दबंग पब्लिक प्रवक्ता

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जहरीले कीटनाशक व रसायन युक्त पदार्थों के सेवन से 5 गौवंशों की हुई मौत, ग्रामीणों में आक्रोश, कार्यवाही की माँग

शहडोल 

जिले के सिंहपुर थाना क्षेत्र में उस समय हड़कंप मच गया, जब कटहा नाला के पास स्थित खेतों के आसपास 5 से अधिक गौवंश मृत अवस्था में मिले। आरोप है कि सब्जी फार्मिंग में उपयोग किए गए कीटनाशक और रसायन युक्त पदार्थों के सेवन से गौवंशों की मौत हुई है। घटना के बाद पशुपालकों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। एक साथ 5 से अधिक गौवंशों की मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। पशुपालकों को हुए भारी नुकसान के बीच ग्रामीण अब जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई और उचित मुआवजे की मांग कर रहे हैं। फिलहाल पुलिस और संबंधित विभाग मामले की जांच में जुटे हैं। जांच रिपोर्ट के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा। 

जिले के सिंहपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत सिंहपुर-बोड़री मार्ग पर कटहा नाला के पास स्थित एक खेत में दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां संदिग्ध परिस्थितियों में 5 से अधिक गौवंशों की मौत हो गई। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है और स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों ने मामले में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए सिंहपुर थाने का रुख किया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में सब्जी फार्मिंग का कार्य करने वाले एक किसान द्वारा खेतों में भारी मात्रा में कीटनाशक एवं अन्य रासायनिक पदार्थों का उपयोग किया गया था। बताया जा रहा है कि खेत में पेस्टीसाइड युक्त सामग्री और रसायन मिश्रित पानी खुले में पड़ा हुआ था,इसी जहरीले पदार्थ का सेवन करने अथवा रसायन युक्त पानी पीने से गौवंशों की मौत हुई है।

घटना में किसान हेमराज पटेल, रुद्र बैगा, परवी बाई, राधा पटेल सहित अन्य ग्रामीणों के मवेशियों की मौत होने की बात सामने आई है। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में गौवंशों की मौत से पशुपालकों को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि खेत में उपयोग किए जा रहे रसायनों का सुरक्षित निस्तारण किया जाता तो यह घटना टाली जा सकती थी। घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर एकत्र हो गए, मृत गौवंशों को देखकर लोगों में गहरा आक्रोश देखा गया, ग्रामीणों ने संबंधित किसान की लापरवाही को इस हादसे का जिम्मेदार बताते हुए प्रशासन से निष्पक्ष जांच और कठोर कार्रवाई की मांग की है। 

फिलहाल मामले की शिकायत सिंहपुर थाने में की गई है। पुलिस और संबंधित विभागीय अधिकारियों द्वारा घटना की जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही गौवंशों की मौत के वास्तविक कारणों का स्पष्ट खुलासा हो सकेगा। 

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तेज रफ्तार मोटरसाइकिल की टक्कर से 18 वर्षीय युवक घायल, मामला दर्ज, पुलिस विवेचना जारी 

अनूपपुर/कोतमा

थाना भालूमाड़ा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम गोविंदा गांव के पास बीती रात्रि लगभग 10 बजे एक सड़क दुर्घटना में स्कूटी सवार युवक घायल हो गया। घटना के संबंध में थाना भालूमाड़ा पुलिस द्वारा प्रकरण क्रमांक 0272/2026 विधिवत पंजीबद्ध कर मामले की विवेचना प्रारंभ कर दी गई है। घटना के बाद क्षेत्र में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी की स्थिति निर्मित हो गई तथा स्थानीय लोगों की भीड़ घटनास्थल पर एकत्र हो गई।

प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रिंस सिंह पिता रमाशंकर सिंह, उम्र 18 वर्ष, निवासी वार्ड क्रमांक 14 भालूमाड़ा, अपने दोस्त विनय साहू की होंडा एक्टिवा स्कूटी (क्रमांक MP65 S 7891) से कोतमा से भालूमाड़ा की ओर जा रहे थे। जैसे ही वे भालूमाड़ा रोड पर पेट्रोल पंप से आगे ग्राम गोविंदा गांव के पास पहुंचे, तभी सामने से आ रही एक मोटरसाइकिल, जिसे कथित रूप से तेज रफ्तार एवं लापरवाहीपूर्वक चलाया जा रहा था, ने उनकी स्कूटी को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर के प्रभाव से स्कूटी सवार सड़क पर गिरकर घायल हो गया।

घटना के तुरंत बाद आसपास मौजूद लोगों ने घायल युवक को संभाला और प्राथमिक सहायता उपलब्ध कराई। घायल युवक को उपचार हेतु स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है। मोटरसाइकिल में दो व्यक्ति सवार थे, जिनमें एक का नाम मलखांन सिंह बताया गया है। प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि मोटरसाइकिल अत्यधिक तेज गति में थी, जिसके कारण चालक का नियंत्रण बिगड़ गया और दुर्घटना घटित हुई। सूचना मिलने पर भालूमाड़ा पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। 

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रेस्क्यू के दौरान उग्र हुआ हाथी पिंजरा तोड़कर जंगल की ओर भागा, मची भगदड़, फिर चलेगा अभियान

शहडोल

शहडोल और अनूपपुर जिले में डेढ़ महीने से दहशत फैला रहे बिगड़ैल हाथी को पकड़ने की कोशिश शुक्रवार को नाकाम हो गई। रेस्क्यू के दौरान हाथी अचानक उग्र हो गया और पिंजरा पलटकर जंगल की ओर भाग निकला, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। 

जिले के केशवाही वन परिक्षेत्र के बेलिया क्षेत्र में पिछले चार दिनों से बिगड़ैल हाथी को पकड़ने के लिए वन विभाग की टीम लगातार अभियान चला रही है। शुक्रवार सुबह रेस्क्यू के दौरान बड़ा हादसा होते-होते टल गया, जब बिगड़ैल हाथी पिंजरा तोड़कर जंगल की ओर भाग निकला। घटना के समय मौके पर वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बांधवगढ़ और संजय गांधी टाइगर रिजर्व की रेस्क्यू टीम मौजूद थी।

जानकारी के अनुसार चार प्रशिक्षित हाथियों की मदद से बिगड़ैल हाथी को कैंप तक लाया गया। जैसे ही उसे पिंजरे के अंदर किया गया, हाथी अचानक आक्रोशित हो गया और उसने पिंजरे को पलट दिया। हाथी के उग्र रूप को देखकर मौके पर मौजूद रेस्क्यू दल और अधिकारियों में अफरा-तफरी मच गई। करीब दो दर्जन से अधिक कर्मचारियों ने भागकर अपनी जान बचाई।

वन विभाग ने हाथी को काबू करने के लिए तीन बार ट्रैंकुलाइजर डोज भी दी लेकिन प्रयास विफल रहा और हाथी जंगल की ओर भाग निकला। घटना में पिंजरा क्षतिग्रस्त हो गया, जिसे मरम्मत के लिए बुढार भेजा गया है।

वन विभाग के मुताबिक बिगड़ैल हाथी पिछले डेढ़ महीने से शहडोल और अनूपपुर जिले के गांवों में लगातार उत्पात मचा रहा है। हाथी के हमले में अब तक चार लोगों और आठ मवेशियों की मौत हो चुकी है, जबकि दो बच्चों समेत तीन लोग घायल हुए हैं। वन संरक्षक महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि रेस्क्यू के दौरान ऐसी घटनाएं सामान्य हैं। टीम दोबारा तैयारी में जुटी है और शनिवार को फिर अभियान चलाया जाएगा।

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पुलिस अभिरक्षा से आरोपी फरार मामले में थानाप्रभारी सहित तीन पुलिसकर्मियों को आईजी ने किया निलंबित

उमरिया 

जिले के इंदवार थाने से पुलिस अभिरक्षा में रखा गया एक आरोपित फरार हो जाने के मामले में शहडोल रेंज की आईजी एन. चैत्रा ने बड़ी कार्रवाई करते हुए थाना प्रभारी समेत तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। मामले को गंभीर लापरवाही मानते हुए संबंधित पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच भी किया गया है।

एसडीओपी उमरिया पुन्नू सिंह परस्ते ने बताया कि इंदवार थाना क्षेत्र के ग्राम पनपथा में पूर्व में हुई लूट की वारदात के दो आरोपियों को पुलिस रिमांड पर लिया गया था। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि लूटा गया सोना-चांदी कटनी जिले के बरही निवासी बंटी ताम्रकार को बेचा गया है। इसी आधार पर पुलिस ने बंटी ताम्रकार को हिरासत में लेकर पूछताछ की।

पुलिस के अनुसार आरोपी के पास से करीब एक किलो 50 ग्राम चांदी और 15 ग्राम सोना बरामद कर जब्त किया गया। हालांकि जप्ती कार्रवाई के दौरान आरोपी ने दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने से इनकार करते हुए दावा किया कि सामान गिरवी रखा गया था, खरीदा नहीं गया। इसी दौरान वह पुलिस अभिरक्षा से फरार हो गया।

घटना के बाद प्रारंभिक जांच में लापरवाही पाए जाने पर थाना प्रभारी विजय कुमार पटले, सब इंस्पेक्टर सूर्यपाल सिंह और एएसआई अमर बहादुर सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। साथ ही तीनों को लाइन अटैच किया गया है। पुलिस विभाग ने इंदवार थाने की कमान अब इंस्पेक्टर नंदलाल धुर्वे को सौंपी है। वहीं फरार आरोपी की तलाश के लिए विशेष टीम गठित कर दबिश दी जा रही है।

बताया गया है कि टीआई विजय कुमार पटले घटना के समय लॉ एंड ऑर्डर ड्यूटी में तैनात थे, लेकिन केस डायरी उनके पास होने के कारण जवाबदेही तय करते हुए उन पर भी कार्रवाई की गई। घटना के बाद पुलिस व्यवस्था और सुरक्षा प्रबंधन को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

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कंपनी आवासों की जर्जर स्थिति से कर्मचारियों में आक्रोश, रखरखाव व्यवस्था पर गंभीर सवाल

अनूपपुर/कोतमा

साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के जमुना-कोतमा क्षेत्र अंतर्गत कंपनी आवासीय कॉलोनियों की रखरखाव व्यवस्था इन दिनों गंभीर स्थिति में पहुंचती दिखाई दे रही है। आवासों की बिगड़ती हालत ने कर्मचारियों और उनके परिवारों के दैनिक जीवन को प्रभावित कर दिया है, जिससे पूरे क्षेत्र में असंतोष और नाराजगी का माहौल बना हुआ है।

जानकारी के अनुसार विभिन्न आवासीय कॉलोनियों में बड़ी संख्या में कंपनी क्वार्टर लंबे समय से आवश्यक मरम्मत और नियमित रखरखाव से वंचित हैं। कई आवासों में दीवारों पर गहरी दरारें, छतों से पानी का रिसाव, फर्श का टूटना और सीलन जैसी समस्याएं स्पष्ट रूप से देखी जा रही हैं। कई भवनों की संरचनात्मक स्थिति कमजोर होती जा रही है, जिससे आवासों की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं।

इसके साथ बिजली व्यवस्था की पुरानी वायरिंग, बार-बार होने वाले फॉल्ट तथा जल आपूर्ति और सफाई व्यवस्था में अनियमितता ने आवासीय कॉलोनियों की स्थिति को और अधिक खराब कर दिया है। यह समस्याएं लंबे समय से बनी हुई हैं, जिससे निवासियों का जीवन प्रभावित हो रहा है।

बरसात के मौसम में हालात और अधिक गंभीर हो जाते हैं, जब कई आवासों में पानी भरने, छतों से टपकाव और दीवारों में नमी जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। इससे न केवल भवनों को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि रहवासियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य पर भी असर पड़ रहा है।

स्थानीय कर्मचारियों का कहना है कि कई बार शिकायतें दर्ज कराई गई हैं, लेकिन सुधार कार्यों में अपेक्षित तेजी नहीं दिखाई देती। उनका आरोप है कि निरीक्षण तो किए जाते हैं, लेकिन उसके अनुरूप जमीनी स्तर पर ठोस मरम्मत कार्य लागू नहीं हो पा रहे हैं। कर्मचारियों की मांग है कि एसईसीएल के क्षेत्रीय महाप्रबंधक तत्काल हस्तक्षेप करें।

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अमलाई कोल साइडिंग का काला सच, रात के अंधेरे में कोयले का खेल, प्रदूषण, अवैध ट्रांसपोर्ट और सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल

*हाईकोर्ट के निर्देश, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आदेश के बाद नहीं थमा खेल*

शहडोल

अनूपपुर और शहडोल जिले की सीमाओं को जोड़ने वाला अमलाई क्षेत्र इन दिनों कथित कोल माफियाओं, प्रदूषण और प्रशासनिक लापरवाही के गंभीर आरोपों के कारण सुर्खियों में है। अमलाई रेलवे स्टेशन के समीप संचालित कोल साइडिंग, जिसे मूल रूप से खाद्यान्न, सीमेंट, उर्वरक एवं अन्य मालवाहक सामग्रियों की ढुलाई के उद्देश्य से विकसित किया गया था, आज कोयले के विशाल कारोबार का केंद्र बन चुकी है। हालात यह हैं कि वार्ड क्रमांक 15 इंदिरा नगर, नगर परिषद बकहो के लोग वर्षों से धूल, धुएं और प्रदूषण के बीच जीवन बिताने को मजबूर हैं।

स्थानीय रहवासियों का आरोप है कि यह पूरा खेल केवल दिन में ही नहीं बल्कि रात के अंधेरे में भी बड़े स्तर पर संचालित होता है। देर रात कोयले की धुलाई, ट्रकों की आवाजाही और साइडिंग में भारी वाहनों की आवाजाही लगातार जारी रहती है। लोगों का कहना है कि रात के समय निगरानी कमजोर होने का फायदा उठाकर कई अनियमित गतिविधियां संचालित की जाती हैं।

स्थानीय नागरिकों के अनुसार देर रात बड़ी संख्या में ट्रेलर और भारी वाहन कोयला लेकर कोल साइडिंग पहुंचते हैं। यहां कोयले की लोडिंग-अनलोडिंग और धुलाई का काम तेज गति से चलता है। सबसे गंभीर आरोप यह है कि इन वाहनों की यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं।

लोगों का दावा है कि कई ट्रकों और ट्रेलरों के दस्तावेज अधूरे हैं। कुछ वाहनों के पास वैध परमिट नहीं हैं, कई का फिटनेस प्रमाणपत्र समाप्त हो चुका है, जबकि कुछ वाहन बिना उचित बीमा और रजिस्ट्रेशन दस्तावेजों के ही सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इसके बावजूद इन वाहनों की आवाजाही पर कोई प्रभावी रोक नहीं लगाई जा रही।

पूरे मामले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कोल साइडिंग संचालन के लिए पर्यावरणीय मानकों का पालन अनिवार्य था, लेकिन धरातल पर अधिकांश नियम केवल कागजों तक सीमित दिखाई देते हैं।

लोगों का आरोप है कि स्प्रिंकलर सिस्टम और पानी के छिड़काव की व्यवस्था केवल दिखावे के लिए लगाई गई है। अधिकांश समय न तो पानी का छिड़काव होता है और न ही धूल नियंत्रण के प्रभावी उपाय दिखाई देते हैं। नतीजा यह है कि पूरा इंदिरा नगर क्षेत्र कोयले की धूल से प्रभावित रहता है।

बताया जाता है कि वर्ष 2008 से ही स्थानीय लोग इस कोल साइडिंग का विरोध कर रहे हैं। कई बार धरना, प्रदर्शन और अनशन भी किए गए। जब प्रशासनिक स्तर पर सुनवाई नहीं हुई तो इंदिरा नगर के रहवासियों ने जबलपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

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अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर अमरकंटक में स्वच्छता रैली, विचार गोष्ठी, श्रमदान एवं पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित

अनूपपुर

अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के पावन अवसर पर 22 मई 26 को वन परिक्षेत्र  अमरकंटक के  तत्वावधान में जनजागरूकता, स्वच्छता संदेश रैली, विचार गोष्ठी, माँ नर्मदा नदी के पावन तट पर श्रमदान स्वच्छता अभियान एवं पौधरोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत वन विद्यालय सभागार में विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। 

विचार गोष्ठी को संबोधित करते हुए डॉ. रविन्द्र शुक्ला ने जैव विविधता विषय पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के साथ जल, जंगल एवं प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण एवं संवर्धन वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। बदलते पर्यावरणीय परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए वृक्षों की कटाई रोकना तथा वृक्षारोपण को जनअभियान के रूप में अपनाना आवश्यक है। उन्होंने जैव विविधता के प्रकारों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रकृति की प्रत्येक इकाई मानव जीवन के लिए उपयोगी है तथा मधुमक्खी एवं तितली जैसे जीव पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

जैव विविधता समिति के अध्यक्ष धनंजय तिवारी ने कहा कि लगातार वन क्षेत्र घटने, बढ़ते तापमान एवं पर्यावरणीय बदलाव के कारण वन्य जीव प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि मानव प्राकृतिक क्षेत्रों में अतिक्रमण कर रहा है जिससे वन्य प्राणी आबादी क्षेत्रों की ओर आने को विवश हो रहे हैं तथा संरक्षण के प्रति समाज को अधिक संवेदनशील होने की आवश्यकता है। स्वच्छता का संदेश देते हुए जागरूकता रैली निकाली गई तथा माँ नर्मदा नदी के पावन तट पर श्रमदान कर स्वच्छता अभियान चलाया गया। इसके साथ ही पौधरोपण कर जैव विविधता संरक्षण एवं पर्यावरण संवर्धन का संदेश दिया गया।

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अज्ञात वाहन से टकराया जंगली सूअर हुई मौत

अनूपपुर

जिला मुख्यालय से 9 किलोमीटर दूरी स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग 43 भोलगढ गांव के समीप गुरुवार की साम अज्ञात बड़े वाहन की ठोकर से एक जंगली सूअर के टकराने पर सूअर स्थल पर मृत हो गया। वनविभाग द्वारा मृत जंगली सूअर के प्रकरण पर कार्रवाई की है। 

राष्ट्रीय राज्य मार्ग 43 में ग्राम भोलगढ़ के पिंजरहा धार के समीप कुरियारी जंगल की ओर से विचरण कर में सड़क पार कर रहा एक न जंगली सूअर अज्ञात वाहन से टकरा गया, जिसकी स्थल पर ही मौत हो गई। घटना की सूचना अनूपपुर से कोतमा की ओर जा रहे पत्रकार सुधाकर पयासी द्वारा वन्यजीव संरक्षक शशिधर अग्रवाल को दिए जाने पर शशिधर अग्रवाल द्वारा वन विभाग को सूचित करते हुए स्वयं घटना स्थल पर पहुंचकर भोलगढ वनरक्षक रोहित उपाध्याय एवं सुरक्षा श्रमिकों के साथ मृत जंगली सूअर के शव को वनचौकी भोलगढ़ में लाकर रखते हुए घटना की जानकारी वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को दिया गया। शुक्रवार के दिन डॉ. योगेश चंद्र दीक्षित पशु चिकित्सा अधिकारी अनूपपुर द्वारा पीएम की कार्यवाही किए जाने बाद वन विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की उपस्थिति में कफन,फूल एवं अगरबत्ती से मृत जंगली सूअर के शव का दाह संस्कार किया गया।

 भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के आंखों से ओझल उमरिया, जिले के दिग्गज   फिसड्डी, अनूपपुर की बल्ले बल्ले, जिताऊ उमरिया को ठेंगा 


उमरिया

मध्यप्रदेश में चल रही निगम, प्रकोष्ठों में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों में उमरिया जिले को स्थान न मिलने से एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी के उच्च आलाकमान और उनकी , मोहन सरकार की  कार्य शैली को लेकर तीखे सवाल खड़े हो रहें हैं। उमरिया जिले की इस उपेक्षा पूर्ण कार्य शैली ने न सिर्फ मोहन सरकार पर सवाल खड़े कर दिये है, इस प्रक्रिया ने भाजपा के आंतरिक लोकतंत्र को लेकर भी गहरे सवाल उठा कर चर्चाओं को सरगर्म कर रखा है, क्योंकि जितनी नियुक्तिया होनी थी वह लगभग हो चुकी , शायद अब  गुंजाइश बची नही, और अगर होगी भी तो उमरिया को स्थान मिले उसकी संभावनाएं कम ही है। यद्यपि  उमरिया को उसका वाजिब हक मिलना चाहिए। शहडोल संभाग के अनूपपुर से रामलाल रौतेल और शहडोल से राजेन्द्र भारती को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी से नवाजा गया है, वही उमरिया के हिस्से में कुछ नहीं आया। जिससे  तुलनात्मक रूप से यह खाई और बढ चली है। आखिर कार उमरिया जिला जो कि 1980 के दशक से भाजपा को पालने -पोषने और वट वृक्ष तैयार करने में सराहनीय भूमिका निभाई, आज उसे दुर्दिन देखने को मिल रहा है , वह हासिये में खड़ा हुआ है। इस दृष्टि से भाजपा का शीर्ष  नेतृत्व उमरिया की उपेक्षा कर प्रदेश भर में क्या  संदेश देना चाहता है। हम शहडोल संभाग के राजनैतिक परिदृश्य पर चर्चा करने पर पता चलता है कि शहडोल संभाग में आठ विधानसभा क्षेत्र आतें है, जिनमें से भाजपा के पास सात विधायक है और जो अभी भी भाजपा के हिस्से में नहीं है वह है अनूपपुर जिले का पुष्पराजगढ़ विधानसभा ही है। पिछले पंचवर्षीय 2018 अनूपपुर जिले की तीनों विधानसभा क्षेत्र से भाजपा ने एक भी विधानसभा नही जीती थी। इस तरह से अनूपपुर जिले ने भाजपा को जब तब लंबी चोट दी है, फिर भी अनूपपुर को भाजपा सदैव उपकृत करने का रिवाज बना लिया है। इस परिपाटी ने  सवाल खड़ा कर दिया  कि अवसर वादियों के लिए भाजपा ऐसे सुनहरे अवसर कब तक देती रहेगी,क्योंकि वर्तमान में अनूपपुर से भाजपा सरकार में मंत्री, सांसद, प्रदेश प्रवक्ता, और अब अनुसूचित जन जाति के अध्यक्ष पद से नवाजा गया है। भाजपा की समीक्षा करने पर पता चलता है कि अनूपपुर जिले में भाजपा सबसे कमजोर है, आज भी घुटने तक ही उठ पायी है, फिर भी वहा  मध्यप्रदेश सरकार में दिलीप जयसवाल जो की दूसरी बार ही विधानसभा की देहरी तक पहुंचे हैं, फिर भी मंत्री जैसे तोहफे से नवाजे गयें है, जबकि दिलीप जयसवाल वर्ष 2008 में पहली बार विधायक बने और इनके विरूद्ध इतना जनाक्रोश बढ़ा की भाजपा आलाकमान ने वर्ष 2013 में प्रत्याशी बदल कर अपनी सीट को बचाने की कवायद की थी, तब इन्होंने भाजपा की जीती हुई बाजी को बदल कर काग्रेस की झोली में डलवाने में सफल हो गयें थे, फिर वर्ष 2018 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के रूप में इन्हें हार मिली थी। वर्तमान में दुबारा चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे कि मंत्री जैसे पद से नवाज दिया गया, जबकि उमरिया से शहडोल से लगातार चुनाव जीतने वाले नेताओं को किनारे कर दिया गया। इस राजनैतिक घटना क्रम में देखा जाये तो उमरिया जिले ने लगातार  भाजपा की शान बढायी है फिर भी इस जिले वासियों को उसका वांछित लाभ नहीं मिल पाया। उनके लिए कभी भी  निगम, मंडलों के  पदों के लिए कभी नाम आगे नहीं बढाया गया । जबकि दो बार के हारे नेता रामलाल रौतेल के लिए सदा भाजपा उपहार में जिम्मेदार पदो पर सुशोभित किया, इस तरह से देखा जाये तो भाजपा में वर्तमान में जिताऊ नेताओं को कमतर आंकना और हारऊ नेताओं को उपकृत करने की रिवाज से उमरिया जिले के भाजपा नेताओं और गोंड समुदाय को व्यथित कर रखा है। अगर आदिवासी नेताओं को इस योग्य नहीं समझा गया था, तो अन्य समुदाय के भाजपा नेताओं में मिथलेश मिश्रा, मनीष सिंह, कमलेश गुप्ता, देवेश शर्मा, धनुषधारी सिंह,दिलीप पांडे  अरविंद बंसल, मान सिंह,राम नारायण पयासी , जैसे कर्मठ और निष्ठावान भाजपा नेताओं की लंबी कतार लगी हुई है । ध्यान देने योग्य है की इन नेताओं में मनीष सिंह वरिष्ठता क्रम और कर्तव्यनिष्ठा में इनका शानी जिले भर में कोई नेता नहीं है। वह खुद चुनाव जीतने और जीताने का,लंबा इतिहास कायम कर रखा है। उनकी पृष्ठभूमि का आकलन करने पर पता चलता है कि उन्होंने ने भाजपा के लिए जो जमीन बनायी, वह उनके लिए और अन्यों के लिये भी समान रूप से फलदायी रही। मनीष सिंह कालरी कर्मचारी उपभोक्ता भंडार में वर्ष  2002 से लेकर 2013 तक तीन पंचवर्षीय अध्यक्ष पद पर सुशोभित रहे, चूंकि संवैधानिक अडचन के कारण उन्हें 2013 से 2018 तक अध्यक्ष का चुनाव नहीं लड सकें तब भी संचालक मंडल में विजयी होकर अपना स्थान सुरक्षित रखा, और वर्ष 2019 से 2024 तक पुनः अध्यक्ष पद पर आसीन होने का गौरव हासिल किया, इस तरह अपनी छबि एक जीताऊ बना रखी है। फिर भी भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने उमरिया जिले को उसका वाजिब हक न देकर उपेक्षा की है, जिसकी चर्चा  वर्तमान में पूरे संभाग भर में बनी हुई  है, देखना लाजिमी होगा कि क्या उमरिया के भी दिल बहुरेंगे ‌की भाजपा को गच्चा देने वाले अनूपपुर की यूँ ही बल्ले बल्ले बनी रहेगी।

जनजातीय समुदाय के भूमि पर व्यापारी के कब्जा क्षेत्र व हाथी प्रभावित क्षेत्र का आयोग के अध्यक्ष ने किया दौरा


अनूपपुर

मध्यप्रदेश राज्य अनुसूचित जाति जनजाति आयोग के अध्यक्ष रामलाल रौतेल ने गुरुवार को जिला मुख्यालय अनूपपुर से, 4 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम पंचायत पोंडी(मानपुर) के मानपुर गांव में, ग्रामीण जनजातीय समुदाय के पूर्वजों के पट्टे की भूमि एवं शासकीय भूमि पर 50 वर्ष पूर्ण किए गए कब्जा की भूमि पर, विगत एक वर्ष के समय से अनूपपुर की एक बड़े व्यापारी द्वारा नियम विरुद्ध तरीके से ग्रामीण जनों की भूमि पर कब्जा करके, मानपुर ग्राम मे अनेकों स्थानों पर आरसीसी पोंल खड़ा कर बाउंड्री बाल बनाए जाने, ग्रामीण जनों के पूर्वजों की भूमि पर बनाए गए भवनों पर जबरदस्ती बलपूर्वक कब्जा करने की कोशिश व पुलिस एवं प्रशासन से अनावश्यक दबाव बनाकर ग्रामीणों से मारपीट करने, कई तरह की धमकियां देकर धमकाया जाने से ग्रामीण जन परेशान है। जिसकी शिकायतें मिलने पर जनजाति आयोग के अध्यक्ष रामलाल रौतेल ने गुरुवार की सुबह मानपुर ग्राम पहुंचकर पीड़ित ग्रामीणों से उनकी समस्याएं सुनते हुए ग्रामीणों के बताए जाने पर कब्जा किए गए स्थलो का निरीक्षण करते हुए ग्रामीण जनों को एकजुट रहने प्रशासन से चर्चा कर जल्द ही एक बड़ा शिविर एवं बैठक करने का आश्वासन दिया।

श्री रौतेल अनूपपुर जिले से लगे शहडोल जिले के ग्राम पंचायत रामपुर,गिरवा एवं पड़रिया के क्षेत्र में विगत 10 दिनों से अधिक समय से विचरण कर रहे, एक बिगड़ैल हाथी से प्रभावित ग्रामीण जनों से मुलाकात कर हाथियों द्वारा किए गए मकान एवं अन्य संपत्तियों के नुकसान का स्थल पर पहुंचकर निरीक्षण किया। इस दौरान ग्राम पंचायत पड़रिया के बैरिहा गांव निवासी रामसजीवन कोल,संपत कोल के मकानों को कई बार इस हाथी द्वारा तोड़फोड़ कर मकान को पूरी तरह नष्ट कर दिये जाने, गांव में विनोद सिंह बरगाही,बृजेश यादव,हेमराज यादव सहित अन्य ग्रामीणों की संपत्तियों का हाथी द्वारा किए गए नुकसान का निरीक्षण कर पीड़ितों से चर्चा करते हुए शीघ्र ही हाथी को इस इलाके से दूर भेजे जाने की कार्यवाही चलने से अवगत कराते हुए, पीड़ितों को उचित आर्थिक सहायता राशि दिलाए जाने की बात कही, 13 मई की रात ग्राम पंचायत गिरवा के निवासी छोटेलाल सिंह जो अपने गांव स्थित घर से गौशाला की ओर स्थित खेत में बने मकान में हाथी द्वारा हमला कर मृत कर देने उनके ही एक मवेशी को हमला कर मृत कर देने खेत में बने मकान को में तोड़फोड़ कर अंदर रखे विभिन्न तरह के अनाजों को खा लेने की घटना पर, मृतक छोटेलाल सिंह के घर पहुंच कर घटना के संबंध में चर्चा करते हुए दुख व्यक्त किया तथा शासन की योजना अंतर्गत तत्काल सहायता राशि दिए जाने बिगड़ैल हाथी का रेस्क्यू कार्य प्रारंभ होने तत्काल सुरक्षित स्थान पर भेजे जाने की बात कही। श्री रौतेल अपने भ्रमण दौरान ग्राम पंचायत एवं वन बीट रामपुर के बेलिया गांव में वन विभाग द्वारा बनाए गए हाथी के रेस्क्यू कैंप के कंट्रोल रूम स्थल पर पहुंच कर बिगड़ैल हाथी के रेस्क्यू के संबंध में वन परिक्षेत्र अधिकारी केशवाही अंकुर तिवारी से बातचीत की उन्होंने कहा कि क्षेत्र में आतंक का पर्याय बन चुके इस बिगड़ैल हाथी को जल्द ही क्षेत्र के बाहर रेस्क्यू कर ले जाया जाना चाहिए ताकि ग्रामीण जन पूर्व की तरह स्वतंत्र रूप से रह सके।

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