दबंग पब्लिक प्रवक्ता

शिक्षा से दूर बच्चे, नौनिहालों से कराया जा रहा टीका-चंदन,  मंदिर परिसर में संदिग्ध लोगों की सक्रियता पर उठे सवाल


अनूपपुर

पवित्र नगरी अमरकंटक स्थित मां नर्मदा मंदिर परिसर, कोटितीर्थ कुंड एवं रामघाट क्षेत्र में इन दिनों एक चिंताजनक स्थिति देखने को मिल रही है। यहां मासूम बच्चों से बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के माथे पर चंदन-टीका लगवाकर उनसे राशि लेने का कार्य कराया जा रहा है। बच्चों के हाथों में चंदन के डिब्बे, ब्रश तथा 'नर्मदे हर', 'ॐ' और 'महाकाल' अंकित सांचे दिखाई देते हैं। श्रद्धालुओं को रोककर उनके माथे पर टीका लगाया जाता है और इसके बाद उनसे स्वेच्छा अथवा अपेक्षित रूप से धनराशि ली जाती है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जिन नन्हे हाथों में इस उम्र में किताबें, कॉपियां और स्कूल का बस्ता होना चाहिए, वे हाथ दिनभर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के बीच टीका-चंदन लगाने के कार्य में व्यस्त नजर आते हैं। उनका आरोप है कि कुछ अभिभावक तात्कालिक आर्थिक लाभ के लालच में बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेजने के बजाय इस कार्य में लगा देते हैं। परिणामस्वरूप उनकी शिक्षा प्रभावित हो रही है और उनका भविष्य भी संकट में पड़ता दिखाई दे रहा है।

जानकारी के अनुसार, इस कार्य से प्रतिदिन लगभग 200 से 300 रुपये तक की आय हो जाती है। इसी कारण कई बच्चे सुबह से शाम तक मंदिर परिसर में इसी गतिविधि में लगे रहते हैं। सामाजिक रूप से यह स्थिति न केवल बाल शिक्षा के अधिकार पर प्रश्नचिह्न लगाती है, बल्कि बाल संरक्षण और बाल श्रम जैसे गंभीर मुद्दों की ओर भी संकेत करती है।

स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि मंदिर परिसर में कुछ बाहरी एवं संदिग्ध व्यक्ति भी इसी प्रकार की गतिविधियों में संलिप्त हैं। इनकी पहचान, सत्यापन और उद्देश्य को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। श्रद्धालुओं की बढ़ती आवाजाही को देखते हुए यह स्थिति सुरक्षा की दृष्टि से भी चिंता का विषय मानी जा रही है।

जिस आरोप पर गई सरपंची, उसी मामले पर कमिश्नर ने सचिव को किया दोष मुक्त, जिला पंचायत की दोहरी कार्रवाई कटघरे में

*पूर्व सरपंच को न्याय की जगी आस*


उमरिया

जिले की पाली जनपद पंचायत की आदिवासी ग्राम पंचायत गिजरी में अमृत सरोवर निर्माण में विलंबित भुगतान को लेकर जिला पंचायत की पूरी प्रक्रिया अब कठघरे में है। आयुक्त शहडोल के फैसले ने जिला पंचायत की कार्रवाई की मंशा पर ही सवाल* खड़े कर दिए हैं।

बताया जाता है कि मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत उमरिया ने अमृत सरोवर में भुगतान न करने के मामले में पहले सचिव सुरेन्द्र शुक्ला को निलंबित किया। फिर इतने में भी काम नहीं बना तो सरपंच नन्हू सिंह को भी बलि का बकरा बना दिया। सचिव-सरपंच पर समान रूप से भुगतान न करने के आरोप थे। 

जिला पंचायत उमरिया की इस कार्रवाई से असंतुष्ट सचिव ने आयुक्त शहडोल में अपील कर न्याय की फरियाद लगाई। जिस पर विचारण करते हुए आयुक्त ने जांच प्रतिवेदन और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर पाया कि जिला पंचायत की कार्यवाही विधि संगत नहीं है और सचिव को दोषमुक्त कर निलंबन से बहाल कर दिया।

आयुक्त ने अपने पारित फैसले में पाया कि किसी भी शासकीय निर्माण कार्य के भुगतान के लिये तय मापदंड में उपयंत्री द्वारा कार्य का मूल्यांकन के पश्चात ही भुगतान किये जाने का प्रावधान है। जब संबंधित उपयंत्री ने मूल्यांकन ही नहीं किया तो भुगतान की कार्यवाही नहीं हो सकी।  

आयुक्त ने जनपद पंचायत पाली के खण्ड पंचायत अधिकारी के जांच प्रतिवेदन का आधार लेते हुए कहा कि समय पर उपयंत्री द्वारा कार्य का मूल्यांकन नहीं करने के लिए सचिव-सरपंच को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

जांच प्रतिवेदन में यह बात सामने आई कि सचिव ने उपयंत्री से मूल्यांकन की मांग करने के बाद भी उपयंत्री ने मूल्यांकन क्यों नहीं किया। साथ ही जिला पंचायत में शिकायत के बाद भी मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने मामले में संज्ञान लेते हुए उपयंत्री पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की। उसी समय ग्राम पंचायत गिजरी के सरपंच नन्दू सिंह को पद से मुक्त कर दिया गया था, आयुक्त शहडोल के न्यायालय में फरियाद लगाकर जिला पंचायत उमरिया के आदेश को रद्द करने की मांग की है

सड़क किनारे मिला रेत का अवैध भंडारण, प्रशासन ने रेत किया नष्ट, कीचड़ में फंसा मिला संदिग्ध हाइवा


शहडोल

जैतपुर थाना प्रशासन की संयुक्त टीम ने सड़क किनारे और खुले स्थानों से करीब 210 घन मीटर अवैध रेत का भंडारण पकड़कर जेसीबी से नष्ट कर दिया, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतनी बड़ी मात्रा में जमा रेत आखिर स्थानीय पुलिस को पहले क्यों नहीं दिखाई दी।

खनिज, राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने जैतपुर क्षेत्र में कार्रवाई की। ग्राम गलहथा के डोंगरी टोला में साबीर खान के घर के पास 30 घन मीटर, कामता शासकीय महाविद्यालय के पास 50 घन मीटर, झिरिया टोला की शासकीय भूमि पर 100 घन मीटर और ग्राम कोल्हुआ में 30 घन मीटर अवैध रेत का भंडारण मिला। सभी स्थानों पर जेसीबी से रेत का विनष्टीकरण कराया गया।

कार्रवाई के दौरान गलहता में बिना नंबर का एक संदिग्ध हाइवा भी कीचड़ में फंसा मिला। चालक मौके से गायब था और वाहन खराब हालत में मिला। प्रशासन ने वाहन मालिक की तलाश शुरू कर दी है। पहचान होने पर अलग से प्रकरण दर्ज किया जाएगा।

ग्रामीणों का आरोप है कि कुनुक नदी सहित आसपास के क्षेत्रों से लंबे समय से हाइवा वाहनों के जरिए अवैध रेत का खनन और परिवहन किया जा रहा था। उनका कहना है कि हाल ही में सोहागपुर पुलिस द्वारा पकड़े गए एक हाइवा के चालक ने पूछताछ में बताया था कि रेत कुनुक नदी से जैतपुर के एक "भाईजान" की जेसीबी से लोड की गई थी। कार्रवाई एसडीएम जैतपुर, सहायक खनिज अधिकारी और थाना प्रभारी जैतपुर के नेतृत्व में हुई। प्रशासन का कहना है कि अवैध खनन, परिवहन और भंडारण के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। 

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