राष्ट्र की युवा शान नमन है तुमको, हे व्यक्तित्व महान नमन है तुमको, आध्यात्म विज्ञान नमन है तुमको



स्वामी विवेकानंद की जयंती पर गीत 


  *स्वामी विवेकानंद*


राष्ट्र की युवा शान नमन है तुमको।

हे व्यक्तित्व महान नमन है तुमको।


स्वामी तुम हो इन्द्र ज्ञान के 

कहें तुम्हें ज्ञानेंद्र,

तुम्हें विवेकानंद कहें या,

तुमको कहें नरेंद्र।


आध्यात्म विज्ञान नमन है तुमको।

हे व्यक्तित्व महान नमन है तुमको।


आज शिकागो का भाषण 

दुनियां में गूंज रहा है,

कहां खो गये धर्म सनातन 

तुमको ढूंढ रहा है।


अनुष्ठान धर्म के नमन है तुमको,

हे व्यक्तित्व महान नमन है तुमको


सदियां नमन करेंगी तुमको,

युग पूजेंगे तुमको,

भारत के संग विश्व समूचा,

याद करेगा तुमको।


भारत के सम्मान नमन है तुमको।

हे व्यक्तित्व महान नमन है तुमको।


गीतकार अनिल भारद्वाज एडवोकेट हाईकोर्ट ग्वालियर म.प्र.

विश्व हिंदी दिवस में मेघा अग्रवाल को त्रिभाषा अधिवेशन में साहित्य सम्मान से किया सम्मानित


हैदराबाद

नागपूर की सौ. मेघा मनोज अग्रवाल को हैदराबाद में विश्व हिंदी दिवस 10 जनवरी 26 के अवसर पर प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा एवं एस एच एम वी फाउंडेशन द्वारा त्रिभाषी अधिवेशन, कवि सम्मेलन व सम्मान समारोह में  मेघा अग्रवाल को संस्थापक आ. संगम त्रिपाठी जी द्वारा सम्मानित किया गया। 

समारोह के अतिथि डॉ रावी नूतला शशिधर, तेलगु वक्ता आचार्य कसी रेड्डी वेंकट रेड्डी जी पूर्व अध्यक्ष तेलगु विभाग उस्मानिया विश्वविद्यालय, संस्कृत वक्ता चिलकर्मरी लक्ष्मीनाथ आचार्य जी विरमित उपन्यासक अध्यक्ष संस्कृत भारती ट्रस्ट तेलंगाना, हिंदी वक्ता गजेन्द्र पाठक जी सीनियर प्रोफेसर एवं अध्यक्ष हिन्दी विभाग हैदराबाद, कवि संगम त्रिपाठी संस्थापक प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा, डॉ गुंडाल विजय कुमार संस्थापक एस एच एम वी फाउंडेशन हैदराबाद, रामवल्लभ इंदौरी जी रहे।

माँ सरस्वती पूजन अतिथियों ने किया। सरस्वती वन्दना स्वर देवी सीमा शर्मा मंजरी मेरठ ने किया। प्रदीप मिश्र अजनबी दिल्ली के निर्देशन में डाॅ दुर्गेश नंदिनी हैदराबाद, राकेश मणि त्रिपाठी पनवेल, अनिल राही ग्वालियर, सुहास भटनागर हैदराबाद, अजय कुमार पाण्डेय हैदराबाद, नूतल शशिधर रवि श्रीमती अनिता मिश्रा दुबे, कृष्ण कुमार द्विवेदी नागपुर , बालकृष्ण महाजन नागपुर, मेघा अग्रवाल नागपुर, राजेन्द्र कुमार रुंगटा बिलासपुर वाले हैदराबाद, सत्य प्रसन्न, अंजलि मिश्रा तिवारी बस्तर, कमलेश्वर नागेश्वर राव, सोनिया नायडू दुर्ग छत्तीसगढ़, नरेन्दर कल्याणकर, अवनीश कुमार शुक्ला, सुरेश जी हैदराबाद मुख्य रूप से  शामिल रहे।

समारोह में उपस्थित अतिथियों ने त्रिभाषा वक्तव्य दिया व कवियों कवयित्रियों ने काव्य पाठ किया। इसी के साथ इस कार्यक्रम में आये हुए सभी कवियों, अतिथिगण को सम्मान प्रदान किया गया 

हिन्दी भाषा के प्रसार में महती सहयोगी इस समारोह का संचालन प्रदीप मिश्र 'अजनबी' दिल्ली ने किया। समारोह के समापन पर श्री अवनीश कुमार शुक्ला ने सभी की उपस्थिति के प्रति आभार अभिव्यक्त किया।

मेघा अग्रवाल जी ने हैदराबाद में शामिल हो हिंदि राष्ट्र की भाषा बननी चाहिए यह काव्यपाठ किया सभी ने बहोत सराहना की जिससे नागपूर शहर  को मेघा अग्रवाल पर बहोत  गर्व है।

बने राष्ट्रभाषा हिंदी यह है संकल्प हमारा, हिंदी के प्रतिभा मंडल का फैल रहा उजियारा


*हिंदी दिवस पर आधारित एक राष्ट्रभाषा हिंदी गीत*             


बने राष्ट्रभाषा हिंदी यह है संकल्प हमारा,

हिंदी के प्रतिभा मंडल का फैल रहा उजियारा।


हिंदी के हाथों के कंगन जब जब बजे उठते हैं,

सूरज चांद सितारे नभ में महाकाव्य लिखते हैं।


विश्व हिंदी दिवस मनाता है देखो जग सारा।

बने राष्ट्रभाषा हिंदी यह है संकल्प हमारा।


हिंदी का प्रदीप मुख मंडल चमक रहा है ऐसे,

उदयांचल में देव दिवाकर दमक रहा है जैसे।


विश्व भाषा होगी हिंदी यह विश्वास हमारा।

बने राष्ट्रभाषा हिंदी यह है संकल्प हमारा।


किसी गीत के भावों जैसा सुंदर है कोमल है,

हिंदी माता के शब्दों का रेशम सा आंचल है।


विश्व पटल पर हिंदी छाई यह सौभाग्य हमारा।

बने राष्ट्रभाषा हिंदी यह है संकल्प हमारा।


इस जग में कोई भी अक्षर ऐसा कहीं नहीं है ,

जो हिंदी के सुंदरतम हाथों में सजा नहीं है ।


हिंदी विश्व भाषा होगी है विश्वास हमारा।

हिंदी को अपनायेंगे हम है संकल्प हमारा।


बने राष्ट्रभाषा हिंदी यह है संकल्प हमारा,


*गीतकार अनिल भारद्वाज एडवोकेट उच्च न्यायालय ग्वालियर मध्य प्रदेश*

त्रिभाषा सम्मेलन हैदराबाद भावी पीढ़ी को प्रेरणा देगी -  कवि संगम त्रिपाठी


       

प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा व एस एच एम वी फाउंडेशन हैदराबाद द्वारा त्रिभाषा सम्मेलन क्रियान्वित किया गया। त्रिभाषा सम्मेलन में हिंदी, संस्कृत व तेलगु को नई दिशा दी गई।कवि संगम त्रिपाठी ने कहा कि त्रिभाषा सम्मेलन भावी पीढ़ी को प्रेरणा देगी।

विश्व हिंदी दिवस पर कवि बालकृष्ण रामभाउ महाजन नागपुर की कृति ' जंग अभी जारी है ' व गंगांजलि साझा काव्य संग्रह कवि संगम त्रिपाठी हास्य व्यंग जबलपुर मध्यप्रदेश, कवि पंकज बुरहानपुरी कवि लेखक बुरहानपुर, कवि श्याम फतनपुरी कवि गीतकार गोमती नगर लखनऊ, डॉ सोमनाथ शुक्ल कवि लेखक प्रयागराज की कृति जिसके संपादक डॉ अजय शुक्ल है का विमोचन किया गया जो कि प्रेरणादायक उद्धरण हैं।

विश्व हिंदी दिवस के अतिथि डॉ रावी नूतला शशिधर, तेलगु वक्ता आचार्य कसी रेड्डी वेंकट रेड्डी जी पूर्व अध्यक्ष तेलगु विभाग उस्मानिया विश्वविद्यालय, संस्कृत वक्ता चिलकर्मरी लक्ष्मीनाथ आचार्य जी विरमित उपन्यासक अध्यक्ष संस्कृत भारती ट्रस्ट तेलंगाना, हिंदी वक्ता गजेन्द्र पाठक जी सीनियर प्रोफेसर एवं अध्यक्ष हिन्दी विभाग हैदराबाद, डॉ गुंडाल विजय कुमार संस्थापक एस एच एम वी फाउंडेशन हैदराबाद, प्रदीप मिश्र अजनबी दिल्ली, रामवल्लभ इंदौरी, डाॅ दुर्गेश नंदिनी हैदराबाद, राकेश मणि त्रिपाठी पनवेल, अनिल राही ग्वालियर, सुहास भटनागर हैदराबाद, अजय कुमार पाण्डेय हैदराबाद, नूतल शशिधर रवि श्रीमती अनिता मिश्रा दुबे, कृष्ण कुमार द्विवेदी नागपुर , बालकृष्ण महाजन नागपुर, मेघा अग्रवाल नागपुर, राजेन्द्र कुमार रुंगटा बिलासपुर वाले हैदराबाद, सत्य प्रसन्न, अंजलि मिश्रा तिवारी बस्तर, कमलेश्वर नागेश्वर राव, सीमा शर्मा मंजरी मेरठ, सोनिया नायडू दुर्ग छत्तीसगढ़, नरेन्दर कल्याणकर, अवनीश कुमार शुक्ला, सुरेश जी हैदराबाद आदि का सहयोग प्रेरणादाई रहा।

प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा व एसएचएम वी फाउंडेशन द्वारा विश्व हिंदी दिवस पर त्रिभाषा अधिवेशन संपन्न


हैदराबाद

विश्व हिंदी दिवस 10 जनवरी 26 के अवसर पर प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा एवं एस एच एम वी फाउंडेशन द्वारा त्रिभाषा विकास कार्यशाला, अधिवेशन, कवि सम्मेलन व सम्मान समारोह संपन्न हुआ।

समारोह के अतिथि डॉ रावी नूतला शशिधर, तेलगु वक्ता आचार्य कसी रेड्डी वेंकट रेड्डी जी पूर्व अध्यक्ष तेलगु विभाग उस्मानिया विश्वविद्यालय, संस्कृत वक्ता चिलकर्मरी लक्ष्मीनाथ आचार्य जी विरमित उपन्यासक अध्यक्ष संस्कृत भारती ट्रस्ट तेलंगाना, हिंदी वक्ता गजेन्द्र पाठक जी सीनियर प्रोफेसर एवं अध्यक्ष हिन्दी विभाग हैदराबाद, कवि संगम त्रिपाठी संस्थापक प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा, डॉ गुंडाल विजय कुमार संस्थापक एस एच एम वी फाउंडेशन हैदराबाद, रामवल्लभ इंदौरी जी रहे।

माँ सरस्वती पूजन अतिथियों ने किया। सरस्वती वन्दना स्वर देवी सीमा शर्मा मंजरी मेरठ ने किया। प्रदीप मिश्र अजनबी दिल्ली के निर्देशन में डाॅ दुर्गेश नंदिनी हैदराबाद, राकेश मणि त्रिपाठी पनवेल, अनिल राही ग्वालियर, सुहास भटनागर हैदराबाद, अजय कुमार पाण्डेय हैदराबाद, नूतल शशिधर रवि श्रीमती अनिता मिश्रा दुबे, कृष्ण कुमार द्विवेदी नागपुर , बालकृष्ण महाजन नागपुर, मेघा अग्रवाल नागपुर, राजेन्द्र कुमार रुंगटा बिलासपुर वाले हैदराबाद, सत्य प्रसन्न, अंजलि मिश्रा तिवारी बस्तर, कमलेश्वर नागेश्वर राव, सोनिया नायडू दुर्ग छत्तीसगढ़, नरेन्दर कल्याणकर, अवनीश कुमार शुक्ला, सुरेश जी हैदराबाद मुख्य रूप से  शामिल रहे। समारोह में उपस्थित अतिथियों ने त्रिभाषा वक्तव्य दिया व कवियों कवयित्रियों ने काव्य पाठ किया।

इसी के साथ इस कार्यक्रम में आये हुए सभी कवियों, अतिथिगण का यथायोग्य सम्मान किया गया और विशेष सम्मान के तहत प्रेरणा के संस्थापक कवि संगम त्रिपाठी को तथा मेरठ की प्रसिद्ध कवियत्री श्रीमती सीमा शर्मा 'मंजरी' को एस एच एम वी फाउंडेशन ने मानद डाक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया।   

हिन्दी भाषा के प्रसार में महती सहयोगी इस समारोह का संचालन प्रदीप मिश्र 'अजनबी' दिल्ली ने किया। समारोह के समापन पर श्री अवनीश कुमार शुक्ला ने सभी की उपस्थिति के प्रति आभार अभिव्यक्त किया।

गंगांजलि साझा काव्य संग्रह का हैदराबाद में होगा विमोचन



प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा व एस एच एम वी फाउंडेशन हैदराबाद के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित त्रिभाषा सम्मेलन 10 जनवरी 2026 को आयोजित होगा।

हैदराबाद सम्मेलन में गंगांजलि साझा काव्य संग्रह का विमोचन किया जाएगा। गंगांजलि साझा काव्य संग्रह के संपादक डॉ अजय शुक्ल है व इस संग्रह में कवि संगम त्रिपाठी हास्य व्यंग जबलपुर मध्यप्रदेश, कवि पंकज बुरहानपुरी कवि लेखक बुरहानपुर,‌ कवि श्याम फतनपुरी कवि गीतकार गोमती नगर लखनऊ, डॉ सोमनाथ शुक्ल कवि लेखक प्रयागराज की रचनाएं संग्रहित हैं।

प्रदीप मिश्र अजनबी दिल्ली ने बताया कि गंगांजलि साझा काव्य संग्रह भावनाओं का काव्य संगम है जो पाठकों के बीच स्थान बनाने में सफल होगी।

कवियत्री मेघा मनोज अग्रवाल नारी रत्न सम्मान से हुई सम्मानित 


जबलपुर

कवियित्री मेघा अग्रवाल नागपुर को समाजसेविका  हिंदी लेखन व उनके बहुमुखी प्रतिभा के लिए राज्यस्तरीय श्याम बहुउद्देशीय संस्था की तरफ से देवरी में नारी रत्न सम्मान से संस्थापक डाॅ. घनश्याम निखाडे द्वारा सम्मानित किया गया। जिससे नागपूर का नाम रोशन हुआ। 

             हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी 13 विविध क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने के लिए 13 व्यक्तियों को गौरव पुरस्कार सम्मान 2026 श्याम महाजन बहुत उद्देश्य विकास संस्था मां धुकेश्वरी मंदिर ट्रस्ट और देवरी तालुका पत्रकार संघ ने 4 जनवरी को देवरी में धुकेश्वरी मंदिर सभागृह में यह सम्मान कार्यक्रम आयोजित किया गया। राज्य स्तरीय सम्मान कृषि भूषण पुरस्कार, आदर्श शिक्षिका पुरस्कार, शिक्षक रत्न पुरस्कार, दर्पण पत्रकारिता पुरस्कार, समाज भूषण पुरस्कार, नारी रत्न पुरस्कार, ग्राम समाज भूषण (आदर्श सरपंच ) पुरस्कार, सहकार भूषण पुरस्कार, प्रशांसकरत्न पुरस्कार भारतीय संस्कृति रक्षक पुरस्कार और सेवाभाव भूषण पुरस्कार ऐसे विविध क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने वाले व्यक्तियों को श्रीफल, शॉल, रजक प्रदक स्मृति चिन्ह और प्रमाण पत्र देकर उन्हें सम्मानित किया गया। 

         इस सत्कार समारोह का उद्घाटन जिला अधिकारी प्रदीप नायर अध्यक्ष खा नामदेव राव किरसान इनके हस्ते हुआ। प्रमुख अतिथि आदरणीय माजी आमदार सहषराम कोरोटे, उपविभाग पुलिस अधिकारी विवेक पाटील नगरअध्यक्ष संजु उईके धुकेश्वरी मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष अडॅ प्रशांत संगीडवार , उद्योगपती शैकी  , अन्य अधिकारी व पदाधिकारी उपस्थित थे। जन मानस की उपस्थित व तीनो संस्था की उपस्थिति में आयोजन संपन्न हुआ। कवि संगम त्रिपाठी संस्थापक प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा ने मेघा अग्रवाल को बधाई दी और उनके हिंदी साहित्य सेवा की सराहना की है।

प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा व एसएचएम वी फाउंडेशन के तत्वाधान में कृति का होगा विमोचन, सम्मेलन में जंग जारी 


जबलपुर

प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा व एस एच एम वी फाउंडेशन हैदराबाद के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित विश्व हिंदी दिवस 10 जनवरी 26 को त्रिभाषा सम्मेलन, कवि सम्मेलन व सम्मान समारोह में डॉ बालकृष्ण रामभाऊ महाजन नागपुर महाराष्ट्र की कृति का विमोचन किया जाएगा।

प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा के संस्थापक कवि संगम त्रिपाठी, महासचिव प्रदीप मिश्र अजनबी, राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ लाल सिंह किरार व एस एच एम वी फाउंडेशन हैदराबाद के संस्थापक डॉ विजय कुमार ने जारी विज्ञप्ति में बताया कि हैदराबाद सम्मेलन दक्षिण भारत में भाषा व संस्कृति के प्रचार-प्रसार में मील का पत्थर साबित होगा। त्रिभाषा सम्मेलन में मुख्य अतिथि डॉ धर्म प्रकाश वाजपेई दिल्ली व अतिथि डॉ रावी नूतला शशिधर जी आमंत्रित हैं।

त्रिभाषा सम्मेलन में तेलुगु वक्ता आचार्य कसी रेड्डी वेंकट रेड्डी जी पूर्व अध्यक्ष तेलुगू विभाग, उस्मानिया विश्वविद्यालय। संस्कृत वक्ता चिलकमर्री लक्ष्मीनाथ आचार्य जी विरमित उपन्यासक, अध्यक्ष - संस्कृत भारती ट्रस्ट, तेलंगाना। हिन्दी वक्ता गजेन्द्र पाठक जी सीनियर प्रोफेसर एवं अध्यक्ष - हिन्दी विभाग हैदराबाद विश्वविद्यालय होंगे।

राकेश मणि त्रिपाठी देवरिया, उत्तर प्रदेश , डॉ ओमप्रकाश द्विवेदी ओम पडरोना कुशीनगर उत्तर प्रदेश, डॉ दुर्गेश नंदिनी हैदराबाद, देवनारायण शर्मा ग्राम+पोस्ट, चमरौआ, बाह (आगरा) उप्र , डॉ मिंटू शर्मा , असम गुवाहाटी, डॉ लाल सिंह किरार अध्यक्ष प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा, अनिल राही ग्वालियर मध्यप्रदेश, मेघा अग्रवाल नागपूर महाराष्ट्र, सोनिया नायडू दुर्ग छत्तीसगढ़, संत शरण श्रीवास्तव, जबलपुर, प्रभा बच्चन श्रीवास्तव जबलपुर, दुर्वा दुर्गेश वारिक ' गोदावरी' गोवा, महेश नारायण शर्मा टोंक राजस्थान, सरस्वती मल्लिक मधुबनी बिहार, ज्ञानेन्द्र श्रीवास्तव जबलपुर, विनीता श्रीवास्तव जबलपुर, अन्नपूर्णा मालवीया (सुभाषिनी) प्रयागराज, डॉ.जयप्रकाश नागला  नांदेड़, कवि  वीरेंद्र पाठक गीतकार गजलकार हाथरसी, थानाभद लपसिरिकुल थाईलैण्ड, बसंती दीपशिखा हैदराबाद, रामवल्लभ गुप्त इंदौरी, डॉ शिवशरण श्रीवास्तव ' अमल'  बिलासपुर छत्तीसगढ़, सतीश पाण्डेय बिलासपुर छत्तीसगढ़, अंजलि तिवारी मिश्रा जगदलपुर बस्तर,  रामअवतार स्वामी उनियारा, जिला - टोंक, राजस्थान, संगीता श्रीवास्तव, शिवपुर वाराणसी, डा बालकृष्ण रामभाऊ महाजन नागपुर महाराष्ट्र, डॉ कृष्ण कुमार द्विवेदी नागपुर, सुनीता लुल्ला हैदराबाद, विद्यावाचस्पति डॉ कर्नल आदिशंकर मिश्र ' आदित्य' लखनऊ, राजेंद्र कुमार रुंगटा बिलासपुर वाले हैदराबाद, अजय पांडेय हैदराबाद, एम. एस. राव हैदराबाद, डॉ गंगाधर वड़ोदे हैदराबाद, श्रीमती सरिता सुराणा हैदराबाद, नागेश्वर राव कमलेकर हैदराबाद, विश्वजीत सपन हैदराबाद, अंकित शुक्ला ' विशाल' हैदराबाद , अनिता मिश्रा दुबे, श्री मन्नानारायणाचार्य हैदराबाद व राजवीर शर्मा वरिष्ठ पत्रकार अम्बाह मुरैना ने शामिल होने की सहमति प्रदान की है।

प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा व एसएचएमवी फाउंडेशन द्वारा हैदराबाद में त्रिभाषा सम्मेलन 10 जनवरी को होगा आयोजित 


जबलपुर  

प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा व एस एच एम वी फाउंडेशन हैदराबाद के संयुक्त तत्वावधान में विश्व हिंदी दिवस 10 जनवरी 26 को हैदराबाद में त्रिभाषा सम्मेलन व सम्मान समारोह आयोजित किया गया है। एस एच एम वी फाउंडेशन हैदराबाद के संस्थापक डॉ विजय कुमार के अनुसार त्रिभाषा सम्मेलन में मुख्य अतिथि डॉ धर्म प्रकाश वाजपेई दिल्ली व अतिथि डॉ रावी नूतला शशिधर जी आमंत्रित हैं।

त्रिभाषा सम्मेलन में तेलुगु वक्ता आचार्य कसी रेड्डी वेंकट रेड्डी जी पूर्व अध्यक्ष तेलुगू विभाग, उस्मानिया विश्वविद्यालय। संस्कृत वक्ता चिलकमर्री लक्ष्मीनाथ आचार्य जी विरमित उपन्यासक, अध्यक्ष - संस्कृत भारती ट्रस्ट, तेलंगाना। हिन्दी वक्ता गजेन्द्र पाठक जी सीनियर प्रोफेसर एवं अध्यक्ष - हिन्दी विभाग हैदराबाद विश्वविद्यालय होंगे। त्रिभाषा सम्मेलन पश्चात सम्मान समारोह व देश के विभिन्न प्रांतों से आए कवि कवयित्री रचनाकार साहित्यकार काव्य पाठ करेंगे।

इस आयोजन में राकेश मणि त्रिपाठी देवरिया, उत्तर प्रदेश , डॉ ओमप्रकाश द्विवेदी ओम पडरोना कुशीनगर उत्तर प्रदेश, डॉ दुर्गेश नंदिनी हैदराबाद, देवनारायण शर्मा ग्राम+पोस्ट, चमरौआ, बाह (आगरा) उप्र , डॉ मिंटू शर्मा , असम गुवाहाटी, डॉ लाल सिंह किरार अध्यक्ष प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा, अनिल राही ग्वालियर मध्यप्रदेश, मेघा अग्रवाल नागपूर महाराष्ट्र, सोनिया नायडू दुर्ग छत्तीसगढ़, संत शरण श्रीवास्तव, जबलपुर, प्रभा बच्चन श्रीवास्तव जबलपुर, दुर्वा दुर्गेश गोदावरी गोवा, महेश नारायण शर्मा टोंक राजस्थान, सरस्वती मल्लिक मधुबनी बिहार, ज्ञानेन्द्र श्रीवास्तव जबलपुर, विनीता श्रीवास्तव जबलपुर, अन्नपूर्णा मालवीया (सुभाषिनी) प्रयागराज, डॉ.जयप्रकाश नागला  नांदेड़, कवि  वीरेंद्र पाठक गीतकार गजलकार हाथरसी, थानाभद लपसिरिकुल थाईलैण्ड, बसंती दीपशिखा हैदराबाद, रामवल्लभ गुप्त इंदौरी, डॉ शिवशरण श्रीवास्तव ' अमल'  बिलासपुर छत्तीसगढ़, सतीश पाण्डेय बिलासपुर छत्तीसगढ़, अंजलि तिवारी मिश्रा जगदलपुर बस्तर,  रामअवतार स्वामी उनियारा, जिला - टोंक, राजस्थान, संगीता श्रीवास्तव, शिवपुर वाराणसी, डा बालकृष्ण रामभाऊ महाजन नागपुर महाराष्ट्र, डॉ कृष्ण कुमार द्विवेदी नागपुर, सुनीता लुल्ला हैदराबाद, विद्यावाचस्पति डॉ कर्नल आदिशंकर मिश्र ' आदित्य' लखनऊ, राजेंद्र कुमार रुंगटा बिलासपुर वाले हैदराबाद, अजय पांडेय हैदराबाद, राजकुमारी रैकवार राज जबलपुर, एम. एस. राव हैदराबाद, डॉ गंगाधर वड़ोदे हैदराबाद, श्रीमती सरिता सुराणा हैदराबाद, नागेश्वर राव कमलेकर हैदराबाद, विश्वजीत सपन हैदराबाद, अंकित शुक्ला ' विशाल' हैदराबाद मन्नानारायणाचार्य हैदराबाद ने शामिल होने की सहमति प्रदान की है।

कवि संगम त्रिपाठी संस्थापक प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा ने बताया कि इस आयोजन में प्रदीप मिश्र अजनबी महासचिव प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा दिल्ली व राजवीर शर्मा वरिष्ठ पत्रकार अम्बाह मुरैना विशेष रूप से शामिल रहेंगे।

कार डिवाइडर से टकराकर पलटी, चालक घायल, बाघिन ने ग्रामीण पर  किया हमला


शहडोल

जिले में तेज रफ्तार का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। आए दिन हो रहे सड़क हादसे न केवल यातायात व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे हैं, बल्कि लोगों की जान भी जोखिम में डाल रहे हैं। ताजा मामला बुढार थाना क्षेत्र का है। यहां एक तेज रफ्तार कार बीच सड़क अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई और पलट गई। हादसे में कार चालक को मामूली चोटें आई हैं।

पुलिस के अनुसार कार बुढार से धनपुरी की ओर जा रही थी। कार में केवल चालक ही सवार था। जैसे ही वाहन बुढार थाना क्षेत्र अंतर्गत बिजली ऑफिस के पास पहुंचा, अचानक चालक का संतुलन बिगड़ गया। तेज रफ्तार होने के कारण कार सीधे सड़क के डिवाइडर से टकरा गई और कई बार पलटते हुए बीच सड़क पर जा पलटी। हादसे की आवाज सुनकर आसपास मौजूद लोग मौके पर दौड़े चले आए।

स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए पलटी हुई कार से चालक को बाहर निकाला। चालक को हल्की चोटें आई थीं, जिसे तुरंत उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल भिजवाया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार यदि उस समय सड़क पर अन्य वाहन होते तो हादसा और भी गंभीर हो सकता था। घटना के बाद कुछ समय के लिए मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बना रहा और यातायात भी प्रभावित हुआ।

घटना की सूचना मिलते ही बुढार थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने स्थिति को संभालते हुए यातायात को सुचारू कराया और दुर्घटनाग्रस्त कार को सड़क से हटवाया। पुलिस के अनुसार प्रारंभिक जांच में हादसे का कारण तेज रफ्तार और वाहन पर नियंत्रण खोना माना जा रहा है। मामले में आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। गौरतलब है कि जिले में लगातार तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाने के कारण सड़क हादसे बढ़ते जा रहे हैं। पुलिस प्रशासन द्वारा समय-समय पर यातायात नियमों के पालन की अपील की जाती रही है, लेकिन इसके बावजूद लोग नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। ऐसे हादसे यह चेतावनी देते हैं कि वाहन चलाते समय सावधानी और संयम बेहद जरूरी है।

*बाघिन ने ग्रामीण पर हमला कर किया घायल*

उमरिया जिले के बांधवगढ़ टाईगर रिजर्व से सटे मानपुर के बेल्दी गांव के रहवासी इलाके में दिखी बाघिन, वन विभाग की टीम और चौंकी अमरपुर पुलिस मौके पर पहुंची पार्क प्रबंधन की टीम ने संज्ञान लेकर आगे की कार्यवाही तय कर हाथियों की मदद से जंगल में खदेड़ने की कायवाद भी शुरू करेगी, ग्राम बेलदी के गोपाल कोल पर हमला कर लहूलुहान कर दिया, उसके बाएं पैर को दात पंजा नाखूनों से नोचकर गर्भीर रूप से घायल कर दिया, घायल को मानपुर स्वास्थ केंद्र 108 की सहायता से इलाज के लिए भेजा गया, इसके अलावा ग्राम बेलदी के दुर्गा प्रसाद द्विवेदी के घर में जाकर घुस गया, जिसे रेस्क्यू करने की कार्यवाही जंगल विभाग की टीम कर रही है, पूरे गांव में भय का माहौल व्याप्त हो गया है, लोग अपने घरों में दुबके बैठे हैं, निस्तार आदि को घर से निकलना मुश्किल हो गया है, बाघ को बेलदी गांव से बाहर निकलने की गुहार गांववासियों ने पार्क प्रबंधन के आला अधिकारियों से मांग की गई है।

गुंजन साहित्य संघ ने गीतकार अनिल भारद्वाज को गुंजन साहित्य सम्मान से किया सम्मानित


ग्वालियर

साहित्यिक सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था गुंजन साहित्य संघ विशाखापट्टनम के तत्वाधान में मध्य प्रदेश ग्वालियर के वरिष्ठ गीतकार व हिंदी सेवी साहित्यकार अनिल भारद्वाज एडवोकेट को गुंजन साहित्य सम्मान 2025 से सम्मानित किया गया है।

 गीतकार अनिल भारद्वाज को यह सम्मान हिंदी साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट साहित्य सृजन एवं निरंतर साहित्य साधना के लिए प्रदत्त किया गया है।

   गीतकार अनिल भारद्वाज वरिष्ठ हिंदी सेवी एवं श्रेष्ठ साहित्यकार होकर  हिंदी राष्ट्रभाषा पर आधारित विश्व के प्रथम महाकाव्य हिंदी के आंसू के रचयिता हैं। आपने विश्व के प्रथम हिंदी माता मंदिर की स्थापना युवा अभिभाषक मंच के माध्यम से ग्वालियर मध्य प्रदेश में कराई।

      संगीत एवं कला के क्षेत्र में भी अनिल भारद्वाज चित्रकार तथा बांसुरी वादक हैं तथा आपने वायलिन में संगीत प्रभाकर की उपाधि प्राप्त की है। आप फिल्म राइटर एसोसिएशन मुंबई के फेलो मेंबर है एवं वर्तमान में उच्च न्यायालय ग्वालियर में वरिष्ठ अधिवक्ता हैं।

    साहित्य के क्षेत्र में गीतकार अनिल भारद्वाज द्वारा सन् 1971 से निरंतर साहित्य सृजन करते हुए कई साहित्यिक कृतियां साहित्य जगत को प्रदत्त की गईं  जिनमें गीत संग्रह बीत गया मधुमास (पुरस्कृत कृति ) हिंदी के आंसू ( हिंदी पर आधारित विश्व का प्रथम महाकाव्य) तथा हिंदी माता चालीसा (भक्ति काव्य) आदि प्रकाशित कृतियां उल्लेखनीय हैं।गीतकार अनिल भारद्वाज की रचनाएँ देश भर की विभिन्न पत्र पत्रिकाओं समाचार पत्रों एवं साझा संकलनों में निरंतर प्रकाशित हो रही हैं एवं रचनाओं का प्रसारण विभिन्न टी वी चैनलों एवं आकाशवाणी केंद्रों द्वारा किया जाता रहा है l

  विद्यार्थी जीवन में कॉलेज के सर्वश्रेष्ठ गीतकार की उपाधि 1978 तथा कमला अवधेश बाजपेई पुरस्कार 1997 एवं आदर्श अधिवक्ता सम्मान 1999 से सम्मानित।

   गीतकार अनिल भारद्वाज को, नेपाल,भारत,यू एस तथा तंजानिया के रचनाकारों में से लुंबिनी नेपाल की संस्था द्वारा प्रथम श्रेणी में चयन किया एवं महिला शक्ति काव्य रत्न की मानद उपाधि 2023 प्रदान की गई। हनुमान जन्मोत्सव पर श्रेष्ठ रचना सृजन सम्मान 2023,अंतर्राष्ट्रीय कला एवं साहित्य सम्मान 2023, भारत माता अभिनंदन सम्मान 2023, प्रकृति प्रेमी हिंदी साहित्य सम्मान2023,हिंदी दिवस के उपलक्ष में हिंदी सेवी सम्मान 2023,विश्व हिंदी दिवस के उपलक्ष में देश के चुनिंदा 551 हिंदी सेवियों में हिंदी सेवी सम्मान 2023,काव्य कला सेवा संस्थान द्वारा सृजन श्री सम्मान सम्मान 2023, SSIF द्वारा अंतर्राष्ट्रीय कला एवं साहित्य सम्मान 2023,हम रंग फाउंडेशन द्वारा हिंदी सेवी सम्मान 2023, ग्राम टुडे प्रकाशन समूह द्वारा अटल स्मृति सम्मान 2023, कीर्तिमान साहित्य पत्रिका द्वारा आज के श्रेष्ठ रचनाकार सम्मान 2023,लोकप्रिय साहित्य सम्मान 2023,भंडारी साहित्य शिरोमणि सम्मान 2023,श्रेष्ठ रचनाकार सम्मान 2024,वीर रस सम्मान 2024,गणतंत्र के प्रहरी सम्मान 2024,सृजन के सारथी 2024,देश प्रेमी सम्मान 2024,वीर रस सम्मान 2024, महात्मा बुद्ध सम्मान 2024,श्रेष्ठ रचनाकार सम्मान2024,काव्य कौस्तुभ सम्मान 2024,हनुमंत भक्त सम्मान 2024, गुरुदेव अभिव्यक्ति सम्मान 2024, श्रेष्ठ सृजन रत्न सम्मान 2024,रविंद्रनाथ टैगोर की जयंती पर अंतरराष्ट्रीय कला एवं साहित्य सम्मान 2024, संत शिरोमणि तुलसीदास सम्मान 2024, हिंदी सेवी सम्मान 2024, प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा द्वारा मेरे राम जी अभिनंदन 2024,महात्मा गांधी साहित्य सेवा सम्मान 2024, कला संगम फाउंडेशन द्वारा रामनवमी सम्मान 2024,गणपति भक्त सम्मान 2024, सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन सम्मान 2024, बुद्ध अंतरराष्ट्रीय साहित्य  महोत्सव पर महात्मा बुद्ध सम्मान 2024, साखी साहित्यक मंच राजस्थान द्वारा होली महोत्सव पर सम्मान 2024,स्वर्णिम रक्षा सूत्र सम्मान 2024, भैया बहन सम्मान 2024, SSIF द्वारा विश्व गुरु भारत गौरव सम्मान, 2024,हिंदी काव्य रत्न मानद उपाधि 2024 से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नेपाल की संस्था द्वारा सम्मानित, अटल स्मृति सम्मान 2024,अटल काव्य सुरभि सम्मान 2024,श्रेष्ठ कल्पनाकार रचयिता सम्मान 2024, अंतर्राष्ट्रीय ब्राह्मण मंच द्वारा राष्ट्रीय सम्मान (संगीत) 2024, भारत की बात संस्था द्वारा काव्य श्री विभूषण सम्मान 2024, नव वर्ष सम्मान 2025, राष्ट्र धर्मी सम्मान 2025, मां सरस्वती सम्मान 2025,शिव शक्ति सम्मान 2025,साहित्य सम्मान निधि 2025,होली महोत्सव राष्ट्रीय अवार्ड 2025, साखी साहित्य मंच राजस्थान द्वारा साहित्य सम्मान निधि 2025, रंग लेखन सम्मान 2025, चैत्र नवरात्रि सह रामनवमी सम्मान 2025,राष्ट्रीय कवि स्पर्श मंच द्वारा उत्कृष्ट लघु कथा सृजन हेतु नवरात्रि सम्मान 2025, एवं सहभागिता सम्मान 2025, नव प्रज्ञा फाउंडेशन काशी कविता मंच वाराणसी द्वारा काव्य रत्न सम्मान 2025,आदि से सम्मानित किया जा चुका है।

इस अवसर पर उच्च न्यायालय संघ ग्वालियर के अध्यक्ष पवन पाठक,अंतर्राष्ट्रीय अभिभाषक मंच के अध्यक्ष विजय सिंह चौहान,एवं हिंदीमाता काव्य धारा मंच भारत के पदाधिकारीगण उमाशंकर द्विवेदी,संजय निगम,अभिभाषक गण,बलदेव पाठक, सहित साहित्यक एवं सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं के साथ ही संपादकगण आनंद पांडे, कुलदीप अवस्थी एवं ध्यानेंद्र शर्मा आदि ने गीतकार अनिल भारद्वाज को हार्दिक बधाई दी है।

कवि एवं लेखक गिरीश पटेल, “वातायन कबीर अलंकरण” सम्मान से सम्मानित 


उमरिया

उमरिया की विख्यात साहित्यिक संस्था ने गिरीश पटेल को “वातायन कबीर अलंकरण सम्मान से सम्मानित किया। उन्हें सम्मानित करने के लिए वातायन की ओर से, वातायन संस्था के प्रथम अध्यक्ष स्वर्गीय एन एम दीक्षित की स्मृति में उनकी सुपुत्री श्रीमती रंजना दीक्षित विशेष रूप से नोएडा से उमरिया पहुँची थीं।अलंकरण समारोह के साथ ही पुस्तक विमोचन और कविता पाठ का भी कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में सम्मिलित होने के लिए नेपाल और भारत के विभिन्न प्रांतों से साहित्यकार एकत्रित हुए थे। इन्हीं साहित्यकारों में से 28 साहित्यकारों को अलंकरण सम्मान से नवाज़ा गया था। प्रत्येक साहित्यकार का सम्मान अलग-अलग साहित्यिकार के द्वारा किया गया। अलंकरण सम्मान में माल्यार्पण और शाल के अतिरिक्त सम्मान पत्र और एक निश्चित धनराशि भी भेंट की गई।नेपाल और भारत के विभिन्न क्षेत्रों से आए विद्वानों के समागम ने कार्यक्रम को सफल और गरिमामय बना दिया। इस कार्यक्रम में 3 लेखकों की पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। अंत में कविता पाठ के कार्यक्रम में कवियों ने अपनी सरस रचनाओं का पाठ कर, कार्यक्रम को उत्कर्ष पर पहुंचा दिया। ज्ञातव्य है कि 25 दिसम्बर वातायन संस्था का स्थापना दिवस है इसी अवसर पर यह संस्था प्रतिवर्ष कार्यक्रम आयोजित करती है।

कवि संगम त्रिपाठी को मिला वातायन वागीश अलंकरण सम्मान, लोगो ने दी शुभकामनाएं



       जबलपुर -  वातायन साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था उमरिया संस्था के संस्थापक स्व. पंडित रामनरेश मिश्र की स्मृति में भव्य साहित्यिक आयोजन किया। आयोजन के अध्यक्ष जगदीश प्रसाद पयासी कार्यक्रम  मुख्य अतिथि डॉ. परमानंद तिवारी एवं विशिष्ट अतिथि टी. एस. चतुर्वेदी, प्रो. अशोक श्रीवास्तव, डॉ. राकेश सोनी रहे। 

        वातायन के अलंकरण समारोह में प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा के संस्थापक कवि संगम त्रिपाठी जबलपुर को वातायन वागीश अलंकरण प्रदान किया गया।

          इस अवसर पर देश के 28 साहित्यकारों और समाजसेवियों के साथ वातायन संस्था के पदाधिकारी एवं सहयोगी गण अनिल मिश्र, राजकुमार महोबिया, संतोष कुमार द्विवेदी, चन्द्र किशोर चंदन, डॉ नियाज अहमद,मुकेश त्रिपाठी, शंभू सोनी, राकेश उरमलिया, संपत नामदेव, भूपेन्द्र त्रिपाठी, राम लखन सिंह चौहान, विनोद शुक्ल, मोहम्मद शारिब, शिवांश सिंह सेंगर, करन सिंह, शिवानंद पटेल, सत्येन्द्र गौतम, प्रेमशंकर मिर्जापुरी, किशोर नामदेव, गणेश दत्त गौतम, एम. डी. सिद्दीकी, शरद जायसवाल, चन्द्र किशोर श्रीवास्तव, रविन्द्र रवि का सहयोग सराहनीय रहा।

         कवि संगम त्रिपाठी को डॉ पी. के. मिश्रा ' सुरेश ' , अशोक अवधिया, अनंत उपाध्याय, समाजसेवी सुरेश अवधिया, डॉ.0अरुणा पांडेय, विजय बागरी, आशा निर्मल जैन, अजय कुमार झा (जनकपुर नेपाल) व देश के विभिन्न प्रांतों से आए कवि, कवयित्री व साहित्य मनीषियों ने बधाई दी। समारोह का संचालन कवि साहित्यकार अनिल मिश्र ने किया।

 'शब्दांजलि' काव्य संग्रह का 'वातायन' संस्था के मंच पर विमोचन 


जबलपुर

वातायन साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था उमरिया संस्था के संस्थापक स्व. पंडित रामनरेश मिश्र की स्मृति में भव्य साहित्यिक आयोजन किया। आयोजन के अध्यक्ष जगदीश प्रसाद पयासी कार्यक्रम  मुख्य अतिथि डॉ. परमानंद तिवारी एवं विशिष्ट अतिथि टी. एस. चतुर्वेदी, प्रो. अशोक श्रीवास्तव, डॉ. राकेश सोनी रहे। 

         वातायन के भव्य आयोजन में स्व. रामचन्द्र प्रसाद कर्ण बिरसिंहपुर पाली के की किताब 'शब्दांजलि' का विमोचन किया गया। इस अवसर पर देश के 28 साहित्यकारों और समाजसेवियों के साथ अनिल मिश्र, लवलेश कुमार कर्ण, कवि संगम त्रिपाठी, डॉ पी.के. मिश्र ' सुरेश ' , सुरेश अवधिया, अनंत उपाध्याय, अशोक अवधिया उपस्थित रहे।

     वातायन संस्था के पदाधिकारी एवं सहयोगी गण राजकुमार महोबिया, संतोष कुमार द्विवेदी, चन्द्र किशोर चंदन, डॉ नियाज अहमद,मुकेश त्रिपाठी, शंभू सोनी, राकेश उरमलिया, संपत नामदेव, भूपेन्द्र त्रिपाठी, राम लखन सिंह चौहान, विनोद शुक्ल, मोहम्मद शारिब, शिवांश सिंह सेंगर, करन सिंह, शिवानंद पटेल, सत्येन्द्र गौतम, प्रेमशंकर मिर्जापुरी, किशोर नामदेव, गणेश दत्त गौतम, एम. डी. सिद्दीकी, शरद जायसवाल, चन्द्र किशोर श्रीवास्तव, रविन्द्र रवि का सहयोग सराहनीय रहा।

         इस अवसर पर डॉ. अरुणा पांडेय, विजय बागरी, आशा निर्मल जैन, अजय कुमार झा (जनकपुर नेपाल) व देश के विभिन्न प्रांतों से आए कवि, कवयित्री व साहित्य मनीषी कार्यक्रम की शोभा बढ़ाने में सहयोग प्रदान किया।

       कवि साहित्यकार रामचन्द्र प्रसाद कर्ण बिरसिंहपुर पाली की किताब शब्दांजलि के प्रकाशन व विमोचन का भगीरथ प्रयास वरिष्ठ साहित्यकार कवि अनिल मिश्र के प्रयासों का परिणाम है आपकी प्रेरणा से शब्दांजलि किताब का अहिल्या सा उद्धार हो गया व जन जन को समर्पित हो गई।

अटल तुम्हारी जय हो, अजर अमर हे अटल तुम्हारी जय हो, भारत मां की शान तुम्हारी जय हो



अटल तुम्हारी जय हो


अजर अमर हे अटल तुम्हारी जय हो।

भारत मां की शान तुम्हारी जय हो।


राष्ट्रभाषा की सुगंध से,

तुमने दुनिया को महकाया।

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर,

हिंदी का परचम लहराया।


हिंदी के तूफान तुम्हारी जय हो।

अजर अमर हे अटल तुम्हारी जय हो।



भारत माता पूछ रही है,

तुम सा लाल कहां से लाए,

तुम जैसे अनमोल रतन को,

फिर से भारत रत्न दिलाए।


हंसमुख व्यक्ति महान तुम्हारी जय हो।

अजर अमर हे अटल तुम्हारी जय हो


तुम तो एक अजातशत्रु थे,

दुश्मन के भी अटल मित्र थे।

अद्भुत और प्रखर वक्ता थे,

राजनीति के वृत्तचित्र थे।


रणनीतिज्ञ महान तुम्हारी जय हो।

अजर अमर हे अटल तुम्हारी जय हो।


जन जन के जननायक थे तुम,

राष्ट्रभक्ति के गायक थे तुम।

भारत मां के वरदपुत्र तुम,

नीलकमल गीतों के थे तुम।


भारत की पहचान तुम्हारी जय हो।

अजर अमर हे अटल तुम्हारी जय हो।

  

-गीतकार अनिल भारद्वाज एडवोकेट उच्च न्यायालय पीठ ग्वालियर मध्यप्रदेश

हरनाम सिंह, मध्य प्रदेश प्रगतिशील लेखक संघ की राज्य कार्यकारिणी के ऊर्जावान सदस्य, लेखक, समालोचक हैं। इन्होंने गिरीश पटेल की पुस्तक “तब मैं कविता लिखता हूँ” को पढ़कर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है, इसे आप भी पढ़िए।

                                             -आनंद पाण्डेय 

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*अविभाजित काव्य चेतना का सहज कवि गिरीश पटेल*

————————————————-पुस्तक- “तब में कविता लिखता हूं" पर पाठकीय टिप्पणी*

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              गिरीश पटेल उस शख्सियत का नाम है जिसने व्यक्तिगत अनुभव, अनुभूतियों के माध्यम से समाज में व्याप्त विसंगतियों को अपनी रचनाशीलता के माध्यम से उठाया है। इस काव्य संग्रह को पढ़ने की सिफारिश जिन साहित्यकारों, ने की उनमें गौहर रज़ा, कुमार अंबुज, उदय प्रकाश, सेवा राम त्रिपाठी के अलावा डॉक्टर सुखदेव सिंह सिरसा भी हैं। जिसके चलते पुस्तक पढ़ने की जिज्ञासा बढ़ गई।

             अपनी शुभकामनाओं में डॉक्टर सिरसा ने कहा बे- मकसद शायरी गुनाह की तरह होती है। सांप्रदायिक नफरत हजूमी हिंसा और बाजार के आतंक ने हमारी संवेदना को सुन्न कर दिया है। आज प्रश्न एक चीख और उत्तर मौन में तब्दील हो गए हैं। इसी मौन को मुखर करने का माध्यम गिरीश पटेल का काव्य संग्रह *तब मैं कविता लिखता हूं* के रूप में सामने आया। 200 प्रृष्ठों में सिमटी सौ कविताएं गांव के गलियारों से होती हुई अंतरराष्ट्रीय फलक को छूती है।

               पुस्तक पढ़ने का प्रारंभ गौहर रज़ा साहब की पसंद की कविता *कौन हैं वे लोग*  से की जिसमें कोविड काल में सैकड़ो मीलों के अंतहीन फांसले  नापते उन मेहनतकशों की पीड़ा है, जो रातों-रात खानाबदोशों की कतार में खड़े कर दिए गए थे। कवि पूछता है कि आखिर किस अपराध की सजा भुगती  उन्होंने ? लेकिन जिस कविता को मैंने पसंद किया वह गिरीश पटेल की पहली कविता है जो उन्होंने 19 वर्ष की आयु में लिखी थी,*ऐ मॉं तेरे बिन* बेहद भावपूर्ण कविता जिसने अंतर्मन को भिगो दिया।

               *तंन्द्रा* कविता में वर्तमान समय की चुप्पी को मुर्गे की बांग के माध्यम से तोड़ा गया है। मुर्गा बांग देता रहा लोग सोते रहे। कविता *बहुत बड़ी चादर* में कोविड काल के दौरान लाशों के ढेर ही नहीं व्यापम की काली करतूतें, बिकाऊ मीडिया, बाबाओं का अधःपतन, कलबुर्गी, गौरी लंकेश की हत्या, पुरस्कार लौटाते लेखकों का सम्मान, ईवीएम की बाजीगरी, पुलवामा के शहीद सैनिकों के लाशें सभी ढक दिए गए हैं। राज्यसभा का सदस्य बनने के लिए ज़मीर बेचते जज की लोलुपता कवि की नजर से नहीं बच सकी। पाकिस्तान के कायदे आजम जिन्ना को संबोधित करते कवि कहता है "कभी तुमने जो नफरत के बीज बोए थे मुसलमानों में, अब हम उसे बो रहे हैं हिंदुओं के दिल में।

            *सौंदर्य की प्रतिमा* का बिंब फटी बिवाई से गुजर कर गृहणी की दिनचर्या में अनंतहीन थकावट के रूप में सामने आता है। धन कुबरों की मुनाफे की हवस पर *और में चुप रहूं* कविता में कवि कहता है कि "तुम्हारा बस चले तो हवाओं को रोक दो, सूर्य को कर दो स्विच ऑफ, तुम चाहो तो बेचो सवेरा, और जिसे चाहो दे दो रात। *नज़रिया* कविता में आत्म अवलोकन करते कवि मानता है "जिस दिन लेखनी आंसुओं के मूल्य को आंक सकेगी, उस दिन लेखन धन्य हो जाएगा। संग्रह में किसानों के पसीने के साथ बैलों की मेहनत को भी स्वीकारा गया है। *चाहत* कविता में कवि मरणोपरांत वृक्ष बनने की कामना करता है। 

              कुछ कविताएं व्यंग्य शैली में भी लिखी गई है। *बेरोजगारी*,*दायित्व निर्वाह* इसी श्रेणी की कविताएं हैं। शीर्षक कविता *...तब मैं कविता लिखता हूं* का प्रारंभ तो मन की उमंग से होता है, आगे चलकर किसानों के दर्द से होते हुए कवि बताता है जब गुंडे राज चलाते हैं तब मैं कविता लिखता हूं। करोना काल को गिरीश जी ने शिद्दत के साथ याद रखा है। कई कविताओं में उस काल के हर पहलू से टटोलना का प्रयास किया गया है। सामाजिक राजनीतिक विसंगतियों पर सचेत करते हुए कविता *पौ फटने से पहले* मैं कवि कहता है यदि पकड़ना हो साजिश के सूत्र तो, उठना होगा मुंह अंधेरे पौ फटने से पहले। संगठन की ताकत को कविता *थोथा चना* में रेखांकित किया गया है।

               गीत अध्याय में पहला ही गीत *जोड़ सको तो जोड़ो* में कवि झूठें डर अहम् और धार्मिक विद्वेष को तोड़ने का आह्वान करता है। अफ्रीकी देशों में से चीता आगमन को जिस तरह उत्सव और उपलब्धि प्रचारित किया गया गिरीश जी चुटकी लेते लिखते हैं "चीते के आने से देश संवर जाएगा... भूखा पेट भर जाएगा"।

              कुल मिलाकर अपने समय को आइना दिखाती कविताएं नए प्रतीक और बिंब की मांग करती है। उम्मीद की जानी चाहिए कि भविष्य की कविताओं में कुछ और नए प्रयोग देखने को मिलेंगे।


 हरनाम सिंह

सशक्त हस्ताक्षर की 43 वीं गोष्ठी में काव्य धारा हुई प्रवाहित 


जबलपुर

सशक्त हस्ताक्षर की 43 वीं काव्य गोष्ठी चंचल बाई महाविद्यालय में सानंद सम्पन्न हुई ၊ सबसे पहले संस्थापक गणेश श्रीवास्तव प्यासा ने सभी अतिथियों का अपनी वाणी से स्वागत किया ၊ सरस्वती वंदना तरुणा खरे ने पढ़ी ၊

      कार्यक्रम की मुख्य अतिथि शिक्षाविद् डॉ. संध्या शुक्ल मण्डला,कार्यक्रम की अध्यक्षता शिक्षाविद्‌ अरविंद कुमार शुक्ल, विशिष्ट अतिथि सुशील श्रीवास्तव,डॉ. प्रतीक्षा सेठी, समाज सेवक विजय खरे, सारस्वत अतिथि राजेश पाठक प्रवीण, मंगलभाव सलाहकार कवि संगम त्रिपाठी, सी. पी. वैश्य की गरिमामय उपस्थिति में सम्पन्न हुई ၊ महेश स्थापक, दिवाकर शर्मा, डॉ. आनंद त्रिपाठी,ऋषि राज रैकवार ने स्वागत में सहभागिता की ၊

         गोष्ठी की शुरुआत कवयित्री शिवानी भगत ने अकेलेपन पर भावुक अभिव्यक्ति दी ၊ उमा खरे, सुवीर श्रीवास्तव ने नज्म प्रस्तुत करके खूब तालियाँ बटोरी ၊ शिवानी खरे, तरुणा खरे,जी.एल.जैन, जयप्रकाश श्रीवास्तव ने अपनी सशक्त रचनाओं व प्रस्तुति से सबको प्रभावित किया ၊ इन्द्राना से पधारे प्रकाश सिंह ठाकुर ने तरन्नुम में अपना रचना प्रस्तुत की ၊ राजकुमारी राज ने हिन्दी के स्थान की बात की ၊ मदन श्रीवास्तव ने समाज में व्याप्त विडम्बनाओं में आग लगाने की बात की ၊ सुभाष मणि वैरागी,अमर सिंह वर्मा,सुशील श्रीवास्तव ने मंच को खूब संवारा ၊ रजक ने अपनी कुण्डलियों से भरपूर मनोरंजन किया ၊ सिद्धेश्वरी सराफ शीलू ने अपने गीत से शब्द, भावों, गेयता से अलग छाप छोड़ी ၊ भेडा़ घाट से पधारे कुंजीलाल चक्रवर्ती निर्झर ने जगन्नाथ प्रभु का भजन गाकर सभी का मनमोह लिया ၊ उर्मिला श्रीवास्तव ने दादी पर बहुत ही मार्मिक रचना प्रस्तुत की और परिवार में दादी के रहने के फायदे गिनाएँ,जब आज संयुक्त परिवार टूट रहे हैं, उस पर अपनी वेदना प्रस्तुत की ၊ युवा कवि अम्लान गुहा नियोगी ने ओज से भरी रचना भारत माता, वंदेमातरम्‌ की आनं -वान-शान बढ़े और बढ़ाने की बात की ၊ डॉ. सुरेन्द्रलाल साहू निर्विकार ने दार्शनिक रचना प्रस्तुत की ၊ मनोज शुक्ल मनोज ने शानदार गीत पढ़ा ၊मंचीय कवयित्री वंदना सोनी विनम्र ने अपनी रचनाओं से मंच लूट लिया ၊ संदीप खरे युवराज ने क्रांति की अलख जगाने महारानी लक्ष्मी बाई की वीर रस से भरपूर रचना पढ़ी ၊ मंचासीन अतिथियों ने भी अपनी रचनाओं से मंच को पराकाष्ठा पर पहुँचाया ၊ संचालन गणेश श्रीवास्तव व आभार प्रदर्शन मदन श्रीवास्तव ने किया ၊

तानसेन आ जाओ तुमसे बहुत प्यार करता है, ये इमली का पेड़ तुम्हारी बहुत याद करता है


*तानसेन की इमली का पेड़*

 

तानसेन आ जाओ तुमसे बहुत प्यार करता है।

ये इमली का पेड़ तुम्हारी बहुत याद करता है।


ये मजार पर खड़ा तुम्हारा इंतजार करता है। 

ये इमली का पेड़ तुम्हारी याद बहुत करता है।


जब समाधि से तानों की 

आवाज तुम्हारी आती,

शिल्प कला से मिलने को

संगीत कला आ जाती।


संत मौहम्मद गौस मकबरा फिर गूंजा करता है।

ये इमली का पेड़ तुम्हारी याद बहुत करता है।


जब तुम राग बसंत सुनाते 

ये फागुन ले आता,

दीपक राग सुनाते तो गर्मी 

का मौसम लाता,


मेघ राग सुनते ही सावन की मल्हार गाता है,

ये इमली का पेड़ तुम्हारी याद बहुत करता है।


सदियों से तुमसे मिलने को 

कलाकार आते हैं, 

तुम्हें नमन कर इस इमली के 

पत्ते भी खाते हैं।


इसका रस‌ गाने वालों का स्वर मीठा करता है,

ये इमली का पेड़ तुम्हारी याद बहुत करता है।


आओगे इक दिन मजार से बाहर ये कहता है,

ये इमली का पेड़ तुम्हारी याद बहुत करता है।


*गीतकार अनिल भारद्वाज एडवोकेट हाईकोर्ट ग्वालियर*

अंतरराष्ट्रीय रामायण कॉन्फ्रेंस में इंजीनीयर संतोष कुमार मिश्र 'असाधु' का हुआ सम्मान

*साधक के चेतना की आकाशीय स्थिति की उपलब्धि का नाम है मोक्ष दायिनी काशी*


जबलपुर

विगत दिवस अंतर्राष्ट्रीय रामायण शोध संस्थान अयोध्या, शोध संस्थान वृंदावन एवं तारक सेवा मंडल बनारस के संयुक्त तत्वाधान में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर  ' भारत की अस्मिता: श्रीराम कथा ' विषय पर एक वृहद कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया जिसमें देश-विदेश से पधारे विद्वतजनों ने शिरकत की। इस कार्यक्रम में रामायण केंद्र जबलपुर इकाई के संयोजक एवं धर्म,आध्यात्म व दर्शन के क्षेत्र में देश-विदेश में तेजी से उभरते , प्रसिद्ध धार्मिक चिंतक इंजी. संतोष कुमार मिश्र 'असाधु ' जोकि वर्तमान में मध्य प्रदेश पॉवर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड जबलपुर में सुपरिटेंडिंग इंजीनियर के पद पर कार्यरत हैं,के द्वारा श्रीरामचरित मानस में तापस प्रसंग विषय पर एक बेहद महत्वपूर्ण शोधपत्र प्रस्तुत किया गया । अपने वक्तव्य के दौरान श्री मिश्र द्वारा  रामायण के सम्बन्ध में विभिन्न भ्रामक दुष्प्रचारो का खंडन करते हुए मोक्ष दायिनी काशी का संबंध किसी साधक के चेतना की आकाशीय स्थिति की उपलब्धि से प्रतिपादित किया गया। श्री मिश्र द्वारा किसी साधक के समाधि की गहराई में उसके चेतना के उत्थान की आकाशीय अवस्था में परा वाणी से उद्घाटित हुए प्रणव अर्थात ' राम नामक' शब्द को ही इस भवसागर का तारक मंत्र उदघोषित किया जिसकी वहां काफी सराहना की गई । जन जागृति की दिशा में इस तरह के अभिनव कार्य करते हुए श्री मिश्र ने संस्कारधानी जबलपुर का नाम अंतरराष्ट्रीय क्षितिज पर पुनः गौरवान्वित किया है। कवि संगम त्रिपाठी संस्थापक प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा ने बधाई दी और जारी विज्ञप्ति में बताया कि संतोष कुमार मिश्र ' असाधु'  अपनी भाषा व संस्कृति के प्रचार-प्रसार में सतत प्रेरणादायक कार्य कर रहे हैं।

शिक्षाविद,समाजसेवी,साहित्यकार पी.यादव ‘ओज अंतरराष्ट्रीय आइडल प्राइड अचीवर अवार्ड से हुए सम्मानित 


जी.एल.ए.विश्वविद्यालय,मथुरा एवं गोपाल किरण सेवी समाज संस्थान,ग्वालियर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार एवं सम्मान समारोह में प्रतिष्ठित शिक्षाविद,साहित्यकार एवं समाजसेवक पी.यादव ‘ओज’ को अंतरराष्ट्रीय आइडल प्राइड अचीवर अवार्ड 2025–26 से सम्मानित किया गया।यह सम्मान उन्हें शिक्षा,साहित्य और समाज सेवा के क्षेत्र में उनके दीर्घकालिक,निरंतर एवं अभूतपूर्व योगदान के लिए प्रदान किया गया।समारोह में देश-विदेश से आए शिक्षाविदों,शोधार्थियों,साहित्यकारों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं की गरिमामयी उपस्थिति रही।श्री पी.यादव ‘ओज’ पिछले कई वर्षों से साहित्य सृजन,शैक्षिक नवाचार,मूल्यपरक लेखन तथा सामाजिक जागरूकता के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।उनकी रचनाएँ मानवीय संवेदना,सामाजिक सरोकार और दार्शनिक दृष्टि से समृद्ध मानी जाती हैं।शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में उनके प्रयासों ने अनेक युवाओं और विद्यार्थियों को प्रेरित किया है।इस सम्मान की प्राप्ति पर पी यादव ‘ओज’ ने आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया तथा कहा कि यह सम्मान उन्हें और अधिक समर्पण,उत्तरदायित्व और सृजनशीलता के साथ कार्य करने की प्रेरणा प्रदान करता है।आयोजक संस्थाओं ने उनके योगदान को समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया।यह सम्मान न केवल पी.यादव ‘ओज’ के व्यक्तिगत कृतित्व की पहचान है,बल्कि हिंदी साहित्य, शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र के लिए भी गौरव का विषय है। कवि संगम त्रिपाठी संस्थापक प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा ने बधाई दी और कहा कि पी यादव ' ओज' हिंदी के प्रचार-प्रसार में अपना विशिष्ट योगदान दे रहे है।

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