दबंग पब्लिक प्रवक्ता

जनता के बीच नेता नहीं, सेवक की पहचान बना चुके हैं महाबल मिश्रा, द्वारका से पार्षद, विधायक से सांसद तक का सफर

*जनसेवा व विकास को बनाया अपनी राजनीति का आधार*


 *न्यू दिल्ली से पत्रकार ऊषा माहना*

नई दिल्ली

राजनीति में कई चेहरे आते हैं और चले जाते हैं, लेकिन कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं जो अपने कार्यों और जनता से सीधे जुड़ाव के कारण लोगों के दिलों में अपनी अलग जगह बना लेते हैं। महाबल मिश्रा भी ऐसे ही जनप्रतिनिधियों में शामिल हैं, जिन्होंने द्वारका से पार्षद के रूप में अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू कर विधायक और फिर सांसद तक का सफर तय किया। लंबे राजनीतिक अनुभव के बावजूद जनता के बीच उनकी पहचान आज भी एक जनसेवक और जमीन से जुड़े नेता के रूप में बनी हुई है।

*जनता की समस्याओं को समझना और समाधान के लिए प्रयास करना प्राथमिकता*

महाबल मिश्रा का राजनीतिक जीवन जनहित के मुद्दों से जुड़ा रहा है। क्षेत्र की मूलभूत सुविधाओं, विकास कार्यों और आम जनता की समस्याओं को लेकर वे लगातार सक्रिय रहे हैं। उनके समर्थकों का कहना है कि जनता के बीच रहकर उनकी समस्याएं सुनना और जरूरत के समय सहायता के लिए आगे आना उनकी कार्यशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।

विधायक के रूप में भी उन्होंने अपने क्षेत्र की जनता से जुड़े अनेक मुद्दों को प्रमुखता से उठाया और विकास कार्यों में अपनी भूमिका निभाई। यही कारण है कि क्षेत्र के लोगों के बीच उन्हें केवल राजनीतिक प्रतिनिधि के तौर पर नहीं, बल्कि सुख-दुख में साथ खड़े रहने वाले व्यक्ति के रूप में देखा जाता है।

*पार्षद से सांसद तक—लंबा राजनीतिक अनुभव*

महाबल मिश्रा ने अपने राजनीतिक सफर में स्थानीय स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक की जिम्मेदारियां निभाई हैं। पार्षद के रूप में जमीनी राजनीति को करीब से समझने के बाद विधायक और सांसद के रूप में उन्होंने व्यापक स्तर पर जनता का प्रतिनिधित्व किया। लंबे राजनीतिक अनुभव ने उन्हें क्षेत्रीय समस्याओं के साथ-साथ दिल्ली की राजनीति की गहरी समझ भी दी है।

राजनीतिक मामलों के जानकार और अनुभवी नेता के रूप में भी महाबल मिश्रा की अपनी पहचान है। वे जनता की आवश्यकताओं और क्षेत्र के विकास से जुड़े विषयों को समझने तथा उन्हें उचित मंच तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं।

*सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों में भी सक्रिय*

राजनीति के साथ-साथ महाबल मिश्रा सामाजिक एवं धार्मिक गतिविधियों से भी जुड़े रहे हैं। समाज सेवा के क्षेत्र में किए गए कार्यों के लिए विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं द्वारा उन्हें कई बार सम्मानित किया जा चुका है।

धर्म और अध्यात्म के प्रति उनकी गहरी आस्था है। अपने निवास स्थान पर वे समय-समय पर धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन भी करते हैं, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं।

*सरल व्यवहार और सकारात्मक सोच बनी पहचान*

महाबल मिश्रा की पहचान उनके सरल व्यवहार, सकारात्मक सोच और जनता के साथ सीधे संवाद के कारण भी है। उनका मानना है कि जनप्रतिनिधि का वास्तविक दायित्व केवल चुनाव जीतना नहीं, बल्कि जनता के विश्वास पर खरा उतरना और जरूरत के समय उनके साथ खड़ा रहना है।

यही वजह है कि उनके समर्थक उन्हें “नेता से अधिक जनता का सेवक” कहना पसंद करते हैं। पश्चिमी दिल्ली के विकास में उनकी राजनीतिक एवं सामाजिक भूमिका को उनके समर्थक महत्वपूर्ण मानते हैं।

*जनता के विश्वास को बनाए रखना सबसे बड़ी उपलब्धि*

महाबल मिश्रा का राजनीतिक सफर इस बात का उदाहरण है कि लंबे समय तक जनता के बीच सक्रिय रहकर ही जनप्रतिनिधि अपनी स्थायी पहचान बना सकता है। पार्षद से विधायक और फिर सांसद तक पहुंचने के बाद भी जनता से उनका जुड़ाव उनकी राजनीतिक यात्रा की महत्वपूर्ण विशेषता माना जाता है।

जनता के बीच लोकप्रियता, सामाजिक सरोकार और जनसेवा की भावना ही महाबल मिश्रा की पहचान बन चुकी है। उनके समर्थक उनके उत्तम स्वास्थ्य, सुखद जीवन और दीर्घायु की कामना करते हैं।

 मां नर्मदा के दरबार में पहुंचे जगद्गुरु शंकराचार्य, विधिवत पूजन कर लिया आशीर्वाद


अनूपपुर

मां नर्मदा की उद्गम स्थली अमरकंटक में आध्यात्मिक वातावरण उस समय और अधिक गरिमामय हो उठा, जब द्वारका शारदा पीठाधीश्वर अनंत विभूषित जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती महाराज ने मां नर्मदा मंदिर पहुंचकर विधिवत दर्शन-पूजन किया। जगद्गुरु के मंदिर पहुंचने पर पुजारीगण एवं सेवायतों द्वारा परंपरागत रूप से उनका विशेष सम्मान किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मां नर्मदा का विशेष पूजन-वाचन संपन्न हुआ। इस दौरान मंदिर परिसर श्रद्धा और भक्ति के भाव से अभिभूत नजर आया।

जगद्गुरु शंकराचार्य ने मां नर्मदा के पावन उद्गम का दर्शन कर पूजा-अर्चना की और मां नर्मदा से लोककल्याण की कामना करते हुए आशीर्वाद प्राप्त किया। उनके सान्निध्य में संपन्न धार्मिक अनुष्ठान ने अमरकंटक की आध्यात्मिक गरिमा को और अधिक व्यापकता प्रदान की। दर्शन-पूजन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं भक्तगण उपस्थित रहे। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती महाराज के साथ उनके भक्तगण एवं श्रद्धालु मौजूद रहे। 

नर्मदा मंदिर में पूजन-अर्चन के पश्चात जगद्गुरु शंकराचार्य श्री मार्कंडेय आश्रम पहुंचे। यहां आश्रम के आचार्य महामंडलेश्वर ब्रह्मऋषि स्वामी रामकृष्णानंद महाराज के शिष्यों ने श्रद्धापूर्वक उनका स्वागत किया। आश्रम परिसर में वैदिक परंपरानुसार पादुका पूजन किया गया। श्रद्धालुओं ने पूरी आस्था के साथ पादुकाओं का पूजन कर संतों का आशीर्वाद प्राप्त किया। मां नर्मदा के पावन दर्शन से लेकर श्री मार्कंडेय आश्रम में पादुका पूजन तक पूरा आयोजन सनातन संस्कृति और संत परंपरा की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत करता रहा है। एक ओर नर्मदा मंदिर में वैदिक मंत्रों की गूंज सुनाई दी तो दूसरी ओर आश्रम परिसर में गुरु-भक्ति और श्रद्धा का वातावरण दिखाई दिया।

नारी सशक्तिकरण और प्रेरणादायी है रानी दुर्गावती का जीवन- रंजना चितले

*एमसीयू में वीरांगना रानी दुर्गावती की जयंती मनाई गई*


भोपाल

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के एसटी/एससी सेल द्वारा लता मंगेशकर सभागार में रानी दुर्गावती जयंती का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि जनजातीय विशेषज्ञ रंजना चितले ने कहा कि रानी दुर्गावती का जीवन महिला सशक्तिकरण की अनुपम मिशाल है,उन्होंने कभी भी अपनी अस्मिता, अस्तित्व और स्व से समझौता नहीं किया।

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इसके बाद कार्यक्रम संयोजक डॉ गजेंद्र सिंह अवास्या ने मुख्य अतिथि रंजना चितले को पुस्तक भेंटकर सम्मानित किया।

रंजना चितले ने अपने संबोधन में रानी दुर्गावती के जीवन और उनके व्यक्तित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि रानी दुर्गावती गोंडवाना की वीर और साहसी शासिका थीं, जिन्होंने अपने जीवन में स्वतंत्रता, स्वराज और नारी सशक्तिकरण का उदाहरण प्रस्तुत किया। पति की मृत्यु के बाद रानी दुर्गावती ने राज्य की बागडोर संभाली और कुशलता से शासन किया। उन्होंने अपने राज्य की स्वतंत्रता और सम्मान की रक्षा के लिए मुगल सम्राट अकबर की सेना के विरुद्ध भी संघर्ष किया।

रंजना चितले ने कहा कि रानी दुर्गावती का जीवन साहस, स्वाभिमान और संघर्ष की प्रेरणा देता है। उन्होंने अपने संबोधन में जनजातीय समाज की भूमिका पर भी प्रकाश डालते हुए बताया कि जनजातीय समाज और जनजातीय सेनानियों ने स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने विद्यार्थियों से जनजातीय नायकों और सेनानियों के इतिहास तथा उनके योगदान के बारे में जानकारी प्राप्त करने और समाज में उनके प्रति जागरूकता फैलाने का अनुरोध किया।

समारोह में डॉ रामदीन त्यागी, डॉ लोकेंद्र सिंह राजपूत, डॉ अरुण खोबरे, डॉ सूर्य प्रकाश,श्री मनोज धुर्वे, डॉ तुषार भोंसले, सहित अन्य शिक्षक,कर्मचारी, और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।कार्यक्रम के अंत में कार्यक्रम संयोजक डॉ गजेंद्र सिंह अवास्या ने आभार प्रदर्शन के साथ कार्यक्रम का समापन किया।

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