विकासखंड में शिक्षा की बदहाली" की तस्वीर, शिक्षा का दोहरा सच बेली, महरोई में अकाल, कन्नाबहरा में शिक्षकों की भरमार 


उमरिया 

बिरसिंहपुर पाली के आदिम जाति कल्याण विभाग के विद्यालयों में शिक्षकों की पद स्थापना में व्यापक भर्रेशाही उजागर होकर सामने आई हैं। पाली विकासखंड में एक ओर बेली माध्यमिक  विद्यालय  जहाँ पर कक्षा 1 से 8 तक 102 छात्र अध्ययन रत है, इस विद्यालय में आज  सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे चल रहा है, वही पर दुसरी तरफ  पाली विकास खंड के ही  कन्नाबहरा विद्यालय में स्वीकृत पद से अधिक  शिक्षको की पद स्थापना ने आदिम जाति विभाग की कार्य शैली पर तीखे सवाल खड़े कर रहा है। बताया जाता है कि एक तरफ शिक्षकों का इस अकाल है कि प्राथमिक और माध्यमिक के लिए सिर्फ एक शिक्षक तो वही , दूसरी ओर अनुपात से अधिक शिक्षक पदस्थ करके रख दिया गया है।पाली विकास खंड के बेली माध्यमिक विद्यालय में कक्षा एक से पांच तक प्राथमिक खंड मु 72 आदिवासी छात्र और माध्यमिक में 30 छात्रों के साथ  हैं, 102 छात्र अध्ययन रत फिर भी अध्यापन के लिए  सिर्फ  एक शिक्षक । उसके ऊपर बी एल ओ,और छात्रावास का काम भी उन्ही शिक्षक के हवाले।  नियम के अनुसार यहां कम से कम  06 शिक्षकों की पद स्थापना   होनी  चाहिए।बिडम्बना ही कहा जाये की इसी आदिम जाति विभाग की कन्नाबहरा विद्यालय में  पहले से ही स्वीकृति पद भरे होने के बाद अतिरिक्त शिक्षक  पदस्थ कर दिया गया है। इसी तरह कन्नाबहरा के बगल के विद्यालय  महरोई आश्रम शाला पूरी तरह शिक्षक विहीन बनी हुई है और उसी से लगी अरहरिया दादर में सिर्फ एक शिक्षक पदस्थ हैं। 

सूत्रों का कहना है कि कन्नाबहरा विद्यालय शहडोल के समीप और मुख्य मार्ग पर होने के कारण शिक्षक वहां पदस्थ होने के लिए विभाग की खुशामद करते हैं। नतीजा ये कि जहां पहले से शिक्षक हैं वहां भी नए भेजे जा रहे हैं। बेली के अभिभावकों का कहना है "एक शिक्षक 8 कक्षाओं को कैसे पढ़ाएगा? आदिवासी बच्चों की पढ़ाई से किसी को मतलब नहीं है।"

स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने कलेक्टर उमरिया से मांग की है कि पूरे विकासखंड में युक्तियुक्तकरण कर शिक्षकों का समान वितरण किया जाए। शिक्षक विहीन स्कूलों में तुरंत पदस्थापना हो, ताकि बच्चों का भविष्य बर्बाद न हो। शिक्षा विभाग के अधिकारी इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं।

मोबाइल के बाद कीटनाशक दवा खरीदी के नाम पर ग्राम पंचायत ने किया गोल माल, सरकारी धन का दुरुपयोग


उमरिया

जिले की जनपद पंचायत करकेली की जरहा ग्राम पंचायत में वित्तीय अनियमितताओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बताया जाता है कि जरहा ग्राम पंचायत में फर्जी बिलों के जरिये तरह तरह के हथकंडे अपना कर ग्राम पंचायत के जिम्मेदारो ने शासकीय धन राशि का व्यापक रूप से दोहन किया है। अभी हाल में ही मोबाइल खरीदी की आग ठंडी भी नहीं हुई थी, कीटनाशक खरीदी का मामला ग्राम पंचायत की भष्ट कार्य शैली को बेपर्दा करके रख दिया है। जरहा ग्राम पंचायत में अब कीटनाशक दवा खरीदी कर यह साबित किया है कि ग्राम पंचायत की राशि पर ग्राम हितों से ज्यादा निजी हित साधने में उपयोग करना कोई अपराध नही है। इसी लिए जब जैसे मन हुआ राशि आहरण कर उसे फर्जी बिलों के सहारे निपटाने की जुगत की जा रही है, मालुम होवे की इस ग्राम पंचायत में  पहले  5वें राज्य वित्त से ₹19,500 का मोबाइल खरीदकर विवादों में आई पंचायत, अब 15 दिन के अंदर ₹10,235 के कीटनाशक खरीद के बिलों को लेकर सवालों के घेरे में है।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के पोर्टल से मिली जानकारी के अनुसार अक्टूबर 2025 में मिश्रा टेडर्स नामक दूकान से 2 बिलों के माध्यम से भुगतान किया गया है। मिश्रा टेडर्स के बिल क्र 37 दिनांक 15-10-25 से राशि 8100.00 व्यय मदो और बिल क्र 98 दिनांक 21-10-25 के जरिये 2135.00 पांचवे राज्य वित्त से व्यय कर खरीदी की गयी है, इस प्रकार कीटनाशक के नाम पर 10,235.00 रूपये की चपत लगायी गई है। जो आफिस एवं अन्य व्यय मदों के नाम पर की गयी है। ग्राम पंचायत में हो रही इस नियम विरूद्ध खरीदी ने ग्राम पंचायत पर बडे सवाल खड़े कर दिये है कि आखिर कार इस कीटनाशक की उपयोगिता क्या थी, क्या यह सामग्री पंचायत आयी भी की नहीं, अगर उपयोग किया गया तो उसके फोटो ग्राप कहा है, क्या खरीदी के मापदंडों का पालन किया गया आदि सवाल आज भी अनुत्तरित बने हुए है।

₹10,235 के कीटनाशक का छिड़काव जरहा की किन गलियों, नालियों या सार्वजनिक स्थानों पर किया गया? इसका स्टॉक रजिस्टर और फोटो कहां है। सरकारी खरीद के लिए टेंडर या कम से कम 3 कोटेशन अनिवार्य हैं। रिटेलर से सीधे भुगतान किस नियम के तहत हुआ?

ग्रामवासियों का कहना है कि "पहले मोबाइल के नाम पर तिजोरी खाली की, अब कीटनाशक के नाम पर। न कहीं कीट नाशक का  छिड़काव दिख रहा है, न सामान।इस तरह पंचायत के व्दारा शासकीय धन राशि का बेहद दुरुपयोग किया गया है।

ग्रामीणों ने कलेक्टर उमरिया और मुख्य कार्य पालन अधिकारी जनपद पंचायत करकेली से मांग की है कि जरहा पंचायत के वर्तमान सचिव  के कार्य काल की विस्तृत जांच जिसमें सभी निर्माण कार्य और  सभी बिलों की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।

जमीन के विवाद पर चचेरे भाई की साइबर साजिश, फर्जी इंस्टाग्राम बनाकर कर रहा था बदनाम


उमरिया

जिले के नौरोजाबाद थाना अंतर्गत ग्राम नरवार में जमीन विवाद ने रिश्तों की कड़वाहट को साइबर अपराध तक पहुंचा दिया। चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी कोई बाहरी व्यक्ति नहीं,बल्कि फरियादी का चचेरा भाई ही निकला। आरोप है कि उसने फरियादी के नाम और फोटो का इस्तेमाल कर फर्जी इंस्टाग्राम आईडी बनाई और उसी की पहचान बनकर लोगों को संदेश भेजने लगा। इस हरकत से फरियादी की सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित हुई और उसके कई व्यक्तिगत व सामाजिक काम भी बिगड़ गए। जानकारी के अनुसार फरियादी आशीष सोनी और आरोपी शिवम सोनी आपस में चचेरे भाई हैं। दोनों परिवारों के बीच लंबे समय से जमीन को लेकर विवाद चल रहा है। विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों परिवार अब गांव में अलग-अलग स्थानों पर घर बनाकर रह रहे हैं।आरोप है कि इसी रंजिश के चलते शिवम ने आशीष के नाम से इंस्टाग्राम पर फर्जी अकाउंट बनाया, प्रोफाइल में आशीष की फोटो लगाई और खुद को आशीष बताकर कई लोगों से बातचीत करने लगा।इससे परिचितों के बीच भ्रम की स्थिति बनी और फरियादी की छवि को नुकसान पहुंचा। फर्जी आईडी की जानकारी मिलने पर आशीष सोनी ने तत्काल नौरोजाबाद थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए डिजिटल साक्ष्यों और तकनीकी जांच के आधार पर आरोपी की पहचान की तथा शनिवार को उसके विरुद्ध अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(C) (पहचान संबंधी जानकारी का दुरुपयोग),66(D) (किसी अन्य का प्रतिरूप बनाकर ऑनलाइन धोखाधड़ी), 67 एवं 67(A) सहित भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं 336(2), 336(4), 318(2) और 319(2) के तहत प्रकरण दर्ज किया है। इन धाराओं का संबंध पहचान का दुरुपयोग,छलपूर्वक प्रतिरूप धारण कर धोखाधड़ी,साइबर माध्यम से अपराध करने और संबंधित दंडनीय कृत्यों से है। पुलिस के अनुसार विवेचना के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर धाराओं की अंतिम प्रयोज्यता तय की जाएगी। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि यदि उनके नाम,फोटो या पहचान का सोशल मीडिया पर कोई फर्जी अकाउंट बनाया जाए तो तुरंत संबंधित प्लेटफॉर्म,स्थानीय पुलिस या साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत करें।किसी अन्य की पहचान का दुरुपयोग कर उसे बदनाम करना या लोगों को गुमराह करना गंभीर साइबर अपराध है,जिसके लिए कानून में कड़ी सजा का प्रावधान है।

सरपंच-सचिव पर ठेकेदारी का आरोप,  निर्माण मे मिट्टी मिली रेत का उपयोग, ग्रामीणों ने रोका काम


उमरिया

जिले के विकासखंड मानपुर की ग्राम पंचायत बड़खेरा के वार्ड क्र. 19 में बन रही पुलिया की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे हैं। ग्रामीणों की शिकायत और मौके के वायरल वीडियो में आरोप है कि पुलिया में अच्छी रेत की जगह नाली की मिट्टी मिली सामग्री का उपयोग किया जा रहा है।

वीडियो में साफ दिख रहा है कि सरिया के ऊपर मशीन से पतला मसाला डाला जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह काम सरपंच पुष्पमनी सिंहबऔर सचिव धीरज लाल की मिलीभगत से उनके करीबी ठेकेदार द्वारा करवाया जा रहा है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि पंचायत में कुआं खनन समेत सभी काम ठेके पर हो रहे हैं।

मौके पर ग्राम पंचायत के जागरूक नागरिक  बड़ी संख्या में जुटे और उन्होंने इस गुणवत्ता हीन काम को  रोकने की मांग की। ग्रामीणों ने कहा कि "इस तरह की पुलिया एक बारिश में बह जाएगी और शासकीय राशि का दुरुपयोग होगा   । बताया जाता है कि इस पुलिया की लागत अनुमानित  दस लाख है इतनी धन राशि में गुणवत्ता युक्त और टिकाऊ पुलिया का निर्माण हो सकता है, जो ग्रामीणों के लिए दशकों का सहारा बनेगी,लेकिन  यह पुलिया बेहद घटिया युक्त सामग्री और गुणवत्ता हीन बनायी जा रही है। ।

ग्रामवासियों ने कलेक्टर उमरिया और  मानपुर के मुख्य कार्य पालन अधिकारी से मांग की है  पुलिया निर्माण की तत्काल जांच और दोषियों पर वैधानिक  कार्रवाई की मांग की गयी है।

विद्यालय में बड़ा खेल? फर्जी आवक रजिस्टर, गायब आवेदन और अतिथि शिक्षक भर्ती में कथित धांधली का खुलासा

*"आवेदन गायब करो, फिर कहो मिला ही नहीं" — अभ्यर्थी का गंभीर आरोप*

*फिर से हुई अतिथि शिक्षक भर्ती में गड़बड़ी तो अन्य कई गंभीर मुद्दों के साथ हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की चेतावनी*


उमरिया

जिले के बिरसिंहपुर पाली क्षेत्र के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय शाहपुर एक बार फिर गंभीर विवादों के केंद्र में है। अतिथि शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के बाद अब विद्यालय में आवेदन प्राप्त करने और अभिलेख संधारण की व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अभ्यर्थी दिलीप कुमार द्विवेदी ने आरोप लगाया है कि विद्यालय में प्राप्त होने वाले आवेदनों को नियमित शासकीय अभिलेख में दर्ज न कर कथित रूप से एक अलग रजिस्टर में दर्ज किया जाता है, ताकि बाद में आवेदन प्राप्त होने से ही इनकार किया जा सके।

आवेदक के अनुसार, 8 जुलाई 2026 को आवेदन जमा करने के बाद पावती देने से मना कर दिया गया। विद्यालय के भृत्य ने कथित रूप से कहा कि विद्यालय की सील और रजिस्टर प्रभारी प्राचार्य के पास हैं, इसलिए उनके आने के बाद ही पावती मिलेगी। वहीं जब प्रभारी प्राचार्य श्री सिंह परस्ते से दूरभाष पर संपर्क किया गया तो उन्होंने कथित रूप से कहा कि सील और आवक-जावक रजिस्टर उनके पास नहीं, बल्कि विद्यालय में ही रहते हैं। दोनों कथनों में विरोधाभास ने पूरे मामले को संदेह के घेरे में ला दिया।

आवेदक का कहना है कि 10 जुलाई 2026 को पावती मांगने पर प्रभारी प्राचार्य की मौजूदगी में कंप्यूटर ऑपरेटर से आवेदन दर्ज कराया गया। इसके बाद जो पावती दी गई, उसमें आवक की सील के स्थान पर जावक की सील लगी थी। इतना ही नहीं, रजिस्टर में आवक क्रमांक 03 दर्ज था, जबकि पावती पर 031 अंकित किया गया था बाद में उसे कंप्यूटर ऑपरेटर द्वारा सुधारा गया इससे अभिलेखों की प्रामाणिकता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि कथित रूप से प्रमाणित रजिस्टर में जनवरी 2025 से जुलाई 2026 तक केवल तीन पत्र ही दर्ज मिले। यदि यह सही है, तो इतने लंबे समय में विद्यालय को क्या  केवल तीन ही पत्र  प्राप्त हुए? अन्य आवेदन कहाँ गए? आवेदक का आरोप है कि पहले भी उसके कई आवेदन गायब कर दिए गए और बाद में अधिकारियों के समक्ष यह कह दिया जाता है कि आवेदन मिला ही नहीं।

आवेदक ने यह भी दावा किया है कि संभागीय जांच समिति की रिपोर्ट में अतिथि शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में नियमों के उल्लंघन, पुराने वैध पैनल की उपेक्षा तथा भर्ती में गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में विद्यार्थियों को होम एग्जाम में कथित रूप से अनियमित तरीके से उत्तीर्ण कराने जैसे मामलों का भी उल्लेख होने का दावा किया गया है।

ग्रामीणों द्वारा प्रभारी प्राचार्य पर पैसे लेकर विद्यार्थियों को पास कराने जैसे आरोप लगाए जाने की बात भी सामने आई है। आवेदक का कहना है कि संभाग स्तरीय गठित जांच के जांच रिपोर्ट में भी कई मामलों में अनियमितताएं उजागर हुई हैं।

दिलीप कुमार द्विवेदी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सत्र 2026-27 की अतिथि शिक्षक भर्ती में फिर से किसी प्रकार की अनियमितता हुई तो प्रभारी प्राचार्य, एसएमडीसी अध्यक्ष, सचिव, संबंधित सदस्यों तथा जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध उच्च न्यायालय में याचिका दायर की जाएगी और संपूर्ण अभिलेख न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे। वरिष्ठ अधिकारियों को इस संबंध में जानकारी दी जा चुकी है।

*अब उठ रहे हैं बड़े सवाल*

क्यों विद्यालय में शासकीय आवक रजिस्टर के स्थान पर कोई अलग बिना प्रमाणित रजिस्टर उपयोग में लाया जाता रहा, आपत्ति करने पर रजिस्टर को केवल पेज संख्या के आधार पर प्रमाणित किया गया।जनवरी 2025 से जुलाई 2026 तक केवल तीन आवेदन दर्ज होने का कारण क्या है। आवेदन की पावती देने में देरी और सील संबंधी विरोधाभास क्यों सामने आया। क्यों आवक की जगह जावक का शील लगाया गया। क्या इतने वर्षों में 3 पत्रों के अलावा विद्यालय में कोई पत्र व्यवहार नहीं हुआ। अतिथि शिक्षक भर्ती में जांच रिपोर्ट में अनियमितताओं का उल्लेख है, तो जिम्मेदारों पर अब तक ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई? प्रभारी प्राचार्य श्री सिंह परस्ते का सिर्फ वेतन वृद्धि भर  रोकना क्या पक्षपात नहीं है।

जांच रिपोर्ट में अतिथि शिक्षक भर्ती में धांधली उजागर हुई है और अन्य कई अनियमिताएं सामने आई है तो उनके पद पर बने रहना क्या न्यायसंगत है जबकि विद्यालय में उनसे दो वरिष्ठ उच्च माध्यमिक शिक्षक है। सहायक आयुक्त उमरिया को इसकी जानकारी दी गई लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं आया।

जिला पंचायत का अजब कारनामा, आखिर एक पखवाड़े में सचिवों मिली पूर्व पंचायत की की चाबी


उमरिया

जिले में तबादला नीति तमाशा बनकर रह गई है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा एक महीने के अंदर जारी किए गए दो आदेशों में 2 सचिवों को 23 दिन के भीतर ही उनकी पूर्व पदस्थ ग्राम पंचायतों में वापस भेज दिया गया है। जिला पंचायत के मुख्य कार्य पालन अधिकारी अभय सिंह ओहरिया के व्दारा जारी आदेश 15 जून 2026 और 8 जुलाई 2026 के आदेशों ने न सिर्फ तबादला नीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि एक जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी की कार्यशैली को भी कठघरे में ला खड़ा किया है। 

जब छोटे-छोटे मसले पर प्रशासनिक अधिकारियों की इस तरह की कार्य शैली ने अपने ही आदेशों को लागू करने और कराने में जिस तरह की ढुल मुल रवैया से जिला पंचायत की साख को दांव पर लगा कर रख दिया है। जब जिला प्रशासन के वरिष्ठ  अधिकारी ही अपने आदेशों को ही कपड़ों की तरह बदलते देखे जाते हैं, तब मातहत अधिकारियों और निचले स्तर के कर्मचारियों के व्दारा किये जा रहे कार्यशैली पर आखिर रोक कौन लगाएगा ?

जिला पंचायत उमरिया के व्दारा जारी 15 जून को जारी आदेश में श्याम लाल विश्वकर्मा को सलैया -13 से चांद पुर किया गया था, जिसे उच्च न्यायालय जबलपुर के पारित आदेश के चलते पुनः सलैया - 13 में पदस्थ किया गया है, जिससे साफ जाहिर होता है कि पहले किया गया तबादला आदेश नियम विरूद्ध था, इससे भी आश्चर्य जनक आदेश कमलेश चौधरी का देखने में आया है, जिसमें पहले आदेश में पठारी ग्राम पंचायत से हटा कर दुलहरी ग्राम पंचायत किया गया है, फिर दुसरे आदेश में दुबारा पठारी ग्राम पंचायत में तैनात कर दिया गया है। पल पल बदलते आदेशों से जिला पंचायत की किरकिरी करके रख दिया है। 

सूत्रों बताते है कि जिला पंचायत में तबादला नीति उद्योग बनकर रह गई है। आप अपनी मर्जी से पसंदीदा ग्राम पंचायत में तबादला करा सकते हैं, बशर्ते "आपकी मुराद के साथ हमारी मुराद पूरी होनी चाहिए"।जिला पंचायत के इस तबादला सूची के प्रकाश में आने के बाद यह साबित हो गया है कि किसी सचिव को दो-दो ग्राम पंचायत का प्रभार, तो किसी को जनपद में तैनाती के आदेशों ने जिला पंचायत की "ढोल की पोल" खोल कर रख दी है। अब देखना होगा कि ऐसे हर पल आदेशों पर  कलेक्टर और प्रदेश स्तरीय  पंचायत विभाग इस "आवागमन" वाले तबादला खेल पर क्या कार्रवाई करते हैं।

गांव में प्रसूता को गोद में उठाकर 2 किलोमीटर पैदल ले गए परिजन, विकास कार्यों पर उठे सवाल


उमरिया

एक ओर पूरी दुनिया चांद पर मानव बस्ती बसाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है, वहीं देश के कई गांव आज भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। यह केवल संसाधनों की कमी का नहीं, बल्कि योजनाओं के कमजोर क्रियान्वयन और निचले स्तर पर व्याप्त भ्रष्टाचार का भी परिणाम माना जा रहा है। ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन कई गांवों की जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है।

ऐसा ही मामला उमरिया जिले की चंदिया तहसील के बैगा बाहुल्य ग्राम देवरा में सामने आया है। यहां सड़क के अभाव में प्रसव पीड़ा से तड़प रही एक गर्भवती महिला को उसके परिजनों ने गोद में उठाकर करीब दो किलोमीटर तक कच्चे और दुर्गम रास्ते से पैदल चलकर मुख्य सड़क तक पहुंचाया। इसके बाद हाईवे से वाहन की व्यवस्था कर महिला को अस्पताल ले जाया गया।

घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार सड़क निर्माण की मांग की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। बरसात के मौसम में हालात और भी बदतर हो जाते हैं, जिससे मरीजों, गर्भवती महिलाओं और स्कूली बच्चों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

यह घटना एक बार फिर ग्रामीण विकास योजनाओं के क्रियान्वयन और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही पर सवाल खड़े करती है। यदि समय रहते गांव तक सड़क जैसी बुनियादी सुविधा उपलब्ध करा दी जाती, तो प्रसूता और उसके परिजनों को इस तरह जान जोखिम में डालकर सफर करने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ता। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल सड़क निर्माण कराने और दोषियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।

व्यापारी से 50 लाख की मांगी रंगदारी, मामला हुआ दर्ज, जंगल मे मिला मांसाहारी जानवर का कंकाल


उमरिया 

जिले में कबीर बिल्डकॉन के संचालक और बड़े व्यापारी विनोद आहूजा से 50 लाख की रंगदारी (अवैध वसूली) मांगने का मामला सामने आया है। पुलिस ने शुरुआती जांच में आरोपों को सही पाते हुए आरोपी विकास सचदेव के खिलाफ एक्सटॉर्शन का मामला दर्ज कर लिया है।

व्यापारी विनोद आहूजा ने एसपी को शिकायत में बताया था कि विकास सचदेव लगातार उनके खिलाफ झूठी शिकायतें कर रहा था। आहूजा के मुताबिक, उन्होंने शासन और उच्च न्यायालय स्तर पर हुई सभी जांचों में हमेशा सहयोग किया, लेकिन इसके बावजूद शिकायतें बंद नहीं हुईं।इसके बाद विकास सचदेव ने एक रात उनसे मुलाकात की और कहा कि अगर वे 50 लाख रुपए दे दें, तो वह अपनी सभी शिकायतें वापस ले लेगा। व्यापारी ने इस धमकी को अपनी जान-माल की सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए पुलिस से कार्रवाई की गुहार लगाई थी।  आरोपी विकास सचदेव के विरुद्ध एक्सटॉर्शन सहित संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

*जंगल मे मांसाहारी जानवर का मिला कंकाल*


उमरिया जिले के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के ताला परिक्षेत्र की मझखेता बीट में मानसूनी गश्त के दौरान एक मांसाहारी जंगली जानवर का कंकाल मिला है। घने और दुर्गम जंगल में कंकाल मिलने की खबर से वन विभाग में हड़कंप मच गया, जिसके बाद आला अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंच गए।

कंकाल मिलने की सूचना मिलते ही क्षेत्र संचालक (फील्ड डायरेक्टर), उप संचालक और वन्यप्राणी स्वास्थ्य अधिकारी अपनी टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। मामले की गंभीरता को देखते हुए पूरे इलाके में डॉग स्क्वाड (खोजी कुत्तों) की मदद से सर्चिग कराई गई और पूरे क्षेत्र की मेटल डिटेक्टर से भी जांच की गई, ताकि कोई संदिग्ध चीज न छूटे। डॉक्टर ने शुरुआती जांच के बाद इसके बाघ (टाइगर) का कंकाल होने की आशंका जताई है। अधिकारियों के सामने कंकाल का बारीकी से मुआयना किया गया। यह पता लगाने के लिए कि यह कंकाल किस प्रजाति का है और नर का है या मादा का, कंकाल का अंतिम संस्कार कर दिया गया।

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की स्पेशल टीम इस पूरे मामले की जांच कर रही है। अब लैब की वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि यह कंकाल असल में किस बाघ का था, उसकी उम्र क्या थी और उसकी मौत किन हालातों में हुई थी।

रेलवे के निर्माण कार्यों में जांच के नाम पर खानापूर्ति, करोड़ों के निर्माण कार्यों पर उठे गंभीर सवाल 

*भ्रष्टाचार व रेल संरक्षा से समझौते के आरोप*


उमरिया

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, बिलासपुर मंडल के अंतर्गत कटनी–बिलासपुर मुख्य रेलखंड पर बंधवावारा–घुनघुटी सेक्शन (किमी 922 से 924) के बीच करोड़ों रुपये की लागत से कराए जा रहे नाली निर्माण एवं सेस रिपेयर कार्यों में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद भी जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। स्थानीय नागरिकों, रेलवे कर्मचारियों एवं तकनीकी जानकारों का आरोप है कि स्पष्ट शिकायतों, समाचार प्रकाशन एवं उपलब्ध साक्ष्यों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने न तो निर्माण सामग्री की निष्पक्ष जांच कराई और न ही कार्य की तकनीकी गुणवत्ता का वास्तविक परीक्षण कराया जा रहा है। 

*मिट्टीयुक्त रेत, बिना कम्पेक्शन और कागजों में पूरा काम*

आरोप है कि रेलवे ट्रैक के समानांतर बनाई जा रही नाली में स्वीकृत गुणवत्ता वाली साफ रेत के स्थान पर मिट्टीयुक्त एवं निम्न गुणवत्ता की रेत का उपयोग किया गया। वहीं इसी स्थान पर हुए सेस रिपेयर कार्य में भी निर्धारित मानकों के अनुरूप कम्पेक्शन नहीं किया गया। कई स्थानों पर केवल औपचारिक रूप से मिट्टी डालकर कार्य पूर्ण दर्शा दिया गया, जबकि वास्तविक गुणवत्ता सुनिश्चित नहीं की गई। आरोप यह भी है कि जिन कार्यों का निष्पादन पूर्ण रूप से नहीं हुआ, उनका भी मापन पुस्तिका (एमबी/एमडीओ) के आधार पर भुगतान कर दिया गया।

*अवैध रेत उत्खनन और राजस्व की क्षति के आरोप*

स्थानीय लोगों के अनुसार निर्माण कार्य में उपयोग की गई रेत बाजार से नहीं खरीदी गई, बल्कि आसपास के बरसाती नालों जो की रौगढ बीट के क्षेत्र में आते हैं उन नालो से रात के समय अवैध उत्खनन कर सीधे निर्माण स्थल तक पहुंचाई गई। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल सरकारी राजस्व की हानि ही नहीं, बल्कि पर्यावरणीय नियमों और खनिज अधिनियम का भी गंभीर उल्लंघन माना जाएगा।

*रेल संरक्षा पर मंडरा रहा खतरा*

विशेषज्ञों का कहना है कि रेलवे ट्रैक के समीप होने वाले प्रत्येक निर्माण कार्य में उच्च गुणवत्ता की सामग्री एवं निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन अनिवार्य होता है। कमजोर निर्माण, अपर्याप्त कम्पेक्शन अथवा घटिया सामग्री के उपयोग से वर्षा के दौरान कटाव, धंसान एवं ट्रैक की स्थिरता प्रभावित हो सकती है, जिससे भविष्य में रेल परिचालन और यात्रियों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।

*जांच के नाम पर केवल औपचारिकता?*

सूत्रों का दावा है कि शिकायतों और समाचार प्रकाशन के बाद अधिकारियों द्वारा जांच तो की गई, लेकिन न तो सामग्री के नमूने लिए गए, न प्रयोगशाला परीक्षण कराया गया और न ही स्वतंत्र तकनीकी एजेंसी से गुणवत्ता का मूल्यांकन कराया गया। आरोप है कि जांच केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रही, जिससे पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

*विजिलेंस की भूमिका भी सवालों के घेरे में*

रेलवे में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी इंजीनियरिंग विभाग, गुणवत्ता नियंत्रण इकाई तथा विजिलेंस तंत्र की होती है। इसके बावजूद यदि इतने गंभीर आरोपों के बाद भी प्रभावी कार्रवाई नहीं होती, तो संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली भी स्वतः संदेह के घेरे में आ जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा तथा रेल संरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है।

*उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच की मांग*

क्षेत्रीय नागरिकों एवं रेलवे कर्मचारियों ने रेल मंत्रालय, रेलवे बोर्ड, तथा दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक से मांग की है कि पूरे मामले की किसी स्वतंत्र एवं उच्च स्तरीय तकनीकी समिति से जांच कराई जाए। साथ ही निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, कम्पेक्शन टेस्ट, मापन पुस्तिकाओं, भुगतान अभिलेखों एवं अवैध रेत उत्खनन के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों एवं संबंधित एजेंसियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

अवैध मुरूम उत्खनन पर कार्रवाई, 3 डंपर, 1 टेलर, 1 पोकलेन जब्त, जिला सीईओ ने सरपंच को किया पद से पृथक


उमरिया

जिले में अवैध उत्खनन के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नौरोजाबाद थाना क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग-43 के किनारे चल रहे मुरूम के अवैध उत्खनन पर शिकंजा कस दिया। पाली एसडीएम मीनाक्षी बंजारे के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई में टीबीसीएल कंपनी के तीन डंपर, एक टेलर और एक पोकलेन मशीन मौके से जब्त की गई। कार्रवाई के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया।

प्रशासन को सूचना मिली थी कि एनएच-43 के किनारे बिना वैध अनुमति के मुरूम का उत्खनन किया जा रहा है। सूचना मिलते ही पाली एसडीएम मीनाक्षी बंजारे अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचीं। निरीक्षण के दौरान वहां भारी मशीनों से मुरूम की खुदाई और डंपरों में भरकर परिवहन की तैयारी होती मिली।

एसडीएम ने मौके पर मौजूद कंपनी के कर्मचारियों से उत्खनन से संबंधित अनुमति, खनिज विभाग की स्वीकृति और परिवहन से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा। हालांकि कंपनी की ओर से कोई भी वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया जा सका। दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने पर प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए तीन डंपर और एक पोकलेन मशीन को जब्त कर लिया।

प्रशासन का कहना है कि बिना वैध अनुमति किसी भी प्रकार का खनिज उत्खनन नियमों का उल्लंघन है। प्रारंभिक जांच में मामला अवैध उत्खनन का प्रतीत होने पर सभी वाहनों को जब्त कर अग्रिम कार्रवाई शुरू कर दी गई है। संबंधित विभागों से भी इस मामले में आवश्यक जानकारी जुटाई जा रही है।

*जिला सीईओ ने सरपंच को किया पद से पृथक*

उमरिया सीईओ जिला पंचायत अभय सिंह ने मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 40 का प्रयोग करते हुए नन्हू सिंह सरंपच ग्राम पंचायत गिंजरी, जनपद पंचायत पाली को कर्तव्यों के प्रति घोर उपेक्षा किए जाने पर पद से पृथक कर दिया है।विदित हो कि ग्राम पंचायत गिंजरी जनपद पंचायत पाली अंतर्गत महात्मा गांधी राश्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना से वित्तीय वर्श 2025- 26 में स्वीकृत कार्य अमृत सरोवर जोगी नाला ग्राम बरबसपुर ग्राम पंचायत गिंजरी के संबंध में सियाराम महरा ग्राम बरबसपुर व्दारा सीपी ग्राम पोर्टल पर ट्रेक्टर ट्राली कि भाडा राशि 219300 लगभग 8 माह से भुगतान हेतु लंबित है। आवेदन पत्र व कलेक्टर, कमिश्नर जनसुनवाई मे आवेदन किया गया , किंतु ग्राम पंचायत में राशि उपलब्ध होने के पश्चात भी सरपंच एवं सचिव व्दारा भुगतान नही किया गया। जिस पर यह कार्यवाही की गई है।

चीतल को केला खिलाना पड़ा भारी, वन विभाग ने किया गिरफ्तार


उमरिया

जिले के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में वन्य जीवों के प्रति लापरवाही और नियमों की अनदेखी का मामला सामने आया था। एक पर्यटक कार से उतरकर चीतल को केला खिलाता नजर आया। इस पूरी घटना का वीडियो वहां मौजूद एक अन्य व्यक्ति ने अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इस वीडियो के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन के संज्ञान में आते ही अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू की और संबंधित व्यक्ति की पहचान कर उसे तलाश लिया। वन विभाग ने उसके खिलाफ वन्य जीव संरक्षण संबंधी विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज करते हुए आरोपी बनाया और उसे न्यायालय में पेश किया। वायरल वीडियो में जिस स्थान पर केला खिलाया गया, उस स्थान की पहचान बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के मगधी गेट के सामने की हुई। चीतल को केला खिलाते हुए वीडियो सोशल मीडिया के माध्यम से बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन के संज्ञान में आया था। बांधवगढ़ प्रबंधन ने उक्त वीडियो को संज्ञान में लेते हुए तत्काल जांच प्रारम्भ की जिसके फलस्वरूप अनूप मिश्रा ग्राम बेलिया बड़ी, तहसील कोतमा, जिला अनूपपुर को 06 जून को वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की संबंधित धाराओं को अधिरोपित करते हुए आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया। 

संजय गाँधी ताप परियोजना के रख रखाव के नाम पर चल रहा खेल, इकाई 3-4 के मरम्मत कार्य पर उठे गंभीर सवाल


उमरिया

संजय गांधी थर्मल पावर प्लांट बिरसिंहपुर पाली में एक बार फिर  से अनियमितताओं की गूंज उत्पादन केन्द्र से परियोजना के बाहर सुनाई दे रही है। विश्वासनीय  सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार यूनिट क्रमांक 3/4 में चल रहे मरम्मत कार्यों में तकनीकी मानकों की अनदेखी कर परियोजना को लाखों रुपये की चपत लगने की बात बतायी जा रही है। विदित होवे की इकाई क्र तीन चार के मरम्मत कार्य इन दिनों चल रहा है । मालुम होवे की इकाई क्र चार पिछले पांच माह से बेक्र डाऊन चल रही है। जिसके टरबाइन में खराबी बतायी जा रही है। 

सूत्रों का दावा है कि बंकर मरम्मत कार्य के तहत क्षतिग्रस्त स्टील प्लेटों को पूरी तरह हटाकर नई प्लेटें लगाने का प्रावधान था ,लेकिन   पुरानी प्लेटों को बदलने की जगह उसके खराब भाग की  कटिंग कर टूकडो में प्लेट लगाकर थेंगरी लगाने का काम किया जा रहा है। परियोजना में मरम्मत कार्य में लग रहें इन कथित आरोपों के अनुसार मरम्मत कार्य में  गुणवत्ता से समझौता कर कार्य को पूरा दिखाने की कोशिश की जा रही है जिससे भविष्य में संयंत्र की सुरक्षा और कार्यक्षमता भी प्रभावित हो सकती है।

प्लांट के गलियारों में यह चर्चा भी जोरों पर है कि बड़े नाम वाली कंपनियों को ठेके दिए जाने के बाद वास्तविक कार्य स्थानीय स्तर के ठेकेदारों से कराया जाता है। यदि जांच में यह तथ्य सही पाए जाते हैं तो ठेका प्रक्रिया गुणवत्ता नियंत्रण और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग सकते हैं। परियोजना में घटिया मरम्मत कार्य की इन मुखरित खबरों से क्षेत्र के लोगों और कर्मचारियों का कहना है कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय तकनीकी एवं वित्तीय जांच कराई जाए। 

 सचिव ने दी धमकी, सरपंच व पंचो ने प्रभारी मंत्री से की तबादले की मांग, युवती से दुष्कर्म, आरोपी गिरफ्ताऱ


उमरिया

जन कल्याण शिविर अमिलिहा में उमरिया जिले के प्रभारी मंत्री नागर सिंह चौहान को बेली ग्राम पंचायत की आदिवासी महिला सरपंच श्रीमती केमली बाई ने पंचो सहित उपस्थित होकर सचिव के मनमानी कार्य शैली, अनियमितताओं, और शासकीय धन राशि के अपव्यय की राम कहानी सुनाई, साथ ही मय पंचो के एक आवेदन पत्र देकर तबादले की मांग की थी, जिस पर प्रभारी मंत्री ने कलेक्टर उमरिया को आवेदन देते हुए निर्देश दिए गए थे कि तत्काल इस सचिव को अटैच करते हुए अन्य को प्रभार दे, लेकिन जन कल्याण शिविर संपन हुए एक पखवाड़ा व्यतीत हो गयें, प्रभारी मंत्री के निर्देश का पालन करना कलेक्टर उमरिया ने उचित नहीं समझा।

ध्यान देने योग्य है कि  12 पंचीय बेली ग्राम पंचायत सचिव की कार्य प्रणाली से तंग सरपंच, उप सरपंच सहित 10 लोगों ने उपस्थित होकर जन कल्याण शिविर में कलेक्टर उमरिया और प्रभारी मंत्री के समक्ष शिकायत दर्ज करायी गयी थी फिर भी न जाने की प्रशासनिक व्यवस्था में ग्राम पंचायत सचिव को हटाने में इतनी बड़ी क्या बाधा उत्पन्न हो रही है कि जन कल्याण शिविर की मंशा पर पानी फेरते हुए सरपंच की मांग और प्रभारी मंत्री के निर्देश सभी को धत्ता बताते हुए सचिव को अभय कर दिया गया है। बताया जाता है की जन कल्याण शिविर में उठी इस मांग पर अब तक न जांच प्रक्रिया शुरू हुई और ना ही सचिव को वहाँ से हटाया गया। 

*सचिव ने शिकायतकर्ताओं को दी धमकी* 

बेली ग्राम पंचायत के सचिव ने अपना तांडव शुरू कर दिया है। बताया जाता है वह शिकायत कर्ताओं को झूठे आरोपों में फंसाने की खुली धमकी देते हुए कहा कि आप मेरी शिकायत करते हो मैं आपके विरूद्ध मान हानि के मामले के साथ ऐसे मामले में फंसाऊगा की कोई भी बचा नहीं सकता। सचिव के इस धमकी से ग्राम पंचायत में और ही असंतोष के श्वर मुखर हो गयें है। बताया जाता है कि बेली में पदस्थ यही सचिव इसके पहले इसी जनपद के गोयरा ग्राम पंचायत में शासकीय धन राशि के आरोप में लगभग एक वर्ष से ज्यादा समय तक निलंबित रहे हैं।

*युवती से दुष्कर्म, मामला दर्ज कर आरोपी गिरफ्ताऱ*

उमरिया जिले के चंदिया थाने की निवासी 19 वर्षीय युवती ने अपने माता-पिता के साथ थाना पंहुचकर घर में रुके रिश्तेदार के द्वारा जबरन दुष्कर्म किये जाने की शिकायत दर्ज कराई है। एसडीओपी पी एल परस्ते ने बताया है की पीड़िता की शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपी इस्तियाक मौलाना के विरुद्ध दुष्कर्म की धाराओं में एफआईआर दर्ज कर उसे गिरफ्ताऱ कर लिया है। आरोपी के द्वारा इस जघन्य वारदात को अंजाम दिए जाने के बाद पीड़िता को गंभीर अवस्था में जिला अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है।

50 लाख रुपये की रंगदारी माँगने व जान से मारने पर युवक पर लगा आरोप, एसपी को सौपा ज्ञापन 


उमरिया

जिला मुख्यालय उमरिया के आहूजा परिवार ने खलेसर होंडा एजेंसी के पास निवासी विकास सचदेव के विरुद्ध पुलिस अधीक्षक उमरिया को शिकायत सौंपकर 50 लाख रुपये की कथित रंगदारी मांगने तथा जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है। परिवार ने मामले की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

शिकायत के अनुसार, आहूजा परिवार का कहना है कि वर्ष 2023 से विकास सचदेव द्वारा विभिन्न विभागों में उनके विरुद्ध लगातार शिकायतें की जा रही हैं। परिवार का आरोप है कि पूर्व में भी उनसे 25 लाख रुपये की मांग की गई थी, जिसके संबंध में मामला न्यायालय में विचाराधीन है।

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि 27 जून की रात जैन मंदिर के पास विकास सचदेव ने कथित रूप से चंद्रप्रकाश आहूजा का रास्ता रोककर 50 लाख रुपये की मांग की। आरोप है कि राशि नहीं देने पर परिवार के सदस्यों के विरुद्ध विभिन्न विभागों एवं सीएम हेल्पलाइन में शिकायतें करने तथा गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई।

आहूजा परिवार का कहना है कि उनके विरुद्ध विभिन्न विभागों में की गई शिकायतों की जांच में उन्हें राहत मिली है। परिवार का यह भी दावा है कि संबंधित मामलों में उन्हें सक्षम प्राधिकारों एवं न्यायालय से अनुकूल निर्णय प्राप्त हुए हैं। पीड़ित परिवार ने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर तथ्यों के आधार पर विधि सम्मत कार्रवाई की जाए।

ज्वाला धाम ने पंचायत के गौशाला पर किया कब्जा, कलेक्टर से हुई शिकायत, कार्यवाही की मांग


उमरिया

ज्वाला धाम ऊंचेहरा  की हडप नीति का कारनामा ऊंचेहरा ग्राम पंचायत से बढकर निपनिया ग्राम पंचायत को भी अपने गिरफ्त में ले लिया है। विदित होवे की निपनिया ग्राम पंचायत में बनी गौशाला पर अतिक्रमण करते हुए ज्वाला धाम ने अपने कब्जे में ले लिया है। विदित होवे की निपनिया ग्राम पंचायत की वर्क आई डी 174000 2080/A v/1/ 22012034514047 के लागत 38 लाख 5 हजार से प्रारंभ कराया गया था, जो गौशाला। लगभग बनकर तैयार हो गया है, लेकिन इस गौशाला को ग्राम पंचायत निपनिया के व्दारा शासकीय गौशाला को ज्वाला धाम के हवाले कर दिया गया है। ज्वाला धाम और ग्राम पंचायत के सरपंच की इस मिलीभगत के कारण न सिर्फ शासकीय धन राशि के दुरुपयोग करने का मामला है बल्कि साथ ही मध्यप्रदेश शासन की गौशाला के उद्देश्य को भी पलीता लगता दिखाई दे रहा है।

इस बात की शिकायत निपनिया ग्राम पंचायत के आंनद कुमार गौतम ने कलेक्टर उमरिया की जन सुनवाई में करते हुए अतिक्रमित गौशाला को मुक्त कराने का आवेदन पत्र दिया गया है। इस बात की शिकायत जन कल्याण शिविर करकेली में भी करते हुए अनुविभागीय अधिकारी राजस्व अम्बिकेश प्रताप से की गयी है, यद्यपि इस मामले में प्रशासन ने  फिलहाल अब तक कोई जांच कार्यवाही नहीं की है। 

शासकीय गौशाला जो मध्यप्रदेश शासन व्दारा निपनिया में बनाया जा रहा था, चूंकि इसके निर्माण से ही ज्वाला धाम समिति कब्जा कर रखी थी, जिस वजह से इस गौशाला के नाम पर दान दाताओं से भी जमकर वसूली की जाने की बातें बतायी जा रही हैं। बताया जाता है कि गौशाला परिसर ज्वाला धाम से साफ तौर पर दिखाई दे रहा था, जिसको दिखाकर चंदा एकत्रित करने का गोरख धंधा भी खूब चला। हलांकि इसके कोई कागजी प्रमाण नहीं है।

मालुम होवे की ज्वाला धाम की प्रबंध समिति में पहले से ही उंचेहरा ग्राम पंचायत की संपत्ति को हडपने और उन्हें व्यवसायिक उपयोग करने के आरोप लगे हैं, जो की वास्तविक और हकीकत में दिखाई दे रहे हैं, फिर भी न जिला प्रशासन और ना ही ग्राम पंचायत कभी भी इस ओर आवश्यक कार्यवाही नही की है।

अवैध भंडारण में खनिज विभाग की कार्यवाही 25 से 30 ट्रैक्टर रेत जप्त, रेत माफिया हुआ फरार 


उमरिया

जिले के बिरसिंहपुर पाली थाना अंर्तगत घुनघुटी रेलवे स्टेशन के समीप लगभग 25 -30 टेक्टर टाली रेत जिसका अवैध भंडारण किया गया था, को पकड़ने में खनिज विभाग को महती सफलता अर्जित की है। बताया जाता है कि घुनघुटी रेलवे स्टेशन से सटी रेलवे की भूमि पर रेत के अवैध भंडारण की जानकारी मिलने पर खनिज विभाग का अमले ने त्वरित कार्यवाही करते हुए रेत को अपने कब्जे में ले लिया है। इस कार्यवाही को अंजाम देने के लिए खनिज विभाग ने स्थानीय पुलिस और वन महकमा को भी अपने साथ ले रखा था। खनिज विभाग ने अवैध रेत को अपने कब्जे में लेते हुए इसे वहाँ से उठाकर वन विभाग के सुर्पुद कर दिया है। इस समय घुनघुटी में रेत माफिया के हौसले बुलंद है और रात दिन एक कर रेत के अवैध कारोबार को अंजाम देते देखें जाते हैं। रेत के इस कारोबार बढाने में स्थानीय पुलिस प्रशासन का हाथ बताया जाता है। घुनघुटी पुलिस चौकी में पदस्थ कई कर्मचारी रेत चोरी कराने का ठेका ले रखें है। बिना स्थानीय प्रशासन के मिलीभगत के इस पैमाने पर रेत का भंडारण किया जाना संभव नहीं है। बताया जाता है कि घुनघुटी में कई छत्रप रेत के अवैध कारोबार में संलिप्त है जो घुनघुटी के आसपास के नालो से रेत निकालने के काम में जुटे हुए हैं, और गहिरा नाला, झरिया नाले को पाताल में पहुचाने में सफल हो गयें है। रेत माफिया की  गेंग चलती है और पुलिस प्रशासन को अपने पक्ष में करके शासन को हर दिन लाखों रूपये की क्षति पहुचाते हुये इस काम को अंजाम देते आ  रहें हैं। रेलवे परिसर में अवैध रेत का भंडारण जो की वन चौकी से भी लगी हुई है, यह भंडारण अपने साथ कई सवाल खड़े करते हुए स्थानीय पुलिस, वन और रेलवे को कटघरे में खड़ा करता है। आखिर कार रेलवे स्टेशन के सटी भूमि पर उसके परिसर में अवैध भंडारण का घिनौना कृत्य बिना उनकी मिलीभगत के कैसे संभव हो गया। कहा तो यह भी जाता है इस अवैध भंडारण में क्षेत्र का कुख्यात अपराधी जो आये दिन जेल की सैर करते रहते हैं के हाथ होने से लोग सामने आने से बच रहे हैं।

खनिज विभाग का छोटा सा विभाग है जो पूरे जिले भर में व्यस्त रहता है उसकी इस व्यस्तता का लाभ उठाते हुए घुनघुटी जैसे क्षेत्र में अवैध रेत भंडारण का  करते हुए दिन दुगुना रात चौगुनी चांदी काट रहे हैं।

प्रति नियुक्ति कर भूला प्रशासन, प्रति नियुक्ति तो समाप्त नहीं, ऊपर से लाद दिये और शिक्षक, कुम्भकर्णी नींद में प्रशासन

*चुन-चुन कर हुई पदस्थापना*


उमरिया 

जिले में प्रति नियुक्ति पदस्थापना कर जन जातीय कार्य विभाग की  सहायक आयुक्त उमरिया यह भूल बैठी है, की जिन शिक्षकों की प्रति नियुक्ति की गयी है, वह महज दो वर्षों के लिए है, और उसकी समयावधि सात साल पूर्व की गयी थी, ऐसा ही एक संवेदनशील मुद्दा इन दिनों शिक्षा जगत में  छाया हुआ है। बताया जाता है कि वर्ष 2019 में शिक्षा विभाग में पदस्थ शिक्षकों ने राज्य शासन के पोर्टल में आन लाइन आवेदन कर शिक्षा विभाग से आदिवासी विकास में जाने का अनुरोध किया था, उन दिनों प्रदेश में कांग्रेस की कमल नाथ सरकार थी और उस दरम्यान प्रतिनियुक्ति के सन्दर्भ में शिक्षा विभाग से अनापत्ति - सहमति के आधार पर उमरिया जिले के 09 शिक्षकों को सशर्त दो वर्ष के लिये आदिवासी विकास विभाग में पदस्थापना संबधित आदेश आयुक्त आदिवासी भोपाल के व्दारा प्रदान किये गए थे। शिक्षा विभाग के इन शिक्षको ने आयुक्त के आदेश के परिपालन में सहायक आयुक्त उमरिया से संपर्क साधते हुए जिले के आदिवासी विकास विभाग के व्दारा अपनी सुविधा अनुसार सडक किनारे के विद्यालयों में चुन चुन कर अपनी पदस्थापना करायी गयी और दो वर्षों के स्थान पर पिछले सात वर्षों से इन विद्यालयों को अपनी जागीर मानकर शिक्षकीय दायित्व निभाते आ रहें हैं। इन सात सालों में कितने सहायक आयुक्त आये और चले गए, लेकिन प्रतिनियुक्ति के इस मामले पर किसी का ध्यान नही गया और न ही शिक्षा विभाग को अपने गयें हुये शिक्षकों की खोज खबर लेने की जरूरत समझ में आयी। 

ध्यान देने योग्य है कि इस बीच संलग्नीकरण पर रोक लगाने और उस को समाप्त करने के लिए समय समय पर शिक्षा विभाग और आदिवासी विकास विभाग के लिये समय सीमा के अंदर वापसी के निर्देश प्रसारित किये गए हैं, परन्तु उमरिया जिले में वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों के पालन में जिला सदैव फिसड्डी बना रहा है, यहाँ पर उन बाबूओं का ही राज कायम है जो दशकों से एक ही कुर्सी पर जमे मलाई छान रहे थे। तत्संबंध में राज्य सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने संलग्नीकरण प्रथा पर रोक लगाते हुए  संलग्न शिक्षकों को मूल स्थान पर भेजने के आदेश जारी किये गए थे, जिसके परिपालन में कार्यालय आयुक्त जन जातीय कार्य मध्यप्रदेश के पत्र क्र - स्था- 4 टी - (27) / 2024/23422 भोपाल दिनांक 10-12-2024 में आदेश जारी करते हुए उल्लेख किया था कि विभाग में सभी तरह के संलग्नीकरण पर रोक लगाई गई है, और जो भी संलग्न शिक्षक है उन्हें 16-12-2024 तक अनिवार्य रूप से मूल पदांकित विद्यालयों में वापस पदांकित विद्यालयों में भेज कर पालन प्रतिवेदन संलग्न प्रपत्र में भेजना सुनिश्चित किया जाये। आयुक्त के इस निर्देशों का भी पालन सहायक आयुक्त उमरिया के व्दारा नहीं किया गया। अगर इसके पालन के लिए नजर घुमायी जाती तो यह मामला भी प्रकाश में जरूर आता, लेकिन जिले में वरिष्ठ कार्यालयों के आदेश का परिपालन तो कतिपय अधिकारियों के लिए तिजोरी भरने का एक जरिया बना हुआ  है। दाद देनी होगी प्रति नियुक्ति पर गयें शिक्षकों की जिन्होंने एक साथ दोनों विभागों को साध कर अपने मन मर्जी का राज कायम कर रखा है। लोक शिक्षण संचालनालय शिक्षकों के तैनाती को लेकर गंभीर हैं, वही पर उमरिया जिले का शिक्षा विभाग कुंभकर्णी नींद में सो रहा है। अभी हाल में जनजातीय कार्य विभाग उमरिया व्दारा तबादला सूची जारी की गयी है, इस सूची में कन्नाबहरा प्राथमिक शाला में अशोक सिंह सहायक शिक्षक की पद स्थापना कर दी गई है। कन्नाबहरा में प्राथमिक में लगभग 28 छात्र दर्ज हैं और वहा पर पहले से दो शिक्षक काफिया हक और रजनी सिंह पदस्थ थी, छात्र संख्या के मान से दो शिक्षक ही पर्याप्त है। इनमें से काफिया हक की पद स्थापना विकलांग कोटे से हैं तो दूसरी रजनी सिंह शिक्षा विभाग से प्रति नियुक्ति में वर्ष 2019 से जमी हुई है। यद्यपि इनकी पद स्थापना दो वर्ष के लिए की गयी थी, नियमत: इनको पहले मूल विभाग को वापस कर नयी पद स्थापना की जानी चाहिए थी, लेकिन विसंगतियों से भरा जन अपेक्षा है लोक शिक्षण संचालनालय इस ओर आवश्यक कब कदम उठायेगा।

नगर परिषद मे गडबड झाला, महिला पार्षदों ने सीएमओ की कार्य शैली पर उठाए सवाल, कार्यवाही की मांग


उमरिया 

जिले की  नगर परिषद नौरोजाबाद जो अपने काले कारनामों के लिए बदनाम मानी जाती है, महिला पार्षदों की उपेक्षा के लिए एक बार फिर चर्चाओं में आ गयी है। बताया जाता है कि नगर परिषद की महिला पार्षदों ने इस बार मुख्य नगर पालिका अधिकारी पर अपने उपेक्षा के तीखे आरोप लगाते हुए कहा है की न तो मुख्य नगर पालिका अधिकारी परिषद में अपनी कुर्सी पर बैठते हैं, न पार्षदों का फोन रिसीव करते हैं, न ही पारित संकल्पों पर कार्यवाही करते हैं,जिससे नगर का विकास समुचित रूप से हो सकें। महिला पार्षदों ने मीडिया से बातचीत करते हुए बताया की मुख्य नगर पालिका अधिकारी  कार्यालय से अनुपस्थित रहने के आदी हैं, वह कभी भी समय पर कार्यालय नहीं पहुचते, जिससे आम नागरिकों के साथ जन प्रतिनिधियों को भी  भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

वार्ड क्रमांक 03 की पार्षद गीता पटेल एवं वार्ड क्रमांक 08 की पार्षद  सावित्री साकेत ने भी सीएमओ की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए जमकर नाराजगी व्यक्त की। दोनों जनप्रतिनिधियों ने कहा कि कई बार वार्डों की समस्याओं और विकास कार्यों को लेकर अधिकारियों के समक्ष मुद्दे रखे जाते हैं, लेकिन उन्होंने जनता के हितों के मुद्दों से सदा दूरी बनाकर रखें हुए हैं, उनके प्रति उनकी उदासीनता बनी रहती है।

पार्षद का कहना है कि नगर परिषद कार्यालय में विभिन्न कार्यों के लिए आने वाले नागरिक  घंटों इंतजार कर वापस चले जाते हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी उपलब्ध नहीं रहते। इतना ही नहीं, कई बार फोन करने पर भी सीएमओ द्वारा कॉल रिसीव नहीं की जाती, जिससे जनप्रतिनिधियों और नागरिकों दोनों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

पार्षद ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि जनता ने हमें चुनकर भेजा है, जिससे हमारी जिम्मेदारी बनती है कि क्षेत्र के समन्वित विकास और उनके हकों के लिए हम संकल्पित होकर काम करें लेकिन नगर पालिका परिषद में हो रही उपेक्षा,मनमानी और नियम विरूद्ध कार्य शैली ने इस संकल्प को पलीता लगा कर रख दिया है।   ऐसे में जब परिषद के  अधिकारियों द्वारा उनकी बातों तवज्जो ज्ञनहीं दिया जाता, तो जनता के बीच असंतोष बढ़ता है और विकास कार्य भी प्रभावित होते हैं।

पार्षदों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की जाए, ताकि नगर परिषद की कार्यप्रणाली में सुधार हो सके और जनता को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।



प्राचार्य व शिक्षक अदिवासी को दे रहे हैं धमकी, कलेक्टर व एसपी कार्यवाही के लिए लगाई न्याय की गुहार


उमरिया

जिले के जनजातीय क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने शिक्षा विभाग, पुलिस जांच प्रक्रिया और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। ग्राम नरवार निवासी आदिवासी छात्र मालिकदीन बैगा ने शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय शाहपुर के प्रभारी प्राचार्य श्री सिंह परस्ते, शिक्षक तोमन यादव तथा जांच प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस अधीक्षक उमरिया एवं कलेक्टर को शिकायत भेजकर न्याय की मांग की है।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि विद्यालय में अनियमितताओं और कथित भ्रष्टाचार की शिकायत करने के बाद उसे लगातार दबाव, धमकी और समझौते के लिए प्रलोभन का सामना करना पड़ा। वहीं, संबंधित मामलों की जांच निष्पक्ष तरीके से नहीं किए जाने के भी आरोप लगाए गए हैं।

मालिकदीन बैगा के अनुसार 18 अक्टूबर 2025 को उन्होंने थाना पाली में लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया था कि विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य श्री सिंह परस्ते एवं शिक्षक तोमन यादव उनके घर पहुंचे और शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस दौरान गाली-गलौज की गई, धमकियां दी गईं तथा कथित रूप से जबरन हस्ताक्षर भी कराए गए।

उनका आरोप है कि शिकायत दर्ज होने के कई माह बाद भी न तो एफआईआर दर्ज की गई और न ही आरोपितों के विरुद्ध कोई ठोस कार्रवाई हुई। आवेदन में आरोप लगाया है कि जांच अधिकारी ने उनका बयान घर पर नहीं लिया और पुलिस जांच अधिकारी द्वारा जबरन विद्यालय शाहपुर ले जाया गया। आरोप है कि विद्यालय परिसर में ही संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की मौजूदगी में बयान देने का दबाव बनाया गया। मालिकदीन बैगा का कहना है कि बयान की प्रति दिखाए बिना तथा उसे पढ़कर सुनाए बिना ही हस्ताक्षर करा लिए गए। 

निर्माणाधीन बस स्टैंड दुकानों की दीवारों में आई दरारें, गुणवत्ता पर उठे सवाल, कार्यवाही की मांग


समाचार

नगर पालिका बिरसिंहपुर पाली द्वारा साईं मंदिर के समीप निर्मित नया बस स्टैंड एक बार फिर चर्चाओं में है। इस बस स्टैंड की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, क्योंकि दुकानों की दीवारों में दरारें आ चुकी हैं। उद्घाटन से पहले ही शुरू हुए मरम्मत कार्य ने नगरवासियों को चिंता में डाल दिया है।

बस स्टैंड परिसर की दुकानों की पिछली दीवारों में दरारें नजर आने लगी थीं। ठेकेदार द्वारा दीवार के हिस्से को तोड़कर मरम्मत का कार्य शुरू कर दिया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य के पूरा होने के कुछ ही समय बाद इस तरह की खामियां सामने आने से निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गए हैं।

बस स्टैंड निर्माण कार्य की शुरुआत से ही गुणवत्ता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। कई लोगों ने निर्माण सामग्री और कार्य की गुणवत्ता को लेकर आपत्तियां भी दर्ज कराई थीं, लेकिन नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारियों और इंजीनियरों ने इन शिकायतों पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया।

नगर पालिका बिरसिंहपुर पाली के नेता प्रतिपक्ष संजीव खंडेलवाल ने निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि बस स्टैंड निर्माण में गुणवत्ता मानकों का पालन नहीं किया गया, जिसके कारण उद्घाटन से पहले ही भवन की स्थिति खराब होने लगी है। उन्होंने पूरे निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

उमरिया जिले के प्रभारी मंत्री नागर सिंह चौहान ने इस स्थिति पर आश्चर्य व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि बिरसिंहपुर पाली में शानदार बस स्टैंड का निर्माण कराया गया है, और अगर उद्घाटन से पहले ही उसमें जर्जरता जैसी स्थिति सामने आती है, तो यह गंभीर विषय है। उन्होंने इस मुद्दे की जानकारी लेने की बात कही है।

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