दबंग पब्लिक प्रवक्ता

अंधेरे में जीने को मजबूर, विकास के दावों के बीच बिजली जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित सैकड़ों आदिवासी परिवार

*अठारहवीं शताब्दी जैसी जिंदगी जी रहे हैं लोग, कहा हैं जनप्रतिनिधि*


उमरिया

जब पूरा देश डिजिटल इंडिया, स्मार्ट गाँव और विकसित भारत की ओर तेजी से बढ़ रहा है, तब उमरिया जिले के पाली विकासखंड के घुनघुटी ग्राम पंचायत की आदिवासी बहुल गांव गाँधीग्राम, और कठई ग्राम पंचायत की चिनकी,सांस, गढकुर जैसे वनांचल आदिवासी  बहुल गांवों में बिजली जैसी मूलभूत सुविधा से आज भी बिजली जैसी बुनियादी सुविधा के लिए तरस रहे है, जहाँ पर सूर्यास्त होते ही पूरे गाँव अंधेरे की आगोस की घनी  चादर में डूब जाता है, जिससे ऐसा प्रतीत होता है मानो समय अभी भी अठारहवीं शताब्दी में ठहरा हुआ है। 

घुनघुटी ग्राम पंचायत के सांस गाँव में लगभग तीन सौ भूमिया (भील) आदिवासी परिवार जो की बैगा प्रजाति से जुडा माना जाता है, इस गाँव के आदिवासी दिन भर खेतों में और घुनघुटी से मेहनत-मजदूरी कर जब शाम को घर लौटते हैं तब दिनभर कठिन परिश्रम करने के बाद जब ग्रामीण अपने घरौंदे में प्रवेश करते हैं, तब उनका स्वागत धुंध अंधकार के व्दारा किया जाता है, जब आज भारत इक्कीसवीं सदी के आधुनिक सुविधाओं से सूर्य की भांति जगमगाती रोशनी से होती है तब इन गांवों के आदिवासियों का अभिनंदन घोर अंधकार से होता है। आदिवासी बच्चों की पढ़ाई विशेष कर प्रभावित होती है, महिलाओं को घरेलू कार्यों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, क्योंकि आज भी  ग्रामीणों का जीवन  ढिबरी एवं लालटेन की सीमित रोशनी तक सिमटा हुआ है।

सबसे बड़ा दुर्भाग्य इन गांवों का यह है कि चुनावी मौसम में बरसाती  नेताओं जनप्रतिनिधियों और उनके नुमाइंदों की आवाजाही तो होती है, आदिवासियों को बिजली के सब्ज बाग भी दिखाये जाते हैं, विकास के अनेक वादे परोसे जाते हैं, किन्तु चुनाव समाप्त होते ही आदिवासियों की थाली खाली की खाली रह जाती है। विदित होवे की वर्षों से ग्रामीण बिजली उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी यह जायज़ मांग अब तक पूरी नहीं हो सकी है। इसके लिए न क्षेत्र के जनप्रतिनिधि आवाज बुलंद करते हैं, न इस ओर प्रशासनिक पहल होती है, जबकि बिजली अब केवल एक प्रकाश का माध्यम बची बल्कि यह एक ऐसी  सुविधा बन गयी है, जो की आज जीवन  के हर पहलु को प्रभावित करती है। जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, मनोरंजन के साधन, दूर संचार के साथ ही आज आर्थिक विकास का आधार भी बनी हुई  है। बिजली के अभाव में गाँव के बच्चे आधुनिक शिक्षा से पीछे छूट रहे हैं तथा ग्रामीण शासन की अनेक योजनाओं का पूरा लाभ नहीं उठा पा रहे हैं।

वर्तमान में केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा 'धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान' संचालित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य आदिवासी क्षेत्रों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करना है। ऐसे में इन बिजली विहीन  गाँवों को प्राथमिकता के आधार पर बिजली सुविधा से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

इन गाँवों के ग्रामीणों ने शासन, प्रशासन, जनप्रतिनिधियों एवं समाजसेवियों से मार्मिक अपील की है कि उनके गाँव तक भी विकास की रोशनी पहुँचाई जाए। जिस दिन यहाँ के घरों में पहला बल्ब जलेगा, उस दिन केवल अंधेरा ही नहीं मिटेगा, बल्कि सैकड़ों आदिवासी परिवारों के सपनों को भी नया उजाला मिलेगा।

अब प्रश्न यह है कि क्या जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि गाँधीग्राम की इस पीड़ा को सुनेंगे, या फिर यह गाँव आने वाले वर्षों तक भी विकास की रोशनी से वंचित रहेगा?

चावल से लदे 42 ट्रको में ओवरलोडिंग, एसपी के निर्देशन में सिर्फ 4 पर हुई जुर्माना व कार्यवाही


अनूपपुर। 

मध्य प्रदेश स्टेट सिविल सप्लाईज कॉर्पोरेशन के हजारों क्विंटल चावल के परिवहन में ओवरलोडिंग का मामला सामने आने के बाद अनूपपुर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस अधीक्षक विक्रांत मुराव के निर्देशन में कोतवाली पुलिस ने दो ट्रको पर कार्यवाही की तो वहीं यातायात पुलिस ने ओवरलोड वाहनों के खिलाफ दो ट्रको पर 41 हजार का जुर्माना लगाया गया है। जानकारी के अनुसार अनूपपुर जिले से मुरैना जिले के लिए भेजे जा रहे चावल को रेलवे रैक प्वाइंट तक पहुंचाने के लिए लगाए गए कई ट्रकों में निर्धारित क्षमता से अधिक माल लादा जा रहा था। शिकायतों और निगरानी के दौरान ओवरलोड परिवहन की पुष्टि होने पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए चार ट्रकों के खिलाफ चालानी कार्रवाई कर जुर्माना लगाया। जांच और चेकिंग के दौरान कई ट्रकों के चालक अपने वाहन मौके पर ही छोड़कर फरार हो गए। जिससे ट्रको पर कार्यवाही ना हो सके। रेलवे रैक प्वाइंट तक चावल पहुंचाने के लिए बड़ी संख्या में वाहनों का उपयोग किया जा रहा है। ऐसे में ओवरलोडिंग न केवल सड़क सुरक्षा के लिए खतरा बन रही है, बल्कि परिवहन नियमों का भी खुला उल्लंघन है।

कोतवाली पुलिस ने कार्रवाई करते हुए क्षमता से अधिक लदे दो ट्रकों को पकड़ा है। कार्रवाई कोतवाली थाना प्रभारी अरविंद जैन के नेतृत्व में 17 जून को की गई। जांच के दौरान ट्रक क्रमांक एमपी 20 एचबी 5660 एवं एचपी 38 जे 4533 में निर्धारित क्षमता से अधिक चावल लोड पाया गया। ओवरलोडिंग की पुष्टि होने पर दोनों वाहनों को थाना परिसर लाया गया और वैधानिक कार्रवाई की गई। मामले में ट्रक चालक राजेश यादव पिता रामसुरत यादव 40 वर्ष निवासी चंदिया तथा दीपेश यादव पिता सुखसेन प्रसाद यादव 30 वर्ष निवासी ग्राम पोड़ी कला थाना ब्यौहारी के विरुद्ध धारा 113/194(1) के तहत ओवरलोडिंग तथा परमिट की शर्तों के उल्लंघन पाए जाने पर धारा 66/192(ए) मोटर वाहन अधिनियम के अंतर्गत कार्रवाई की गई है।

रेलवे रैक प्‍वाइंट के लिये जिले के चार गोदामों से 17 जून को निकले 42 ओव्‍हर लोड़ ट्रको में यातायात को सिर्फ 2 ट्रक ओव्‍हर लोड़ मिले। जबकि यातायात पुलिस इन दिनों दिन रात दो दो प्‍वांइट  बनाकर हाइवे में खड़े होकर यातायात नियमों के उल्‍लंघनन करने वाले वाहनों पर कार्यवाही की जा रही है। एसपी की कार्यवाही देख अंडर लोडिंग हुआ चालू पूरे मामले में पुलिस अधीक्षक के सख्‍त निर्देशन और कड़ी निगरानी के बाद 18 जून को चारो वेयर हाउस से चावल अंडर लोड़ दिया जाने लगा। 

भ्रष्टाचार व जनसमस्याओं पर कांग्रेस का अनोखा विरोध, प्रदर्शन व नारेबाजी, आवारा कुत्ते को सौपा ज्ञापन


शहडोल

जिले के ब्यौहारी नगर परिषद में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार और जनसमस्याओं को लेकर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी ब्यौहारी द्वारा नगर परिषद क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं, विकास कार्यों में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर आमसभा एवं विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया था। प्रदर्शन के बाद कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता अपना ज्ञापन प्रशासन को सौंपने नगर परिषद कार्यालय पहुंचे, लेकिन वहां उन्हें कोई जिम्मेदार अधिकारी मौजूद नहीं मिला। तो आवारा कुत्ते को ही ज्ञापन सौप दिया।

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि जनता की समस्याओं को लेकर प्रशासन पूरी तरह उदासीन बना हुआ है। काफी देर तक अधिकारियों का इंतजार करने के बाद कार्यकर्ताओं ने नगर परिषद कार्यालय के सामने धरना शुरू कर दिया और जिला प्रशासन तथा पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

धरने के दौरान कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि कोई अधिकारी ज्ञापन लेने नहीं आया तो वे किसी आवारा कुत्ते को ही ज्ञापन सौंप देंगे। जब लंबे इंतजार के बाद भी कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा, तो कांग्रेसियों ने अपनी चेतावनी को अमल में बदल दिया। कार्यकर्ताओं ने एक आवारा कुत्ते को पकड़कर उसके गले में ज्ञापन लगाया और प्रतीकात्मक रूप से उसे प्रशासन का प्रतिनिधि मानते हुए ज्ञापन सौंप दिया।

इस अनोखे विरोध प्रदर्शन को देखने बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुट गए। देखते ही देखते यह घटनाक्रम पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया। कई लोगों ने इसे प्रशासनिक उदासीनता पर करारा व्यंग्य बताया तो कुछ ने इसे लोकतांत्रिक विरोध का अनोखा तरीका कहा। कांग्रेस ने चेतावनी दी कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। क्षेत्र में “ज्ञापन वाले कुत्ते” की चर्चा अधिकारियों से ज्यादा हो रही है और प्रशासन की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में नजर आ रही है।

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