मथुरा में प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा का राष्ट्रीय सम्मेलन 26 से, जुटेंगे 175 से अधिक साहित्यकार


​मथुरा

प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा (संबद्ध: लोक संचेतना फाउंडेशन) के तत्वावधान में मथुरा में दो दिवसीय राष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। सम्मेलन का प्रथम सत्र 26 सितंबर से प्रारंभ होगा, जबकि मुख्य राष्ट्रीय आयोजन 27 सितंबर को प्रातः 11:00 बजे शुरू होगा। संस्था के संस्थापक कवि संगम त्रिपाठी ने बताया कि यह सम्मेलन मथुरा में हिंदी साहित्य का अब तक का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक आयोजन सिद्ध होगा।

*​प्रमुख अतिथि और दिग्गज साहित्यकार करेंगे शिरकत*

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दिल्ली के सिविल सेवा गुरु डॉ. धर्म प्रकाश वाजपेयी होंगे, जबकि अध्यक्षता वरिष्ठ कवयित्री प्रभा बच्चन श्रीवास्तव जबलपुर करेंगी। विशिष्ट अतिथियों के रूप में मध्य प्रदेश से विनोद कुमार मिश्र (दतिया) एवं अनिल मिश्र (कटनी) उपस्थित रहेंगे। इस समागम में देश के विभिन्न राज्यों से 175 से अधिक कवि, साहित्यकार, पत्रकार, समाजसेवी और हिंदी प्रेमी हिस्सा ले रहे हैं।

*​एक दर्जन से अधिक पुस्तकों का होगा विमोचन*

आयोजन के दौरान साहित्य जगत की कई प्रमुख कृतियों का लोकार्पण किया जाएगा, जिनमें प्रमुख हैं:

​सौदागर सिंह 'दिलवर' की कृति 'दर्द-ए-हयात' (गज़ल संग्रह)

​डॉ. राम निवास तिवारी 'इंडिया' की पुस्तक 'नूर-ए-इश्क: मोहब्बत का एहसास' (गज़ल संग्रह)

​सोनिया नायडू (भिलाई, छत्तीसगढ़) की कृति 'प्रीत'

​रामवल्लभ गुप्त 'इंदौरी' की पुस्तक 'महक कस्तूरी'

​इसके साथ ही एक दर्जन से अधिक अन्य साहित्यिक पुस्तकों का विमोचन भी संपन्न होगा।

​*हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने की दिशा में अहम कदम*

आयोजन को भव्य व दिव्य रूप देने में राष्ट्रीय महासचिव प्रदीप मिश्र 'अजनबी' (दिल्ली), राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. लाल सिंह किरार (अम्बाह, मुरैना), राष्ट्रीय सलाहकार डॉ. सोमनाथ शुक्ल (प्रयागराज), राष्ट्रीय संचालिका मेघा अग्रवाल (नागपुर), प्रेरणा स्मारिका की संपादक सीमा शर्मा (मेरठ) और प्रबंध संपादक सिद्धेश्वरी सराफ 'शीलू' (जबलपुर) निरंतर जुटे हुए हैं। आयोजकों का मानना है कि यह राष्ट्रीय सम्मेलन, सम्मान समारोह एवं कवि सम्मेलन हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार और इसे राष्ट्रभाषा का दर्जा दिलाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

अखिल भारतीय सांस्कृतिक प्रतिरोध अभियान ‘हम देखेंगे’ की मांग, मुख्य चुनाव आयुक्त त्यागपत्र दें

 *नागरिकों के मतदान के अधिकार पर उठे सवालों के जवाब मिलने ही चाहिए।*


नई दिल्ली

अखिल भारतीय सांस्कृतिक प्रतिरोध अभियान ‘हम देखेंगे’ निर्वाचन आयोग के हालिया घटनाक्रम को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करता है।

            23 सितंबर को द इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित एक विस्तृत रिपोर्ट में बताया गया कि निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले दस महीनों के दौरान निर्वाचन आयोग के कामकाज से संबंधित कम-से-कम 14 मामलों में औपचारिक आपत्तियाँ दर्ज कीं। रिपोर्ट के अनुसार इन आपत्तियों का संबंध नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता-सूची से नाम हटाने और बहाल करने, निर्वाचन संबंधी सॉफ़्टवेयर तथा मतदाता-सूची के डिजिटल नियंत्रण जैसे महत्वपूर्ण विषयों से था। दोनों निर्वाचन आयुक्तों ने कुछ कार्रवाइयों को “अनधिकृत” और “अवैध” बताया तथा निर्वाचन संबंधी आँकड़ों के केंद्रीकरण और वैधानिक अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी प्रश्न उठाए।

             जनवादी लेखक संघ, जन संस्कृति मंच, प्रगतिशील लेखक संघ, भारतीय जन नाट्य संघ ( इप्टा) अखिल भारतीय दलित लेख का मंच द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि जुलाई 2026 में  फार्म 6 में ऐसा प्रश्न जोड़ा गया, जिसे लेकर निर्वाचन आयुक्त विवेक जोशी ने मई में आपत्ति दर्ज की थी और सुखबीर सिंह संधू ने बाद में इसे अनाधिकृत और गैरकानूनी  बताते हुए हटाने की माँग की थी।

             मतदाता-सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर भी गंभीर प्रश्न उठे हैं। द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार राष्ट्रीय स्तर पर एस आई  आर के मसौदा मतदाता-सूचियों में 13 करोड़ से अधिक नाम प्रभावित हुए हैं। पश्चिम बंगाल में मतदाता-सूची से संबंधित विवादों के बीच सर्वोच्च न्यायालय ने SIR की प्रक्रिया के एक हिस्से में न्यायिक अधिकारियों की भूमिका तय की थी।

           इन घटनाक्रम के बीच 25 सितंबर को दिल्ली के जंतर मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े और गिरफ्तारी की माँग को लेकर प्रदर्शन हुआ, जिसमें दीपांकर भट्टाचार्य, योगेंद्र यादव, नेहा वोरा समेत अनेक नेताओं और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया।

             हमारे लिए इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न है —भारत के प्रत्येक नागरिक के मतदान के अधिकार, मतदाता-सूची की विश्वसनीयता और निर्वाचन आयोग की संस्थागत पारदर्शिता ।

           भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत निर्वाचन आयोग को स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने की जिम्मेदारी दी गई है। 2023 के कानून की धारा 18 के अनुसार आयोग का काम, जहाँ तक संभव हो, सर्वसम्मति से किया जाना है और मतभेद की स्थिति में बहुमत की राय के अनुसार निर्णय होना है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दोनों निर्वाचन आयुक्तों द्वारा इसी व्यवस्था के संदर्भ में आयोग के कामकाज पर आपत्तियाँ दर्ज किए जाने की बात कही गई है।

           इन आरोपों और आपत्तियों की स्वतंत्र, पारदर्शी और सार्वजनिक जाँच आवश्यक है। निर्वाचन आयोग को भी सामने आए प्रत्येक प्रश्न पर स्पष्ट तथ्यात्मक स्पष्टीकरण सार्वजनिक करना चाहिए, ताकि नागरिकों का विश्वास कायम रहे और यह स्पष्ट हो सके कि मतदाता-सूची में नाम जोड़ने, हटाने या बहाल करने से संबंधित प्रत्येक कार्रवाई किस वैधानिक प्रक्रिया के तहत हुई।

            लोकतंत्र में मतदाता-सूची केवल प्रशासनिक दस्तावेज नहीं है। वह नागरिक के मतदान के अधिकार का आधार है। इसलिए उससे जुड़े किसी भी निर्णय की पारदर्शिता और जवाबदेही लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियादी आवश्यकता है।

            ‘हम देखेंगे’ इस पूरे घटनाक्रम में सामने आए तथ्यों, निर्वाचन आयोग के स्पष्टीकरणों, न्यायिक कार्यवाहियों और नागरिक अधिकारों से संबंधित प्रश्नों पर सार्वजनिक संवाद और तथ्यपरक बहस की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

           मुख्य चुनाव आयुक्त पर लगे आप इतने गंभीर हैं कि भारतीय लोकतंत्र में आस्था बनाए रखने के लिए और आरोपी की निष्पक्ष जांच करने के लिए उन्हें तत्काल पद मुक्त किया जाना जरूरी है। हमारी मांग है कि है या तो स्वयं इस्तीफा दें या उन पर महाभियोग की कार्रवाई शुरू की जाए। 

            हम यह भी मांग करते हैं कि हिरासत में लिए गए  प्रदर्शन करने वाले सभी साथियों को अविलंब रिहा किया जाए। 

          हम देश भर के लेखकों- कलाकारों , सचेत नागरिकों और छात्रों से अपील करते हैं कि वे भारतीय लोकतंत्र की रक्षा के इस अभियान में शामिल हों और शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से प्रतिरोध आंदोलन चलाएं।

प्रलेसं का 14वाँ राज्य सम्मेलन की पूर्व संध्या पर होगा सांस्कृतिक आयोजन


इंदौर

प्रगतिशील लेखक संघ के राज्य सम्मेलन की तैयारी के सिलसिले में एक बैठक आयोजित हुई, जिसमें निर्णय लिया गया कि 24 अक्टूबर को प्रारंभ होने वाले सम्मेलन के पूर्व 23 अक्टूबर की शाम इंदौर आ चुके प्रतिनिधियों एवं शहरवासियों के लिए एक सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया जाएगा। बैठक में आयोजन संबंधी विभिन्न कार्यों के लिए सदस्यों ने उत्साहपूर्वक अपनी-अपनी जिम्मेदारियाँ तय कीं। सम्मेलन के पूर्व युवा कवियों के लिए दो-दिवसीय कविता शिविर भी आयोजित किया जाएगा।

बैठक में दिवंगत लेखिका कृष्णा अग्निहोत्री, लेखक एवं वैज्ञानिक विजय अग्रवाल एवं मणिपुरी संगीतकार चौंगथम विक्रम सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर विजय दलाल, प्रकाश पाठक, गजानन निमगांवकर, नीपा पांड्या, अभय लोधी, डॉ. जाकिर हुसैन, पीयूष लकड़ा, सारिका श्रीवास्तव, विनीत तिवारी, हरनाम सिंह, जावेद आलम आदि उपस्थित थे।

द्वारका नई दिल्ली वेस्ट से पार्षद, विधायक व सांसद सदस्य रूप में जनता के प्रिय महाबल मिश्रा


नई दिल्ली

 *न्यू दिल्ली से पत्रकार ऊषा माहना*

नेता नहीं सेवक हैं महाबल मिश्रा। महाबल मिश्रा को लोग नेता कम एक सच्चे सेवक के रूप में मानने लगे हैं। अपने क्षेत्र की जनता का यह सदा ध्यान रखते हैं। सारी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने में योगदान देते हैं। महाबल मिश्रा ने अनेक बार लोगों की सहायता की है। महाबल मिश्रा एक राजनीतिक विशेषज्ञ भी हैं।

महाबल मिश्रा द्वारा नई दिल्ली से पार्षद, विधायक से सांसद सदस्य के रूप में जनता के प्रिय महाबल मिश्रा। विधायक रहते हुए क्षेत्र की जनता के लिए सदा ही नेक कार्य करते हैं।

महाबल मिश्रा एक सच्चे समाज सेवक हैं। इनकी सेवक और शुभचिंतक के रूप में एक अलग ही पहचान है। अपने पारदर्शिता, व्यक्तित्व के करण ही इन्होंने सदस्य सांसद (लोकसभा) के रूप में कभी प्रतिनिधि किया है। अपने जन प्रिय नेता के रूप में अपनी जनता को सेवा देकर (पश्चिम) दिल्ली के विकास में भूमिका निभाई है। अपने क्षेत्र की जनता के कार्य बहुत समझते हैं।

सेवक के रूप में समाज की उत्कृष्ट सेवा करने में कई बार सामाजिक, धार्मिक संस्थाओं ने इन्हें सम्मानित किया हैं। महाबल मिश्रा हमेशा सकारात्मक व्यवहार में रहते हैं। धर्म और अध्यात्म में इनकी बहुत आस्था है। अपने निवास स्थान पर यह धार्मिक समारोह का आयोजन करते रहते हैं। हम इनके अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करते हैं।

प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा द्वारा हिन्दी सम्मेलन मथुरा में हिन्दी सेवा भारती, कवियों, साहित्यकारों का करेगा सम्मान


जबलपुर

प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा द्वारा आयोजित दिनांक 27 सितंबर 26 को मथुरा में हिंदी सम्मेलन आयोजित है। प्रदीप मिश्र अजनबी महासचिव दिल्ली व डॉ लाल सिंह किरार अम्बाह मुरैना राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा ने बताया कि मथुरा आयोजन में हिंदी अभिव्यक्ति सभा,कवि सम्मेलन, सम्मान समारोह पुस्तक विमोचन लोकार्पण व कवियों साहित्यकारों पत्रकारों व समाजसेवियों को सम्मानित किया जाएगा।

कवि संगम त्रिपाठी संस्थापक प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा ने बताया कि हिन्दी सेवा भारती सम्मान गोवर्धन थपलियाल दिल्ली , महेन्द्र ' माणिक ' पुणे हास्य व्यंग कवि , डॉ महेश अनघड़ हास्य कवि कसरावद खरगोन , राकेश त्रिपाठी देवरिया , डॉ गोविन्द पाण्डेय प्रेम जबलपुर मध्यप्रदेश , आचार्य विजय तिवारी किसलय जबलपुर मध्यप्रदेश , डॉ कर्नल आदि शंकर मिश्र आदित्य लखनऊ , डॉ रामचन्द्र स्वामी बीकानेर राजस्थान , विनय कुमार झा गाजियाबाद , सरस्वती मल्लिक मधुबनी बिहार , डॉ कालिंदी त्रिपाठी कुशीनगर उत्तर प्रदेश ,  सोनिया नायडू भिलाई छत्तीसगढ़ , सुमन गर्ग दिल्ली , अनिल राही ग्वालियर , मेघा अग्रवाल नागपुर , बीना नौडियाल खंडूरी देहरादून , किरन नैथानी श्रीनगर पौड़ी गढ़वाल उत्तराखंड , मृत्युंजय उपाध्याय नवल गोरखपुर , डॉ चैतन्य चेतन एडवोकेट नवाबगंज बरेली , डॉ सुषमा पंड्या बिलासपुर छत्तीसगढ़ , पं निरंजन द्विवेदी वत्स जबलपुर , ममता साहू कांकेर छत्तीसगढ़ , अनुराधा गर्ग जबलपुर , अर्चना आनंद गाजीपुर , गीतकार डॉ अशोक अग्रहरि प्रतापगढ़ी , राम वल्लभ इंदौरी ,  डॉ सोमनाथ शुक्ल प्रयागराज , अनीता के. शाह सह संपादक गुजराती बोल वडोदरा , डॉ महेंद्र सिंह गौर सागर मध्यप्रदेश , आचार्य सी. ए. , प्रा. डॉ. शंकर घनशामदास अंदानी अहिल्या नगर , कवि डॉ. देवीदास बामणे रायगड महाराष्ट्र , डॉ. दीप्ति खरे, मंडला मध्यप्रदेश , कवयित्री श्रीमती संतोष पारीक , श्रीमती मनोरमा शर्मा मनु हैदराबाद को मथुरा हिन्दी सम्मेलन में प्रदान किया जाएगा।

कवि संगम त्रिपाठी ने बताया कि मथुरा राष्ट्रीय सम्मेलन में कवि साहित्यकार समाजसेवी पत्रकार विभिन्न राज्यों से शामिल हो रहे हैं। 

 CA Vinod Rawal Launches Bridging Borders to Help NRIs Navigate Cross-Border Taxation, Repatriation & Succession


*Journalist Usha Mahna from New Delhi*

New Delhi 

Chartered Accountant and U.S. Enrolled Agent CA Vinod Rawal today launched his book, Bridging Borders – Taxation, Repatriation & Succession, at the India International Centre, New Delhi. Published by Har-Anand Publications, the book is a comprehensive and practical guide designed for Non-Resident Indians (NRIs), globally connected Indian families, professionals, and financial advisors dealing with cross-border financial and legal matters.

Drawing upon more than 37 years of professional experience, CA Vinod Rawal has authored the book to simplify complex issues relating to international taxation, FEMA regulations, Double Taxation Avoidance Agreements (DTAA), fund repatriation, inheritance, succession planning, anti-money laundering compliance, foreign investments, and other cross-border regulatory frameworks.

Unlike conventional tax books, Bridging Borders explains complex legal provisions through more than 50 real-life case studies and practical family scenarios. Spread across 15 chapters, the book integrates key legislations including the Income Tax Act, FEMA, DTAA, FCRA, PMLA, FATCA/CRS, the Benami Law, the Black Money Act, and succession laws into a single practical reference.

The book follows the story of a globally connected Indian family to explain how residential status affects taxation, how NRIs can legally repatriate funds from India, manage overseas investments, plan inheritance, and comply with evolving financial regulations.

Speaking on the occasion, CA Vinod Rawal said: "With increasing global mobility, Indian families require clarity and confidence in managing their assets across jurisdictions. 'Bridging Borders' aims to simplify complex tax and succession matters and provide practical solutions for families navigating cross-border financial responsibilities."

Addressing the needs of nearly 35 million Indians living overseas and their families in India, the book seeks to empower readers with practical guidance for managing wealth, taxation, inheritance, and regulatory compliance across multiple jurisdictions.

The event brought together experts from taxation, banking, law, governance, and financial planning to deliberate on the growing importance of informed cross-border financial planning in an increasingly globalised world.

The launch ceremony was attended by several eminent personalities, including Shri K. J. Alphons, IAS, Former Union Minister; Shri S. B. K. Singh, IPS, Former Director General, Delhi Prisons; Dr. (Adv.) Ravi Gupta, renowned author of over 200 tax books; Shri Shashank Dixit, Chief General Manager & Zonal Head, IDBI Bank, Delhi; and renowned entrepreneur, motivational speaker and author Shri Shiv Khera.


प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा का राष्ट्रीय सम्मेलन, देश के कवि, साहित्यकार, समाजसेवी पत्रकार होंगे शामिल 


जबलपुर

प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा राधा रानी के आदेश पर दिनांक 27 सितंबर 26 को मथुरा में राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित कर रही है। प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा के राष्ट्रीय सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों से कवि साहित्यकार समाजसेवी पत्रकार शामिल हो रहे है। प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा के संस्थापक कवि संगम त्रिपाठी ने बताया की मथुरा आयोजन ऐतिहासिक होगा। 

आयोजन को भव्य व दिव्य बनाने में प्रदीप मिश्र अजनबी दिल्ली, डॉ लाल सिंह किरार अम्बाह मुरैना, डॉ सोमनाथ शुक्ल प्रयागराज, सीमा शर्मा मेरठ, सिद्धेश्वरी सराफ शीलू जबलपुर, मेघा अग्रवाल नागपूर, सार्थक गौड़ दिल्ली, दादा भैरु सुनार मनासा, पप्पू सोनी शामगढ़ मंदसौर व अन्य सहयोगी अथक परिश्रम कर रहे हैं।

कवि संगम त्रिपाठी ने कहा कि प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा के राष्ट्रीय सम्मेलन में हिंदी के वर्तमान परिदृश्य में वक्तव्य, कवि सम्मेलन, सम्मान समारोह व पुस्तक विमोचन लोकार्पण मुख्य आकर्षण के बिंदु होंगे।

प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा का राष्ट्रीय सम्मेलन दिनांक - 27 सितंबर 2026 को समय - प्रातः 11.00 बजे से आयोजित है। कार्यक्रम स्थल -  मंदिर श्री जी द्वारकाधीश प्रभु श्री जी बाबा आश्रम, भूतेश्वर मथुरा उत्तर प्रदेश है।

दशपुर साहित्य मंच में गंगांजलि साझा काव्य संग्रह का लोकार्पण, कवि सम्मेलन हुआ संपन्न



      मंदसौर  -  दशपुर साहित्य मंच मालव प्रांत के मंच पर दिनांक 06 सितंबर 26 को साहित्य मनीषियों ने अपनी रचनाओं से माहौल को साहित्यमय कर दिया। बसंत ऋतु को रचनाकारों ने बखूबी चित्रण किया। गीत ग़ज़ल हास्य व्यंग से  सार्थकता पूर्ण कवि सम्मेलन संपन्न हुआ।

           दशपुर साहित्य मंच मालव प्रांत के आयोजन अवसर पर गंगांजलि साझा काव्य संग्रह का लोकार्पण किया गया। गंगांजलि साझा काव्य संग्रह के संपादक डॉ. अजय शुक्ल हैं व इस संग्रह में कवि संगम त्रिपाठी हास्य व्यंग जबलपुर मध्यप्रदेश, कवि पंकज बुरहानपुरी कवि लेखक बुरहानपुर,‌ कवि श्याम फतनपुरी कवि गीतकार गोमती नगर लखनऊ, डॉ. सोमनाथ शुक्ल कवि लेखक प्रयागराज की रचनाएं संग्रहित हैं। गंगांजलि साझा काव्य संग्रह भावनाओं का काव्य संगम है।

          गंगांजलि साझा संग्रह का लोकार्पण वरिष्ठ कवि साहित्यकार राम वल्लभ गुप्त इंदौरी, शिव जी डांगी, धनपाल धमाका, पप्पू सोनी, विजय विद्रोही, दादु जी, मोहित जी गोस्वामी मुकेश जी ,संगम जी त्रिपाठी, राजेंद्र जी तिवारी ने लोकार्पित किया।

💔सूरज और रानी की अधूरी प्रेम कहानी 💔 


एक लड़का था, जिसका नाम सूरज था और एक लड़की थी, जिसका नाम रानी था। दोनों एक-दूसरे से बहुत प्यार करते थे। उनके दिल में एक ही सपना था, एक दिन शादी करके साथ-साथ पूरी जिंदगी बिताना। सूरज अक्सर रानी से कहता था, “रानी, मैं तुम्हें हमेशा खुश रखूँगा। बस थोड़ा समय और, फिर मैं तुम्हारे घरवालों से हमारा रिश्ता माँगने आऊँगा।” रानी भी सूरज पर पूरा विश्वास करती थी। वह अपने माता-पिता के सपनों को भी पूरा करना चाहती थी और सूरज को भी खोना नहीं चाहती थी। एक दिन रानी के पिता उसके लिए एक रिश्ता लेकर आए। लड़का अच्छा कमाता था, परिवार अच्छा था और समाज में उसकी अच्छी प्रतिष्ठा थी। रानी के पिता ने मन ही मन तय कर लिया कि वे रानी की शादी उसी घर में करेंगे। लेकिन सूरज को इस बात की कोई जानकारी नहीं थी। रानी कई बार सोचती रही कि वह सूरज को सब कुछ बता देगी, लेकिन हर बार उसके सामने सूरज का चेहरा आ जाता और वह कुछ कह नहीं पाती। वह सूरज से बहुत प्यार करती थी और उसे खोने से डरती थी। उधर सूरज भी यही सोच रहा था कि अब उसे रानी के घरवालों से बात करनी चाहिए। एक दिन सूरज रानी के घर पहुँचा। उसे देखकर रानी के पिता ने सारी बात साफ-साफ बता दी। उन्होंने कहा, “बेटा, आज मैं रानी के लिए रिश्ता देखकर आया हूँ। लड़का अच्छा है, परिवार अच्छा है और वह अच्छी कमाई करता है। कुछ ही महीनों में हम रानी की शादी उसी घर में करने का सोच रहे हैं।” यह सुनकर सूरज के पैरों तले जमीन खिसक गई। वह कुछ नहीं बोला। चुपचाप वहाँ से चला गया। उसकी आँखों में आँसू थे और दिल में सिर्फ एक सवाल था— “रानी ने मुझे पहले क्यों नहीं बताया?” सूरज ने रानी से फोन पर पूछा, “तुमने मुझे यह बात पहले क्यों नहीं बताई?” रानी के पास कोई जवाब नहीं था। वह भी रो रही थी। उसने कहा, “सूरज, मैं तुम्हें खोना नहीं चाहती थी… और अपने माता-पिता को भी दुखी नहीं करना चाहती थी। मैं दोनों को बचाना चाहती थी, लेकिन शायद मैं खुद ही दोनों के बीच फँस गई।” सूरज ने बहुत कोशिश की कि रानी से एक बार मिल सके। वह बार-बार फोन करता रहा, लेकिन परिस्थितियाँ ऐसी बन गईं कि दोनों एक-दूसरे से मिल नहीं पाए। आखिरकार सूरज ने रानी को एक आखिरी संदेश भेजा— “रानी, तुम परेशान मत होना। शायद हमारी कहानी का रास्ता यहीं से अलग हो रहा है। मैंने तुम्हें सच्चे दिल से चाहा था और हमेशा तुम्हारी खुशी की दुआ करूँगा। तुम जहाँ भी रहो, खुश रहना। अगर कभी जिंदगी हमें दोबारा मिलाने का मौका दे, तो शायद हमारी अधूरी कहानी को एक नया रास्ता मिल जाए। और अगर ऐसा न हो सके, तो भी मेरी जिंदगी की सबसे खूबसूरत याद तुम ही रहोगी।” रानी ने वह संदेश पढ़कर बहुत देर तक आँसू बहाए। उसने आसमान की तरफ देखा और मन ही मन कहा— “कुछ रिश्ते किस्मत में साथ रहने के लिए नहीं, बल्कि जिंदगी भर याद रहने के लिए लिखे जाते हैं।” सूरज और रानी की प्रेम कहानी पूरी नहीं हुई… लेकिन उनका प्यार उनके दिलों में हमेशा अधूरा होकर भी सच्चा रहा। 💔 अर्पणा दुबे

भोजपुरी गायिका निशा ने महामंडलेश्वर राजेश्वरी नंद गिरी से लिया आशीर्वाद


देवघर

जानी -मानी मशहूर भोजपुरी गायिका निशा उपाध्याय बोलवम काँवरिया रोड में एक कार्यक्रम संपन्न कर लौटने के क्रम में अंतर्राष्ट्रीय किन्नर अखाडा के महामंडलेश्वर कांवरिया सेवा शिविर में अंतर्राष्ट्रीय जूना किन्नर अखाड़ा की महामंडलेश्वर व झारखण्ड प्रदेश अध्यक्ष राजेश्वरी नंद गिरी ऊर्फ रोज मौसी से आत्मीय मुलाकात कर आशीर्वाद लिया। गायिका निशा ने कहा कि राजेश्वरी नंद गिरी से मिलकर उन्हें सुखद् अनुभूति मिलती है। उनका प्यार, लगाव, और स्नेह से हमें बेहद खुशी मिली है ।अर्धनारीश्वर से सभी आशीर्वाद लेने आते है, मुझे भी उनका आशीर्वाद मिला है। गायिका निशा उपाध्याय को देखने एवं  मिलने हेतू उनके प्रशंसकों एवं शिवभक्तों की भारी भीड़ देखी  गई।

डॉ. सोमनाथ शुक्ल की पुस्तक ‘श्रम साधक’ का हुआ विमोचन, 'गुफ़्तगू' बॉलीवुड अभिनेता का हुआ नागरिक अभिनंदन

*कबीर और रहीम की तरह साधक हैं डॉ. सोमनाथ: अतुल तिवारी*


प्रयागराज

डॉ. सोमनाथ शुक्ल के दोहे पढ़कर सहज ही कहा जा सकता है कि इन्होंने कबीर और रहीम की तरह साधना करके काव्य रचा है। इतनी आसानी से मजदूरों और श्रमिकों को केंद्र में रखकर दोहा लिख देना बहुत बड़ी बात है। अपनी सद्यः प्रकाशित पुस्तक ‘श्रम साधक’ में उन्होंने जिस तरह से मजदूरों के हालात को रेखांकित किया है, वह आज के दौर में बेहद उल्लेखनीय है।

यह बातें बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता अतुल तिवारी ने रविवार की शाम सिविल लाइंस स्थित एक होटल में आयोजित पुस्तक विमोचन समारोह में कहीं। साहित्यिक संस्था 'गुफ़्तगू' की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में डॉ. सोमनाथ शुक्ल की पुस्तक ‘श्रम साधक’ का लोकार्पण किया गया।

*पहली बार किसी शहर ने किया मेरा नागरिक अभिनंदन*

इस अवसर पर 'गुफ़्तगू' संस्था द्वारा अभिनेता अतुल तिवारी का नागरिक अभिनंदन भी किया गया। श्री तिवारी ने कहा कि यह पहली बार है कि किसी शहर ने मेरा इस तरह नागरिक अभिनंदन किया है, वरना मेरे गृह नगर लखनऊ ने भी कभी मेरा नागरिक अभिनंदन नहीं किया। इस सम्मान के लिए उन्होंने 'गुफ़्तगू' संस्था का हृदय से आभार व्यक्त किया।

*वर्तमान विमर्श पर सटीक प्रहार है ‘श्रम साधक’*

कार्यक्रम में उपस्थित अन्य विशिष्ट वक्ताओं ने भी पुस्तक और लेखक की जमकर सराहना की:

डॉ. सरोज सिंह: "डॉ. सोमनाथ जी ने दोहा लिखने के लिए जिन गंभीर मुद्दों को उठाया है, आज के दौर में उस पर काव्य लेखन लगभग नहीं हो रहा है, अलबत्ता कहानियां जरूर लिखी जा रही हैं।"

डॉ. इम्तियाज़ अहमद ग़ाज़ी: "डॉ. सोमनाथ शुक्ल हमारे दौर के एक बेहद प्रतिभावान कवि हैं, समाज में ऐसे रचनाकारों का उचित सम्मान होना चाहिए।"

डॉ. धनंजय चोपड़ा: "इस पुस्तक में लिखे गए कुछ दोहे इतने जीवंत हैं कि वे सीधे मेरे अपने जीवन से जुड़े हुए महसूस होते हैं।"

न्यायमूर्ति अशोक कुमार (अध्यक्षीय संबोधन): कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे न्यायमूर्ति अशोक कुमार ने डॉ. शुक्ल की इस पुस्तक को समाज के लिए बेहद सराहनीय और एक ख़ास कृति बताया।

*संचालन और धन्यवाद ज्ञापन*

कार्यक्रम का सफल संचालन मनमोहन सिंह तन्हा ने किया, जबकि अंत में नरेश कुमार महरानी ने उपस्थित अतिथियों और साहित्य प्रेमियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।

*इनकी रही प्रमुख उपस्थिति*

इस भव्य साहित्यिक आयोजन में शहर के कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से प्रभाशंकर शर्मा, नीना मोहन श्रीवास्तव, शैलेंद्र जय, आसिफ़ उस्मानी, डॉ. एस.एम. अब्बास, डॉ. वीरेंद्र कुमार तिवारी, शिबली सना, अफसर जमाल, शिवाजी यादव, मंजुलता नागेश, सुनील दानिश, धीरेंद्र सिंह नागा, क्षमा द्विवेदी और शाहीद खुश्बू आदि मौजूद रहे।

सशक्त हस्ताक्षर की 51 वीं काव्य गोष्ठी में गूॅंजे कविता के स्वर, साहित्य प्रेमियों का अपनी वाणी किया अभिनंदन 


जबलपुर -   सशक्त हस्ताक्षर की 51 वीं काव्य गोष्ठी श्री शास. महाकौशल महाविद्यालय में सानंद सम्पन्न हुई । सर्वप्रथम संस्थापक गणेश श्रीवास्तव प्यासा ने सभी अतिथियों , साहित्य मनीषियों, साहित्य प्रेमियों का अपनी वाणी से अभिनंदन किया ।

          कार्यक्रम के मुख्य अतिथि  प्राचार्य डॉ. अलकेश चतुर्वेदी, अध्यक्षता महामहोपाध्याय आचार्य डॉ. हरिशंकर दुबे, विशिष्ट अतिथि संध्या जैन श्रुति, डॉ . अरुण शुक्ल, अमरेंद्र नारायण सारस्वत अतिथि राजेश पाठक प्रवीण, मंगल भाव कवि संगम त्रिपाठी, इं. अरविंद मोहन नायक की गरिमामय उपस्थिति रही । सरस्वती वंदना प्रकाश सिंह ठाकुर इंद्राना ने की । यशपाल जैन, अंजलि नायक, डॉ. ज्योति जुनगरे, चंद्रकांत जैन, सत्यम् श्रीवास्तव,अरुण शुक्ल, दिवाकर शर्मा, महेश स्थापक, संतशरण श्रीवास्तव बच्चन की स्वागत, अभिनंदन में सहभागिता रही । इस अवसर पर अरविंद मोहन नायक की पुस्तक दास्तां का लोकापर्ण किया गया । डाँ . निर्मला डोंगरे पूर्णिका , व शिवानी भगत महेश्वरी को शाल, कलम श्री, मानपत्र, अंगवस्त्र,मोती की माला स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया ।

          गोष्ठी का शुभारंभ वरिष्ठ साहित्यकार हीराधर बड़गैया  ने की । शिवानी भगत महेश्वरी,कुंजीलाल चक्रवर्ती निर्झर भेड़ाघाट,डॉ. ताराचंद कुशवाहा,सुशील श्रीवास्तव ,उर्मिला श्रीवास्तव,डॉ. निर्मला डोंगरे पूर्णिका, पूजा नारायण शर्मा, तरुणा खरे तनु, मानसिंह ठाकुर दीपक,दीनदयाल तिवारी बेताल, विवेक कुमार गुप्ता सहर, प्रेम कुमार पालीवाल, लखन रजक, विजय सिन्हा कमर जानी इलाहाबादी, डॉ. अरुणा पान्डे, प्रभा बच्चन श्रीवास्तव, आशा मालवीय, कालीदास ताम्रकार काली, अमर सिंह वर्मा, सुशील जैन, डॉ. सुरेंद्र लाल साहू निर्विकार ने एक से बढ़कर एक विविध रंगी रचनाएँ पढ़कर कार्यक्रम को सफल बनाया । मंचस्थ अतिथियों ने भी काव्य पाठ कर मंच को ऊँचाईयां प्रदान की । संचालन सिद्धेश्वरी सराफ शीलू तथा आभार प्रदर्शन तरुणा खरे तनु ने किया ।

स्वदेशी जागरण मंच द्वारा शिवभक्तों की सेवा स्टाल लगाकर वितरण की सामग्री


देवघर

नटराज की नगरी बाबाधाम में स्वदेशी अपनाने और भारत को समृद्ध राष्ट्र बनाने एवं विश्वगुरु बनाने के मिशन के साथ, पूरे श्रद्धा, निष्ठा, व समर्पण के साथ देवतुल्य बोलबम कांवरिया की सेवा में दूसरी सोमवारी पर स्थानीय जलसार चिल्ड्रन पार्क में स्टाल लगाकर स्वदेशी जागरण मंच, मंच द्वारा जल, शरबत ,नींबू पानी, फल इत्यादि की  शिवभक्तों को पूरे भक्ति भाव से  सेवा दी जा रही है । साथ ही,मंच द्वारा फलाहारी हलुवा कांवरियों को वितरित किया गया । मंच के मनोज सिंह, संजय सिंह,  प्रभाष गुप्ता ,माया केसरी ,अमर कुमार सिंहा ,आशा झा, लक्ष्मी देवी, राजीव झा, मिथलेश बाजपेई ,बृजेश सिंह ,अभय सिंह, त्रिदेव के डॉक्टर राकेश सिंह, गौरी शंकर शर्मा, जीवेश सिंह, सुधीर सिंह, गिरीश सिंह, बिनोद साह, बाबू सोना श्रृंगारी, सोनी केसरी, विपिन अग्रवाल, गुड्डू बंका , इत्यादि सक्रियता से लगे हुए हैं, और भक्तों की सेवा कर रहे हैं।

सैल्यूट -तिरंगा ने बोलवम कावरिया की सेवा मे नि: शुल्क  सेवा शिविर का किया भव्य शुभारम्भ


देवघर 

स्थानीय तिवारी चौक रोड एवं जलसार  पार्क के निकट राष्ट्रवादी संगठन "सैल्यूट तिरंगा" का निःशुल्क बोलबम सेवा शिविर काविधिवत शुभारम्भ रंजन कुमार चौधरी, राष्ट्रीय युवा अध्यक्ष,     वार्ड पार्षद सोनी केसरी, वार्ड पार्षद चांदनी चौधरी, वार्ड पार्षद मंजू देवी, समाजसेवी सरिता चौधरी द्वारा किया गया। पूरे श्रावण मास शिवभक्तों की सेवा में लगे इस शिविर में जल, शरबत, ढंडा, कोल्ड ड्रिन्क, लस्सी, हलुआ, नीम्बू पानी, फल-केला, अनार, अमरूद , इत्यादि एवं चिकित्सा की समुचित व्यवस्था उपलब्ध रहेंगी। मौके पर  देव कुमार, उत्तम साह (डमरु), श्री प्रभाष गुप्ता, लक्षमी देवी ,अलका सोनी, मनीष चौधरी,बृजेश सिंह, निशांत तिवारी, जितेंद्र सोनी, चुन्नु कुमार, जितेंद्र मालाकार, आशीष चौधरी , सत्येन्द्र सिंह,कोमल साह इत्यादि अनेको कार्यकर्ता भारी संख्या में मौजूद थे।

रसायन विज्ञान का जादू, सुशी सक्सेना की नई किताब बताएगी रोज़मर्रा की ज़िंदगी की केमिस्ट्री



अत्यंत प्रसन्नता का विषय है कि लेखिका सुशी सक्सेना की नई विज्ञान पुस्तक "The Chemistry Connection (Chemistry in Our Daily Life) प्रकाशित हो चुकी है। यह पुस्तक रसायन विज्ञान को हमारे रोज़मर्रा के जीवन से जोड़ती है। सरल अंग्रेज़ी में लिखी गई इस पुस्तक में बताया गया है कि रासायनिक तत्व और अभिक्रियाएँ हमारे जीवन के हर पहलू में कैसे मौजूद हैं। सुबह की चाय से लेकर रात के बल्ब तक, प्याज़ से निकलने वाले आँसुओं से लेकर माचिस की तीली तक — हर छोटी-बड़ी घटना के पीछे छिपे विज्ञान को लेखिका ने आकर्षक उदाहरणों, समीकरणों और प्रयोगों के माध्यम से समझाया है।

पुस्तक में रसोई, बाथरूम और घर के हर कोने में छिपी विज्ञान की कहानियों को उजागर किया गया है। लेखिका का उद्देश्य रसायन विज्ञान को छात्रों और आम लोगों के लिए एक डरावने विषय के बजाय एक जादुई दुनिया के रूप में प्रस्तुत करना है, जो हमें हमारे आसपास की हर चीज़ से गहराई से जोड़ती है।

इस पुस्तक के लिए लेखिका ने कई प्रख्यात वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों का आभार व्यक्त किया है। इनमें प्रमुख रूप से डॉ. ए. पी. जयरामन, मुंबई, डॉ. विजय गर्ग, पंजाब, डॉ. वीर सर, गोवा, डॉ. राम शंकर, इंदौर मध्यप्रदेश और डॉ. अश्क हुसैन जम्मू-कश्मीर शामिल हैं। पुस्तक को पूरा करने में सहयोग के लिए सुशी सक्सेना ने सतीश एम., तमन्ना, मेलिना, सुनीता फडणीस, आदराम नायक और अनामिका को धन्यवाद दिया है। इसके साथ ही उन्होंने अपने अमेरिका में रहने वाले मित्रों एनी, एमेलिया, लियोम सर और रोहित के सहयोग और प्रोत्साहन के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया है, जिनके समर्थन से यह कार्य संभव हो सका। यह पुस्तक छात्रों, शिक्षकों और विज्ञान में रुचि रखने वाले सभी लोगों के लिए अत्यंत उपयोगी है।

*सुशी सक्सेना*

बाबाधाम में शिवभक्तों की सेवा हेतु स्वदेशी जागरण मंच ने बोलबम निःशुल्क सेवा शिविर का किया भव्य शुभारंभ 


देवघर

स्वदेशी अपनाने को बढावा देने एवं भारत को समृद्ध राष्ट्र बनाने  के मिशन को गति प्रदान करते हुए स्वदेशी जागरण मंच ने स्थानीय  जलसार चिल्ड्रेन पार्क के निकट  सेवा, समर्पण एवं अटूट श्रद्धा के  साथ शिवभक्तों की सेवा हेतु बोलबम सेवा शिविर का विधिवत शुभारम्भ किया । शिविर का उद्घाटन भारत माता की तस्वीर पर माल्यार्पण कर एवं दीप प्रज्वलित कर एवं नारियल फोड़ कर किया गया। शिविर उद्घाटन में मंच के अखिल भारतीय राष्ट्रीय मेला प्रमुख सचिन बरियार, प्रांत संयोजक राजेश उपाध्याय,क्षेत्रीय संयोजक अमरेंद्र सिंह,प्रांत कोष प्रमुख विष्णु सिंह, प्रांत सह संयोजक ज्ञानदीप टुडू,संपर्क प्रमुख अजय चौधरी दीपक,  प्रांत मेला प्रमुख दिलीप वर्मा, प्रदेश समिति सदस्य जटाशंकर जी, कृषि प्रकोष्ठ प्रमुख अंजनी सिन्हा, प्रांत समन्वयक मनोज सिंह के कर कमलों संपन्न हुआ।इस मासव्यापी शिविर मे बोलबम शिव भक्तों हेतु निःशुल्क जल, शर्बत, नींबू पानी,चाय,फल - केला, सेव, अनार , अमरूद इत्यादि  एवं अन्य जरूरी सुविधाएँ उपलब्ध रहेगी। सेवा शिविर में मंच के सदस्य एवं अन्य लोग सक्रिय रूप से तत्पर रहेंगे। इस अवसर पर बाबा नगरी से झाररखण्ड प्रांत  के लिए राष्ट्रव्यापी स्वदेशी समर्थक अभियान का भी  शंखनाद  किया गया।  और बिगुल बजा कर शुरुआत की गई।मौके पर मंच के प्रान्त समन्वयक मनोज सिंह,  जिला संयोजक संजय सिंह, श्री प्रभाष गुप्ता, अमर सिन्हा, गौरी शकर शर्मा, बाबू सोना श्रृंगारी,  राजीव झा, ;बजेश सिंह, ममता कुमारी, वार्ड पार्षद सोनी केसरी , बबली बरनवाल, अतिस शंकर झा , चंद्रकांत सिंह, प्रेमलता बरनवाल, बीणा मंडल, आशा झा, तनुजा सिंह, दिनेश बरनवाल,संजीव सिंह, संगीता देवी, जयशंकर प्रसाद, नवीन सिन्हा, भवेश चौधरी, गोकर्ण सिंह, गुड्डू मोदी, पूनम प्रकाश, गिरीश सिंह, अजीत दुबे, इत्यादि भारी संख्या में  कार्यकर्ता 'मौजूद थे।

प्रेमचंद जयंती के आयोजन में गूंजी कलम की आवाज, साहित्यकारों की प्रतिमाएं गिराकर उनके विचारों को नहीं मारा जा सकता

*14वां राज्य सम्मेलन होगा इंदौर में*


इंदौर

महान कथाकार प्रेमचंद की जयंती के उपलक्ष में आयोजित गोष्ठी में प्रेमचंद के अलावा विख्यात यायावर लेखक राहुल सांकृत्यायन, जन कवि धूमिल को भी याद किया गया। वक्ताओं ने इन लेखकों की रचनाओं का पाठ करते हुए कहा कि साहित्यकारों की प्रतिमाएं गिराकर उनके विचारों को नहीं मारा जा सकता।

प्रगतिशील लेखक संघ का 14वां राज्य सम्मेलन अक्टूबर माह में इंदौर में आयोजित होगा। इसी कार्यक्रम की पृष्ठभूमि में जारी रचनात्मक बैठकों की श्रृंखला के तहत प्रलेसं इकाई द्वारा अभिनव कला समाज सभागृह में गोष्ठी का आयोजन रखा गया था। बैठक को संबोधित करते हुए हरनाम सिंह ने कहा कि एक ही विचारधारा से संचालित राज्यों में लेखकों, स्वतंत्रता संग्राम के नायकों की प्रतिमाएं सुनियोजित तरीके से तोड़ी जा रही है। उन्होंने राहुल सांकृत्यायन की वैचारिक यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि राहुल ने आंख मूंदकर किसी भी विचार को स्वीकार नहीं किया था। सनातन धर्म से प्रारंभ होकर आर्य समाज, बौद्ध धर्म से होते हुए उनकी जीवन यात्रा मार्क्सवाद पर आकर समाप्त हो गई। फिर वे जीवन पर इसी विचारधारा के साथ बने रहे।

गोष्ठी का संचालन करते हुए आयोजन की समन्वयक सारिका श्रीवास्तव ने जनकवि धूमिल का जीवन परिचय देते हुए कहा कि वे एक विद्रोही कवि थे। उनका गुस्सा किसी व्यक्ति के नहीं अपितु शोषण की व्यवस्था के खिलाफ था। राहुल सांकृत्यायन ने तिब्बत से दुर्लभ बौद्ध साहित्य लाकर भारतीय ज्ञान परंपरा को समृद्ध करने का ऐतिहासिक कार्य किया। हिंदी के लोकप्रिय लेखक प्रेमचंद का अधिकांश लेखन उर्दू में था।

गोष्ठी में युवा लेखक रवि अहिरवार ने धूमिल की कविता के वाचन पश्चात कहा कि अपने प्रगतिशील चिंतन के चलते ये लेखक आज भी प्रासंगिक बने हुए हैं। प्रेमचंद कालीन विसंगतियां वर्तमान समाज में भी मौजूद है। साहित्य केवल मनोरंजन नहीं है वह अपने समय के सवालों को उठाने का माध्यम भी है। विवेक मेहता के अनुसार राहुल सांकृत्यायन ने अपने समय के रूढ़िवादी समाज के अंधविश्वासों को चुनौती दी थी। उनकी पुस्तक तुम्हारी क्षय पढ़ी जानी चाहिए।

चुन्नीलाल वाधवानी ने कहा कि प्रगतिशील लेखक संघ धर्मनिरपेक्ष संगठन है। पाठकों को निरंतर अध्ययन करते रहना चाहिए।

प्रेमचंद का जीवन परिचय गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे इकाई अध्यक्ष डॉक्टर जाकिर हुसैन ने दिया। प्रेमचंद की कहानी "भाई साहब" का वाचन नीपा पंड्या ने किया। अभय लोधी ने राहुल की रचना "जात पात की क्षय" पढ़ी। धूमिल की कविताओं का पाठ विवेक, नेहा दुबे ने किया। राम आसरे पांडे ने प्रेमचंद पर स्वरचित कविता पढ़ी। विजय दलाल ने भी अपने विचार व्यक्त किये। गोष्ठी में प्रमोद बागड़ी, अरविंद पोरवाल, जावेद आलम, आकाश,लेखराज, शबाना पारेख, देशराज, आकाश सिंह राठौड़, अथर्व शिन्त्रें की उपस्थिति महत्वपूर्ण थी।

श्री गोपाल कृष्ण मंदिर का 39वां स्थापना दिवस धूमधाम व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया


देवघर

स्थानीय कास्टर टाउन स्थित श्री गोपाल कृष्ण मंदिर का 39वां स्थापना दिवस समारोह पूरे हर्षोल्लास के साथ धूमधाम से मनाया गया। 

इस अवसर पर श्री गोपाल कृष्ण मंदिर का फूलों व पुष्पों से भव्य आकर्षक श्रृंगार किया गया। साथ ही, रंग-बिरंगे लाइटों व पुष्पो से पूरे मंदिर परिसर को सजाया गया। 

इस अवसर पर गायकों द्वारा भक्तिमय भजनों की अनुपम व रोचक प्रस्तुति की गई। इस भक्तिमय प्रस्तुति से महिला-पुरुष  भक्तगण व आगंतुक भक्ति में मग्न हो उठे। पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।।

आयोजन में उपमहापौर टीप चटर्जी, तारा चंद जैन, प्रदीप बाजला, राष्ट्रीय हिन्दू परिषद (भारत) के जिला अध्यक्ष प्रभाष गुप्ता, श्याम कीर्तन मंडल के अध्यक्ष संजय बंका (गुडु बंका) एवं अन्य अनेकों गणमान्य लोग उपस्थित रहे। 

इस अवसर पर  पुरोहितों द्वारा विधिवत पूजा-भोग व आरती की गई। आयोजन में अभिषेक तुलस्यान एवं ज्योत्सना तुलस्यान की सक्रिय व सराहनीय भूमिका रही, जिनके अथक व सक्रिय प्रयास से आयोजन का सफलतापूर्वक संचालन हुआ। आयोजन में भक्तों की भारी भीड़ देखी गई।

पं. निरंजन द्विवेदी वत्स का 75 वां जन्मदिन (अमृत महोत्सव) धूमधाम से मनाया गया 


    जबलपुर -  संस्कारधानी जबलपुर के वरिष्ठ कवि साहित्यकार समाजसेवी पं. निरंजन द्विवेदी वत्स जी का 75 वां जन्मदिन (अमृत महोत्सव) धूमधाम से मनाया गया। आयोजन के मुख्य अतिथि आचार्य डॉ हरिशंकर दुबे, कार्यक्रम अध्यक्ष शिवकुमार पटेल, सारस्वत अतिथि कुलदीप सिंह सिसोदिया, नलिन कांत बाजपेयी, संजय चौधरी। विशिष्ट अतिथि अर्चना सिसोदिया पार्षद, सोनिया रंजित सिंह पार्षद, भापकर पार्षद,  मोनिका सिंह पार्षद, विराजमान रहे। मंगल भाव राजेश पाठक प्रवीण ने अभिव्यक्त किये।

              कार्यक्रम का शुभारंभ सीता राम जी के पूजन अर्चन से प्रारंभ हुआ। सरस्वती वंदना कवयित्री वंदना सोनी विनम्र ने किया। अखिलेश खरे अखिल व सुनील तोमर के संचालन में उपस्थित कवि व कवयित्री जयप्रकाश श्रीवास्तव, दीपक तिवारी ' दीपक' , डॉ प्रशांत मिश्रा, मदन श्रीवास्तव, कृष्णा राजपूत, गणेश श्रीवास्तव प्यासा, शैली दीवान, वंदना सोनी विनम्र, तरुणा खरे ' तनु' , एम. पी. सिंह ' निकुंभ ' , अखिलेश खरे, सुनील तोमर, अनुराग तिवारी, सुंदरलाल साहू ' निर्विकार ' , राकेश राकेन्दू, विजय नेमा ' अनुज ' , सुभाष मणि बैरागी, विजय विश्वकर्मा, प्रकाश ठाकुर, कवि संगम त्रिपाठी, संतोष नेमा ' संतोष ' , पुरुषोत्तम पटेल तन्हा, रामप्रवेश निराला, सतीश नवल आदि ने काव्य पाठ किया।

      कवि संगम त्रिपाठी व निखिल द्विवेदी के निर्देशन में आयोजित वरिष्ठ कवि साहित्यकार समाजसेवी पं निरंजन द्विवेदी वत्स जी के 75 वें जन्मदिन अमृत महोत्सव में संस्कारधानी जबलपुर की साहित्यिक सामाजिक संस्थाएं पाठक मंच अमरतलाल, तुलसी साहित्य समिति, मंथन, वर्तिका, पाथेय, सशक्त हस्ताक्षर, मध्य भारत साहित्य परिषद, जबलपुर पारिवारिक प्रकाशक, सनाढ्य संगम व उपस्थित कवि कवयित्रियों, जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों, अतिथियों व निरंजन द्विवेदी वत्स के बाल सखाओं, सहयोगियों व अनेक शुभचिंतक की गरिमामय उपस्थिति में जन्मदिन मनाया गया वो भव्य व ऐतिहासिक रहा। निरंजन द्विवेदी वत्स आयोजन की भव्यता और दिव्यता को देखकर भावविभोर हो गये और उनकी वाणी सागर की लहरों सी तरंगों सा अमृत की बूंदों सा मन मस्तिष्क में समा गई। आभार दीपक तिवारी ' दीपक ' ने अभिव्यक्त किये।

सशक्त हस्ताक्षर की स्वर्णिम 50 वीं काव्य गोष्ठी में गूॅंजी साहित्य की स्वर धारा 


जबलपुर

सशक्त हस्ताक्षर की50 वीं काव्य गोष्ठी चंचलबाई महाविद्यालय में सानंद सम्पन्न हुई। संस्थापक गणेश श्रीवास्तव प्यासा ने सभी अतिथियों, साहित्य मनीषियों का अपनी ओर से सभी का अभिनंदन किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ अलकेश चतुर्वेदी, अध्यक्षता महामहोपाध्याय आचार्य डॉ. हरिशंकर दुबे, विशिष्ट अतिथि डॉ. सुरेन्द्रलाल साहू निर्विकार, डॉ. अरुणा पान्डे मंगल भाव कवि संगम त्रिपाठी की गरिमामय उपस्थिति रही। अरुण शुक्ल, अमरनाथ सोनी, महेश स्थापक, दिवाकर शर्मा,प्रीति शुक्ला की स्वागत अभिनंदन में सहभागिता रही। सरस्वती वंदना अनुराधा गर्ग दीप्ति ने की।

           गोष्ठी का शुभारंभ कवि कालिदास ताम्रकार काली ने की । सुवीर श्रीवास्तव वीर, शिवानी भगत, इन्द्राना से प्रकाशसिंह ठाकुर, भेड़ाघाट से कुंजीलाल चकवर्ती निर्झर , उर्मिला श्रीवास्तव, विवेक कुमार गुप्ता सहर, आशा मालवीय, अखिलेश खरे अखिल,प्रेम कुमार पालीवाल,दीनदयाल तिवारी बेताल,जय प्रकाश श्रीवास्तव,कौशिक सेन गुप्ता,प्रभा विश्वकर्मा शील,लखन रजक, विजय सिन्हा कमर इलाहावादी, सुशील श्रीवास्तव, मदन श्रीवास्तव,श्रीमती तरुणा श्रीवास्तव, प्रीति नामदेव भूमिजा,विजय विश्वकर्मा,पं निरंजन द्विवेदी वत्स ,डॉ. मुकुल तिवारी, अमर सिंह वर्मा, वंदना सोनी विनम्र, संध्या द्विवेदी,एम. एल. शर्मा नयन,ज्योति  मिश्रा ने एक से बढ़कर एक रचनाओं की प्रस्तुति देकर मंच को चरम पर पहुंचाया । मंचस्थ अतिथियों ने भी रचना पाठ कर मंच को ऊँचाईयाँ दी । संचालन गणेश श्रीवास्तव प्यासा व आभार प्रदर्शन तरुणा खरे तनु ने किया।

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