कागज़ों में कैद नागरिक, पहचान, अधिकार और भारतीय लोकतंत्र का बदलता चेहरा- राजकुमार अग्रवाल


भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र कहलाता है। संविधान हर नागरिक को समानता, स्वतंत्रता, गरिमा और जीवन जीने का अधिकार देता है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में आम भारतीय नागरिक के जीवन का एक बड़ा हिस्सा कागज़ों, प्रमाण पत्रों, बायोमेट्रिक सत्यापन, डिजिटल पहचान और सरकारी प्रक्रियाओं में उलझता चला गया है। आज भारत का नागरिक अपने अस्तित्व को साबित करने के लिए बार-बार सरकार के सामने खड़ा दिखाई देता है। वह जन्म लेता है तो जन्म प्रमाण पत्र चाहिए, स्कूल जाता है तो आधार चाहिए, मोबाइल लेना है तो बायोमेट्रिक चाहिए, बैंक खाता खोलना है तो केवाईसी चाहिए, शादी करनी है तो विवाह प्रमाण पत्र चाहिए, यात्रा करनी है तो पहचान पत्र चाहिए, जमीन खरीदनी है तो दर्जनों दस्तावेज चाहिए, सरकारी योजना लेनी है तो हर महीने जीवित होने का प्रमाण चाहिए।

यह स्थिति केवल प्रशासनिक व्यवस्था का विस्तार नहीं रह गई है, बल्कि धीरे-धीरे नागरिक और राज्य के बीच अविश्वास का प्रतीक बनती जा रही है। सवाल यह है कि क्या लोकतंत्र में नागरिक सरकार के लिए बना है या सरकार नागरिकों के लिए? क्या किसी व्यक्ति की पहचान केवल कागज़ों और बायोमेट्रिक डेटा से तय होगी? क्या इंसान की गरिमा से बड़ा कोई दस्तावेज हो सकता है?

*पहचान का संकट: नागरिक या दस्तावेज?*

भारत में आज एक सामान्य नागरिक के पास कई प्रकार के पहचान पत्र होते हैं—आधार कार्ड, वोटर कार्ड, राशन कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट, परिवार पहचान पत्र, जन्म प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, बैंक पासबुक, बिजली बिल, गैस कनेक्शन, स्वास्थ्य कार्ड और न जाने कितने अन्य दस्तावेज।

विडंबना यह है कि इनमें से कोई भी दस्तावेज हर जगह मान्य नहीं होता। एक विभाग कहता है आधार लाओ, दूसरा कहता है राशन कार्ड चाहिए, तीसरा कहता है परिवार पहचान पत्र जरूरी है, चौथा कहता है केवल पासपोर्ट चलेगा। नागरिक की पहचान कभी पूरी नहीं मानी जाती।

यह स्थिति केवल तकनीकी अव्यवस्था नहीं है, बल्कि प्रशासनिक सोच का परिणाम है जिसमें नागरिक को हमेशा “संदेह” की नजर से देखा जाता है। सरकारें मानकर चलती हैं कि व्यक्ति गलत जानकारी दे सकता है, इसलिए हर कदम पर प्रमाण मांगो, सत्यापन कराओ, बायोमेट्रिक लो, फोटो लो, हस्ताक्षर मिलाओ, फाइल बनाओ और नागरिक को दफ्तर-दफ्तर भटकाओ।

एक गरीब मजदूर, किसान, विधवा महिला या बुजुर्ग व्यक्ति के लिए यह प्रक्रिया किसी यातना से कम नहीं होती। वह सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाता है, साइबर कैफे में पैसे खर्च करता है, लाइन में खड़ा रहता है और अंत में अक्सर सुनता है—“सिस्टम डाउन है, कल आना।”

*डिजिटल इंडिया: सुविधा या नया बोझ?*

डिजिटल इंडिया का विचार सुनने में आकर्षक लगता है। सरकार ने दावा किया कि डिजिटल तकनीक भ्रष्टाचार कम करेगी, पारदर्शिता बढ़ाएगी और लोगों को सुविधा देगी। लेकिन जमीनी सच्चाई अलग दिखाई देती है।

आज गांवों में लाखों लोग ऐसे हैं जिनके पास स्मार्टफोन नहीं है। इंटरनेट की गुणवत्ता खराब है। बुजुर्गों को तकनीक समझ नहीं आती। पढ़े-लिखे लोग भी कई बार ऑनलाइन पोर्टल और ऐप्स की जटिलता से परेशान हो जाते हैं।

सरकारें मान बैठी हैं कि हर नागरिक डिजिटल रूप से सक्षम है। लेकिन भारत की वास्तविकता यह नहीं है। यहां अभी भी करोड़ों लोग ऐसे हैं जो ऑनलाइन फार्म भरने, ऐप डाउनलोड करने, ओटीपी डालने और दस्तावेज अपलोड करने की प्रक्रिया से डरते हैं।

डिजिटल इंडिया का सपना तब तक अधूरा रहेगा जब तक तकनीक इंसान के लिए सरल नहीं बनती। अगर तकनीक नागरिक को और अधिक परेशान करे, तो वह सुविधा नहीं बल्कि नया बोझ बन जाती है।

*आधार और बायोमेट्रिक का जाल*

आधार कार्ड को शुरू में केवल एक पहचान परियोजना बताया गया था। बाद में धीरे-धीरे इसे हर चीज से जोड़ दिया गया—बैंक खाते, मोबाइल नंबर, राशन, पेंशन, छात्रवृत्ति, गैस सब्सिडी, स्कूल दाखिला, अस्पताल और यहां तक कि मृत्यु प्रमाण पत्र तक।

आज स्थिति यह है कि अगर किसी व्यक्ति का फिंगरप्रिंट मशीन में मैच नहीं हुआ, तो उसका राशन रुक सकता है। बुजुर्गों के अंगूठे कई बार मशीन नहीं पहचानती। मजदूरों के हाथों की रेखाएं मिट जाती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट नहीं चलता। लेकिन सिस्टम कहता है—“ऑथेंटिकेशन फेल।”

सवाल यह है कि क्या किसी इंसान का जीवन एक मशीन के सफल या असफल होने पर निर्भर होना चाहिए?

तकनीक का उद्देश्य इंसान की मदद करना होना चाहिए, न कि इंसान को मशीन के सामने असहाय बना देना।

*नाम पर भी नियंत्रण?*

भारतीय समाज में नाम केवल पहचान नहीं होता, वह संस्कृति, परिवार, परंपरा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हिस्सा होता है। लेकिन आज नाम बदलना भी एक कठिन प्रशासनिक प्रक्रिया बन चुका है।

कई राज्यों में स्कूल रिकॉर्ड, आधार, परिवार पहचान पत्र, बैंक खाते और अन्य दस्तावेजों में नाम की छोटी सी गलती सुधारने में महीनों नहीं बल्कि वर्षों लग जाते हैं।

हरियाणा जैसे राज्यों में पुराने रिकॉर्ड बदलवाना लगभग असंभव माना जाता है। जिन लोगों के नाम 1970 या 1980 के दशक में स्कूलों में गलत दर्ज हो गए थे, वे आज तक सुधार के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

लोकतंत्र में किसी व्यक्ति को अपने नाम, पहचान और निजी जीवन पर अधिकार होना चाहिए। लेकिन जब एक नागरिक अपने ही नाम में बदलाव नहीं करवा पाता, तब यह केवल प्रशासनिक समस्या नहीं रहती, बल्कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता के प्रश्न में बदल जाती है।

*हरियाणा की “जीवंत प्रमाण” व्यवस्था और महिलाओं का अपमान*

हरियाणा सरकार की दीन दयालु लाडो लक्ष्मी योजना ने एक गंभीर बहस को जन्म दिया है। योजना के तहत आर्थिक सहायता पाने वाली महिलाओं से हर महीने “जीवित होने का प्रमाण” मांगा जा रहा है। मोबाइल पर संदेश भेजे जाते हैं जिनमें महिलाओं से अपनी फोटो अपलोड करने को कहा जाता है ताकि वे साबित कर सकें कि वे जीवित हैं।

यह केवल तकनीकी प्रक्रिया नहीं है। यह एक सामाजिक और मानवीय प्रश्न है।

एक ओर सरकार महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की बात करती है, दूसरी ओर उन्हीं महिलाओं से हर महीने जिंदा होने का सबूत मांगती है।

ग्रामीण क्षेत्रों में हजारों महिलाएं ऐसी हैं जिनके पास स्मार्टफोन नहीं है। उन्हें साइबर कैफे या दूसरों के मोबाइल पर निर्भर रहना पड़ता है। कई महिलाएं तकनीकी जानकारी के अभाव में योजना से वंचित हो सकती हैं।

सवाल यह भी है कि जब बुजुर्ग पेंशन, विधवा पेंशन और अन्य योजनाओं में हर महीने ऐसा प्रमाण नहीं मांगा जाता, तो केवल महिलाओं के लिए यह व्यवस्था क्यों?

आर्थिक सहायता देना स्वागत योग्य कदम हो सकता है, लेकिन सहायता के बदले किसी नागरिक की गरिमा को ठेस पहुंचाना लोकतांत्रिक संवेदनशीलता नहीं कहलाता।

*सरकारी अविश्वास की राजनीति*

भारत की प्रशासनिक व्यवस्था में एक गहरी मानसिकता दिखाई देती है—नागरिक पर भरोसा मत करो।

अगर कोई व्यक्ति पेंशन ले रहा है, तो उससे बार-बार जीवित होने का प्रमाण मांगो। अगर कोई किसान सब्सिडी चाहता है, तो उससे कई प्रमाण पत्र मांगो। अगर कोई छात्र छात्रवृत्ति चाहता है, तो उसकी पहचान, आय, निवास, जाति और बैंक खाते का बार-बार सत्यापन करो।

सरकारें यह भूल जाती हैं कि हर अतिरिक्त दस्तावेज गरीब व्यक्ति के लिए अतिरिक्त बोझ होता है।.

जिस देश में करोड़ों लोग रोज कमाकर खाते हैं, वहां बार-बार दफ्तरों के चक्कर लगाना आर्थिक और मानसिक दोनों प्रकार का उत्पीड़न बन जाता है।

*क्या नागरिक की स्वतंत्रता घट रही है?*

भारतीय संविधान व्यक्ति को गरिमा के साथ जीवन जीने का अधिकार देता है। लेकिन आज नागरिक का जीवन लगातार निगरानी, सत्यापन और डेटा संग्रह के दायरे में आ रहा है।

मोबाइल नंबर से लेकर बैंक खाते तक, यात्रा से लेकर खरीदारी तक, लगभग हर गतिविधि किसी न किसी डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज हो रही है।

सरकारें इसे सुरक्षा और पारदर्शिता का नाम देती हैं। लेकिन लोकतंत्र में सबसे बड़ा सवाल हमेशा यह होता है—राज्य की शक्ति की सीमा क्या होनी चाहिए?

अगर सरकार नागरिक के हर कदम पर निगरानी रखे, हर सुविधा के बदले पहचान मांगे और हर अधिकार को कागजी प्रक्रिया से जोड़ दे, तो लोकतंत्र धीरे-धीरे नियंत्रण तंत्र में बदल सकता है।

*संघीय ढांचा और अलग-अलग राज्यों की समस्याएं*

भारत एक संघीय लोकतंत्र है। अलग-अलग राज्यों की अपनी प्रशासनिक व्यवस्थाएं हैं। लेकिन लगभग हर राज्य में नागरिक दस्तावेजों और सत्यापन की समस्याओं से जूझ रहा है।

*उत्तर प्रदेश*

जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र और आय प्रमाण पत्र के लिए लंबी प्रक्रियाएं आम शिकायत हैं।

*बिहार*

भूमि रिकॉर्ड और पहचान दस्तावेजों में त्रुटियां वर्षों तक लोगों को परेशान करती हैं।

*राजस्थान*

डिजिटल सेवाओं के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी पहुंच सीमित है।

*पंजाब*

भूमि रजिस्ट्रेशन और राजस्व रिकॉर्ड में देरी आम समस्या है।

*महाराष्ट्र*

शहरी क्षेत्रों में ऑनलाइन सिस्टम होने के बावजूद कई सेवाओं में दस्तावेजों की पुनरावृत्ति होती है।

*हरियाणा*

परिवार पहचान पत्र, सामाजिक योजनाओं और दस्तावेज सत्यापन की जटिलता लगातार विवाद का विषय रही है।

इससे स्पष्ट है कि समस्या किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है। यह पूरे प्रशासनिक ढांचे की सोच से जुड़ा मुद्दा है।

*गरीब सबसे ज्यादा क्यों परेशान होता है?*

एक अमीर व्यक्ति एजेंट रख सकता है, वकील कर सकता है, निजी सुविधा ले सकता है। लेकिन गरीब व्यक्ति के पास समय, संसाधन और तकनीकी सहायता नहीं होती।

अगर किसी मजदूर का राशन कार्ड बंद हो जाए, तो उसका परिवार भूखा रह सकता है। अगर किसी बुजुर्ग की पेंशन रुक जाए, तो उसकी दवा बंद हो सकती है। अगर किसी महिला का दस्तावेज गलत हो जाए, तो वह सरकारी योजना से बाहर हो सकती है।

कागजी व्यवस्था का सबसे बड़ा बोझ हमेशा कमजोर वर्ग पर पड़ता है।

*क्या यह विकास का मॉडल है?*

सरकारें अक्सर कहती हैं कि यह सब “सिस्टम सुधार” के लिए जरूरी है। लेकिन सवाल यह है कि क्या विकास का अर्थ केवल डेटा संग्रह और सत्यापन है?

*विकास का वास्तविक अर्थ होना चाहिए—*

शिक्षा की सरल पहुंच

स्वास्थ्य सुविधाएं

रोजगार

सुरक्षित जीवन

न्याय तक आसान पहुंच

सम्मानजनक प्रशासन

अगर नागरिक अपना अधिकांश समय केवल प्रमाण पत्र बनवाने में बिताने लगे, तो यह विकास नहीं बल्कि प्रशासनिक जटिलता का विस्तार कहलाएगा।

*लोकतंत्र का मूल प्रश्न: सरकार किसके लिए?*

लोकतंत्र का आधार नागरिक होता है। सरकार जनता द्वारा चुनी जाती है ताकि वह जनता की सुविधा और अधिकारों की रक्षा कर सके।

लेकिन जब नागरिक ही सरकार के सामने बार-बार अपनी पहचान साबित करने लगे, तब लोकतांत्रिक संतुलन बिगड़ने लगता है।

सरकार का काम नागरिक को सम्मान देना है, न कि उसे हर समय शक की निगाह से देखना।

अगर कोई व्यक्ति दस्तावेज नहीं बनवाना चाहता, तो उसे बुनियादी अधिकारों से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। नागरिकता का अर्थ केवल सरकारी डेटाबेस में दर्ज होना नहीं है। नागरिकता एक संवैधानिक और मानवीय संबंध है।

*कोरोना काल और पहचान की राजनीति*

कोरोना महामारी के दौरान भी लोगों को कई प्रकार के प्रमाण और दस्तावेजों से गुजरना पड़ा। कई जगह राशन, यात्रा और सहायता योजनाओं के लिए पहचान आधारित प्रक्रियाएं लागू की गईं।

इस दौरान यह स्पष्ट हुआ कि भारत की प्रशासनिक व्यवस्था संकट के समय भी कागजी नियंत्रण से बाहर नहीं निकल पाती।

जब लोगों को तत्काल राहत चाहिए थी, तब भी कई स्थानों पर दस्तावेज प्राथमिकता बन गए।

*क्या समाधान संभव है?*

समस्या केवल आलोचना से हल नहीं होगी। कुछ बुनियादी सुधार जरूरी हैं—

1. एकीकृत पहचान व्यवस्था

अगर सरकार पहचान प्रणाली बना चुकी है, तो एक ही पहचान हर विभाग में मान्य होनी चाहिए।

2. मानव आधारित विकल्प

जहां डिजिटल सत्यापन असफल हो, वहां मानवीय विकल्प उपलब्ध होना चाहिए।

3. ग्रामीण डिजिटल सहायता

हर गांव में मुफ्त तकनीकी सहायता केंद्र स्थापित होने चाहिए।

4. दस्तावेजों की संख्या कम हो

सरकारी सेवाओं में आवश्यक दस्तावेजों की सीमा तय होनी चाहिए।

5. सम्मानजनक प्रशासन

किसी भी योजना में ऐसी भाषा और प्रक्रिया न हो जो नागरिक की गरिमा को ठेस पहुंचाए।

6. डेटा सुरक्षा कानून

नागरिकों के बायोमैट्रिक और निजी डेटा की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

*सबसे बड़ा सवाल*

सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यही है—क्या सरकार नागरिक पर भरोसा करती है?

अगर हर महीने किसी महिला से पूछा जाए कि “साबित करो कि तुम जीवित हो,” तो यह केवल तकनीकी सत्यापन नहीं बल्कि राज्य और नागरिक के बीच अविश्वास का प्रतीक बन जाता है।

एक लोकतंत्र में सरकार का दायित्व नागरिक को सम्मान देना है, न कि उसे हर समय प्रमाण देने के लिए मजबूर करना।

भारत एक महान लोकतांत्रिक राष्ट्र है, लेकिन लोकतंत्र केवल चुनावों से मजबूत नहीं होता। लोकतंत्र तब मजबूत होता है जब नागरिक सम्मान महसूस करे, जब प्रशासन सरल हो, जब सरकार जनता पर भरोसा करे और जब व्यक्ति की गरिमा को कागजों से ऊपर रखा जाए।

आज जरूरत इस बात की है कि भारत डिजिटल और प्रशासनिक सुधारों को मानवीय दृष्टिकोण से देखे। तकनीक नागरिक की सेवक बने, मालिक नहीं। दस्तावेज सुविधा का माध्यम बनें, उत्पीड़न का नहीं।

अगर भारत को वास्तव में विकसित राष्ट्र बनना है, तो उसे केवल डिजिटल डेटा नहीं बल्कि मानवीय गरिमा को केंद्र में रखना होगा। क्योंकि किसी भी लोकतंत्र की असली पहचान उसके नागरिकों के सम्मान से होती है, न कि उनके पास मौजूद कागजों की संख्या से।

*लेखक*

राजकुमार अग्रवाल

वरिष्ठ पत्रकार, चिंतक, राजनीतिक विश्लेषक एवं दुभाषी दैनिक ‘अटल हिन्द’ के सम्पादक।


नाबालिग बालिका से दुष्कर्म का आरोपी गिरफ्तार, दो ट्रको की टक्कर, दोनो चालक घायल, अस्पताल में भर्ती


अनूपपुर

कोतवाली अनूपपुर पुलिस द्वारा 17 वर्षीय नाबालिग बालिका के साथ दुष्कर्म के आरोपी को जिला शहडोल से गिरफ्तार किया गया है। नाबालिग बालिका द्वारा अपने माता पिता के साथ थाना कोतवाली अनूपपुर पहुंचकर रिपोर्ट दर्ज कराई गई कि रिस्तेदारी में बरहो के कार्यक्रम के दौरान मोहित पटेल निवासी ग्राम पड़रिया थाना बुढार जिला शहडोल से परिचय और दोस्ती होने के बाद मोहित पटेल नाबालिग बालिका के घर आना जाना करने लगा और इस बीच आरोपी द्वारा नाबालिग बालिका के साथ शारीरिक दुष्कर्म किया गया है। उक्त रिपोर्ट पर थाना कोतवाली अनूपपुर में अपराध क्रमांक 292/26 धारा 64(2) (m), बीएनएस एवं 5,6 पाक्सो एक्ट पंजीबद्ध किया गया।

टी.आई. कोतवाली अरविन्द जैन के नेतृत्व में महिला उपनिरीक्षक सरिता लकड़ा, प्रधान आरक्षक रीतेश सिहं, शेख रसीद एवं आरक्षक अब्दुल महिला आरक्षक अंकिता सोनी की टीम के द्वारा नाबालिग बालिका का मेडिकल परीक्षण कराया जाकर तत्काल चन्दघण्टो में आरोपी नवयुवक मोहित पटेल पिता भगवानदास पटेल उम्र करीब 23 साल निवासी ग्राम पड़रिया थाना बुढार जिला शहडोल को घर से गिरफ्तार कर न्यायालय पेश किये जाने पर उक्त प्रकरण में जेल भेजा गया है।

*दो ट्रको की जोरदार टक्कर, दोनो चालक हुए घायल, अस्पताल में भर्ती*


शहडोल जिले के जयसिंहनगर और गोहपारू थाना क्षेत्र की सीमा में स्थित चुन्दी नदी के पास रविवार सुबह दो ट्रकों की आमने-सामने जोरदार भिड़ंत हो गई। हादसा इतना भीषण था कि दोनों ट्रकों के केबिन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए और चालक अंदर ही फंस गए। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और स्थानीय लोगों की मदद से राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया।

पुलिस और ग्रामीणों ने काफी मशक्कत के बाद दोनों ट्रकों को पीछे खिंचवाकर केबिन में फंसे चालकों को बाहर निकाला। रेस्क्यू के दौरान मौके पर लोगों की भीड़ जमा रही। गंभीर रूप से घायल दोनों चालकों को तत्काल उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया, जहां उनका इलाज जारी है।

समय रहते पुलिस द्वारा किए गए रेस्क्यू के कारण दोनों घायलों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार और सड़क पर नियंत्रण खोने की आशंका जताई जा रही है। पुलिस दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है।

तप रहे धरती गगन, उगल रही है आग, नहाने देता नहीं टंकी का उबला पानी, उफ ये भयंकर गर्मी


*उफ ये भयंकर गर्मी*


तप रहे धरती गगन उफ ये भयंकर गर्मी,

उगल रही है आग उफ ये भयंकर गर्मी।


इसके जुल्मो सितम से बिजली ही बचाती है,

एसी फ्रिज कूलरों से ठंडकें बरसाती है,

रौब बिजली ने अगर झाड़ा गर्मी मैडम पर,

वो उसके ट्रांसफार्मर ही फूंक जाती है।


 नहाने देता नहीं टंकी का उबला पानी,

फिर सताती है जमके उफ ये भयंकर गर्मी।


ब्यूटी पार्लर से सज के नौतपा में आती है,

फिर तो ये गरमा-गरम हीरोइन सी लगती हैं,

गर्मियों की लगे मिस इंडिया मिस वर्ल्ड कभी, 

मलिका-ए-तपन ग्रीष्म सुंंदरी सी लगती है।


आ रही लू की बिकनी पहने छुपा लो चेहरे, 

कनपटी सेक देगी उफ ये भयंकर गर्मी।


*गीतकार अनिल भारद्वाज एडवोकेट हाईकोर्ट ग्वालियर*

सशक्त हस्ताक्षर का चतुर्थ वार्षिकोत्सव दिव्यता-भव्यता हर्ष व उल्लास के साथ समारोह संपन्न - कवि संगम त्रिपाठी 


जबलपुर

सशक्त हस्ताक्षर का चतुर्थ वार्षिक कार्यक्रम बड़ी दिव्यता-भव्यता के साथ कला वीथिका में हर्ष व उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ ၊ संस्थापक गणेश श्रीवास्तव प्यासा ने अपनी वाणी से सभी अतिथियों का अभिनंदन किया।प्रथम चरण में राष्ट्रीय कवि सम्मेलन हुआ जिसमें देश के कोने से आये। कवि-कवियित्रियों ने सहभागिता की ၊ दूसरे चरण में विमोचन व सम्मान समारोह हुआ ၊

मुख्य अतिथि रजनी साहू सुधा अध्यक्षता महामहोपाध्याय आचार्य डॉ. हरिशंकर दुबे, विशिष्ट अतिथि डॉ. अन्नपूर्णा तिवारी अनु , आनंद ज्योति पाठक, डॉ. कुमकुम शुक्ला, रत्ना श्रीवास्तव, डॉ. सुरेन्द्रलाल साहू निर्विकार,सारस्वत अतिथि राजेश पाठक प्रवीण, समीक्षक डॉ. मुकुल तिवारी, यशोवर्धन पाठक की गरिमामय उपस्थिति रही ၊ सशक्त हस्ताक्षर की स्मारिका सहित रजनी साहू सुधा की पुस्तक समवेतस्वर एवं डॉ. अन्नपूर्णा तिवारी की पुस्तक  सृजन मेरे-भाव मेरे का विमोचन हुआ ၊ सभी अतिथियों का शाल, कलमश्री,अंगवस्त्रम्,मानपत्र,स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया ၊

कार्यक्रम में डॉ. हरिदास बड़ोदे हरिप्रेम मेहरा बैतूल,डॉ. मनोज फगवाड़वी  फगवाड़ा पंजाब,सुवीर श्रीवास्तव वीर, शिवानी भगत,जी.डी. अग्रवाल,निरंजन द्विवेदी वत्स, मदन श्रीवास्तव, बालमुकुंद लखेरा ढीमरखेड़ा,मनोहर सोनी, राजवीर शर्मा पत्रकार अम्बाह,डॉ. नीरज चौधरी नीर,राम वल्लभ गुप्त इंदौरी,अमरेन्द्र नारायण,विवेक शैलार, सिद्धेश्वरी सराफ शीलू,विष्णु बाजपेई विकल कटनी,सुरेश सचान पटेल कानपुर, विवेक गुप्ता सहर,विजय बागरी कछार गाँव, जयप्रकाश श्रीवास्तव,प्रकाश सिंह ठाकुर इंद्राना,सलिल,सुभाष मणि वैरागी, सुभाष तिवारी,उज्जवल मिश्रा,प्रेमकुमार पालीवाल,नायकजी,संदीप सक्सेना, अन्नपूर्णा दुबे,अनंतराम चौबे, डॉ. ललिता यादव बिलासपुर,डॉ. निवेदिता वर्मा मेघा भाटापारा,रश्मि अग्रवाल किरन बिलासपुर, डॉ. नवनीता दुबे मण्डला,लखन लाल रजक, अमरजीतसिंह,अनुराधा चौधरी,पार्वती पटेल,मनोज दुबे,डॉ. तनुजा चौधरी, डाॅ. अनुराधा गर्ग दीप्ति, दिवाकर शर्मा,संदीपजी,तरुणा खरे, प्रीति नामदेव भूमिजा, अनुजा दुबे पूजा महाराष्ट्र,मधु जैन माधवी मैहर, रागिनी मित्तल कटनी,महेश स्थापक, नंदनी प्रसाद पाण्डेय, केशरी प्रसाद पाण्डेय,संजय पाण्डेय,महब जबलपुरी,सलिल तिवारी,अमरसिंह वर्मा, रितु सक्सेना, चंद्रकला सक्सेना, वंदना सोनी विनम्र, नीतू आशीष साहू, नीतू रंजीत साहू,शिल्पा साहू, रेखा साहू,सीमा साहू, डॉ.संध्या शुक्ल मृदुल, डॉ. दीप्ति खरे, डाॅ. उर्मिला साँईप्रीत कटनी,अमिता शुक्ल, अरुण शुक्ल,सरोज खरे,सचिन खरे, रजनी कैलाश साहू,कुंजीलाल चक्रवर्ती निर्झर भेड़ाघाट,सुशील श्रीवास्तव,एड. तृप्ति त्रिवेदी,प्रदीप नामदेव नम्र पनागर,एड. प्रभा खरे अखिल, डॉ. सलमा जमाल,सुभाष शलभ,डॉ. छाया सिंह,उर्मिला श्रीवास्तव,प्रभा विश्वकर्मा शील,मीना भट्ट, करुणा दुबे कीर्तिश्री, विजय नेमा अनुज,संतोष नेमा संतोष,सुरेश मिश्र विचित्र,अभय तिवारी,रुपराम नामदेव, कैलाश नामदेव, आनंद श्रीवास्तव,रश्मि खरे, निर्मला तिवारी, शाश्वत खरे,आरती श्रीवास्तव नृत्य,ओ.पी. श्रीवास्तव, आरती श्रीवास्तव,सुरेश सोनी दर्पण,अमरनाथ सोनी,डॉ. भावना दीक्षित, चंद्रप्रकाश श्रीवास्तव,यू.एस.दुबे,विशेष सहयोगी मदन श्रीवास्तव, कवि संगम त्रिपाठी,संचालन गणेश श्रीवास्तव, सिद्धेश्वरी सराफ शीलू, आभार प्रदर्शन लखन रजक ने किया।

प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा ने आदेश जैन को दिया राष्ट्रभाषा सम्मान


नागपुर

प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा के संस्थापक कवि संगम त्रिपाठी, प्रदीप मिश्र अजनबी दिल्ली महासचिव प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा व डॉ लाल सिंह किरार राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा के मार्गदर्शन में नागपूर आकाशवाणी विभावरी के उद्घोषक व विदर्भ हिंदी साहित्य सम्मेलन के संयोजक साहित्यिक मंच के संस्थापक आदेश जैन को सम्मानित किया गया।

प्रेरणा राष्ट्रभाषा  सम्मान स्मृति चिन्ह, अंगवस्त्र आदि आदेश जैन को मेघा अग्रवाल नागपुर महाराष्ट्र हिंदी प्रचारक व कवयित्री ने प्रदान किया। प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा हिंदी सेवियों को सम्मानित करने के साथ ही हिंदी राष्ट्रभाषा अभियान को सतत प्रचारित व प्रसारित कर रही है।

अखिल भारतीय लोधी, क्षत्रिय महासभा व गोंड महासभा के तत्वावधान में राजा हिरदेशाह की होगी शौर्य यात्रा


भोपाल

अखिल भारतीय लोधी, लोधा, लोध क्षत्रिय महासभा मध्यप्रदेश, राजा हिरदेशाह शोध संस्था तथा गोंड महासभा के तत्वावधान में 28 अप्रैल 2026 को राजा हिरदेशाह लोधी के बलिदान दिवस पर शौर्य यात्रा का आयोजन भोपाल के जम्बूरी मैदान पर आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव होंगे। प्रदेश के श्रम तथा पंचायत कल्याण मंत्री प्रहलाद पटेल कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि होंगे।

अखिल भारतीय लोधी, लोधा, लोध क्षत्रिय महासभा के प्रदेश अध्यक्ष, पूर्व मंत्री विधायक जालम सिंह पटेल एवं पूर्व विधायक एवं युवा राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रध्युम्न सिंह लोधी ने संयुक्त पत्रकार वार्ता में इस वृहद आयोजन की जानकारी दी। जालम सिंह पटेल ने कहा कि यह आयोजन इतिहास की अनदेखी का शिकार उन क्रांतिवीर राजाओं और जनजातीय योद्धाओं के स्मरण का महापर्व है जिनके बलिदान से आजादी की नींव रखी जा सकी लेकिन उनके योगदान को इतिहासकारों के पूर्वाग्रहों ने गुमनाम बना दिया। 1857 में देश के पहले स्वतंत्रता संग्राम से पहले ही 1842 में पिछड़े, दलित और आदिवासी राजाओं ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंक दिया था। इस विद्रोह का नेतृत्व हीरापुर के बहादुर राजा हिरदेशाह लोधी ने किया, बड़ी संख्या में बुंदेला राजा और योद्धा इस संघर्ष में जुड़ते गए। गोंड और राजगोंड राजाओं ने भी इस विद्रोह में अंग्रेजों के हौसले को पस्त किया। करीब दो साल चला यह संघर्ष आपसी दगाबाजी तथा प्रमुख राजाओं और उनके परिजनों को फांसी दिए जाने से कमजोर पड़ गया। अंग्रेजों के खिलाफ यह पहला सशस्त्र विद्रोह था लेकिन इतिहासकारों ने इसे स्वतंत्रता आंदोलन का गौरव नहीं बनने दिया।

जालम सिंह पटेल ने बताया कि ब्रिटिश हुकूमत ने देश में जमीनों को हड़पने के लिए तीन काले कानून बनाकर लागू किए थे। किसानों से 6 से 30 गुना तक लगान वसूला जाने लगा था, जमीन को सिकमी पर देने के लिए भी रोक लगा दी गई थी इस कानून का उल्लंघन करने पर जमीन राजसात कर ली जाती थी, मृत्यु के बाद जमीन का नामांतरण बंद कर दिया गया था और जमीन राज साहब की जाने लगी थी। 1836 में 5 साल के लिए ले गए कानून को बाद में 20 साल के लिए बढ़ा दिया गया इन कानूनों ने साधारण किसानों के साथ जमीदारों के लिए भी जमीन बचाना मुश्किल कर दिया था। राजा हिरदेशाह लोधी ने इन कानूनों के खिलाफ दलित, पिछड़े और आदिवासी राजाओं को एकजुट कर क्रांति का शंखनाद किया। अंग्रेजों की फौज में नर्मदा टाइगर के नाम से विख्यात राजा हिरदेशाह की गिरफ्तारी पर दस हजार का इनाम घोषित था। बड़े इनाम के लालच में शाहगढ़ के बखतबली बुंदेला ने दिसंबर 1843 को उन्हें धोखे से गिरफ्तार करा दिया। राजा हिरदेशाह को नौ महीने तक चुनार जेल में रखा गया। 1857 के विद्रोह में उनके पुत्र मेहरबान सिंह लोधी और भाई को फांसी की सजा दी गई। राजा हिरदेशाह 28 अप्रैल 1858 को शहीद हुए।

बुंदेला विद्रोह में गोंड राजा डेलन शाह ने बड़ी कुर्बानी दी। डेलन शाह को जिंदा या मुर्दा पकड़ने के लिए अंग्रेजों ने 2000 रुपए इनाम घोषित किया था। डेलन शाह को पकड़ पाने में नाकाम अंग्रेजों की फौज ने उनके परिवार पर कहर बरपाया। 17 जनवरी 1858 को डेलन शाह के 16 परिवार सदस्यों और साथियों को एक साथ फांसी दे दी गई इसमें उनका पांच साल का पोता भी शामिल था। इसी दिन डेलन शाह के चार अन्य परिजनों को गोली मारी गई। डेलन शाह इस अन्याय से टूट गये और गिरफ्तार कर लिए गए। इन्हें 16 मई 1858 को फांसी दी गई। मदनपुर के गोंड राजा नरवर शाह पर एक हजार इनाम घोषित था, इनकी जेल में रहते मौत हुई। मधुकर शाह बुंदेला को फरवरी 1844 में नरहट सागर में फांसी दी गई। दीवान गजराज सिंह को 29 नवंबर 1857 को चडालगढ़ जबलपुर में फांसी दी गई। अंग्रेजों ने अनेक वीरों पर भारी भरकम इनाम घोषित किया था, सावंत सिंह पर5000 का इनाम, चंद्रपुर के दीवान जवाहर सिंह पर 10000, राजा परीक्षित जैतपुर पर 10000, दीवान बहादुर सिंह,  गणेश जू, गिराट के  परीक्षित, सागर के लक्ष्मण सिंह, पहलवान सिंह पर पांच-पांच शहर का इनाम घोषित किया गया गोकुल सिंह दरियाव सिंह पंचम सिंह और गणेश जी पर 3 000 आदमपुर के शाह चंदेरी के धर्म ग्रह पर ₹2000 के नाम घोषित थे। इन वीरों का नाम अमर है लेकिन इतिहास इनका उल्लेख नहीं करता। राजा हिरदेशाह लोधी शोध संस्था द्वारा अब लगातार ऐतिहासिक तथ्यों को एकत्रित कर देश के सामने लाया जा रहा है।

कार्यक्रम में मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रहलाद सिंह पटेल (कैबिनेट मंत्री), दीदी उमा भारती (पूर्व मुख्‍य मंत्री), धर्मेन्‍द्र भाव सिंह लोधी (राज्‍यमंत्री), राहुल सिंह (सांसद), विपिन कुमार वर्मा (डेविड), कमलेश प्रताप शाह (विधायक), प्रेम शंकर वर्मा (विधायक),, प्रहलाद सिंह लोधी (विधायक), प्रीतम सिंह लोधी (विधायक), नीरज सिंह लोधी (विधायक), वीरेन्‍द्र सिंह लोधी (विधायक), अनुभा मंजारे (विधायक), दीदी रामसिया भारती (विधायक), राजकुमार कर्राहे (विधायक), राजा कौशलेन्‍द्र सिंह जूदेव लोधी (वंशज, राजा हिरदेशाह लोधी), ठाकुर राम कुमार सिंह (वंशज, गोंड राजा नरवर शाह) शामिल होंगे।

1842 की भारत की पहली अंग्रेजों के खिलाफ क्रांति (बुंदेला विदोह) के जनक टाइगर राजा हिरदेशाह लोधी की पुण्यतिथि 28 अप्रैल को  जंबूरी मैदान भोपाल में मुख्यमंत्री ,मंत्री, सांसद विधायक सहित कई दिग्गज होंगे शामिल

सशक्त हस्ताक्षर की 47वीं काव्य गोष्ठी संपन्न हुई, अतिथियों, कवि-कवयित्रियों, काव्य प्रेमियों का हुआ अभिनंदन


जबलपुर -   

सशक्त हस्ताक्षर की 47 वीं काव्य गोष्ठी नूतन मराठी स्कूल गोल बाजार में सानंद सम्पन्न हुई ၊ सर्वप्रथम संस्थापक गणेश श्रीवास्तव प्यासा ने अपने शब्द सुमनों से सभी अतिथियों,कवि-कवयित्रियों,काव्य प्रेमियों का अभिनंदन किया ၊ सरस्वती वंदना लखन रजक ने की ၊

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नेत्र विशेषज्ञ डॉ.सुरेन्द्रलाल साहू निर्विकार, अध्यक्षता महामहोपाध्याय आचार्य डॉ. हरिशंकर दुबे, विशिष्ट अतिथि आचार्य विजय तिवारी किसलय, अरुण शुक्ल, सारस्वत अतिथि राजेश पाठक प्रवीण,मंगल भाव संतोष नेमा संतोष की गरिमामय उपस्थिति रही। महेश स्थापक, दिवाकर शर्मा,इन्द्र सिंह राजपूत, मंजू इंग्ले, शेखर शर्मा स्वागत, अभिनंदन में सहभागी रहे।


कवि विवेक कुमार गुप्ता ने गोष्ठी का शुभारंभ किया।  प्रेमकुमार पालीवाल ने शानदार मुक्तक पढ़े ၊ अखिलेश खरे अखिल की रचना में माटी की खुश्बू थी। लखनलाल रजक,अमरसिंह वर्मा, शिवानी भगत, कालीदास ताम्रकार,विजय सिन्हा कमर इलाहाबादी उर्फ कमर जानी,जय प्रकाश श्रीवास्तव, अभयतिवारी, दीनदयाल तिवारी बेताल, उर्मिला श्रीवास्तव, केशरी प्रसाद पाण्डेय वृहद,संजय पाण्डेय, विजय नेमा अनुज ने एक से बढ़कर एक रचनाएँ पढ़ी। मंचस्थ अतिथियों ने भी मंच को ऊँचाईयाँ दी। संचालन गणेश श्रीवास्तव प्यासा,व आभार प्रदर्शन मदन श्रीवास्तव ने किया।

सीएचसी में मरीज परेशान, मेडिकल स्टोर हो रहे मालामाल, बोलेरो पलटी, चार लोग हुए घायल


शहडोल

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सीएचसी बुढार में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आ रही है। प्राथमिक उपचार में उपयोग होने वाली जरूरी दवाइयों का अभाव बना हुआ है, जिससे मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, अस्पताल में रेबीज और टीटी के इंजेक्शन उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में गरीब और दूर-दराज के गांवों से आने वाले मरीजों को मजबूरन बाहर की मेडिकल दुकानों से महंगे दामों पर दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि वे अपनी रोज़ी-रोटी छोड़कर इलाज के लिए अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन वहां भी उन्हें प्राथमिक इलाज तक नहीं मिल पा रहा। इतना ही नहीं, जब दवाइयों की कमी के बारे में पूछा जाता है तो पर्ची में लिखने के बजाय सिर्फ मौखिक रूप से बाहर से दवा लेने की सलाह दी जाती है, जिससे पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

बड़ा सवाल यह है की जब सरकारी अस्पतालों में ही जरूरी दवाइयां उपलब्ध नहीं होंगी, तो गरीब मरीजों का इलाज कैसे संभव होगा। स्वास्थ्य विभाग को इस ओर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है, ताकि मरीजों को समय पर और मुफ्त उपचार मिल सके।

इस मामले में बुढार अस्पताल की बीएमओ डॉ. शैली जैन ने बताया की पिछले दो दिनों से इंजेक्शन अस्पताल में उपलब्ध नहीं हैं। मैंने इंडेंट कर दिया है। आवश्यकता होने पर मरीज बाहर से लगवा सकते हैं।

*बोलेरो पलटी, चार लोग हुए घायल अस्पताल में भर्ती*

अनूपपुर जिले के अमरकंटक  मां नर्मदा जी की उद्गम स्थली/पवित्र नगरी अमरकंटक से लगभग 19 किमी दूर शहडोल रोड भुंडा कोना के आगे हनुमान मंदिर पास में एक सड़क हादसा सामने आया है । पौंडकी के पहले स्थित हनुमान मंदिर के पास तेज रफ्तार बोलेरो वाहन अनियंत्रित होकर पलट गई जिसमें सवार चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए ।

जानकारी के अनुसार वाहन अमरकंटक से लालपुर विश्वविद्यालय की ओर जा रही थी तभी अचानक चालक का संतुलन बिगड़ने से हादसा हो गया । दुर्घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई ।

स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों की मदद से घायलों को तुरंत बाहर निकालकर उपचार के लिए भेजा गया । सभी की हालत गंभीर बताई जा रही है । सूचना मिलते ही पुलिस व प्रशासन मौके पर पहुंचकर जांच में जुट गए हैं । प्रारंभिक तौर पर तेज रफ्तार और सड़क की स्थिति को हादसे का कारण माना जा रहा है।

चोरी करते 4 चोर रंगे हाथों गिरफ्तार, कपड़ा दुकान में लगी आग, जला लाखो का सामान


अनूपपुर

रामनगर पुलिस ने बड़ी कार्यवाही करते हुए खदान में चोरी करते 4 आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से कुल ₹75,000 मूल्य का माल जप्त किया गया है।

थाना रामनगर क्षेत्र के अमाडांड़ OCM खदान में सुरक्षा प्रभारी संजय कुमार मिश्रा द्वारा सूचना दी गई कि बीती रात करीब 2:30 बजे अज्ञात व्यक्ति स्टोर में रखी केबल चोरी कर रहे हैं। सूचना मिलते ही थाना प्रभारी सुमित कौशिक के नेतृत्व में पुलिस टीम ने तत्काल मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की और आरोपियों को चोरी करते समय ही पकड़ लिया।

गिरफ्तार आरोपियों में जैनुल आबेदीन (36 वर्ष), मोहम्मद साकिल (25 वर्ष), जलेश्वर चौधरी (35 वर्ष) निवासी कोतमा एवं रामदास निवासी मलगा (42 वर्ष) शामिल हैं। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक एंड्रॉइड मोबाइल, दो कीपैड मोबाइल, एक मोटरसाइकिल (टीवीएस स्पोर्ट्स, कीमत करीब ₹70,000) तथा लगभग 5-7 मीटर कॉपर केबल (कीमत करीब ₹5,000) जप्त की है। पुलिस ने आरोपियों के विरुद्ध अपराध क्रमांक 91/26 के तहत धारा 331(4), 305(B) , 3(5) बीएनएस में मामला दर्ज कर सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश किया है ।

*कपड़ा दुकान में लगी आग*


शहडोल जिले के खैरहा थाना क्षेत्र से एक बड़ी घटना सामने आई है, जहां राजेंद्र गेस्ट हाउस के बगल में स्थित नरेंद्र जायसवाल के कॉम्प्लेक्स में संचालित कपड़े की दुकान में अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और दुकान में रखा कपड़ा सहित अन्य सामान आग की लपटों में घिर गया।

आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही देर में दुकान में रखा पूरा सामान जलकर खाक हो गया। इस हादसे में दुकान मालिक को लाखों रुपए के नुकसान की आशंका जताई जा रही है। आग लगने का सही कारण फिलहाल स्पष्ट नहीं हो पाया है, हालांकि प्रारंभिक तौर पर शॉर्ट सर्किट से आग लगने की संभावना व्यक्त की जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही खैरहा थाना पुलिस मौके पर पहुंच गई और हालात को संभाला। वहीं धनपुरी नगरपालिका की दमकल की गाड़ी ने मौके पर पहुंचकर कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। 

अंतर्राष्ट्रीय कवि सम्मेलन भव्यता के साथ हुआ सम्पन्न, मिहूं अग्रवाल को मिला अंतराष्ट्रीय साहित्य सम्मान


लखनऊ

अंतरराष्ट्रीय सरस्वती साहित्य समिती कवि सम्मेलन लखनऊ द्वारा बाल कवयित्री मिहूं अग्रवाल नागपुर को अंतराष्ट्रीय साहित्य सम्मान से सम्मानित किया गया।

अंतर्राष्ट्रीय सरस्वती साहित्य समिति द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय कवि सम्मेलन 29 मार्च 2026 को लखनऊ में संपन्न हुआ। संस्था संस्थापक डॉ आरती दुबे (शुक्ला) जी एवं डॉ प्रिया ठाकुर द्वारा आयोजित किया गया था। कार्यक्रम की अध्यक्षता एवं मु. अतिथि जनपद देवरिया उपस्थित आ. सौदागर सिंह द्वारा की किया गया। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि उत्तरप्रदेश के उप मुख्यमंत्री आ. बृजेश पाठक की धर्मपत्नी आ. नम्रता पाठक की गरिमामयी उपस्तिथि रही।  इंटरनेशनल राइफल आ. दुर्गेश त्रिपाठी, अंतर्राष्ट्रीय महामंडलेश्वर महादेव बाबा महाराज, लंदन से उपस्थित अंतर्राष्ट्रीय संत बलदेव आनंद महाराज, छत्तीसगढ़ से उपस्तिथ आदरणीय इंजीनियर हरी प्रकाश गुप्ता जी (वरिष्ठ साहित्यकार), CISF एवं साहित्यिक क्षेत्र में वर्ल्ड रिकॉर्ड धारक आ. श्री संजीव जी, सुप्रसिद्ध कवि एवं संगीतकार आ. डॉ ओम शर्मा 'ओम, सुप्रसिद्ध गीतकार आ. वंदना विशेष, अध्यक्ष आ. सरोज दुबे थी एवं महाराष्ट्र छत्तीसगढ़, झारखण्ड, पंजाब, हरियाणा सहित देश भर से वरिष्ठ कवि कवयित्री  बालकवि बालकवयित्री भी उपस्तिथ रहे। मंच संचालन आ. अंकुर पाठक द्वारा किया गया। मेघा अग्रवाल नागपुर ने बताया कि सभी अतिथियों ने मिहूं अग्रवाल की सराहना की अधिक संख्या में कवियों की उपस्थिति रही सभी ने एक से बढ़कर एक कविताऐ सुनाई। 

संथापिका डॉ आरती दुबे व आयोजक डॉ प्रिया ठाकूर ने मिहूं अग्रवाल का सत्कार कर बहोत बधाई देते हुए शाल मोमेंटो प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया। 

मिहूं अग्रवाल पर उन्के माता पिता बहन व नागपुर वासियों को बहोत गर्व है कि उन्होनें छोटी सी उम्र में नागपुर का नाम रोशन किया। उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना के साथ अनेकों शुभकामनाएं। कवि संगम त्रिपाठी संस्थापक प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा ने बधाई दी और कहा कि वर्तमान समय में हिंदी साहित्य सृजन में मिहूं अग्रवाल नागपुर प्रेरणादायक कार्य कर रही है।

70-80 एकड़ में लगी गेहॅू की फसल जलकर हुई नष्ट, किसानों का लाखो का नुकसान


छिंदवाड़ा

जिले के चौरई विधानसभा के अंतर्गत ग्राम चिखलीखुर्द के किसानों की पूरे गांव की लगभग 70-80 एकड़ जमीन पर लगी खड़ी गेहूं की फसल जलकर नष्ट हो गई । घटना आज दोपहर लगभग 1.30 बजे की है किसानों ने आग बुझाने का भरसक प्रयास किया, किंतु सफल नहीं हो सके किसानों ने  स्थानीय प्रशासन को अवगत कराया था, प्रशासन में ना राजस्व अमला और ना पुलिस का अमला पहुंचा तब जाकर जिला प्रशासन के मुखिया कलेक्टर हरेंद्र नारायण सिंह को अवगत कराया तब जाकर स्थानीय प्रशासन हरकत में आया और राजस्व अमला तहसील चांद का 2.30 बजे करीब पहुंचे तब तक किसानों की फसल जलकर नष्ट हो चुकी थी । आग बुझाने के लिए कोई दमकल मौके पर नहीं पहुंचा आज ही मध्य प्रदेश के मुखिया छिंदवाड़ा बस दुर्घटना में घायल परिजनों को देखने और मिलने पहुंचे थे, उनके छिंदवाड़ा में मौजूदगी के रहते यह दूसरे तरफ यह हाल किसानों का बना था । शीघ्र ही प्रशासन किसानों को उचित सर्वे करा कर तत्काल मुआवजा प्रदान करें चिखली खुर्द गाँव के किसानो मे बलवान वर्मा सूरज वर्मा विनोद वर्मा इंद्रकुमार वर्मा  राजेंद्र वर्मा धनराज वर्मा, संतोष वर्मा, जागलाल वर्मा सहित अन्य कृषक की गेहूं की फसल नस्ट हो गई है ।  अखिल भारतीय लोधी लोधा लोध महासभा के प्रदेश मंत्री एडवोकेट देवेंद्र वर्मा ने कहा कि किसान अपने खेत की नरवाई में आग लगाता तो अभी तक प्रशासन पहुंच जाता उन्होनें बताया कि चिखलीखुर्द ग्राम की तहसील चांद है और सभी कृषक लोधी समाज के हैं 70-80 एकड़ में फसल लगी थी, जली फसलों का जांच व सर्वे कराकर किसानों को तत्काल मुआवजा प्रदान किया जाए, इस हेतु उन्होनें जिला कलेक्टर से इस संबंध में चर्चा की गई है।


राजा हिरदेशाह लोधी, 1842 के बुंदेलखंड विद्रोह के महान योद्धा की सच्ची कहानी राजा 


1842 और 1857 के बुंदेला विद्रोह के प्रमुख नायक और मध्य प्रदेश (नरसिंहपुर) के एक वीर लोधी राजपूत शासक थे। उन्होंने अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों के विरुद्ध हीरागढ़/हिरापुर रियासत से सशस्त्र क्रांति का नेतृत्व किया और अपने परिवार सहित देश की स्वतंत्रता के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। 

*राजा हिरदेशाह लोधी का परिचय*

मूल स्थान: वे नरसिंहपुर जिले के अंतर्गत हीरागढ़/हिरापुर रियासत के राजा थे। हीरागढ़ राज्य में राजा हिरदेशा जुदेव लोधी के अधीन  1883 गाँव थे  । उनके पास 80 बड़ी तोपें, 100 छोटी तोपें, 200 गुरबा, 7 हाथी, 1600 घुड़सवार और घुड़सवार सैनिक, 21686 पैदल सैनिक, 500 साड़ियाँ (ऊँट) और 200 खच्चर थे। उनके वंशज, राजा कौशलेंद्र सिंह जुदेव को मध्य प्रदेश सरकार द्वारा उनके पूर्वजों से छीनी गई कुल भूमि में से केवल सौ एकड़ भूमि दी गई थी, जिसे वन विभाग ने वापस ले लिया है। आज वे एक साधारण किसान के रूप में जीवन यापन कर रहे हैं।

भारत के स्वाधीनता संग्राम के इतिहास में जिन वीर योद्धाओं का नाम भुला दिया गया, उनमें बुंदेलखंड के लोधी राजा हिरदेशाह जूदेव का नाम अत्यंत महत्वपूर्ण है। अंग्रेजों के विरुद्ध 1842 और 1857 के विद्रोह में उनके नेतृत्व, साहस और बलिदान ने एक अमिट छाप छोड़ी, लेकिन दुर्भाग्यवश, पक्षपातपूर्ण इतिहासकारों ने उनके योगदान को नजरअंदाज किया। इस विस्तृत जीवनी में हम जानेंगे हिरदेशाह की पृष्ठभूमि, संघर्ष, और बलिदान की गाथा, जो आज भी बुंदेलखंड की लोक परंपराओं और नाटकों में जीवंत है।

*परिवार और वंशपरंपरा*

हिरदेशाह के पूर्वज राजा ईश्वरदास, महोबा के राजा परमाल के मित्र और अनन्य सहयोगी थे। जब पृथ्वीराज चौहान ने वीर आल्हा-ऊदल की अनुपस्थिति में महोबा पर हमला किया, तब राजा ईश्वरदास ने अपने दो पुत्रों के साथ राजा परमाल की सहायता की। इस युद्ध में पृथ्वीराज को पराजय का सामना करना पड़ा, और राजा ईश्वरदास का एक पुत्र शहीद हो गया। यह परंपरा आगे चलकर हिरदेशाह  तक पहुँची, जिनका जीवन भी बलिदान और स्वाभिमान का प्रतीक बना।

*वर्णव्यवस्था और सामाजिक पृष्ठभूमि*

बुंदेलखंड और महाकोशल क्षेत्र दसवीं शताब्दी तक वर्णव्यवस्था से काफी हद तक मुक्त रहा। इस क्षेत्र में लोधी, गोंड़, अहीर, खंगार जैसे समुदायों को धीरे-धीरे क्षत्रिय वर्ण में सम्मिलित करने के प्रयास हुए। लोधियों को चंद्रवंशी क्षत्रिय सिद्ध करने के लिए कुछ नए पुराण व संहिताएँ भी रची गईं। परंतु नव क्षत्रियों को अक्सर ‘ओछी जात’ कहकर अपमानित किया गया। फिर भी लोधी राजाओं ने अपनी जनता से आत्मीय संबंध बनाए रखे, जो बाद में 1842 और 1857 के विद्रोह में उनके पक्ष में खड़े हुए।

*हिरदेशाह और बुंदेलखंड विद्रोह (1842)*

सन् 1841-43 के दौरान बुंदेलखंड क्षेत्र में अंग्रेजों के खिलाफ जो विद्रोह हुआ, वह भारतीय इतिहास का पहला सशस्त्र संग्राम था। राजा हिरदेशाह जूदेव इसके अग्रणी नायक थे। हीरापुर (जिसे अब हीरागढ़ कहा जाता है) के राजा हिरदेशाह के आह्वान पर लोधी, बुंदेला, ठाकुर, गोंड़, जागीरदार और किसान सभी ने अंग्रेजों के खिलाफ हथियार उठा लिए।

*विद्रोह की योजना और क्रियान्वयन*

काशी के बुढ़वा मंगल मेले से प्रेरित होकर, 1840 में सूपा गाँव में एक मेले का आयोजन किया गया, जिसमें बुंदेलखंड के कई राजा-जमींदार शामिल हुए। इस सम्मेलन में अंग्रेजी शासन के विरुद्ध व्यापक विद्रोह की योजना बनी। राजा हिरदेशाह और मधुकर शाह (झांसी) ने दक्षिण बुंदेलखंड में संपर्क कर विद्रोह की अगुवाई की। इस विद्रोह में गोंड़, लोधी, बुंदेला व ठाकुर समुदायों के योद्धा सम्मिलित थे।

*विद्रोह का प्रसार और टकराव*

राजा हिरदेशाह के नेतृत्व में विद्रोहियों ने गजपुरा चौकी पर कब्ज़ा किया और हीरागढ़ पर अंग्रेजों ने हमला किया। नगर खाली करवाया गया और अंग्रेजों ने उसे लूटकर ध्वस्त कर दिया। इसके बाद हिरदेशाह तेजगढ़ पहुँचे, वहाँ से नरसिंहपुर, दमोह, जबलपुर और सागर पर आक्रमण किए गए। अंग्रेजी सेना को छापामार पद्धति से बुरी तरह पराजित किया गया।

राजा हिरदेशाह का नाम सुनते ही अंग्रेज अधिकारियों के रोंगटे खड़े हो जाते थे। उनकी गिरफ्तारी पर 500 रुपये का इनाम घोषित किया गया, लेकिन विद्रोही जनता ने उन्हें संरक्षण दिया।

1857 का स्वतंत्रता संग्राम और हिरदेशाह का बलिदान 1842 के विद्रोह के 15 वर्षों बाद 1857 में एक बार फिर अंग्रेजों के खिलाफ क्रांति की ज्वाला भड़की। इस बार हिरदेशाह और उनका पूरा परिवार इसमें कूद पड़ा।

राजा हिरदेशाह लोधी– 28 अप्रैल 1858 को वीरगति को प्राप्त हुए।

पुत्र मेहरवान सिंह लोधी – 1857 में युद्ध करते हुए शहीद हुए।

भाई सावंत सिंह लोधी– 1857 में युद्ध के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए।

दूसरे भाई गजराज सिंह लोधी – अंग्रेजों से युद्ध करते हुए गिरफ्तार हुए और 1858 में फाँसी दी गई।

इस प्रकार हिरदेशाह के लोधी राजवंश ने 1841 से 1858 तक लगातार स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेकर बलिदान दिया।

*इतिहास में उपेक्षा और लोक स्मृति में अमरता*

ब्रिटिश दस्तावेजों और आर. वी. रसेल जैसे लेखकों ने यह स्पष्ट लिखा कि 1842 और 1857 दोनों विद्रोहों को भड़काने वाले प्रमुख नेता हीरापुर के लोधी राजा हिरदेशाह थे। लेकिन भारतीय इतिहास लेखन में उन्हें वह स्थान नहीं मिला जिसके वे अधिकारी थे।

आज भी बुंदेलखंड के नाटकों, लोकगीतों और लोककथाओं में हिरदेशाह की वीरता अमर है। बुंदेलखंड के युवा उनके साहस और बलिदान से प्रेरणा लेते हैं।

राजा हिरदेशाह केवल एक राजा नहीं थे, वे अपने समुदाय और पूरे बुंदेलखंड के प्रतिनिधि थे। उन्होंने सामाजिक न्याय, स्वतंत्रता और स्वाभिमान की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर किए। इतिहास भले ही मौन रहा हो, पर लोकगाथाएँ आज भी उनके यश को गाती हैं।

हिरदेशाह जूदेव — एक बहुजन योद्धा, जिन्होंने स्वतंत्रता की पहली मशाल जलायी, जिसे कालांतर में 1857 की क्रांति ने बढ़ाया। उनका नाम भारतीय स्वाधीनता संग्राम के उन वीर सेनानियों में अमर रहेगा, जिनका मूल्यांकन अब हो रहा है  सभी जिला तहसील ब्लाक ग्रामीण स्तर पर व्यापक तैयारी चल रही है और 28 अप्रैल 2026 को जंबूरी मैदान भोपाल में 1840-42 की क्रांति के बुंदेला क्रांतिवीर हिरदेशाह लोधी की पूरे मध्य प्रदेश से शौर्य यात्रा पहुुंचेगी अखिल भारतीय लोधी लोधा लोध द्वारा यह शोर्य दिवस के रूप में मनाया जाना सुनिश्चित किया गया है जिसमें मध्य प्रदेश शासन के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव सहित मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश शासन के कई मंत्रीगण, जनप्रतिनिधि गण सहित स्वजातीय बंधु बांधव मातृशक्ति भी बड़ी संख्या में शामिल होंगे उक्ताशय की जानकारी अखिल भारतीय लोधी लोधा लोध महासभा के प्रदेश प्रचार मंत्री एडवोकेट देवेंद्र वर्मा ने दी है।

श्री शिव शंभूधाम दादा दरबार चल रहा है यज्ञ, होगा विशाल भंडारा


छिंदवाड़ा 

जिले के तहसील छिंदवाड़ा के ग्राम नेर में चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर चमत्कारिक श्री शिव शंभूधाम दादा दरबार नेर के तत्वाधान में श्री श्री दिव्य नवचंडी नवकुंडीय हवनात्मक यज्ञ एवं 52 मनोकामना ज्योति कलश स्थापना एवं दादाजी निरंतर फलाहार व दुग्दाधार 52 साल उपवास संकल्प पर खीले के पलंग में सोए हुए हैं, माता की जवारे अपने शरीर में धारण करें हुऐ हैं। यह महायज्ञ 20 से 28 मार्च तक चलेगा, जिसमें प्रतिदिन भारत के अन्य प्रदेश से उत्तरप्रदेश महाराष्ट्र, दिल्ली, उत्तराखंड, जम्मू कश्मीर झारखंड, राजस्थान, छत्तीसगढ़, एवं मध्यप्रदेश के अन्य जिले से भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, रीवा, इंदौर, सागर, नरसिंहपुर, सिवनी, बैतूल, छिंदवाड़ा सहित आसपास क्षेत्रों से श्रद्धालु दिन रात से हजारों की संख्या में श्रद्धालु देखने आ रहे हैं, जिसे लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा हैं। समिति के अनुसार इस महायज्ञ में नेर से पं.परशुराम मिश्रा शास्त्री, पं.निशांत कृष्ण मिश्रा शास्त्री, पं.प्रशांत मिश्रा शास्त्री अन्य विद्वान आचार्य कर रहे हैं। यज्ञ एवं देवीपूजन (सहस्त्राच॔न) प्रातः सुबह 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक शुभ यज्ञ बेला दोपहर 3 बजे से शाम 5 बजे तक आहुतियां दी जाएगी। दिनांक: 28 मार्च 2026 को यज्ञ समापन जवारे विसर्जन एवं भंडारा महाप्रसाद का वितरण होगा।

कुएं में गिरा तेंदुआ हुई मौत, सिरफिरे ने मंदिर में की तोडफ़ोड़, 5 वर्ष से फरार आरोपी गिरफ्तार 


उमरिया

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में शनिवार को एक वयस्क तेंदुए के मारे जाने की खबर है, टाइगर रिजर्व के पनपथा बफर परिक्षेत्र की सीमा से लगे राजस्व ग्राम महरोई के समीप एक कुएं में तेंदुए का शव देखा गया, जिसके बाद पार्क प्रबंधन को सूचना दी गई, जिसके बाद वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और घटना के कारणों की जांच शुरू की गई।प्रारंभिक पीएम रिपोर्ट में तेंदुए की मौत का कारण कुएं में डूबना पाया गया, शव परीक्षण के बाद निर्धारित एसओपी अनुसार क्षेत्र संचालक, एनटीसीए प्रतिनिधि, तहसीलदार मानपुर, वन्यप्राणी स्वास्थ्य अधिकारी,खंड पशु चिकित्सा अधिकारी,सरपंच पनपथा एवं अन्य वन अधिकारी कर्मचारी की उपस्थिति में मृत तेंदुए के शव का शवदाह कराया गया है।

*सिरफिरे ने राम जानकी मंदिर में कई तोडफ़ोड़*

शहडोल जिले के अमलाई थाना अंतर्गत चैत्र नवराती पर राम जानकी मंदिर में तोड़फोड़, गांव के ही रहने वाले एक सिरफिरे ने राम जानकी मंदिर में रामजी की प्रतिमा की तोड़फोड़ की है, गांव का ही दीपनारायण वासुदेव उर्फ नानलल्ली ने मंदिर में की तोड़ फोड़, मंदिर की प्रतिमा को तोड़ दिया है, रामजी की प्रतिमा खंडित होने पर धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचा है। स्थानीय लोगों में आक्रोश, धर्म प्रेमियों ने विरोध जताया है, मामले की जानकारी लगते ही अमलाई पुलिस मौके पर पहुँची, स्थानीय लोगों ने अमलाई थाने में की शिकायत, शिकायत पर से अमलाई पुलिस ने दीपनारायण वासुदेव के खिलाफ किया मामला दर्ज, अमलाई थाना क्षेत्र के नेशनल हाईवे 43 ग्राम बटुरा राम जानकी मंदिर की घटना है।

समाचार 10

5 वर्ष से फरार 1.93 लाख का के वसूली वारंटी गिरफ्तार

अनूपपुर जिले के थाना जैतहरी पुलिस द्वारा वसूली वारंटी के तहत एक आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, कुटुंब न्यायालय, जिला अनूपपुर द्वारा प्रकरण क्रमांक एमजेसीआर 36/2021, धारा 125(3) जाफौ के अंतर्गत धौकल सिंह गोंड पिता दलबीर सिंह गोंड, उम्र 45 वर्ष, निवासी खुंटाटोला, थाना जैतहरी, जिला अनूपपुर (म.प्र.) के विरुद्ध ₹1,93,000/- की वसूली वारंटी जारी की गई थी। आरोपी पिछले लगभग 5 वर्षों से फरार था एवं उसने अपनी पत्नी को उक्त राशि का भुगतान नहीं किया था। थाना जैतहरी पुलिस द्वारा लगातार तलाश करते हुए दिनांक 22 मार्च 2026 को आरोपी को विधिवत गिरफ्तार कर  न्यायालय में प्रस्तुत किया गया

IPTA इकाई द्वारा महिला समिति की अगुवाई में तीन दिवसीय राष्ट्रीय नाट्य समारोह का होगा आयोजन

*असमंजस बाबू, बहत्तर मील, नाटक का होगा मंचन*


अनूपपुर

जिले में कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारतीय जन नाट्य संघ (IPTA) इकाई अनूपपुर द्वारा तीन दिवसीय नाट्य समारोह का आयोजन किया जा रहा है। यह समारोह 3, 4 और 5 अप्रैल 2026 को अमरकंटक रोड स्थित बेथेल मिशन हायर सेकेंड्री स्कूल में संपन्न होगा।

समारोह की सबसे खास बात यह है कि इस बार आयोजन की पूरी जिम्मेदारी महिलाओं की आयोजन समिति ने संभाली है, जो न केवल अनूपपुर बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी एक सराहनीय पहल मानी जा रही है।

समारोह के पहले दिन 3 अप्रैल को अशोकनगर की जनसंगीत की प्रस्तुति के साथ इलाहाबाद से आए कलाकारों द्वारा ‘असमंजस बाबू’ नाटक का मंचन किया जाएगा। दूसरे दिन 4 अप्रैल को प्रसिद्ध फिल्म एवं रंगमंच अभिनेता राजेंद्र गुप्ता की विशेष प्रस्तुति होगी, जिसमें वे चर्चित कवि धूमिल की कविता-पटकथा पर आधारित नाटक प्रस्तुत करेंगे। तीसरे दिन 5 अप्रैल को जबलपुर से आए ‘विवेचना’ समूह द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित नाटक ‘बहत्तर मील’ का मंचन किया जाएगा।

इस आयोजन समिति की अध्यक्ष पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष पल्लविका पटेल हैं, जबकि महासचिव के रूप में लक्ष्मी खेडिया जिम्मेदारी निभा रही हैं। कोषाध्यक्ष के रूप में डॉ. श्रद्धा सोनी अपनी भूमिका अदा कर रही हैं।

इसके अलावा महिला समिति में अनु शर्मा, बिंदू सिंह, तृप्ति ठाकुर, पूनम रात्रे, डॉक्टर करुणा सोनी, निरुपमा पटेल सहित शहर की अनेक महिलाओं ने सक्रिय भागीदारी निभाई है। सभी महिलाएं मिलकर इस आयोजन को सफल और प्रभावी बनाने में जुटी हुई हैं।

इस नाट्य समारोह का मुख्य उद्देश्य कला और संस्कृति को संरक्षित करना तथा समाज को रंगमंच से जोड़ना है। आयोजकों का मानना है कि ऐसे आयोजनों से स्थानीय प्रतिभाओं को मंच मिलता है और सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा मिलती है। यह आयोजन न केवल अनूपपुर के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए सांस्कृतिक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण अवसर साबित होगा।

आचार्य धनंजय पाठक की कृतियां मिली- कवि संगम त्रिपाठी


 

जबलपुर

डॉ. आचार्य धनंजय पाठक पनेरीबांध डाल्टनगंज पलामू झारखंड की कृतियां समरोपदेश प्रबंध काव्य व सनातनी हिन्दी पूजा विधि अजय कुमार पाठक जबलपुर मध्यप्रदेश ने एक मुलाकात में प्रदान की।

डॉ. आचार्य धनंजय पाठक पनेरीबांध डाल्टनगंज पलामू झारखंड के सुप्रसिद्ध साहित्यकार कवि है। डॉ आचार्य धनंजय पाठक पद्म व गद्य के सशक्त हस्ताक्षर है। इनकी रचनाएं विभिन्न साझा संग्रह व पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई है और आकाशवाणी दूरदर्शन से प्रसारित होती है। देश के विभिन्न संस्थाओं ने डॉ आचार्य धनंजय पाठक को सम्मानित कर चुकी है।

साहित्य मनीषियों का स्वागत,वंदन, अभिनंदन के साथ सशक्त हस्ताक्षर की 46 वीं काव्य गोष्ठी संपन्न


जबलपुर

सशक्त हस्ताक्षर की 46 वीं,काव्य गोष्ठी खचाखच भरे हाल में बड़े ही आनंदपूर्व, काव्यरसास्वादन के साथ सम्पन्न हुई ၊ सर्वप्रथम संस्थापक गणेश श्रीवास्तव प्यासा ने अपनी वाणी से सभी अतिथियों, साहित्य मनीषियों का स्वागत,वंदन, अभिनंदन किया ၊ सरस्वती वंदना इंद्राना से पधारे कवि प्रकाश सिंह ठाकुर ने की ၊

कार्यक्रम के मुख्यअतिथि प्रो.डॉ. शरद नारायण खरे, अध्यक्षता महामहोपाध्याय आचार्य डॉ. हरिशंकर दुबे, विशिष्ट अतिथि नीलम खरे, सुवीर श्रीवास्तव, विजय नेमा अनुज, सारस्वत अतिथि राजेश पाठक प्रवीण,मंगलभाव कवि संगम त्रिपाठी,संतोष नेमा संतोष की गरिमामय उपस्थिति रही ၊ दिवाकर शर्मा,स्वामी दुर्गाप्रसाद श्रीवास्तव,डॉ. पी. आर. एस. चौधरी,अमरनाथ सोनी, अरुण शुक्ल, देवेन्द्र अग्रवाल, महेश स्थापक,के.के. तिवारी, रमाकांत गौतम,दिलीप नीखरा, अर्चना श्रीवास्तव, चंदा श्रीवास्तव,मंजू इंगले, सुनीता जैन, शेखर शर्मा ने स्वागत, वंदन, अभिनंदन में सहभागिता की।

कवि दीनदयाल तिवारी बेताल, भेड़ाघाट से आये कुंजीलाल चक्रवर्ती निर्झर, जी.एल. जैन, मनोज शुक्ल मनोज,जयप्रकाश श्रीवास्तव, विवेक कुमार गुप्ता,लखन लाल रजक,डॉ. आशा श्रीवास्तव, डॉ. एम.एल.शर्मा नयन, सिद्धेश्वरी सराफ शीलू, विजय सिंहा कमर इलाहावादी, डॉ. एस.एल. साहू,डॉ. मुकुल तिवारी, निर्मला तिवारी,डॉ. ममता तिवारी, तरुणा खरे तनु, अनुकम्पा नायक,प्रीति नामदेव भूमिजा, ढीमरखेड़ा से बालमुकुंद लखेरा,डॉ. भावना दीक्षित, राजेन्द्र मिश्रा, उर्मिला श्रीवास्तव, ज्योति मिश्रा, ज्योति प्यासी, अमरसिंह वर्मा, विवेक शैलार, संध्या द्विवेदी, सभी ने एक से बढ़कर प्रस्तुतियाँ दी ၊ मंचस्थ अतिथियों ने भी फागुन की सतरंगी छटा विखेर दी ၊ संचालन गणेश श्रीवास्तव प्यासा व आभार प्रदर्शन गुलजारी लाल जैन ने किया ၊

इस ब्रह्मांड में साक्षात ब्रह्म ही अलग-अलग रंग-रूप, आकृति और गुणों वाले जीव के रूप में मौजूद हैं .... असाधु ! '


भोपाल/जबलपुर

तुलसी मानस प्रतिष्ठान भोपाल, रामायण केंद्र भोपाल,श्रीरामचंद्र पथ गमन, संस्कृति विभाग, मध्य प्रदेश शासन के संयुक्त तत्वाधान में  दिनांक 13 मार्च एवं 14 मार्च 2026 को मानस भवन, भोपाल में आयोजित किए जा रहे दो दिवसीय चतुर्थ अंतरराष्ट्रीय रामायण कॉन्फ्रेंस में रामायण केंद्र जबलपुर इकाई के संयोजक इंजी . संतोष कुमार मिश्र ' असाधु' ने भगवान शिव द्वारा ' श्रीरामचरितमानस ग्रंथ के नामकरण ' विषय पर  एक अत्यंत रोचक शोध पत्र प्रस्तुत किया गया । इस कॉन्फ्रेंस में देश-विदेश से लगभग 60 शोध पत्र प्राप्त हुए हैं।  अपने संबोधन में रामायण केंद्र जबलपुर इकाई के संयोजक एवं प्रसिद्ध धार्मिक चिंतक इंजी. संतोष कुमार मिश्र 'असाधु ' जो कि वर्तमान में मध्य प्रदेश पॉवर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड जबलपुर में अधीक्षण अभियंता के पद पर कार्यरत हैं,के द्वारा बताया गया कि रामचरित मानस कोई सामान्य किस्सा-कहानी वाला ग्रंथ कदापि नहीं  है बल्कि यह एक अत्यंत गूढ़ ब्रह्म विद्या विज्ञान है। उन्होंने बताया कि ईश्वर के द्वारा सृष्टि निर्माण से लेकर सृष्टि के विनाश के मूल में केवल और केवल मन तत्व ही होता है। हमारा मन दुनियां के उस दरवाजे की तरह होता है जिसके एक ओर से प्रवेश करने पर यह जीव या तो दुनियां के भिन्न-भिन्न मायावी झंझावातों में फंस जाता है वहीं दूसरी ओर मन द्वार से बाहर से निकल कर वह दुनियांदारी के चक्र से सदा-सदा के लिए मुक्त हो जाता है। श्री मिश्र ने अपने इस शोध पत्र में रामचरितमानस के प्रत्येक कांड में भिन्न-भिन्न पात्रों के माध्यम से मन तत्व की व्याख्या की गई। इसके अतिरिक्त रामचरित मानस के नामकरण के सम्बन्ध में और भी कई गूढ़ विषयों का रहस्योद्घाटन किया गया। श्री मिश्र के इस अनूठे शोध पत्र की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए उन्हें आयोजकों द्वारा भी सम्मानित किया गया है।

 श्री मिश्र द्वारा जन जागृति की दिशा में इस तरह के अभिनव कार्य करते हुए संस्कारधानी जबलपुर का नाम अंतरराष्ट्रीय क्षितिज पर पुनः गौरवान्वित किया है। कवि संगम त्रिपाठी ने बधाई दी और कहा कि संतोष कुमार मिश्र ' असाधु' साहित्य व अध्यात्म के माध्यम से समाज को दिशा देने का काम कर रहे हैं।

डॉ. सोमनाथ शुक्ल प्रयागराज ने गजल संग्रह भेंट की- कवि संगम त्रिपाठी 


जबलपुर

डॉ. सोमनाथ शुक्ल प्रयागराज ने अपनी गजल संग्रह शाम तक लौटा नहीं कवि संगम त्रिपाठी को भेंट की। डॉ सोमनाथ शुक्ल प्रयागराज की एक पुस्तक ( सोमनाथ शुक्ल के सौ शेर) गुफ्तगू पब्लिकेशन प्रयागराज उत्तर प्रदेश से प्रकाशित है जो कि चर्चित कृति है। डॉ सोमनाथ शुक्ल की रचनाएं विभिन्न साझा संग्रह, पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई है और कई संस्थाएं उन्हें सम्मानित कर चुकी हैं।

.डॉ सोमनाथ शुक्ल प्रयागराज साहित्य की धारा को प्रयागराज की पावन भूमि से गंगा जमुनी संस्कृति को आगे बढ़ाने का काम कर रहे है।

सागर की कवयित्री प्रतिभा द्विवेदी "मुस्कान"  को नेपाल से मिला स्त्री शक्ति सम्मान


लुंबिनी

एक बार फिर प्रतिभा द्विवेदी "मुस्कान"  ने सागर मध्यप्रदेश का नाम काव्य लेखन  में विश्व स्तर पर रोशन किया है। सागर की उभरती कवयित्री तथा सहायक बी.एड प्राध्यापिका रहीं सुश्री प्रतिभा द्विवेदी "मुस्कान" को नेपाल में सम्मानित किया गया है। इसके पहले भी विभिन्न आभासी प्रतियोगिताओं में लगातार पाँच बार सम्मानित किया जा चुका है यह छठा अवसर है। प्रतिभा द्विवेदी "मुस्कान"  पंडित श्री हरिराम द्विवेदी शास्त्रि जनता बॉय स्कूल के रिटायर्ड शिक्षक की सुपुत्री हैं।अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च के अवसर पर सागर जिले की कवयित्री तथा सहायक बी एड प्राध्यापिका रहीं प्रतिभा द्विवेदी "मुस्कान"  को "स्त्री शक्ति सम्मान"  से सम्मानित किया गया है। 

नेपाल भारत मैत्री विकास, बुंदेलखंड सांस्कृतिक पर्यटन विकास, देवनागरी लिपि के संरक्षण संवर्द्धन, हिंदी तथा नेपाली भाषा को मैत्री भाषा के रूप में प्रचार प्रसार करने तथा देश विदेश की विभिन्न क्षेत्र की महिला प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में प्रतिभा द्विवेदी को सम्मानित किया गया है। शब्द प्रतिभा बहुक्षेत्रीय सम्मान फाउन्डेशन नेपाल द्वारा आज प्रतिभा द्विवेदी "मुस्कान"  के साथ नेपाल, भारत सहित विश्व के सात देश की 300 महिला कवयित्रियों, लेखिकाओं, समाज सेविकाओं और शिक्षिकाओं को ई प्रशस्ति पत्र सर्टिफिकेट प्रदान कर सम्मानित किया गया है। प्रतिभा द्विवेदी "मुस्कान"  जिले की एक उभरती हुई लेखिका,कवयित्री और भूतपूर्व सहायक बी.एड प्राध्यापिका हैं, इनकी सैकड़ों रचनाएं विभिन्न पत्रिकाओं तथा संकलनों में प्रकाशित हो चुकी है। संस्था के अध्यक्ष आनन्द गिरि मायालु ने प्रतिभा द्विवेदी "मुस्कान"  को सम्मानित करते हुए कहा - मध्यप्रदेश की धरती बहुमुखी प्रतिभाओं से भरी है, इसी धरती की होनहार प्रतिभा के रूप में आज प्रतिभा द्विवेदी "मुस्कान"  को सम्मानित कर गर्व हो रहा है। ऐसी रचनात्मक क्षमता की धनी प्रतिभाओं की राज्य और केंद्र सरकार द्वारा आर्थिक सहयोग तथा सम्मान प्रदान कर प्रोत्साहन देने की आवश्यकता है। 

ज्ञात हो कि शब्द प्रतिभा बहुक्षेत्रीय सम्मान फाउन्डेशन नेपाल अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त संस्था बन चुकी है जो समय समय पर विकास विभिन्न भौतिक तथा ऑनलाइन कार्यक्रमों का आयोजन कर विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिभाओ को प्रोत्साहित करती आई है। कवयित्री प्रतिभा द्विवेदी "मुस्कान"  को देश विदेश से दर्जनों प्रतिष्ठित सम्मान मिल चुके हैं। सम्मान ग्रहण करते हुए प्रतिभा द्विवेदी मुस्कान ने संस्था को धन्यवाद देते हुए कहा - शब्द प्रतिभा हम सभी साहित्य सर्जकों के लिए वरदान बनकर सामने आया है, संस्था के कार्यों की जितनी प्रशंसा की जाए कम ही है। देश विदेश के हजारों कवि, लेखक, साहित्यकार और शिक्षकों को सम्मानित कर प्रोत्साहित करने में संस्था की प्रशंसनीय भूमिका रही है। प्रतिभा चयन समिति संयोजक डॉ प्रीति प्रसाद प्रीत ने सम्मानित सभी प्रतिभाओं को बधाई देते हुए भविष्य के आयोजनों में सक्रियता से सहभागी होने के लिए अनुरोध किया है। कवि संगम त्रिपाठी संस्थापक प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा ने प्रतिभा द्विवेदी को सम्मानित किए जाने पर बधाई दी है।

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