फ्लाईओवर निर्माण नगरिकों ने अगरबत्ती जलाकर दर्ज कराया विरोध, 8 वर्ष बाद भी अधूरा

*ठेकेदार के सुस्त रवैया से आम जनता परेशान, प्रशासन से जल्द पूर्ण करने की मांग*


अनूपपुर

दो हिस्सों में बटे शहर को एक करने वाला रेल्वी फाटक को फ्लाईओवर का निर्माण के लिए बंद हो जाने के बाद से नगर लोग जैसे दो देशों में बट कर रह गया हैं। 4 वर्षों से नगर का मुख्य बाजार में वीरानी छा गई हैं। अलग- अलग हिस्सों में बाजार बटने के कारण व्यापारियों के सामने काफी जीवनयापन की समस्याएं खड़ी हो गई है। फ्लाईओवर का निर्माण कार्य पिछले 4 सालों से कछुए की गति से चल रहा है जो पूरा होने का नाम नहीं ले रहा। जिसकी निर्माण अवधि दो बार बढ़ाई जा चुकी हैं। वहीं कलेक्टर ने भी कई बार अधिकारियों को फटकार लगा चुके हैं किन्तु अधिकारियों के कानोंमें जू नहीं रेग रहीं। वहीं रेल्वे प्रशासन भी अपने क्षेत्र में हो रहे निर्माण पर ध्यान नहीं दे रहा। सोमवार को नगर के लोगो ने अनोखा प्रर्दशन करते हुए निर्माणाधीन फ्लाईओवर के नीचे अगरबत्ती जलाकर अपना विरोध दर्ज कराते हुए शीघ्र निर्माण की मांग की। स्थानीय निवासियों ने लगातार जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगा चुके कि फ्लाई ओवर की सौगात जल्दम मिले लेकिन ऐसा नहीं हो रहा। निर्माण पिछले कई सालों में चालू कम बंद ज्यादा रहा है। जिससे नगर के व्यापारी काफी परेशान और गुस्से को दिखाने के लिए सोमवार को फ्लाईओवर के नीचे अगरबत्ती जलाकर अपना विरोध दर्ज कराते हुए शीघ्र निर्माण की मांग की।

दो हिस्सों में बंटे अनूपपुर शहर को जोड़ने वाला रेलवे ओवरब्रिज अनूपपुर का निर्माण 16 अगस्त 2021 में 18 माह में हुआ पूर्ण करने के आश्वासन पर आरंभ हुआ। तैयारी लेकर सेतु निर्माण कार्य तीन साल बाद भी अधूरा पड़ा है। इसके निर्माण कार्य पूर्ण होने में अभी भी सालभर की समयावधि लगने की संभावना है। इसे पूर्ण होने को लेकर अब तक न तो ठेकेदार की ओर से और ना ही जिला प्रशासन की ओर से स्पष्ट जानकारी दी जा रही है। शहर की मुख्य कड़ी मार्ग कही जाने वाला यह मार्ग अब बारिश की बौछार में दलदली स्थल बन गया है। गत दिनों अपर कलेक्टर अमन वैष्णव ने निर्माणाधीन रेलवे फ्लाई ओवर ब्रिज कार्य का निरीक्षण किया तथा फ्लाईओवर कार्य जल्द से जल्द पूर्ण करने के संबंध में कार्य में तेजी लाने एवं ब्रिज निर्माण कार्य की वस्तुस्थिति एवं प्रगति की जानकारी प्रतिदिन प्रदान करने के निर्देश अनुविभागीय अधिकारी सेतु को दिए। वहीं कलेक्टर रेल अधिकारियों के साथ रेलवे ओवरब्रिज निर्माण की समीक्षा भी कर चुके हैं।

तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 6 अगस्त 2016 को आमसभा में ब्रिज निर्माण की घोषणा की थी। 14 दिसम्बर 2016 में ही प्रशासकीय स्वीकृति भी प्रदान। यहां तक कि 8 मई 2017 को कार्यदिश जारी कर दिया था। यहां तक वर्ष 2020 में मुख्यमंत्री ने खुद ही ओवरब्रिज निर्माण की आधारशिला रखी थी। जानकारी के अनुसार 12.01 करोड़ की लागत से 12-12 मीटर चौड़ाई और 462.44 मीटर का यह लम्बा पुल होगा। रेल पटरियों के उपर 56 मीटर लम्बी स्पॉन और ब्रिज में पिलर और आड़ीबॉल का भी उपयोग करते हुए 10 पिलर खड़े किए जाएंगे। दोनों छोर पर 50-50 मीटर लम्बी बीबीसी और 3-3 मीटर की चौड़ी सर्विस रोड प्रस्तावित है। लेकिन विभागीय व प्रशासकीय लापरवाही के कारण स्वीकृत ओवरब्रिज का निर्माण आज तक पूर्ण नहीं हो सका।

लोक सेवा केन्द्र के संचालक पर 5 हजार का लगाया जुर्माना


अनूपपुर

मध्यप्रदेश लोक सेवाओं के प्रदान की गारण्टी अधिनियम 2010 के अंतर्गत संचालित लोक सेवा केन्द्र पुष्पराजगढ़ के औचक निरीक्षण के दौरान पाई गई कमियों के चलते संचालक को जारी कारण बताओ सूचना पत्र का जवाब समाधान कारक नहीं पाए जाने पर प्रभारी कलेक्टर अमन वैष्णव ने लोक सेवा केन्द्र पुष्पराजगढ़ के संचालक वीरेन्द्र कुमार मिश्रा को आर.एफ.पी. एनेक्जर-7 के तहत 5 हजार रुपये की शास्ति से दण्डित किया है। उन्होंने लोक सेवा केन्द्र पुष्पराजगढ़ के संचालक को निर्देश दिए हैं कि शास्ति की राशि 3 दिवस के अन्दर जमा करते हुए जमा राशि की स्लिप कार्यालय कलेक्टर (लोक सेवा प्रबंधन) अनूपपुर में उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें।

एडीजीपी ने लूट के फरार आरोपियों पर 30 हजार ईनाम किया घोषित


उमरिया

फरियादी सुरेन्द्र कुमार मिश्रा पिता स्व.पंचम लाल मिश्रा उम्र 57 बर्ष निवासी एमपीईबी कालोनी मंठार ने थाना पाली में रिपोर्ट दर्ज कराया है कि दिनांक 20/7/24 को एक लाख चालीस हजार रूपये नगद राशि लेकर लाल रंग के छोटे हैंड बैग में रखकर अपनी मोटर साइकिल से एसबीआई बैंक शाखा पाली गया था, जहां बैंक के बाहर उमरिया रोड तरफ से मोटर साइकिल में सवार दो अज्ञात व्यक्ति आये और मेरे हाथ से रुपये से भरे बैग को लूटकर शहडोल रोड तरफ भाग गए।  इस घटना की रिपोर्ट पर थाना पाली में अपराध क्र. 401/2024 धारा 309(4) भारतीय न्‍याय संहिता कायम कर विवेचना की जा रही है और फरार अज्ञात आरोपियों की पतारसी एवं गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। 

इस घटना की सूचना पर एडीजीपी डीसी सागर ने लूट में संलि‍प्‍त संदिग्‍ध आरोपियों की सूचना देने या लूट में शामिल आरोपियों की पतारसी या गिरफ्तारी में सहयोग करने वाले व्‍यक्ति को 30000/-(तीस हजार रुपये) ईनाम देने की उद्घोषणा की गई है। (मध्यप्रदेश पुलिस रेग्युलेशन के पैरा क्र. 80(B)(1) के अनुसार) उन्‍होंने लूट के आरोपियों की गिरफ्तारी में पुलिस की मदद करने के लिए जनता से अपील की है और पुलिस को ग्राम व शहर में सतर्कतापूर्वक नियमित गस्‍त करने के लिए निर्देशित किया है। इसके अतिरिक्‍त एसडीओपी पाली, थाना प्रभारी पाली एवं अनुसंधान टीम को अपराध के अनुसंधान में वैज्ञानिक, फोरेंसिक, सायबर फोरेंसिक, परिस्थितिजन्‍य साक्ष्‍य आदि के आधार पर अग्रिम कार्यवाही करने के दिशा निर्देश दिये गये हैं। 

विंध्य क्षेत्र में प्रदेश अध्यक्ष पूर्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता का तीन दिवसीय दौरा

22,23,24 जुलाई 5 जिले के कार्यकर्ताओं को प्रदेश अध्यक्ष का मिलेगा मार्गदर्शन


शहड़ोल

वैश्य महासम्मेलन मध्यप्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष उमाशंकर गुप्ता का विंध्य क्षेत्र शहडोल संभाग मे तीन दिवसीय दौरा कार्यक्रम संगठन को मजबूती प्रदान करने की दृष्टि से तय हुआ है। 22, 23, 24 जुलाई को मध्यप्रदेश प्रदेश अध्यक्ष का मार्गदर्शन संभाग भर के वैश्य महासम्मेलन मध्य प्रदेश के कार्यकर्ताओं को प्राप्त होगा। प्रदेश अध्यक्ष सतना से चलकर 21 जुलाई रात 10 बजे उमरिया पहुँच रात्रि विश्राम करेंगे।  22 जुलाई सोमवार  सुबह 10 बजे से 11.30 बजे तक उमरिया जिले के कार्यकर्ताओं के साथ वैश्य बंधुओ के घर संपर्क  11:30 बजे  1:00 तक  संगठन की बैठक लेंगे, इसके उपरांत 1:00 बजे भोजन के बाद ब्यौहारी के लिए लिए रवाना होंगे, 3:30 से 5:00 बजे तक ब्यौहारी जिले की बैठक में शामिल, 5:00 से 5:30 तक  टी टाइम, 5:30 बजे से 6:30 तक घरों में संपर्क, 7:00 शहडोल के लिए रवाना, 9:00 बजे शहडोल पहुंचकर रात्रि विश्राम, 23 जुलाई सुबह 10:00 बजे से 11:30 तक घरों में संपर्क करेंगे। 11:30 से 1:00 तक जिले की बैठक में शामिल होंगे। 1:00 बजे भोजन तत्पश्चात 1:30 बजे डिंडोरी के लिए रवाना होंगे, 3:30 बजे डिंडोरी पहुंच कर शाम 5:00 बजे तक कार्यकर्ताओं की बैठक लेंगे,  5:00 से 5:30 चाय पर चर्चा करेंगे,  समय 5:30 से शाम 7:00 बजे तक कार्यकर्ताओं के साथ वैश्य बंधुओ के घरों में संपर्क, शाम 7:00 बजे डिंडोरी से शहडोल के लिए प्रस्थान, रात्रि 9:00 बजे शहडोल पहुंचकर विश्राम 24 जुलाई शहडोल से अनूपपुर के लिए प्रस्थान, सुबह 10:00 अनूपपुर आगमन 10:45 से 11:30 तक घरों में संपर्क, 11:30 से 1:00 बजे तक कार्यकर्ताओं की बैठक लेंगे, 1:00 से 1:30 तक भोजन, इसके उपरांत 2:45 पर नर्मदा एक्सप्रेस से अनूपपुर से भोपाल के लिए प्रस्थान करेंगे  तीन दिवसीय दौरा कार्यक्रम की जानकारी देते हुए प्रदेश महामंत्री एवं संभाग प्रभारी शहडोल ने संगठन के सभी कार्यकर्ताओ से शत प्रतिशत संख्या में पहुँचकर शामिल होने की अपील कर कहा कि प्रदेश अध्यक्ष का दौरा निश्चित ही संभाग के कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का  संचार करेगा और  बढ़ते हुए लक्ष्य की ओर हम सभी को दिशा मिलेगी। तदाशय की जानकारी   संभागीय मीडिया प्रभारी नीरज गुप्ता द्वारा देते हुए कार्यकर्ताओं को असुविधा से बचने के लिए तथा कार्यक्रम के संबंध में सही जानकारी प्राप्त करने के लिए मीडिया हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया   है 9425 17 3849 पर आवश्यकता अनुसार दूरभाष से संपर्क किया जा सकता है। 

*कार्यक्रम को लेकर पांचों जिले की तैयारी पूर्ण*   

संगठनात्मक दृष्टि से प्रदेश अध्यक्ष का  संभागीय दौर काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है कयास लगाए जा रहे हैं दौरे  के उपरांत संगठन में कोई बड़ा  फेर बदल हो सकता है  अपने लोकप्रिय प्रदेश अध्यक्ष के स्वागत के लिए आतुर जिला अध्यक्ष शहडोल मुकेश अग्रवाल ने कहां की जिले के संगठन को एक  ओजस्वी वक्ता को सुनने का अवसर नहीं छोड़ना चाहिए वही जिला अध्यक्ष अनूपपुर मुकेश जैन ने कहा कि प्रदेश के  मुखिया से परस्पर संवाद से बड़ी से बड़ी समस्याओं का  हल हो सकता है वही डिंडोरी जिला अध्यक्ष कमलेश अवधिया ने बताया कि कार्यक्रम को लेकर हमारी तैयारी पूर्ण हो चुकी है अब तो बस इंतजार  हम सभी के लोकप्रिय प्रदेश अध्यक्ष महोदय का व्यवहारी जिला अध्यक्ष राजेश गुप्ता में कहां की माननीय अध्यक्ष महोदय के आगमन से हम सभी एक नई ऊर्जा और उत्साह से ओत प्रोत हो जाएंगे वहीं जिला अध्यक्ष उमरिया कीर्ति कुमार सोनी ने आज का कार्यक्रम सफल बताते हुए जिले के सभी कार्यकर्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया है।

शीतल नहीं चांदनी रातें, उमस भरा सारा दिन, जाने कहां छिपी वर्षा ऋतु, कहां खो गया सावन


 *जुगनू इन रातों के*

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शीतल नहीं चांदनी रातें,

उमस भरा सारा दिन,

जाने कहां छिपी वर्षा ऋतु,कहां खो गया सावन।


फूलों के मौसम में जिसने ढेरों स्वप्न संजोए,

बिना आंसुओं के वो क्यारी चुपके चुपके रोए।


सूख रहे हैं पुष्प लताऐं, प्यासी है अमराई,

किसी पेड़ की छाया में,जाकर लेटी पुरवाई,


जाने कहां जा बसे वे दिन,रिमझिम बरसातों के,

चुरा ले गईं गर्म हवाऐं, जुगनू इन रातों के।


इस मौसम में पहले से भी,दुबली लगती नदिया।

रूठ किनारों से उदास सी,बहती रहती नदिया,


इस ऋतु में जो पक्षी आते,रास्ता भूल गए हैं।

शीतल झरने पहाड़ियों के,बहना भूल गए हैं।


अंजुरी भर बारिश करके,ये अंबर हार गया है,

हरे भरे पत्तों को शायद,लकवा मार गया है।


नहीं भुलाई जातीं वे,पिछले सावन की रातें,

जिनमें दो भीगे दिल करते,भीगी भीगी बातें।


अब रह रह के याद आ रहीं,वे मखमली फुहारें,

कोई भादों से कह दे,ले आए मस्त बहारें।


गीतकार -अनिल भारद्वाज एडवोकेट उच्च न्यायालय ग्वालियर

प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा द्वारा दुर्गा तिवारी को दिया गया प्रेरणा शिक्षाविद सम्मान


जबलपुर  

प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा हिंदी प्रचार प्रसार के साथ विभिन्न क्षेत्रों में प्रेरणादायक कार्य कर रहे पत्रकार, शिक्षाविद, कलमकार व समाजसेवियों को निरंतर सम्मानित करने का काम कर रही है जिससे समाज में नव जागृति पैदा हो और इस दिशा में लोगों को काम करने की प्रेरणा मिल सके।

डॉ गुंडाल विजय कुमार, प्रदीप मिश्र अजनबी, डॉ हरेंद्र हर्ष, डॉ लाल सिंह किरार के सतत प्रयासों से प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा अपने हिंदी प्रचार का काम कर रही है और इन कार्यों के दौरान समाज के हर वर्ग से संवाद भी बनाए हुए हैं जिससे भविष्य में और बेहतर किया जा सके। दिनांक 25.06..2024 को जारी विज्ञप्ति में कवि संगम त्रिपाठी ने बताया कि  इसी तारतम्य में श्रीमती दुर्गा तिवारी लोरमी जिला मुंगेली छत्तीसगढ़ को शिक्षाविद सम्मान 2024 प्रदान किया गया। श्रीमती दुर्गा तिवारी वर्तमान में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गोंडखाम्ही में व्याख्याता एल.बी .के रूप में पदस्थ हैं। ये स्काउट गाइड प्रभारी भी हैं।

कोरोनावायरस जैसे भयावह स्थिति में उन्होंने 2020 से ऑनलाइन क्लास के माध्यम से बच्चों को पढ़ाई से जोड़े रखने का एक सराहनीय प्रयास किया । इन्होंने सिर्फ अपने ही जिले के बच्चों को ही नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ के हर जिले के बच्चों को ऑनलाइन क्लास के माध्यम से पढ़ाया। इन्होंने 1376 ऑनलाइन क्लास ली और 76629 बच्चों लाभान्वित किया। इन्होंने मोहल्ला क्लास भी संचालित किया। दुर्गा तिवारी विभिन्न सामाजिक सांस्कृतिक साहित्यिक संस्थाओं से जुड़कर समाज सेवा में रत लोगों की प्रेरणा स्रोत बन गई हैं। 

 भारतवर्ष के विभिन्न क्षेत्रों के विकास हेतु दुर्गा तिवारी द्वारा लिखे गए गद्य - पद्य लेख विभिन्न पत्र पत्रिकाओं व समाचार पत्रों में प्रकाशित होते रहते हैं । इनकी जीवन की गतिशीलता, समाज सेवा, सहयोग एवं कर्तव्य परायणता  ही इनके जीवन के आदर्श हैं। इन सभी सेवाओं में रत होने के बावजूद दुर्गा तिवारी की व्यवहार कुशलता सहजता व सरलता इनके बहु आयामी व्यक्तित्व के परिचायक है। प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा के प्रेरणा स्त्रोत डाॅ धर्म प्रकाश वाजपेयी, डॉ शिवशरण श्रीवास्तव अमल , राजकुमारी रैकवार राज आदि ने बधाई दी है।

कण कण में विज्ञान पुस्तक, आलेख एवं कविताओं का संग्रह व ज्ञानवर्धक


पुस्तक समीक्षा

पुस्तक - कण कण में विज्ञान

समीक्षक - सुशी सक्सेना

कण कण में विज्ञान पुस्तक बहुत से विज्ञान लेखकों और विज्ञान से संबंधित बच्चों के रचनात्मक सहयोग से बनी है। यह आलेख एवं कविताओं का संग्रह है, जिनसे विज्ञान से संबंधित बहुत सारी रोचक और ज्ञानवर्धक जानकारी प्राप्त होगी। इसे स्पेस टू स्पेस समूह के संस्थापक अमर पाल सिंह और  लेखिका सुशी सक्सेना ने मिलकर संपादित किया है। कण कण में विज्ञान एक अद्वितीय और रोचक पुस्तक है जो विज्ञान के विभिन्न पहलुओं को सरल और सुलभ भाषा में प्रस्तुत करती है। इस पुस्तक का मुख्य उद्देश्य विज्ञान को आम जनता तक पहुंचाना है। 

पुस्तक में विज्ञान के बुनियादी सिद्धांतों और अवधारणाओं को समझाया गया है। यह न केवल वैज्ञानिक तथ्यों को बताती है, बल्कि उनके पीछे के कारणों और प्रभावों को भी स्पष्ट करती है। सहयोगी लेखकों ने विभिन्न अध्यायों में यह समझाने का प्रयास किया है कि विज्ञान हमारे दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा है। यह विद्यार्थियों और विज्ञान में रुचि रखने वालों के लिए बेहद उपयोगी है।

पुस्तक की भाषा सरल और सुलभ है, जिसे विभिन्न आयु वर्ग के पाठक इसे आसानी से समझ सकते हैं।वैज्ञानिक अवधारणाओं को समझाने के लिए पुस्तक में कई चित्र और डायग्राम शामिल हैं, जो पाठकों के लिए समझ को और भी आसान बना देते हैं। यह पुस्तक शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए एक मूल्यवान संसाधन हो सकती है। जो लोग विज्ञान में रुचि नहीं रखते हैं, उनके लिए भी यह पुस्तक प्रेरणादायक हो सकती है। यह विज्ञान की रोचकता और उसकी महत्ता को उजागर करती है।

कण कण में विज्ञान एक उत्कृष्ट पुस्तक है जो विज्ञान को सरल, सुलभ और रोचक तरीके से प्रस्तुत करती है। यह न केवल विज्ञान के विद्यार्थियों के लिए बल्कि आम पाठकों के लिए भी एक महत्वपूर्ण संसाधन हो सकती है। लेखकों की लेखन शैली और प्रस्तुतिकरण की विधि पुस्तक को और भी प्रभावी बनाती है।

प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा ने हिंदी सेवियों को किया सम्मानित


 

जबलपुर

प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा हिंदी प्रचार प्रसार के साथ विभिन्न क्षेत्रों में प्रेरणादायक कार्य कर रहे पत्रकार, शिक्षाविद, कलमकार व समाजसेवियों को निरंतर सम्मानित करने का काम कर रही है जिससे समाज में नव जागृति पैदा हो और इस दिशा में लोगों को काम करने की प्रेरणा मिल सके।

          डॉ गुंडाल विजय कुमार, प्रदीप मिश्र अजनबी, डॉ हरेंद्र हर्ष, डॉ लाल सिंह किरार के सतत प्रयासों से प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा अपने हिंदी प्रचार का काम कर रही है और इन कार्यों के दौरान समाज के हर वर्ग से संवाद भी बनाए हुए हैं जिससे भविष्य में और बेहतर किया जा सके। कवि संगम त्रिपाठी संस्थापक प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा ने दिनांक 12.06.2024 को जारी विज्ञप्ति में बताया कि हिंदी सेवी सम्मान - शिव शंकर तिवारी 'सोहगौरा' प्रतापगढ़ उत्तर प्रदेश, श्री प्रभात वर्मा पटना बिहार, डॉ शिप्रा मिश्रा बेतिया बिहार, सरस्वती मलिक मधुबनी बिहार व डॉ मनीष कुमार चौरसिया भागलपुर बिहार। हिंदी प्रेमी सम्मान 2024 - मधुसूदन आत्मीय मुंगेर बिहार, हिंदी भक्त सम्मान 2024 - गोपाल दास गुप्ता रायसेन मध्यप्रदेश। शिक्षाविद सम्मान 2024 - नवनीता दुबे 'नूपुर' मंडला मध्यप्रदेश व वीरेन्द्र कुमार दुबे जबलपुर मध्यप्रदेश को प्रदान किया गया है।

         प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा के प्रेरणा स्त्रोत डाॅ धर्म प्रकाश वाजपेयी, डॉ शिवशरण श्रीवास्तव अमल , राजकुमारी रैकवार राज, संतोष कुमार पाठक, बिनोद कुमार पांडेय  आदि ने बधाई दी है।

बहुत बोलती हैं ये आंखे मन टटोलती हैं ये आंखें इसीलिए तुम चुप बैठी हो


 *चुप बैठी हो*

बहुत बोलती हैं ये आंखें,इसीलिए तुम चुप बैठी हो। मन टटोलती हैं ये आंखें इसीलिए तुम चुप बैठी हो।


तुम कितना भी रोको इनको 

अनजाने ही झुक जाती हैं।

इनसे मत अब प्यार छुपाओ 

ये चुपके से कह जाती हैं।


राज खोलती है ये आंखें इसीलिए तुम चुप बैठी हो।

बहुत बोलती हैं ये आंखें,इसीलिए तुम चुप बैठी हो।


कह जातीं नजरों नजरों में 

तन्हाई के गम की बातें,

मेरा हृदय रुला जाती हैं  

तेरी पलकों की बरसातें।


प्यार तौलती हैं ये आंखें इसीलिए तुम चुप बैठी हो।

बहुत बोलती हैं ये आंखें,इसीलिए तुम चुप बैठी हो।


इनकी चमक खिला जाती है 

पल भर में मुरझाया चेहरा,

होठों की मुस्कानों से भी 

छट जाता बिछुड़न का कोहरा।


स्नेह घोलती है ये आंखें इसीलिए तुम चुप बैठी हो।

बहुत बोलती हैं ये आंखें,इसीलिए तुम चुप बैठी हो।


गीतकार अनिल भारद्वाज एडवोकेट हाईकोर्ट ग्वालियर

गमले क्यारी जंगल में आओ हम पेड़ लगाएं, हरियाली से भारत के माथे पर तिलक लगाएं


 पर्यावरण के माथे पर


गमले क्यारी जंगल में आओ हम पेड़ लगाएं,

हरियाली से भारत के माथे पर तिलक लगाएं।


हरे भरे मधुवन लालच की 

आरी से कटवाए,

कर षड़यंत्र कुल्हाड़ी से 

वृक्षों के कत्ल कराए।


चलो परकटे से उपवन के घावों को सहलाएं,

निधिबन नंदनवन के माथे पर फिर तिलक लगाऐं।


फसलों की प्यास को 

नलकूपों को सौंप रहे हैं।

धरती की छाती में गहरे 

खंजर घोंप रहे हैं,


पहले नदी झील तालाब प्रदूषण मुक्त कराऐं,

गंगा जमुना सरस्वती को फिर हम तिलक लगाऐं।


पौधों मानव सब जीवों में 

जान एक सी होती,

अंग किसी का कटे प्रकृति के 

मन को पीड़ा होती।


गांव शहर फिर राष्ट्र को हम हरा भरा बनाऐं,

पर्यावरण के माथे पर फिर हम तिलक लगाऐं।


गमले,क्यारी,जंगल में आओ हम पेड़ लगाएं,

हरियाली से भारत के माथे पर तिलक लगाएं।


गीतकार- अनिल भारद्वाज एडवोकेट उच्च न्यायालय ग्वालियर

दर्जनों शिकायत पर रोजगार सहायक चंद्रशेखर के सामने प्रशासन हुआ नतमस्तक

*अपने चहेतों व रिश्तेदारो के नाम फर्जी मस्टररोल भरकर राशि का करता है फर्जी आहरण*


अनूपपुर

जिले के जनपद पंचायत जैतहरी अंतर्गत ग्राम पंचायत लपटा का मामला जहां पर सरपंच उप सरपंच एवं पूर्व पंचों के द्वारा लगातार वर्षों से तत्कालीन पदस्थ रोजगार सहायक चंद्रशेखर कुशवाहा का शिकायत करते चले आ रहे हैं परंतु आज तक प्रशासन संज्ञान लेकर घोर लापरवाही पर प्रति ध्यान न देते हुए इन्हें खुली संरक्षण भ्रष्टाचार करने के लिए देखकर रखा गया है ऐसा प्रतीत होता है कि इनके घाट के सामने प्रशासन और उनके जिम्मेदार आल्हा अधिकारी नतमस्तक दिखाई पड़ रहे हैं। दर्जनों शिकायतों के बावजूद किसी भी प्रकार की इनकी जांच ना हुई तो कार्यवाही तो बड़ी दूर की बात है।

*यह हैं मामला*

विगत वर्ष ग्राम पंचायत लपटा के सरपंच उप सरपंच एवं पूर्व पंच के द्वारा अपने-अपने आवेदन पत्रों में तत्कालीन पदस्थ स्थानीय ग्राम रोजगार सहायक चंद्रशेखर कुशवाहा का शिकायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत अनूपपुर एवं जनपद पंचायत जैतहरी को लिखित रूप से किया गया था जिसमें उल्लेख है कि समस्त विकास कार्यों में अपने माता-पिता सगे संबंधी नाथ रिश्तेदारों के नाम पर जो पंचायत के किसी भी कार्य में एक विधि उपस्थित नहीं हुए हैं उनके नाम पर अवैध तरीके से राशि भरकर आहरण किया जा रहा है और योजनाओं को की राशि को बंदर बांट करते हुए पलीता लगाने का काम किया जा रहा है समस्त निर्माण कार्यों के मास्टर रोल में फर्जी तरीके से नाम दर्ज कर राशि का प्रभक्षण कर लिया गया है। साथ ही योजना में भी गलत तरीके से अपने शुभचिंतकों का नाम जुड़वा कर अवैध तरीके से लाभ दिलाया गया है।

*योजनाओं में भर गया फर्जी राशि*

रोजगार सहायक चंद्रशेखर कुशवाहा के द्वारा अपने पदस्थापना वर्ष के समय विभिन्न कार्यों में अवैध राशि भरकर प्रभक्षण किया गया है जिसकी शिकायत सरपंच उपसरपंच ने की थी। ग्रामीण क्रीड़ांगन खेल मैदान समतलीकरण प्राथमिक पाठशाला जरेली, गौशाला निर्माण कार्य, मेन रोड से पीडीएस गोदाम पहुंच मार्ग, आरसीसी पुलिया निर्माण पूरनलाल के खेत के पास, पुल निर्माण बैरिया टोला, आवास मोहल्ला पहुंच मार्ग आरसीसी पुलिया निर्माण महेंद्र मिश्रा के खेत के पास, सघन वृक्षारोपण बंधवा ओला लोटन के खेत में में रोड से बंधवाटोला पहुंच मार्ग आरसीसी पुलिया निर्माण, ठाकुर तालाब के पास आईएफआर तिपान कंट्रोलर स्टैग्रेट टंच चितवाही डांगरी और इस तरह के न जाने विभिन्न निर्माण कार्यों में अवैध राशि का गबन किया गया है।

*कार्यवाही के नाम पर हुआ स्थानांतरण*

ग्राम पंचायत में रोजगार सहायक का भर्ती के दौरान किसी भी प्रकार की स्थानांतरण की व्यवस्था नहीं है वह जिस पंचायत में कार्यरत है वही कार्य करेंगे ऐसी अभी तक राज्य सरकार के द्वारा किसी भी प्रकार की नीति व आदेश जारी नहीं किए गए हैं परंतु संबंधित अधिकारी जांच में दोषी पाए जाने के विरुद्ध कार्यवाही न करते हुए रोजगार सहायकों का इस पंचायत से उस पंचायत विधि विरुद्ध स्थानांतरण कर दिया जाता है। ऐसा ही ग्राम पंचायत लपटा के रोजगार सहायक के साथ हुआ सरपंच उप सरपंच एवं पंचों के द्वारा कई बार शिकायत करने पर ना तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारी के द्वारा जांच की गई और ना कार्यवाही की गई बल्कि उनको उपहार में दूसरा पंचायत पंचायत दे दिया गया जहां वह जाकर के फिर से खुलेआम भ्रष्टाचार का बीज बोने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।

वशिष्ठ पीठाधीश्वर महर्षि डॉ.रामविलास वेदांती के मुख से भागवत कथा ज्ञान भक्ति गंगा हुई प्रवाहित

*श्रीमद्भागवत सप्ताहज्ञान महायज्ञ , हवन और भंडारा बाद हुआ समापन*


 अनूपपुर

मां नर्मदा जी की उद्गम स्थली पवित्र नगरी अमरकंटक के काटजूग्राम वार्ड क्रं.02 बाराती सुरेंद्र पांडेय के निज निवास पर अपने पूर्वजों और परिवार के निमित्त मां नर्मदा की असीम अनुकम्पा तथा गुरुदेव युवराज स्वामी बद्री प्रपन्नाचार्य महाराज चित्रकूट धाम के आशीर्वाद से श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ तेईस से उन्तीस मई दो हजार चौबीस तक अयोध्या नगरी से पधारे कथा व्यास सदगुरुदेव परमपूज्य वशिष्ठ पीठाधीश्वर महर्षि डॉ.राम बिलास वेदांती महाराज के विद्वतवरेण्य संत के श्रीमुख से निःश्रत श्रीमद्भागवत कथा श्रद्धा और शुभता का नया सोपान अमरकंटक नगर वासियों हेतु प्रवाहित किए । श्रीमद्भागवत कथा के संयोजक रहे डॉ.वेदांती के शिष्य डॉ.राघवेश दास वेदांती अयोध्या रहे। कथा के मुख्य यजमान के रूप में श्रोता अमरकंटक बाराती निवासी ममता पांडेय / सुरेंद्र पांडेय तथा उनकी बहू श्रीमती रेशमा पांडेय / शैलेंद्र पांडेय  सहित परिवार के अन्य सदस्यगण स्वागत की बागडोर पूरे सप्ताह भर सम्हाले रखे । 

प्रथम दिवस मां नर्मदा उद्गम स्थल कुंड में पूजन कर कलशों में जल भरकर भव्य रथ में कथा वाचक संत को विराजमान कर माथे में भागवत , कलश रख पैदल परिवार , नगरवासियों की टोली साथ ढोल नगाड़ों , अतीसबाजी मध्य शोभा यात्रा नर्मदा मंदिर से प्रारंभ होकर वार्ड 02 बाराती निज निवास कथा स्थल पहुंच कलश स्थापना , बेदी पूजन , भागवत पुराण पूजन उपरांत रोजाना दोपहर 03 बजे से शाम 06 बजे तक मंत्रमुग्ध कर देने वाली कथा का वाचन तथा भजन गीत वाद्ययंत्र के साथ 29 मई तक चलती रही। दिन गुरुवार 30 मई 2024 को यज्ञ हवन पूर्णाहुति पश्चात विशाल भंडारा प्रसाद ग्रहण करावाया गया । 

अयोध्या से पधारे भागवत कथा वाचक संत हिंदूधाम संस्थापक वशिष्ठ पीठाधीश्वर महर्षि डॉ. रामविलास दास वेदांती महाराज ने बताया की मानस मराल वैष्णव कुलभूषण संत शिरोमणि रामभूषण दास महाराज जैसे संत का सानिध्य (हमारे गुरुदेव) व संरक्षण मिला तथा दीक्षा प्राप्त करने का सौभाग्य भी मिला । 

रामविलास वेदांती ने 1968 में घरबार छोड़कर अयोध्या राम की नगरी पहुंच योग्यतम् आचार्य संत अभिरामदास का संरक्षण मिला । इन्ही के मार्गदर्शन में आपने संस्कृत का अध्ययन करते हुए वेदांताचार्य एवं विद्यावारिधि(पीएचडी)की उपाधि प्राप्त की। आपने 1976 में श्री रामनगरी की प्रमुख पीठ वशिष्ठ भवन के महंत पद पर सुशोभित हुए। श्री रामजन्मभूमि आंदोलन नेतृत्व की जब भी जरूरत पड़ी तो आपने अग्रिम पंक्ति में खड़े होकर हिंदू समाज का नेतृत्व किया और पच्चीस बार जेल भी गए । वेदांती जी ने लोकसभा सदस्य के रूप में दो बार धर्म संस्कृति और सनातनता की पताका फहराई। आपने वर्ष 2000 में न्यूयार्क के विश्व धर्म सम्मेलन में हिंदू धर्म दर्शन के संवाहक बने। गत तीन दशक से कथा , प्रवचन के फलक पर छाए हुए है। अपने लगभग एक हजार मंचो से भक्ति की गंगा को प्रवाहित किया है। पूज्य वेदांती महाराज वेद, वेदांत , गीता , उपनिषद , श्रीमद्बाबाल्मिकी - रामायण , श्रीमद्भागवत महापुराण , श्री रामचरित मानस और अन्यान्य पुराणों के मर्मज्ञ विश्वविख्यात संत  शिरोमणि है। ऐसे संत का आगमन अयोध्या से पधार कर मां नर्मदा जी की उद्गम स्थली अमरकंटक की पावन भूमि में अपके श्री मुख से श्रीमद्भागवत कथा का ज्ञान गंगा भक्ति रस खूब बहाया । सप्ताह भर श्रोतागण खूब भक्ति में झूमते नजर आए।

प्यासी धरती मुरझा मधुवन, 

प्यासी धरती तुझे पुकारे, प्यासी नदिया तुझे पुकारे, आ रे मेघा अब तो आ रे


 ।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।

     

प्यासी धरती तुझे पुकारे,

प्यासी नदिया तुझे पुकारे,

      आ रे मेघा अब तो आ रे।

      

बादल नीलगगन पर छाते,

संग आंधियों को ले आते,

तेरे राजदूत बनकर वे,

झूठे आश्वासन दे जाते।

        

सूखी पोखर तुझे पुकारे,

आ रे मेघा अब तो आ रे।

 

 कोयल सूखी अमराई में,

 विरह गीत गाती रहती है,

 और मोरनी खुली चोंच से,

 अंबर को देखा करती है।

 

प्यासा चातक तुझे पुकारे,

आ रे मेघा अब तो आ रे।

 

बूंदों की गगरी सिर पर रख,

मानसून की दासी आतीं,

मधुबन के मुरझाये मुख पर,

आकर छींटे से दे जातीं।


झुलसी कोंपल तुझे पुकारे,

आ रे मेघा अब तो आ रे।

 

 प्यासी धरती तुझे पुकारे,

 प्यासी नदिया तुझे पुकारे,

           आ रे मेघा अब तो आ रे।

           ।।।।।।।।।।।।।।।।

  गीतकार 

अनिल भारद्वाज ,एडवोकेट, हाईकोर्ट ,ग्वालियर, मध्यप्रदेश।

बघेली की बाल लोक गायिका मान्या ने दी मंत्रमुग्धकारी प्रस्तुति, दर्शक हुए भाव विभोर

*उत्थान, सामाजिक, सांस्कृतिक, समिति समिति कर रहा है विंध्य लोकरंग महोत्सव का आयोजन*


अनूपपुर

राष्ट्रीय ख्यातिलब्ध बघेली की बाल लोक गायिका सुश्री मान्या पाण्डेय की मंत्रमुग्धकारी प्रस्तुति से अनूपपुर के सैकड़ों श्रोता – दर्शक कुछ ऐसे भाव विभोर हुए कि लगभग तीन घंटे तक कर्णप्रिय गायन रस में गोते लगाते रहे। किसी की आंख से आंसू बह रहे थे तो कोई तालियां बजा – बजाकर संगत दे रहा था। जो जहाँ बैठा ,वहीं बैठा रह गया। लोग भाव विभोर थे और यही टिप्पणी करते दिखे कि विंध्य के इन बाल नव रत्नों में मानों माता सरस्वती की सम्पूर्ण कृपा बरस रही है। जिला मुख्यालय में विवेकानन्द स्मार्ट सिटी परिसर में 7 -10 बजे तक बुन्देली लोक गायिका मान्या पाण्डेय और उनके समूह ने प्रस्तुति दी। अनूपपुर जिला विकास मंच, मप्र श्रमजीवी पत्रकार संघ, जिला दवा विक्रेता संघ, मिड वे ट्रीट, पीआरटी महाविद्यालय, विवेकानन्द स्मार्ट सिटी के सक्रिय सहयोग और उत्थान सामाजिक, सांस्कृतिक एवं साहित्यिक समिति के नेतृत्व में आयोजित इस सांस्कृतिक आयोजन में सैकड़ों लोगों ने हिस्सा लिया।

विंध्य मेकल क्षेत्र बघेली लोक साहित्य और लोक संस्कृति की वाचिक परंपरा के रूप में काफी समृद्ध रहा है। बघेली लोकगीत और लोक संस्कृति राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त करें, उनके मंचीय प्रदर्शन का विस्तार हो, संरक्षण, संवर्धन व संचयन हो इसके लिए उत्थान सामाजिक सांस्कृतिक एवं साहित्यिक समिति द्वारा शहडोल व रीवा संभाग के सम्पूर्ण जिलों में विंध्य लोकरंग महोत्सव का आयोजन किया जा रहा हैं। इसी तारतम्य में सैकड़ों लोगों की उपस्थिति में कार्यक्रम की शुरुआत हुई।

रामायण परिसर में महोत्सव की शुरुआत अतिथियों द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन कर हुई, तत्पश्चात राष्ट्रीय लोक गायिका मान्या पाण्डेय के द्वारा बघेली सुमिरनी लोकगीत – देवी गंगा देवी गंगा लहर तोंहार लहर लहरिया हो मैया भींजय आठो अंग, आदिवासी करमा गीत भोर पहा रामा नही आए हो आमा के डहरा, दादरा गीत अइसन मिजाजी ताल गगरिया बूड़त नही रे, जन्म संस्कार गीत कहूं खेलन निकरि गए हमार लालना, तिलक गीत राजा दशरथ फूले न समाय तिलक आबा मोरे अंगना, अंजुरी गीत हरदी से रंगी रे पियरिया छोड़ाए नही छूटय हो, जेवनार गारी गीत उतरत माघ लगत दिन फागुन राम चले हां ससुरारी, बिदाई गीत कच्ची ईंट बाबुल देहरी न धरियो एवं जातीय गीत बिरहा की प्रस्तुति दी गई। तत्पश्चात बाल कलाकार प्रत्युष द्विवेदी द्वारा बघेली लोकगीत एवं भजन की प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम में आगे विंध्य के प्रसिद्ध लोक गायक नरेन्द्र सिंह सीधी द्वारा बघेली ददरिया, कोलदहका, टप्पा एवं पितमा गीतों की प्रस्तुति दी गई। उसके बाद लोक गायिका श्रुति सिंह, सुभी सिंह द्वारा विवाह गीतों एवं लोक गायक कपिल तिवारी द्वारा बघेली दादरा गीतों की प्रस्तुति दी गई।

विंध्य लोकरंग महोत्सव में राष्ट्रीय लोक गायिका मान्या पाण्डेय लगातार बघेली के विविध लोकगीतों की प्रस्तुतियां कर रही हैं। मान्या को बघेली के हजारों गीत कंठस्थ हैं जिन्हे आप देश के विविध मंचो पर अनवरत प्रस्तुत करती रही हैं। अनूपपुर के लोकरंग महोत्सव में मान्या पाण्डेय एवं उनके लोककला दल को सम्मानित किया गया। इस शांतिपूर्ण रंगारंग महोत्सव में इस दौरान अनूपपुर, चचाई, कोतमा, बिजुरी, राजेन्द्रग्राम, अमरकंटक, जैतहरी, पेण्ड्रा से आए सैकड़ों लोगों सहित जिले के समाज सेवी, साहित्यकार, लोक कलाकार, रंगकर्मी, पत्रकारगण एवं भारी संख्या में शहरवासी उपस्थित रहे।

एक आदर्श वृद्धाश्रम, अपने घावों को भरने का मरहम- एडीजीपी डी सी सागर


शहड़ोल

भारत में परिवार सशक्‍त मानवीय मूल्‍यों एवं आदर्शों पर आश्रित होता है। वृद्धाश्रम का अस्तित्‍व समाज में तभी आया है जब परिवार में मानवीय मूल्‍यों का अधोपतन या विघटन हुआ है। इस गतिविधि को परिवार में मानवीय मूल्‍यों का स्‍वार्स्‍थ सिद्धि की भेंट चढ़ जाना कहा जा सकता है। परिवार में मानवीय मूल्‍यों के नि:शक्‍त हो जाने के कारण वृद्धाश्रम में वृद्ध महिलाएं और वृद्ध पुरुष निराश्रित, असहाय और लाचारी में जीवन जीने को विवश हो जाते हैं। उनके जीवन में उनके परिवार के सदस्‍यों द्वारा दुर्व्‍यवहार के साथ-साथ संवेदनहीनता एवं अमानवीयता से बेघर कर दिया जाता है। 

उदाहरण के लिए शहडोल के एक वृद्धाश्रम में पहुंचकर, सम्‍मानित वृद्धजनों के दर्शन करने का अवसर मिला। सभी वृद्धजन निराश, दिल से दु:खी और अपने अतीत की खुशियों को फिर से वृद्धाश्रम के नए वातावरण में तलाशने की कोशिश करते हुए नजर आये। इनमें किसी की बहू ने सास के साथ दुर्व्‍यवहार किया और घर से निकाल दिया। कहीं बेटे ने कर्तव्‍य को तिलांजलि देकर अपने पिता को घर से बेघर किया। अनेक वृद्ध महिलाएं इस हद तक अवसादग्रस्‍त थीं कि उन्‍होंने अपनी सारी सम्‍पत्ति को दान कर दिया या जल में प्रवाहित कर दिया। 

अत: वृद्धाश्रम इस प्रकार होना चाहिए कि उसमें निवासरत वृद्धजन अपने अंत:करण में परमानंद की खोज करने में सफल हो सकें। इस प्रकार का सकारात्‍मक वातावरण तभी संभव है जब वृद्धाश्रम में वे सभी मानवीय मूल्‍य जो एक परिवार को सृजित करते हैं, पुष्पित करते हैं और समृद्ध बनाते हैं उनका पुनर्जागरण हो। एक आदर्श और समृद्धशील वृद्धाश्रम की परिकल्‍पना निम्‍नानुसार है -


साफ-सफाई - बेडशीट, गद्दे, मच्‍छरदानी आदि साफ-सुथरे होने चाहिए। कम्‍बल, रजाई, तकिया, गद्दे आदि को आवश्‍यकता अनुसार समय-समय पर सुखाना चाहिए। पीने का पानी साफ उपलब्‍ध होना चाहिए। 

पौष्टिक आहार - समय पर पौष्टिक आहार आयु के अनुकूल देना चाहिए। भोजन की गुणवत्‍ता उच्‍च स्‍तर का होना चाहिए।

स्‍वास्‍थ्‍य की देखभाल - समय-समय पर मेडिकल चेकअप करना चाहिए और आवश्‍यक दवाईंया देना चाहिए।

योग, ध्‍यान, शारीरिक व्‍यायाम, खेलकूद एवं मनोरंजक गतिविधियां : स्‍वास्‍थ्‍य के अनुरूप प्रतिदिन हल्‍के शारीरिक व्‍यायाम, योग, ध्‍यान एवं मनोरंजक गतिविधियां होना चाहिए। मनोरंजन के संसाधन जैसे- बड़े स्‍क्रीन की टीवी, म्‍यूजिक सिस्‍टम उपलब्‍ध होने चाहिए। इंडोर गेम जैसे - कैरम, चेस आदि खेल होने चाहिए। समय-समय पर मनोरंजक गतिविधियां होना चाहिए। परिसर में झूला लगा होना चाहिए।

परिसर का सौंदर्यीकरण एवं स्‍वच्‍छता - परिसर की साफ-सफाई नियमित रूप से होनी चाहिए। परिसर में हरियाली होनी चाहिए। परिसर में फलदार वृक्ष होने चाहिए। वॉक करने के लिए सुरक्षित ट्रैक होना चाहिए, जिसके आसपास फूल लगे हों।

रचनात्‍मक कार्य -15 दिन में एक बार धार्मिक, दर्शनीय स्‍थल भ्रमण पर ले जाना चाहिए। रुचिपूर्ण सरल रचनात्‍मक कार्यों जैसे - चित्रकला, काव्‍य रचना, रुई बाती, अगरबत्‍ती निर्माण आदि में लगाना चाहिए। 

वृद्धाश्रम जहां-जहां भी स्थित हों उनमें अनंत खुशियों का संसार हो जिससे निवासरत सभी वृद्धजन अपने बेटा, बेटी, बहू या अन्‍य परिजनों को क्षमा करते हुए उनसे जुड़ी हुई सभी यादों को विलुप्‍त कर सकें और अपनी प्रशन्‍नता के जनक स्‍वयं बन सकें। वृद्धाश्रम में निवासरत सभी वृद्धजन जिन्‍हें मैं दिल से युवा मानता हूँ उनकी हौसला-अफजाई के लिए चंद पंक्तियां इस प्रकार हैं:- 


तू खुद की खोज में निकल

तू किस लिए हताश है,

तू चल, तेरे वजूद की

समय को भी तलाश है

समय को भी तलाश है।।


डी. सी. सागर, अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक, शहडोल ज़ोन

मूक बधिर लापता युवती को पुलिस ने उत्तरप्रदेश से लाकर परिवार से मिलाया


शहडोल

मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के अमलाई थाने की पुलिस ने अपने बेहतरीन क्षमता और प्रयासों का उदाहरण पेश करते हुए अमलाई से गुम हुई एक मूक बधिर युवती जो कि स्कूटी छोड़कर लापता हो गई थी, उसे यूपी के मथुरा से ढूंढ निकाला है। युवती 4 दिन से घर से गायब थी। पुलिस ने उसे दस्तयाब कर परिजनों के हवाले कर दिया है। इधर लापता बच्ची को पाकर परिजनों के खुशी का ठिकाना नहीं रहा, बच्ची के परिजन शहडोल पुलिस की जमकर तारीफ कर रहे है। अमलाई थाना क्षेत्र की रहने वाली एक मूक बधिर युवती 4 दिन पहले अमलाई थाना क्षेत्र के अमरकंटक रोड़ डोंगरिया के पास स्कूटी छोड़कर लापता हो गई थी, जिसकी जानकरी परिजनों ने अमलाई पुलिस को दी थी। पुलिस ने तत्काल गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करते हुए ,साइबर सेल की मदद से युवती का लोकेशन ट्रेस कर एक टीम यूपी के मथुरा रवाना हुई, जंहा से युवती को दस्तयाब कर अमलाई लेकर उसे परिजनों के हवाले कर दिया।

सिविल सेवा दिवस पर, इस क्षेत्र में निस्वार्थता व व्यावहारिकता पर एडीजीपी की भावनाए


राष्ट्रीय सिविल सेवा दिवस के अवसर पर, मैं सिविल सेवा के क्षेत्र में निस्वार्थता और व्यावहारिकता के बारे में अपनी भावनाओं को साझा करना चाहता हूं। कुछ दिन पहले मेरे अंदर ये भावनाएँ जागृत हुईं। एक दिन, मेरी दो बेटियां, जो रचनात्मक और खुशमिजाज़ हैं, ने मुझसे पूछा कि भारतीय पुलिस सेवा से मेरी सेवानिवृत्ति कब है। एक शरारती मुस्कान के साथ मैंने उन्हें जो बताया, वह तर्क के साथ प्रबलित एक भावनात्मक कविता में तब्दील हो गया।

यह रहा:

"मेरे जुनून का सत्र"

जैसे-जैसे भारतीय पुलिस सेवा से मेरी सेवानिवृत्ति मेरी ओर बढ़ती है, मेरा जुनून अनंत तक बढ़ता जाता है। जैसे-जैसे भारतीय पुलिस सेवा से मेरी सेवानिवृत्ति मेरी ओर बढ़ती है, मेरे जुनून का सत्र हर घमंड को त्याग देता है। जैसे-जैसे भारतीय पुलिस सेवा से मेरी सेवानिवृत्ति बढ़ती जा रही है, मेरे जुनून का दौर और भी अधिक गंभीर होता जा रहा है। जैसे-जैसे भारतीय पुलिस सेवा से मेरी सेवानिवृत्ति मेरी ओर बढ़ती है, मेरे जुनून का सत्र और अधिक क्षमता प्राप्त करता है। जैसे-जैसे भारतीय पुलिस सेवा से मेरी सेवानिवृत्ति मेरी ओर बढ़ती है, मेरे जुनून का सत्र और अधिक जीवंत हो जाता है। जैसे-जैसे भारतीय पुलिस सेवा से मेरी सेवानिवृत्ति मेरी ओर बढ़ती है, मेरे जुनून का सत्र और अधिक मापनीयता जोड़ता है। जैसे-जैसे भारतीय पुलिस सेवा से मेरी सेवानिवृत्ति मेरी ओर बढ़ती जा रही है, मेरे जुनून का सत्र हर कसौटी पर खरा उतरता जा रहा है। जैसे-जैसे भारतीय पुलिस सेवा से मेरी सेवानिवृत्ति मेरी ओर बढ़ती है, मेरे जुनून का सत्र तारकीय दृश्यता को अनुकूलित करता है।

जैसे-जैसे भारतीय पुलिस सेवा से मेरी सेवानिवृत्ति मेरी ओर आकर्षित होती है, मेरे जुनून का सत्र जीवन शक्ति की भावना को कई गुना बढ़ा देता है। जैसे-जैसे भारतीय पुलिस सेवा से मेरी सेवानिवृत्ति मेरी ओर आकर्षित हो रही है, मेरे जुनून का सत्र अधिक स्थिरता को घेरता है। जैसे-जैसे भारतीय पुलिस सेवा से मेरी सेवानिवृत्ति मेरी ओर आकर्षित हो रही है, मेरे जुनून का सत्र प्रतिरक्षा के लिए स्वस्थ एंटीबॉडी को बढ़ावा देता है। जैसे-जैसे भारतीय पुलिस सेवा से मेरी सेवानिवृत्ति मेरी ओर आकर्षित हो रही है, मेरे जुनून का सत्र रचनात्मकता के लिए लाल अक्षर वाले दिन को सृजित करता है।

जैसे-जैसे भारतीय पुलिस सेवा से मेरी सेवानिवृत्ति मेरी ओर आकर्षित हो रही है, मेरे जुनून का सत्र किसी भी तरह की फिजूलखर्ची को त्याग देता है। जैसे-जैसे भारतीय पुलिस सेवा से मेरी सेवानिवृत्ति मेरी ओर बढ़ती है, मेरे जुनून का सत्र सभी के समक्ष सम्मान के साथ झुकना सिखाता है। जैसे-जैसे भारतीय पुलिस सेवा से मेरी सेवानिवृत्ति मेरी ओर आकर्षित हो रही है, मेरे जुनून का सत्र मुझे जीवन की नाजुकता के बारे में समझदार बनाता है। जैसे-जैसे भारतीय पुलिस सेवा से मेरी सेवानिवृत्ति मेरी ओर आकर्षित हो रही है, मेरे जुनून का सत्र आध्यात्मिकता में सिकुड़ने से इनकार कर रहा है।

जैसे-जैसे भारतीय पुलिस सेवा से मेरी सेवानिवृत्ति मेरी ओर आकर्षित हो रही है, मेरे जुनून का सत्र हिमालयी मानवता की गहराई से गूँज रहा है। इधर-उधर भटकने के बाद, मैंने अपनी बेटियों को, जिनका धैर्य टूटने ही वाला था, बताया कि मेरी सेवानिवृत्ति 30 जून, 2025 को होगी। उन दोनों ने मुझे इतने प्रगतिशील और उत्साहपूर्ण विचार रखने के लिए हार्दिक बधाई दी। साथ ही  अपने रिटर्न उपहार का वादा पूरा करने के लिए अशेष  शुभकामनाएं भी दीं। ऐसी ही स्पोर्टिंग हैं मेरी बेटियां जिन्हें अपनी स्मार्ट मां का पूरा सपोर्ट मिलता है। सेवानिवृत्ति एक उत्साहपूर्ण उत्सव है एक नई कसौटी की ओर जिस पर सर्वत्र खरा उतरना होगा।

सशक्त हस्ताक्षर ने स्व. इन्द्र बहादुर खरे की याद में 24 वीं काव्य गोष्ठी संपन्न 


   

जबलपुर

सशक्त हस्ताक्षर की 24वीं कवि गोष्ठी श्री जानकी रमण महाविद्यालय में सानंद सम्पन्न हुई। संस्थापक गणेश श्रीवास्तव प्यासा ने अपनी वाणी से सभी अतिथियों, कवियों-कवयित्रियों का अभिनंदन किया ၊ मुख्य अतिथि पूर्व प्राचार्य यशोवर्धन पाठक, अध्यक्षता उदय भास्कर अम्बष्ठ पूर्व प्रबंधक एस. वी. आई. विशिष्ट अतिथि पं. दीनदयाल तिवारी बेताल, प्राचार्य अभिजात कृष्ण त्रिपाठी, प्रो. मलय रंजन खरे की गरिमामय उपस्थिति रही। इस अवसर पर सशक्त हस्ताक्षर द्वारा यशोवर्धन पाठक, उदय भास्कर अम्बष्ठ, पं. दीनदयाल तिवारी बेताल का शाल, श्रीफल, मानपत्र देकर सम्मानित किया गया। गोष्ठी प्रसिद्ध शिक्षाविद्, संपादक, युवा कवि स्व. इन्द्र बहादुर खरे की पुण्यतिथि के अवसर पर पुण्य स्मरण हेतु समर्पित थी। मुख्य अतिथि की आसंदी से यशोवर्धन पाठक ने उनसे जुड़े संस्मरण, व्यक्तित्व - कृतित्व व समकालीन कवियों व कविता पर  विशद् प्रकाश डाला।

सरस्वती वंदना आकाशवाणी कलाकार लखन रजक ने की।  कवि गोष्ठी की शुरुआत स्वर झंकार की अध्यक्षा राजकुमारी राज ने देवी की आराधना करके की। जी. एल. जैन महासचिव ने हास्य व्यंग्य के तीर छोड़े। संदीप खरे युवराज ने गीत एवं वरिष्ठ कवयित्री निर्मला तिवारी ने करुण रस में डूबी प्रभावपूर्ण रचना पढ़ वाहवाही ली ၊ आशुतोष तिवारी, रामकुमार वर्मा, प्रकाश सिंह ठाकुर ने गज़ल, इन्द्र सिंह राजपूत ने जल की समस्या पर शानदार रचना पढ़ी।  वरिष्ठ कवि जयप्रकाश श्रीवास्तव ने भी जल, नदी, रेत, सूखे की परेशानियों पर सुंदर दोहे सस्वर पढ़ें सभी की खूब सराहना प्राप्त की। यशोवर्धन पाठक, डॉ. विनोद श्रीवास्तव, अम्लान गुहा नियोगी ने संघर्ष की प्रेरणा देते हुए जोश से भरपूर रचना पढ़ी।  पं. दीनदयाल तिवारी बेताल, अध्यक्ष मदन श्रीवास्तव, चंद्र प्रकाश श्रीवास्तव, डॉ. अरुणा पाण्डे ने प्रजातंत्र और मताधिकार पर नये दृष्टिकोण के साथ व्यंग्य का पुट लिये शानदार प्रस्तुति देकर मंच को नयी ऊंचाई दी। कालीदास ताम्रकार काली, तरुणा खरे ने तरुन्नम में उत्कृष्ट गज़ल पढ़कर मंच लूटा। केशरी प्रसाद पाण्डेय, अरूण शुक्ल को भी खूब सराहा। संजय पाण्डेय, सत्यम खरे की गरिमामय उपस्थिति रही। संचालन गणेश श्रीवास्तव, आभार प्रदर्शन सलाहाकार कवि संगम त्रिपाठी ने किया।

लोकसभा के 6 मतदान केंद्रों में मतदाताओं ने किया 100 प्रतिशत मतदान करके रचा इतिहास

*कमिश्नर, एडीजीपी व कलेक्टर के नेतृत्व में हुआ मतदान*


शहड़ोल

शहडोल संभाग में 06 मतदान केन्‍द्रों में मतदाताओं ने उमंग व उत्‍साह पूर्वक शत-प्रतिशत मतदान करके ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। यह उल्‍लेखनीय है कि शहडोल संभाग में कमिश्नर शहडोल संभाग एवं एडीजीपी डीसी सागर के नेतृत्‍व में पुलिस एवं प्रशासन द्वारा व्‍यापक रूप से किए मतदाता जागरूकता रैली, फ्लैग मार्च एवं नुक्‍कड़ सभा में ''100 प्रतिशत मतदान, आंधी आये या तूफान'' के फलस्‍वरूप में संभाग के 06 मतदान केन्‍द्रों में जिला शहडोल में चंदनिया खुर्द में, जिला उमरिया के कुशमहा कला, कुमकनी, पिपरीटोला, गंजरहा और सेमरी में 100 प्रतिशत मतदान किया गया। जिला अनूपपुर अंतर्गत पुष्‍पराजगढ़ क्षेत्र के  02 मतदान केन्‍द्र डोगरिया टोला और चटुआ में मतदाताओं ने सड़क, पुल, पानी, बिजली आदि की समस्‍या को लेकर मतदान का सामूहिक बहिष्‍कार किया हुआ था, जहां कमिश्‍नर शहडोल और एडीजीपी शहडोल द्वारा पुलिस अधीक्षक जितेन्‍द्र सिंह पवांर, संयुक्‍त कमिश्‍नर मगन सिंह कनेश, जनपद सीईओ पुष्‍पराजगढ़, तहसीलदार पुष्‍पराजगढ़ एवं एडीजीपी आफिस कमाण्‍डो के साथ पहुँचे और जनता का समझाईश दी गई और मांगों के निराकरण का आश्‍वासन दिया गया। इसके बाद मतदाताओं ने अपने संवैधानिक मताधिकार का उपयोग करने के लिए राजी हुए और मतदान किए। 

कमिश्नर शहडोल संभाग एवं एडीजीपी डीसी सागर ने लोकसभा निर्वाचन हेतु आज शहडोल जिले के शासकीय प्राथमिक विद्यालय धुरवार, शासकीय प्राथमिक विद्यालय पुलिस लाइन शहडोल, पंडित शंभूनाथ शुक्ल विश्वविद्यालय शहडोल, रघुराज उच्चतर माध्यमिक विद्यालय शहडोल, शासकीय प्राथमिक विद्यालय जमुई में बनाए गए मतदान केंद्रों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कमिश्नर ने मतदान करने आए मतदाताओं से चर्चा की तथा प्रदाय किए जा रहे सुविधाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए की मतदाताओं को किसी भी प्रकार की सुविधा न हो सभी सुविधाएं उपलब्ध रहे, दिव्यांग एवं वरिष्ठ मतदाताओं को लाने वाले जाने हेतु वाहन भी उपलब्ध हो। एडीजीपी डीसी सागर ने सुबह मतदान केन्‍द्र पुलिस लाईन शहडोल में पहुँचकर मतदान किया और मतदाताओं का उत्‍साहवर्धन किया। साथ ही मतदाताओं से अपील करते हुए कहा कि आज लोकतंत्र के इस महापर्व में सहभागिता निभाने हेतु अपने घरों से निकलें और मतदान केंद्र जाकर शत प्रतिशत मतदान करें। उन्होंने मतदान करने आए मतदाताओं के साथ सेल्फी लेकर उत्साहवर्धन भी किया। 

इसके अतिरिक्‍त जिला अनूपपुर में भी कमिश्नर शहडोल संभाग बीएम जामोद एवं एडीजीपी  डी सी सागर ने अनूपपुर लोक सभा निर्वाचन मतदान को दृष्टिगत रखते हुए कलेक्ट्रेट कार्यालय में बनाए गए निर्वाचन कंट्रोल रूम, वेब कास्टिंग रूम तथा कम्यूनिकेशन टीम के कार्यों का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान  कमिश्नर शहडोल संभाग बीएस जामोद ने मतदान केंद्रों  की निगरानी, चेक पोस्टों की निगरानी वेबकास्टिंग तथा विधानसभावार मतदान प्रतिशत के प्रगति के संबंध में अनूपपुर जिले के कोतमा अनूपपुर एवं पुष्पराजगढ़ विधानसभा क्षेत्र के टीम से जानकारी प्राप्त की।  इय दौरान कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी आशीष वशिष्ठ, पुलिस अधीक्षक जितेंद्र सिंह पवाँर मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत तन्मय वशिष्ठ शर्मा संयुक्त आयुक्त (विकास) मगन सिंह कनेश, संयुक्त कलेक्टर दिलीप कुमार पाण्डेय सहायक कलेक्टर महिपाल सिंह गुर्जर सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। कमिश्नर शहडोल संभाग बी एस जामोद, पुलिस उप महानिदेशक डीसी सागर ने अनूपपुर जिले के भ्रमण के दौरान खैरहा और करकटी के मध्य छिरहटी के पास सड़क दुर्घटना में घायल पड़े व्यक्ति अपने वाहन से उपचार हेतु उपचार हेतु उप स्वास्थ्य केंद्र बुढ़ार भिजवाया तथा स्वास्थ्य के संबंध में हाल चाल पूंछा। इस प्रकार मानवीय संवेदना से दुर्घटना में घायल व्‍यक्ति का उपचार में सहयोग किया गया। 

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अखिल भारतीय प्रगतिशील लेखक संघ ने मनाया स्थापना दिवस

*फ़िलिस्तीनी मुक्ति संघर्ष, भारतीय संविधान व अंबेडकर आदि विषयों पर हुई परिचर्चा*


अनूपपुर

प्रलेस अनूपपुर ने 14 अप्रैल को एक कार्यक्रम आयोजित किया जिसमें प्रलेस के स्थापना दिवस के साथ ही फ़िलिस्तीनी मुक्ति संघर्ष तथा भारतीय संविधान और अंबेडकर आदि विषयों पर परिचर्चा हुई । यद्यपि अखिल भारतीय प्रगतिशील लेखक संघ की स्थापना 9 अप्रैल 1936 को लखनऊ में हुई थी लेकिन 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती थी अतः यह कार्यक्रम 14 अप्रैल के लिए तय किया गया । प्रगतिशील लेखक संघ के स्थापना की योजना सन् 1935 में लंदन के एक रेस्टोरेंट में बनी जब वहाँ पर सज्जाद ज़हीर, मुल्कराज आनंद, प्रमोद रंजन सेन गुप्ता, मुहम्मद दीन तासीर ज्योतिर्मय घोष, हाजरा बेगम तथा उनके कुछ अंग्रेज मित्रों ने गहन मंथन किया और प्रगतिशील लेखक संघ का एक प्राथमिक खाका तैयार किया । सज्जाद ज़हीर जब लंदन से भारत वापस लौटे तो उन्होंने कई प्रदेशों का दौरा कर वहाँ के लेखकों से संपर्क किया और प्रेमचंद से मंत्रणा कर के लखनऊ में 9 और 10 अप्रैल 1936 को एक सम्मेलन आयोजित किया गया जिसमें प्रगतिशील लेखक संघ की स्थापना की गई जिसमें प्रेमचंद ने अध्यक्षता की इसमें सज्जाद ज़हीर,मुल्कराज आनंद , कन्हैया लाल मुंशी सहित कई प्रसिद्ध लेखकों ने हिस्सा लिया पर कुछ बड़े लेखक इससे दूर रहे । निराला और रामविलास शर्मा लखनऊ में उपस्थित थे फिर भी इस कार्यक्रम में नहीं आए , जैनेंद्र कुमार को ज़रूर प्रेमचंद उस बैठक में ले गए पर इसके बाद जैनेन्द्र हमेशा ही इस संघ से दूर रहे । प्रेमचंद के अध्यक्षीय भाषण से प्रभावित होकर तमाम लेखकों ने इसकी सदस्यता ली और इस तरह से इसका गठन हुआ। 

प्रलेस का यह कार्यक्रम मंदाकिनी होटल में सायं 4 बजे से प्रारंभ हुआ । इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि की आसंदी से बोलते हुए इप्टा के राष्ट्रीय सचिव शैलेंद्र ने कहा कि “आज हम काफ़ी विषम परिस्थितियों में जी रहे हैं , राष्ट्र प्रेम और राष्ट्र भक्ति का पैमाना बदल दिया गया है और उस बदले हुए पैमाने की फ़्रेम पर कस कर हम राष्ट्र प्रेम को आंक रहे हैं । यदि हम राष्ट्र से प्रेम करते हैं तो राष्ट्र तो एक सौ चालिस करोड़ लोगों से मिलकर बना है इतना ही नहीं इस देश का सारा भू-भाग ,खेत-खलिहान , नदी-पर्वत, कल-कारख़ाने सब कुछ तो राष्ट्र में समाहित हैं तो हमें इन सब प्रेम होना चाहिए तभी तो हम सच्चे अर्थों में राष्ट्र से प्रेम कर सकेंगे । क्या ऐसा हो रहा है ? जाति , धर्म, संप्रदाय, रहन-सहन , भाषा- प्रांत आदि रूपों में विभाजित होकर यदि एक दूसरे से घृणा करेंगे तो प्रेम कहॉं रह जाएगा, फिर कैसा राष्ट्र प्रेम और कैसी राष्ट्र भक्ति । हमारे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, गांधी , नेहरू, पटेल, बोस, भगत सिंह आदि को एक दूसरे का विरोधी बता कर हम दोनों तरह की विचारधाराओं को समाप्त करने पर नहीं तुले हुए हैं  ? सभी की विचारधाराओं में भले अंतर रहा हो पर सभी का उद्देश्य पवित्र और नेक था और एक था , तो इन सब को ख़ारिज करके हम कौन सी विचारधारा का प्रतिपादन कर रहे हैं और किस लोकतंत्र की चर्चा हो रही है जो संविधान सम्मत है भी या नहीं । जब हम व्यथित होते हैं, तनाव में होते हैं, चिड़चिड़ाहट हम पर हावी होती है और थकान महसूस होती है तब हम मॉं की गोद में सिर रख कर लेटते हैं और उसका वात्सल्य पूर्ण हाथ हमें सहला रहा होता है तो हम पुनः शांत ,ऊर्जान्वित ,तनाव मुक्त और प्रसन्न हो उठते हैं ठीक उसी तरह की मनोदशा में जब हम गांधी के पास जाते हैं तो हमें शुकून मिलता है तो फिर हम गांधी को ख़ारिज कैसे कर सकते हैं ।राष्ट्र को संविधान सम्मत होना होगा, तभी संविधान की इज़्ज़त और रक्षा होगी । फ़िलिस्तीन का संघर्ष बहुत पुराना है यह यकायक पैदा नहीं हुआ , उसकी जड़ों में जाकर समस्या का पता लगाकर मोहब्बत से उसका हल ढूँढना होगा तभी उसका समाधान हो सकेगा।  

जब तक शैलेंद्र बोलते रहे , लोग मंत्रमुग्ध हो कर सुनते रहे । ऐसा लग रहा था कि काश समय ठहर जाए शैलेंद्र बोलते रहें और सब सुनते रहें और यह क्रम अनंत काल तक चलता रहे ।जब कक्ष में शैलेंद्र की आवाज़ गूंज रही थी फिर भी एक सन्नाटा पसरा था और कोई आवाज़ नहीं और कोई प्रतिक्रिया नहीं । शैलेंद्र की आवाज़ और श्रोताओं के कानों के बीच एक अजीब तादात्म्य स्थापित हो चुका था।

इस कार्यक्रम को विशिष्ट अतिथि दिलावर सिंह, ज़िला विधिक अधिकारी, कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉक्टर परमानंद तिवारी प्रलेस अध्यक्ष शहडोल के साथ ही अनंत के दास , भूपेश शर्मा , एडवोकेट बासुदेव चटर्जी, एडवोकेट विजेंद्र सोनी ने भी संबोधित किया । मीना सिंह ने अपने गीत से सबका मन मोह लिया ।आभार प्रदर्शन पवन छिब्बर ने किया और इस कार्यक्रम का संचालन गिरीश पटेल ने किया । इस अवसर पर राजेंद्र कुमार बियाणी, डॉक्टर करुणा सोनी , राउत राय , डॉक्टर असीम मुखर्जी,हीरा लाल राठौर शिवकान्त त्रिपाठी, चंद्रशेखर सिंह, रामनारायण पाण्डेय, आनंद पाण्डेय, एडवोकेट संतोष सोनी, रावेंद्रकुमार सिंह भदौरिया,पत्रकार अजीत मिश्रा, राम बाबू चौबे, सुदीप सोनी , एम एम मंसूरी , सी आई डी विभाग के प्रतिनिधि, आयुष सोनी और उनके साथी व अन्य अतिथि उपस्थित थे ।




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