दबंग पब्लिक प्रवक्ता

बस व ट्रक की जोरदार टक्कर, 6 लोग हुए घायल, नाराज ग्रामीणों ने सांसद का काफिला रोका 


उमरिया

जिले के बिरसिंहपुर पाली थाना क्षेत्र में सुबह भीषण सड़क हादसा हो गया। तेंदूपत्ता गोदाम के पास कोरबा से बिलासपुर जा रही शिव ट्रेवल्स की बस और ट्रक में आमने-सामने जोरदार भिड़ंत हो गई।

टक्कर इतनी तेज थी कि बस का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और ड्राइवर केबिन में फंस गया। मौके पर पहुंची पुलिस और स्थानीय लोगों ने काफी मशक्कत के बाद ड्राइवर को सुरक्षित बाहर निकाला।

बस में करीब 40 से 50 यात्री सवार थे। हादसे में आगे की सीट पर बैठे करीब 6 यात्रियों को चोटें आई हैं। गनीमत रही कि कोई जनहानि नहीं हुई। सूचना मिलते ही 108 एम्बुलेंस मौके पर पहुंची। सभी घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पाली ले जाया गया, जहां उनका उपचार चल रहा है। दो यात्रियों की हालत गंभीर बताई जा रही है।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक ट्रक गलत साइड से आ रहा था, जिससे यह हादसा हुआ। पाली पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। क्रेन की मदद से दोनों वाहनों को सड़क से हटाया गया, जिसके बाद जाम खुला।

*ग्रामीणों व किसानों ने रोका सांसद का काफिला*


शहडोल जिले के ब्यौहारी विधानसभा क्षेत्र के दौरे पर पहुंचे सीधी सांसद डॉ. राजेश मिश्रा को ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा। जन चौपाल कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे सांसद का काफिला भमरहा प्रथम गांव में ग्रामीणों ने रोक लिया और झापर नदी पर बने पुल को चालू कराने तथा अधिग्रहित भूमि का मुआवजा दिलाने की मांग उठाई। लगभग एक घंटे तक सांसद का काफिला मौके पर रुका रहा, जहां ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं विस्तार से बताईं।

जानकारी के अनुसार सीधी संसदीय क्षेत्र के सांसद डॉ. राजेश मिश्रा मंगलवार को ब्यौहारी विधानसभा के ग्राम कोना टोला में आयोजित जन चौपाल में शामिल होने तथा ग्रामीणों के बीच रात्रि विश्राम के लिए जा रहे थे। उनके साथ ब्यौहारी विधायक शरद जुगलाल कोल भी मौजूद थे। इसी दौरान रास्ते में भमरहा प्रथम गांव के लोगों ने उनका काफिला रोक लिया।

ग्रामीणों का आरोप है कि झापर नदी पर बना पुल करीब तीन वर्ष पहले पूरी तरह तैयार हो चुका है, लेकिन आज तक आम लोगों के लिए चालू नहीं किया गया। पुल के दोनों ओर पहुंच मार्ग के लिए स्थानीय किसानों की भूमि अधिग्रहित की गई थी, लेकिन प्रभावित किसानों को अब तक मुआवजे की राशि नहीं मिली है। इसी वजह से पुल का उपयोग शुरू नहीं हो सका है। पुल निर्माण पूरा होने के बावजूद करीब 30 किसानों को उनकी जमीन का मुआवजा नहीं मिला है। 

ग्रामीणों और किसानों ने सांसद के समक्ष अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए जल्द समाधान की मांग की। सांसद डॉ. राजेश मिश्रा ने मौके पर लोगों से चर्चा की और उन्हें आश्वस्त किया।

पुलिस की 2 स्थानों में कार्यवाही, महिला समेत 2 आरोपियों से 12 लीटर शराब जप्त


अनूपपुर/कोतमा

रामनगर पुलिस ने राजनगर क्षेत्र में एक ही दिन दो अलग-अलग स्थानों पर कार्रवाई करते हुए एक महिला एवं एक पुरुष के कब्जे से कुल 12 लीटर हाथ भट्ठी से निर्मित कच्ची महुआ शराब बरामद की है। पुलिस ने दोनों मामलों में आबकारी एक्ट के तहत पृथक-पृथक प्रकरण दर्ज कर विवेचना प्रारंभ कर दी है। 

पुलिस को मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई थी कि राजनगर क्षेत्र में अलग-अलग स्थानों पर अवैध रूप से महुआ शराब बिक्री के लिए रखी गई है। सूचना पर पहली कार्रवाई वार्ड क्रमांक 07 राजनगर निवासी श्रीमती दुर्गावती रौतेल (44 वर्ष) को उसके घर के सामने अवैध शराब बिक्री के उद्देश्य से शराब रखे हुए पाया गया। पुलिस ने घेराबंदी कर महिला को पकड़ा और तलाशी ली। तलाशी के दौरान उसके कब्जे से एक सफेद जरीकेन में रखी 06 लीटर हाथ भट्ठी से निर्मित कच्ची महुआ शराब बरामद हुई। 

दूसरी वार्ड क्रमांक 02 बाजार दफाई राजनगर में की गई। मुखबिर की सूचना पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घेराबंदी कर हरिहर तिवारी उर्फ बग्गड़ (56 वर्ष) को उसके घर के सामने सड़क किनारे अवैध शराब बिक्री के उद्देश्य से शराब रखे हुए पकड़ा। तलाशी लेने पर आरोपी के कब्जे से एक प्लास्टिक जरीकेन में रखी 06 लीटर हाथ भट्ठी की बनी कच्ची महुआ शराब बरामद हुई। रामनगर पुलिस ने दोनों आरोपियों के विरुद्ध क्रमशः अपराध क्रमांक 166/26 एवं 167/26 के तहत धारा 34(A) आबकारी एक्ट में प्रकरण दर्ज कर विवेचना प्रारंभ कर दी है। 

फिर सुलग रही असंतोष की आग, पॉवर प्रोजेक्ट्स, कोल ब्लॉक्स जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया से किसानों में भारी नाराजगी

*1330 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण, बनने जा रहा पॉवर हब या विनाश का हब*


( मनोज द्विवेदी, संपादक ,दैनिक कीर्तिक्रांति, अनूपपु्र ,मप्र )

अनूपपुर

मध्यप्रदेश -छत्तीसगढ़ का सीमावर्ती जनजातीय जिला एक बार फिर असंतोष की आग मे सुलग रहा है। जिले को पॉवर हब बनाने की कोशिशों के बीच किसानों की जमीन अधिग्रहण की अराजक प्रक्रिया जारी है।  जिसमे लोगों का  खुला आरोप है कि किसानों , जमीन मालिकों , क्षेत्र के पर्यावरणीय हितों की अनदेखी जमकर की जा रही है।इससे एक बार फिर लोगों के जेहन मे मोजर बेयर पॉवर प्लांट जमीन अधिग्रहण के दौरान हुई हिंसा की याद ताजा हो गयी।

अनूपपु्र जिले मे चचाई पॉवर प्लांट, हिन्दुस्तान पॉवर ( मोजर बेयर  ) जैतहरी,  टोरंट पॉवर ( न्यू जोन ) रक्सा  , अडानी पॉवर ( वेल्सपन कम्पनी ) छतई , उमरदा ,मझगंवा ( बिजुरी ) के बाद लामाटोला कोल ब्लॉक अन्तर्गत बसखली, लामटोला, रेउला और गढ़ी में प्रस्तावित कोयला परियोजना हेतु लगभग  1030 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के कारण किसानों मे भारी आक्रोश है।

जमीन मालिक ,किसानों ,स्थानीय लोगों मे विस्थापन, मुआवजा, रोजगार, सामुदायिक कल्याण के कार्यों  के साथ व्यापक पर्यावरणीय चिंताएं हैं। किसानों, मजदूरों, बेरोजगारों ,स्थानीय निवासियों, व्यवसायियों, समाजसेवियों, नेताओं, व्यापारियों, पत्रकारों की अपनी - अपनी चिंताएं हैं। 

जनप्रतिनिधियों ,अधिकारियों को यह समझना होगा कि  ऐसे भीषण  डेवलपमेंट से स्थानीय लोगों की चिंता यदि आक्रोश मे बदलती है तो यह केवल चुनावी मुद्दा नहीं है। इसका जिले और प्रदेश की कानून व्यवस्था पर भी व्यापक असर पडता है।

मोजर बेयर पॉवर प्लांट हेतु जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया मे व्यापक हिंसा हुई थी।  पत्रकारिता और समाज की नई पीढी को शायद पता भी ना हो कि तब जमीन अधिग्रहण के दौरान बंद कंटेनर मे हिंसक महिलाओं की भीड तेल डाल कर आग लगा रही थी, जिसमे कंपनी के लोग और अधिकारी जान बचाने के लिये छुपे हुए थे।

एक गाँव मे एसडीओपी सहित पुलिस और राजस्व के अधिकारियों को दस घंटे भीड ने बंधक बना रखा था । तब कलेक्टर कवींद्र कियावत ने वरिष्ठ पत्रकारों और एडीएम को मौके पर भेजा था ,तब जाकर लोग रिहा हुए।

इसके बाद किसान नेता राकेश टिकेत की उपस्थिति मे मोजर बेयर के गेट पर भारी हिंसा हुई। एसपी एन पी वरकडे सहित बहुत से पुलिस और राजस्व अधिकारी गंभीर रुप से घायल हुए थे। एसपी को तो लगभग मार ही डाला गया था। पत्रकारों ने अपनी जान पर खेल कर कलेक्टर जे के जैन और एसपी की जान बचाई थी।पुलिस फायरिंग हुई,बल प्रयोग हुआ ,तब जाकर घंटों बाद स्थिति नियंत्रण मे आई।

तब और अब मे बडा अन्तर ये है कि उस वक्त की पत्रकारिता जन सरोकार से जुडी हुई,जनता और जिले के हित मे ईमानदार पत्रकारिता थी। गाँव के लोगो ने पत्रकारिता और पत्रकारों के प्रति विश्वास कायम था। हम लोग जनता के गुस्से और भीड की हिंसा के बीच भी उनके साथ, उनके लिये संघर्ष करते थे। किसी पत्रकार पर तब ना कम्पनी की दलाली का आरोप लगा और ना किसी ने पत्रकारों से बदतमीजी की।।इसके बाद हुए 2018 के विधानसभा चुनाव मे भाजपा अनूपपु्र जिले की तीनों सीटें हार गयी। मध्यप्रदेश से भाजपा की सरकार चली गयी।‌

दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से आज परिस्थितियों मे बहुत अन्तर है।  अविश्वास और मर्यादा का बडा संकट है । इसलिये जिले के प्रत्येक सेक्टर मे अराजकता ,अविश्वास और येन केन लाभवंती बनने का माहौल होने से आम लोगों मे बेचैनी ,गुस्से की हद तक जा पहुंचा है। शासन , प्रशासन  और समाज के जिम्मेदार वर्ग को जवाबदेही लेनी होगी। 

यह सुनिश्चित करना होगा कि विकास के सभी कार्यों के कारण एक भी किसान ,जमीन मालिक के हितों की अनदेखी ना हो। उसे जमीन के बाजार मूल्य से बढकर ,उसकी सहमति का मुआवजा दिया जाए। परिवार के लिये रोजगार सुनिश्चित हो‌ । सामुदायिक कार्यों और पर्यावरणीय हितों का समुचित ध्यान रखा जाए। 

ऐसे सभी बडे कार्यों से सदियों पुरानी बसाहट, गांव ,नदी - नालों की भौगोलिक, सामाजिक, सांस्कृतिक व्यवस्था मे आमूल - चूल परिवर्तन होता है‌ । यह लोगों की अपने घर, खेत, जमीन ,बसाहट से भावनात्मक लगाव पर आघात करता है। इन सब तथ्यों को ध्यान नहीं रखा जाएगा तो लोगों के असंतोष ,उनके गुस्से को हवा देने वाले बहुत से लोग हैं ।

 हमारा अनूपपु्र जिला एक बार फिर असंतोष, नाराजगी के कारण अराजक हिंसा का शिकार ना बने ,यह देखना शासन - प्रशासन , जनप्रतिनिधियों, जवाबदेह सच्चे पत्रकारों , समाजसेवियों की जिम्मेदारी है। मुआवजा, पुनर्वास, रोजगार , पर्यावरणीय प्रभाव , सामुदायिक कल्याण के कार्यों पर ईमानदारी से कार्य होना चाहिये।

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