बीमारों की सांसों पर संकट, एम्बुलेंस संचालन में व्यापक फर्जीवाड़ा कर कंपनी कर रही लाखों का खेल

*जय अम्बे इमरजेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड की एम्बुलेंस की सेवा से काली कमाई*


उमरिया

जिले के मरीजों को राहत भरी यात्रा कर सुलभता से चिकित्सालय तक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध  कराने के लिए मध्यप्रदेश शासन की यशस्वी योजना एम्बुलेंस (108) जिसे आपातकालीन चिकित्सा सेवा और जननी एक्सप्रेस के नाम पर संचालित कर मरीजों की जान बचाने का उद्यम कर रही वही पर सरकार की इस सुखद मंशा पर ठेकेदार व्दारा पानी फेरते हुए  अपनी  तिजोरियां भरने का जरिया बना  चुकी है। बताया जाता है की उमरिया जिले में जय अम्बे इमरजेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के एम्बुलेंस की सेवा का बीड़ा उठा  रही है जो सेवा कम काली कमाई का जरिया ज्यादा बनायी है और इसके चलते वह कतिपय फर्जी कॉल्स का सहारा लेकर  ऐसा घिनौना खेल चल रही है, जि  बिना सेवा के ही कमायी होती रहेंगी और दुसरे की सेवा से भी बच जायेगें। एक तरफ बिना काम किये एम्बुलेंस का मीटर चलता रहेंगा, दुसरी ओर  असली मरीज को भी लाने की झंझट खत्म। इस घिनौने भरे खेल से एक तरफ जहाँ ठेकेदार की जेबें गर्म होती रहती है वही इस खेल में कई मरीजों को  अस्पताल पहुंचने के इंतजार में  जान से गवां बैठते हैं,  जिस के लिये इस ठेकेदार को कदापि दोषी नहीं माना जा सकता।पडताल करने पर पता चलता है कि एक  तरफ एम्बुलेंस के पहिए सिर्फ कागजों और फर्जी कॉल्स पर दौडक़र सरकार को करोड़ों का चूना लगा रहे हैं, वही कुछेक मरीज अपने जीवन से हाथ धो लिये। उल्लेखनीय है कि जिले के पाली, करकेली,मानपुर, चंदिया और नौरोजाबाद समेत तमाम लोकेशंस पर तैनात एम्बुलेंस सेवाओं की जमीनी हकीकत दुखभरी और  भयावह है, बताया जाता है की  पाली लोकेशन के वाहन संख्या (सीजी-04-एनएस-4602) ने तो इस मामले में  बेशर्मी की सारी हदें पार कर दी हैं। पीसीआर बुक की पड़ताल में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि जिन नंबरों से एम्बुलेंस बुलाई गई, वे नंबर या तो खुद एम्बुलेंस स्टाफ के हैं, या फिर बंद और अनरिचेबल हैं। हैरानी की बात तो यह है कि जब जिला चिकित्सालय के कंप्यूटर रिकॉर्ड खंगाले गए, तो अधिकांश केसों में पेशेंट नॉट फाउंड का मैसेज सामने आया। साफ है कि सरकारी तेल फूंकने और केस नंबर बढ़ाकर शासन से ज्यादा फंडिंग ऐंठने के लिए यह पूरा जाल बुना गया है।

*जिला प्रभारी पर गंभीर आरोप*

भ्रष्टाचार का यह सिंडिकेट ऊपर से नीचे तक जुड़ा हुआ है। नाम न छापने की शर्त पर कर्मचारियों ने बताया की  यह सब कंपनी के जिला अधिकारी सतेंद्र वर्मा के इशारे पर हो रहा है। जो कर्मचारी इस काले खेल में शामिल होने से इनकार करता है, उसे मानसिक रूप से प्रताडि़त किया जाता है। स्थानीय गुर्गों से धमकियां दिलवाई जाती हैं, वेतन काट लिया जाता है या नौकरी से निकालने का भय दिखाकर घर बैठा दिया जाता है। पायलट रोहनी कुशवाहा ने इस जुल्म के खिलाफ आवाज उठाई और थाने में शिकायत भी दर्ज कराई है, जो इस बात का प्रमाण है कि कंपनी के भीतर तानाशाही और उगाही का साम्राज्य चल रहा है।

*जब एम्बुलेंस फेक केस में बिजी*

इस घोटाले का सबसे काला पहलू यह है कि जब एम्बुलेंस फर्जी कॉल्स के कारण सडक़ों पर हवा में दौड़ रही होती है, ठीक उसी वक्त किसी प्रसव पीड़ा से गुजरती महिला या दिल के दौरे से तड़पते मरीज को वाहन नहीं मिल पाता। कंट्रोल रूम से वाहन व्यस्त है का संदेश दे दिया जाता है। यह सिर्फ आर्थिक भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि यह गैर इरादतन  हत्या के समान है। क्या शासन-प्रशासन को उन मौतों का हिसाब नहीं लेना चाहिए जो एम्बुलेंस की अनुपलब्धता के कारण हुईं?

*अफसरों की चुप्पी पर उठ रहे सवाल*

जिले में इतना बड़ा फर्जीवाड़ा चल रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद में सो रहे हैं। एम्बुलेंस जिला प्रभारी सतेंद्र वर्मा से जानकारी लेने की कोशिश की गयी लेकिन उन्होंने   फोन उठाना उचित नहीं समझा। जिससे इस संवेदनशील मामले में उनकी भी संलिप्तता की बू आ रही है। वहीं, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. वी.एस. चंदेल ने करेंगे का रटा-रटाया जवाब देकर पल्ला झाड़ लिया है। सवाल यह है कि यह खानापूर्ति कब तक चलेगी, क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही प्रशासन की नींद टूटेगी। 

*प्रदेशव्यापी ऑडिट की दरकार*

उमरिया जिले में कार्यरत जेएईएस कंपनी का कारोबार जिले के साथ ही  पूरे प्रदेश में फैला हुआ है। यदि एक छोटे से  जिले में फर्जी काल का खेल चल रहा है तब अन्य जिले अछूते रह पायेंगे कह पाना कठिन है। इसलिए इस मामले की प्रदेश स्तरीय सघन जांच करायी जाये तो  करोड़ों का घोटाले सामने आ सकता है ।इस मामले की विस्तृत जांच करने पर  इस कंपनी का खेला सामने आयेगा।

कलेक्टर के खिलाफ पत्रकारों ने खोला मोर्चा, प्रेस कॉन्फ्रेंस का किया बहिष्कार


उमरिया

जिले में जब से कलेक्टर के पद पर धरणेन्द्र कुमार जैन ने पद भार ग्रहण किया है तब से लगातार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए उनका रवैया पत्रकारों के साथ असहयोगात्मक ही रहा है। जिले में कोई भी घटना या किसी पीड़ित, शोषित, गरीब का मामला आता है या कहीं कोई गलत काम हो रहा है तो आम जनता की आवाज को उठाने का कार्य मीडिया ही करता है, और उन मुद्दों पर जब जिले के कलेक्टर से संवाद स्थापित करने का प्रयास किया जाता है तो उनके द्वारा सीधे कह दिया जाता है कि मैं कुछ भी नहीं बता सकता हूं, जबकि समूचे विश्व में हर जगह से समाचार संकलन का कार्य मीडिया द्वारा ही अनादि काल से किया जा रहा है, इतना ही नहीं समाज में विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बाद मीडिया को चौथे स्तम्भ का दर्जा दिया गया है और उमरिया जिले के कलेक्टर द्वारा लगातार चौथे स्तम्भ की उपेक्षा की जा रही है, वहीं आज भारत सरकार के महत्वपूर्ण कार्यक्रम जी राम जी अधिनियम 2025 के लिए पी आई बी अर्थात प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो की तरफ से आए मनीष दुबे को भी जिले के कलेक्टर के रवैये के चलते विरोध का सामना करना पड़ा जबकि उनको जिले के पत्रकारों से संवाद स्थापित करना था और वह संवाद स्थापित नहीं हो सका।

गौरतलब है कि इतना ही नहीं जिले के सभी पत्रकारों ने यह भी कहा कि आज भर नहीं जब तक जिले के कलेक्टर का रवैया नहीं सुधरेगा तब तक हमारे द्वारा भी इसी तरह का असहयोगात्मक रवैया अपनाया जाएगा। इसके चलते भले ही शासन की योजनाओं का प्रचार प्रसार न हो उसकी समस्त जिम्मेदारी जिले के कलेक्टर की होगी। कलेक्टर के तानाशाही रवैये से क्षुब्ध पत्रकारों ने किया प्रेस कॉन्फ्रेंस का बहिष्कार किया है।


वन विभाग की दोहरे मापदण्ड से उपजते सवाल, बाघ की मौत मामले में दोषियों पर नही हुई कार्यवाही 


उमरिया

जिले के चंदिया वन परिक्षेत्र में पिछले माह कथली नदी के किनारे बाघ की हत्या के मामले में दोषी वन कर्मचारियों के ऊपर अब तक कार्यवाही नहीं किये जाने से वन मंडलाधिकारी की कार्यवाही पर तीखे सवाल खड़े करके रख दिया है, जबकि नौरोजाबाद परिक्षेत्र के कल्दा बीट में राजस्व भूमि पर खैर के वृक्षों की कटाई को अवैध मानते हुए वन मंडलाधिकारी ने वन रक्षक और वन पाल को निलंबित करने का फरमान जारी किया गया है। इतना ही नही इसी तरह नौरोजाबाद परिक्षेत्र के मनेरी बीट में राजस्व गाँव  करौंदी के खेत से दो सागौन  वृक्ष का मामले में भी विभाग चुप्पी साधे बैठा हुआ है।

ज्ञात होवे की चंदिया वन परिक्षेत्र के अन्तर्गत पिछले 12 दिसंबर 2025 को कथली नदी के किनारे बिजली के करेंट से एक बाघ की हत्या का मामला दर्ज किया गया था, वन विभाग ने बाघ के हत्या के लिए छह आरोपियों को पकड कर न्यायालय भेंज दिया, साथ ही इस मामले में दोषी पाये गये वन कर्मचारियों की जांच शुरू कर दी जांच में विभाग के कतिपय कर्मचारियों को दोषी पाया गया था, जिसकी जांच प्रतिवेदन वन परिक्षेत्राधिकारी और उप वन मंडलाधिकारी उमरिया की अनुशंसा सहित वन मंडलाधिकारी उमरिया के दफ्तर में पिछले एक माह से धूल खा रही है, लेकिन इस मामले में अब तक कोई ठोस कार्यवाही न होने से अधिकारियों पर कतिपय कर्मचारियों को बचाने के आरोप लगाये जा रहे हैं। नौरोजाबाद परिक्षेत्र के कल्दा बीट के कर्मचारियों के ऊपर हुई कार्यवाही से वन विभाग को  कटघरे में खड़ा करता है , विभागीय कार्यवाही में इस तरह की असमानता बरतने के पीछे राज क्या छिपा है।

विदित होवे की बाघ एक राष्ट्रीय पशु है और उसके रख रखाव के लिए बाघ अभयारण्य बनाकर पाल रही है और उसके हत्या के लिए दोषियों को जहाँ एक ओर जेल की हवा खा रहे हैं उसी मामले में विभागीय कर्मचारियों के दोष साबित होने के बाद  कार्यवाही न किया जाना विभाग के आला अधिकारी की कार्यवाही को न सिर्फ सवालों के घेरे में बताया जा रहा है,उन पर पक्षपात और विसंगति पूर्ण कार्यवाही के लिए जिम्मेदार माना जा रहा है।इस संदर्भ में वन मंडलाधिकारी विवेक सिंह  से दूरभाष पर 9407199140 से संपर्क किया गया लेकिन नेटवर्क न होने के कारण बात नहीं हो पायी।

पुलिस की सख्त कार्रवाई, होटल–ढाबों में अवैध शराब पिलाने वालों पर कसा शिकंजा, मामला दर्ज


उमरिया

जिले के बिरसिंहपुर पाली नगर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने एवं अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से नगर निरीक्षक राजेशचंद्र मिश्रा के नेतृत्व में पाली पुलिस द्वारा लगातार सघन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में रविवार की रात पाली के अस्थायी  बस स्टैंड क्षेत्र में स्थित होटल-ढाबों पर पुलिस ने औचक निरीक्षण किया।चेकिंग के दौरान पुलिस टीम ने बीनस होटल, गुरुनानक होटल एवं महंता ढाबा का निरीक्षण किया। इस दौरान बीनस होटल में ग्राहकों को बैठाकर अवैध रूप से शराब पिलाए जाने का मामला सामने आया, जिस पर पुलिस ने मौके पर ही मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम की धारा 34(1) एवं 36 के तहत संबंधित होटल संचालक के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की।

इस कार्रवाई में उप निरीक्षक बीरेंद्र यादव, प्रधान आरक्षक महेश मिश्रा एवं आरक्षक अजीत कुमार सहित पुलिस स्टाफ उपस्थित रहा। वहीं गुरुनानक होटल एवं महंता ढाबा में भी पुलिस द्वारा काउंटर, रसोईघर एवं बैठने की व्यवस्था की गहन जांच की गई तथा संचालकों को नियमों का पालन करने की सख्त हिदायत दी गई।

पाली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि नगर क्षेत्र में किसी भी होटल या ढाबे में अवैध शराब पिलाने, नियमों के उल्लंघन एवं अनैतिक गतिविधियों को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस प्रकार की औचक चेकिंग और सख्त कार्रवाई आगे भी निरंतर जारी रहेगी। इस कार्रवाई से होटल-ढाबा संचालकों में हड़कंप की स्थिति बनी रही, वहीं आम नागरिकों ने पुलिस की इस  पहल की सराहना की है।

जुंआ फड़ पर पुलिस का छापा 5 हजार नगद सहित 2 लाख का मसरूका जब्त 


उमरिया

जिले के बिरसिंहपुर पाली थाना के घुनघुटी चौकी की पुलिस को चंदनिया में चल रहे जुंआ के काले व्यवसाय को पकड़ने में महती सफलता अर्जित की है। बताया जाता है कि शहडोल के कतिपय जुआड़ी चंदनिया को जुंआ खेलने का अड्डा बना रहे थे, जिसकी भनक लगते ही घुनघुटी पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए इस अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने की ठान ली, और आज जुंआ फड में छापा मारकर जुंआ खेलते हुए रंगे हाथ पकडा। जुआरियों के पास से 5 हजार रूपये ताश पत्ती और दो लाख रूपये का मसरूका जब्त करने में कामयाबी हासिल की है। पकड़े गए आरोपियों में  रजनी उर्फ सिराजुल्लाह खान सोहागपुर, शंभू गुप्ता, मोहम्मद फारूक रंगरेज, बिलाल खान, मुस्तखिन खान सभी निवासी शहडोल बतलाये जाते हैं। जुंआ का यह घिनौना खेल चंदनिया गाँव से आगे पानी टंकी से अन्दर खेला जा रहा था। इन दिनों घुनघुटी पुलिस क्षेत्र में चल रहे अवैध व्यवसायों पर अंकुश लगाने की सराहनीय पहल में जुटी हुई है ।

2 बाघ का शव मिलने से मचा हड़कंप, प्रबंधन पर उठ रहर सवाल  विभाग जांच में जुटी


शहडोल

धमोखर परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम रायपुर के कुदरी टोला में गुरुवार दोपहर उस वक्त सनसनी फैल गई, जब खेत में बने एक पुराने कुएं में बाघ का शव देखा गया। सूचना मिलते ही जिम्मेदार पार्क अधिकारी और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई और स्थिति का जायजा लिया।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार गांव से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर स्थित इस पुराने कुएं से तेज दुर्गंध आ रही थी, जिससे आशंका जताई जा रही है कि बाघ की मौत 48 घंटे से अधिक समय पहले हो चुकी है। हैरानी की बात यह है कि बाघ शावक की मौत के महज 24 घंटे के भीतर एक और बाघ का शव मिलना पार्क प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।यह घटना न सिर्फ वन विभाग के लिए चुनौती बनकर सामने आई है,बल्कि वन्यजीव प्रेमियों के लिए भी बेहद निराशाजनक है।जिस स्थान पर बाघ का शव मिला, वह जंगल चौकी के बेहद करीब बताया जा रहा है,ऐसे में निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।फिलहाल वन विभाग द्वारा आगे की कार्रवाई की जा रही है और मौत के कारणों की जांच की जा रही है।

*मादा बाघ शावक का शव मिलने से मचा हड़कंप*

उमरिया के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के वन परिक्षेत्र ताला, कथली बीट (आर.एफ.331) में गश्त के दौरान एक मादा बाघ शावक का शव मिला।सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम तत्काल घटनास्थल पर पहुंची और मानक संचालन प्रक्रिया के तहत कार्रवाई प्रारंभ की। मृत शावक की आयु लगभग 7–8 माह आंकी गई है और प्रारंभिक जांच में मृत्यु का संभावित कारण किसी अन्य वन्य प्राणी से संघर्ष बताया गया।घटना की सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को तुरंत दी गई और वन्यप्राणी अपराध नियंत्रण ब्यूरो एवं राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के निर्देशानुसार सभी प्रक्रियाएं अपनाई गईं। शव का पंचनामा तैयार कर स्थल सुरक्षित किया गया। डॉग स्क्वॉड एवं मेटल डिटेक्टर से स्थल की जांच की गई, जिसमें कोई संदिग्ध वस्तु या गतिविधि नहीं मिली।सक्षम वन्य चिकित्सक की उपस्थिति में विस्तृत पोस्टमार्टम परीक्षण कराया गया और आवश्यक नमूने संकलित कर अधिकृत प्रयोगशाला भेजे गए। सभी वैधानिक और तकनीकी प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद को शव दाह की कार्यवाही संपन्न की गई। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रशासन ने क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा दी है और गश्ती अभियान जारी रखा है, ताकि वन्य प्राणियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

मुख्यमंत्री सपरिवार पहुँचे विरासनी माता के मंदिर, दर्शन कर प्रदेश वासियों के लिए मांगा आशीर्वाद


उमरिया

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के एक दिवसीय निजी दौरे पर बिरसिंहपुर पाली पहुँच कर जगत जननी जगदम्बा माँ के दर्शन कर मन्नत मांगी, ताकि उनकी कुर्सी सलामत बनी रही। बताया जाता है कि इसके पहले वह राज्य स्तरीय पेशा एक्ट महा सम्मेलन कार्यक्रम में पाली विकास खंड के गोरईया ग्राम पंचायत आये थे, तब माँ बिरासनी मंदिर में माथा नहीं टेंक पाये थे तब से ही यह चर्चा चल पडी थी की पाली आने के बाद जो जगत जननी के दर्शन नहीं करते उन्हें अपनी कुर्सी गवानी पडती है।यद्यपि यह बात अपने उद्बोधन में भी मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा था कि जब मैं शिक्षा मंत्री था तब माँ बिरासनी मां के दर्शन किया था,और  मां ने मुझे मुख्यमंत्री बना दिया,मैं माता के दर्शन के लिये जरूर जाऊगा, लेकिन वह दर्शन करने के लिए कार्यक्रम स्थल से निकले, लेकिन आखिर कार आनन फानन में बीच रास्ते से कार्यक्रम बदल गया था और वह माता के दरबार में माथा टेकने नही पहुँच पाये। कही न कहीं इसकी कसक उनके मन में बनी रही। इस बात झलकियाँ भी राजनैतिक परिदृश्य में मिलने लगी थी और उनके मन में बैठी पीड़ा उन्हें माता के दरबार में खीच ले आयी। विदित होवे की बीते दिवस मुख्यमंत्री मोहन यादव सपत्नीक बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान के दौरे पर आये हुए थे, जहाँ पर उन्होंने रात्रि विश्राम किया और सुबह राष्ट्रीय उद्यान का भ्रमण किया तत्पश्चात वह बिरसिंहपुर पाली पहुँच कर माता के दर्शन किया। इस अवसर पर क्षेत्रीय विधायक मीना सिंह, जैतपुर विधायक जय सिंह मरावी,नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष सुश्री शकुंतला प्रधान, नगर पालिका उपाध्यक्ष राजेश पटेल के अलावा सैकड़ों भाजपाई कार्यक्रम में शिरकत की। 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव साल के अंतिम में छुट्टियां मनाने उमरिया जिले पहुंचे। जहां बांधवगढ़ में सफारी में बाघों के दीदार किये।और आज हेलीकॉप्टर विमान द्वारा प्रकाश नगर स्थित हेलीपैड पर उतरे, जहां प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस के वरिष्ठ अफसरों ने उनका स्वागत किया। मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था बेहद पुख्ता रही। मंदिर परिसर से लेकर पूरे मार्ग पर पुलिस बल तैनात रहा, वहीं जिला प्रशासन लगातार निरीक्षण करता नजर आया। मुख्यमंत्री का यह दौरा पूरी तरह निजी बताया जा रहा है तो वहीं भाजपा कार्यकर्ताओं ने भव्यता के साथ स्वागत किया उनके आगमन से क्षेत्र में उत्साह का माहौल है।

बच्चों की थाली के जूठन से बढ़ रही समूहों की चमक, कागजी साबित हो तो रहा मध्याह्न भोजन 


उमरिया/ बिरसिंहपुर पाली 

सरकार की महत्वपूर्ण मीड डे मील 15 अगस्त 1995 से लागू कर शासकीय विद्यालयों में अध्ययन रत छात्राओं की उपस्थिति बढाने और कुपोषण से मुक्ति दिलाने के उद्देश्य से लागू किया गया था, जिस पर सरकार आज भी करोड़ों रूपयों का व्यय कर योजना संचालित कर रखी है लेकिन योजना से शासकीय विद्यालयों में अध्ययन रत छात्र- छात्राओं को कितना लाभ  हुआ वह आज भी परदे के पीछे ही छिपा हुआ है। विद्यालयों में सुरूचि पूर्ण पोषक युक्त भोजन के लिए सरकार योजना में हर माह बेहिसाब धन व्यय कर रहा है परन्तु उन नौनिहालों कि सूरत जस की तस बनी हुई है जिनके लिए यह महती योजना को संचालित किया जा रहा है।  दशकों व्यतीत हो जाने के बाद भी इन छात्राओं के जीवन स्तर पर कोई सुधार दिखाई नहीं दे रहा है,अलबत्ता बच्चों को मंध्यांह भोजन देने वाले समूहों की सेहत में जरूर सुधार दिखाई दे रहा है, और उनकी चमक दिन दोगनी रात चौगुनी बढती जा रही है।विद्यालयों में भोजन की योजना लागू करने के पीछे सरकार की मंशा थी कि बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्तर पर सुधार दर्ज किया जायेगा। देश भर के शासकीय विद्यालयों में अध्ययन रत बच्चों के अध्ययन में पाया गया था कि बच्चे गंभीर रूप से कुपोषित रहते हैं, जिससे उनका विकास आवश्यकता से कम हो रहा है, जिससे बच्चों का सर्वांगीण विकास हो सकें जिससे विद्यालयों में भोजन प्रदान करने की योजना चलाई गयी थी। यह योजना 15 अगस्त 2025 को तीन दशक पूरे कर चौथे दशक में प्रवेश कर गया लेकिन जो लाभ मिलना था वह समूहों तक आकर लटक कर रह गया है।यद्यपि विद्यालयों में चलने वाले इस सु पोषित भोजन योजना का सभी जगह बुरा हाल है, विद्यालयों में कभी भी,कहीं भी मीनू के अनुरूप बच्चों को नहीं परोसा जा रहा है तथापि  उमरिया जिला तो इस मामले में ज्यादा ही फिसड्डी दिखाई दे रहा है  । पिछले दिनों जिले के विद्यालयों का भ्रमण कर विद्यालयों में बच्चों का अध्ययन करने पर पता चलता है की यह योजना वर्तमान में खानापूर्ति का रूप धारण कर कागजों में ही शत प्रतिशत संचालित हो रही है। आदिवासी   विकासखंड पाली के विद्यालयों में संचालित समूह संचालक राजनैतिक दलों के सहारे इस योजना को बट्टा लगा रहे हैं । वह विद्यालयों की बजाय भाजपा की बैठकों और विधायकों के पिछलग्गू बनकर इस योजना से ठाठ के साथ मौज उडाते देखे जा सकते हैं। माध्यमिक विद्यालय नया मंगठार विद्यालय  में भ्रमण करने पर पाया गया की पिछले तीन दिनों से विद्यालय में भोजन नहीं बन रहा। बनता भी है तो उसमें मीनू का पालन नहीं किया जाता। माध्यमिक विद्यालय नया  मंगठार जमीनी हकीकत को बया करने के लिए हांडी के दो दाने है, कमोवेश यह स्तिथि पूरे जिले की है जहाँ पर मंध्यांह भोजन के सहारे बच्चों का कम समूहों का विकास ज्यादा हुआ है। वर्तमान परिवेश में मंध्यांह भोजन की राशि सीधे राज्य सरकार द्वारा सीधे भोपाल से हस्तांतरित की जाती है , जिससे विकास खंड स्तरीय निगरानी समिति को समूह संचालक ठेंगे में रखते हैं। विद्यालय के शिक्षक और निगरानी करने वाले इसी बात के शुक्र गुजार है की कम से कम विद्यालय में चूल्हा तो जल रहा है जो खिलाना है खिलाये ।पाली विकास खंड के अमिलिहा विद्यालय में संचालित समूह तो जिला प्रशासन के नाक में दम करके रख दिया था।आज भी वहाँ के समूह संचालक कमिश्नर के यहाँ प्रकरण दायर कर मंध्यांह भोजन की बागडोर लेने की कोशिश में डाटा हुआ है।

सवाल यह भी है कि जिन बच्चों के समग्र विकास के लिए यह योजना क्रियांवित की गयी थी वह आज गौण होकर  नाम मात्र की रह गई है और उसके स्थान पर स्व सहायता समूहों का विकास जारी है। होना यह चाहिए की छात्राओं के समग्र विकास के साथ समूहों का विकास होता तो इस पर कदापि किसी को कोई आपत्ति नहीं होती लेकिन समूह तो इन नौनिहालों के थाली के जूठन पर मुंह मारकर अपनी चमक बढाने में तुले हुए हैं।

महिला की हत्या व दुष्कर्म का हुआ खुलासा, आरोपी को पुलिस ने किया गिरफ्तार


उमरिया

जिले के पाली थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम बंधवाबारा में महिला का शव संदिग्ध हालात में मिलने के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। जिस घर से शव बरामद हुआ था, उसी घर के मालिक राजकुमार गोड को पुलिस ने आरोपी के रूप में गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के विरुद्ध हत्या एवं दुष्कर्म का प्रकरण पंजीबद्ध किया गया है।

इस संबंध में एसडीओपी एस.सी. बोहित ने जानकारी देते हुए बताया कि 20 दिसंबर को आरोपी राजकुमार गोड मृतिका अमशिया बैगा (45 वर्ष), पति सोहन बैगा को अपने घर साफ-सफाई के बहाने लेकर गया था। इसी दौरान आरोपी द्वारा महिला के साथ यौन उत्पीड़न (दुष्कर्म) किया गया, जिसके बाद उसकी हत्या कर दी गई,एसडीओपी ने बताया कि पुलिस द्वारा आरोपी को हिरासत में लेकर गहन पूछताछ की गई, जिसमें उसने दुष्कर्म और हत्या की वारदात को कबूल कर लिया है। आरोपी के बयान और जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर उसके विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में हत्या एवं दुष्कर्म का मामला दर्ज किया गया है।

गौरतलब है कि महिला का शव आरोपी के ही घर में मिलने से शुरू से ही मामला संदेह के घेरे में था। घटना के बाद गांव में भारी आक्रोश और सनसनी फैल गई थी। पुलिस ने मौके पर एफएसएल टीम को बुलाकर साक्ष्य संकलन कराया था, जिसके बाद जांच की कड़ियां जुड़ती चली गईं। फिलहाल आरोपी पुलिस हिरासत में है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है। इस जघन्य वारदात के खुलासे के बाद गांव में दहशत का माहौल है, वहीं पुलिस पूरे मामले में सख्ती से कार्रवाई कर रही है।

स्पा के आड में अवैध गतिविधियों के संचालन के आरोप, धार्मिक नगरी में काले व्यवसाय से जन मानस में आक्रोश 


उमरिया

जिले के धार्मिक नगरी के रूप में विख्यात  बिरसिंहपुर पाली में एनएच-43 सड़क किनारे स्थित रामपुर शुक्ला कॉम्प्लेक्स में संचालित स्पा  सेंटर को लेकर एक नया  विवाद सामने आया है।बताया जाता है की इस मामले को लेकर  स्थानीय निवासी राजेश पाण्डेय ने इस संबंध में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व  बिरसिंहपुर पाली को लिखित शिकायत करते हुए  स्पा एवं सैलून की आड़ में अवैध गतिविधियां संचालित होने का आरोप लगाया है।शिकायत में कहा गया है कि बिरसिंहपुर पाली में जगत जननी आराध्य देवी बिरासनी माता एवं हरिहर भगवान  का बहु प्रसिद्धि तीर्थ स्थल  लोगों के  आस्था का केंद्र बना हुआ  है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु और आम नागरिकों का आना जाना सदैव सदा बना रहता है। ऐसे पवित्र स्थल पर  एनएच-43 जैसे व्यस्त मार्ग पर स्थित कॉम्प्लेक्स में स्पा के आड में  आपत्तिजनक गतिविधियों को संचालित कर धन कमाने की हवस ने स्पा सेंटर को हवस  पूरी करने का अड्डा बना दिया है। इससे न सिर्फ  सामाजिक मर्यादाओ का उल्लंघन हो रहा है अपितु  धार्मिक नगरी की छवि पर भी  घातक दाग लग रहें है।  इन गतिविधियों के कारण स्थानीय नागरिकों में व्यापक स्तर पर  असंतोष फैल रहा है  और लोगों में  भय का माहौल बन हुआ है। 

 शिकायत कर्ता राजेश पाण्डेय ने इन्ही सभी आशंकाओं को देखते हुए  प्रशासन से मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच कर उचित कानूनी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो धार्मिक नगरी की छवि धूमिल होगी और असामाजिक तत्वों का मनोबल बढ़ेगा। शिकायत की प्रतिलिपि एसडीएम पाली, कलेक्टर उमरिया और पुलिस अधीक्षक उमरिया को भी भेजी गई है।

वहीं इस पूरे मामले पर स्पा एवं सैलून सेंटर के मैनेजर चंदन मिश्रा ने आरोपों को सिरे से खारिज किया है। फोन पर बातचीत में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके सेंटर में किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधियां संचालित नहीं होती हैं। उनका कहना है कि यह सेंटर हाल ही में शुरू हुआ है और कुछ लोग बिना कारण अफवाह फैला रहे हैं। चंदन मिश्रा के अनुसार स्पा एवं सैलून पूरी तरह नियमों के तहत संचालित है और यहां किसी भी तरह की आपत्तिजनक गतिविधि नहीं होती।

फिलहाल मामला प्रशासन के संज्ञान में है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन जांच के बाद क्या कदम उठाता है और आरोप सही पाए जाते हैं या इन्हें महज अफवाह मानकर खारिज किया जाता है। क्षेत्रवासियों की नजरें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

आजादी के 78 वर्ष बाद भी बिजली के नही हुए दर्शन, उजाले के नाम पर कैरोसीन भी छीना

*आदिवासी गाँवों  की त्रासदी भरी दास्तान*


उमरिया

जिले में अब भी दर्जनों गाँव ऐसे है, जहाँ पर अभी भी मूलभूत सुविधाएं गरीब आदिवासियों के लिए मृगतृष्णा बनी हुई है। देश आजाद होकर आठवे दशक में प्रवेश कर रहा है, परन्तु आदिवासियों की  बुनियादी समस्याओं का पहाड़ वैसे ही खडा है। अभी भी जिला के दूर दराज क्षेत्रों में बिजली जैसी बुनियादी जरूरत की पहुंच न होने के कारण लोगों का जीवन उन्नीसवीं सदी में जीने के लिए मजबूर है। ऐसे गाँवों में आदिवासी विकास खंड के बाघन्नारा,गांधी ग्राम, चिनकी और सास जैसे वनांचल के गाँव आज अंधेरे में जीवन यापन कर रहे हैं। इन  गांवो  के लोग रात में अंधकार से निपटने के लिए  रोशनी के लिए एक मोमबत्ती का सहारा लेते हैं। देश की सरकारें यह मानकर की पूरे देश में अंधकार से निपटने के कारगर बिजली आपूर्ति हो गयी है और अब कैरोसीन की आवश्यकता नहीं है, यह मानकर गरीब आदिवासियों को मिलने वाली शासकीय उचित मूल्य दूकानों से कैरोसीन की सुविधा भी छीन ली गई है। मामला जिले के आदिवासी विकास खंड क्षेत्र के पाली जनपद के ग्राम सांस का है। यहां आजादी के बाद अब भी बुनियादी सुविधाओं का टोटा है। पाली के इस सांस गाँव मे  में तकरीबन  70 बैगा जाति के लोग निवास करते है। लगभग 100 से 200  की आबादी वाले इस गांव में रहते हैं जहाँ माध्यमिक तक एक विद्यालय भी है। 

आजादी के 78 साल बाद भी गांव की सूरत नहीं बदल सकी है। गांव में विद्युतीकरण नहीं हो सका है। कई वर्ष पहले गांव में बिजली के खम्भे खड़े कर  तार दौड़ा दी गयी, लेकिन अभी तक तार   गाँव मे रोशनी की किरणें गाँव तक नहीं पहुंच सकी। प्रशासनिक अमले के साथ इस क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने भी  इनके भविष्य के साथ खूब खिलवाड़ किया इनके द्वारा वोट के बदले  सिर्फ आश्वसान की घुट्टी  ही मिली। गांव के लोग कहते हैं कि बिजली न होने से रात में जंगली जानवरों का भय बना रहता है। लोगों को रात में उजाले के लिए सौर ऊर्जा व मोमबत्ती का सहारा लेना पड़ता है।

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने देश के हर घर तक बिजली पहुंचाने के लिए सहज बिजली हर घर योजना (सौभाग्य) लांच की थी, जिसके तहत घर घर बिजली देने का प्लान बनाया, लेकिन दिल्ली और भोपाल में बनी ये योजनाए सायद यहां पहुच ही नहीं पाई।  उमरिया जिले के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के बिरसिंहपुर पाली जनपद के कठई पंचायत के सांस गाँव व चांदपुर पंचायत के बाघन्नारा जहाँ बैगा जाति की बस्ती है जहां सांस गाँव मे लगभग 200 परिवार तो बाघन्नारा में लगभग 500 परिवार बैगा जाति के लोग निवाश करते लेकिन आज तक इस सांस गाँव मे उजाला को देखने के लिए कई वर्ष गुजर गए वन विभाग के जंगलों में खंभे लग गए तार भी दौड़ दिए लेकिन आज 5 से 6 वर्ष बीतने जा रहा तार में करेण्ट कब आएगा कोई बताने वाला नही है। 

लोकसभा चुनाव में प्रयुक्त वाहनों का अब तक भुगतान नही, सीएम हेल्प लाइन शिकायत दर्ज 


शहडोल

संसदीय चुनाव संपन्न हुये भले दो वर्ष की अवधि पूरी होने को है, लेकिन इस चुनाव में प्रयुक्त वाहनों का भुगतान आज तक नहीं किया जा सका। वाहनों के भुगतान न होने के कारण निर्वाचन शाखा और उसके अधिकारियों की साख पर बट्टा लगता दिखाई दे रहा है। बताया जाता है कि लोकसभा चुनाव शहडोल संसदीय क्षेत्र में शहडोल निर्वाचन कार्यालय व्दारा वाहनों को किराये पर लगाया गया था, लेकिन किराये के इन वाहनों का भुगतान आज तक नहीं किया गया है जिससे वाहन मालिकों में खासा आक्रोश व्याप्त है। वाहनों के मालिकों के व्दारा किराये के लिए निर्वाचन कार्यालय का चक्कर लगाते लगाते थक हार कर सी एम हेल्पलाइन का सहारा ले रखा है, उसमें भी उनके भुगतान के प्रति प्रशासनिक अधिकारियों का रवैया ठीक नजर नहीं आ रहा है।

लोकसभा चुनाव में अपनी गाड़ी लगाने वाले रमेश त्रिपाठी ने बताया कि शहडोल निर्वाचन कार्यालय कलेक्टर शहडोल के व्दारा उनका वाहन किराये पर लगाया गया था जिसके किराया राशि 36000.00 का भुगतान आज तक नहीं होने के कारण सी एम हेल्पलाइन का सहारा लेना पडा है। रमेश त्रिपाठी ने बताया की मेरे व्दारा सी एम हेल्पलाइन नंबर 31020223 पर 08 अप्रैल 2025 से लंबित है, जिसे लगातार प्रशासन फोर्स क्लोज कराने में जुटा हुआ है, जबकि मामले का निराकरण नहीं किया जा रहा है। मामले में बजट अप्राप्त होने का जिक्र  किया जा रहा है, जबकि निर्वाचन जैसे गंभीर कार्यों के लिए पहले से राशि की व्यवस्था होनी चाहिए। रमेश त्रिपाठी ने बतलाया की हमारे जैसे अन्य वाहन मालिक भी भुगतान के लिए निर्वाचन कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। वाहनों के किराये का लंबी अवधि के बाद भुगतान न हो पाना जिला अधिकारियों की कार्यशैली की कलई खोलकर रख दी है। अपेक्षा है जिला प्रशासन निर्वाचन जैसे संवेदनशील कार्यों की साख बचाने के लिए अविलंब भुगतान कराने की पहल करेंगे।

महिला ने पड़ोसन को बंधक बनाकर पीटा, धान खरीदी केंद्र के प्रबंधक पर FIR के निर्देश 


शहडोल/उमरिया

शहडोल जिले के ब्यौहारी थाना क्षेत्र से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक महिला ने अपनी ही पड़ोसी महिला को घर के अंदर बुलाकर बंधक बनाया और हाथ पैर बांध कर बेरहमी से मारपीट की। पीड़िता का आरोप है कि आरोपी महिला ने न सिर्फ उसके साथ मारपीट की, बल्कि उसका मोबाइल फोन और सोने के कान के झुमके भी छीन लिए। हैरानी की बात यह है कि आरोपी महिला ने वीडियो में सामान वापस करने की बात स्वीकार की, लेकिन अब तक न तो मोबाइल लौटाया गया और न ही जेवर।

घटना ब्यौहारी थाना क्षेत्र के बराछ गांव की है। पुलिस के अनुसार किरण तिवारी पति देवेंद्र तिवारी उम्र 28 वर्ष अपने घर के बाहर टहल रही थी। इसी दौरान पड़ोस में रहने वाली ललिता कहार ने उसे अपने घर बुलाया। जैसे ही किरण तिवारी आरोपी के घर के अंदर गई, ललिता ने दरवाजा बंद कर दिया और उसके हाथ-पैर बांध दिए। इसके बाद अपने पुत्र और पुत्री के साथ मिलकर किरण तिवारी की बेरहमी से पिटाई की।

पीड़िता किरण तिवारी के अनुसार उसका ललिता से कोई प्रत्यक्ष विवाद नहीं था, लेकिन पूर्व में पारिवारिक विवाद को लेकर आरोपी महिला रंजिश रखती थी। इसी रंजिश के चलते उसने इस घटना को अंजाम दिया। मारपीट के दौरान किरण तिवारी की चीख-पुकार सुनकर उसके परिजन मौके पर पहुंचे और उसे छोड़ने की गुहार लगाई, लेकिन आरोपी महिला ने उनके साथ भी मारपीट की और धमकाकर भगा दिया।

इसके बाद परिजनों ने पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने घटना देखकर हैरान रह गई, क्योंकि किरण तिवारी के हाथ-पैर बंधे हुए थे और वह मदद की गुहार लगा रही थी। पीड़िता ने पुलिस को बताया कि आरोपी ललिता गांव में लेडी डॉन के नाम से जानी जाती है और उसके खिलाफ पहले भी मारपीट के मामले दर्ज हैं।

किरण तिवारी का आरोप है कि मारपीट के दौरान आरोपी महिला ने उसका मोबाइल फोन और सोने के कान के झुमके छीन लिए। एक वीडियो में ललिता यह स्वीकार करती नजर आ रही है कि वह सामान वापस कर देगी, लेकिन घटना को काफी समय बीत जाने के बाद भी मोबाइल और जेवर वापस नहीं किए गए हैं। पीड़िता ने पुलिस प्रशासन से न्याय की गुहार लगाते हुए सामान दिलाने की मांग की है।

इस मामले में उपनिरीक्षक मोहन पड़वार ने बताया कि किरण तिवारी के साथ ललिता कहार एवं अन्य के द्वारा घर में बांधकर मारपीट करने की शिकायत दर्ज की गई है। पुलिस ने मामला कायम कर लिया है और पूरे प्रकरण की जांच की जा रही है। आरोपी महिला के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

*मार पीट करने वाले धान खरीदी केंद्र के प्रबंधक के विरुद्ध एफ आई आर के निर्देश*

उमरिया जिले के हर्रवाह धान खरीदी केंद्र के संचालक के व्दारा धान बेचने आये किसान के साथ मारपीट करना मंहगा पडता दिखाई दे रहा है । इस मामले को कलेक्टर धरणेंद जैन ने गंभीरता से लिया है और धान खरीदी केंद्र के प्रबंधक के विरुद्ध पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश खाद्य विभाग के अधिकारियों को दिये है।विदित होवे धान खरीदी केंद्र सिलपरी वेयर हाऊस धान खरीदी केंद्र में धान बेचने पहुंचे   किसान संजय राय की धान तौलाई का काम चल रहा था जिसमें 580 बोरी तुल चुकी थी और 66 बोरी धान तुलाई बची हुई थी कि तभी प्रबंधक  कर्ण सिंह किसान के पास पहुंचा और तुलाई बंद करने की बात करते हुए विवाद करने लगा, इसके बाद संजय राय के साथ मारपीट भी किया। शासन के निर्देशो के अनुरूप तुलाई के लिए कोई समय सारणी तय नहीं की है। धान खरीदी केंद्र के प्रबंधक का यह कृत्य अमानवीय और नियम विरुद्ध होने के कारण कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराते हुए धान खरीदी से अलग रखने के निर्देश जारी किये है। इसकी जिम्मेदारी खाद्य विभाग को सौंपी गई है।

बाघ का शिकार करने वाले 6 आरोपियों को वन विभाग ने किया गिरफ्तार


उमरिया 

जिले में बिजली का तार बिछाकर किया गया बाघ का शिकार करने वाले 6 आरोपियों को गिरफ्तार करके जिला न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ सीजीएम कोर्ट ने 3 दिन की न्यायिक रिमांड पर जंगल विभाग को सौंप दिया है। वही वन विभाग आरोपियों से पूछताछ करके अन्य जानकारी निकलवाने की कोशिश करेगी। विदित है कि 13 दिसम्बर 2025 को ट्रांसफर के पास से जीआई तार बिछाकर खूंटी गाड़कर बाघ का शिकार किया गया था। वारदात के सम्बन्ध में फारेस्ट एसडीओ कुलदीप त्रिपाठी ने जानकारी में बताया कि केस क्रमांक 7776 /23 आर एफ क्रमांक 10 के नजदीक खेत में मृत मिले बाघ विषय को लेकर जांच जारी थी, जिसमें 6 आरोपी शोभालाल पिता छोटेलाल, अंजनी पिता बाबूलाल, लरकुवा पिता चरका बैगा, अशोक पिता शिवचरण, लक्खू पिता डोभारी व अच्छेलाल को आरोपी बनाया गया है। अन्य आरोपी होने के संदेह में रिमांड पर लेकर पूछताछ की जावेगी बाद 3 दिन की रिमांड के बाद 18 दिसम्बर 2025 को पुनः कोर्ट में पेश किया जाएगा, जहां से सभी आरोपियों के खिलाफ आगे की अन्य कारवाही की जावेगी।

उप वनपाल की  कार्य शैली से आदिवासियों के ऊपर छाया संकट, रिश्वत की कमी तो मुर्गा से भरपाई  


उमरिया

आदिवासियों के हित संवर्धन के लिए कृत संकल्पित सरकार के कदमों पर राष्ट्रीय उद्यान बांधवगढ़ के धमोखर रेंज के रायपुर सर्किल के उप वनपाल पैर में बंधे पत्थर साबित हो रहे हैं। बताया जाता है कि यह उप वनपाल पिछले एक दशक से यहाँ पदांकित होकर आदिवासियों का जमकर शोषण कर रहे हैं। बताया जाता है कि आदिवासियों का शोषण, वन्य प्राणियों का शिकार, और वन संपदा के दोहन की इनकी कुशलता और उससे प्राप्त काली कमायी के कारण यह उप वनपाल  राष्ट्रीय उद्यान के अधिकारियों का कमाऊ पूत बनकर उभरा है और इसी के बदौलत अधिकारी- कर्मचारी  कोई भी रहे उप वनपाल उमेश वर्मन ही रहेंगे।

अभी हाल में सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने इस शासकीय सेवक की कलई खोलकर रख दी है। वीडियो में सकरिया निवासी रतन रैदास  से 1050 .00 रूपये हुकुम सिंह 1500.00 और  काशी रैदास  1500.00 रूपये की रिश्वत की बात बतायी गयी है। इसी तरह इन्ही अधिकारी के व्दारा रायपुर सर्किल के ग्राम पंचायत सकरिया के गिडरी में साठ वर्षीय कमल भान सिंह के बैंल (नटवा) का शिकार हो जाने के कारण वन विभाग व्दारा प्रदान की जाने वाली सहयोग राशि के बदले उप वनपाल के व्दारा खुले आम पैसो की मांग की जाती रही है और वद्ध  विकलांग आदिवासी रिश्वत की पूर्ति नहीं कर पाया तो उसने उसके मुर्गे को ही जबरन उठाकर ले गया। उप वनपाल की इस हरकत से आदिवासियों में व्यापक तौर पर क्षोभ व्याप्त है। खेद जनक कहा जाता है कि इन चार वीडियो के वायरल होने से राष्टीय उद्यान के अधिकारियों की    प्रतिष्ठा पर काले धब्बे लग रहे हैं परंतु आरोपित उप वनपाल को संरक्षित करने से यह सवाल उन पर लगने लगे हैं की इस रिश्वत में वरिष्ठ  अधिकारियों की सह पर ही उप वनपाल की दुकान दारी चल रही है। चार वीडियो जो  सामने आये है इस तरह की घटना कोई पहली और अनोखी नहीं है। भले ही उनका राज फाश न हो पाया हो लेकिन इनकी कार्य शैली से जन जन प्रभावित है । 

राष्ट्रीय उद्यान बांधवगढ़ के कतिपय अधिकारियों के व्दारा जिस तरह आदिवासियों का शोषण करने के मामले जिस तरह प्रकाश में लगातार आ रहें हैं इस पर जिला प्रशासन के आलाकमान अधिकारियों को संज्ञान लेते हुए आदिवासियों के हितों को संवर्धन करते हुए दोषियों को दंडित करने की आवश्यक कदम उठायेंगे।

शराब पीकर शिक्षक पहुँचा स्कूल, मचा बवाल, कलेक्टर ने किया निलंबित


उमरिया

बीते दिनों एक शिक्षक शराब के नशे में धुत होकर स्कूल पहुंचने के बाद काफी बवाल मचा था, वहीं यह खबर अखबारों और न्यूज़ चैनलों की सुर्खियां भी बनी हुई थी। इसके बाद जिले के कलेक्टर ने मामले का संज्ञान लेते हुए शिक्षक चंद्रभान कोल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

दरअसल शिक्षक चंद्रभान कोल मानपुर के करौंदी टोला शासकीय प्राथमिक स्कूल में पदस्थ है। लेकिन जब बच्चों को पढ़ने स्कूल पहुंचा तब वह शराब के नशे में धुत रहा है। स्कूल पहुंचने के बाद शिक्षक इस कदर नशे में चूर था कि वह हाथ पैर भी नहीं डूला पा रहा था। स्कूल में मौजूद बच्चों ने शिक्षक की यह हरकत देखी तब उन्होंने इसकी जानकारी परिजनों को दी तब परिजनों ने शराबी शिक्षक के खिलाफ कार्यवाही की मांग की थी। इस दौरान किसी ने शराबी शिक्षक का वीडियो अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर लिया और सोशल मीडिया में वायरल कर दिया।

शराब के नशे में चूर शिक्षक का वीडियो सोशल मीडिया सहित कई प्रमुख अखबारों और न्यूज़ चैनलों की सुर्खियां बन गए। मामले का संज्ञान जिले के कलेक्टर ने लिया और पूरे मामले की जांच ब्रा मानपुर से कराई गई जिसमें शिक्षक चंद्रभान कोल अक्सर शराब के नशे में ही स्कूल पहुंचता है। शिक्षक चंद्रभान कोल दोषी पाए जाने के चलते कलेक्टर ने उसे निलंबित कर दिया है।

धमोखर रेंज के विवादित डिप्टी रेंजर पर राष्ट्रीय उद्यान के अधिकारियों की बरस रही कृपा

*दशकों से एक ही जगह काट रहे चांदी*


उमरिया   

मध्य प्रदेश के बहु प्रसिद्ध राष्ट्रीय उद्यान बांधवगढ़ में शासन व्दारा जारी स्थानांतरण नीति के पालन के मामले  में फिसड्डी साबित हो रहा है, सामान्यतः शासन के तबादला नीति में एक शासकीय कर्मचारी के लिए एक स्थान पर एक पद पर अधिकतम 3 वर्ष की अवधि तय की गयी है, लेकिन इसके पालन में राष्ट्रीय उद्यान के आला अधिकारियों की भेदभाव पूर्ण कार्यशैली दुधारू गाय का काम कर रही है। तभी तो किसी कर्मचारी को बीच सत्र में ही प्रभार सौंपने के आदेश जारी कर उसका शोषण करते है तो कुछ कर्मचारियों को दशकों तक एक ही स्थान पर रखकर अवैध कमायी का जरिया बना रखा है। विदित हो की उमरिया जिला स्थित बाँधवगढ़ टाईगर रिजर्व क्षेत्र के धमोखर रेंज के सकरिया बीट सर्किल रायपुर में पिछले एक दशक से एक ही स्थान पर पदस्थ डिप्टी रेंजर उमेश बर्मन अंगद के पैर बनकर जमे हुए हैं, एक डिप्टी रेंजर का एक ही स्थान पर दशकों की पद स्थापना का मामला तबादला नीति के पालन कारी अधिकारियों के कार्यशैली संबंधित कर्मचारी के साथ ही कदाचरण की श्रेणी में आता है। नियम विरुद्ध इस पद स्थापना के लिए एक गंभीर मामला मानते हुए प्रशासनिक स्तर समीक्षा होनी चाहिए की इस दौरान किन कर्मचारियों की कितनी बार तबादला हुआ और इन्हें आखिर कार इस तबादला से क्यों बचाया गया, तथा दोषियों के विरूद्ध कार्यवाही किया जाना चाहिए, लेकिन बाँधवगढ़ टाईगर रिजर्व क्षेत्र के अधिकारियों को सब कुछ पता होने के बाद भी आखिर डिप्टी रेंजर पर क्यो मेहरबानी दिखा रहे हैं। 

राष्ट्रीय उद्यान बांधवगढ़ के धमोखर वन परिक्षेत्र की सकरिया बीट सर्किल रायपुर में प्रभारी डिप्टी रेंजर की संलिप्तता की शिकायतें पूर्व में भी प्रकाश में आयी थी की इनकी संलिप्तता से सागौन के घने जंगल वीरान बन गये हैं। सागौन,साल जैसे इमारती वृक्षों की अवैध और अधाधुंध कटाई का गिरोह राष्ट्रीय उद्यान के अस्तित्व को मिटाने में लगा हुआ है। इतना ही नहीं रेत चोरी का मामला भी इन्ही  के कारगुजारियों में से एक है। राष्ट्रीय उद्यान के क्षेत्र में होने के कारण आये दिन पालतू पशुओं के मौत की घटनाये हर दिन की घटनाओं में से एक हो गयी है। मध्यप्रदेश सरकार के व्दारा पालतू पशुओं के नुकसानी पर गरीब जनता को मिलने वाली मुआवजा राशि के बदले श्रीमान की कलम तभी आगे बढेगी जब पशुओं से हाथ धो चुका गरीब साहब की मुराद पूरी कर दे, अन्यथा गरीब के हाथ शासन व्दारा दी जाने वाली राहत राशि से भी हाथ धोना पड़ेगा।पशुओं के हानि होने पर पैसे मांगने के सीधे आरोप विभाग के ऊपर गम्भीर सवाल खड़े कर रहे हैं, उधर राष्ट्रीय उद्यान के जिम्मेदार अधिकारियो ने जांच के नाम पर व्यापक पैमाने पर लीपापोती कर अपने चहेते डिप्टी रेंजर को बचाने का बीड़ा उठा लिया है। आखिर कार उच्च अधिकारियों के नयनों के पलक बने इस डिप्टी रेंजर को बचाने के लिए प्रबंधन कब तक लुका छिपी का खेल खेल कर बचाता रहेगा। अपेक्षा है की वरिष्ठ अधिकारी इनकी कारगुजारियों से पर्दा उठा कर कानूनी कार्रवाई करें,वरना राष्ट्रीय उद्यान खेल का मैदान बनकर रह जायेगा।

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व क्षेत्र के डायरेक्टर डॉ0 अनुपम सहाय से बात की गई तो उनका कहना था कि अब आप बोल रहे हैं तो मैं पता कर लूंगा, मूझे याद नही है कि वो व्यक्ति कब से है। हटाने की नीति है, लेकिन हर कोई नही हटता डायरेक्टर साहब को अपने ही कर्मचारी का नाम नही पता कहा जो भी शिकायतें है, जांच कराई जाएगी। इस जांच में कोई आँच आएगी या फिर इसी तरह से डिप्टी रेंजर के ऊपर अधिकारियों की कृपा बरसती ही रहेगी।

शिक्षकों की  कमी, बाउंड्री वॉल की जर्जरता, नामांकन शुल्क में धांधली  पर आर-पार की लड़ाई 

*महाविद्यालय की त्रुटियों और शुल्क विसंगति को लेकर प्राचार्य को सौंपा ज्ञापन*


​उमरिया

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP), उमरिया इकाई ने आज रणविजय प्रताप सिंह महाविद्यालय में व्याप्त शैक्षणिक और प्रशासनिक अनियमितताओं के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए प्राचार्य महोदय को ज्ञापन सौंपा। अभाविप ने महाविद्यालय प्रशासन और विश्वविद्यालय की लचर कार्यप्रणाली पर कड़ा विरोध जताते हुए शीघ्र सुधार न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है। जिला संयोजक आकाश तिवारी के नेतृत्व में सौंपे गए इस ज्ञापन में महाविद्यालय की बदहाल स्थिति और छात्रों के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ को प्रमुखता से उठाया गया।

*​शिक्षकों का घोर अभाव*

महाविद्यालय में जहाँ 65 का स्टाफ होना चाहिए, वहाँ केवल 11 लोग कार्यरत हैं। शिक्षकों की इस भारी कमी से पठन-पाठन पूरी तरह ठप है।नामांकन शुल्क में अवैध वसूली: विश्वविद्यालय द्वारा UTD के छात्रों से ₹500 नामांकन शुल्क लिया जा रहा है, जबकि संबद्ध महाविद्यालयों के छात्रों से ₹750 वसूले जा रहे हैं। अभाविप ने इस ₹250 की अतिरिक्त वसूली को अन्यायपूर्ण बताते हुए छात्रों को रिफंड करने की मांग की है।सुरक्षा से खिलवाड़ (टूटी बाउंड्री वॉल): महाविद्यालय की बाउंड्री वॉल कई जगह से क्षतिग्रस्त है, जिससे परिसर में असामाजिक तत्वों का प्रवेश होता है। यह छात्रों और संपत्ति की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है।

*​संसाधनों की कमी*

विज्ञान प्रयोगशालाओं में उपकरण और रसायनों का अभाव है, तथा पुस्तकालय में नई पुस्तकों की भारी कमी है। मूलभूत सुविधाओं का टोटा: परिसर में पीने के साफ पानी र शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है।

*​परीक्षा परिणाम में देरी*

CCE और प्रैक्टिकल के अंक समय पर अपलोड न होने से परिणाम लटक जाते हैं। अभाविप ने मांग की है कि परीक्षा फॉर्म भरने से पहले ही ये अंक पोर्टल पर अपडेट किए जाएं।

*​छात्र हितों से समझौता नहीं*

इस अवसर पर अभाविप के जिला संयोजक आकाश तिवारी ने कहा, महाविद्यालय प्रशासन छात्रों के भविष्य के प्रति उदासीन है। एक तरफ शिक्षकों की कमी से पढ़ाई नहीं हो रही, वहीं दूसरी तरफ फीस के नाम पर छात्रों से भेदभाव किया जा रहा है। टूटी बाउंड्री वॉल सुरक्षा पर प्रश्नचिन्ह है। यदि प्रशासन ने हमारी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया और जल्द सुधारात्मक कदम नहीं उठाए, तो विद्यार्थी परिषद लोकतांत्रिक ढंग से उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगी, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

शासन द्वारा तय वेतन की मांग को लेकर आंदोलन की राह पकड़ेंगे चालक


उमरिया

मध्यप्रदेश प्रदेश ड्राइवर महासंघ उमरिया की एक महती बैठक आयोजित की गयी इस बैठक में जिले के सैकड़ों चालकों ने भाग लिया।बैठक में चालकों की एक सूत्रीय मांग पर विचार किया गया। विदित होवे की साऊथ ईस्ट कोल कंपनी जोहिला एरिया के कंचन ओपन कास्ट में चल रहे भारी वाहनों में कार्यरत चालकों का भारी शोषण किया जा रहा है। मालूम होवे की शासन व्दारा चालकों की दैनिक मजदूरी 1350=00 रूपये तय की गयी है लेकिन चालकों से आधी अधूरी मजदूरी देकर काम कराया जा रहा है जिसके विरोध में मध्यप्रदेश डाइवर महासंघ ने आज बैठक आयोजित कर चरण बद्ध आंदोलन का निर्णय लिया है। पहले चरण में शासन -प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर मध्यप्रदेश शासन के व्दारा तय वेतन की मांग की जायेंगी, और मांग पूरी नहीं होने की स्थिति में महासंघ उग्र आंदोलन छेडते हुए काम बन्द हड़ताल की जायेगी। मालुम हो की एस ई सी एल सेमी गर्वनमेन्ट कंपनी होने के बाबजूद ठेका कंपनियों के व्दारा श्रमिकों का बददस्तूर शोषण किया जा रहा है जबकि प्रिसिंपल एम्पलाइज होने के नाते एस ई सी एल की जिम्मेदारी होती है कि किसी भी श्रमिक का शोषण ठेकेदार या वाहन मालिकों के व्दारा न किया जाये फिर भी ठेका श्रमिकों, वाहन चालकों के शोषण अनवरत रूप से जारी है। देखना होगा की श्रमिक शोषण के इस संवेदनशील मामले मे प्रबंधन और प्रशासन क्या कदम उठाती है। 

बैठक में मध्यप्रदेश ड्राइवर महासंघ   ने संकल्प लिया है कि नशे की हालत में गाड़ी नहीं चलाएंगे नशा मुक्ति अभियान चलाएंगे, उक्ताशय का संंकल्प राजू रैदास के नेतृत्व में संपंन हुई।

घटिया रेत, सरिया से बनी बांऊण्डी बाल की दीवार हुई तिरछी, अधिकारियों की संरक्षण में चल रहा गुणवत्ताविहीन कार्य 


उमरिया

गुणवत्ता का पैमाना माना जाने वाली रेलवे के निर्माण कार्य भी आज घटिया कार्यों की मंजिलें गढने की इबारतें लिख रहा है, तभी तो रेलवे के निर्माण कार्य भी घटिया पन की बलि चढते नजर आ रहें हैं। कभी रेलवे की गुणवत्ता मानक की मिसाल पेश की जाती रही है, बदलते परिवेश ने  रेलवे के निर्माण कार्यो की गुणवत्ता को लील लिया, और रेलवे के निर्माण कार्य भी अत्यंत घटिया पूर्व और कमायी के जरिया बनकर उभरें है। निर्माण कार्यो में गुणवत्ता मानकों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही है,  नौरोजाबाद रेलवे स्टेशन में चल रहें बाऊण्डी बाल और नाली निर्माण कार्य को देखने  में प्रयुक्त होते वाली घटिया सामग्री हर एक के आंखों में चुफ रही है। लोहे की प्रयुक्त सरिया और मीट्टी युक्त रेत ठेकेदार के घटिया काम की पोल खोल कर रख दी है।ठेकेदार के इन कामों को देखकर लगता है कि यह सिर्फ शासकीय धन राशि को डकारने से ज्यादा कुछ कार्य एजेंसी करना नहीं चाहती। बताया जाता है कि बाऊण्डी बाल में सरिया का प्रयोग धरातल से न कर दो ढाई फीट ऊपर से लगायी गई है, जबकि किसी भी निर्माण कार्य में ऐसा होता नहीं है। जंग युक्त लोहे की सरिया और मिट्टी युक्त रेत से निर्मित यह बाऊण्डी बाल और नाली की उम्र क्या होगी, इसको लेकर निर्माण काल से ही सवाल उठाये जाने लगे हैं, लेकिन जिन रेलवे के अधिकारियों की जिम्मेदारी घटिया पन कार्य को रोकने की होती है वह तो उन ठेकेदारो की कृपा बरसाते नजर आ रहें हैं।अगर उनकी कृपा भरी दृष्टि न होती तो  घटिया निर्माण कार्य में रोक नहीं लगायी जाती है । रेलवे की बन रही बांऊण्डी बाल की दीवार देखने में वह पूरी तरह से टेढ़ी -मेढ़ी और लहराई हुई नजर आ रही है। यह निर्माण कार्य  शासकीय धन राशि की होली खेलने से ज्यादा कुछ साबित नहीं होगा ‌। विदित होवे पिछले दिनों नौरोजाबाद रेलवे स्टेशन में नव निर्मित ओभर बिज इसी गुणवत्ता हीन होने का दंश आम नागरिक उठा रहे हैं। रेलवे  के अधिकारी  भी आज के परिवेश ठेकेदारो की गुलामी के आदी हो गयें है, तभी तो रेलवे जैसे संवेदनशील विभाग में बोर्ड लगाने जैसी आवश्यक पैमाना  को लगभग गायब ही कर दिया गया है, जिसको देखकर कार्य की मूल भूत जानकारी  का आंकलन लगाया जा सकें। यहाँ से शुरू हुआ अनियमितता का खेल आखिर तक  छल कपट गुणवत्ता हीन पूरा कर शासकीय धन राशि को हडप कर ठेकेदार चलते बनते हैं और उसकी त्रासदी लोग वर्षों  भुगतते रहते हैं। अपेक्षा है कि उच्च  रेल प्रबंधन मामले की गंभीरता से लेते हुए गुणवत्ता युक्त कार्य कराने के लिए आवश्यक कदम उठायेगी।

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