💔सूरज और रानी की अधूरी प्रेम कहानी 💔 


एक लड़का था, जिसका नाम सूरज था और एक लड़की थी, जिसका नाम रानी था। दोनों एक-दूसरे से बहुत प्यार करते थे। उनके दिल में एक ही सपना था, एक दिन शादी करके साथ-साथ पूरी जिंदगी बिताना। सूरज अक्सर रानी से कहता था, “रानी, मैं तुम्हें हमेशा खुश रखूँगा। बस थोड़ा समय और, फिर मैं तुम्हारे घरवालों से हमारा रिश्ता माँगने आऊँगा।” रानी भी सूरज पर पूरा विश्वास करती थी। वह अपने माता-पिता के सपनों को भी पूरा करना चाहती थी और सूरज को भी खोना नहीं चाहती थी। एक दिन रानी के पिता उसके लिए एक रिश्ता लेकर आए। लड़का अच्छा कमाता था, परिवार अच्छा था और समाज में उसकी अच्छी प्रतिष्ठा थी। रानी के पिता ने मन ही मन तय कर लिया कि वे रानी की शादी उसी घर में करेंगे। लेकिन सूरज को इस बात की कोई जानकारी नहीं थी। रानी कई बार सोचती रही कि वह सूरज को सब कुछ बता देगी, लेकिन हर बार उसके सामने सूरज का चेहरा आ जाता और वह कुछ कह नहीं पाती। वह सूरज से बहुत प्यार करती थी और उसे खोने से डरती थी। उधर सूरज भी यही सोच रहा था कि अब उसे रानी के घरवालों से बात करनी चाहिए। एक दिन सूरज रानी के घर पहुँचा। उसे देखकर रानी के पिता ने सारी बात साफ-साफ बता दी। उन्होंने कहा, “बेटा, आज मैं रानी के लिए रिश्ता देखकर आया हूँ। लड़का अच्छा है, परिवार अच्छा है और वह अच्छी कमाई करता है। कुछ ही महीनों में हम रानी की शादी उसी घर में करने का सोच रहे हैं।” यह सुनकर सूरज के पैरों तले जमीन खिसक गई। वह कुछ नहीं बोला। चुपचाप वहाँ से चला गया। उसकी आँखों में आँसू थे और दिल में सिर्फ एक सवाल था— “रानी ने मुझे पहले क्यों नहीं बताया?” सूरज ने रानी से फोन पर पूछा, “तुमने मुझे यह बात पहले क्यों नहीं बताई?” रानी के पास कोई जवाब नहीं था। वह भी रो रही थी। उसने कहा, “सूरज, मैं तुम्हें खोना नहीं चाहती थी… और अपने माता-पिता को भी दुखी नहीं करना चाहती थी। मैं दोनों को बचाना चाहती थी, लेकिन शायद मैं खुद ही दोनों के बीच फँस गई।” सूरज ने बहुत कोशिश की कि रानी से एक बार मिल सके। वह बार-बार फोन करता रहा, लेकिन परिस्थितियाँ ऐसी बन गईं कि दोनों एक-दूसरे से मिल नहीं पाए। आखिरकार सूरज ने रानी को एक आखिरी संदेश भेजा— “रानी, तुम परेशान मत होना। शायद हमारी कहानी का रास्ता यहीं से अलग हो रहा है। मैंने तुम्हें सच्चे दिल से चाहा था और हमेशा तुम्हारी खुशी की दुआ करूँगा। तुम जहाँ भी रहो, खुश रहना। अगर कभी जिंदगी हमें दोबारा मिलाने का मौका दे, तो शायद हमारी अधूरी कहानी को एक नया रास्ता मिल जाए। और अगर ऐसा न हो सके, तो भी मेरी जिंदगी की सबसे खूबसूरत याद तुम ही रहोगी।” रानी ने वह संदेश पढ़कर बहुत देर तक आँसू बहाए। उसने आसमान की तरफ देखा और मन ही मन कहा— “कुछ रिश्ते किस्मत में साथ रहने के लिए नहीं, बल्कि जिंदगी भर याद रहने के लिए लिखे जाते हैं।” सूरज और रानी की प्रेम कहानी पूरी नहीं हुई… लेकिन उनका प्यार उनके दिलों में हमेशा अधूरा होकर भी सच्चा रहा। 💔 अर्पणा दुबे

भोजपुरी गायिका निशा ने महामंडलेश्वर राजेश्वरी नंद गिरी से लिया आशीर्वाद


देवघर

जानी -मानी मशहूर भोजपुरी गायिका निशा उपाध्याय बोलवम काँवरिया रोड में एक कार्यक्रम संपन्न कर लौटने के क्रम में अंतर्राष्ट्रीय किन्नर अखाडा के महामंडलेश्वर कांवरिया सेवा शिविर में अंतर्राष्ट्रीय जूना किन्नर अखाड़ा की महामंडलेश्वर व झारखण्ड प्रदेश अध्यक्ष राजेश्वरी नंद गिरी ऊर्फ रोज मौसी से आत्मीय मुलाकात कर आशीर्वाद लिया। गायिका निशा ने कहा कि राजेश्वरी नंद गिरी से मिलकर उन्हें सुखद् अनुभूति मिलती है। उनका प्यार, लगाव, और स्नेह से हमें बेहद खुशी मिली है ।अर्धनारीश्वर से सभी आशीर्वाद लेने आते है, मुझे भी उनका आशीर्वाद मिला है। गायिका निशा उपाध्याय को देखने एवं  मिलने हेतू उनके प्रशंसकों एवं शिवभक्तों की भारी भीड़ देखी  गई।

डॉ. सोमनाथ शुक्ल की पुस्तक ‘श्रम साधक’ का हुआ विमोचन, 'गुफ़्तगू' बॉलीवुड अभिनेता का हुआ नागरिक अभिनंदन

*कबीर और रहीम की तरह साधक हैं डॉ. सोमनाथ: अतुल तिवारी*


प्रयागराज

डॉ. सोमनाथ शुक्ल के दोहे पढ़कर सहज ही कहा जा सकता है कि इन्होंने कबीर और रहीम की तरह साधना करके काव्य रचा है। इतनी आसानी से मजदूरों और श्रमिकों को केंद्र में रखकर दोहा लिख देना बहुत बड़ी बात है। अपनी सद्यः प्रकाशित पुस्तक ‘श्रम साधक’ में उन्होंने जिस तरह से मजदूरों के हालात को रेखांकित किया है, वह आज के दौर में बेहद उल्लेखनीय है।

यह बातें बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता अतुल तिवारी ने रविवार की शाम सिविल लाइंस स्थित एक होटल में आयोजित पुस्तक विमोचन समारोह में कहीं। साहित्यिक संस्था 'गुफ़्तगू' की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में डॉ. सोमनाथ शुक्ल की पुस्तक ‘श्रम साधक’ का लोकार्पण किया गया।

*पहली बार किसी शहर ने किया मेरा नागरिक अभिनंदन*

इस अवसर पर 'गुफ़्तगू' संस्था द्वारा अभिनेता अतुल तिवारी का नागरिक अभिनंदन भी किया गया। श्री तिवारी ने कहा कि यह पहली बार है कि किसी शहर ने मेरा इस तरह नागरिक अभिनंदन किया है, वरना मेरे गृह नगर लखनऊ ने भी कभी मेरा नागरिक अभिनंदन नहीं किया। इस सम्मान के लिए उन्होंने 'गुफ़्तगू' संस्था का हृदय से आभार व्यक्त किया।

*वर्तमान विमर्श पर सटीक प्रहार है ‘श्रम साधक’*

कार्यक्रम में उपस्थित अन्य विशिष्ट वक्ताओं ने भी पुस्तक और लेखक की जमकर सराहना की:

डॉ. सरोज सिंह: "डॉ. सोमनाथ जी ने दोहा लिखने के लिए जिन गंभीर मुद्दों को उठाया है, आज के दौर में उस पर काव्य लेखन लगभग नहीं हो रहा है, अलबत्ता कहानियां जरूर लिखी जा रही हैं।"

डॉ. इम्तियाज़ अहमद ग़ाज़ी: "डॉ. सोमनाथ शुक्ल हमारे दौर के एक बेहद प्रतिभावान कवि हैं, समाज में ऐसे रचनाकारों का उचित सम्मान होना चाहिए।"

डॉ. धनंजय चोपड़ा: "इस पुस्तक में लिखे गए कुछ दोहे इतने जीवंत हैं कि वे सीधे मेरे अपने जीवन से जुड़े हुए महसूस होते हैं।"

न्यायमूर्ति अशोक कुमार (अध्यक्षीय संबोधन): कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे न्यायमूर्ति अशोक कुमार ने डॉ. शुक्ल की इस पुस्तक को समाज के लिए बेहद सराहनीय और एक ख़ास कृति बताया।

*संचालन और धन्यवाद ज्ञापन*

कार्यक्रम का सफल संचालन मनमोहन सिंह तन्हा ने किया, जबकि अंत में नरेश कुमार महरानी ने उपस्थित अतिथियों और साहित्य प्रेमियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।

*इनकी रही प्रमुख उपस्थिति*

इस भव्य साहित्यिक आयोजन में शहर के कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से प्रभाशंकर शर्मा, नीना मोहन श्रीवास्तव, शैलेंद्र जय, आसिफ़ उस्मानी, डॉ. एस.एम. अब्बास, डॉ. वीरेंद्र कुमार तिवारी, शिबली सना, अफसर जमाल, शिवाजी यादव, मंजुलता नागेश, सुनील दानिश, धीरेंद्र सिंह नागा, क्षमा द्विवेदी और शाहीद खुश्बू आदि मौजूद रहे।

सशक्त हस्ताक्षर की 51 वीं काव्य गोष्ठी में गूॅंजे कविता के स्वर, साहित्य प्रेमियों का अपनी वाणी किया अभिनंदन 


जबलपुर -   सशक्त हस्ताक्षर की 51 वीं काव्य गोष्ठी श्री शास. महाकौशल महाविद्यालय में सानंद सम्पन्न हुई । सर्वप्रथम संस्थापक गणेश श्रीवास्तव प्यासा ने सभी अतिथियों , साहित्य मनीषियों, साहित्य प्रेमियों का अपनी वाणी से अभिनंदन किया ।

          कार्यक्रम के मुख्य अतिथि  प्राचार्य डॉ. अलकेश चतुर्वेदी, अध्यक्षता महामहोपाध्याय आचार्य डॉ. हरिशंकर दुबे, विशिष्ट अतिथि संध्या जैन श्रुति, डॉ . अरुण शुक्ल, अमरेंद्र नारायण सारस्वत अतिथि राजेश पाठक प्रवीण, मंगल भाव कवि संगम त्रिपाठी, इं. अरविंद मोहन नायक की गरिमामय उपस्थिति रही । सरस्वती वंदना प्रकाश सिंह ठाकुर इंद्राना ने की । यशपाल जैन, अंजलि नायक, डॉ. ज्योति जुनगरे, चंद्रकांत जैन, सत्यम् श्रीवास्तव,अरुण शुक्ल, दिवाकर शर्मा, महेश स्थापक, संतशरण श्रीवास्तव बच्चन की स्वागत, अभिनंदन में सहभागिता रही । इस अवसर पर अरविंद मोहन नायक की पुस्तक दास्तां का लोकापर्ण किया गया । डाँ . निर्मला डोंगरे पूर्णिका , व शिवानी भगत महेश्वरी को शाल, कलम श्री, मानपत्र, अंगवस्त्र,मोती की माला स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया ।

          गोष्ठी का शुभारंभ वरिष्ठ साहित्यकार हीराधर बड़गैया  ने की । शिवानी भगत महेश्वरी,कुंजीलाल चक्रवर्ती निर्झर भेड़ाघाट,डॉ. ताराचंद कुशवाहा,सुशील श्रीवास्तव ,उर्मिला श्रीवास्तव,डॉ. निर्मला डोंगरे पूर्णिका, पूजा नारायण शर्मा, तरुणा खरे तनु, मानसिंह ठाकुर दीपक,दीनदयाल तिवारी बेताल, विवेक कुमार गुप्ता सहर, प्रेम कुमार पालीवाल, लखन रजक, विजय सिन्हा कमर जानी इलाहाबादी, डॉ. अरुणा पान्डे, प्रभा बच्चन श्रीवास्तव, आशा मालवीय, कालीदास ताम्रकार काली, अमर सिंह वर्मा, सुशील जैन, डॉ. सुरेंद्र लाल साहू निर्विकार ने एक से बढ़कर एक विविध रंगी रचनाएँ पढ़कर कार्यक्रम को सफल बनाया । मंचस्थ अतिथियों ने भी काव्य पाठ कर मंच को ऊँचाईयां प्रदान की । संचालन सिद्धेश्वरी सराफ शीलू तथा आभार प्रदर्शन तरुणा खरे तनु ने किया ।

स्वदेशी जागरण मंच द्वारा शिवभक्तों की सेवा स्टाल लगाकर वितरण की सामग्री


देवघर

नटराज की नगरी बाबाधाम में स्वदेशी अपनाने और भारत को समृद्ध राष्ट्र बनाने एवं विश्वगुरु बनाने के मिशन के साथ, पूरे श्रद्धा, निष्ठा, व समर्पण के साथ देवतुल्य बोलबम कांवरिया की सेवा में दूसरी सोमवारी पर स्थानीय जलसार चिल्ड्रन पार्क में स्टाल लगाकर स्वदेशी जागरण मंच, मंच द्वारा जल, शरबत ,नींबू पानी, फल इत्यादि की  शिवभक्तों को पूरे भक्ति भाव से  सेवा दी जा रही है । साथ ही,मंच द्वारा फलाहारी हलुवा कांवरियों को वितरित किया गया । मंच के मनोज सिंह, संजय सिंह,  प्रभाष गुप्ता ,माया केसरी ,अमर कुमार सिंहा ,आशा झा, लक्ष्मी देवी, राजीव झा, मिथलेश बाजपेई ,बृजेश सिंह ,अभय सिंह, त्रिदेव के डॉक्टर राकेश सिंह, गौरी शंकर शर्मा, जीवेश सिंह, सुधीर सिंह, गिरीश सिंह, बिनोद साह, बाबू सोना श्रृंगारी, सोनी केसरी, विपिन अग्रवाल, गुड्डू बंका , इत्यादि सक्रियता से लगे हुए हैं, और भक्तों की सेवा कर रहे हैं।

सैल्यूट -तिरंगा ने बोलवम कावरिया की सेवा मे नि: शुल्क  सेवा शिविर का किया भव्य शुभारम्भ


देवघर 

स्थानीय तिवारी चौक रोड एवं जलसार  पार्क के निकट राष्ट्रवादी संगठन "सैल्यूट तिरंगा" का निःशुल्क बोलबम सेवा शिविर काविधिवत शुभारम्भ रंजन कुमार चौधरी, राष्ट्रीय युवा अध्यक्ष,     वार्ड पार्षद सोनी केसरी, वार्ड पार्षद चांदनी चौधरी, वार्ड पार्षद मंजू देवी, समाजसेवी सरिता चौधरी द्वारा किया गया। पूरे श्रावण मास शिवभक्तों की सेवा में लगे इस शिविर में जल, शरबत, ढंडा, कोल्ड ड्रिन्क, लस्सी, हलुआ, नीम्बू पानी, फल-केला, अनार, अमरूद , इत्यादि एवं चिकित्सा की समुचित व्यवस्था उपलब्ध रहेंगी। मौके पर  देव कुमार, उत्तम साह (डमरु), श्री प्रभाष गुप्ता, लक्षमी देवी ,अलका सोनी, मनीष चौधरी,बृजेश सिंह, निशांत तिवारी, जितेंद्र सोनी, चुन्नु कुमार, जितेंद्र मालाकार, आशीष चौधरी , सत्येन्द्र सिंह,कोमल साह इत्यादि अनेको कार्यकर्ता भारी संख्या में मौजूद थे।

रसायन विज्ञान का जादू, सुशी सक्सेना की नई किताब बताएगी रोज़मर्रा की ज़िंदगी की केमिस्ट्री



अत्यंत प्रसन्नता का विषय है कि लेखिका सुशी सक्सेना की नई विज्ञान पुस्तक "The Chemistry Connection (Chemistry in Our Daily Life) प्रकाशित हो चुकी है। यह पुस्तक रसायन विज्ञान को हमारे रोज़मर्रा के जीवन से जोड़ती है। सरल अंग्रेज़ी में लिखी गई इस पुस्तक में बताया गया है कि रासायनिक तत्व और अभिक्रियाएँ हमारे जीवन के हर पहलू में कैसे मौजूद हैं। सुबह की चाय से लेकर रात के बल्ब तक, प्याज़ से निकलने वाले आँसुओं से लेकर माचिस की तीली तक — हर छोटी-बड़ी घटना के पीछे छिपे विज्ञान को लेखिका ने आकर्षक उदाहरणों, समीकरणों और प्रयोगों के माध्यम से समझाया है।

पुस्तक में रसोई, बाथरूम और घर के हर कोने में छिपी विज्ञान की कहानियों को उजागर किया गया है। लेखिका का उद्देश्य रसायन विज्ञान को छात्रों और आम लोगों के लिए एक डरावने विषय के बजाय एक जादुई दुनिया के रूप में प्रस्तुत करना है, जो हमें हमारे आसपास की हर चीज़ से गहराई से जोड़ती है।

इस पुस्तक के लिए लेखिका ने कई प्रख्यात वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों का आभार व्यक्त किया है। इनमें प्रमुख रूप से डॉ. ए. पी. जयरामन, मुंबई, डॉ. विजय गर्ग, पंजाब, डॉ. वीर सर, गोवा, डॉ. राम शंकर, इंदौर मध्यप्रदेश और डॉ. अश्क हुसैन जम्मू-कश्मीर शामिल हैं। पुस्तक को पूरा करने में सहयोग के लिए सुशी सक्सेना ने सतीश एम., तमन्ना, मेलिना, सुनीता फडणीस, आदराम नायक और अनामिका को धन्यवाद दिया है। इसके साथ ही उन्होंने अपने अमेरिका में रहने वाले मित्रों एनी, एमेलिया, लियोम सर और रोहित के सहयोग और प्रोत्साहन के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया है, जिनके समर्थन से यह कार्य संभव हो सका। यह पुस्तक छात्रों, शिक्षकों और विज्ञान में रुचि रखने वाले सभी लोगों के लिए अत्यंत उपयोगी है।

*सुशी सक्सेना*

बाबाधाम में शिवभक्तों की सेवा हेतु स्वदेशी जागरण मंच ने बोलबम निःशुल्क सेवा शिविर का किया भव्य शुभारंभ 


देवघर

स्वदेशी अपनाने को बढावा देने एवं भारत को समृद्ध राष्ट्र बनाने  के मिशन को गति प्रदान करते हुए स्वदेशी जागरण मंच ने स्थानीय  जलसार चिल्ड्रेन पार्क के निकट  सेवा, समर्पण एवं अटूट श्रद्धा के  साथ शिवभक्तों की सेवा हेतु बोलबम सेवा शिविर का विधिवत शुभारम्भ किया । शिविर का उद्घाटन भारत माता की तस्वीर पर माल्यार्पण कर एवं दीप प्रज्वलित कर एवं नारियल फोड़ कर किया गया। शिविर उद्घाटन में मंच के अखिल भारतीय राष्ट्रीय मेला प्रमुख सचिन बरियार, प्रांत संयोजक राजेश उपाध्याय,क्षेत्रीय संयोजक अमरेंद्र सिंह,प्रांत कोष प्रमुख विष्णु सिंह, प्रांत सह संयोजक ज्ञानदीप टुडू,संपर्क प्रमुख अजय चौधरी दीपक,  प्रांत मेला प्रमुख दिलीप वर्मा, प्रदेश समिति सदस्य जटाशंकर जी, कृषि प्रकोष्ठ प्रमुख अंजनी सिन्हा, प्रांत समन्वयक मनोज सिंह के कर कमलों संपन्न हुआ।इस मासव्यापी शिविर मे बोलबम शिव भक्तों हेतु निःशुल्क जल, शर्बत, नींबू पानी,चाय,फल - केला, सेव, अनार , अमरूद इत्यादि  एवं अन्य जरूरी सुविधाएँ उपलब्ध रहेगी। सेवा शिविर में मंच के सदस्य एवं अन्य लोग सक्रिय रूप से तत्पर रहेंगे। इस अवसर पर बाबा नगरी से झाररखण्ड प्रांत  के लिए राष्ट्रव्यापी स्वदेशी समर्थक अभियान का भी  शंखनाद  किया गया।  और बिगुल बजा कर शुरुआत की गई।मौके पर मंच के प्रान्त समन्वयक मनोज सिंह,  जिला संयोजक संजय सिंह, श्री प्रभाष गुप्ता, अमर सिन्हा, गौरी शकर शर्मा, बाबू सोना श्रृंगारी,  राजीव झा, ;बजेश सिंह, ममता कुमारी, वार्ड पार्षद सोनी केसरी , बबली बरनवाल, अतिस शंकर झा , चंद्रकांत सिंह, प्रेमलता बरनवाल, बीणा मंडल, आशा झा, तनुजा सिंह, दिनेश बरनवाल,संजीव सिंह, संगीता देवी, जयशंकर प्रसाद, नवीन सिन्हा, भवेश चौधरी, गोकर्ण सिंह, गुड्डू मोदी, पूनम प्रकाश, गिरीश सिंह, अजीत दुबे, इत्यादि भारी संख्या में  कार्यकर्ता 'मौजूद थे।

प्रेमचंद जयंती के आयोजन में गूंजी कलम की आवाज, साहित्यकारों की प्रतिमाएं गिराकर उनके विचारों को नहीं मारा जा सकता

*14वां राज्य सम्मेलन होगा इंदौर में*


इंदौर

महान कथाकार प्रेमचंद की जयंती के उपलक्ष में आयोजित गोष्ठी में प्रेमचंद के अलावा विख्यात यायावर लेखक राहुल सांकृत्यायन, जन कवि धूमिल को भी याद किया गया। वक्ताओं ने इन लेखकों की रचनाओं का पाठ करते हुए कहा कि साहित्यकारों की प्रतिमाएं गिराकर उनके विचारों को नहीं मारा जा सकता।

प्रगतिशील लेखक संघ का 14वां राज्य सम्मेलन अक्टूबर माह में इंदौर में आयोजित होगा। इसी कार्यक्रम की पृष्ठभूमि में जारी रचनात्मक बैठकों की श्रृंखला के तहत प्रलेसं इकाई द्वारा अभिनव कला समाज सभागृह में गोष्ठी का आयोजन रखा गया था। बैठक को संबोधित करते हुए हरनाम सिंह ने कहा कि एक ही विचारधारा से संचालित राज्यों में लेखकों, स्वतंत्रता संग्राम के नायकों की प्रतिमाएं सुनियोजित तरीके से तोड़ी जा रही है। उन्होंने राहुल सांकृत्यायन की वैचारिक यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि राहुल ने आंख मूंदकर किसी भी विचार को स्वीकार नहीं किया था। सनातन धर्म से प्रारंभ होकर आर्य समाज, बौद्ध धर्म से होते हुए उनकी जीवन यात्रा मार्क्सवाद पर आकर समाप्त हो गई। फिर वे जीवन पर इसी विचारधारा के साथ बने रहे।

गोष्ठी का संचालन करते हुए आयोजन की समन्वयक सारिका श्रीवास्तव ने जनकवि धूमिल का जीवन परिचय देते हुए कहा कि वे एक विद्रोही कवि थे। उनका गुस्सा किसी व्यक्ति के नहीं अपितु शोषण की व्यवस्था के खिलाफ था। राहुल सांकृत्यायन ने तिब्बत से दुर्लभ बौद्ध साहित्य लाकर भारतीय ज्ञान परंपरा को समृद्ध करने का ऐतिहासिक कार्य किया। हिंदी के लोकप्रिय लेखक प्रेमचंद का अधिकांश लेखन उर्दू में था।

गोष्ठी में युवा लेखक रवि अहिरवार ने धूमिल की कविता के वाचन पश्चात कहा कि अपने प्रगतिशील चिंतन के चलते ये लेखक आज भी प्रासंगिक बने हुए हैं। प्रेमचंद कालीन विसंगतियां वर्तमान समाज में भी मौजूद है। साहित्य केवल मनोरंजन नहीं है वह अपने समय के सवालों को उठाने का माध्यम भी है। विवेक मेहता के अनुसार राहुल सांकृत्यायन ने अपने समय के रूढ़िवादी समाज के अंधविश्वासों को चुनौती दी थी। उनकी पुस्तक तुम्हारी क्षय पढ़ी जानी चाहिए।

चुन्नीलाल वाधवानी ने कहा कि प्रगतिशील लेखक संघ धर्मनिरपेक्ष संगठन है। पाठकों को निरंतर अध्ययन करते रहना चाहिए।

प्रेमचंद का जीवन परिचय गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे इकाई अध्यक्ष डॉक्टर जाकिर हुसैन ने दिया। प्रेमचंद की कहानी "भाई साहब" का वाचन नीपा पंड्या ने किया। अभय लोधी ने राहुल की रचना "जात पात की क्षय" पढ़ी। धूमिल की कविताओं का पाठ विवेक, नेहा दुबे ने किया। राम आसरे पांडे ने प्रेमचंद पर स्वरचित कविता पढ़ी। विजय दलाल ने भी अपने विचार व्यक्त किये। गोष्ठी में प्रमोद बागड़ी, अरविंद पोरवाल, जावेद आलम, आकाश,लेखराज, शबाना पारेख, देशराज, आकाश सिंह राठौड़, अथर्व शिन्त्रें की उपस्थिति महत्वपूर्ण थी।

श्री गोपाल कृष्ण मंदिर का 39वां स्थापना दिवस धूमधाम व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया


देवघर

स्थानीय कास्टर टाउन स्थित श्री गोपाल कृष्ण मंदिर का 39वां स्थापना दिवस समारोह पूरे हर्षोल्लास के साथ धूमधाम से मनाया गया। 

इस अवसर पर श्री गोपाल कृष्ण मंदिर का फूलों व पुष्पों से भव्य आकर्षक श्रृंगार किया गया। साथ ही, रंग-बिरंगे लाइटों व पुष्पो से पूरे मंदिर परिसर को सजाया गया। 

इस अवसर पर गायकों द्वारा भक्तिमय भजनों की अनुपम व रोचक प्रस्तुति की गई। इस भक्तिमय प्रस्तुति से महिला-पुरुष  भक्तगण व आगंतुक भक्ति में मग्न हो उठे। पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।।

आयोजन में उपमहापौर टीप चटर्जी, तारा चंद जैन, प्रदीप बाजला, राष्ट्रीय हिन्दू परिषद (भारत) के जिला अध्यक्ष प्रभाष गुप्ता, श्याम कीर्तन मंडल के अध्यक्ष संजय बंका (गुडु बंका) एवं अन्य अनेकों गणमान्य लोग उपस्थित रहे। 

इस अवसर पर  पुरोहितों द्वारा विधिवत पूजा-भोग व आरती की गई। आयोजन में अभिषेक तुलस्यान एवं ज्योत्सना तुलस्यान की सक्रिय व सराहनीय भूमिका रही, जिनके अथक व सक्रिय प्रयास से आयोजन का सफलतापूर्वक संचालन हुआ। आयोजन में भक्तों की भारी भीड़ देखी गई।

पं. निरंजन द्विवेदी वत्स का 75 वां जन्मदिन (अमृत महोत्सव) धूमधाम से मनाया गया 


    जबलपुर -  संस्कारधानी जबलपुर के वरिष्ठ कवि साहित्यकार समाजसेवी पं. निरंजन द्विवेदी वत्स जी का 75 वां जन्मदिन (अमृत महोत्सव) धूमधाम से मनाया गया। आयोजन के मुख्य अतिथि आचार्य डॉ हरिशंकर दुबे, कार्यक्रम अध्यक्ष शिवकुमार पटेल, सारस्वत अतिथि कुलदीप सिंह सिसोदिया, नलिन कांत बाजपेयी, संजय चौधरी। विशिष्ट अतिथि अर्चना सिसोदिया पार्षद, सोनिया रंजित सिंह पार्षद, भापकर पार्षद,  मोनिका सिंह पार्षद, विराजमान रहे। मंगल भाव राजेश पाठक प्रवीण ने अभिव्यक्त किये।

              कार्यक्रम का शुभारंभ सीता राम जी के पूजन अर्चन से प्रारंभ हुआ। सरस्वती वंदना कवयित्री वंदना सोनी विनम्र ने किया। अखिलेश खरे अखिल व सुनील तोमर के संचालन में उपस्थित कवि व कवयित्री जयप्रकाश श्रीवास्तव, दीपक तिवारी ' दीपक' , डॉ प्रशांत मिश्रा, मदन श्रीवास्तव, कृष्णा राजपूत, गणेश श्रीवास्तव प्यासा, शैली दीवान, वंदना सोनी विनम्र, तरुणा खरे ' तनु' , एम. पी. सिंह ' निकुंभ ' , अखिलेश खरे, सुनील तोमर, अनुराग तिवारी, सुंदरलाल साहू ' निर्विकार ' , राकेश राकेन्दू, विजय नेमा ' अनुज ' , सुभाष मणि बैरागी, विजय विश्वकर्मा, प्रकाश ठाकुर, कवि संगम त्रिपाठी, संतोष नेमा ' संतोष ' , पुरुषोत्तम पटेल तन्हा, रामप्रवेश निराला, सतीश नवल आदि ने काव्य पाठ किया।

      कवि संगम त्रिपाठी व निखिल द्विवेदी के निर्देशन में आयोजित वरिष्ठ कवि साहित्यकार समाजसेवी पं निरंजन द्विवेदी वत्स जी के 75 वें जन्मदिन अमृत महोत्सव में संस्कारधानी जबलपुर की साहित्यिक सामाजिक संस्थाएं पाठक मंच अमरतलाल, तुलसी साहित्य समिति, मंथन, वर्तिका, पाथेय, सशक्त हस्ताक्षर, मध्य भारत साहित्य परिषद, जबलपुर पारिवारिक प्रकाशक, सनाढ्य संगम व उपस्थित कवि कवयित्रियों, जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों, अतिथियों व निरंजन द्विवेदी वत्स के बाल सखाओं, सहयोगियों व अनेक शुभचिंतक की गरिमामय उपस्थिति में जन्मदिन मनाया गया वो भव्य व ऐतिहासिक रहा। निरंजन द्विवेदी वत्स आयोजन की भव्यता और दिव्यता को देखकर भावविभोर हो गये और उनकी वाणी सागर की लहरों सी तरंगों सा अमृत की बूंदों सा मन मस्तिष्क में समा गई। आभार दीपक तिवारी ' दीपक ' ने अभिव्यक्त किये।

सशक्त हस्ताक्षर की स्वर्णिम 50 वीं काव्य गोष्ठी में गूॅंजी साहित्य की स्वर धारा 


जबलपुर

सशक्त हस्ताक्षर की50 वीं काव्य गोष्ठी चंचलबाई महाविद्यालय में सानंद सम्पन्न हुई। संस्थापक गणेश श्रीवास्तव प्यासा ने सभी अतिथियों, साहित्य मनीषियों का अपनी ओर से सभी का अभिनंदन किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ अलकेश चतुर्वेदी, अध्यक्षता महामहोपाध्याय आचार्य डॉ. हरिशंकर दुबे, विशिष्ट अतिथि डॉ. सुरेन्द्रलाल साहू निर्विकार, डॉ. अरुणा पान्डे मंगल भाव कवि संगम त्रिपाठी की गरिमामय उपस्थिति रही। अरुण शुक्ल, अमरनाथ सोनी, महेश स्थापक, दिवाकर शर्मा,प्रीति शुक्ला की स्वागत अभिनंदन में सहभागिता रही। सरस्वती वंदना अनुराधा गर्ग दीप्ति ने की।

           गोष्ठी का शुभारंभ कवि कालिदास ताम्रकार काली ने की । सुवीर श्रीवास्तव वीर, शिवानी भगत, इन्द्राना से प्रकाशसिंह ठाकुर, भेड़ाघाट से कुंजीलाल चकवर्ती निर्झर , उर्मिला श्रीवास्तव, विवेक कुमार गुप्ता सहर, आशा मालवीय, अखिलेश खरे अखिल,प्रेम कुमार पालीवाल,दीनदयाल तिवारी बेताल,जय प्रकाश श्रीवास्तव,कौशिक सेन गुप्ता,प्रभा विश्वकर्मा शील,लखन रजक, विजय सिन्हा कमर इलाहावादी, सुशील श्रीवास्तव, मदन श्रीवास्तव,श्रीमती तरुणा श्रीवास्तव, प्रीति नामदेव भूमिजा,विजय विश्वकर्मा,पं निरंजन द्विवेदी वत्स ,डॉ. मुकुल तिवारी, अमर सिंह वर्मा, वंदना सोनी विनम्र, संध्या द्विवेदी,एम. एल. शर्मा नयन,ज्योति  मिश्रा ने एक से बढ़कर एक रचनाओं की प्रस्तुति देकर मंच को चरम पर पहुंचाया । मंचस्थ अतिथियों ने भी रचना पाठ कर मंच को ऊँचाईयाँ दी । संचालन गणेश श्रीवास्तव प्यासा व आभार प्रदर्शन तरुणा खरे तनु ने किया।

बाबा विश्वनाथ की नगरी में 'गंगांजलि' साझा काव्य संग्रह का भव्य लोकार्पण


वाराणसी

बाबा विश्वनाथ की पावन धरती पर आयोजित 'बाबा श्री काल भैरव कवि सम्मेलन व सम्मान समारोह' में साझा काव्य संग्रह 'गंगांजलि' का भव्य लोकार्पण किया गया। यह साहित्यिक आयोजन देश भर से आए तमाम विद्वानों, साहित्यकारों और कवियों की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जबलपुर से पधारे प्रसिद्ध हास्य-व्यंग्य कवि संगम त्रिपाठी उपस्थित रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता सागर के प्रख्यात शिक्षाविद् डॉ. महेंद्र सिंह गौर ने की।

*साहित्य मनीषियों का रहा जमावड़ा*

विद्वानों की इस सभा में 'गंगांजलि' के लोकार्पण के अवसर पर काशी हिंदी विद्यापीठ के कुलसचिव इंद्रजीत तिवारी 'निर्भीक', कुलाधिपति कवि सुखमंगल सिंह 'मंगल', उपकुलसचिव डॉ. ओमप्रकाश पांडेय 'निर्भर', डॉ. राम अवतार पांडेय (वाराणसी), शिवनाथ सिंह (रायबरेली), अभिमन्यु पांडेय (कुशीनगर) और प्रयागराज से अमित शर्मा विशेष रूप से मंचासीन रहे। इस भव्य आयोजन में राष्ट्रीय स्तर के कई जाने-माने कवि और कवयित्रियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

*जन्मदिन के जश्न से यादगार बना आयोजन*

समारोह के दौरान साहित्य के इस उत्सव के साथ-साथ काशी हिंदी विद्यापीठ के कुलसचिव इंद्रजीत तिवारी 'निर्भीक' का जन्मदिन भी धूमधाम से मनाया गया। उपस्थित सभी अतिथियों ने उन्हें शुभकामनाएं दीं, जिससे यह आयोजन और भी यादगार बन गया।

*भावनाओं का अद्भुत संगम है 'गंगांजलि'*

साझा काव्य संग्रह 'गंगांजलि' को भावनाओं का एक अद्भुत काव्य संगम बताया गया है। इस पुस्तक के संपादक डॉ. अजय शुक्ल हैं। इस संग्रह में मुख्य रूप से जबलपुर के हास्य-व्यंग्य कवि संगम त्रिपाठी, बुरहानपुर के कवि व लेखक पंकज बुरहानपुरी, लखनऊ (गोमती नगर) के गीतकार कवि श्याम फतनपुरी और प्रयागराज के कवि व लेखक डॉ. सोमनाथ शुक्ल की उत्कृष्ट रचनाओं को समाहित किया गया है।

जीने की आरजू छीन क्या खुश न हुआ मन तेरा, तू ने मेरी हँसी छीन ली रूप चुराया मेरा




*रूप चुराया मेरा*


जीने की आरजू छीन क्या खुश न हुआ मन तेरा,

तू ने मेरी हँसी छीन ली रूप चुराया मेरा।


तेरे सुंदर से सुंदर 

मनमोहक चित्र बनाए,

पूजा तुझे उम्र भर तुझ पर 

गीत लिखे फिर गाए।


होटों से बंसी ‌धुन छीन मधुर सुर छीना मेरा,

तू ने मेरी हँसी छीन ली रूप चुराया मेरा।


कर्क रोग जीने की मोहलत 

कम से कम देता है,

दे कर कई कष्ट जिंदगी 

घायल कर देता है।


सांसें रोईं धड़कन रोई हृदय रुलाया मेरा,

तू ने मेरी हँसी छीन ली रूप चुराया मेरा।


ये विनम्र विनती है 

अपने भक्त को क्षमा करना,

जीवन के आखिरी छोर पर 

अपने दर्शन देना। 


क्यों इतने दुख लिखे भाग्य में दोष बताना मेरा,

तू ने मेरी हंसी छीन ली रूप चुराया मेरा।


गीतकार अनिल भारद्वाज एडवोकेट हाईकोर्ट ग्वालियर

नियम, कानून ना मानने वालों का कैसा संवैधानिक अधिकार, नाबालिग से बलात्कारियों की सजा फांसी तय हो- मनोज द्विवेदी


अनूपपुर

दिल्ली के निर्भया काण्ड के बाद आज भी देश मे कुछ भी नहीं बदला है। समाज मे छुपे भेडिये और उन्हे बचाने वाले लोग बलात्कार की घटना मे बराबर के जिम्मेदार हैं । ऐसी घटनाओं की फास्ट ट्रैक अदालतों मे सुनवाई और तय समय मे फांसी की सजा नहीं दी जाएगी, राक्षसों के मन मे समाज, कानून का कोई भय उत्पन्न नहीं होगा। 

सरकार यह भी सुनिश्चित करे कि जो लोग नियम, कानून ,कायदे नहीं मानते , जिनके मन मे देश के संविधान के प्रति सम्मान ना हो ,उनके सभी संवैधानिक अधिकार स्वयमेव खत्म माने जाएं।

श्री गंगानगर राजस्थान मे एक 13 साल की बच्ची जो ट्यूशन से अपने घर जा रही थी। उसने एक रिक्शा वाले से उसने कहा कि आप मुझे घर छोड़ दीजिए रिक्शावाला उसे बहलाकर गेस्ट हाउस पर ले गया।वहां उसे न सिर्फ 10000 में बेच दिया बल्कि खुद उसका बलात्कार भी किया

उसके बाद उसे बच्ची का गेस्ट हाउस संचालक ने बलात्कार किया फिर गेस्ट हाउस वाले ने तीन दिन 12 लोगो से उसे बच्ची का बलात्कार करवाया ।फिर उस गेस्ट हाउस संचालक ने उस बच्ची को दूसरे गेस्ट हाउस वाले को 50 हजार में बेच दिया और वहां 20 से ज्यादा लोगों ने उसे बच्चे का बलात्कार किया।

इस तरह उसे बच्ची के साथ जो मात्र 13 साल की मासूम बच्ची थी 32 दरिंदों ने बलात्कार किया । बच्ची जब दर्द से चीखती तो उसे शराब पिला देते जिससे बच्ची की आवाज कमरे से बाहर नहीं जाए।‌ राजस्थान की इस रूह कंपा देने वाली घटना ने देश को झकझोर कर रख दिया।

लेकिन इससे क्या कोई फर्क पडने वाला है ? शायद बिल्कुल भी नहीं ।हमारे आसपास ऐसी ही घटनाएं हुई हैं, जहाँ  बलात्कारी नर पिशाच 32 की जगह 5-6 ही थे।

पूरा समाज ,परिस्थिति जन्य साक्ष्य चीख - चीख कर सामूहिक बलात्कार की पुष्टि कर रहे थे। लोग सडकों पर आए ,धरना - प्रदर्शन क्या नहीं किया गया ? जिन पर कार्यवाही करने की जिम्मेदारी थी ,वे ही यह भूल गये कि वो भी किसी अबोध बच्ची के पिता, भाई, परिजन होंगे। 

मरी हुई बुजदिल आत्माओं के साथ पशुवत पेट पालते लोगों के दम पर ही बलात्कारी समाज मे बेखौफ अगले शिकार की खोज मे रहता है। उसे कोई फर्क नहीं पडता कि फिर वो बच्ची केवट है, ब्राम्हण है ,  क्षत्रिय या दलित।  

बलात्कारी कमजोर वर्ग को ही शिकार बनाता है। जहाँ उसे छ: इंच छोटा हो जाने का डर हो ,वह आंख उठा कर देखता तक नहीं। तो अब यह बहुत जरुरी है कि बलात्कारियों मे गर्दन छोटी होने या सुनिश्चित लंबी होने का भय हो। नर पिशाचों मे स्पष्ट संदेश जाना चाहिए कि यदि उसने किसी बहन ,बेटी पर कुदृष्टि डाली तो उसकी जिन्दगी 6 महीने ही शेष होगी।

आज ही पश्चिम बंगाल मे हथियार छीन कर भागते एक बलात्कारी को वहाँ की पुलिस ने गति प्रदान किया है। नियम ,कायदे, संविधान केवल उनके लिये ही नहीं होना चाहिए जो उसका सम्मान करते हैं। जो इन्हे नहीं मानते, जिनके मन मे इसके प्रति कोई डर - भय ना हो, उनके सभी संवैधानिक अधिकार खत्म माना जाना चाहिए।

( मनोज कुमार द्विवेदी, अनूपपु्र ,मप्र )

यह मोह बहुत ही मोहीला होता है, लेकिन उतना ही दर्दीला होता है- अनिल भारद्वाज


*मोह बहुत मोहीला* 


यह मोह बहुत ही मोहीला होता है,

लेकिन उतना ही दर्दीला होता है।


जब कभी किसी से मोह टूट जाता है,

तो पलकों से भी अधिक हृदय रोता है।


यह सही गलत दिल से निकाल देता है,

यह वो करवाता जो इसको भाता है।


यह नागफांस में कस लेता है जिसको,

तो गरुड़ देव भी छुड़ा न पाते उसको।


क्या पता कौन किस पर मोहित हो जाए, 

फिर दुनिया चाहे उलट पलट हो जाए।


अतिमोह भी सदां दुख देता रहता है,

मीरा की तरह गरल पीना पड़ता है।


सीता ने मोह किया सोने के मृग से,

पति विरह में बहे अनगिन आंसू दृग से।

  

जब पुत्रमोह में नृप अंधा होता है, 

तो मर्यादा का चीर हरण होता है।


यदि मोह करो तो कान्हा जैसा करना,

जग निर्मोही भी कहे प्यार से सुनाना।


गीतकार अनिल भारद्वाज एडवोकेट हाईकोर्ट ग्वालियर म प्र

पंकज बुरहानपुरी के सम्मान में काव्य गोष्ठी आयोजन सम्पन्न


जबलपुर

जबलपुर संस्कारधानी में पंकज बुरहानपुरी ( डॉ यमुना प्रसाद दुबे ) गंगा जमुना के तट से पधारे वरिष्ठ कवि के सम्मान में काव्य गोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम में शहर के वरिष्ठ कवि साहित्यकार उपस्थित रहे। निरंजन द्विवेदी वत्स, कवि संगम त्रिपाठी, विजय विश्वकर्मा, मदन श्रीवास्तव, प्रकाश सिंह ठाकुर, एम. पी. सिंह ' निकुंज', मानसिंह ' दीपक', सुनील सिंह तोमर प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। 

गीत और गज़लों के दौर में बहुत सुन्दर रचनाएं प्रस्तुत की गयीं। कवि  पंकज बुरहानपुरी जी ने अपने गीतों से आयोजन को ऊंचाईयों तक पहुंचाया। वरिष्ठ कवि विजय विश्वकर्मा के संचालन में गीत ग़ज़ल हास्य व्यंग की रचनाएं प्रवाहित हुई। आभार प्रकाश सिंह ठाकुर ने अभिव्यक्त किया।

प्रदेश उपाध्यक्ष गणेश सिंह राजावत के नेतृत्व में धूमधाम से मनाया गया नरेंद्र मोदी विचार मंच का 23वां स्थापना दिवस


बैढ़न/सिंगरौली

नरेंद्र मोदी विचार मंच के 23वें स्थापना दिवस के अवसर पर सिंगरौली के बैढ़न में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन मंच के प्रदेश उपाध्यक्ष गणेश सिंह राजावत के नेतृत्व में संपन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों एवं आम नागरिकों ने सहभागिता की।

कार्यक्रम में मंच की प्रदेश सचिव रश्मि साकेत की विशेष उपस्थिति रही। उन्होंने अपने संबोधन में नरेंद्र मोदी विचार मंच की स्थापना, उद्देश्यों एवं राष्ट्र निर्माण में उसकी भूमिका पर प्रकाश डालते हुए केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न जनहितकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी उपस्थित जनसमुदाय के साथ साझा की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में देश विकास, आत्मनिर्भरता और जनकल्याण के नए आयाम स्थापित कर रहा है तथा इन योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना सभी कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी है।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि सिंगरौली नगर निगम की महापौर Rani Agrawal रहीं। उन्होंने अपने संबोधन में शासन की विभिन्न महत्वाकांक्षी योजनाओं, नगरीय विकास कार्यों एवं जनकल्याणकारी कार्यक्रमों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए नागरिकों से योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ लेने का आह्वान किया।

इस अवसर पर सिंगरौली भाजपा जिला अध्यक्ष देवेंद्र पांडे, नगर निगम अधिकारी सुंदरलाल शाह, नगर निगम के पटेल साहब, समूह अध्यक्ष उर्मिला देवी, सुमन साकेत सहित बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ता एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान राष्ट्र निर्माण, सामाजिक जागरूकता, संगठन विस्तार तथा केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया। मंच के पदाधिकारियों ने कहा कि नरेंद्र मोदी विचार मंच राष्ट्रवाद, सामाजिक समरसता और जनसेवा के मूल्यों को लेकर निरंतर कार्य कर रहा है तथा आने वाले समय में संगठन को और अधिक मजबूत बनाया जाएगा।

बैढ़न में आयोजित इस कार्यक्रम में हजारों की संख्या में लोगों की उपस्थिति रही, जिससे आयोजन स्थल राष्ट्रभक्ति, उत्साह और जनसहभागिता से सराबोर दिखाई दिया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रहित एवं जनकल्याण के संकल्प के साथ हुआ।

गंगांजलि साझा संग्रह राजेंद्र कुमार तिवारी को किया भेंट-  कवि संगम त्रिपाठी 


जबलपुर

गंगांजलि साझा काव्य संग्रह राजेंद्र कुमार तिवारी मंदसौर को उनके जबलपुर आगमन पर सौजन्य मुलाकात कर कवि संगम त्रिपाठी ने भेंट किया। राजेंद्र कुमार तिवारी मंदसौर वरिष्ठ कवि साहित्यकार समाजसेवी व हिंदी प्रेमी हैं।

गंगांजलि साझा काव्य संग्रह के संपादक डॉ अजय शुक्ल है व इस संग्रह में कवि संगम त्रिपाठी हास्य व्यंगकार जबलपुर मध्यप्रदेश, कवि पंकज बुरहानपुरी कवि लेखक बुरहानपुर,‌ कवि श्याम फतनपुरी कवि गीतकार गोमती नगर लखनऊ, डॉ सोमनाथ शुक्ल कवि लेखक प्रयागराज की रचनाएं संग्रहित हैं। गंगांजलि साझा काव्य संग्रह भावनाओं का काव्य संगम है।

बूंदों के नौलखा हार से सज, धज कर इठलाती आजा, आजा बरखा रानी आजा



 बूंदों के नौलखा हार


आजा बरखा रानी आजा।


बूंदों के नौलखा हार से सज 

धज कर इठलाती आजा,

       आजा बरखा रानी आजा।


इंद्रधनुष बनकर बूंदों की 

सतरंगी किरनें आईं हैं,

बिजली बदली पुरवा तेरी 

अगवानी करने आईं हैं।


बैठ अश्वमेघों के रथ पर 

नीलगगन से नीचे आजा। 

      आजा बरखा रानी आजा।


उमड़ घुमड़ कर तुझे बुलातीं

काली काली मस्त घटाएं,

कोयल मोर पपीहे तुझको 

रह-रह कर आवाज लगाएं।


बूंदों की पाजेब पहन कर 

छम छम छम छम करती आजा।

       आजा बरखा रानी आजा।


गीतकार अनिल भारद्वाज एडवोकेट हाईकोर्ट ग्वालियर

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