वन माफिया वनों में सागौन के वृक्षों का खुलेआम आरा चलाकर कर रहे हैं कत्लेआम आरा, शासन को करोड़ों की चपत
वन माफिया वनों में सागौन के वृक्षों का खुलेआम आरा चलाकर कर रहे हैं कत्लेआम आरा, शासन को करोड़ों की चपत
*रेत माफिया भी हुए बेलगाम, जिम्मेदार नींद में*
शहडोल
इन दिनों वन माफिया के चंगुल में बुरी तरह जकड़ चुका है और जंगल को जिस बेरहमी से उजाड़ा जा रहा है उसे देखकर यही लगता है कि अगर यही हाल रहा तो इस हरे-भरे वृत्त को रेगिस्तान में बदलते देर नहीं लगेगी।
हालात बेहद चिंताजनक हैं क्योंकि घुनघुटी वन परिक्षेत्र में खैर तस्करी के मामले की आग अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि इसी वृत्त के बुढार, जैतपुर और शहडोल परिक्षेत्र के जंगलों में सागौन और साल की व्यापक तस्करी का नया खेल शुरू हो गया है। विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार घुनघुटी में हजारों की तादाद में खैर के हरे-भरे पेड़ों की हुई कटाई के मामले ने वन मुख्यालय तक को हिला कर रख दिया है और इस मामले में वन मंडलाधिकारी उमरिया से जवाब-तलब किया गया है।
लेकिन बड़ा सवाल शहडोल वन मंडल की मुखिया पर खड़ा हो रहा है। वन मंडलाधिकारी शहडोल श्रद्धा पेंद्रो जो बड़ी-बड़ी डींगें हांकती हैं और खुद को सिंघम बनी घूमती हैं, उनकी कथित ईमानदारी की चुनरी पर बुढार के जंगलों में सागौन के वृक्षों पर चल रहे आरे के निशानों ने बड़ा दाग लगा कर रख दिया है। विभाग में ईमानदारी और सख्ती के बड़े-बड़े दावे करने वाली वन मंडलाधिकारी शहडोल के नाक के नीचे ही आरक्षित वन उजड़ रहे हैं और उनके दावे खोखले साबित हो रहे हैं।
इसका पुख्ता सबूत बुढार वन परिक्षेत्र के धनपुरी बीट के आरक्षित वन क्षेत्र आरएफ 833 से मिला है जहां जीपीएस लोकेशन 23.155424, 81.525095 पर एक हरे-भरे विशाल सागौन के पेड़ को आरी से काट दिया गया है। फोटो में तने पर ताजा निशान साफ हैं। बुढार में सागौन-साल के हजारों वृक्षों की अवैध कटाई जारी है और खुलेआम आरा चल रहा है, जिससे शासन को करोड़ों की चपत लग रही है। तस्करी का तरीका संगठित है, दिन में रेकी और रात में कटाई कर लकड़ी अवैध आरा मशीनों पर खपाई जा रही है।
इधर शहडोल वन परिक्षेत्र में रेत माफिया भी बेलगाम है। जानकार सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार वन अमले द्वारा पकड़ी गई रेत की अवैध डग्गी को रेत माफिया छुड़ा ले गया। एक तरफ ईमानदारी की डींगें और दूसरी तरफ सागौन के जंगल उजड़ना और रेत की डग्गी का छूट जाना, यह पूरे अमले की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
ग्रामीणों का कहना है कि ऐसा ही रहा तो सदा हरा-भरा लहलहाता शहडोल वन वृत्त भी रेगिस्तान में बदल जाएगा और वन मंडलाधिकारी की ईमानदारी के सारे दावे इन कटे हुए सागौन के ठूंठों तले दब कर रह जाएंगे।

