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दो घटनाओं में 3 की मौत, 2 घायल, कार अनियंत्रित होकर खेत मे घुसी, बाइक हुई दुर्घटना
अनूपपुर
जिले के राजेंद्रग्राम थाना क्षेत्र मे दो अलग-अलग सड़क हादसे में 3 लोगों की मृत्यु हो गई हैं। जबकि 2 घायलों का इलाज जारी हैं।
पहली घटना राजेंद्रग्राम थाना क्षेत्र के ग्राम मौहारी परसेलखर्द निवासी 28 वर्षीय राम सिंह पुत्र ढिमरा किरर जंगल में मोटरसाइकिल अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई जिससे वह घटनास्थल में ही दम तोड़ दिया। कुछ लोगो देखकर सूचना पर मौके पर पुलिस ने पंचनामा बना पोस्टमार्डम उपरांत शव परिजनों को सौप कर जांच की कार्यवाई प्रारंभ कर दी।
दूसरी घटना राजेंद्रग्राम थाना क्षेत्र में कार सवार 4 लोग राजेंद्रग्राम से अपने गृह ग्राम बंहनी जा रहें थे। तभी कारीमाट जंगल मोड में तिवारी टोला के समीप स्थित तीखे मोड़ पर कार चालक वाहन से नियंत्रण खो दिया जिससे कार सड़क छोड़कर सीधे खेत में जा घुसी। हादसा इतना भीषण था कि एक व्यक्ति की मौके पर ही मृत्यु हो गई, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए है। जिसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पुष्पराजगढ़ पहुंचाया गया, जहां उपचार के दौरान एक अन्य घायल ने भी दम तोड़ दिया है। वर्तमान में दो घायलों का इलाज जारी हैं। मृतको में 29 वर्षीय नर्मदा प्रसाद कनौजिया एवं 25 वर्षीय सोनू कनौजिया दोनो के सगे भाई थे।
थाना प्रभारी राजेंद्रग्राम पीसी कोल ने बताया कि सड़क दुघर्टना में 3 की मृत्यु हो गई हैं। जिसमे एक बाईक चालक किरर के जंगलमें अनियंत्रित होकर गिरा और मैके पर मौत हो गई। दूसरी कार अनियंत्रित होकर खेत में घुसी जिसमें दो की मौत हुई हैं। जांच की जा रहीं हैं।
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ग्राम पंचायत में पानी के टैंकर का हो रहा है दुरुपयोग, जनता प्यासी, भवन निर्माण में पानी की सप्लाई, नहीं कट रही रसीद
अनूपपुर
पंचायत का टैंकर मालिक विहीन, बिना रसीद के हो रहा प्रयोग आम ग्रामीणों को नहीं मिल रहा लाभ, पंचायत को हो रहा आर्थिक नुकसान प्रशासन के खिलाफ जनता का बढ़ता आक्रोश, लोगो ने जांच की मांग की है।
ग्राम पंचायत बेलिया बड़ी में पंचायत के टैंकर का दुरुपयोग थमने का नाम नहीं ले रहा है। खास बात यह है कि इस टैंकर का कोई मालिक या जिम्मेदार व्यक्ति नहीं है, जिसके चलते यह सार्वजनिक संपत्ति मनमाने ढंग से इस्तेमाल हो रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह सिलसिला पिछले कई वर्षों से चला आ रहा है। आरोप है कि टैंकर का उपयोग करने पर न तो पंचायत की ओर से कोई रसीद काटी जाती है और न ही टैंकर के रखरखाव या देखभाल पर कोई ध्यान दिया जाता है। यानी पंचायत का यह टैंकर न तो आय का साधन बन पा रहा है और न ही उचित रूप से सुरक्षित है।
ग्रामीणों का कहना है कि आम जनता को पानी नही मिल रहा है और बिना किसी पारदर्शिता के टैंकर को निजी भवन निर्माण कार्यों में लगाया जा रहा है, जिससे पंचायत को सालाना कई हजार का नुकसान हो रहा है। इस मामले को लेकर गुस्साए ग्रामीणों ने प्रशासन से यह मांग की है कि इस "मालिक विहीन टैंकर" की जांच कराई जाए, दुरुपयोग को रोका जाए और पिछले वर्षों के हिसाब-किताब की गहन छानबीन की जाए। सूत्रों का कहना है कि ग्राम पंचायत का पुराना टैंकर भी ग्राम पंचायत में नजर नहीं आ रही है, इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि शासकीय संपत्तियों का कोई मालिक नहीं है।
*इनका कहना है*
इस पूरे मामले पर ग्राम पंचायत के सरपंच बेलिया बड़ी बब्बू कोल से बात की तो कहां गया कि पंचायत में पानी टैंकर का उपयोग तो होता है, लेकिन रसीद नहीं काटी जाती है, जिससे पंचायत को काफी नुकसान हो रहा है।
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बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान में लगातार बाघ का आतंक, हमले से 2 लोगो की हुई मौत, ग्रामीणों मे दहशत व नाराजगी
उमरिया
विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से सटे क्षेत्रों में बाघों की बढ़ती गतिविधियां लगातार जानलेवा साबित हो रही हैं। पनपथा कोर क्षेत्र के झलवार गांव के समीप शनिवार को बाघ के हमले में एक युवक की मौत हो गई। यह घटना बीते 24 घंटों के भीतर बाघ के हमले से हुई दूसरी मौत है, जिससे आसपास के गांवों में भय और आक्रोश का माहौल बन गया है।
जानकारी के अनुसार मृतक की पहचान कल्याण सिंह (30 वर्ष), पिता रामकृपाल सिंह, निवासी ग्राम झलवार के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि युवक जंगल से लगे क्षेत्र में मौजूद था, तभी घात लगाए बैठे बाघ ने उस पर हमला कर दिया। हमला इतना अचानक और खतरनाक था कि उसे बचने का मौका नहीं मिला और मौके पर ही उसकी मौत हो गई।
गौरतलब है कि इससे एक दिन पहले इसी इलाके में बाघ ने एक 45 वर्षीय महिला पर हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया था। लगातार दो दिनों में हुई इन घटनाओं ने वनांचल के गांवों में चिंता बढ़ा दी है। ग्रामीणों का कहना है कि जंगल से बाहर निकलकर बाघों की बढ़ती आवाजाही अब आम लोगों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है।
घटना के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्र हो गए और वन विभाग के प्रति नाराजगी जताई। उनका आरोप है कि क्षेत्र में लंबे समय से बाघों की सक्रियता बढ़ने के बावजूद सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए। लोगों ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाने, वन कर्मियों की तैनाती मजबूत करने तथा ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
वन विभाग के अधिकारियों ने घटनाओं पर दुख व्यक्त करते हुए प्रभावित परिवारों को नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराने और क्षेत्र में सतर्कता बढ़ाने की बात कही है। वहीं लगातार हो रहे हमलों ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष को रोकने के लिए ठोस और प्रभावी कदम कब उठाए जाएंगे। ग्रामीण फिलहाल भय के साए में जीवन बिताने को मजबूर हैं।
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तेज रफ्तार मोटरसाइकिल ने मारी टक्कर, महिला की हुई मौत, बाइक चालक भी हुआ घायल
शहडोल
जिले के जयसिंहनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत कनाडी खुर्द गांव में तेज रफ्तार का कहर देखने को मिला। सड़क किनारे पैदल जा रही एक महिला को तेज गति से आ रही बाइक ने जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में महिला गंभीर रूप से घायल हो गई, जबकि बाइक चालक भी चोटिल हो गया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को उपचार के लिए अस्पताल भिजवाया।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार मृतक महिला की पहचान धनकी बसोर (40 वर्ष) निवासी करकी के रूप में हुई है। बताया गया कि महिला सड़क किनारे पैदल जा रही थी, तभी तेज रफ्तार बाइक ने उसे अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि महिला सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गई। वहीं बाइक सवार युवक भी दुर्घटना में घायल हो गया। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने तत्काल पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर घायल महिला को अस्पताल पहुंचाया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। बाइक सवार युवक का उपचार अस्पताल में जारी है। पुलिस ने मामला दर्ज कर दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है।
क्षेत्र में इस घटना के बाद लोगों में आक्रोश देखा जा रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि तेज रफ्तार और यातायात नियमों की अनदेखी के कारण लगातार सड़क हादसे हो रहे हैं। जिले में आए दिन दुर्घटनाओं में लोगों की जान जा रही है, लेकिन यातायात नियमों का प्रभावी पालन नहीं कराया जा रहा। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में दोपहिया वाहन चालक बिना हेलमेट के सड़कों पर दौड़ रहे हैं, जबकि कई चार पहिया वाहन चालक भी सीट बेल्ट का उपयोग नहीं कर रहे। वहीं शहडोल-बुढार राष्ट्रीय राजमार्ग-43 पर लगातार हो रहे हादसों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों का आरोप है कि सड़क किनारे खड़े भारी वाहनों और यातायात अव्यवस्थाओं को दूर करने के लिए संबंधित विभाग पर्याप्त कार्रवाई नहीं कर रहा है, जिससे दुर्घटनाओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
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पुताई वाला कॉलेज छात्रा को लेकर हुआ फरार, पुलिस ने दस्तयाब के परिजनों को सौपा
शहडोल
जिले में इंस्टाग्राम पर फर्जी पहचान बनाकर एक शातिर युवक ने जिले के जैतपुर क्षेत्र की 18 वर्षीय फर्स्ट ईयर छात्रा को अपने प्रेमजाल में फंसाकर उसे भगा ले गया। हालांकि जैतपुर पुलिस ने युवती को मुरैना जिले से सकुशल दस्तयाब कर परिजनों के हवाले कर दिया।
ग्वालियर जिले के मोहसान निवासी करण धनक ने इंस्टाग्राम पर करण राजपूत नाम से फर्जी आईडी बनाई थी। युवक लोगों के घरों में पुट्टी-पुताई का काम करता था और आलीशान मकानों में काम के दौरान वहां अपनी फोटो खींचकर सोशल मीडिया डीपी में लगाता था, ताकि खुद को संपन्न और प्रभावशाली दिखा सके। इसी फर्जी चमक-दमक के जरिए उसने जैतपुर की छात्रा से दोस्ती की और धीरे-धीरे उसे अपने झांसे में ले लिया।
बताया गया कि युवक ग्वालियर से ट्रेन के जरिए शहडोल पहुंचा, फिर बस से बुढार और वहां से ऑटो में बैठकर जैतपुर आया, यहां से वह युवती को अपने साथ लेकर फरार हो गया, युवती के अचानक लापता होने पर परिजनों ने 6 जून को जैतपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मुरैना जिले के एक गांव स्थित युवक के मामा के घर से युवती को बरामद कर लिया। हालांकि शहडोल पुलिस को देखकर आरोपी युवक मौके से फरार हो गया, फिलहाल पुलिस आरोपी की तलाश में जुटी है।
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आदित्य हॉस्पीटल के डॉक्टरों ने सड़क दुर्घटना में गर्भवती घायल महिला का प्रसव कराकर माँ व बच्चे को दिया जीवनदान
*नि:शुल्क कराया पूरा इलाज*
अनूपपुर
आदित्य सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल शहडोल ने एक बार फिर चरितार्थ कर दिखाया है। गंभीर सड़क दुर्घटना में घायल गर्भवती महिला और उसके गर्भस्थ शिशु के जीवन पर मंडरा रहे संकट के बीच अस्पताल के चिकित्सकों ने असाधारण संवेदनशीलता, त्वरित निर्णय क्षमता और मानवीय सरोकारों का परिचय देते हुए एक नवजात की जान बचा ली।
अनूपपुर जिले के ग्राम लखेड़ा निवासी भागवती सिंह, पति कमल सिंह, दोपहिया वाहन दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। हादसे में उनके सिर पर गंभीर चोटें आईं, जिसके कारण उनकी स्थिति अत्यंत चिंताजनक हो गई। प्रारंभिक उपचार के बाद उन्हें उच्च चिकित्सा सुविधा के लिए रेफर कर दिया गया था, लेकिन रास्ते में उनकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई। इसी दौरान गर्भ में पल रहे शिशु का जीवन भी संकट में पड़ गया।
परिजनों ने अंतिम उम्मीद के रूप में उन्हें शहडोल स्थित आदित्य सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में भर्ती कराया। यहां पहुंचते ही चिकित्सकों ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए तत्काल विशेषज्ञों की टीम गठित की। मां और शिशु दोनों के जीवन को बचाने की चुनौती के बीच डॉक्टरों ने सूझबूझ और साहस का परिचय देते हुए आपातकालीन सिजेरियन ऑपरेशन का निर्णय लिया।
अस्पताल के विशेषज्ञ चिकित्सकों के अथक प्रयास रंग लाए और सफल शल्य प्रक्रिया के माध्यम से शिशु को सुरक्षित जन्म दिलाया गया। चिकित्सकों के अनुसार नवजात पूरी तरह स्वस्थ है तथा उसकी स्थिति संतोषजनक बनी हुई है। वहीं सिर में गंभीर चोटों के कारण मां का उपचार अभी भी गहन चिकित्सा निगरानी में जारी है और चिकित्सक उन्हें स्वस्थ करने के लिए लगातार प्रयासरत हैं।
आर्थिक रूप से कमजोर परिवार की परिस्थितियों को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन और संचालक डॉ. आदित्य त्रिवेदी ने संपूर्ण उपचार एवं डिलीवरी की प्रक्रिया निःशुल्क कराने का निर्णय लिया। ऐसे समय में जब चिकित्सा सेवाओं को लेकर अक्सर प्रश्न उठते हैं, आदित्य हॉस्पिटल की यह पहल मानवता, करुणा और सामाजिक उत्तरदायित्व का परिचय दिया।
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लोकतंत्र के इतिहास में काला अध्याय, नामांकन निरस्त होने पर प्रेस वार्ता में कांग्रेस का तीखा प्रहार
अनुपपुर
मध्यप्रदेश की राजनीति में उपजे इस अभूतपूर्व संकट ने लोकतांत्रिक मूल्यों की नींव को हिलाकर रख दिया है। कांग्रेस की राज्यसभा प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होना महज एक तकनीकी त्रुटि का मामला नहीं, बल्कि इसे कांग्रेस ने संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर एक ‘सुनियोजित प्रहार’ करार दिया है। एक साफ-सुथरी छवि वाली नेत्री को विवादास्पद कानूनी व्याख्याओं के जाल में फंसाकर चुनावी दौड़ से बाहर करने के बाद, अब कांग्रेस ने ‘संस्थानों’ के बजाय ‘जनता की अदालत’ में आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है
कांग्रेस पार्टी ने इसे लोकतंत्र के इतिहास का ‘काला अध्याय’ बताते हुए देशव्यापी विरोध की रणनीति तैयार की है। पार्टी का स्पष्ट आरोप है कि यह कदम केवल एक प्रत्याशी को रोकने के लिए नहीं, बल्कि विपक्षी दलों को चुनाव प्रक्रिया से बाहर रखने की एक सोची-समझी साजिश है। नामांकन निरस्त करने के आधारों पर तीखी कानूनी आपत्ति जताई है। उमरिया के पूर्व विधायक और जिला प्रभारी अजय सिंह ने पत्रकार वार्ता में कहा कि जिस निजी परिवाद का हवाला दिया गया, उसमें मीनाक्षी नटराजन को ‘प्रतिवादी’ के तौर पर सूचीबद्ध किया गया था, न कि ‘अभियुक्त’ के रूप में।
कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि इसी तरह तुच्छ और विवादित तकनीकी आधारों पर विपक्ष के उम्मीदवारों को चुनावी मैदान से बाहर किया गया, तो भविष्य में निष्पक्ष चुनाव की संभावना समाप्त हो जाएगी। क्या यह कार्रवाई निष्पक्षता को मजबूत करने के लिए थी या विपक्ष की आवाज दबाने के लिए? इस घटनाक्रम ने पूरे देश में बहस छेड़ दी है कि क्या भारत का लोकतंत्र अब स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की अग्निपरीक्षा में खरा उतर पाएगा?
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तहसीलदार पर रिश्वत व प्रताड़ना का आरोप लगाकर पटवारी ने दिया इस्तीफा, आत्मदाह की दी चेतवानी
शहडोल
जिले की जयसिंहनगर तहसील से एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक महकमे में हलचल मचा दी है। जयसिंहनगर तहसील में पदस्थ पटवारी रमेश पटेल ने प्रभारी तहसीलदार सुषमा धुर्वे पर रिश्वत मांगने और मानसिक एवं आर्थिक प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा संभागायुक्त (कमिश्नर) शहडोल को सौंपते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। प्रभारी तहसीलदार ने सारे आरोप निराधार बताए हैं।
पटवारी रमेश पटेल ने मीडिया से चर्चा के दौरान आरोप लगाया कि नव नियुक्त एसडीएम की व्यवस्थाओं के नाम पर प्रभारी तहसीलदार द्वारा उनसे 40 हजार रुपये की मांग की गई थी। उनका कहना है कि दबाव के चलते उन्होंने 5 हजार रुपये नकद तथा 5 हजार रुपये फोन-पे के माध्यम से दिए, लेकिन इसके बाद भी लगातार शेष राशि की मांग की जाती रही। पटवारी का आरोप है कि निर्धारित रकम नहीं देने पर पहले उनका स्थानांतरण कराया गया और बाद में उन्हें निलंबित कर दिया गया। इतना ही नहीं, निलंबन अवधि के दौरान मिलने वाला गुजारा भत्ता भी रोक दिया गया, जिससे उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा।
रमेश पटेल का कहना है कि लंबे समय से हो रही कथित प्रताड़ना और आर्थिक परेशानियों से तंग आकर उन्होंने नौकरी छोड़ने का फैसला लिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि 16 जून तक दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो वह भोपाल स्थित मुख्यमंत्री निवास के सामने आत्मदाह करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
इनका कहना है।
मामले में प्रभारी तहसीलदार सुषमा धुर्वे का कहना है कि पटवारी रमेश पटेल द्वारा लगाए जा रहे सारे आरोप तथ्यहीन और निराधार है। उनका स्थानांतरण प्रशासनिक आवश्यकता की दृष्टि से किया गया था। इस स्थानांतरण के खिलाफ उन्होंने न्यायालय की शरण ली थी, लेकिन वहाँ से भी उनकी याचिका खारिज कर दी गई है। उनके द्वारा लगाए जा रहे सारे आरोप निराधार है।
समाचार 09
वन अधिकार अधिनियम अंतर्गत एक दिवसीय कार्यशाला संपन्न
उमरिया
कमिश्नर शहडोल संभाग श्रीमती सुरभि गुप्ता ने वन अधिकार अधिनियम 2006 के अंतर्गत आयोजित संभाग स्तरीय कार्यशाला का शुभारंभ किया। कमिश्नर ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि वन के संरक्षण में जनजातीय समुदाय के लोगों और वनवासियों का अहम योगदान है। उन्होंने कहा कि वन अधिकार अधिनियम 2006 यह कानून वन क्षेत्रों में रहने वाले जनजातीय समुदाय के लोगों और अन्य पारंपरिक वनवासियों के अधिकारों को मान्यता देने के लिए बनाया गया था।
उन्होंने कहा कि इस अधिनियम के तहत व्यक्तिगत वन अधिकार, सामुदायिक वन अधिकार,लघु वनोपज पर अधिकार जैसे अन्य महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए है, इन अधिकारों के प्रति लोगों को जागरूक करना और उनका अधिकार देना हम सब का दायित्व है जिससे वे सशक्त और जागरूक हो सके। कार्यशाला को सी.सी. एफ. वनवृत्त शहडोल श्री महेंद्र प्रताप सिंह ने भी संबोधित किया। कार्यशाला में वन अधिकार अधिनियम के विशेषज्ञ डॉ. शरद चंद्र लेले ने वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत प्रदत्त अधिकारो के बारे में भी विस्तृत जानकारियो से अवगत कराया एवं उपस्थित अधिकारियों ने अपने अपने प्रश्न भी पूछे जिसका जवाब विशेषज्ञ द्वारा दिया गया।