दबंग पब्लिक प्रवक्ता

पैरा मेडिकल कॉलेज में छात्राओं के साथ छलावा, कलेक्टर को छात्राओं ने सुनाई आप बीती, लगाई न्याय की गुहार


उमरिया

विवेकानंद पैरामेडिकल कॉलेज विकट गंज में अध्ययन रत छात्राओं के धैर्य का बांध आखिर कार तीन वर्ष के बाद टूट गया, और आज जन सुनवाई में पहुँच कर अपनी आप बीती कलेक्टर धरणेन्द्र जैन के समक्ष प्रस्तुत की। ज्ञापन देने वाली विवेकानंद पैरा मेडिकल कॉलेज की छात्राओं ने बताया की हम छात्राओं के व्दारा बी एम एल टी की पढ़ाई के लिए  वर्ष 2023 में दाखिला ली थी, तब से अनवरत रूप से कालेज में अध्ययन रत है लेकिन तीन वर्ष बीत गयें न तो हमारा परीक्षा फार्म आज तक भरवाया गया और न ही हमारी परीक्षा आयोजित की गयी, पिछले वर्ष भी हम लोग जब परीक्षा फार्म भरवाये जा रहे थे तब कांलेज प्रबंधन से बात की थी, तब यह कह कर शांत कर दिया गया था कि आप लोगो की परीक्षा अगले सत्र में आयोजित की जायेगी । अब जब इस सत्र में भी परीक्षायें आयोजित की गयी तब भी इन छात्राओं के परीक्षा फार्म नहीं भराये गये, तब छात्राओं ने जन सुनवाई में पहुंच कर आप बीती बतलायी, जबकि इस मामले में विवेकानंद पैरा मेडिकल कॉलेज के जय कुमार पाण्डेय कहा कहना है की छात्राओं की उपस्थिति 75 प्रतिशत अनिवार्य है, लेकिन यह छात्राओं की उपस्थिति कम होने। के कारण परीक्षा में सम्मिलित नहीं किया जा सकता। कुछ छात्राओं के दस्तावेज अपूर्ण है,जिस कारण इन छात्राओं को परीक्षा में नहीं बैठ पा रही है। 

यह मामला काफी गंभीर हैं की विवेकानंद पैरा मेडिकल कॉलेज में छात्रायें पिछले तीन वर्ष से अध्ययन रत है फिर इनके साथ यह छलावा किसी गंभीर वित्तीय अनियमितताओं की ओर इशारा करती है। मामले की जांच अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को सौंपी गई है। छात्राओं के साथ हो रहें छलावा की असलियत जांच में उजागर होने की आश लगायी जा रही हैं।

हड़ताल का टेंट हटाने से भड़का पटवारी, कलेक्टर कार्यालय घेराव की दी चेतावनी, 4 पटवारी निलंबित


अनूपपुर

जिले में 12 फरवरी 2026 से जारी पटवारियों की अनिश्चितकालीन कलमबंद हड़ताल मंगलवार को और उग्र हो गई। कोतमा, अनूपपुर, जैतहरी एवं पुष्पराजगढ़ तहसीलों के पटवारियों द्वारा 10 सूत्रीय मांगों को लेकर शुरू किया गया आंदोलन अब प्रशासन और पटवारी संघ के बीच टकराव की स्थिति में पहुंच गया है। मंगलवार को जिला प्रशासन द्वारा धरना स्थल पर लगाया गया टेंट हटाए जाने के बाद आंदोलन ने नया मोड़ ले लिया।

पटवारी संघ पहले ही सशर्त सामूहिक इस्तीफा तहसीलदार को सौंप चुका है। संघ का कहना है कि समस्याओं के समाधान के बजाय हड़ताल समाप्त कराने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। व्यक्तिगत नोटिस जारी करने, सेवा समाप्ति और अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी से कर्मचारियों का मनोबल तोड़ा जा रहा है।

जिला अध्यक्ष चेतन सिंह मरावी ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया, बल्कि शांतिपूर्ण धरना दे रहे कर्मचारियों का टेंट उखाड़कर आंदोलन को कमजोर करने का प्रयास किया। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताते हुए चेतावनी दी कि यदि शीघ्र सकारात्मक एवं सम्मानजनक निर्णय नहीं लिया गया तो बुधवार को जिले के समस्त पटवारी एवं प्रदेश स्तर के पदाधिकारी अनूपपुर पहुंचकर जिला कलेक्टर कार्यालय का घेराव करेंगे और व्यापक धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।

हड़ताल के चलते नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, नक्शा तरमीम, गिरदावरी, जाति प्रमाण पत्र, विभिन्न प्रकरणों की जांच प्रतिवेदन सहित अनेक राजस्व कार्य प्रभावित हो रहे हैं। इससे आमजन को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। संघ ने स्पष्ट किया है कि 10 सूत्रीय मांगों के निराकरण तक आंदोलन जारी रहेगा और आवश्यकता पड़ने पर उग्र कदम भी उठाए जाएंगे।

*एसडीएम ने 4 पटवारियों को किया निलंबित*

अनूपपुर जिले में जारी पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के बीच प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए चार हल्का पटवारियों को निलंबित कर दिया है। अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) अनूपपुर द्वारा 24 फरवरी 2026 को जारी अलग-अलग आदेशों में हल्का लतार के मिथलेश शर्मा (हल्का नंबर 54), हल्का बरबसपुर के अजय कुमार पंकज (हल्का नंबर 31), हल्का दुलहरा के शैलेंद्र द्विवेदी (हल्का नंबर 19) तथा हल्का कोंसा की वर्षा लहरे (हल्का नंबर 22) के विरुद्ध कार्रवाई की गई है।

संबंधित पटवारी 9 फरवरी 2026 से अपने मुख्यालय पर अनधिकृत रूप से अनुपस्थित पाए गए। उनके हल्का अंतर्गत ग्रामों में फार्म रजिस्ट्री एवं रबी गिरदावरी कार्यों की प्रगति अत्यंत कम पाई गई, जो कर्तव्यों के प्रति घोर लापरवाही एवं स्वेच्छाचारिता को दर्शाता है। माध्यमिक शिक्षा मंडल मध्यप्रदेश, भोपाल ने कलेक्टर अनूपपुर को पत्र जारी कर स्पष्ट किया है कि 25 फरवरी 2026 तक बोर्ड परीक्षाओं में कलेक्टर प्रतिनिधि के रूप में ड्यूटी का निर्वहन सुनिश्चित किया जाए, ताकि परीक्षा कार्य में किसी प्रकार का व्यवधान न हो। मंडल परीक्षाएं 7 मार्च 2026 तक आयोजित की जानी हैं। प्रशासनिक सख्ती के बाद जिले में हड़ताल को लेकर स्थिति और गरमा गई है।


चिकित्सको ने नर्सिंग अधिकारी की कार्यशैली पर उठाए गंभीर सवाल, सिविल सर्जन को सौपा ज्ञापन


शहडोल

जिला चिकित्सालय शहडोल के मेटरनिटी विंग में कार्यप्रणाली को लेकर विवाद की स्थिति बन गई है। गायनिक विभाग के समस्त चिकित्सकों ने मेटरनिटी ओटी में पदस्थ एक नर्सिंग अधिकारी की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए सिविल सर्जन को सामूहिक ज्ञापन सौंपा है। डॉक्टरों ने संबंधित नर्स को मेटरनिटी ओटी से हटाकर अन्य वार्ड या विभाग में पदस्थ करने की मांग की है।

सिविल सर्जन, को दिए गए ज्ञापन में चिकित्सकों ने उल्लेख किया है कि नर्सिंग ऑफिसर रश्मि राव की ड्यूटी मेटरनिटी ओटी में लगाई गई है, लेकिन उनके द्वारा ओटी के कार्यों में अपेक्षित रुचि नहीं ली जा रही है। विशेष रूप से ऑपरेशन के दौरान केस असिस्ट करने में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया गया है। ज्ञापन में कहा गया है कि कार्यकुशलता और व्यवहार में कमी स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है, जिससे ऑपरेशन के दौरान अनावश्यक जटिलताएं उत्पन्न हो रही हैं।

चिकित्सकों का आरोप है कि सामान्य मामलों में भी गंभीर परिस्थितियां निर्मित हो जाती हैं और मरीज की स्थिति बिगड़ने का खतरा बढ़ जाता है। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि भविष्य में इस प्रकार की किसी जटिलता की स्थिति में उपस्थित चिकित्सक एवं नर्सिंग अधिकारी जिम्मेदार नहीं होंगे। इसके साथ ही यह भी कहा गया है कि संबंधित नर्स द्वारा कार्य में रुचि न लेने के कारण अन्य नर्सिंग अधिकारियों पर अतिरिक्त कार्यभार पड़ रहा है।ज्ञापन में मेटरनिटी विंग के समस्त चिकित्सकों के हस्ताक्षर हैं। डॉक्टरों ने प्रशासन से शीघ्र आवश्यक कार्यवाही करते हुए मरीज हित में उचित निर्णय लेने की मांग की है। अब देखना होगा कि अस्पताल प्रबंधन इस मामले में क्या कदम उठाता है।

इस संबंध में जब सिविल सर्जन डॉ. शिल्पी सराफ से बात की गई तो उन्होंने बताया कि अस्पताल में पूरे स्टाफ का रोटेशन किया जा रहा है। ड्यूटी लगाने और हटाने का कार्य अस्पताल प्रबंधन के अधिकार क्षेत्र में आता है। हालांकि वर्तमान में संबंधित अधिकारी अवकाश पर हैं।

उल्लेखनीय है कि बीती माह पहले सर्जरी ओटी से संबंधित उक्त नर्स की ड्यूटी बदले जाने के बाद मामला तूल पकड़ गया था। ओटी के चार चिकित्सकों और वही नर्स ने मिलकर विरोध किया और सवाल उठाया कि उसे वहां से क्यों हटाया गया। इस निर्णय को लेकर अस्पताल परिसर में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया और मामला शिकायतों तक पहुंच गया। बताया जाता है कि इस संबंध में कई स्तरों पर लिखित शिकायतें की गईं, जिसके बाद प्रकरण की जांच वर्तमान में सीएमएचओ कार्यालय में जारी है।

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