दबंग पब्लिक प्रवक्ता

कलेक्टर के तबादले का झूठा श्रेय लेने वाले 'कूप मण्डूक', प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत हुआ ट्रांसफर- विनय सिंह


अनूपपुर

जिले के कलेक्टर हर्षल पंचोली के स्थानांतरण को लेकर स्थानीय राजनीति गरमा गई है। इस मामले में एडवोकेट विनय सिंह ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर उन राजनीतिक तत्वों पर कड़ा प्रहार किया है, जो इस तबादले का झूठा श्रेय लेकर सस्ती लोकप्रियता हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि कलेक्टर के स्थानांतरण का मिथ्यापूर्ण श्रेय लेने वाली ताकतें ओछी बयानबाजी बंद करें।

विनय सिंह ने विज्ञप्ति में बताया कि जैसे ही कलेक्टर हर्षल पंचोली के स्थानांतरण का आदेश भोपाल से जारी हुआ, वैसे ही जिले के कुछ तथाकथित नेता और अवांछनीय तत्व आतिशबाजी कर यह दावा करने लगे कि उन्होंने मुख्यमंत्री से कहकर यह तबादला करवाया है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग इसलिए बौखलाए हुए थे क्योंकि कलेक्टर उनकी अवैध और अनुचित बातों को अनसुना कर देते थे।

विज्ञप्ति के माध्यम से स्पष्ट किया गया कि कलेक्टर, कमिश्नर और पुलिस अधीक्षक जैसे उच्च पदों का स्थानांतरण पूरी तरह से प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है। मुख्यमंत्री अधिकारियों के कार्यकाल को दृष्टिगत रखकर ही कोई निर्णय लेते हैं। हर्षल पंचोली ने अनूपपुर में लगभग दो वर्ष का अपना कार्यकाल पूरा कर लिया था, जिसके बाद यह सामान्य प्रशासनिक फेरबदल हुआ है।

विनय सिंह ने स्थानीय प्रशासन और शासन का बचाव करते हुए कहा कि अनूपपुर जिले के सम्मानित और वरिष्ठ नेताओं, जैसे कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त रामलाल रौतेल, मंत्री दिलीप जायसवाल, सांसद हिमाद्री सिंह और जिला भाजपा अध्यक्ष हीरा सिंह ने इस ट्रांसफर पर कोई अनुचित प्रतिक्रिया जाहिर नहीं की है। केवल कुछ छुटभैये और स्वयंभू नेता ही शासन की मंशा के विपरीत बयानबाजी कर रहे हैं। उन्होंने ऐसे लोगों को 'कूप मण्डूक' (कुएं का मेंढक) बताते हुए कहा कि इन्हें आई.ए.एस. अधिकारियों के स्थानांतरण की शासकीय प्रक्रिया का कोई ज्ञान ही नहीं है। आई.ए.एस. अधिकारी अपने काम और गरिमा से अपनी पहचान बनाते हैं और भविष्य में पदोन्नति पाकर कमिश्नर, प्रमुख सचिव या मुख्य सचिव जैसे शीर्ष पदों पर पहुंचते हैं।

श्री बागेश्वर कसौधन वैश्य समाज मनाएगा रजत जयंती पूजन महोत्सव, छात्रों व वरिष्ठजनों को किया जाएगा सम्मानित 


                      

शहडोल। 

श्री बागेश्वर कसौधन वैश्य समाज संभाग शहडोल, जिला-शहडोल, म.प्र. द्वारा इस वर्ष सावन माह में समाज के आराध्य देव बाबा बागेश्वर की पूजा, रुद्राभिषेक और जलाभिषेक का भव्य आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन समाज के लिए बेहद खास है, क्योंकि इस वर्ष समाज अपनी स्थापना का 25वां वर्ष यानी 'रजत जयंती पूजन महोत्सव' मनाने जा रहा है। कार्यक्रम का आयोजन रविवार, 2 अगस्त 2026 को पांडव नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में सुनिश्चित किया गया है। 

महोत्सव को भव्य और सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए समाज के अध्यक्ष मनोज गुप्ता, सचिव बृजेंद्र गुप्ता और कोषाध्यक्ष सचिन गुप्ता सहित पूरी आयोजन समिति तैयारियों में जुटी हुई है। समिति ने सभी स्वजातीय बंधुओं से सपरिवार शामिल होने की अपील की है। साथ ही, समाज के लोगों से अनुरोध किया गया है कि वे उस दिन अपने व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रखकर पूजा और शोभा यात्रा में सहभागिता निभाएं। 

धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रम, रजत जयंती महोत्सव के तहत रविवार को सुबह से लेकर शाम तक कई चरणों में कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की गई है, जो इस प्रकार है, प्रातः 8:30 बजे से धार्मिक अनुष्ठान और बाबा बागेश्वर का पूजन शुरू होगा। प्रातः 9:30 बजे से 10:30 बजे तक उपस्थित श्रद्धालुओं के लिए स्वल्पाहार की व्यवस्था रहेगी। दोपहर 12:00 बजे से 1:00 बजे तक भव्य शोभा यात्रा निकाली जाएगी, जिसके बाद विसर्जन कार्यक्रम होगा। 

दोपहर 1:30 बजे से 3:00 बजे तक महाप्रसाद (भोजन) का वितरण किया जाएगा। दोपहर 3:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक समाज के बच्चों और सदस्यों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जाएंगी। शाम 4:00 बजे से 5:00 बजे तक प्रतिभावान छात्रों और समाज के वरिष्ठ बुजुर्गों को सम्मानित किया जाएगा। शाम 5:30 बजे से 6:30 बजे तक हाई टी के साथ कार्यक्रम का समापन होगा। इस गरिमामयी आयोजन को लेकर कसौधन वैश्य समाज में भारी उत्साह देखा जा रहा है।

मुंशी प्रेमचंद का वास्तविक नाम धनपत राय श्रीवास्तव था। उनका जन्म 31 जुलाई 1880 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी के पास लमही गाँव में हुआ था। वे हिंदी और उर्दू के महान कथाकार एवं उपन्यासकार थे।

प्रेमचंद को "उपन्यास सम्राट" के नाम से जाना जाता है। उन्होंने समाज की गरीबी, शोषण, अन्याय और किसानों की समस्याओं को अपनी रचनाओं में प्रमुखता से स्थान दिया। उनकी भाषा सरल, सहज और प्रभावशाली थी।

गोदान, गबन, निर्मला, कर्मभूमि और रंगभूमि उनके प्रसिद्ध उपन्यास हैं।ईदगाह, कफ़न, पूस की रात, नमक का दरोगा उनकी चर्चित कहानियाँ हैं। उनकी रचनाएँ आज भी समाज को सही दिशा और प्रेरणा देती हैं।

प्रेमचंद ने साहित्य को जनसाधारण के जीवन से जोड़ा। वे सामाजिक सुधार और मानवता के समर्थक थे। उन्होंने हिंदी साहित्य को नई ऊँचाइयाँ प्रदान कीं। उनकी कहानियाँ विद्यालयों और विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जाती हैं। उनका निधन 8 अक्टूबर 1936 को वाराणसी में हुआ।मुंशी प्रेमचंद भारतीय साहित्य के अमर लेखक हैं और उनकी रचनाएँ सदैव प्रेरणा देती रहेंगी।

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