दबंग पब्लिक प्रवक्ता

टोरंट पॉवर के 922 एकड़ भूमि का मामला केंद्र तक पहुंचा, एनजीटी ने टोरेंट पावर समेत अन्य लोगो को भेजा नोटिस, मांगा जवाब

*रक्सा-कोलमी-दैकाल थर्मल पावर प्रोजेक्ट के जमीन हस्तांतरण से लेकर पर्यावरण मंजूरी तक उठे सवाल*


अनूपपुर। 

जिले के रक्सा, कोलमी और दैकाल क्षेत्र में प्रस्तावित टोरेंट पावर के 2×800 मेगावाट क्षमता वाले कोल आधारित अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर प्रोजेक्ट को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। करीब 1600 मेगावाट के इस प्रस्तावित प्रोजेक्ट से जुड़ी 922 एकड़ भूमि के हस्तांतरण और पर्यावरणीय स्वीकृति को लेकर मामला अब केंद्र सरकार और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) तक पहुंच गया है।

अनूपपुर तहसील के रक्सा और कोलमी क्षेत्र की लगभग 476.788 हेक्टेयर, यानी करीब 922 एकड़ भूमि को लेकर सवाल खड़े किए गए हैं। शिकायत के अनुसार यह भूमि पूर्व में पावर प्लांट की स्थापना के उद्देश्य से किसानों से अधिग्रहित की गई थी। आरोप है कि सितंबर 2025 में न्यू जोन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा यह भूमि टोरेंट पावर लिमिटेड को हस्तांतरित कर दी गई।

पूर्व जिला पंचायत सदस्य बुद्धसेन राठौर ने इस संबंध में 7 अगस्त 2026 को केंद्र सरकार के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की थी। शिकायत में राष्ट्रीय पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन नीति-2007 के प्रावधानों का हवाला देते हुए भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पर आपत्ति जताई गई है। आरोप लगाया गया है कि कंपनी परिवर्तन के बाद प्रभावित किसानों के लिए नए सिरे से मुआवजे और पुनर्वास संबंधी प्रावधानों का पालन नहीं किया गया।

शिकायत के बाद भारत सरकार के भूमि संसाधन विभाग ने मामले का संज्ञान लिया है। विभाग के निदेशक सर्वदानंद बरनवाल ने 13 अगस्त 2026 को मध्य प्रदेश के प्रमुख सचिव, राजस्व को पत्र भेजकर पूरे प्रकरण की जांच और संबंधित रिकॉर्ड के सत्यापन की आवश्यकता बताई है। पत्र में NRRP-2007 की प्रयोज्यता, वर्ष 2012 के पुनर्वास आदेश तथा 13 जून 2025 को हुई बैठक की वैधानिक स्थिति की जांच का उल्लेख किया गया है। इसकी प्रति कलेक्टर अनूपपुर को भी भेजी गई है।

इधर, इसी परियोजना को 17 अप्रैल 2026 को मिली पर्यावरणीय स्वीकृति को भी एनजीटी में चुनौती दी गई है। बुद्धसेन राठौर द्वारा दायर अपील क्रमांक 13/2026 पर 25 अगस्त को एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच, भोपाल में सुनवाई हुई। जस्टिस शेओ कुमार सिंह और सुधीर कुमार चतुर्वेदी की बेंच ने टोरेंट पावर सहित सभी संबंधित प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

एनजीटी ने पक्षकारों को छह सप्ताह के भीतर ई-फाइलिंग पोर्टल पर खोज योग्य पीडीएफ प्रारूप में दस्तावेज और जवाब दाखिल करने को कहा है। अपीलकर्ता को एक सप्ताह के भीतर आवश्यक दस्तावेजों की तामील कराने के निर्देश दिए गए हैं। मामले से जुड़े देरी माफी, अंतरिम राहत और अनुवादित दस्तावेजों से संबंधित आवेदनों पर भी नोटिस जारी किया गया है। मामले की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है। अब इस मामले में केंद्र सरकार के स्तर पर होने वाला रिकॉर्ड सत्यापन और एनजीटी में दाखिल होने वाले जवाब महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

बहुचर्चित खैर के पेड़ कटाई मामले में नया मोड़, आदिवासी पर दबाब बनाकर बनाया बलि का बकरा, थाना में हुई शिकायत

*डरा धमकाकर सादे कागज में करा लिए हस्ताक्षर*


उमरिया

घुनघुटी वन परिक्षेत्र में बहुचर्चित खैर की अवैध कटाई का मामला अब नया मोड़ ले चुका है। जंगल में बड़े पैमाने पर खैर के पेड़ों की कटाई के बाद जब ठूंठ गिनती हुई तो विभाग की नींद उड़ गई। अपनी इसी विफलता और लापरवाही पर पर्दा डालने और आंकड़ों की खानापूर्ति के लिए वन विभाग ने गांव के भोले-भाले आदिवासी वाहन चालक को निशाने पर ले लिया है।

सूत्रों के अनुसार घुनघुटी के जंगलों में खैर की अवैध कटाई लंबे समय से चल रही थी, जिसकी भनक तक स्थानीय बीट अमले को नहीं लगी। जब मामला उच्च अधिकारियों के संज्ञान में आया और ठूंठों की गिनती कराई गई तो जंगल में बड़ी संख्या में खैर के ठूंठ पाए गए। इस पर विभाग ने कार्रवाई करते हुए पहले स्थानीय बीट गार्ड और उप वनपाल को निलंबित कर दिया और आनन-फानन में जांच बैठा दी गई।

इसी जांच की आड़ में विभाग ने अपनी गर्दन बचाने के लिए तीन अलग-अलग अपराध पंजीबद्ध किए, जिनका अपराध क्रमांक 806/04, 7790/23 और 807/01 है। इन तीनों प्रकरणों को एक साथ जोड़कर 25 अगस्त को घुनघुटी निवासी एक गरीब आदिवासी के नाम धारा 72 के तहत समन जारी कर दिया गया।

समन मिलते ही 31 अगस्त को पीड़ित प्रदीप बैगा उर्फ टिप्पू पिता कन्जी बैगा निवासी घुनघुटी, जो वाहन चलाकर अपना परिवार पालता है, बयान देने घुनघुटी स्थित रेंज ऑफिस पहुंचा। आरोप है कि उसे घुनघुटी से अन्यत्र स्थान पर ले जाया गया। पीड़ित का आरोप है कि बयान के नाम पर बीट गार्ड सुभाष पटेल ने उससे गाली-गलौज शुरू कर दी और खैर काटने वालों के नाम बताने का दबाव बनाया। जब उसने कहा कि साहब मैं तो दिन भर गाड़ी चलाता हूं, मुझे जंगल के बारे में कुछ नहीं पता, तो उसे हाथ-मुक्कों से पीटा गया, जिससे वह जमीन पर गिर पड़ा। इसके बाद उसके बायें पैर के जंघे पर 4-5 डंडे मारे गए, जिसके चोट के निशान अभी भी बने हुए हैं। उसे करीब पांच घंटे तक बंधक बनाकर रखा गया और डरा-धमकाकर तीन-चार सादे कागजों पर जबरन हस्ताक्षर करा लिए गए।

विभाग की इस कार्यप्रणाली से कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं। यदि खैर की कटाई हुई है तो विभाग ने मौके पर असली तस्करों को क्यों नहीं पकड़ा? ठूंठ गिनती के बाद ही अचानक एक ही आदिवासी पर तीन अपराध कैसे दर्ज हो गए? और बयान के लिए बुलाए गए व्यक्ति को पीटकर सादे कागज पर हस्ताक्षर कराने की क्या जरूरत पड़ गई?

पीड़ित ने 1 सितंबर को थाना पाली में आवेदन देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी बीट गार्ड पर कार्रवाई की मांग की है। पाली पुलिस ने आवेदक का मेडिकल कराते हुए आवेदन पर जांच शुरू कर दी है।

कार्यक्रम में मेधावी छात्रा मान्यता साहू को आगे की पढ़ाई के लिए मुख्यमंत्री ने प्रदान किया लैपटॉप


शहडोल

शहडोल की मेधावी छात्रा मान्यता साहू को उनकी शैक्षणिक उपलब्धि एवं आगे की पढ़ाई में सहयोग के लिए राज्य सरकार की ओर से लैपटॉप प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल स्थित कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में मान्यता साहू को लैपटॉप प्रदान किया।

मान्यता साहू वर्तमान में भोपाल के एसआईआरटी कॉलेज से बी.टेक. की पढ़ाई कर रही हैं। उन्होंने शहडोल के सेंट ज्यूड्स क्रिश्चियन मिशन हायर सेकेंडरी स्कूल से अध्ययन करते हुए हायर सेकेंडरी परीक्षा में गणित विषय में 97.6 प्रतिशत अंक अर्जित कर जिले का नाम गौरवान्वित किया।

मेधावी छात्रा मान्यता साहू का लक्ष्य बी.टेक. की डिग्री पूर्ण करने के बाद भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की तैयारी करना है। राज्य सरकार द्वारा प्रदान किया गया लैपटॉप उनकी उच्च शिक्षा एवं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में उपयोगी साबित होगा।

मान्यता साहू के पिता शहडोल रेलवे स्टेशन शहडोल में कैंटीन का संचालन करते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद मान्यता ने अपनी मेहनत, लगन और दृढ़ इच्छाशक्ति से उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धि हासिल की है।

लैपटॉप मिलने पर मान्यता साहू ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार की यह पहल विद्यार्थियों को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करने वाली है। उन्होंने अपनी सफलता एवं इस सम्मान के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, अपने माता-पिता एवं शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त किया है।

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