामीणों का कहना था कि क्षेत्र में लगातार हो रहे हादसों के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं किया जा रहा है। काफी समझाइश के बाद शाम को शव बाहर निकाला गया।

ग्रामीणों का कहना है कि कोयला परिवहन में लगे भारी वाहनों की गति, सुरक्षा मानकों और निगरानी व्यवस्था की गंभीर समीक्षा की जरूरत है। लोगों ने मांग की है कि दुर्घटना की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

नपा उपाध्यक्ष के परिसर से चलाया जा रहा था, 500 करोड़ का महाघोटाला, मोहरे भाग गए, सफेदपोशो को मिला संरक्षण

*​GNS फाइनेंशियल कांड में सुलगते सवाल, आखिर कब तक 'रसूखदारों' की चौखट के बाहर थमी रहेगी जांच की रफ्तार*


​शहडोल

जिले के बुढार-धनपुरी क्षेत्र में जनता के खून-पसीने की कमाई पर जो 'डाका' डाला गया है, उसका पैमाना और भी खौफनाक है। लगभग 500 करोड़ रुपये की इस कथित निवेश ठगी ने हजारों परिवारों को तबाह कर दिया है। बावजूद इसके, व्यवस्था की सुस्ती और जांच की कछुआ चाल चीख-चीखकर सवाल पूछ रही है कि क्या अपराधियों को कानून से ज्यादा किसी के रसूख का 'कवच' मिला हुआ है?

​*1200 शिकार, 500 करोड़ की 'लूट'*

​दर्ज एफआईआर के मुताबिक, GNS फाइनेंशियल कंपनी के शातिर संचालकों—सुखनंदन यादव, सरोज यादव और मुकेश यादव ने 'डबल मुनाफे' का मायाजाल बुनकर करीब 1200 से अधिक सीधे-साधे निवेशकों को अपने जाल में फंसाया। लूट का आंकड़ा शुरुआती शिकायतों में जो आंकड़ा करोड़ों में था, वह अब 250 करोड़ से लेकर 500 करोड़ रुपये के बीच बताया जा रहा है।

​जैसे ही पाप का घड़ा भरा, कंपनी के संचालक जनता की गाढ़ी कमाई समेटकर रफूचक्कर हो गए। पीड़ितों का सवाल: जब महीनों से पानी की तरह पैसा बहाया जा रहा था, तब स्थानीय खुफिया तंत्र और प्रशासन की आंखें क्यों बंद थीं।

​*किराएदार भागा मकान मालिक की जिम्मेदारी कहा गई* 

​इस पूरे महाघोटाले में सबसे तीखा और गंभीर सवाल उन किरदारों' पर उठ रहा है, जिन्होंने इस अवैध धंधे को फलने-फूलने के लिए अपनी जमीन और साख उधार दी थी। ​कानून का सीधा सिद्धांत यदि किसी अवैध गोदाम, वाहन या भवन से कोई गैरकानूनी धंधा संचालित होता है, तो सबसे पहले उसके मालिक को शिकंजे में लिया जाता है। तो फिर GNS कंपनी के मामले में यह ढिलाई क्यों?

​स्थानीय गलियारों और पीड़ित जनता के बीच यह बात पूरी ताकत से गूंज रही है कि जिस आलीशान भवन से इस ठगी के साम्राज्य को चलाया जा रहा था, वह धनपुरी नगरपालिका परिषद के उपाध्यक्ष और रसूखदार कांग्रेस नेता हनुमान खंडेलवाल का है। ​क्या एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि को यह भनक तक नहीं थी कि उनके भवन में करोड़ों के वारे-न्यारे हो रहे हैं। ​क्या यह सिर्फ एक साधारण 'मकान-किराएदार' का रिश्ता था, या इसके पीछे संरक्षण और हिस्सेदारी का कोई गहरा खेल है?

​जनता मांग कर रही है कि जांच की सुई जब तक इस रसूखदार चौखट तक नहीं पहुंचेगी, तब तक इंसाफ की उम्मीद बेमानी है। (हालांकि, जब तक कोई सक्षम एजेंसी या अदालत इस पर मुहर नहीं लगाती, तब तक निष्पक्षता के नाते उनका पक्ष भी सामने आना जरूरी है—लेकिन जांच से परहेज क्यों?

*​सोया रह गया पुलिस प्रशासन*

​निवेशकों का सीधा आरोप है कि कंपनी के खिलाफ शिकायतें नई नहीं थीं। शुरुआती स्तर पर ही अगर प्रशासन ने अपनी चमचमाती गाड़ियों से उतरकर इन दफ्तरों की थोड़ी भी स्क्रूटनी की होती, तो आज हजारों घर बर्बाद होने से बच जाते।

​किसकी कमाई डूबी? इसमें किसी बड़े पूंजीपति का पैसा नहीं है। इसमें खेतों में पसीना बहाने वाले किसान, दिहाड़ी मजदूर, छोटे व्यापारी, अपनी पेंशन का एक-एक पैसा जोड़ने वाले बुजुर्ग और घर चलाने वाली महिलाएं शामिल हैं। कई लोगों ने अपनी पैतृक जमीनें बेचकर और रिटायरमेंट फंड इस उम्मीद में लगा दिया था कि बच्चों का भविष्य सुधरेगा। आज वे थानों और दफ्तरों के चक्कर काट-काटकर अपनी चप्पलें घिस रहे हैं।

​*एजेंटों' की कार्रवाई से काम नहीं चलेगा*

​पीड़ितों और सामाजिक संगठनों ने अब आर-पार की लड़ाई का मूड बना लिया है। उनकी मांगें बिल्कुल साफ और आक्रामक हैं। डायरेक्टरों के साथ संरक्षकों की भी हो गिरफ्तारी। जांच का दायरा केवल यादव बंधुओं तक सीमित न रहे। उन्हें वर्षों तक 'अभयदान' देने वाले हर सफेदपोश की भूमिका खंगाली जाए। इस 500 करोड़ की राशि को किन-किन बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया, किन बेनामी संपत्तियों में निवेश किया गया, इसकी फोरेंसिक ऑडिट हो।

​आरोपियों और उनके करीबियों की चल-अचल संपत्तियों को अविलंब कुर्क कर निवेशकों की पाई-पाई की रिकवरी की जाए।  जिन अधिकारियों की नाक के नीचे यह समानांतर बैंकिंग सिस्टम चल रहा था, उन पर भी लापरवाही की गाज गिरे।

​*परीक्षा की घड़ी में जांच एजेंसियां*

​बुढार-धनपुरी का यह कथित घोटाला अब महज एक आर्थिक अपराध नहीं रह गया है। यह शहडोल के पुलिस-प्रशासन की साख, रसूखदारों के दबाव के आगे कानून की ताकत और आम जनता के बचे-खुचे भरोसे की सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा है।

​क्या शहडोल पुलिस केवल 'भगोड़े' मोहरों की तलाश का नाटक करती रहेगी, या फिर उन असली 'शतरंज के खिलाड़ियों' के गिरेबान तक हाथ डालेगी जो शहर में ही बैठकर सत्ता और रसूख का लुत्फ उठा रहे हैं? जनता की नजरें टिकी हैं, और आक्रोश का लावा कभी भी फूट सकता है।

1000 करोड़ के कथित कॉर्पाेरेट फर्जीवाड़े में महेंद्र गोयनका दिल्ली से गिरफ्तार, कोलकाता पुलिस कर रही पूछताछ

*फर्जी हस्ताक्षरों से कंपनियों पर नियंत्रण स्थापित करने का आरोप, कई राज्यों में दर्ज हैं धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले*


इंट्रोः- उद्योगपति एवं विधायक संजय पाठक के परिवार से जुड़ी कंपनियों में कथित रूप से लगभग 1000 करोड़ रुपये के कॉर्पाेरेट फर्जीवाड़े के मामले में कोतमा निवासी महेंद्र गोयनका की गिरफ्तारी के बाद जांच तेज हो गई है। कोलकाता पुलिस ने उन्हें दिल्ली से गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से 10 दिन की पुलिस रिमांड मंजूर की गई है। इस दौरान पुलिस वित्तीय लेनदेन, दस्तावेजी हेराफेरी और कथित धोखाधड़ी से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर पूछताछ करेगी। जांच एजेंसियों के अनुसार, महेंद्र गोयनका पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी हस्ताक्षरों, कूटरचित दस्तावेजों और कथित जालसाजी के माध्यम से पाठक परिवार की कई कंपनियों पर अवैध नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास किया। मामले में कोलकाता में भारतीय न्याय संहिता एवं संबंधित प्रावधानों के तहत धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र, जालसाजी और फर्जी दस्तावेजों के उपयोग से जुड़ी गंभीर धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया था। सूत्रों के मुताबिक, गोयनका पूर्व में पाठक परिवार से जुड़ी कंपनी यूरो प्रतीक इस्पात इंडिया प्राइवेट लिमिटेड में वरिष्ठ प्रबंधकीय पद पर कार्यरत रहे हैं। उन पर कंपनी के वित्तीय लेनदेन में कथित अनियमितताओं, संपत्तियों के दुरुपयोग तथा दस्तावेजों में हेराफेरी के आरोप लगाए गए हैं। जांच एजेंसियां अब कंपनी से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य संबंधित दस्तावेजों की भी जांच कर रही हैं।

अनूपपुर

करीब 1000 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े बहुचर्चित मामले में कोलकाता पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए रायपुर निवासी कारोबारी महेंद्र गोयनका को दिल्ली से गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी पिछले करीब डेढ़ से दो वर्षों से फरार चल रहा था और उसकी तलाश कई राज्यों की जांच एजेंसियां कर रही थीं। बताया जा रहा है कि इस दौरान मध्यप्रदेश पुलिस भी उसे गिरफ्तार नहीं कर सकी थी। गिरफ्तारी के बाद अब उसे न्यायालय में पेश करने और आगे की पूछताछ के लिए आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। जांच एजेंसियों के अनुसार महेंद्र गोयनका पहले मध्यप्रदेश के विधायक संजय पाठक के परिवार से जुड़ी कंपनी यूरो प्रतीक इस्पात इंडिया प्राइवेट लिमिटेड में वरिष्ठ प्रबंधकीय जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। आरोप है कि कंपनी के संचालन के दौरान बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं की गईं और पहले से बेची जा चुकी संपत्तियों एवं माल के लेन-देन में भी कथित गड़बड़ियां की गईं, जिससे करोड़ों रुपये के वित्तीय नुकसान की आशंका जताई गई है।

*फर्जी दस्तावेज व हस्ताक्षरों का आरोप*

जांच के दौरान यह भी आरोप सामने आया है कि महेंद्र गोयनका और उनके कुछ सहयोगियों ने फर्जी हस्ताक्षरों और कथित जाली दस्तावेजों के माध्यम से परिवार से जुड़ी कई कंपनियों के नियंत्रण पर कब्जा करने का प्रयास किया। इसी आधार पर कोलकाता में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश, जालसाजी तथा अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद पुलिस ने आरोपी की तलाश तेज कर दी थी और अंततः दिल्ली से उसे गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की।

*कटनी में भी दर्ज हैं आपराधिक मामले*

जांच एजेंसियों के मुताबिक महेंद्र गोयनका और उनके सहयोगियों के खिलाफ मध्यप्रदेश के कटनी जिले में भी धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और आपराधिक षड्यंत्र से जुड़े दो अलग-अलग मामले दर्ज हैं। बताया जा रहा है कि इस मामले में कुछ सह-आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिकाएं पहले ही सर्वाेच्च न्यायालय द्वारा खारिज की जा चुकी हैं, जिसके बाद जांच और तेज कर दी गई थी।

*एनसीएलटी के आदेश में भी हुई थीं टिप्पणियां*

सूत्रों के अनुसार, मुंबई स्थित राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने 9 मई 2025 को जारी अपने एक आदेश में महेंद्र गोयनका और उनकी पत्नी मीनू गोयनका से जुड़े वित्तीय लेन-देन पर भी महत्वपूर्ण टिप्पणियां दर्ज की थीं। इसके अलावा गोयनका से जुड़ी एक अन्य कंपनी निसर्ग इस्पात के वित्तीय लेन-देन और कथित अनियमितताओं की जांच भी विभिन्न स्तरों पर जारी है।

*पूरे वित्तीय नेटवर्क की होगी पड़ताल*

जांच एजेंसियों का मानना है कि महेंद्र गोयनका की गिरफ्तारी इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकती है। अब जांच का दायरा केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे जुड़े वित्तीय नेटवर्क, कंपनियों के आपसी लेन-देन, बैंकिंग ट्रांजेक्शन, दस्तावेजों की सत्यता और अन्य संदिग्ध व्यक्तियों की भूमिका की भी गहन जांच की जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ के दौरान कई और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं, जिससे इस कथित वित्तीय घोटाले की पूरी परतें खुल सकती हैं।

*जांच जारी, कई और खुलासों की संभावना*

कोलकाता पुलिस सहित संबंधित जांच एजेंसियां अब आरोपी से विस्तृत पूछताछ कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड, कंपनियों के वित्तीय लेन-देन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है। जांच के आधार पर आने वाले दिनों में इस प्रकरण में और गिरफ्तारियां या नए खुलासे होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है। कोलकाता पुलिस की 10 दिन की रिमांड के दौरान मामले में शामिल अन्य व्यक्तियों, कंपनियों और वित्तीय लेनदेन की कड़ियों की जांच की जाएगी। जांच एजेंसियों का मानना है कि पूछताछ के दौरान कथित कॉर्पाेरेट फर्जीवाड़े से जुड़े कई महत्वपूर्ण खुलासे सामने आ सकते हैं।

युवक तलवार लेकर गांव में घूमने से मचा हड़कंप, पुलिस के सामने करता रहा अजीब हरकते


शहडोल

जिले के जैतपुर थाना क्षेत्र की झींक बिजुरी चौकी अंतर्गत ग्राम सेमरिया में एक युवक के हाथ में तलवार लेकर गांव में घूमने का मामला सामने आया है। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन युवक पुलिस के सामने भी तलवार लहराता रहा। पुलिस ने उसे दूर से समझाने का प्रयास किया, हालांकि वह नहीं माना और पुलिस को धमकाते हुए आगे बढ़ गया। इस दौरान किसी ग्रामीण ने घटना का वीडियो बना लिया, जो अब चर्चा का विषय बना हुआ है।

पुलिस के अनुसार सूचना मिली थी कि एक युवक हाथ में तलवार लेकर गांव में घूम रहा है। आशंका जताई गई थी कि वह किसी पर हमला कर सकता है। सूचना मिलते ही झींक बिजुरी चौकी प्रभारी उप निरीक्षक रामपाल वर्मा पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे।

चौकी प्रभारी ने बताया कि युवक की मानसिक स्थिति सामान्य नहीं है। पुलिस ने उसके पास जाने के बजाय सुरक्षित दूरी बनाकर उसे समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह अपनी ही धुन में चलता रहा और तलवार लहराते हुए पुलिस को भी धमकाने लगा। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने संयम बरता ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।

कुछ देर बाद युवक वहां से चला गया। इस दौरान मौजूद एक व्यक्ति ने पूरी घटना का वीडियो अपने मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया। वीडियो में युवक हाथ में तलवार लेकर पुलिस के सामने चलता हुआ दिखाई दे रहा है। पुलिस का कहना है कि युवक की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है और परिजनों से दोबारा इलाज कराने के लिए कहा जाएगा, ताकि भविष्य में किसी तरह की अप्रिय घटना न हो। वहीं, पुलिस मामले में आवश्यक वैधानिक कार्रवाई भी कर रही है।

पिता नाबालिग पुत्री से करता था अश्लील हरकत, दुष्कर्म का किया प्रयास, आरोपी को पुलिस ने किया गिरफ्तार


शहडोल 

जिले में रिश्तों को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। जिले की 16 वर्षीय नाबालिग ने अपने ही पिता पर दुष्कर्म के प्रयास और लंबे समय से अश्लील हरकतें करने का आरोप लगाया है। पीड़िता घर से भागकर जबलपुर पहुंची, जहां उसने पुलिस को पूरी आप बीती सुनाई और अपनी बात के समर्थन में मोबाइल से रिकॉर्ड किए गए कुछ वीडियो भी दिखाए। 

मामले की जानकारी मिलने के बाद जबलपुर पुलिस ने शहडोल पुलिस से संपर्क किया। इसके बाद शहडोल पुलिस नाबालिग को अपने साथ शहडोल लेकर आई और महिला थाने में उसकी शिकायत पर आरोपी पिता के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया। नाबालिग की पहचान गोपनीय रखने के लिए थाना क्षेत्र का नाम सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है।

किशोरी 9 जुलाई को घर से निकलकर शहडोल रेलवे स्टेशन पहुंची। वहां से कटनी होते हुए वह करीब 180 किलोमीटर दूर जबलपुर पहुंच गई। वह दिनभर शहर में घूमती रही और रात रेलवे स्टेशन पर गुजारी। रेलवे स्टेशन पर बैठे देखकर एक पुलिसकर्मी ने उससे पूछताछ की और उसे महिला थाने ले गया। वहां किशोरी ने अपने साथ हो रही प्रताड़ना की जानकारी पुलिस को दी।

पीड़िता ने पुलिस को बताया कि उसका पिता पिछले करीब दो वर्षों से शराब के नशे में घर आता था और उसके साथ अश्लील हरकतें करता था। उसने आरोप लगाया कि पिता अनुचित तरीके से छूता था तथा विरोध करने पर धमकाता भी था। पुलिस अधीक्षक संजय कुमार अग्रवाल ने बताया की पुलिस ने नाबालिग को सुरक्षित शहडोल लाकर महिला थाने में उसकी शिकायत पर रिपोर्ट दर्ज की और आरोपी पिता की गिरफ्तारी कर ली गई है।

सरपंच, सचिव की बड़ी लापरवाही, नाली के अंदर डाल दी पेयजल पाइपलाइन, फूटा ग्रामीणों का गुस्सा

*कार्यवाही की मांग*


​अनूपपुर

जनपद पंचायत अनूपपुर के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत बदरा से विकास कार्यों में लापरवाही और मनमानी का एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ जनपद पंचायत कार्यालय और पंचायत भवन से महज 10 मीटर की दूरी पर चल रहे पेयजल पाइपलाइन विस्तार कार्य में तकनीकी मानकों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जिस मार्ग से प्रतिदिन जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी गुजरते हैं, उसी मार्ग पर हो रही इस घोर अनियमितता को लेकर सभी ने आँखें मूंद रखी हैं।

स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के लिए नियमानुसार जमीन की खुदाई कर पाइपलाइन बिछाई जानी थी। लेकिन ठेकेदार और पंचायत प्रशासन ने मेहनत और बजट बचाने के चक्कर में पाइपलाइन को सीधे गंदे पानी की नाली के भीतर ही डाल दिया। ग्रामीणों का कहना है कि नाली के भीतर पाइप डालने से भविष्य में पाइप क्षतिग्रस्त होने पर पूरी बस्ती में दूषित और जहरीला पानी सप्लाई होने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। लाखों रुपये की सरकारी योजना को इस तरह पलीता लगाना सीधे तौर पर जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ है।

ग्रामीणों ने इस घटिया निर्माण कार्य का विरोध किया और नियमानुसार काम कराने की मांग की, तो पंचायत प्रशासन द्वारा उनकी शिकायतों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। इतना ही नहीं, कुछ ग्रामीणों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि विरोध करने वालों पर सरपंच-सचिव द्वारा अपने राजनैतिक प्रभाव और ऊंची पहुंच का हवाला देकर दबाव बनाने व उन्हें डराने-धमकाने का प्रयास भी किया गया।

​मामले को लेकर क्षेत्र की जनता में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से कलेक्टर अनूपपुर, मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) जिला पंचायत, अनुविभागीय अधिकारी तथा संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय तकनीकी एवं वित्तीय जांच कराई जाए। यदि जांच में निर्माण कार्य की गुणवत्ता में कमी या किसी भी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी पाई जाती है, तो दोषी सरपंच, सचिव और संबंधितों के खिलाफ सख्त वैधानिक एवं दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

महिला के अंधी हत्या का पुलिस ने किया खुलासा, जादू, टोना के शक में की थी हत्या दोनो आरोपी सगे भाई गिरफ्तार


​शहडोल

थाना जयसिंहनगर पुलिस ने ग्राम कनाड़ीकला में हुई एक वृद्ध महिला की अंधी हत्या के मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों सगे भाई अनिल यादव पिता अशोक यादव, उम्र 22 वर्ष, सुनील यादव पिता अशोक यादव, उम्र 25 वर्ष दोनो ग्राम कनाड़ीखुर्द, थाना जयसिंहनगर, जिला शहडोल के निवासी को गिरफ्तार कर लिया है। 

​06 जुलाई 2026 को महेन्द्र यादव (पिता ललुआ यादव, निवासी ग्राम कनाड़ीकला पतेरा टोला) ने थाना जयसिंहनगर में सूचना दर्ज कराई थी कि उनकी माता गेंदा बाई यादव बाजार से घर लौट रही थीं। इसी दौरान ग्राम कनाड़ीकला स्थित बड़ादेव के पास कुल्हाड़िया नदी की धार में उनका शव मिला, जिसके गले पर धारदार हथियार से प्रहार के निशान थे। सूचना मिलते ही पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बी.एन.एस.) की धारा 103(1) के तहत अपराध पंजीकृत कर विवेचना शुरू की।

​मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक द्वारा आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी के निर्देश दिए गए। साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने संदेही अनिल यादव एवं सुनील यादव को हिरासत में लेकर पूछताछ की, जिसके बाद दोनों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया।।

​पूछताछ में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि हत्या की वजह जादू-टोना का अंधविश्वास था। आरोपियों को भ्रम था कि मृतिका गेंदा बाई यादव द्वारा किए गए जादू-टोने के कारण उनकी माता लगातार बीमार रहती थीं। इसी संदेह में दोनों ने मिलकर पूर्व नियोजित षड्यंत्र रचा।

​योजना के मुताबिक, 6 जुलाई को आरोपी सुनील यादव कुल्हाड़ी लेकर नदी के पास पहले से ही घात लगाकर बैठ गया। जैसे ही वृद्ध महिला वहाँ पहुँची, आरोपी अनिल यादव ने पीछे से कुल्हाड़ी से उनकी गर्दन पर ताबड़तोड़ वार कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया। ​पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर वारदात में इस्तेमाल की गई कुल्हाड़ी और मोबाइल फोन विधिवत जब्त कर लिए हैं। 

टाइगर रिजर्व में मिला मादा बाघ शावक का शव, पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद होगी मौत के कारणों की पुष्टि


उमरिया

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के धमोखर रेंज अंतर्गत बीट धमोखर की सीमा से लगभग 500 मीटर दूर ग्राम चापर के राजस्व क्षेत्र में एक मादा बाघ शावक का शव मिलने से वन विभाग में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही वन अमला और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे तथा पूरे क्षेत्र का निरीक्षण किया।

वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश तोमर ने मृत शावक का प्राथमिक परीक्षण किया। प्रारंभिक जांच में शावक के सिर की हड्डियों में फ्रैक्चर पाया गया है। इसके अलावा शव पर नाखून और दांत के निशान भी मिले हैं, जिससे प्रथम दृष्टया किसी जंगली जानवर के हमले की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, मृत्यु के वास्तविक कारणों का खुलासा विस्तृत पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा।

घटनास्थल पर किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि या शिकार की संभावना की जांच के लिए डॉग स्क्वाड की सहायता से सर्च अभियान चलाया गया। साथ ही मेटल डिटेक्टर से भी क्षेत्र की गहन जांच की गई, लेकिन कोई भी अस्वाभाविक या संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हुई।

समयाभाव के कारण मृत शावक के शव को सुरक्षित रख लिया गया है। क्षेत्र संचालक, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व ने भी घटनास्थल का निरीक्षण कर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। वन विभाग के अनुसार शावक का विधिवत पोस्टमार्टम कराया जाएगा। इसके बाद राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के प्रचलित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के अनुरूप शव का दाह संस्कार किया जाएगा तथा आवश्यक वैधानिक कार्रवाई पूरी की जाएगी। वन विभाग पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रहा है।

मालगाड़ी डिरेलमेंट का मुख्य आरोपी को आरपीएफ व टास्क फोर्स की टीम ने किया गिरफ्तार


अनूपपुर

बिलासपुर–अनूपपुर रेलखंड के करगीरोड स्टेशन पर 13 जुलाई 2026 को हुई मालगाड़ी डिरेलमेंट की घटना में फरार चल रहे मुख्य आरोपी को रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी की गिरफ्तारी टास्क फोर्स टीम और आरपीएफ उसलापुर की संयुक्त कार्रवाई में अनूपपुर जिले के पुष्पराजगढ़ क्षेत्र से की गई।

गिरफ्तार आरोपी की पहचान पवन नायक (29 वर्ष), निवासी ग्राम करपा, पोस्ट करपा, थाना करनपठार, तहसील पुष्पराजगढ़, जिला अनूपपुर के रूप में हुई है। आरपीएफ के अनुसार करगीरोड स्टेशन के लाइन नंबर-03 पर टी/एन बॉक्स-419 के डिरेलमेंट मामले में पवन नायक मुख्य आरोपी था और घटना के बाद से फरार चल रहा था।

गौरतलब है कि हादसे के बाद आरपीएफ ने त्वरित कार्रवाई करते हुए महज 10 घंटे के भीतर 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन मुख्य आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बाहर था। लगातार तलाश और तकनीकी जांच के बाद आखिरकार उसे पुष्पराजगढ़ से गिरफ्तार कर लिया गया।

आरपीएफ अधिकारियों ने बताया कि आरोपी से पूछताछ की जा रही है और मामले की विस्तृत जांच जारी है। रेलवे प्रशासन ने कहा कि रेल संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और रेल परिचालन में बाधा डालने वाले तत्वों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

दो दिवसीय भव्य कुश्ती प्रतियोगिता का हुआ भव्य शुभारंभ, महिला व पुरुष पहलवानों ने दिखाया दांव पेंच


अनूपपुर

जिले के पसान नगरपालिका क्षेत्र में आयोजित दो दिवसीय भव्य दंगल (कुश्ती) प्रतियोगिता का शुक्रवार को भव्य शुभारंभ हुआ। आयोजन के पहले ही दिन राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर के महिला एवं पुरुष पहलवानों ने अपने दमदार दांव-पेंच और शानदार खेल कौशल से हजारों दर्शकों का दिल जीत लिया। अखाड़े में हुए एक से बढ़कर एक रोमांचक मुकाबलों ने खेल प्रेमियों को अंत तक बांधे रखा।

कार्यक्रम का शुभारंभ नगर पालिका अध्यक्ष राम अवध सिंह ने पहलवानों को माला पहनाकर एवं उनका आत्मीय स्वागत कर किया। इस अवसर पर उन्होंने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि कुश्ती भारत की प्राचीन एवं गौरवशाली परंपरा का हिस्सा है। ऐसे आयोजन युवाओं को खेलों से जोड़ने, स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करने तथा क्षेत्र में खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। उन्होंने आयोजन समिति की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन क्षेत्र की सांस्कृतिक एवं खेल परंपरा को नई पहचान देते हैं।

दंगल के पहले दिन कई रोमांचक मुकाबले देखने को मिले, लेकिन सबसे अधिक आकर्षण महिला पहलवानों के मुकाबले रहे। महिला खिलाड़ियों ने बेहतरीन तकनीक, फुर्ती और दमदार प्रदर्शन का परिचय देते हुए पुरुष पहलवानों को भी पटखनी देकर दर्शकों की जमकर वाहवाही बटोरी। महिला पहलवानों के शानदार प्रदर्शन पर पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा और दर्शकों ने खड़े होकर उनका उत्साहवर्धन किया। देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे नामी महिला एवं पुरुष पहलवानों ने अखाड़े में शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी ताकत, तकनीक और अनुभव का परिचय दिया।

सरपंच ने जिला सीईओ के खिलाफ, आत्म दाह की दी चेतावनी, कमिश्नर से लगाई न्याय की गुहार, पद से पृथक करने का मामला


उमरिया

जिले के बिरसिंहपुर पाली जनपद पंचायत के गिंजरी ग्राम पंचायत के सरपंच नन्हू सिंह को पद से पृथक करने के मामले में सरपंच ने जिला पंचायत उमरिया के मुख्य कार्य पालन अधिकारी अभय सिंह ओहरिया के पद से नियम विरूद्ध हटाने के विरोध में आयुक्त शहडोल के दरबार में पहुंच कर आत्म दाह की चेतावनी के साथ अपनी फरियाद लगायी है। बताया जाता है कि ग्राम पंचायत के सरपंच नन्हू सिंह ने आयुक्त शहडोल को ज्ञापन देकर बताया की मुख्य कार्य पालन अधिकारी अभय सिंह ओहरिया ने फर्जी जांच प्रतिवेदन के आधार पर सरपंच पद से नियम विरूद्ध पद से पृथक कर दिया है, जो कि न सिर्फ लोकतांत्रिक प्रक्रिया में चुने हुए जन प्रतिनिधियों का सीधा अपमान है, साथ ही जिले भर में प्रशासनिक तंत्र की भष्ट्राचार की जडो को मजबूत और  पल्लवित करने का काम किया है। जिला पंचायत के इस दुर्भावनापूर्ण निर्णय से जिले भर के जन प्रतिनिधियों में भय का वातावरण बना हुआ है। 

मामले के संबंध में बताया जाता है कि गिंजरी में वर्ष 2024-25 में बरबसपुर के जोगी नाला में अमृत तालाब का काम नियमानुसार मापदंडों के अनुरूप सहायक यंत्री और उपयंत्री के आदेशानुसार बनाया गया है। सरपंच ने आरोप लगाया है कि अमृत सरोवर के इस कार्य में उपयंत्री के व्दारा बिना मूल्यांकन, बिना भुगतान के ही स्वीकृति राशि के 10% राशि की मांग की गयी थी और राशि नहीं दिये जाने के कारण कार्य का मूल्यांकन नहीं किया गया, जब मूल्यांकन नहीं करने की शिकायत बार -बार की गयी, तो घर बैठे मनमानी पूर्वक माप -पुस्तिका बिना मूल्यांकन पत्रक के 17-12-25 को जनपद पंचायत में जमा कर  दी गई, मामले को बढते देख मूल्यांकन पर्ची जनवरी 2026 में दी गई, तब सामग्री का बिल मनरेगा पोर्टल में दर्ज किया गया, तब तक राशि उपलब्ध नहीं करायी गयी जिस कारण से देयको का भुगतान नही किया जा सका।

ध्यान देने योग्य है कि सरपंच व्दारा उपयंत्री के व्दारा कार्य के मूल्यांकन न करने की शिकायत जनपद पंचायत पाली और जिला पंचायत उमरिया में समय समय पर की गयी है, उस पर संज्ञान न लेते हुए जिला पंचायत के व्दारा कार्य पालन यंत्री जल संसाधन विभाग उमरिया से मिथ्या कूट रचित जांच प्रतिवेदन तैयार कर सरपंच पद से हटाने की कार्य वाही की गयी है।

सरपंच नन्हू सिंह ने आयुक्त से मांग की है कि मैरी शिकायतों का निष्पक्ष रूप से जांच कराते हुए मेरे विरूद्ध नियम विरूद्ध पद से हटाने की कार्य वाही को निरस्त किया जाये अन्यथा मैं आदिवासी सरपंच आत्म दाह कर लूंगा, जिसकी संपूर्ण जबाबदारी प्रशासन की होगी।

मलगा मुख्य मार्ग के पास जमीन धंसने से बन गया गहरा गड्ढा, मंत्री, कलेक्टर, एसपी, जीएम ने मौके का किया निरीक्षण

*धंसाव के कारणों की कराई जाएगी जांच*


अनूपपुर

जिले के जमुना-कोतमा क्षेत्र के मलगा गांव में मुख्य मार्ग के समीप अचानक जमीन धंसने की घटना ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। धंसाव के कारण वहां गहरा गड्ढा बन गया, जिसके बाद आसपास के क्षेत्र में लोगों के बीच भय का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में लंबे समय से भूमिगत कोयला खनन का कार्य चल रहा है, जबकि प्रभावित परिवारों को अब तक पूरी तरह राहत और सुरक्षा का भरोसा नहीं मिला है।

ग्रामीणों का आरोप है कि खनन गतिविधियों के कारण क्षेत्र की जमीन कमजोर होती जा रही है। उनका कहना है कि कई बार संबंधित अधिकारियों को संभावित खतरे की जानकारी दी गई, लेकिन समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। लोगों ने आशंका जताई कि यदि जल्द ही सुरक्षा संबंधी उपाय नहीं किए गए तो भविष्य में और भी गंभीर घटनाएं हो सकती हैं।

घटना की सूचना मिलते ही प्रदेश सरकार के मंत्री दिलीप जायसवाल, कलेक्टर हर्षल पंचोली, पुलिस अधीक्षक विक्रांत मुराब, जमुना-कोतमा क्षेत्र के महाप्रबंधक प्रभाकर राम त्रिपाठी, कोतमा एसडीएम तथा अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया और संबंधित विभागों से विस्तृत जानकारी प्राप्त की। साथ ही विशेषज्ञों से तकनीकी परीक्षण कराने के निर्देश दिए गए।

प्रशासन का कहना है कि धंसाव के वास्तविक कारणों का वैज्ञानिक तरीके से परीक्षण कराया जाएगा। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो नियमानुसार आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

इधर ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे क्षेत्र का विस्तृत सर्वे कराने, संभावित खतरे वाले इलाकों की पहचान करने, प्रभावित परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा पारदर्शी जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई है।

खेत जुताई के समय ट्रैक्टर अनियंत्रित होकर पलटा,  चालक की दबकर हुई मौत


अनूपपुर

जिले के जैतहरी थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम डोड़ीपानी में खेत की जुताई के दौरान हुए दर्दनाक हादसे में ट्रैक्टर चालक की मौके पर ही मौत हो गई।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, 28 वर्षीय अमन कुमार कोल, राम बिहारी राठौर के खेत में ट्रैक्टर से जुताई कर रहा था। इसी दौरान खेत में ट्रैक्टर मोड़ते समय वाहन अनियंत्रित होकर खेत के किनारे बने लगभग सात फीट गहरे गड्ढे में जा गिरा। हादसे में ट्रैक्टर पलट गया और चालक उसके नीचे दब गया, जिससे उसकी घटनास्थल पर ही मृत्यु हो गई।

पुलिस ने बताया कि ग्रामीणों की सूचना पर जैतहरी पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची। पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से चालक को ट्रैक्टर के नीचे से बाहर निकलवाया और शव को पोस्टमार्टम के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जैतहरी भेज दिया। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया जाएगा। मामले में मर्ग कायम कर दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है।

रेत माफियाओं ने तहसीलदार से छुड़ाया रेत से भरा ट्रैक्टर, वनकर्मियों से कर दी मारपीट, तीन पर मामला दर्ज


शहडोल 

जिले के जयसिंहनगर थाना क्षेत्र में अपराधियों के बढ़ते हौसलों का मामला सामने आया है। तीन आरोपियों ने पहले रेत से भरे जब्त ट्रैक्टर-ट्रॉली को तहसीलदार के कब्जे से छुड़ाकर फरार कर दिया। इसके कुछ घंटे बाद यही आरोपी बस स्टैंड पर एक वनकर्मी से गाली-गलौज करते हुए मारपीट पर उतर आए। पुलिस ने दोनों मामलों में तीन नामजद आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस के अनुसार नायब तहसीलदार शिवकुमार सिंह ने शिकायत दर्ज कराई है कि अवैध रेत खनन और परिवहन की सूचना मिलने पर वे एक कर्मचारी के साथ मौके पर पहुंचे थे। जांच के दौरान रेत से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली को जब्त कर कार्रवाई की जा रही थी। इसी दौरान चालक ने अपने साथियों को सूचना दी। कुछ ही देर में हर्ष कचेर, हेमंत चतुर्वेदी और एक अन्य मौके पर पहुंचे तथा विवाद करते हुए जब्त ट्रैक्टर-ट्रॉली को तहसीलदार के कब्जे से छुड़ाकर ले गए। घटना के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया।

पहली घटना के कुछ घंटे बाद यही आरोपी जयसिंहनगर बस स्टैंड पहुंचे, जहां ड्यूटी से लौटे वन विभाग के कर्मचारी विजय कुमार गुप्ता बैठे थे। आरोप है कि तीनों ने उनसे विवाद शुरू किया, गाली-गलौज की और मारपीट कर दी। वनकर्मी की शिकायत पर पुलिस ने इस मामले में भी तीनों आरोपियों के खिलाफ अलग से अपराध दर्ज किया है। थाना प्रभारी अजय कुमार बैगा ने बताया कि दोनों मामलों में प्रकरण दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी गई है। आरोपियों की तलाश की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

विद्यालय में पीने के पानी की नही है व्यवस्था, बच्चे घर से लाते हैं पानी, कई माह से हैंडपंप बन्द

*शोपीस बना नल, शिकायत के बाद नही हुआ सुधार*


अनूपपुर

जिले के शासकीय माध्यमिक विद्यालय धुम्मा विद्यालय में पेयजल संकट ने बच्चों की परेशानी बढ़ा दी है। विद्यालय परिसर में पीने के पानी के लिए कोई व्यवस्था नहीं है एक हैंडपंप भी है तो वह आज कई दिनों से बंद है ऐसे में विद्यालय के छात्र-छात्राएं  पेयजल के लिए तरस रहे हैं और कई बार पूरे दिन प्यासे रहने को मजबूर हो जाते हैं।

विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों का कहना है कि वे घर से पानी की बोतल लेकर आते हैं, लेकिन कुछ ही घंटों में पानी खत्म हो जाता है। इसके बाद विद्यालय में पानी नहीं मिलने के कारण उन्हें प्यासा रहना पड़ता है। कई घंटे तक विद्यालय में रहने वाले बच्चों के सामने यह स्थिति रोज की समस्या बन गई है।

विद्यालय की रसोइया  कार्यकर्ता ने बताया कि  पानी के कारण मध्याह्न भोजन बनाने और अन्य दैनिक कार्यों में भी भारी परेशानी होती है। कई बार उन्हें दूर से पानी लाना पड़ता है, जिससे समय और श्रम दोनों अधिक लगते हैं।

विद्यालय की प्राचार्य ने बताया कि पेयजल समस्या को लेकर कई बार संबंधित विभाग के अधिकारियों को लिखित एवं मौखिक रूप से जानकारी दी जा चुकी है। और साथ ही इस संबंध में सीएम हेल्पलाइन भी की गई है लेकिन इसके बावजूद अब तक न तो खराब हैंडपंपों की मरम्मत कराई गई और न ही स्वच्छ पेयजल की कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई है।

विद्यालय में जो एकमात्र हैंडपंप है, उससे निकलने वाला पानी मटमैला और मिट्टीयुक्त है। ऐसे पानी के सेवन से बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका बनी हुई है। बावजूद इसके बच्चों के सामने कोई दूसरा विकल्प नहीं है।

विद्यालय प्रबंधन और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन एवं संबंधित विभाग से मांग की है कि विद्यालय में जल्द से जल्द स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि बच्चों को प्यासा न रहना पड़े और दूषित पानी पीने की मजबूरी से मुक्ति मिल सके। विद्यालय जैसे संवेदनशील स्थान पर पेयजल संकट को लेकर जिम्मेदार विभाग की उदासीनता पर भी सवाल उठ रहे हैं।

कार से 3.58 किलो गाँजा, 3 नग कारतूस, 5 मोबाइल, 37 हजार, वाई फाई डोंगल जप्त, 2 आरोपी गिरफ्तार

*नशे के विरुद्ध पुलिस की कार्यवाही*


अनूपपुर

थाना कोतमा पुलिस द्वारा रात्रिकालीन वाहन चेकिंग के दौरान मादक पदार्थ तस्करी के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 3 किलो 58 ग्राम गांजा, 03 नग .32 बोर के जिंदा कारतूस, ₹37,300 नगद, 05 मोबाइल फोन , एक वाई फाई डोंगल एवं एक ग्रैंड विटारा कार जप्त की गई है।

दिनांक 13 जुलाई 2026 को थाना कोतमा की पुलिस टीम द्वारा ग्राम पथरौड़ी स्थित एंजल किराना स्टोर के सामने रात्रिकालीन वाहन एवं संदिग्ध व्यक्तियों की चेकिंग की जा रही थी। इसी दौरान एक सफेद रंग की ग्रैंड विटारा कार क्रमांक MP 18 ZE 5709 पुलिस चेकिंग देखकर पीछे मुड़कर भागने का प्रयास करने लगी। पुलिस टीम ने तत्परता से घेराबंदी कर वाहन को रोक लिया।

वाहन में चालक शिवा विश्वकर्मा एवं उसके साथ रेखा उर्फ मनीषा गुप्ता सवार मिले। दोनों की गतिविधियां संदिग्ध प्रतीत होने पर नियमानुसार पूछताछ एवं तलाशी की गई। पूछताछ में आरोपियों ने वाहन में गांजा रखा होना स्वीकार किया।

वाहन की तलाशी लेने पर पुलिस को निम्न सामग्री, 03 किलो 58 ग्राम गांजा अनुमानित कीमत ₹45,000, 03 नग 32 बोर के जिंदा कारतूस,₹37,300 नगद, 05 मोबाइल फोन, जियो कंपनी का एक वाई-फाई डोंगल, सिम व दो बैग बरामद की है। ग्रैंड विटारा कार अनुमानित कीमत ₹12 लाख है, बरामद सम्पूर्ण सामग्री की कुल अनुमानित कीमत ₹1400000 है।

रेखा उर्फ मनीषा गुप्ता, उम्र 35 वर्ष, निवासी हनुमान नगर, नई बस्ती, थाना कोलगवां, जिला सतना, शिवा विश्वकर्मा, उम्र 30 वर्ष, निवासी लालपुर, थाना बुढ़ार, जिला शहडोल को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों के विरुद्ध थाना कोतमा में धारा 8/20(b) एनडीपीएस एक्ट एवं 27 आर्म्स एक्ट के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ कर दी गई है।

लूट का आरोपी गिरफ्तार, बाइक नगदी जब्त, चोर गिरफ्तार चोरी की रकम से खरीदी बाइक जब्त


अनूपपुर

थाना प्रभारी रामनगर सुमित कौशिक के नेतृत्व में थाना रामनगर पुलिस को एक महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त हुई है। थाना रामनगर के अपराध क्रमांक 266/2024 धारा 303(2), 305(ए) बीएनएस के चोरी के मामले में लगभग 02 वर्ष से फरार एवं उद्घोषित आरोपी छोटू वादी पिता स्व. मोतीलाल वादी, उम्र 35 वर्ष, निवासी ग्राम चकौड़िया, थाना जैतपुर, जिला शहडोल को दिनांक 13 जुलाई 2026 को गिरफ्तार किया गया।

गिरफ्तार आरोपी एक शातिर आदतन चोर है, जिसके विरुद्ध थाना बिजुरी, थाना कोतमा एवं थाना पाली (जिला उमरिया) में भी चोरी के अपराध पंजीबद्ध हैं। लंबे समय से फरार चल रहे आरोपी की लगातार तलाश की जा रही थी। मुखबिर सूचना एवं तकनीकी जानकारी के आधार पर पुलिस टीम ने उसे गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की।

पूछताछ के दौरान आरोपी के कब्जे से चोरी की रकम से खरीदी गई होंडा कंपनी की एक मोटरसाइकिल तथा ₹500 नगद बरामद कर विधिवत जब्त किए गए। आरोपी को वैधानिक कार्रवाई उपरांत माननीय न्यायालय कोतमा के समक्ष प्रस्तुत किया गया जहाँ से न्यायालय ने अभियुक्त को जिला जेल भेज दिया गया है।

*लूट के आरोपी गिरफ्तार*

शहडोल जिले के खैरहा थाना क्षेत्र में पिकअप चालक से हुई लूट के मामले का पुलिस ने चंद घंटों में खुलासा करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के कब्जे से लूट में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल और नकद 1 हजार रुपए बरामद किए गए हैं। मामले में शामिल दूसरा आरोपी अभी फरार है, जिसकी तलाश जारी है।

पुलिस के अनुसार, बीते दिन खैरहा थाना क्षेत्र में बाइक सवार दो बदमाशों ने पिकअप चालक को रास्ते में रोककर चाकू की नोक पर 2,800 रुपए नकद एवं दस्तावेज लूट लिए थे। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने दो नामजद आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर गठित दो विशेष टीमों ने कार्रवाई करते हुए लखवारिया के पास से आरोपी नवीन यादव को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपी ने वारदात स्वीकार कर ली। उसकी निशानदेही पर लूट में प्रयुक्त मोटरसाइकिल और 1 हजार रुपए नकद जब्त किए गए। पुलिस का कहना है कि फरार दूसरे आरोपी की तलाश के लिए लगातार दबिश दी जा रही है और जल्द ही उसे भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

लूट के आरोपी को पुलिस ने लूट की मोटरसाइकिल के सहित किया गिरफ्तार


अनूपपुर

जिले के चौकी देवहरा की पुलिस के द्वारा दिनांक 13 जुलाई 2026 को लूट के आरोपी को लूट की मोटरसाइकिल के साथ गिरफ्तार किया गया 11 जुलाई 2026 को अवधेश कुमार सिंह पिता विजय सिंह उम्र 40 वर्ष निवासी ग्राम पटना कला थाना चचाई जिला अनूपपुर के द्वारा चौकी उपस्थित होकर आवेदन पत्र के माध्यम से शिकायत किया की  10 जुलाई 2026 के रात्रि करीब 9:30 बजे वह उद्धव ओझा निवासी ग्राम देवहरा की दुकान से उसकी मोटरसाइकिल हीरो होंडा पैशन क्रमांक एमपी 18 एम जी 0158 को लेकर उसके लिए अंडा बिरयानी लेने के लिए ग्राम धिरौल बस स्टैंड में अहमद रजा की बिरयानी की दुकान में गया था, वहां से जब मैं अंडा बिरयानी लेकर जाने लगा तो वहां पर मौजूद एक अज्ञात व्यक्ति जो सफेद रंग का शर्ट पहने था, वह बोला कि उसे ग्राम पंचायत धिरौल तक पहुंचा दे, तब वह उक्त अज्ञात व्यक्ति को मोटरसाइकिल में बैठाकर ले जाने लगा तो वहां पर मौजूद लाला गुप्ता व अहमद राजा मौजूद थे, रात में 9:45 बजे ग्राम पंचायत धिरौल में पहुंचा तो उक्त अज्ञात व्यक्ति के द्वारा मुझे डरा धमका कर धक्का देकर मोटरसाइकिल लूट कर भाग गया, तब मैं वहां से भाग कर ग्राम धिरौल के सिंह वाहिनी मंदिर के पास पहुंचा, जहां पर अनिल सिंह चंदेल सहित तीन-चार लोग मौजूद थे, जिन्हें घटना की पूरी जानकारी दी व उन लोगो के साथ व जाकर देवहरा में उद्धव ओझा के पास जाकर पूरी बात बताई, मोटरसाइकिल लेकर भगा अज्ञात व्यक्ति की पता तलाश किये जो नहीं मिला, तब मैं उक्त घटना की रिपोर्ट चौकी किया। रिपोर्ट पर अपराध धारा 309 ( 4 ) बी एन एस कायम किया जाकर विवेचना में लिया गया। विवेचना दौरान गवाहों के द्वारा आरोपी के नाम की पुष्टि सुनील यादव पिता हीरालाल यादव उम्र 22 वर्ष निवासी ग्राम धिरौल चौकी देवहरा थाना चचाई जिला अनूपपुर हुई। देवहरा चौकी की पुलिस ने पता तलाश लूट की गई मोटरसाइकिल सहित आरोपी सुनील यादव को गिरफ्तार कर न्यायालय अनूपपुर में पेश किया गया।

पल्सर सवार अज्ञात हमलावरों ने गांव में दुकानदार युवक को गोली मारकर कर दी हत्या


शहडोल 

जिले के अमलाई थाना क्षेत्र अंतर्गत रामपुर गांव में सोमवार रात करीब 10 बजे अज्ञात बदमाशों ने एक युवक की गोली मारकर हत्या कर दी। प्राप्त जानकारी के अनुसार भूपेंद्र कहार उर्फ रज्जन कहार जो रामपुर में मीट की दुकान चलाता था पल्सर मोटरसाइकिल पर सवार अज्ञात हमलावरों ने उस पर दो गोली मार दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।

घटना के तुरंत बाद परिजन और स्थानीय लोगों की मदद से घायल भूपेंद्र कहार को जिला चिकित्सालय अनूपपुर लाया गया, जहां चिकित्सकों ने परीक्षण के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

घटना की सूचना मिलते ही अमलाई थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण कर जांच शुरू कर दी। पुलिस अज्ञात आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है। हत्या के कारणों का अभी खुलासा नहीं हो सका है। पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ करने के साथ-साथ उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज एवं अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान करने का प्रयास कर रही है।

दिनदहाड़े नहीं बल्कि देर रात हुई इस सनसनीखेज वारदात के बाद रामपुर गांव सहित पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है। पुलिस का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच की जा रही है और जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार करने का प्रयास किया जाएगा।

कलेक्टर के आदेश को दिखाया ठेंगा, धर्मकांटा एण्ड वेयर हाउस ने नही लौटाए 3.64 लाख रुपए

*तौल में पाई पकड़ी गई थी गड़बड़ी*


उमरिया

जिले में "जिसकी लाठी उसकी भैंस"वाली कहावत चरितार्थ हो रही है। कलेक्टर के स्पष्ट आदेश के बाद भी पूजा धर्मकांटा एण्ड वेयर हाउस बरबसपुर ने सरकारी खजाने के ₹3,64,115 नहीं लौटाए। विदित होवे की कलेक्टर खाद्य शाखा उमरिया के आदेश क्र 779 दिनांक 29 मई 2026 के व्दारा पूजा वेयर को उक्त राशि समितियों में जमा करने के आदेश जारी किये गए थे। मामले के संबंध में बताया जाता है कि पूजा वेयर हाउस ने तौल कांटे के सत्यापन कराये बगैर ही धान खरीदी शुरू कर दी थी, जिससे समितियों के तौल कांटे और पूजा वेयर हाउस के तौल कांटे मे हर गाड़ी में लगभग दो क्विंटल साठ किलो धान कम निकली, जिस पर समितियों ने अपने तौल कांटे को बाजार के तौल कांटे  से जांचने के बाद भी पूजा वेयर हाउस के तौल कांटे मे यह कमी बनी रही, तब इस मामले को जिला प्रशासन के समक्ष उठा कर जांच करायी गयी। जिसमें 53 गाडियों में 153.70 क्विंटल धान की चोरी पकड़ी गयी, जिसकी कीमत 3.64 लाख की राशि पांच समितियों को लौटाने के आदेश कलेक्टर उमरिया ने जारी करते हुए एक सप्ताह की अवधि दी थी, जो दो माह में भी जमा नहीं किया गया। इस मामले ने पूजा वेयर हाउस और उमरिया जिला प्रशासन की कार्य शैली पर तीखे सवाल खड़े कर दिये है, कि कलेक्टर के वसूली के आदेश को कचरा समझने वाले पूजा वेयर हाउस को किस बात की सहूलियत प्रदान की जा रही है उसके ऊपर पुलिस में प्राथमिकी दर्ज क्यों नहीं करायी जा रही है, पूजा वेयर हाउस के अनुबंध को रद्द क्यों नहीं किया जा रहा है। 

नाप-तौल अधिकारी कहां है? कलेक्टर के आदेश में साफ तौर पर उल्लेख किया गया है कि "तौलकांटा सत्यापन नहीं किये जाने के कारण" धान  शॉर्टेज हुई। फिर नाप-तौल अधिकारी पर कार्रवाई क्यों नहीं? क्या "सेटिंग" हो गई?

किसान का पैसा कौन देगा? मालूम होवे की पूजा वेयर हाउस में जिन समितियों के धान का भंडारण हुआ है उनमें धान कम बतायी गयी उनमें घुनघुटी समिति का ₹1.37 लाख, मालाचुआ का ₹1.09 लाख आज भी अटका है। इसका जिम्मेदार कौन?

इस पूरे मामले में सबसे शर्मनाक बात यह निकल कर आयी की  गलती वेयर हाउस की है। फिर भी प्रशासन ने न वसूली की, न लाइसेंस रद्द किया, न जेल भेजा। मतलब आदेश सिर्फ फाइल में बंद करने के लिए जारी किए जाते हैं?

समिति प्रबंधकों का आरोप: "ऊपर से नीचे तक मिलीभगत है। तभी तो कलेक्टर का आदेश भी ठंडे बस्ते में है।"अब देखना है कि कलेक्टर उमरिया अपने ही आदेश की इज्जत बचाने के लिए क्या कार्रवाई करते हैं या ये मामला भी फाइलों में दब जाएगा।

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