दबंग पब्लिक प्रवक्ता

आंगनबाड़ी का सपना दिखाकर नौकरी के नाम पर महिला से 1.5 लाख की ठगी, 2 आरोपी गिरफ्तार


शहडोल

जिले के जयसिंहनगर से बेरोजगारी का फायदा उठाकर नौकरी के नाम पर ठगी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। जहां आंगनबाड़ी में कार्यकर्ता और सहायिका की नौकरी दिलाने का झांसा देकर महिला से करीब डेढ़ लाख रुपए की ठगी कर ली गई।

आरोपियों ने विभाग में पहुंच होने का दावा करते हुए न सिर्फ किस्तों में रकम वसूली, बल्कि कलेक्ट्रेट कार्यालय बुलाकर फर्जी नियुक्ति पत्र तक थमा दिया। जब पीड़ित महिला जॉइनिंग के लिए पंचायत पहुंची तो पूरा खेल सामने आ गया। फिलहाल पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस घटना ने एक बार फिर बेरोजगारी के नाम पर चल रहे ठगी के खेल को उजागर कर दिया है। 

दरअसल, ग्राम धिरियाटोला निवासी साधना पटेल ने अपनी सहेली मायावती सिंह गोंड के साथ मिलकर आंगनबाड़ी में नौकरी के लिए संपर्क किया था। इस दौरान उनकी मुलाकात समावित द्विवेदी और अनुराग द्विवेदी नामक व्यक्तियों से हुई। जिन्होंने महिला बाल विकास विभाग में अपनी पहुंच होने का दावा करते हुए नौकरी लगवाने के नाम पर पहले 10 हजार, फिर 50 हजार और बाद में ट्रेनिंग व जॉइनिंग के नाम पर किस्तों में कुल 1 लाख 49 हजार 704 रुपए ले लिए। 

इतना ही नहीं, आरोपियों ने दोनों महिलाओं को शहडोल कलेक्ट्रेट कार्यालय बुलाकर जनपद पंचायत जयसिंहनगर का फर्जी नियुक्ति आदेश पत्र भी थमा दिया और पंचायत में जॉइनिंग के लिए भेज दिया। जब पीड़ित महिलाएं ग्राम पंचायत पहुंची तो वहां पहले से ही पद भरे होने की जानकारी मिली, जिससे पूरे मामले का खुलासा हुआ। ठगी का एहसास होने पर जब महिलाओं ने आरोपियों से संपर्क किया तो उन्होंने पैसे लौटाने का आश्वासन देते हुए लगभग 6 माह का समय मांगा। लेकिन आज तक न तो पैसा वापस मिला और न ही कोई नौकरी।

तीन हाथियों ने रात में तोड़ा एक घर, बाल बाल बचा ग्रामीण का परिवार, एक घायल की हुई मौत


अनूपपुर

विगत 57 दिनों से तीन हाथियों का समूह अनूपपुर जिले के अनूपपुर एवं जैतहरी इलाके में निरंतर विचरण करते दिन के समय जंगल में ठहरकर शाम रात होते ही जंगलों से निकल कर ग्रामीण जनों के घरों में तोड़फोड़ कर खेत एवं बांडियों में लगे विभिन्न तरह की फसलों को अपना आहार बना रहे है। हाथियों के निरंतर विचरण एवं नुकसान के कारण एक दर्जन से अधिक ग्राम के ग्रामीण भयभीत एवं परेशान हैं। हाथियों को जिले से बाहर किए जाने के वन विभाग एवं ग्रामीणों का निरंतर प्रयास विफल हो रहा है। रविवार एवं सोमवार की रात तीनों हाथियों का समूह अचानक एक गांव में पहुंचकर एक ग्रामीण के घर में तोड़फोड़ करने लगे जिससे ग्रामीण का परिवार किसी कदर घर से निकल कर भाग कर अपनी जान बचा सके। सोमवार की सुबह तीनों हाथी जैतहरी के धनगवां के जंगल में ठहरे हुए हैं।

जैतहरी एवं अनूपपुर क्षेत्र के दर्जनों गांव में दिनों के समय जंगल में ठहर कर साम रात होते ही विचरण करते हुए ग्रामीणो के घरों में तोड़फोड़ कर नुकसान पहुंचाया, हाथियों के हमले से दो बृद्धो की मौत हो गई, वही सैकड़ो ग्रामीणों के खेतों में लगी विभिन्न तरह की फसलों एवं अन्य संपत्तियों का नुकसान पहुंचाया है, विगत तीन दिनों से तीनों हाथी एक बार फिर एक साथ होकर जैतहरी के धनगवां बीट के जंगल में शनिवार एवं रविवार के दिन एवं रात बिताने बाद रविवार एवं सोमवार की मध्य रात्रि थाना तहसील एवं वन परिक्षेत्र जैतहरी अंतर्गत धनगवा बीट के जंगल बघमढिया एवं आमापानी में व्यतीत करने के बाद देर रात ग्राम पंचायत कुकुरगोंड़ा के वार्ड क्रमांक 1 बेल्हाटोला में कच्चे मकान में तीन बजे रात अचानक पहुंचकर घर की दीवार तोड़ते हुए घर के अंदर रखे सामान को खाने लगे, इस दौरान परिवार के दो पुरुष दो महिला एक-एक पुत्र पुत्री अचानक घर तोड़ते एवं हाथी के पहुंचने से बेहद डर एवं दहशत रहे, जो किसी कदर घर से निकल कर जंगल एवं गांव की ओर भाग कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचकर अपनी जान बचा सके। हाथी के आने की सूचना पर एकत्रित ग्रामीणों ने मशाल एवं हल्ला कर हाथियों को अपने इलाके से रात भर भगाते रहे, इस दौरान तीनों हाथियों ने सात ग्रामीणों के खेतों में लगी चना,मटरी,अलसी एवं अन्य तरह के फसलों को खा कर चल कर नुकसान पहुंचाते सोमवार की सुबह कुकुरगोंडा के बेल्हाटोला गांव से लगे धनगवां बीट के डोकरी पटौरा बघमडिया के जंगल में जाकर ठहर गए कई गांव की ग्रामीणों द्वारा हाथियों के गांव एवं मोहल्ला टोला में पहुंचने पर भगाए जाने का प्रयास निरंतर किया जा रहा है लेकिन तीनों हाथी अनूपपुर जिले को छोड़कर अन्य स्थान पर जाने को तैयार नहीं है।

*घायल वृद्ध की मौत*

11 एवं 12 फरवरी की मध्य रात्रि जिला मुख्यालय अनूपपुर से 3 किलोमीटर दूरपर स्थित ग्राम पंचायत बरबसपुर के कपिलधारा कॉलोनी के पीछे रहने वाले 70 वर्षीय रामविशाल पिता स्व. जगना भैना जो कच्चे मकान के अंदर जमीन में सो रहे थे, घर को देर रात अचानक एक दांत वाला नर हाथी खाने की तलाश में घर के अंदर रखे धान की बोरियों की सुगंध आने पर दीवार तोड़ने से दीवाल का मालवा घर के अंदर गिरने से समृद्ध रामविशाल दब गया रहा, जिसे गंभीर चोट आने पर जिला चिकित्सालय अनूपपुर में भर्ती कराया जा रहा जिसकी सुबह वृद्ध की घर पर मौत हो गई घटना की जानकारी मृतक के पुत्र नवल सिंह भैना द्वारा कोतवाली थाना अनूपपुर दिए जाने पर पुलिस के द्वारा पंचनामा एवं शव परीक्षण की कार्रवाई की गई।

रिहायशी क्षेत्र में सड़क किनारे फेंक रहे हैं अस्पताल का बायो वेस्ट, इंसानो व जानवरो की लिए बना खतरा


शहडोल 

जिले के बुढार नगर से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो ना सिर्फ इंसानियत को शर्मसार करती है बल्कि हमारे स्वास्थ्य तंत्र की गंभीर लापरवाही को भी उजागर करती है। हनुमान मंदिर के ठीक बगल में सड़क किनारे खुलेआम फेंका गया मेडिकल बायो वेस्ट अब बेजुबान गोवंश के लिए मौत का सामान बनता जा रहा है। इंजेक्शन, नीडल और दवाइयों के खतरनाक कचरे को चारे की तरह खा रहे मवेशी… और रिहायशी इलाके में मंडराता संक्रमण का खतरा, खुले में फेंका गया ये मेडिकल कचरा ना सिर्फ पर्यावरण के लिए खतरा है बल्कि इंसानों और बेजुबान पशुओं की जान से खिलवाड़ भी है।

जिले के बुढार ब्लॉक अंतर्गत गोपालपुर मार्ग में स्थित हनुमान मंदिर के ठीक बगल में एक बेहद चिंताजनक और लापरवाही भरा मामला सामने आया है, जहां हॉस्पिटल संचालकों द्वारा मेडिकल बायो वेस्ट को खुलेआम सड़क किनारे फेंक दिया गया है। फेंके गए कचरे में उपयोग किए गए इंजेक्शन, सुइयां (नीडल), दवाइयों की शीशियां एवं अन्य खतरनाक मेडिकल अपशिष्ट शामिल हैं, जो सीधे तौर पर लोगों और मवेशियों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं।

स्थानीय निवासी नरेंद्र तिवारी ने इस पूरे मामले का खुलासा करते हुए बताया कि वे आज सुबह अपने साथियों के साथ मॉर्निंग वॉक पर निकले थे, तभी उनकी नजर हनुमान मंदिर के पास सड़क किनारे पड़े मेडिकल कचरे के ढेर पर पड़ी। हैरानी की बात यह रही कि आसपास कई गोवंश इस कचरे के बीच विचरण कर रहे थे और उसे चारे की तरह ग्रहण कर रहे थे, जो उनके लिए जानलेवा साबित हो सकता है।

रिहायशी इलाके में इस प्रकार बायो वेस्ट फेंके जाने से संक्रमण फैलने का खतरा भी लगातार बढ़ता जा रहा है। ज्ञात हो कि बुढार नगर में कई निजी क्लिनिक संचालित हैं, जहां से निकलने वाले मेडिकल अपशिष्टों का उचित निस्तारण न कर उन्हें खुले में फेंक दिया जाता है, जिससे पर्यावरण और जनस्वास्थ्य दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

लोगो ने इस गंभीर लापरवाही पर कड़ी आपत्ति जताते हुए प्रशासन से मांग की है कि मेडिकल वेस्ट खुले में फेंकने वाले जिम्मेदार क्लीनिक संचालकों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।

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