सशक्त हस्ताक्षर की 53 वीं काव्य गोष्ठी हर्ष व उल्लास के साथ हुई सम्पन्न


जबलपुर -     सशक्त हस्ताक्षर जबलपुर की संस्था जो साहित्य,समाज, संस्कृति के पथ पर अनवरत गतिशील है, की 53 वीं काव्य गोष्ठी केसरवानी महाविद्यालय में हर्ष व उल्लास के साथ सम्पन्न हुई । सर्व प्रथम संस्थापक गणेश श्रीवास्तव प्यासा ने सभी अतिथियों, कवि - कवयित्रियों साहित्य मनीषियों व साहित्यानु रागियों का अपनी वाणी से अभिनंदन किया।

             कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ . आशुतोष दुबे, अध्यक्षता महामहोपाध्याय आचार्य डॉ . हरिशंकर दुबे, विशिष्ट अतिथि शिवहरि श्रीवास्तव, विवेक गुप्ता सहर, आचार्य विजय तिवारी किसलय,सारस्वत अतिथि राजेश पाठक प्रवीण, मंगलभाव कवि संगम त्रिपाठी,अरुण शुक्ल की गरिमामय उपस्थिति रही । सरस्वती वंदना प्रकाश सिंह ठाकुर इन्द्राराना ने की। स्वागत,वंदन, अभिनंदन में रचना गुप्ता, आरव गुप्ता, दिवाकर शर्मा, महेश स्थापक, धनंञ्जय श्रीवास्तव,राजीव लाल श्रीवास्तव की प्रभावपूर्ण सहभागिता रही । इस मौके पर प्राचार्य डॉ. आशुतोष दुबे,शिवहरि श्रीवास्तव, विवेक गुप्ता,गुलजारी जैन,राजरंजन श्रीवास्तव को शाल,स्मृतिचिन्ह, अंगवस्त्रम्, कलमश्री,मोती की माला से सम्मानित किया गया ।

          इस शुभवसर पर कुंजीलाल चक्रवर्ती निर्झर भेड़ाघाट,हीराधर बड़गैयाँ,दीन दयाल तिवारी बेताल, बालमुकुंद लखेरा,अखिलेश खरे अखिल कछारगाँव सुभाषमणि बैरागी,लखनलाल रजक,प्रेमकुमार पालीवाल, डॉ. सुरेंद्र लाल साहू,विजय सिन्हा कम़र जानी इलाहाबादी, मानसिंह ठाकुर दीपक, निरंजन द्विवेदी वत्स, रघुवीर अम्बर,अरविंद मोहन नायक, डॉ . मुकुल तिवारी, शिवानी भगत,प्रभा विश्वकर्मा शील,तरुणा खरे तनु, कालिदास ताम्रकार ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुति देकर कार्यक्रम सफल बनाया । मंचस्थ अतिथियों ने काव्य पाठकर मंच को नयी ऊँचाईयां दी। संचालन सिद्धेश्वरी सराफ शीलू,आभार प्रदर्शन गुलजारी जैन ने किया।

प्रख्यात कवि, साहित्यकार, सेवानिवृत्त डॉ कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’ को मिलावहिन्दी सेवा भारती सम्मान


जबलपुर - हिन्दी महा सम्मेलन, मथुरा में डॉ कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’ को हिन्दी सेवा भारती सम्मान, स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया।

     सम्मान समारोह में डॉ कर्नल मिश्र अस्वस्थता के कारण स्वयं उपस्थित नहीं हो सके इसलिये प्रेरणा हिन्दी प्रचारिणी सभा के संस्थापक कवि संगम त्रिपाठी जी के अनुरोध पर कवि / साहित्यकार राम लखन वर्मा के द्वारा सम्मानित किया गया।   

        कवि राम लखन वर्मा (रायबरेली निवासी) ने डॉ कर्नल मिश्र को उनके लखनऊ स्थित निवास स्थान पर भेंट करते हुए सम्मानित किया। 

ज्ञातव्य हो कि डॉ कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’ को इसके पहले 1150 से अधिक सम्मान पत्र, प्रशस्ति पत्र और स्मृति पत्र प्राप्त हो चुके हैं। उन्हें हिंदो साहित्य में डॉक्टरेट की मानद उपाधि, डॉक्टर ऑफ़ सोसल साइंस, डॉक्टर ऑफ़ डिविनिटी, काशी हिन्दी विद्यापीठ से विद्यावाचस्पति, विद्यासागर, भारत गौरव मानद सम्मान, साहित्य रत्न, साहित्य शिरोमणि, मानद स्मृति सम्मान सहित अनेक राष्ट्रीय अन्तर्राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। उनका नाम ओएमजी बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स में भी दर्ज है।

       डॉ कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’ के 11 काव्य संग्रह, दो लेख संग्रह और 5 ई काव्य संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं तथा सौ से अधिक साझा काव्य संग्रह में उनकी रचनाएँ प्रकाशित हो चुकी हैं। दैनिक समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में भी उनकी कविताएँ: लेख प्रतिदिन प्रकाशित होते रहते हैं।

शब्द कलश प्रकाशन द्वारा ‘डॉ कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’ की जीवन यात्रा’ उनकी ‘आदित्यायन’ शृंखला के अंतर्गत प्रकाशित हो रही है तथा कई अन्य काव्य संग्रह, लेख संग्रह और साझा काव्य संग्रह भी शीघ्र प्रकाशित हो रहे हैं। डॉ आदि शंकर मिश्र आदित्य लखनऊ हिन्दी प्रचार प्रसार व हिन्दी साहित्य को समृद्ध बनाने में प्रेरणादायक कार्य कर रहे हैं।

27 अक्टूबर को छिंदवाड़ा में होगा सर्वजातीय ओबीसी महासंगम, विशाल रैली एवं जनसभा

*27% आरक्षण, जातिगत जनगणना और सामाजिक न्याय की मांग को लेकर कलेक्टर को सौंपेंगे ज्ञापन*


छिंदवाड़ा

मध्य प्रदेश में ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण, जातिगत जनगणना, जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व एवं सामाजिक न्याय की मांगों को लेकर 27 अक्टूबर को छिंदवाड़ा में सर्वजातीय ओबीसी महासंगम, जनसभा एवं विशाल रैली आयोजित की जाएगी। इस संबंध में अखिल भारतीय ओबीसी महासभा, जिला छिंदवाड़ा के तत्वावधान में विभिन्न ओबीसी जातीय संगठनों के पदाधिकारियों की बैठक रविवार को नगर निगम सभापति एवं कुनबी समाज के जिला अध्यक्ष चंद्रभान देवरे के निवास पर संपन्न हुई।

बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 27 अक्टूबर 2026, मंगलवार को प्रातः 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक पवार मंगल भवन, नागपुर रोड, चंदनगांव, छिंदवाड़ा में महासंगम एवं जनसभा आयोजित होगी। इसके पश्चात विशाल रैली निकालकर जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचा जाएगा, जहां राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं राज्यपाल सहित संबंधित संवैधानिक संस्थाओं और विभागों के नाम ज्ञापन कलेक्टर को सौंपा जाएगा।

कार्यक्रम का संकल्प “सत्ताईस प्रतिशत आरक्षण की लड़ाई सत्ताईस को” रखा गया है। ज्ञापन में मध्य प्रदेश में ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण दिलाने के लिए प्रभावी कानूनी एवं संवैधानिक पहल, लंबित नियुक्तियों में प्रभावित अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा, आगामी जनगणना में ओबीसी की जातिगत गणना एवं पृथक जाति कॉलम, जनसंख्या के अनुपात में उचित प्रतिनिधित्व तथा सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने की मांग की जाएगी।

बैठक में चंद्रभान देवरे ने ओबीसी समाज की एकजुटता और अधिकारों के लिए सामूहिक प्रयासों पर जोर दिया। केशव साहू ने कहा कि महासंगम समाज की सामूहिक शक्ति और लोकतांत्रिक अधिकारों की प्रभावी अभिव्यक्ति बनेगा। पवार समाज के जिला अध्यक्ष मुन्ना पवार ने भी कार्यक्रम के प्रति सहमति व्यक्त की। बैठक में आंदोलन की आगामी रणनीति तय करने एवं विभिन्न संगठनों के बीच समन्वय के लिए सशक्त कोर कमेटी के गठन पर भी विचार किया गया।

बैठक में कुर्मी, कुनबी, पवार, लोधी, यादव, साहू, कोष्टी, रजक, धोबी, माली, चौरसिया, पाल, किरार, स्वर्णकार सोनी एवं कुशवाह सहित विभिन्न समाजों के पदाधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। इनमें प्रहलाद पटेल, अजाबराव सनोडिया, चंद्रभान देवरे, महादेव बारस्कर, मुन्ना पवार, यशवंत पवार, शिवकुमार पटेल, अनिल यादव, केशव साहू, जितेंद्र कुमार साहू, बिनोद गढ़ेवाल, शेरसिंह मोखलगाय, महादेव मालवी, देवानंद निकाजू, भाऊराव चरपे, धर्मेंद्र चौरसिया, अभिषेक चौरसिया, सुरेंद्र पाल, सुरेश पाल, शिवकुमार चौरिया, राजेश दोड़के, मनोज सोनी एवं राजेश तांत्रिक सहित अनेक प्रतिनिधि शामिल रहे।

अधिवक्ता देवेंद्र वर्मा, अशोक अंबाडकर, नामदेव सरोदे, डॉ. रमेश उसरेठे, मनोज वानखेड़े, लेखराम पटेल, महेंद्र वर्मा, संजय विश्वकर्मा, सूरज विश्वकर्मा, दिनेश कुमार सूर्यवंशी, सुरेश कपाले, उमेश राय, शिवराज चौरे तथा अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी अपने विचार रखे।

आयोजकों ने स्पष्ट किया कि यह अभियान किसी राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष में नहीं, बल्कि ओबीसी समाज के संवैधानिक अधिकारों, सामाजिक न्याय एवं उचित प्रतिनिधित्व के लिए है। उन्होंने विद्यार्थियों, युवाओं, महिलाओं, किसानों, मजदूरों, कर्मचारियों, अधिवक्ताओं, व्यापारियों और सभी ओबीसी जातीय संगठनों से अधिकाधिक संख्या में शामिल होने की अपील की। कार्यक्रम को शांतिपूर्ण, अनुशासित एवं संवैधानिक मर्यादाओं के अनुरूप संपन्न कराने का आह्वान भी किया गया।

आयोजकों ने कहा कि ओबीसी समाज को आश्वासन नहीं, अधिकार और न्याय चाहिए। 27 अक्टूबर का महासंगम समाज की एकता और संवैधानिक अधिकारों के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता का संदेश देगा।

रैली में सर्वजातीय ओबीसी एकता—सामाजिक न्याय की दिशा में सामूहिक पहल, ओबीसी समाज को आश्वासन नहीं, अधिकार और न्याय चाहिए के लगाएंगे नारे।


State-Level Consultation Programme Held During Poshan Maah, Emphasising Child Nutrition and the Need for a Creche Policy


New Delhi 

NEEV DELHI FORCES organised a state-level consultation programme on Poshan Maah at the Constitution Club of India, Rafi Marg, New Delhi. Representatives from 68 partner organisations participated in the programme.

The programme was attended by Dr. Om Prakash Vyas, Chairperson of the Delhi Commission for Protection of Child Rights (DCPCR), as the Chief Guest. Other prominent participants included Dr. Nupur Birla (NAPI Network), Dr. Aparajita Sharma (National FORCES), Mr. Amrish Dubey (NCCM), Ashia (Right to Food), Awadhesh Yadav (Convenor, NEEV Delhi FORCES), Ashok Kumar Jha (Steering Committee Member, NEEV Delhi FORCES), Thaneshwar Dayal Adigond (Steering Committee Member, NEEV Delhi FORCES), and Sant Lal (Representative, NEEV Delhi FORCES).

The primary objective of the programme was to discuss child nutrition, Early Childhood Care and Development (ECCD), the promotion of nutritious home-cooked food, and measures to reduce the growing consumption of ultra-processed and packaged food products.

The programme was inaugurated by Mr. Thaneshwar Dayal Adigond, Steering Committee Member of NEEV Delhi FORCES. He shared information about the activities and initiatives undertaken by various organisations during Poshan Maah. He stated that several organisations had participated in the campaign and collectively pledged to work towards improving ECCD and child nutrition.

The programme began with the ceremonial lighting of the lamp in the presence of Steering Committee members and Dr. O. P. Vyas. This was followed by a musical presentation by Gyanwati Ji and her colleagues. Representatives from various fields, including Dr. O. P. Vyas, Awadhesh Yadav, Sant Lal, Guddi, Farooq and Rinki, were welcomed during the event.

Sharing his experience in the field of child welfare, Dr. O. P. Vyas emphasised that discussions on children's rights, nutrition and health are not enough unless the recommendations are translated into practical action. He stated that ensuring access to quality food for children and women is a collective responsibility. The government, civil society organisations and communities must work together to ensure that children receive adequate nutrition.

He highlighted food adulteration, food quality and their impact on children's health as serious concerns. He stressed that activities undertaken during Poshan Maah should not be limited to a single month but should continue throughout the year. He also emphasised promoting traditional and home-cooked food and monitoring the quality of meals served at Anganwadi centres and creches. He expressed support for strengthening creche facilities and the demand for a dedicated creche policy in Delhi.

The meeting also discussed the initiatives of the National Network FORCES and ongoing efforts related to creche services. Network representatives reported that 611 creches had been established in Delhi through various initiatives. They emphasised the need to strengthen these facilities further and explore ways to integrate creche services with Anganwadi centres.

Special emphasis was placed on the need for safe and quality childcare facilities for the children of construction workers, domestic workers and working women. Representatives called for the formulation of a creche policy in Delhi under the Palna framework to ensure a systematic arrangement for the care, nutrition and development of young children.

During the programme, the network's website and annual report were launched by Dr. O. P. Vyas. The annual report was also formally released by the distinguished guests.

First Session: Experiences and Achievements During Poshan Maah

In the first session, representatives from different areas shared their activities, community outreach initiatives and experiences during Poshan Maah.।

Awadhesh Yadav highlighted the overall achievements of the campaign and stated that 32 non-governmental organisations (NGOs), working across 33 areas, had directly reached 2,622 people and indirectly reached 1,878 people to improve awareness and understanding of ultra-processed food products.

Other representatives emphasised the importance of educating children and parents about nutritious food, food labels, ingredients, sugar and fat content, and the potential adverse effects of packaged food products. They also highlighted the need to spread reliable information to a wider audience through community engagement and social media.

Participants suggested strengthening food-quality testing, monitoring Anganwadi centres and institutional kitchens, and developing effective mechanisms for addressing complaints related to food quality.

Second Session: Panel Discussion on Child Rights, Nutrition and Food Safety

The second session featured a panel discussion on important issues, including child rights, nutrition, food safety, women's rights and the regulation of ultra-processed food products.

Ashok Jha emphasised the need for effective policies and regulations to protect children's rights and ensure proper nutrition. He stated that data, monitoring mechanisms and social audits are important for assessing and improving children's nutritional status.

Ashia, representing Right to Food, said that nutrition should not be restricted to providing only the minimum required diet. Instead, greater attention must be given to ensuring that children receive adequate and nutritious food. She also highlighted the need for sufficient budgetary allocations for nutrition, better quality in mid-day meals, and protection of the food rights of migrant and displaced children.

Dr. Nupur Birla raised concerns relating to maternity entitlements, breastfeeding, complementary feeding for young children and the regulation of ultra-processed food products. She emphasised the need for clear labelling of ingredients, sugar and fat content on food packages, along with effective warning labels to help consumers make informed choices. She also called for appropriate regulation of food advertisements targeting children. 

Dr. Aparajita Sharma observed that women shoulder a significant share of childcare and nutritional responsibilities. Therefore, policies must take into account women's rights, the actual circumstances of families and the needs of local communities. She stressed the importance of conducting awareness campaigns in collaboration with different networks and raising nutrition-related issues at the grassroots level.

*Key Recommendations and Action Plans*

1. Awareness Campaigns: Conduct continuous community-level campaigns to promote fresh, nutritious, home-cooked food and reduce the consumption of ultra-processed food products.

2. Joint Memorandum: Prepare a joint memorandum on food quality-related concerns in collaboration with other networks.

3. Clear Food Labelling: Advocate for clear information in Hindi on food ingredients, sugar and fat content, and appropriate warning labels on packaged food products.

4. Food Safety for Children: Demand effective regulation of ultra-processed food products intended for children below six years of age and stronger controls on advertisements targeting children.

5. Public Hearings: Organise public hearings across four areas, in collaboration with other networks and the Delhi Commission for Protection of Child Rights (DCPCR), on nutrition, food quality and children's rights.

6. Creche Policy for Delhi: Intensify efforts to advocate for an effective creche policy in Delhi, taking into account the needs of working women and young children.

7. Joint Research and Documentation: Undertake collaborative research on nutrition, food quality, children's health and local food traditions to develop evidence-based recommendations.

8. Social Media and Public Communication: Disseminate accurate information on nutrition to more families through awareness posters, digital content and other communication channels.

*Vote of Thanks and Conclusion*

At the conclusion of the programme, Kavita Ji thanked all participants, the FORCES Steering Committee, representatives from different areas, partner organisations and network members for their contributions and participation. The programme concluded with a musical presentation by Gyanwati Ji and her colleagues.

The central message of the consultation was that ensuring proper nutrition, safe food and quality childcare for children is not solely the responsibility of the government; it is a shared responsibility of society, organisations and communities. Participants emphasised the need to sustain the efforts initiated during Poshan Maah and continue working collectively to improve children's health, nutrition and overall development.

*Journalist Usha Mahna, New Delhi*

जगतू माहरा की जिस जमीन पर आज जगदलपुर (शहर) बसा है उसी माहरा समाज को बस्तर दशहरा में सम्मान की दरकार

*माहरा समाज का आरोप है कि जब से दशहरा पर्व का शासकीयकरण हुआ है, तब से माहरा समाज को सम्मान नहीं मिलता है।*


जगदलपुर की धरती पर आज धूमधाम से विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा मनाया जाता है, जो 75 दिनों तक चलता है, लेकिन क्या आपको पता है जगदलपुर का नाम पहले जगतुगुड़ा हुआ करता था, बाद में राजा दलपत देव ने जगतू से जग और दलपत सागर के दल मिलाकर जगदलपुर को स्थापित किया. इसमें भी गौर करने वाली बात ये है कि जगतु क्या है?

*जगतू माहरा की जमीन पर आज का जगदलपुर* 

दरअसल जगदलपुर की धरती रियासतकाल में माहरा समाज की हुआ करती थी, इस समाज का सरदार जगतु माहरा था, उस जमाने में दशहरा पर्व के दौरान राज दरबार में राजा के साथ माहरा कबीले के सरदार जगतू भी बैठा करते थे, राजा दलपत देव ने जगतु माहरा से जगदलपुर की भूमि राज पाठ करने के लिए मांगी थी, जिसे जगतू माहरा ने दी थी।

*माहरा समाज का आरोप*

लेकिन इन दिनों विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरे में माहरा समाज ने सम्मान नहीं देने का आरोप लगाया है, समाज के लोगों का कहना रै कि प्रमुख रस्म मुरिया दरबार में समाज को जगह नहीं मिलती है, समाज के लोगों को दरकिनार किया जा रहा है, इस बात से माहरा समाज के सदस्य आक्रोशित हैं, और जिला प्रशासन से उचित मांग कर रहे हैं।

*मुरिया दरबार में माहरा समाज को नहीं बुलाने का आरोप*

माहरा समाज के संभागीय अध्यक्ष राजू बघेल का कहना है कि बस्तर के राजा रहे दलपत देव ने जगतु माहरा को काफी सम्मान दिया था, रियासतकाल के दशहरा पर्व और राजदरबार में राजा और जगतु माहरा साथ बैठा करते थे. जब से दशहरे पर्व का शासकीयकरण हुआ है, तब से माहरा समाज को सम्मान नहीं मिलता है, प्रमुख रस्म मुरिया दरबार में माहरा समाज का कोई स्थान नहीं है।

*माहरा समाज के संभागीय अध्यक्ष राजू बघेल ने कहा *

प्रशासन से मांग करते हैं कि मुरिया दरबार मे माहरा समाज के प्रतिनिधि को विशेष जगह दिया जाए. साथ ही प्रशासन दंतेश्वरी मंदिर के नजदीक भूमि आरक्षित करके दें, जो पूर्व से चिन्हित था, ताकि बस्तर सांसद के सहयोग से जगतु माहरा की भव्य प्रतिमा स्थापित की जा सके।

*सांसद महेश कश्यप ने दिया आश्वासन*

बस्तर सांसद व दशहरा समिति के अध्यक्ष महेश कश्यप का कहना है कि मुरिया दरबार मे सभी समाज को सम्मान मिलना चाहिए, मुरिया दरबार में माहरा समाज का प्रतिनिधि मंडल उपस्थित हो, इसके लिए बातचीत की जाएगी, कहीं न कहीं दशहरा पर्व शासन-प्रशासन के अधीन होने के कारण पुरानी विरासत व्यवस्था में चूक हुई है, इस पुरानी परंपरा को गौरव के साथ स्थापित करने के लिए कार्य किया जाएगा।

सांसद ने कहा कि जगतू माहरा ने अपना जमीन दान में दिया है, उनके कर्ज को नहीं चुकाया जा सकता है, लेकिन उन्हें बराबर सम्मान मिलना चाहिए और उनकी प्रतिमा स्थापित करनी चाहिए, इसीलिए समाज की मांग भी है और इसे स्वयं से भी सोचकर निर्णय लिया जा रहा है, सांसद निधि से प्रतिमा के लिए राशि जारी करके सहयोग किया जाएगा और जगतु माहरा जी की भव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी।

बीकानेर जैन महाकुभ में कवि गुलजारी लाल जैन का काव्य पाठ यादगार पल बना 


जबलपुर/बीकानेर

अखिल भारतीय साधुमार्गीय जैन संघ के हुक्म नवम पट्टाधर आचार्य रामलाल महाराज, बहुश्रुत उपाध्याय प्रवर राजेश मुनि शुभार्शीवाद-सान्निध्य में जैन साहित्य संगम व्दारा आयोजित त्रि-दिवसीय 27-28-29 सितम्बर 2026 तृतीय राष्र्टीय अधिवेशन का उद् घाटन समारोह पंजाब के राज्यपाल व चंडीगड़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया के मुख्य अतिथ्य में आदीनाथ भवन बीकानेर में मंगल शुभारंभ हुआ।

जिसमें विराट कविसम्मेलन व सम्मान समारोह आयोजित किया गया जिसमें जबलपुर नगर  के हास्य व्यंग के कवि गुलजारी लाल जैन ने "आई सावन की रिमझिम फुहार" रचना पढ़कर मंच पर वाह वाही लूटी हजारों श्रोताओं को बांधे रखा जिसे हृदय से सराहा गया। कवि सम्मेलन का संचालन श्री विमल भंडारी जी भोपाल ने किया। देश के विभिन्न क्षेत्र से पधारे कवियों ने भाग लिया।स्मृति चिन्ह से कवि श्री जैन का मंच पर काव्य कीर्ति सम्मान एवं कविता प्रतियोगिता "कर्म जैसा बोओगे वैसा पाओगे" में प्रशास्ति पत्र दिया गया।

रितिक जैन ने कविता प्रतियोगिता में काव्य पाठ किया जिसकी सराहना की गई एवं मंच पर प्रशास्ति पत्र दिया गया। मति प्रमिला जैन ने जैन साहित्य सम्मेलन में अपनी सहभागिता बड़ चड़ प्रदान की। जैन साहित्य संगम संस्थान के अध्यक्ष जगदीप जैन" हर्षदर्शी" के प्रति आभार व्यक्त करता हूं जिन्होने कवियों को राष्र्टीय स्तर का मंच प्रदान किया।

          ‌राजस्थान की धरती के आध्यात्मिक  एवं वाह वाह क्या बात है कार्यक्रम में सफलता प्राप्त कवि जगदीप जैन हर्षदर्शी के भागीरथी प्रयासों को नमन वंदन जिनके मेहनत से जैन साहित्य संगम सम्मेलन एवं अधिवेशन ऊंचाईयों तक पहुंचा। इस आयोजन की कवि संगम त्रिपाठी संस्थापक प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा ने बधाई दी संस्कारधानी जबलपुर के कवि गुलजारी लाल जैन ने राजस्थान की धरती पर काव्य पाठ किया वह प्रेरणादायक है।

संस्कारधानी के वरिष्ठ कवि भगवत दुबे को स्मारिका समर्पित 


जबलपुर

प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा द्वारा आयोजित हिंदी सम्मेलन मथुरा में स्मारिका अक्षवी का विमोचन किया गया। कवि संगम त्रिपाठी संस्थापक प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा ने बताया कि अक्षवी स्मारिका की संपादक सीमा शर्मा मेरठ व संयोजन प्रदीप मिश्र अजनबी दिल्ली ने किया। अक्षवी स्मारिका की प्रबंध संपादक सिद्धेश्वरी सराफ शीलू है। अक्षवी स्मारिका माता पिता पर समर्पित की गई है।

         अक्षवी स्मारिका सिद्धेश्वरी सराफ शीलू ने संस्कारधानी जबलपुर के वरिष्ठ कवि साहित्यकार हिंदी प्रेमी आचार्य भगवत दुबे को भेंट की। चर्चा के दौरान सिद्धेश्वरी सराफ शीलू ने मथुरा में आयोजित हिन्दी सम्मेलन की विस्तृत जानकारी दी। आचार्य भगवत दुबे जी ने सिद्धेश्वरी सराफ शीलू को आयोजन के सफल संचालन की बधाई दी व प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा के हिंदी राष्ट्रभाषा अभियान की प्रशंसा की। इस अवसर पर उनके पुत्र उपस्थित रहे।

थर्मल एवं न्यूक्लियर पावर प्लांट के विरोध में चौसरा में किसानों की बैठक संपन्न


छिंदवाड़ा

ग्राम चौसरा में आज थर्मल पावर प्लांट के प्रस्तावित निर्माण के विरोध में किसानों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में हिवरखेड़ी, चौसरा, धनौरा, डागावानी, पिपरिया एवं थावड़ी सहित आसपास के ग्रामों के किसान शामिल हुए।

बैठक में किसानों ने कहा कि क्षेत्र में न्यूक्लियर पावर प्लांट अथवा थर्मल पावर प्लांट किसी भी प्रकार का प्रोजेक्ट स्थापित नहीं किया जाए। किसानों के अनुसार उनकी भूमि के संबंध में पूर्व से न्यायालयीन प्रकरण भी विचाराधीन हैं तथा लगभग 38 वर्षों से भूमि पर किसानों का कब्जा चला आ रहा है।

किसानों ने कहा कि यदि शासन द्वारा भूमि का अधिग्रहण कागजों में किया गया है, लेकिन आज भी भूमि किसानों के कब्जे में है, तो इस स्थिति का विधि एवं राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार निराकरण किया जाना चाहिए। किसानों की प्रमुख मांग है कि भूमि की पावती/राजस्व रिकॉर्ड में किसानों के नाम दर्ज किए जाएं तथा उनके भूमि अधिकार स्पष्ट किए जाएं।

किसानों ने मीडिया, न्यायालय एवं शासन-प्रशासन से अनुरोध किया कि पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए किसानों के पक्ष को सुना जाए और किसी भी परियोजना के संबंध में निर्णय लेने से पहले प्रभावित किसानों के हितों एवं उनके वैधानिक अधिकारों का ध्यान रखा जाए।

बैठक में उपस्थित किसानों ने एकजुट होकर कहा कि किसानों की भूमि एवं उनके अधिकारों की रक्षा करते हुए ही आगे की कार्यवाही की जाए।

मालवा की धरती के कलमकारों का मथुरा में हुआ भव्य सम्मान


जबलपुर/मथुरा

प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा के सम्मेलन में मालवा अंचल से कवि साहित्यकार हिंदी राष्ट्रभाषा अभियान में शामिल होने आते है। मालवा अंचल के रचनाकारों को दादा भैरु सुनार मनासा मंदसौर ने एक सूत्र में पिरोने का काम किया है। मालवा अंचल से कवि गोपाल जाटव विद्रोही खड़ावदा मंदसौर, रामगोपाल फरक्या वरिष्ठ साहित्यकार खड़ावदा मंदसौर,  कवि मुकेश निडर पिपलिया मंडी मंदसौर व भैरु सुनार मनासा को प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा द्वारा दिनांक 27 सितंबर 26 को मथुरा आयोजन में सम्मानित किया गया।

       मालवा अंचल से राजेंद्र कुमार तिवारी मंदसौर, पप्पू सोनी शामगढ़ मंदसौर, दिवाकर उपाध्याय वरिष्ठ कवि साहित्यकार गरोठ, विजय सोनी मंदसौर आदि हिन्दी सेवा में लगे रहते है। हिंदी के प्रति बाल कवि बैरागी जी की प्रेरणा से इनके दिलों में धड़कती है। मालवा अंचल के कलमकारों की हिंदी सेवा देख देशवासियों को प्रेरणा लेनी चाहिए यह बात कवि संगम त्रिपाठी संस्थापक प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा ने कही।

          मालवा अंचल के रचनाकारों को सम्मानित होने पर डॉ धर्म प्रकाश वाजपेयी, प्रदीप मिश्र अजनबी, डॉ धर्मेंद्र कुमार मिश्रा,डॉ लाल सिंह किरार, डॉ सोमनाथ शुक्ल, मेघा अग्रवाल, सिद्धेश्वरी सराफ शीलू, राजकुमारी रैकवार राज, विजय तिवारी किसलय, कवि सतेन्द्र सिंह सतेन्द्र, मांगीलाल मरमिट, डॉ रामदेव शर्मा राही, आचार्य निर्मल, सीमा शर्मा, अर्जुन सक्सेना, तरुणा खरे 'तनु' व  समस्त हिंदी प्रेमियों ने बधाई दी है।

डॉ. रामदेव शर्मा 'राही' हिन्दी सम्मेलन में सम्मानित हुए - कवि संगम त्रिपाठी 


जबलपुर/मथुरा

प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा द्वारा आयोजित हिंदी सम्मेलन में देश भर से आए कवियों विद्वानों ने भाग लिया और आयोजन को दिव्य व भव्य बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ा। 

         प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा के संस्थापक कवि संगम त्रिपाठी, महासचिव प्रदीप मिश्र अजनबी, राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ लाल सिंह किरार, संपादक सीमा शर्मा, राष्ट्रीय संयोजक डॉ सोमनाथ शुक्ल, राष्ट्रीय संचालिका मेघा अग्रवाल, मंच संचालिका सिद्धेश्वरी सराफ शीलू ने डॉ रामदेव शर्मा राही मथुरा को सम्मानित किया। विदित हो कि सम्मेलन के मुख्य अतिथि डॉ धर्म प्रकाश वाजपेयी, अध्यक्षता प्रभा बच्चन श्रीवास्तव, विशिष्ट अतिथि द्वय विनोद कुमार मिश्र ' सुरमणि' व अनिल कुमार मिश्र रहे।

     पं निरंजन द्विवेदी वत्स, दादा भैरु सुनार, रामगोपाल फरक्या, वरिष्ठ कवि आचार्य निर्मल, कवि गोपाल जाटव विद्रोही, कवि पोरवाल मुकेश निडर, शिवशंकर तिवारी 'सोहगौरा, मांगीलाल मरमिट, तरुणा खरे 'तनु', दीनदयाल तिवारी बेताल, राजकुमारी रैकवार राज, सोनिया नायडू आदि ने बधाई दी व उनके साहित्य साधना की प्रशंसा की।

अनुपमा (सबकी सहेली) के नवें अंक का विमोचन, संघर्ष और सफलता की प्रेरणादायक कहानी


लेखकों की आवाज़ और सशक्तिकरण को समर्पित अनुपमा (सब की सहेली) पत्रिका का नवां अंक नई शुरुआत: मेरे सपने, मेरी उड़ान विशेषांक के रूप में प्रकाशित हुआ। 'अनुपमा (सबकी सहेली)' ने इस बार अपने पाठकों के लिए एक बेहद खास और प्रेरणादायक सौगात पेश की है। 

इस विशेषांक में समाज की विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों के संघर्ष, सफलता और आत्मनिर्भरता की प्रेरणादायक कहानियों को जगह दी गई है। "नई शुरुआत: मेरे सपने, मेरी उड़ान" विशेषांक के माध्यम से पत्रिका ने यह संदेश दिया है कि हर व्यक्ति अपने सपनों को साकार कर सकता है। इस अवसर पर पत्रिका की संपादक मंडल ने कहा कि अनुपमा पिछले 9 अंकों से नये साहित्यकारों को एक मंच दे रही है जहाँ वे अपने अनुभव साझा कर सकें और एक-दूसरे की भावनाओं को समझ सकें। यह अंक विशेष रूप से करियर, शिक्षा, उद्यमिता और सामाजिक बदलाव में योगदान पर केंद्रित है।

अनुपमा एक ऐसी पत्रिका है जिसमें नये पुराने, छोटे बड़े और देश विदेश के सभी तरह के रचनाकारों को अपनी लेखनी चलाने का अवसर प्रदान किया जाता है और उन्हें सम्मान पत्र से सम्मानित किया जाता है। 'अनुपमा' के इस अंक को लेकर पाठकों में काफी उत्साह देखा जा रहा है। पत्रिका का दावा है कि यह अंक न केवल जानकारी देगा, बल्कि मुश्किल समय में हार न मानने का हौसला भी देगा। यदि आप जानना चाहते हैं कि सफलता की असली कीमत क्या होती है, तो यह विशेषांक आपके लिए एक अनिवार्य संग्रह है।

*सुशी सक्सेना*

दादा भैरु सुनार मनासा वरिष्ठ कवि को सम्मानित किया गया - कवि संगम त्रिपाठी 


जबलपुर/मथुरा

प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा ने मथुरा हिन्दी सम्मेलन में दादा भैरु सुनार मनासा मध्यप्रदेश को सम्मानित किया। मुख्य अतिथि डॉ धर्म प्रकाश वाजपेयी दिल्ली विशिष्ट अतिथि विनोद कुमार मिश्र दतिया व अनिल कुमार मिश्र कटनी एवं अध्यक्षता प्रभा बच्चन श्रीवास्तव जबलपुर के सानिध्य में विराट ऐतिहासिक आयोजन में दादा भैरु सुनार मनासा वरिष्ठ कवि को सम्मानित किया गया।

        दादा भैरु सुनार मनासा के साथ मालवा की धरती से कवि गोपाल जाटव विद्रोही खड़ावदा मंदसौर, रामगोपाल फरक्या खड़ावदा मंदसौर व कवि मुकेश निडर पिपलिया मंडी मंदसौर अपने सहयोगियों के साथ अपनी पूर्ण निष्ठा से आयोजन को सफल बनाएं।

           दादा भैरु सुनार मनासा प्रति वर्ष प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा के सम्मेलन में दल बल सहित निस्वार्थ भाव से हिन्दी सेवा में शामिल होने आते हैं उन्हें संस्था सम्मानित कर स्वयं गौरवान्वित है।

       कवि संगम त्रिपाठी संस्थापक प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा, डॉ लाल सिंह किरार राष्ट्रीय अध्यक्ष अम्बाह मुरैना, प्रदीप मिश्र अजनबी महासचिव दिल्ली, राष्ट्रीय संयोजक डॉ सोमनाथ शुक्ल प्रयागराज, संस्था संचालिका मेघा अग्रवाल नागपूर, राष्ट्रीय मंच संचालिका सिद्धेश्वरी सराफ शीलू जबलपुर, डॉ रामदेव राही छाता, मथुरा, वरिष्ठ कवि मांगीलाल मरमिट श्योपुर मध्यप्रदेश व कवि सतेन्द्र सिंह ' सतेन्द्र ' भिंड मध्यप्रदेश उपस्थित रहे व बधाई दी।

      कवि संगम त्रिपाठी ने कहा कि प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा हिन्दी राष्ट्रभाषा अभियान के अंतर्गत हिंदी सेवियों को सदैव सम्मानित करती रहेगी।

राष्ट्रीय सम्मेलन में शिवशंकर तिवारी 'सोहगौरा को मिला सेवा का सम्मान - कवि संगम त्रिपाठी 

जबलपुर/मथुरा 


प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा के तत्वावधान में दिनांक 26 व 27 सितंबर 26 को आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन व सम्मान समारोह में वरिष्ठ पत्रकार समाजसेवी हिंदी भक्त शिवशंकर तिवारी 'सोहगौरा प्रतापगढ़ को सम्मानित किया गया। शिवशंकर तिवारी 'सोहगौरा वरिष्ठ पत्रकार समाजसेवी का हिंदी के प्रति प्रेम अवर्णनीय है। कवि संगम त्रिपाठी संस्थापक प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा ने बताया कि समाज व साहित्य के प्रति उनके समर्पण भाव से राष्ट्रीय सम्मेलन में उपस्थित रचनाकारों ने ऐसे व्यक्तित्व को पाकर स्वमेव धन्य हो गये। जिस भौतिक सुख सुविधा की दुनिया में एक व्यक्ति अपने समाज, संस्कृति व भाषा के प्रति समर्पित हो उनका सम्मान करना अपने आप में उपलब्धि ही है। 

डॉ धर्म प्रकाश वाजपेयी दिल्ली, डॉ लाल सिंह किरार अम्बाह मुरैना, प्रदीप मिश्र अजनबी दिल्ली, सीमा शर्मा मेरठ, डॉ सोमनाथ शुक्ल प्रयागराज, सिद्धेश्वरी सराफ शीलू जबलपुर, अनिल मिश्र कटनी, विनोद मिश्र दतिया, मेघा अग्रवाल नागपूर, अनिल शर्मा समाजसेवी दिल्ली आदि ने बधाई दी है।

लाल चौक से गूंजा ‘ड्राइवर्स डिग्निटी’ का राष्ट्रीय संदेश, एआईएमटीसी ने मनाया राष्ट्रीय ‘ड्राइवर सम्मान दिवस'

*वाहन चालकों के सम्मान व सामाजिक सुरक्षा के हक में एक ऐतिहासिक पहल*


*न्यू दिल्ली से पत्रकार ऊषा माहना*

श्रीनगर

देश की अर्थव्यवस्था, सप्लाई चेन और करोड़ों लोगों की दैनिक आवाजाही को गति देने वाले लाखों प्रोफेशनल ड्राइवरों कीगरिमा, सम्मान, सुरक्षा एवं कल्याणको समर्पित‘ड्राइवर डिग्निटीडे’ का राष्ट्रीय आयोजन श्रीनगर (जम्मू-कश्मीर)  के ऐतिहासिकलाल चौक–घंटाघरसे एक व्यापक संदेश के साथ मनाया गया|

जम्मू -कश्मीर सरकार, व कश्मीर प्रशासन के आहवाहन पर डॉ. हरीश सभरवाल, राष्ट्रीय अध्यक्ष, ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (एआइएमटीसी), द्वारा देश के चालक भाई-बहनों के सम्मान, गरिमा, सुरक्षा और अधिकारों के लिए शुरू की गई यह ऐतिहासिक महत्त्वपूर्ण पहल का शुभारंभश्रीनगरजम्मू-कश्मीरसे हुआजहाँ से“ड्राइवर को देखें, व्यक्ति का सम्मान करें”का संदेश देशभर में प्रसारित किया गया।

चालक समुदाय के प्रति सम्मान, संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी के इस संदेश को देश के कोने-कोने तक पहुँचाते हुएभारत के विभिन्न हिस्सों में व्यापक रूप से कार्यक्रम आयोजित किए गए और इसे जनभागीदारी का स्वरूप दिया गया।

श्रीनगर से उठी यह आवाज़ पूरे देश में गूँजी और “ड्राइवर का सम्मान—देश का सम्मान” के संदेश को राष्ट्रीय स्तर पर सशक्त रूप से स्थापित किया।

डॉ. हरीश सभरवाल, राष्ट्रीय अध्यक्ष, (एआइएमटीसी) के नेतृत्व एवं ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के तत्वावधान में आयोजित इस ऐतिहासिक कार्यक्रम मेंभारत रोड सेफ्टी वॉलंटियर्स(बी. ए. आर. एस), जे.के. टायर एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड, दिल्ली कॉन्ट्रैक्ट बस एसोसिएशन(डीसीबीए), फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन(एफ. ए. डी. ए), आई. टी. एस.  इंडिया फोरम, फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री(एफ. आई. सी. सी. आई), ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन(ए सी एम ए), ऑटोमोटिव स्किल्स डेवलपमेंट काउंसिल(ए. एस. डी. सी), साउथ एशिया सेंटर फॉर पीस एंड पीपल्स एम्पावरमेंट(एस. सी. ए. पी. ई. ई), भारत स्काउट्स एंड गाइड्स, एशियन रोड सेफ्टी अकादमीसहित विभिन्न राष्ट्रीय संस्थाओं तथाश्रीनगर के स्थानीय परिवहन एवं चालक संघों- कश्मीर ट्रांसपोर्ट फेडरैशन, कश्मीर ट्रांसपोर्ट कोऑर्डनैशन कमिटी आदि ने सक्रिय सहयोग एवं सहभागिता की।यह कार्यक्रम एक ऐतिहासिक और राष्ट्रीय स्तर की पहल के रूप में सामने आया।

चालकों के सम्मान, गरिमा, सुरक्षा और कल्याण को समर्पित यह आयोजनविभिन्न राष्ट्रीय एवं स्थानीय संगठनों की सामूहिक भागीदारी का उदाहरण बना और एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पहल के रूप में सामने आया। इस अवसर पर चालक समुदाय के योगदान को रेखांकित करते हुएसम्मान, सुरक्षा और सामाजिक प्रतिष्ठाका संदेश देशभर में पहुँचाने का संकल्प भी व्यक्त किया गया।

इस अभियान में हसीब उर रहमान, आईपीएस, पुलिस उपमहानिरीक्षक, यातायात, कश्मीर ; मुबाशिर जान, असिस्टेंट रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिसर (एन्फोर्समेंट), मोटर वाहन विभाग, (जम्मू & कश्मीर); राम शंकर पांडे, चेयरपर्सन -भारत रोड सैफ्टी वॉलनटेरर्स (बी. ए. आर. एस), अखिलेश श्रीवास्तव, (अध्यक्ष - आई. टी. एस.  इंडिया फोरम); अनिल छिकारा, पूर्व डेप्यूटी ट्रांसपोर्ट कमिशनर (दिल्ली सरकार) एवं ट्रांसपोर्ट एड्वाइसर (एआइएमटीसी) ;  डॉ प्रेरणा (बी. ए. आर. एस); उमर भट्ट (एस. सी. ए. पी. ई. ई) ; प्रसेनजीत भट्टाचार्य, फाउन्डर ‘वर्क विद डिग्निटी फाउंडेशन’आदि ने भाग लिया|

इस मौके पर देश भर से से आए एआईएमटीसी के गणमान्य सदस्यों ने इस कार्यकर्म में भाग लिया जिनमें उल्लेखनीय डॉ जी आर शनमुगप्पा, चेयरमैन (एआईएमटीसी) ; गुरिन्द्र पाल सिंह, पूर्व अध्यक्ष ; बल मलकित सिंह, पूर्व अध्यक्ष; भीम वाधवा, पूर्व अध्यक्ष; अमृतलाल मदान, पूर्व अध्यक्ष; हरपाल सिंह बक्शी, अध्यक्ष-डीसीबीए; विजेंदर दलाल, कार्यकारी अध्यक्ष (डीसीबीए); सुरेश खोसला, संदीप धूपर; अजय मैनी;  बी. जी. लिन्गाराजू; सरंजीत सिंह कलसी, वीरेंद्र गुप्ता, सरजंत सिंह; मदन डावर, बलवंत सिंह भुलर (हाइवै हीरो ट्रस्ट), विमल वाही, अमरजीत सिंह सहगल, मोहन सिंह, अध्यक्ष (आर.टी.ओ.डब्लू.ए.) ; सोम लूथरा, गुंजीत सिंह सांघा, अमरीक सिंह, प्रदीप, श्याम सुन्दर, रामरत्न, संजय, पूनम, सौरभ, रूपेश, जयपाल सोलंकी, मुकेश जैन आदि शामिल रहे |

प्रताप पार्क से घंटाघर, लाल चौक, श्रीनगर (जम्मू कश्मीर) तक—ड्राइवर सम्मान में ऐतिहासिक वॉकाथॉन व प्रताप पार्क से लाल चौक–घंटाघर तक निकला ड्राइवर डिग्निटीवॉकाथॉन। ड्राइवर डिग्निटीडे के अवसर पर श्रीनगर मेंप्रताप पार्क से लाल चौक–घंटाघर तक ड्राइवर डिग्निटीवॉकाथॉन का आयोजन किया गया। वॉकाथॉन में बड़ी संख्या में ड्राइवरों, परिवहन क्षेत्र के प्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवकों और विभिन्न संस्थाओं से जुड़े प्रतिभागियों ने भाग लेकर देश के उन लाखों–करोड़ों लोगों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का संदेश दिया, जो प्रतिदिन अपने श्रम से लोगों और अर्थव्यवस्था को गतिमान रखते हैं।

इस आयोजन ने विशेष रूप से राष्ट्रीय स्वरूप तब ग्रहण किया जब जम्मू-कश्मीर के साथ-साथकर्नाटक, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मुंबई और देश के अन्य हिस्सोंसे आए परिवहन प्रतिनिधि एवं सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोग इसमें शामिल हुए। ड्राइवरों की गरिमा, सम्मान, सुरक्षा और कल्याण केवल किसी एक क्षेत्र का विषय नहीं, बल्कि पूरे देश से जुड़ा हुआ विषय है।इस राष्ट्रीय पहल के संदेश को“शुक्रिया सारथी! हमारे सुरक्षा साथी!”जैसे भावपूर्ण अभियान से भी जोड़ा गया, जिसमें नागरिकों से अपने आसपास के किसी ड्राइवर को धन्यवाद देने, उसकी बात सुनने और उसके योगदान को सम्मान देने का आह्वान किया गया।

वॉकाथॉनका मूल संदेश था —“सी द ड्राइवर, रिस्पेक्ट द पर्सन” — ड्राइवर को देखिए, इंसान का सम्मान कीजिए।.ड्राइवर डिग्निटीडे से जुड़े राष्ट्रीय सोशल-मीडिया अभियान में भी यही विचार प्रमुखता से सामने आया | श्रीनगर की सड़कों पर निकला यह वॉकाथॉनकेवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्किसम्मान, सुरक्षा, सामाजिक संवेदनशीलता और ड्राइवर कल्याण को राष्ट्रीय संवाद का हिस्सा बनाने का सार्वजनिक संदेशबनकर सामने आया।

इसके तत्पश्चात, जोगगर्स परक में एक चालक भाइयों और बहनों के सम्मान में एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले सभी लोगों तथा विशेष रूप से ड्यूटी के दौरान दिवंगत हुए ड्राइवरों की स्मृति मेंएक मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलिदी गई। 

ड्राइवर डिग्निटी डे के अवसर परउत्कृष्ट एवं दीर्घकालीन सेवा, अनुशासित कार्यशैली तथा सुरक्षित ड्राइविंग का उल्लेखनीय रिकॉर्डरखने वाले देश भर से आए चालक भाई-बहनों को सम्मानित अतिथिगण द्वारा स्मृति-चिह्न एवं अंगवस्त्रभेंट कर उनके अमूल्य योगदान, परिश्रम और सेवाभाव के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता व्यक्त की गई।

यह सम्मान उन चालकों के परिश्रम, जिम्मेदारी, अनुशासन और सड़क सुरक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की सार्वजनिक सराहनाका प्रतीक है। देश की अर्थव्यवस्था और परिवहन व्यवस्था को निरंतर गतिशील रखने वाले इन समर्पित चालकों का सम्मान समाज मेंड्राइवरों की गरिमा और सम्मान को बढ़ानेके साथ-साथसुरक्षित एवं जिम्मेदार ड्राइविंग की संस्कृति को प्रोत्साहित करनेकी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

“ड्राइवर सड़क परिवहन के पायलट और देश के आंतरिक सिपाही हैं” — डॉ. हरीश सभरवाल, राष्ट्रीय अध्यक्ष उन्होंने कहा, “देश की हर आवश्यक वस्तु और करोड़ों लोगों की आवाजाही के पीछे हमारे ड्राइवर हैं। वे हमारे आंतरिक सिपाही हैं। जिस प्रकार ट्रेन और विमान के पायलटों को सम्मान दिया जाता है, उसी प्रकार सड़क परिवहन के पायलट—हमारे ड्राइवरों—को भी समान गरिमा और सम्मान मिलना चाहिए।”

उन्होंने कहा कि ड्राइवरों का योगदान केवल आर्थिक गतिविधि तक सीमित नहीं है, बल्कि वेराष्ट्र की जीवनरेखा को निरंतर गतिमान रखने वाले महत्वपूर्ण कर्मयोगीहैं। कठिन मौसम, लंबे रूट, लंबे कार्य घंटे और अनेक चुनौतियों के बावजूद वे देश की आवश्यक वस्तुओं और यात्रियों की आवाजाही सुनिश्चित करते हैं।

डॉ. सभरवाल ने कहा किड्राइवर डिग्निटीडे केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि वर्षभर चलने वाला सामाजिक संकल्प होना चाहिए।ड्राइवरों को सम्मानजनक व्यवहार के साथ-साथ सुरक्षित कार्य वातावरण, पर्याप्त विश्राम, स्वास्थ्य सुविधाएं, सामाजिक सुरक्षा और परिवार के बेहतर भविष्य का अवसर मिलना आवश्यक है।

उन्होंने बताया किएआईएमटीसी ड्राइवरों के सामाजिक एवं आर्थिक कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुएलगातार सरकार के समक्ष उनके लिएई.एस.आई. एवं पी.एफ. जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं, ड्राइवर्स वेलफेयर बोर्ड का गठन, आयुष्मान भारत से जुड़ाव, प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आवास सुविधा, नियमित स्वास्थ्य एवं नेत्र जांच शिविर, चिकित्सा सहायता तथा व्यापक बीमा सुरक्षाउपलब्ध कराने की मांग उठाता रहा है। संगठन का प्रयास है कि देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बने ड्राइवरों और उनके परिवारों को सम्मानजनक जीवन, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं तथा मजबूत सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

इसके साथ ही एआईएमटीसीद्वारा हाईवे परसुरक्षित पार्किंग, विश्राम स्थल, स्वच्छ पेयजल, शौचालय, स्वच्छ एवं रियायती भोजन तथा चिकित्सा सुविधाओंकी उपलब्धता पर भी लगातार जोर दिया जा रहा है।

डॉ. सभरवाल ने कहा कियातायात पुलिस और प्रवर्तन अधिकारियों का व्यवहार भी चालक के सम्मान और सड़क सुरक्षा से जुड़ा है।कानून का पालन कराना जरूरी है, लेकिन यह कामसम्मान, संवेदनशीलता और मानवीय व्यवहारके साथ किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, “ड्राइवर और ट्राफिक पुलिस एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा के साझेदार और दोस्त हैं। नियमों का पालन जरूरी है, लेकिन इसे सम्मान और संवेदनशीलता के साथ सुनिश्चित किया जाना चाहिए।”

उन्होंने यातायात पुलिस और प्रवर्तन अधिकारियों को समय-समय परअच्छे व्यवहार, सम्मानपूर्वक संवाद, संवेदनशीलता और प्रभावी बातचीतका प्रशिक्षण देने की आवश्यकता पर जोर दिया।

श्री रामाशंकर पांडेय, चेयरपर्सन, बी.ए.आर.एस.ने ड्राइवर डिग्निटीडे को एक निरंतर राष्ट्रीय आंदोलन में बदलने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ड्राइवर को केवल वाहन चलाने वाले व्यक्ति के रूप में देखना उनके वास्तविक योगदान को सीमित करना है। 

उन्होंने कहा कि ड्राइवरअर्थव्यवस्था, सप्लाई चेन और करोड़ों लोगों की आवाजाही के महत्वपूर्ण संचालकहैं तथा ड्राइवर डिग्निटीका वास्तविक अर्थ केवल एक दिन सम्मानित करना नहीं, बल्कि पूरे कार्यजीवन कोसम्मानजनक, सुरक्षित और मानवीयबनाना है।

उन्होंने“सी द ड्राइवर, रिस्पेक्ट द पर्सन.”को जन-अभियान बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि सड़क पर हमारा व्यवहार ही इस अभियान की वास्तविक सफलता का पैमाना होगा।

उन्होंने कहा कि सरकार, उद्योग, ट्रांसपोर्ट संगठन, वाहन मालिक, एनफोर्समेंट एजेंसियांऔर समाज को मिलकर ड्राइवरों के लिए बेहतर कार्य परिस्थितियां तैयार करनी होंगी।

जे.के. टायर्स एवं इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड की ड्राइवर कल्याण हेतु पहल

इस अवसर परश्री संजीव शर्मा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं मोबिलिटी सॉल्यूशंस एवं फ्लीट मैनेजमेंट, जे.के. टायर्स एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड, ने चालकों के कल्याण के लिए कंपनी द्वारा पिछलेदस वर्षों से चलाए जा रहे विभिन्न कार्यक्रमोंकी जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि कंपनी द्वारा चालकों के लिएस्वास्थ्य जांच और चिकित्सा शिविरलगाए जाते हैं तथा उनके कल्याण के लिए विभिन्न योजनाएं चलाई जाती हैं। इसके साथ ही, मेधावी चालकों के बच्चों की पढ़ाई के लिए पूरी फीस की छात्रवृत्तिभी दी जाती है।

उन्होंने कहा कि इन प्रयासों का उद्देश्य चालकों और उनके परिवारों के स्वास्थ्य, शिक्षा तथा बेहतर जीवन में सहयोग देना और उनके महत्वपूर्ण योगदान के प्रति सम्मान व्यक्त करना है।

उन्होंने कहा किदेश की सप्लाई चेन, व्यापार और रोजमर्रा का जीवन लाखों ड्राइवरों की अथक मेहनत पर निर्भर है।ड्राइवर की सेहत और सुरक्षा ही सुरक्षित सड़क परिवहन की पहली कड़ी है। ड्राइवर सुरक्षित रहेगा, तभी सफर सुरक्षित होगा। इसी सोच के साथ बेहतर और सुरक्षित टायर तकनीक विकसित करने के लिए जे.के. टायर्स एवं इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड लगातार प्रयास कर रही है।

श्री हसीब उर रहमान, आईपीएस, पुलिस उपमहानिरीक्षक, यातायात, कश्मीर ने कहा कि देश में पहली बार ड्राइवर डिग्निटीडे जैसे राष्ट्रीय अभियान की शुरुआत श्रीनगर से होना गर्व की बात है।

उन्होंनेड्राइवरों तथा यातायात पुलिस एवं प्रवर्तन अधिकारियों के बीच बेहतर संवाद, आपसी समझ और सहयोगको बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि अनुशासन और सम्मान साथ-साथ चलें |कानून और यातायात नियमों का पालन सुनिश्चित करना आवश्यक है, लेकिन इसके साथ ड्राइवर कीगरिमा और सम्मानभी कायम रहना चाहिए। सड़क पर टकराव के बजायसम्मान, संवाद और सहयोगका वातावरण सड़क सुरक्षा को अधिक प्रभावी बना सकता है।

उन्होंने ड्राइवरों को समाज और अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कहा कि उन्हें उचित सम्मान मिलना चाहिए। साथ ही उन्होंनेअनुशासित एवं सुरक्षित ड्राइविंग करने वाले ड्राइवरों को प्रोत्साहित करनेतथा यातायात नियमों के पालन की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने ड्राइवरों के कल्याण, सेवानिवृत्ति के बाद सहायता तथासी.एस.आर,के माध्यम से ड्राइवरों के बच्चों की शिक्षा और परिवारों के कल्याणके लिए सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

श्री प्रसेनजीत भट्टाचार्य, फाउन्डर - वर्क विद डिग्निटी फाउंडेशन—ने ‘वर्क विद डिग्निटी’ की भावना को ड्राइवर डिग्निटीडे से जोड़ते हुए कहा कि हर व्यक्ति को गरिमा के साथ काम करने का अधिकार है और ड्राइवर भी इससे अलग नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि सम्मानजनक व्यवहार के साथसुरक्षित कार्य वातावरण, पर्याप्त विश्राम, स्वास्थ्य, स्वच्छता, सामाजिक सुरक्षा और परिवार के बेहतर भविष्यको प्राथमिकता देना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि सड़क पर हमें केवल एक वाहन नहीं, बल्कि उसके पीछे खड़ेएक इंसान, एक परिवार और देश की जीवनरेखा को आगे बढ़ाने वाले कर्मयोगीको देखना चाहिए।

श्रीनगर में इस राष्ट्रीय आयोजन को जमीनी स्तर पर सफल बनाने मेंश्री उमर भट, अध्यक्ष साउथ एशिया सेंटर फॉर पीस एंड पीपल्स एम्पावरमेंट (एस.ए.सी.पी.पी.ई.), जम्मू-कश्मीर स्थितकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने स्थानीय ड्राइवरों, ट्रांसपोर्ट संगठनों, स्वयंसेवकों, प्रशासन और विभिन्न stakeholders के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित किया।

उन्होंने कहा कि ड्राइवरों का सम्मान केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहना चाहिए और उनके लिएस्वास्थ्य, सुरक्षित पार्किंग, विश्राम, स्वच्छता, सुरक्षा एवं परिवार के कल्याणसे जुड़ी सुविधाओं पर निरंतर कार्य होना चाहिए।

सरकार–उद्योग–ट्रांसपोर्ट–समाज: सभी की साझी जिम्मेदारी – डॉ जी.आर. शनमुगप्पा, चेयरमैन (एआईएमटीसी) . 

डॉ जी.आर. शनमुगप्पा, चेयरमैन (एआईएमटीसी) ने कहा किड्राइवर डिग्निटीडे ने स्पष्ट संदेश दिया है कि ड्राइवरों की गरिमा, सुरक्षा और कल्याण केवल परिवहन व्यवसाय का विषय नहीं है।

सरकार, ऑटोमोबाइल एवं टायर उद्योग, कॉरपोरेट जगत, सड़क सुरक्षा संगठन, ट्रांसपोर्ट संगठन, मीडिया और समाज—सभी को मिलकरड्राइवरों के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और मानवीय कार्य वातावरण तैयार करना होगा।

उन्होंने समाज के प्रत्येक वर्ग से अपील की कि जब भी सड़क पर किसी ड्राइवर से सामना हो, तो उसके साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार करें, उसकी कठिनाइयों को समझें, उसके समय का सम्मान करें और सुरक्षित एवं अनुशासित ड्राइविंग के लिए उसे प्रोत्साहित करें।

ड्राइवरों की गरिमा और सड़क सुरक्षा एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हैं। उचित विश्राम, बुनियादी सुविधाएं, स्वास्थ्य सुरक्षा, सम्मानजनक व्यवहार और सुरक्षित कार्य परिस्थितियां न केवल ड्राइवरों के जीवन को बेहतर बनाती हैं, बल्किसड़क सुरक्षा की संस्कृति को भी मजबूत करती हैं।

अगले वर्ष फिर श्रीनगर में होगा राष्ट्रीय आयोजन – डॉ हरीश सभारवाल, राष्ट्रीय अध्यक्ष (एआईएमटीसी)

उन्होंने एआईएमटीसीकी गौरवशाली विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष1936 में लाहौर में स्थापित एआईएमटीसीआज देशभर में परिवहन क्षेत्र की एक व्यापक और सशक्त राष्ट्रीय आवाज है।

इस मौके पर डॉ. हरीश सभरवाल, राष्ट्रीय अध्यक्ष (एआईएमटीसी) ने कहा कि यह पहलमाननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के जन्मदिवसके अवसर पर ड्राइवर समुदाय के सम्मान में आयोजित की गई है। उन्होंने भारत की समस्त परिवहन बिरादरी की ओर से प्रधानमंत्री जी को जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु की कामना की।

साथ ही उन्होंने घोषणा की किअगले वर्ष हमारे माननीय प्रधान मंत्री जी के जनमदिवस, 17 सितंबर 2027, को श्रीनगर में ड्राइवर डिग्निटीडे का पुनः भव्य एवं व्यापक राष्ट्रीय आयोजनकिया जाएगा।

डॉ हरीश सभारवाल, राष्ट्रीय अध्यक्ष (एआईएमटीसी) ने दोहराया कि वे देशभर के अपने सदस्य संगठनों, ट्रांसपोर्टरों, वाहन मालिकों और ड्राइवर समुदाय के साथ मिलकर इस अभियान को आगे बढ़ायेगें और ड्राइवरों कीगरिमा, सुरक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और कल्याणसे जुड़े विषयों को सरकार और राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न मंचों पर निरंतर उठाते रहेंगें।

अल्पसंख्यक आयोग नें मनाया गया शहीद भगत सिंह का जन्मदिवस, सैकड़ो देशभक्तों ने दी श्रद्धांजलि

*अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष निर्मल जैन व भीम ब्रिगेड ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव जोली खोसला की रही उपस्थिति*


*नई दिल्ली से पत्रकार ऊषा माहना*

दिल्ली

 शहीद-ए-आजम भगत सिंह का जन्मदिवस दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग और भीम ब्रिगेड ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में आयोग के सभागार में मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष निर्मल जैन ने की, जबकि भीम ब्रिगेड ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव जोली खोसला ने कार्यक्रम का संचालन किया। इस अवसर पर सैकड़ों राष्ट्रभक्तों ने भाग लेकर शहीद भगत सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की।

कार्यक्रम में आयोग के सदस्य सरदार कुलदीप सिंह ने शहीद भगत सिंह के जीवन और उनके क्रांतिकारी योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर, 1907 को ग्राम बंगा, जिला लायलपुर (पंजाब) में हुआ था। उनके जन्म से कुछ समय पहले ही उनके पिता किशन सिंह और चाचा अजीत सिंह जेल से रिहा हुए थे। उनके परिवार में स्वतंत्रता आंदोलन की चर्चा होती रहती थी, जिसका भगत सिंह के व्यक्तित्व पर गहरा प्रभाव पड़ा।

अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष निर्मल जैन ने भी भगत सिंह के जीवन से जुड़ी घटनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि 13 अप्रैल, 1919 को अमृतसर के जलियांवाला बाग में हुए गोलीकांड ने बालक भगत सिंह के मन पर गहरा प्रभाव डाला। इस घटना के बाद वे जलियांवाला बाग पहुंचे और वहां की खून से सनी मिट्टी एक बोतल में भरकर ले आए। यह घटना उनके जीवन में देश की आजादी के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा बनी।

भगत सिंह ने आयरलैंड, इटली और रूस सहित विभिन्न देशों के क्रांतिकारी आंदोलनों का अध्ययन किया। वे भारत में भी एक संगठित क्रांतिकारी आंदोलन खड़ा करना चाहते थे। विवाह के लिए परिवार के दबाव के बीच उन्होंने घर छोड़ दिया और कानपुर में स्वतंत्रता सेनानी गणेश शंकर विद्यार्थी के समाचार पत्र ‘प्रताप’ में काम करने लगे। बाद में वे लाहौर पहुंचे और ‘नौजवान भारत सभा’ की स्थापना की। इसी दौरान उनकी मुलाकात चंद्रशेखर आजाद जैसे क्रांतिकारियों से हुई। उन्होंने क्रांतिकारी गतिविधियों के लिए बम बनाने की तकनीक का भी अध्ययन किया।

वर्ष 1928 में साइमन कमीशन के भारत आने पर लाहौर में लाला लाजपत राय के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन किया गया। इस दौरान पुलिस के लाठीचार्ज में लाला लाजपत राय गंभीर रूप से घायल हो गए और कुछ समय बाद उनका निधन हो गया। इस घटना से क्रांतिकारियों में आक्रोश फैल गया। इसके बाद भगत सिंह और उनके साथियों ने पुलिस अधिकारी जॉन सांडर्स की हत्या कर दी। पुलिस की तलाश के बावजूद क्रांतिकारी वेश बदलकर लाहौर से निकलने में सफल रहे।

इसके बाद भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने केंद्रीय विधानसभा में बम फेंकने की योजना बनाई। निर्धारित दिन दोनों विधानसभा की दर्शक दीर्घा में पहुंचे और विरोध जताने के लिए बम फेंके तथा क्रांतिकारी विचारों वाले पर्चे वितरित किए। इस दौरान उन्होंने ‘इंकलाब जिंदाबाद’ के नारे लगाए। दोनों ने गिरफ्तारी दी और अदालत में अपने विचारों के माध्यम से स्वतंत्रता आंदोलन का संदेश देश-विदेश तक पहुंचाया।

भगत सिंह पर सांडर्स की हत्या का मुकदमा भी चलाया गया। इस मामले में सुखदेव और राजगुरु सहित अन्य क्रांतिकारियों को भी आरोपी बनाया गया। भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को 23 मार्च, 1931 को फांसी दे दी गई। उनके बलिदान ने देशभर में स्वतंत्रता आंदोलन को नई प्रेरणा दी। उनका नारा ‘इंकलाब जिंदाबाद’ आज भी लोगों में देशभक्ति और क्रांतिकारी चेतना का संचार करता है।

आयोग के सदस्य मोहम्मद हारुन ने अशफाक उल्ला खान और राम प्रसाद बिस्मिल के योगदान को याद करते हुए कहा कि विभिन्न समुदायों के क्रांतिकारियों ने मिलकर देश की आजादी के लिए संघर्ष किया।

मो. फैज खान ने आश्वासन दिया कि दिल्ली के ऐतिहासिक फिरोजशाह कोटला मैदान में क्रांतिकारियों की स्मृति में एक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम राजीव जोली खोसला की देखरेख में आयोजित किया जाएगा।

भीम ब्रिगेड ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव जोली खोसला ने अपने संबोधन में कहा कि आज सभी को यह शपथ लेकर जाना चाहिए कि समाज में व्याप्त ‘तुझे क्या और मुझे क्या’ की भावना को समाप्त किया जाए। उन्होंने बताया कि यह विचार मधुसूदन बयान जी ने व्यक्त किया था। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के उत्थान के लिए नशे, अत्याचार और भ्रष्टाचार को रोकने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा।

कार्यक्रम में उपस्थित भूषण कुमार जैन ने सभी अतिथियों और राष्ट्रभक्तों को सम्मानित किया। इस अवसर पर वर्ष 1857 की क्रांति से जुड़े वंशजों के सदस्य भी उपस्थित रहे। हितेश शर्मा ने भगत सिंह के जीवन पर सोलो एक्ट प्रस्तुत किया, जबकि आदेश चेनपुरिया ने अपनी मधुर आवाज में भगत सिंह को याद किया। सुरेंद्र पुष्करना और मंजू ने क्रांतिकारियों पर आधारित कविताएं प्रस्तुत कीं।

कार्यक्रम में भीम ब्रिगेड के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष इरशाद कुरैशी, महिला अध्यक्ष परमजीत कौर, ऐजै राजन, ऊषा शर्मा, रिजवान, असगर खान, रीमा, विश्व के पहले सरदार जादूगर जितेंद्र सिंह बब्बर, अनीस दुर्रानी, पूर्व न्यायाधीश ओ.पी. सपरा, बिलाल, कश्मीरी पंडित बहन नैन्सी कौल, योगाचार्य पूनम, सुभाष, गोपाल, केशव, राजहंस सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में सभी ने शहीद भगत सिंह के आदर्शों पर चलने, सामाजिक एकता बनाए रखने और राष्ट्रहित में मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया।

प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा का मथुरा में दिव्यता पूर्ण भव्य हिंदी सम्मेलन संपन्न     


मथुरा -   प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा का मथुरा में हिंदी सम्मेलन भव्यता के साथ आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ धर्म प्रकाश वाजपेयी दिल्ली, विशिष्ट अतिथि विनोद मिश्र दतिया व अनिल कुमार मिश्र कटनी ने की। कवि सम्मेलन सम्मान समारोह पुस्तक विमोचन लोकार्पण व हिंदी विचार गोष्ठी की अध्यक्षता प्रभा बच्चन श्रीवास्तव जबलपुर ने किया। राधा कृष्ण के पूजन वंदना पश्चात अतिथियों का स्वागत किया गया। सरस्वती वन्दना सीमा शर्मा मेरठ व गणेश वंदना सोनिया नायडू ने किया। राजकुमारी रैकवार राज जबलपुर व प्रभा बच्चन श्रीवास्तव जबलपुर ने राष्ट्रभक्ति पर भव्य नृत्य प्रस्तुत किया।

वीणा अब्राहम सिंह आगरा, जयपूर्णा विश्वकर्मा गढ़वा झारखंड, डॉ राम लखन वर्मा विद्यावाचस्पति रायबरेली, नितिन शर्मा नीति भोपाल, बेखुद ब्रजवासी मथुरा, डॉ रमा कान्ता हरियाणा, सोनिया नायडू भिलाई, मेघा अग्रवाल नागपूर, राकेश शर्मा हास्य आगरा, रामेन्द्र कुमार शर्मा ( रवि) गीतकार आगरा, उमा शंकर पाराशर आचार्य जी गीतकार आगरा, प्रभु दत्त उपाध्याय आगरा, जगमोहन श्रीवास्तव ग्वालियर, कमलेश कमल ग्वालियर, सरिता चौहान ग्वालियर, पुष्पा मिश्रा ग्वालियर, संदीप खैरा ग्वालियर, अनिल राही ग्वालियर, दीप्ति खरे मंडला, सुषमा वीरेन्द्र खरे सरस सिहोरा जबलपुर, पदमा तिवारी दमोह मध्यप्रदेश, जय प्रकाश गौतम, कवि मुकेश निडर मंदसौर, रंजन मिश्र बिरागी मथुरा, डॉ महेश अनघड़ कसरावद खरगोन मध्यप्रदेश, राघव कन्हौआ भिंड, डॉ सुषमा पंड्या बिलासपुर, रफीक नागौरी उज्जैन, सरिता चौहान, पुष्पा मिश्रा ग्वालियर, कृष्ण कान्त कपासिया बुलंदशहर, हरिहर प्रसाद जी, अनीता गौतम ' विदुषी ' आगरा, वीरेन्द्र पाठक हाथरस, रजनी वर्मा मैनपुरी, कवि मुकेश निडर मंदसौर, आशुकवि भैरु सुनार मनासा, कवि रामगोपाल फरक्या खड़ावदा मंदसौर, प्रांशू त्रिपाठी मैनपुरी, निर्मला डोंगरे सिहोरा/ मथुरा, सागर स्याल कोटियाल, मौर्य ए पी साहब लुधियाना, शीशलता शालू भिलाई छत्तीसगढ़, मोहिनी भटनागर आगरा, रुपेश कुलश्रेष्ठ आगरा, हरिहर प्रसाद पाण्डेय रायबरेली, राधा तोमर अंबाह मुरैना, जयप्रकाश गौतम बटोही दिल्ली भक्ति कवि,  डॉ सोमनाथ शुक्ल प्रयागराज, डॉ राधेश्याम दुबे श्याम फतनपुरी प्रयागराज, अजय शुक्ल नोएडा, राजकुमारी रैकवार राज जबलपुर, डॉ रामनिवास तिवारी इंडिया दिल्ली, शत्रुघन सिंह चम्बल कवि, आनंद सिंह चौहान, रविना नरवरिया पोरसा मुरैना, हरिओम गुप्ता पोरसा मुरैना, सुशील राठौड. राजस्थान, मृत्युंजय उपाध्याय नवल गोरखपुर, विनय कुमार झा गाजियाबाद, मधुकर द्विवेदी जी वरिष्ठ पत्रकार रायपुर, विनोद मिश्र ' सुरमणि' दतिया, कुसुम सिंह अविचल कानपुर, रामवल्लभ गुप्त इंदौरी, आचार्य निर्मल मथुरा, संगीता शुक्ला ' स्वरा' शहडोल,  सोहन लाल शर्मा डींग राजस्थान, विजय कुमार कन्नौजे आमोदी आरंग जिला रायपुर छत्तीसगढ़, दीनदयाल सोनी ' स्वर्ण ' चन्द्रप्रकाश प्रकाश व्यथित बांदा, दिनेश कुमार पुरी मथुरा, डॉ गोविन्द पाण्डेय प्रेम जबलपुर, मधुसूदन गौतम कोटा राजस्थान, डॉ रामचन्द्र स्वामी बीकानेर, डॉ ओम ऋषि भारद्वाज एटा, रजनी वर्मा, डॉ राजेन्द्र मिलन आगरा, यशोयश आगरा, निशि राज आगरा, गोवर्धन थपलियाल दिल्ली, डॉ अशोक अग्रहरि प्रतापगढ़, बीना नौडियाल खंडूरी देहरादून, किरन नैथानी श्रीनगर पौड़ी गढ़वाल, मोहनी भटनागर आगरा, संतोष पारीक, मनोमा मनु हैदराबाद, डॉ महेन्द्र सिंह गौर सागर, नेमा खगेश के शाह वडोदरा गुजरात संपादक गुजराती बोल, राम वल्लभ गुप्त इंदौरी, डॉ विजयानन्द साहित्यकार प्रयागराज, रामलखन गुप्त चाकघाट रीवा, डॉ चैतन्य चेतन एडवोकेट नवाबगंज, ओजेन्द्र तिवारी दमोह, विनय कुमार झा गाजियाबाद, सरस्वती मल्लिक मधुबनी बिहार, बृज बिहारी त्रिपाठी समाजसेवी प्रयागराज आदि उपस्थित रहे व कवियों - कवयित्रियों ने काव्य रस वर्षा की। 

       राष्ट्रीय स्तर पर कवि सम्मेलन को अपने संचालन से सिद्धेश्वरी सराफ शीलू जबलपुर ने उंचाई प्रदान की। अनिल शर्मा समाजसेवी दिल्ली ने आभार व्यक्त किया।

मथुरा में प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा का राष्ट्रीय सम्मेलन 26 से, जुटेंगे 175 से अधिक साहित्यकार


​मथुरा

प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा (संबद्ध: लोक संचेतना फाउंडेशन) के तत्वावधान में मथुरा में दो दिवसीय राष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। सम्मेलन का प्रथम सत्र 26 सितंबर से प्रारंभ होगा, जबकि मुख्य राष्ट्रीय आयोजन 27 सितंबर को प्रातः 11:00 बजे शुरू होगा। संस्था के संस्थापक कवि संगम त्रिपाठी ने बताया कि यह सम्मेलन मथुरा में हिंदी साहित्य का अब तक का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक आयोजन सिद्ध होगा।

*​प्रमुख अतिथि और दिग्गज साहित्यकार करेंगे शिरकत*

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दिल्ली के सिविल सेवा गुरु डॉ. धर्म प्रकाश वाजपेयी होंगे, जबकि अध्यक्षता वरिष्ठ कवयित्री प्रभा बच्चन श्रीवास्तव जबलपुर करेंगी। विशिष्ट अतिथियों के रूप में मध्य प्रदेश से विनोद कुमार मिश्र (दतिया) एवं अनिल मिश्र (कटनी) उपस्थित रहेंगे। इस समागम में देश के विभिन्न राज्यों से 175 से अधिक कवि, साहित्यकार, पत्रकार, समाजसेवी और हिंदी प्रेमी हिस्सा ले रहे हैं।

*​एक दर्जन से अधिक पुस्तकों का होगा विमोचन*

आयोजन के दौरान साहित्य जगत की कई प्रमुख कृतियों का लोकार्पण किया जाएगा, जिनमें प्रमुख हैं:

​सौदागर सिंह 'दिलवर' की कृति 'दर्द-ए-हयात' (गज़ल संग्रह)

​डॉ. राम निवास तिवारी 'इंडिया' की पुस्तक 'नूर-ए-इश्क: मोहब्बत का एहसास' (गज़ल संग्रह)

​सोनिया नायडू (भिलाई, छत्तीसगढ़) की कृति 'प्रीत'

​रामवल्लभ गुप्त 'इंदौरी' की पुस्तक 'महक कस्तूरी'

​इसके साथ ही एक दर्जन से अधिक अन्य साहित्यिक पुस्तकों का विमोचन भी संपन्न होगा।

​*हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने की दिशा में अहम कदम*

आयोजन को भव्य व दिव्य रूप देने में राष्ट्रीय महासचिव प्रदीप मिश्र 'अजनबी' (दिल्ली), राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. लाल सिंह किरार (अम्बाह, मुरैना), राष्ट्रीय सलाहकार डॉ. सोमनाथ शुक्ल (प्रयागराज), राष्ट्रीय संचालिका मेघा अग्रवाल (नागपुर), प्रेरणा स्मारिका की संपादक सीमा शर्मा (मेरठ) और प्रबंध संपादक सिद्धेश्वरी सराफ 'शीलू' (जबलपुर) निरंतर जुटे हुए हैं। आयोजकों का मानना है कि यह राष्ट्रीय सम्मेलन, सम्मान समारोह एवं कवि सम्मेलन हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार और इसे राष्ट्रभाषा का दर्जा दिलाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

अखिल भारतीय सांस्कृतिक प्रतिरोध अभियान ‘हम देखेंगे’ की मांग, मुख्य चुनाव आयुक्त त्यागपत्र दें

 *नागरिकों के मतदान के अधिकार पर उठे सवालों के जवाब मिलने ही चाहिए।*


नई दिल्ली

अखिल भारतीय सांस्कृतिक प्रतिरोध अभियान ‘हम देखेंगे’ निर्वाचन आयोग के हालिया घटनाक्रम को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करता है।

            23 सितंबर को द इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित एक विस्तृत रिपोर्ट में बताया गया कि निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले दस महीनों के दौरान निर्वाचन आयोग के कामकाज से संबंधित कम-से-कम 14 मामलों में औपचारिक आपत्तियाँ दर्ज कीं। रिपोर्ट के अनुसार इन आपत्तियों का संबंध नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता-सूची से नाम हटाने और बहाल करने, निर्वाचन संबंधी सॉफ़्टवेयर तथा मतदाता-सूची के डिजिटल नियंत्रण जैसे महत्वपूर्ण विषयों से था। दोनों निर्वाचन आयुक्तों ने कुछ कार्रवाइयों को “अनधिकृत” और “अवैध” बताया तथा निर्वाचन संबंधी आँकड़ों के केंद्रीकरण और वैधानिक अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी प्रश्न उठाए।

             जनवादी लेखक संघ, जन संस्कृति मंच, प्रगतिशील लेखक संघ, भारतीय जन नाट्य संघ ( इप्टा) अखिल भारतीय दलित लेख का मंच द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि जुलाई 2026 में  फार्म 6 में ऐसा प्रश्न जोड़ा गया, जिसे लेकर निर्वाचन आयुक्त विवेक जोशी ने मई में आपत्ति दर्ज की थी और सुखबीर सिंह संधू ने बाद में इसे अनाधिकृत और गैरकानूनी  बताते हुए हटाने की माँग की थी।

             मतदाता-सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर भी गंभीर प्रश्न उठे हैं। द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार राष्ट्रीय स्तर पर एस आई  आर के मसौदा मतदाता-सूचियों में 13 करोड़ से अधिक नाम प्रभावित हुए हैं। पश्चिम बंगाल में मतदाता-सूची से संबंधित विवादों के बीच सर्वोच्च न्यायालय ने SIR की प्रक्रिया के एक हिस्से में न्यायिक अधिकारियों की भूमिका तय की थी।

           इन घटनाक्रम के बीच 25 सितंबर को दिल्ली के जंतर मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े और गिरफ्तारी की माँग को लेकर प्रदर्शन हुआ, जिसमें दीपांकर भट्टाचार्य, योगेंद्र यादव, नेहा वोरा समेत अनेक नेताओं और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया।

             हमारे लिए इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न है —भारत के प्रत्येक नागरिक के मतदान के अधिकार, मतदाता-सूची की विश्वसनीयता और निर्वाचन आयोग की संस्थागत पारदर्शिता ।

           भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत निर्वाचन आयोग को स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने की जिम्मेदारी दी गई है। 2023 के कानून की धारा 18 के अनुसार आयोग का काम, जहाँ तक संभव हो, सर्वसम्मति से किया जाना है और मतभेद की स्थिति में बहुमत की राय के अनुसार निर्णय होना है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दोनों निर्वाचन आयुक्तों द्वारा इसी व्यवस्था के संदर्भ में आयोग के कामकाज पर आपत्तियाँ दर्ज किए जाने की बात कही गई है।

           इन आरोपों और आपत्तियों की स्वतंत्र, पारदर्शी और सार्वजनिक जाँच आवश्यक है। निर्वाचन आयोग को भी सामने आए प्रत्येक प्रश्न पर स्पष्ट तथ्यात्मक स्पष्टीकरण सार्वजनिक करना चाहिए, ताकि नागरिकों का विश्वास कायम रहे और यह स्पष्ट हो सके कि मतदाता-सूची में नाम जोड़ने, हटाने या बहाल करने से संबंधित प्रत्येक कार्रवाई किस वैधानिक प्रक्रिया के तहत हुई।

            लोकतंत्र में मतदाता-सूची केवल प्रशासनिक दस्तावेज नहीं है। वह नागरिक के मतदान के अधिकार का आधार है। इसलिए उससे जुड़े किसी भी निर्णय की पारदर्शिता और जवाबदेही लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियादी आवश्यकता है।

            ‘हम देखेंगे’ इस पूरे घटनाक्रम में सामने आए तथ्यों, निर्वाचन आयोग के स्पष्टीकरणों, न्यायिक कार्यवाहियों और नागरिक अधिकारों से संबंधित प्रश्नों पर सार्वजनिक संवाद और तथ्यपरक बहस की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

           मुख्य चुनाव आयुक्त पर लगे आप इतने गंभीर हैं कि भारतीय लोकतंत्र में आस्था बनाए रखने के लिए और आरोपी की निष्पक्ष जांच करने के लिए उन्हें तत्काल पद मुक्त किया जाना जरूरी है। हमारी मांग है कि है या तो स्वयं इस्तीफा दें या उन पर महाभियोग की कार्रवाई शुरू की जाए। 

            हम यह भी मांग करते हैं कि हिरासत में लिए गए  प्रदर्शन करने वाले सभी साथियों को अविलंब रिहा किया जाए। 

          हम देश भर के लेखकों- कलाकारों , सचेत नागरिकों और छात्रों से अपील करते हैं कि वे भारतीय लोकतंत्र की रक्षा के इस अभियान में शामिल हों और शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से प्रतिरोध आंदोलन चलाएं।

प्रलेसं का 14वाँ राज्य सम्मेलन की पूर्व संध्या पर होगा सांस्कृतिक आयोजन


इंदौर

प्रगतिशील लेखक संघ के राज्य सम्मेलन की तैयारी के सिलसिले में एक बैठक आयोजित हुई, जिसमें निर्णय लिया गया कि 24 अक्टूबर को प्रारंभ होने वाले सम्मेलन के पूर्व 23 अक्टूबर की शाम इंदौर आ चुके प्रतिनिधियों एवं शहरवासियों के लिए एक सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया जाएगा। बैठक में आयोजन संबंधी विभिन्न कार्यों के लिए सदस्यों ने उत्साहपूर्वक अपनी-अपनी जिम्मेदारियाँ तय कीं। सम्मेलन के पूर्व युवा कवियों के लिए दो-दिवसीय कविता शिविर भी आयोजित किया जाएगा।

बैठक में दिवंगत लेखिका कृष्णा अग्निहोत्री, लेखक एवं वैज्ञानिक विजय अग्रवाल एवं मणिपुरी संगीतकार चौंगथम विक्रम सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर विजय दलाल, प्रकाश पाठक, गजानन निमगांवकर, नीपा पांड्या, अभय लोधी, डॉ. जाकिर हुसैन, पीयूष लकड़ा, सारिका श्रीवास्तव, विनीत तिवारी, हरनाम सिंह, जावेद आलम आदि उपस्थित थे।

द्वारका नई दिल्ली वेस्ट से पार्षद, विधायक व सांसद सदस्य रूप में जनता के प्रिय महाबल मिश्रा


नई दिल्ली

 *न्यू दिल्ली से पत्रकार ऊषा माहना*

नेता नहीं सेवक हैं महाबल मिश्रा। महाबल मिश्रा को लोग नेता कम एक सच्चे सेवक के रूप में मानने लगे हैं। अपने क्षेत्र की जनता का यह सदा ध्यान रखते हैं। सारी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने में योगदान देते हैं। महाबल मिश्रा ने अनेक बार लोगों की सहायता की है। महाबल मिश्रा एक राजनीतिक विशेषज्ञ भी हैं।

महाबल मिश्रा द्वारा नई दिल्ली से पार्षद, विधायक से सांसद सदस्य के रूप में जनता के प्रिय महाबल मिश्रा। विधायक रहते हुए क्षेत्र की जनता के लिए सदा ही नेक कार्य करते हैं।

महाबल मिश्रा एक सच्चे समाज सेवक हैं। इनकी सेवक और शुभचिंतक के रूप में एक अलग ही पहचान है। अपने पारदर्शिता, व्यक्तित्व के करण ही इन्होंने सदस्य सांसद (लोकसभा) के रूप में कभी प्रतिनिधि किया है। अपने जन प्रिय नेता के रूप में अपनी जनता को सेवा देकर (पश्चिम) दिल्ली के विकास में भूमिका निभाई है। अपने क्षेत्र की जनता के कार्य बहुत समझते हैं।

सेवक के रूप में समाज की उत्कृष्ट सेवा करने में कई बार सामाजिक, धार्मिक संस्थाओं ने इन्हें सम्मानित किया हैं। महाबल मिश्रा हमेशा सकारात्मक व्यवहार में रहते हैं। धर्म और अध्यात्म में इनकी बहुत आस्था है। अपने निवास स्थान पर यह धार्मिक समारोह का आयोजन करते रहते हैं। हम इनके अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करते हैं।

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