ठेकेदार ने कार्यपालन अभियंता पर मारपीट, गाली व धमकी के आरोप, मुख्यमंत्री तक पहुँची शिकायत

*जिला पंचायत सदस्य ने सौंपा पत्र, उच्चस्तरीय जांच की मांग*


उमरिया

संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र, बिरसिंहपुर पाली की कार्यप्रणाली और कथित अनियमितताओं को लेकर मामला अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंच गया है। गुरुवाही में आयोजित कार्यक्रम के दौरान जिला पंचायत सदस्य एवं सहकारिता और उद्योग समिति की सभापति बेला अर्जुन सिंह सैयाम ने मुख्यमंत्री को पत्र सौंपकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की।

पत्र में ठेकेदार नीरज मिश्रा द्वारा कार्यपालन अभियंता राम आश्रय शर्मा पर लगाए गए मारपीट, गाली-गलौज और धमकी देने के आरोपों का उल्लेख किया गया है। इसके साथ ही मुख्य अभियंता एच.के. त्रिपाठी के कार्यकाल में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की जांच कराने का अनुरोध भी किया गया है। 

ठेकेदार नीरज मिश्रा ने बताया की 5 अक्टूबर 2026 को संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र के सिविल डिवीजन क्रमांक-2 की निविदा प्रक्रिया में भाग लेने के बाद उन्हें कार्यालय बुलाया गया था। उनका आरोप है कि इस दौरान कार्यपालन अभियंता राम आश्रय शर्मा ने उनके साथ मारपीट की, गाली-गलौज की और धमकी दी। ठेकेदार ने घटना के संबंध में पाली थाने में शिकायत देने और मेडिकल परीक्षण कराने की बात कही है।

मिश्रा का आरोप है कि पुलिस से अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने पुलिस अधीक्षक उमरिया को भी आवेदन सौंपकर एफआईआर दर्ज करने और निष्पक्ष जांच की मांग की। अब यह मामला जनप्रतिनिधि के माध्यम से मुख्यमंत्री तक पहुंच गया है।

मुख्यमंत्री को सौंपे गए पत्र में मुख्य अभियंता एच.के. त्रिपाठी के कार्यकाल के दौरान टेंडर प्रक्रिया, निर्माण कार्यों, वित्तीय लेन-देन और प्रशासनिक व्यवस्था से संबंधित कथित अनियमितताओं की जांच कराने की मांग की गई है। कार्यालय की सीसीटीवी फुटेज, मेडिकल रिपोर्ट, संबंधित कर्मचारियों के बयान और निविदाओं से जुड़े दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण होगी। 

 छोटी महानदी में नहाने गया युवक की डूबकर हुई मौत, रेस्क्यू टीम को 24 घंटे बाद मिला शव


उमरिया

छोटी महानदी के गहरे पानी में डूबे 26 वर्षीय राहुल उर्फ रवि बर्मन का शव सुबह करहिया डैम में मिला। करीब 24 घंटे तक बेटे की सुरक्षित वापसी की उम्मीद लगाए बैठे परिजनों पर जैसे ही उसकी मौत की खबर पहुंची, घर में चीख-पुकार मच गई।

जानकारी के अनुसार, चंदिया थाना क्षेत्र के वार्ड क्रमांक-1 निवासी राहुल, पिता राजेश बर्मन अपने दोस्त राज कुशवाहा सहित चार अन्य साथियों के साथ छोटी महानदी पहुंचा था। बताया जाता है कि राहुल नहाने के लिए नदी में उतरा, तभी वह गहरे पानी में डूब गया। घटना के बाद उसकी तलाश शुरू की गई।

सूचना मिलने पर एसडीईआरएफ की टीम ने नाव की मदद से नदी में सर्च ऑपरेशन चलाया, लेकिन रविवार देर शाम तक उसका कोई सुराग नहीं मिला। सुबह करहिया डैम में राहुल का शव दिखाई दिया। शव पत्थरों के बीच फंसा होने के कारण उसे निकालने में बचाव दल को काफी मशक्कत करनी पड़ी। आखिरकार सुबह करीब 11 बजे शव को बाहर निकाला गया।

जिस बेटे के लौटने की आस में परिवार पूरी रात इंतजार करता रहा, उसकी मौत की खबर ने परिजनों को तोड़कर रख दिया। घटना से चंदिया क्षेत्र में शोक की लहर है। पुलिस द्वारा शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने सहित आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

युवक की जलकर हुई थी मौत, सदमे में पिता व दादी की हुई मौत, जलाकर मारने का लगा आरोप, न्याय की मांग

*पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल*


उमरिया

मानपुर के मझौली गांव में तीन लोगों की मौत पर कई सवाल खड़े कर रही है। जुलाई में कृष्णा उर्फ गोलू केवट गंभीर रूप से जल गया था और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि उसे पेट्रोल डालकर आग लगाई गई थी। परिवार का दावा है कि घटना के बाद से वह लगातार न्याय के लिए पुलिस और जनप्रतिनिधियों के पास जा रहा है।

परिजन और ग्रामीणों के अनुसार, गोलू गांव में विद्या बाई केवट की किराना दुकान पर गया था। बताया गया कि उसने अपना मोबाइल चार्जिंग पर लगाने के लिए कमरे में रखा था। आरोप है कि बाद में कमरे के भीतर उसके साथ विवाद हुआ और उस पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी गई। ग्रामीणों का आरोप है कि उसे कमरे में बंद कर दिया गया था।

गंभीर रूप से झुलसने के बाद गोलू को अस्पताल ले जाया गया। परिजन के मुताबिक, उसे अलग-अलग अस्पतालों में उपचार के लिए ले जाया गया, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी। बेटे की मौत के करीब 15 दिन बाद उसके पिता खानचंद केवट की भी मृत्यु हो गई। इसके बाद बुजुर्ग दादी ने भी दम तोड़ दिया। परिवार का कहना है कि लगातार हुए इन सदमों ने उन्हें तोड़ दिया है।

मृतक की पत्नी पूजा केवट ने आरोप लगाया कि घटना के बाद शिकायत करने के बावजूद परिवार को अब तक न्याय नहीं मिला। मृतक की मां ने भी पुलिस अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से कई बार गुहार लगाने की बात कही। परिवार का कहना है कि घर में कमाने वाला कोई नहीं बचा और अब उनके सामने आर्थिक संकट भी खड़ा हो गया है।

मानपुर थाना प्रभारी ब्रज किशोर गर्ग के अनुसार, मामले में प्रकरण दर्ज किया गया है और आरोपी विद्या बाई की तलाश की जा रही है।

प्रसिद्ध बाघिन 'डॉटी' की हुई मौत, माँ से बिछड़ गए दो शावक, शव का किया पोस्टमार्टम, जांच के लिए नमूने की इकट्ठे


उमरिया

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के जंगल में प्रसिद्ध बाघिन 'डॉटी' की मौत हो गई है। मानपुर बफर रेंज के मझखेता बीट में गश्त के दौरान डॉटी का शव मिलने से वन विभाग में हलचल मच गई। सबसे भावुक करने वाली बात यह है कि डॉटी के लगभग 15 से 16 माह के दो शावक अब अपनी मां से बिछड़ गए हैं। दोनों शावकों को क्षेत्र में अलग-अलग विचरण करते हुए देखा गया है। वन विभाग ने उनकी गतिविधियों पर निगरानी बढ़ा दी है। बाघिन का किया गया अंतिम संस्कार।

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व हाथियों की मदद से गश्त के दौरान मानपुर बफर रेंज के मझखेता बीट में दोपहर बाद एक मादा बाघ का शव दिखाई दिया। सूचना मिलते ही वन विभाग के अधिकारियों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया का पालन किया। घटनास्थल को घेरकर सुरक्षित किया गया और वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी गई। शाम को डॉग स्क्वाड की मदद से मृत बाघिन और आसपास के इलाके की सघन जांच कराई गई। इस दौरान कोई संदिग्ध गतिविधि या वस्तु सामने नहीं आई। इसके बाद वन विभाग ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई की।

सक्षम वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारी और विकासखंड पशु चिकित्सा अधिकारी के दल ने वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में बाघिन के शव का पोस्टमार्टम किया। पूरी प्रक्रिया की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी भी कराई गई। आगे की जांच के लिए आवश्यक नमूने एकत्र किए गए हैं, जिन्हें विभिन्न प्रयोगशालाओं में भेजा जा रहा है। वन विभाग के अनुसार पोस्टमार्टम के दौरान प्रथम दृष्टया मौत का कारण प्राकृतिक पाया गया है। हालांकि मौत के कारणों की विस्तृत जांच के लिए नमूनों की प्रयोगशाला रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी। डॉटी की मौत के बाद उसके दोनों शावकों की सुरक्षा वन विभाग के लिए महत्वपूर्ण हो गई है। करीब 15 से 16 माह की उम्र में दोनों शावक मां से अलग होकर जंगल में विचरण कर रहे हैं। 

स्कूल को सात साल से नहीं मिली, इको क्लब, स्पोर्ट्स व शाला रखरखाव की राशि, अव्यवस्थाओं से जुझते छात्र- छात्राएं


उमरिया

सरकार भले ही आदिवासी बच्चों के लिये समग्र शिक्षा अभियान, पीएम श्री, स्वच्छ भारत मिशन, इको क्लब फॉर मिशन लाइफ और खेलो इंडिया जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं का ढिंढोरा पीट रही हो, लेकिन उमरिया  जिले के सुदूर आदिवासी बाहुल्य प्राथमिक शाला चंगेरा (डाइस कोड 23150706501) में इन योजनाओं की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।

यह शाला 2019 तक एक शाला एक परिसर के तहत हाई स्कूल चंगेरा के साथ कक्षा 1 से 10 तक एक ही परिसर में संचालित होती थी। तब डीपीआई मद से इको क्लब, स्पोर्ट्स और शाला भवन रखरखाव की संयुक्त राशि संकुल प्राचार्य के माध्यम से आती थी। 2019 में जब हाई स्कूल अलग भवन में शिफ्ट हो गया, तब से प्राथमिक शाला के हिस्से की राशि गायब हो गई। वर्तमान में यहां 77 बच्चे दर्ज हैं, जिनमें 90% आदिवासी समाज के हैं। यही बच्चे सरकार की इन योजनाओं के असली हकदार हैं।

इको क्लब फॉर मिशन लाइफ योजना के तहत हर साल 2500 से 5000 रुपये का प्रावधान है। लेकिन चंगेरा में 2019 से एक भी पौधा इस मद से नहीं लगा। शाला की बगिया उजड़ी पड़ी है। खेलो इंडिया और समग्र शिक्षा का स्पोर्ट्स ग्रांट के तहत प्राथमिक शाला को 5000 से 10000 रुपये खेल सामग्री के लिए मिलते हैं ताकि आदिवासी अंचल की प्रतिभा निखर सके। 

शाला भवन रखरखाव और समग्र शिक्षा का कंपोजिट ग्रांट के तहत हर साल 25000 से 75000 तक का कंपोजिट स्कूल ग्रांट शाला की रंगाई-पुताई, शौचालय मरम्मत, पेयजल और फर्नीचर सुधार के लिए दिया जाता है। लेकिन तीनो मदो से 7 वर्ष से एक रुपया नही आया जिससे बच्चो का व स्कूल का विकास पूरी तरह रुक गया है। ग्रामीणों ने कलेक्टर से मांग की है कि 7 साल की लंबित राशि ब्याज सहित शाला को जारी की जाए।

निर्माणाधीन रिसोर्ट के स्टोर का ताला तोड़कर चोरी करने वाले दो आरोपी गिरफ्तार, चोरी की सामग्री जब्त


उमरिया

इंद्रभान शुक्ला पिता प्रेमलाल शुक्ला, उम्र 50 वर्ष, निवासी मारूति नगर, सतना द्वारा चौकी ताला थाना मानपुर में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि दिनांक 12 सितंबर 2026 को शाम को अज्ञात चोरों द्वारा उनके निर्माणाधीन रिसोर्ट के स्टोर का ताला तोड़कर अंदर प्रवेश किया गया तथा इन्वर्टर, हैमर मशीन, गैस सिलेंडर, राशन, ग्राइंडर, मार्बल कटर चोरी कर ली गई। रिपोर्ट पर थाना मानपुर में अपराध क्रमांक 326/2026, धारा 331(3), 305(ए) बीएनएस पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया।

पुलिस द्वारा घटना के आरोपियों की पतासाजी हेतु मुखबिर तंत्र सक्रिय कर संदिग्ध व्यक्तियों से पूछताछ की गई। पूछताछ के दौरान सजन बैगा उर्फ सूरज पिता रामसजीवन बैगा, उम्र 28 वर्ष एवं दिल्लू उर्फ दिलीप बैगा पिता रविंदा बैगा, उम्र 28 वर्ष, दोनों निवासी ताला द्वारा अपने अन्य साथियों संतोष बैगा एवं सूरज बैगा के साथ मिलकर घटना करना तथा चोरी की सामग्री को आपस में बांट लेना बताया गया।

आरोपी सजन बैगा उर्फ सूरज बैगा के कब्जे से माइक्रोटेक कंपनी का एक इन्वर्टर तथा आरोपी दिल्लू उर्फ दिलीप बैगा के कब्जे से एक हैमर कटर मशीन एवं ड्रिल मशीन,  बरामद की गई। दोनों आरोपियों को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया है।

छात्रवृत्ति की राशि नहीं मिलने पर, छात्राओं ने कलक्ट्रेट पहुँचकर कलेक्टर को सौपा आवेदन, जाँच की मांग


उमरिया                 

छात्रवृत्ति की राशि का भुगतान लंबे समय से नहीं होने से परेशान छात्राओं ने अपनी समस्या मीडिया के सामने रखी। छात्राओं का कहना है कि उन्होंने छात्रवृत्ति के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन और आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर दी थीं, बावजूद इसके अभी तक उनके खाते में राशि नहीं पहुंची है। इस संबंध में छात्राओं द्वारा कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर आवेदन भी दिया गया है।

मामला शैक्षणिक सत्र 2022-23 की छात्रवृत्ति से जुड़ा है। आवेदन में उल्लेख किया गया है कि छात्रवृत्ति के लिए प्रक्रिया पूरी किए जाने के बावजूद भुगतान लंबित है। छात्राओं का कहना है कि छात्रवृत्ति का भुगतान संबंधित विभागीय प्रक्रिया के तहत होना है, लेकिन काफी समय बीत जाने के बाद भी उन्हें राशि प्राप्त नहीं हुई।

छात्राओं ने बताया कि छात्रवृत्ति उनके लिए पढ़ाई से संबंधित आवश्यक खर्चों को पूरा करने में महत्वपूर्ण होती है। राशि समय पर नहीं मिलने के कारण उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। छात्राओं का कहना है कि वे लगातार भुगतान का इंतजार कर रही हैं, लेकिन स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है कि आखिर छात्रवृत्ति की राशि कब तक उनके खातों में पहुंचेगी।

छात्राओं ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि यदि दस्तावेज या प्रक्रिया से संबंधित कोई कमी है तो उसकी जानकारी उन्हें दी जाए, ताकि आवश्यक सुधार कर सकें। वहीं यदि विभागीय स्तर पर भुगतान लंबित है तो उसे जल्द पूरा कराया जाए। छात्राओं ने कलेक्टर से पूरे मामले की जांच कराने तथा संबंधित विभाग से छात्रवृत्ति भुगतान की स्थिति की जानकारी लेकर लंबित राशि जल्द से जल्द दिलाए जाने की मांग की है।

शिक्षा के नाम पर मजाक, भाजपा विधायक की मांग, ढेड़ साल बाद भी नही जागी सरकार, नहीं मिला विद्यालय भवन


उमरिया

पीएम श्री का तमगा लिए शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय लोरहा में शिक्षा व्यवस्था मजाक बनकर रह गई है। जहाँ नर्सरी से 12वीं तक लगभग 900 छात्र अध्ययनरत हैं, उनका भविष्य भवन के बिना दांव पर लगा है। विद्यालय में कुल 16 कमरों और टीन के टपरों में बच्चों को कैद कर दिया गया है। जनपद करकेली की ग्राम पंचायत लोरहा में बच्चे जान हथेली पर रखकर जर्जर कमरों में पढ़ने को मजबूर हैं। 50 प्रतिशत कक्षाएं आज भी टीन शेड में लगती हैं। न बाउंड्रीवॉल है, न पर्याप्त शौचालय, न पानी टंकी, न खेल मैदान। कंप्यूटर लैब का सामान धूल खा रहा है क्योंकि उसे रखने तक की जगह नहीं है।

सरपंच रेखा कुशवाहा और प्राचार्य विनोद कुमार मिश्रा कलेक्टर से लेकर जिला शिक्षा अधिकारी तक गुहार लगाते-लगाते थक चुके हैं। तब ग्रामीण बांधवगढ़ भाजपा विधायक से मिले और विद्यालय भवन की समस्या बताई। इस पर विधायक शिवनारायण सिंह लल्लू भैया ने 1 मार्च 2025 को पत्र क्रमांक 181/25 लिखकर कलेक्टर उमरिया से भवन की अनुशंसा की थी। कलेक्टर कार्यालय ने 17 मई 2025 को पत्र क्रमांक 1718/राजस्व/2023 के माध्यम से फाइल जिला शिक्षा अधिकारी को सरका दी और उसके बाद फाइल ठंडे बस्ते में चली गई।

ग्राम पंचायत लोरहा के  द्वारा 4 फरवरी, 21 फरवरी  और 12 मार्च 2025 को लगातार आवेदन दिए गए। प्राचार्य ने 23 जुलाई 2025 को फिर सरपंच को पत्र लिखकर कमियां गिनाईं। 22.6670 हेक्टेयर नजूल भूमि के हस्तांतरण के लिए आरसीएमसी  पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन तक कर दिया गया, लेकिन सिस्टम टस से मस नहीं हुआ।

सवाल सीधा है, जब पीएम श्री स्कूल में ही भवन नहीं है, तो शिक्षा की गुणवत्ता का ढिंढोरा किस बात का है? विधायक की अनुशंसा के बाद भी डेढ़ साल तक भवन स्वीकृत न होना, यह लापरवाही नहीं तो क्या है? अब ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द भवन स्वीकृत नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

नदी पार कर कब्रिस्तान जाना बन सकता है मौत का सफर, तेज बहाव के बीच लोग पार कर रहे हैं नदी


उमरिया

मौत के बाद हर इंसान को दो गज जमीन तक पहुंचने का हक है,लेकिन नोरोज़ाबाद से सटे ग्राम कंचनपुर में यह आखिरी सफर भी किसी इम्तिहान से कम नही। 

जिले के कंचनपुर के पीपल चौक के पास रहने वाले मुजीबुर्रहमान का हार्ट अटैक से निधन हो गया। बुधवार को उन्हें गांव के उस कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया गया, जो नदी की दूसरी ओर स्थित है। जनाजा कब्रिस्तान तक पहुंचाने के लिए लोगों को करीब 4 से 5 फीट गहरी नदी की धार पार करनी पड़ी। शव को पानी के बीच से लेकर गुजरना जोखिम भरा था। तेज बहाव और गहराई के कारण बड़ी संख्या में लोग चाहकर भी नदी पार करने की हिम्मत नहीं जुटा सके और आखिरी मिट्टी में शामिल होने से महरूम रह गए। यह दृश्य सिर्फ एक परिवार की मजबूरी नहीं, बल्कि व्यवस्था के सामने खड़ा बड़ा सवाल भी है कि आखिर किसी इंसान के आखिरी सफर के लिए भी सुरक्षित रास्ता क्यों नहीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि नदी पर रपटा या सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था की मांग कई बार प्रशासन से की जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। अंतिम संस्कार के लिए मुक्तिधाम जाना लोगो के लिए मौत का सफर बन सकता है।

इसी तरह उमरिया मुख्यालय के ज्वालामुखी टोला में भी मुक्तिधाम नदी के दूसरी ओर श्मशान घाट होने के कारण लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है। हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि हाल ही में अंतिम संस्कार के लिए शव ले जाते समय तेज बहाव में शव दो बार नदी में बह गया। परिजनों की तत्परता से उसे तत्काल पकड़ लिया गया, जिसके बाद अंतिम संस्कार हो सका। ज्वालामुखी श्मशान घाट तक सुरक्षित पहुंच मार्ग के लिए महिला वार्ड पार्षद विनीता संजय तिवारी और सविता सोंधिया ने नगरपालिका से जल्द रपटा सहित आवश्यक व्यवस्था कराने की मांग की है। कंचनपुर और ज्वालामुखी की तस्वीरें देख एक सवाल ज़रूर सामने खड़ा है कि क्या आखिरी सफर को सुरक्षित बनाने के लिए भी अब किसी हादसे का इंतजार करना पड़ेगा।

कलकत्ता से आए व्यापारियों से अवैध वसूली, नहीं काटी जा रही रसीद, नगर पालिका पर लाखों के वारा न्यारे के आरोप


उमरिया

जिला मुख्यालय में नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। बस स्टैंड और सब्जी मंडी परिसर में पिछले 15 दिनों से चल रहे कलकत्ता बाजार मेले में खुलेआम अवैध वसूली का खेल चल रहा है।

इस मेले में लगभग 300 दुकानें लगी हैं। व्यापारियों का आरोप है कि नगर पालिका उमरिया के दो कर्मचारी प्रतिदिन प्रत्येक दुकानदार से 200 से 300 रुपये तक की बैठकी वसूलते हैं, लेकिन बदले में नगर पालिका की कोई वैध रसीद नहीं दी जाती।

यदि एक दिन का औसत 250 रुपये भी माना जाए तो 300 दुकानों से प्रतिदिन 75 हजार रुपये और 15 दिनों में 11 लाख रुपये से अधिक की वसूली बनती है। इतनी बड़ी राशि का कोई हिसाब-किताब नगर पालिका के रिकॉर्ड में नहीं है। इससे साफ है कि यह पैसा शासन के खजाने में जमा न होकर सीधे निजी जेब में जा रहा है। होना यह चाहिए कि मेले में सभी व्यापारियों की पूरे एक माह की बैठकी की राशि एक मुश्त एडवांस में लेकर रसीद काटी जानी चाहिए। 

गौर करने वाली बात यह है कि जब जिला मुख्यालय की नगर पालिका में ही इस तरह की वित्तीय अनियमितता और धांधली खुलेआम चल रही है, तो अन्य जगहों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। बिना रसीद के पैसा लेना सीधे-सीधे भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है।

बाहर से रोजगार के लिए आए गरीब व्यापारियों ने कलेक्टर उमरिया से मामले की निष्पक्ष जांच, वसूली गई राशि का ऑडिट और दोषी कर्मचारियों के साथ-साथ इसमें शामिल अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

इस संबंध में नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी से जब इस मामले में चर्चा की गयी तो उनका कहना है की आफ लाइन रसीद नहीं दी जा रही है, फिर आन लाइन काटी जायेगी। 

बाजार में लगी आग, 12 दुकानो में रखा सामान जला, लाखो का नुकसान, दमकल ने पाया आग पर काबू


उमरिया 

असामाजिक तत्वों ने देर रात लगाई आग शहर के सब्जी मंडी में लगी कलकत्ता बाजार में देर रात भीषण आग लगने से एक दर्जन से अधिक दुकानें इसकी चपेट में आ गईं। आग इतनी तेजी से फैली कि दुकानों में रखा कपड़ा और अन्य सामान जलकर खाक हो गया। घटना में लाखों रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है। खोजेंजानकारी के अनुसार, रात करीब 2 बजे अचानक बाजार क्षेत्र में आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और आसपास स्थित करीब एक दर्जन दुकानों को अपनी चपेट में ले लिया। आग की लपटें और धुएं का गुबार देखकर क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और आग बुझाने का अभियान शुरू किया। दमकल कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। समय रहते आग को नियंत्रित कर लिए जाने से बाजार की 100 से अधिक अन्य दुकानों को आग की चपेट में आने से बचा लिया गया।

आग लगने से प्रभावित दुकानों में रखा कपड़ा और अन्य सामान पूरी तरह जलकर नष्ट हो गया। प्रारंभिक रूप से घटना में लाखों रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है। हालांकि नुकसान का वास्तविक आंकलन संबंधित विभाग और प्रभावित दुकानदारों की जानकारी के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

फिलहाल आग लगने के कारणों का स्पष्ट पता नहीं चल सका है। आग दुर्घटनावश लगी या इसके पीछे कोई अन्य कारण है, इसकी जांच की जा रही है। पुलिस और संबंधित विभाग की जांच पूरी होने के बाद ही घटना के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।

नदी किनारे जमीन में दफन मिला लापता युवक का शव, परिजनों ने जताई हत्या की आशंका


उमरिया

कोतवाली थाना क्षेत्र के मगरघरा गांव में उस समय सनसनी फैल गई, जब कई दिनों से लापता एक युवक का शव नदी किनारे जमीन के अंदर दफन मिला। शव की पहचान 30 वर्षीय गो चरण सिंह के रूप में हुई है, जो 5 सितंबर से लापता था। शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिलने के बाद परिजनों ने युवक की हत्या कर शव को छिपाने के उद्देश्य से दफन किए जाने की आशंका जताई है।

जानकारी के अनुसार गो चरण सिंह के अचानक लापता होने के बाद परिजन उसकी तलाश में जुटे हुए थे। गांव सहित आसपास के संभावित स्थानों पर खोजबीन की गई, लेकिन युवक का कोई सुराग नहीं मिला। इसी दौरान 9 सितंबर को नदी किनारे एक चरवाहे को एक स्थान से असामान्य रूप से तेज दुर्गंध महसूस हुई। स्थान संदिग्ध लगने पर उसने मामले की सूचना पुलिस को दी।

सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और संदिग्ध स्थान का निरीक्षण किया। इसके बाद जमीन की खुदाई कराई गई तो भीतर से युवक का शव बरामद हुआ। शव बाहर निकाले जाने के बाद उसकी पहचान गो चरण सिंह के रूप में की गई। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। घटना के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं। आखिर युवक की मौत किन परिस्थितियों में हुई? यदि उसकी मौत सामान्य थी तो शव को नदी किनारे जमीन में दफन करने की जरूरत क्यों पड़ी? 

परिजनों का आरोप है कि युवक की हत्या किए जाने के बाद शव को सुनसान नदी किनारे ले जाकर जमीन में छिपाया गया होगा। सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है की पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।

वेल्डिंग दुकान के बाहर रखा लोहा चोरी के तीन आरोपियों को पुलिस ने किया गिरफ्तार, पीकप सहित लोहा जब्त


उमरिया

जिले के ग्राम घघरी में स्थित एक वेल्डिंग दुकान के सामने से भारी मात्रा में लोहे के पल्ले चोरी होने के मामले में पुलिस को सफलता मिली है। पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार करते हुए चोरी गया करीब 5.5 क्विंटल लोहा बरामद कर लिया है। वारदात में प्रयुक्त पिकअप वाहन को भी जब्त किया गया है। बरामद सामग्री और वाहन की कुल कीमत लगभग 8.60 लाख रुपये बताई जा रही है।

ग्राम घघरी निवासी एवं कृष्णा वेल्डिंग वर्क के संचालक तिलक राज विश्वकर्मा ने 8 सितंबर को सिविल लाइन चौकी में चोरी की शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि ट्रैक्टर-ट्रॉली की मरम्मत के लिए दुकान के बाहर लोहे के पल्ले रखे गए थे। इनका वजन लगभग साढ़े पांच क्विंटल तथा कीमत करीब 60 हजार रुपये थी।

अज्ञात चोर दुकान के सामने रखे लोहे के पल्लों को वाहन में भरकर ले गए। शिकायत के आधार पर कोतवाली थाना पुलिस ने अपराध क्रमांक 473/26 दर्ज करते हुए भारतीय न्याय संहिता की धारा 303(2) के तहत प्रकरण कायम कर जांच शुरू की। पुलिस टीम ने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच की। मुखबिर की सूचना पर तीन संदिग्ध व्यक्तियों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी मिली।

पुलिस ने हिरासत में लेकर पूछताछ की, जहां उन्होंने चोरी की वारदात में शामिल होने की बात स्वीकार कर ली। उनकी निशानदेही पर चोरी गए सभी लोहे के पल्ले बरामद कर लिए गए। आरोपियों के कब्जे से पिकअप वाहन क्रमांक MP 54 ZC 9271 को भी जब्त किया है। वाहन की अनुमानित कीमत करीब 8 लाख रुपये बताई गई है। चोरी गए लोहे की कीमत 60 हजार रुपये है। इस तरह पुलिस द्वारा कुल लगभग 8.60 लाख रुपये का मशरूका जब्त किया गया है।

 एक घंटे में मामला निपटाकर लौटे एमडी, औपचारिकता तक सिमटा दौरा, बांधवगढ़ के सैर-सपाटे की रही योजना


उमरिया

भ्रष्टाचार की दलदल में धंसा वन विकास निगम आज फर्जी पौधरोपण, सागौन-सरई की अवैध कटाई, जंगलों से पत्थरों की बेजा खुदाई और खाद घोटाले का पर्याय बन चुका है। आरोप है कि इस लूट की जड़ें प्रदेश से संभाग तक बैठे आला अधिकारियों तक फैली हैं, जो जिले के अधिकारियों से वसूली कर उन्हें खुली छूट दे रहे हैं, और इसी का नतीजा है कि एमडी मनोज अग्रवाल का बहुचर्चित उमरिया दौरा एक घंटे की खानापूर्ति बनकर रह गया।

ताला-बांधवगढ़ में आवभगत के बाद एमडी साहब उमरिया पहुंचे, नौरोजाबाद और हरवाह का एक घंटे में चक्कर लगाया और सब कुछ ठीक है का सर्टिफिकेट देकर रवाना हो गए। न कोई समीक्षा, न कोई फाइल पलटी, न कोई जमीनी पड़ताल। सवाल लाजिमी है कि जब पूरे मंडल में अवैध आरा मशीनों, फर्नीचर कारखानों और चोरी की लकड़ी से पटिया सप्लाई के आरोप लग रहे हैं, तब एमडी को आल इज वेल कैसे दिख गया?

इस चुप्पी के पीछे सबसे बड़ा खेल कोल इंडिया के वृक्षारोपण की फाइल बताई जा रही है। महारत्न कंपनी कोल इंडिया की आनुषंगिक कंपनी एसईसीएल में वृक्षारोपण का जिम्मा वन विकास निगम के पास है। हर साल करोड़ों के अनुबंध, कागजों पर लाखों पौधे, सुरक्षा-खाद-सिंचाई के नाम पर भुगतान, लेकिन हकीकत में मैदान खाली। आज तक कभी समीक्षा ही नहीं हुई कि अनुबंध में कितने पौधे लगाने थे और आज कितने जिंदा हैं। सूत्रों का कहना है कि खदानों के आसपास हरियाली के नाम पर आया पैसा फाइलों में ही पौधा बनकर लहलहा रहा है।

वरिष्ठ अधिकारी उमरिया जिले के दौरे के बहाने शासकीय व्यय पर बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान का लुत्फ उठाने की रणनीति बनाकर सरकारी दौरे बनाते हैं और मुफ्त की जंगल सफारी, रिसॉर्ट में आवभगत कर फिर एक घंटे में मंडल निपटाकर वापसी कर जाते हैं, वर्तमान में यही नया प्रोटोकॉल बन गया है। 

अवैध कच्ची शराब पर बनाने के ठिकानों में आबकारी विभाग की कार्रवाई, भारी मात्रा में महुआ लाहन जब्त


उमरिया

जिले के भंगहा, रमपुरी, सरईया टोला व ज्वालामुखी में कार्रवाई का इंतजार सागर में नकली एवं कथित जहरीली शराब से हुई मौतों की घटना के बाद उमरिया आबकारी विभाग भी सक्रिय हुआ है। शहर से लगे महरोई गांव और उजनिया क्षेत्र में की गई कार्रवाई के दौरान भारी मात्रा में महुआ लाहन बरामद किया गया। टीम को कच्ची शराब बनाने की भट्ठियां भी मिलीं, जिन पर कार्रवाई की गई।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जिले के कई इलाकों में लंबे समय से अवैध कच्ची शराब का निर्माण और बिक्री का कारोबार चल रहा है। भंगहा, रमपुरी, सरईया टोला और ज्वालामुखी जैसे क्षेत्रों में भी बड़े पैमाने पर कच्ची शराब बनाए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन इन स्थानों पर अब तक प्रभावी कार्रवाई का इंतजार है।

आरोप है कि आबकारी विभाग द्वारा पिछले कई वर्षों से कच्ची शराब के खिलाफ व्यापक अभियान नहीं चलाया गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, कच्ची शराब के सेवन से क्षेत्र में पूर्व में भी कई मौतें हो चुकी हैं। इसके बावजूद अवैध कारोबार पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग पाया।

सागर की घटना के बाद महरोई और उजनिया में हुई कार्रवाई से विभाग की सक्रियता तो बढ़ी है, लेकिन स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कार्रवाई केवल कुछ इलाकों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। जिले के उन सभी क्षेत्रों में लगातार अभियान चलाकर अवैध शराब निर्माण और बिक्री के नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई की जरूरत है।

11 हजार केवी लाइन टूटी, खेत मे काम कर रहे मजदूर की हुई मौत, 43 साल पुरानी लाइन, मेंटेनेन्स पर गंभीर सवाल


उमरिया

चंदिया थाना क्षेत्र के ग्राम रोझिन में हलफल नदी के बगल से रविवार सुबह करीब 11:30 बजे दर्दनाक हादसे में आदिवासी 50 वर्षीय शंभु उर्फ टनटू बेगा युवक की करंट की चपेट में आने से मौत हो गई। हादसे के बाद गांव में मातम है और परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों के मुताबिक रोझिन गांव से गुजर रही 11 हजार केवी विद्युत लाइन वर्ष 1983 में स्थापित हुई थी, यानी करीब 43 वर्ष पुरानी है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों पुरानी इस लाइन में समय-समय पर मेंटेनेंस के दौरान तारों में जोड़ लगाए जाते रहे, जिसके चलते लाइन पर कई जगह जोड़ बन गए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि घटना वाले दिन भी 11 हजार केवी लाइन का एक जोड़ टूट गया और उसी दौरान दुर्भाग्य से उसके नीचे कृषि कार्य कर रहा आदिवासी मजदूर चपेट में आ गया और दर्दनाक मौत हो गई। हादसे का वास्तविक कारण जांच के बाद ही स्पष्ट होगा, लेकिन ग्रामीणों द्वारा लाइन की जर्जर स्थिति और बार-बार और जगह जगह किए गए जोड़ को लेकर लगाए जा रहे आरोप, विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं, यदि जांच में यह सामने आता है कि लाइन की स्थिति पहले से खराब थी और सुरक्षा मानकों की अनदेखी हुई, तो यह केवल एक दुर्घटना नहीं बल्कि गंभीर विभागीय लापरवाही का मामला माना जाएगा।

घटना की सूचना मिलते ही चंदिया पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई करते हुए शव को कब्जे में लेकर शव को पोस्टमार्टम के लिए चंदिया ले गई है। पीएम की कार्रवाई उपरांत शव परिजनों को सौंपा दिया। ग्रामीणों की मांग है कि हादसे की निष्पक्ष जांच हो और यह पता लगाया जाए कि आखिर ग्रामीणों के बार बार शिकायत के बाद भी 43 साल पुरानी विद्युत लाइन को सुरक्षित रखने पूरी तरह बदला क्यों नहीं गया? आपको बता दे हलफल नदी के ऊपर कई खेत ऐसे है, जो 11 हजार केवी के बिल्कुल नीचे है और यहाँ 11 हजार विद्युत लाइन बहुत नीचे से गुजरी है,जो अभी अभी जान माल के लिए खतरनाक साबित हो सकते है।

सगरा तालाब के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण का बहुप्रतीक्षित कार्य पर मंडराया संकट, अफसरशाही हावी

*एसईसीएल के सीएसआर फंड से साढ़े चार करोड़ हुए थे स्वीकृत*


उमरिया

नगर पालिका परिषद पाली के ऐतिहासिक सगरा तालाब के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण का बहुप्रतीक्षित कार्य एक बार फिर खटाई में पड़ता नजर आ रहा है। नगर की पहचान और आस्था के केंद्र रहे इस तालाब के लिए लंबे समय से जीर्णोद्धार की मांग हो रही थी, जिसके लिए बड़ी धनराशि की आवश्यकता थी। नगर पालिका परिषद पाली की अध्यक्ष शकुंतला प्रधान, क्षेत्रीय विधायक मीना सिंह और क्षेत्रीय सांसद हिमाद्री सिंह के अथक और संयुक्त प्रयासों के बाद आखिरकार दो वर्ष पूर्व एसईसीएल के सीएसआर फंड से कोल इंडिया द्वारा लगभग साढ़े चार करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत कराई गई, जिससे पाली वासियों में विकास की एक नई उम्मीद जगी थी।

राशि स्वीकृत होने के बाद विधिवत निविदा प्रक्रिया पूरी की गई और कार्य का शुभारंभ भी करा दिया गया, लेकिन जिला प्रशासन की कुत्सित और उदासीन कार्यप्रणाली के कारण यह महत्वपूर्ण कार्य अपनी निर्बाध गति से चल नहीं पा रहा है। जानकार सूत्रों के अनुसार सीएसआर की यह पूरी राशि एसईसीएल द्वारा कलेक्टर कार्यालय उमरिया के खाते में जमा कर दी गई है, जबकि इस कार्य की कार्य एजेंसी नगर पालिका परिषद पाली है। नगर पालिका का दायित्व है कि वह निविदा प्राप्त ठेकेदार से निविदा के अनुरूप कार्य कराए, उसकी देखरेख और निरीक्षण करे, दस्तावेजों का संधारण करे और किए गए कार्य के अनुरूप देयक तैयार कर कलेक्टर कार्यालय में प्रस्तुत करे। इसके बाद कलेक्टर कार्यालय का दायित्व है कि वह प्रस्तुत देयकों और दस्तावेजों का परीक्षण कराए और यदि देयक किए गए कार्य के अनुरूप पाए जाते हैं तो भुगतान कर दे, और यदि कोई भिन्नता पाई जाती है तो नियमानुसार आपत्ति लगाकर सुधार हेतु नगर पालिका को वापस कर दे।

परंतु इस स्पष्ट प्रक्रिया से इतर जिला प्रशासन द्वारा एक अजीबोगरीब रवैया अपनाया जा रहा है। न तो देयकों पर आपत्ति लगाई जा रही है और न ही उनका भुगतान किया जा रहा है, बल्कि पिछले चार महीनों से सगरा तालाब के देयक कलेक्टर कार्यालय में धूल खा रहे हैं और फाइलों को लटकाकर रखा गया है। ठेकेदार द्वारा कार्य कराए जाने के बाद भी भुगतान न होने से मजदूरों की मजदूरी अटकी हुई है और पूरा निर्माण कार्य ठप होने की कगार पर पहुंच गया है।

यह स्थिति तब है जब केंद्र में, प्रदेश में और नगर पालिका में भाजपा की ही सरकार है और ट्रिपल इंजन की सरकार में विकास की रफ्तार तेज होने के दावे किए जा रहे हैं। सवाल यह उठता है कि जब जनप्रतिनिधियों के प्रयास से राशि आ गई, टेंडर हो गया और काम शुरू भी हो गया तो फिर विकास के पहिये को अफसरशाही क्यों रोक रही है। क्या यह जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच साख की लड़ाई बन गई है या फिर निर्वाचित निकाय की अहमियत को कम आंकने की कोशिश है। कोल इंडिया जैसी महारत्न कंपनी द्वारा जनहित में दिया गया पैसा सरकारी खाते में कैद पड़ा है और इधर तालाब अतिक्रमण, गंदगी और जलकुंभी से पट रहा है। यदि देयक गलत हैं तो उन्हें वापस किया जाए और यदि सही हैं तो भुगतान किया जाए, लेकिन चार महीने तक फाइलों को मौन रखकर लटकाए रखना प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि कर्तव्य के प्रति उदासीनता है।

यह कहानी सिर्फ विकास के अवरुद्ध होने की नहीं, बल्कि फाइलों में उलझी कार्यपद्धति की है। यह बेहद चिंताजनक है कि भारतीय जनता पार्टी की ट्रिपल इंजन की सरकार में अफसरशाही इतनी हावी हो गई है कि शहडोल संसदीय क्षेत्र की तीन ओहदेदार महिला जनप्रतिनिधियों - सांसद, विधायक और नगर पालिका अध्यक्ष के संयुक्त प्रयासों पर पानी फेरते हुए अपने मनमर्जी का राज कायम कर विकास कार्यों को पलीता लगा दिया गया है। पाली की जनता अब यही पूछ रही है कि आखिर इस ऐतिहासिक धरोहर का उद्धार कब होगा और ट्रिपल इंजन का लाभ उसे कब मिलेगा।

शासकीय भूमि पर अवैध कब्जाधारियों के हौसले बुलंद, खेल मैदान व मंदिर परिसर की जमीन कब्जे में


उमरिया

बिरसिंहपुर पाली तहसील में शासकीय भूमि की हिफाजत का जिम्मा जिस राजस्व विभाग पर है, उसी की अनदेखी के चलते भू-माफियाओं के हौसले सातवें आसमान पर हैं, और अब तो हालत यह है कि उन्होंने बच्चों के खेल मैदान से लेकर आस्था के केंद्र मंदिर परिसर और शासकीय तालाबों तक की जमीन को भी नहीं छोड़ा है। ताजा और सबसे वीभत्स उदाहरण ग्राम पंचायत गिंजरी के आश्रित ग्राम बरबसपुर का है, जहां सार्वजनिक उपयोग की दो महत्वपूर्ण शासकीय भूमियों पर खुलेआम हल चल रहा है। दरअसल ग्राम पंचायत ने गांव के युवाओं के भविष्य को देखते हुए खसरा क्रमांक 508 को खेल मैदान के लिए प्रस्तावित किया था, ताकि बच्चे गली-मोहल्लों में भटकने के बजाय एक सुरक्षित मैदान में खेल सकें, लेकिन दबंग कब्जाधारियों ने पंचायत के इस प्रस्ताव को रौंदते हुए उस पर अवैध कब्जा कर खेती शुरू कर दी है, जबकि इसी तरह पंचलेश्वर धाम मंदिर से लगा विशाल सरकारी रकबा खसरा क्रमांक 514/1 जो कांवड़ यात्रा, शिवरात्रि और नवरात्रि के दौरान हजारों श्रद्धालुओं के लिए पार्किंग और विश्राम स्थल के रूप में उपयोग हो सकता था, उस पर भी कब्जा कर कृषि कार्य किया जा रहा है, जिससे हर त्योहार पर जाम और अव्यवस्था की स्थिति बनती है और श्रद्धालुओं को भारी परेशानी उठानी पड़ती है। ग्रामीणों का साफ कहना है कि यह महज दो खसरा नंबरों की कहानी नहीं बल्कि पूरे पाली तहसील की हकीकत है, जहां तालाब, चारागाह और निस्तार की जमीनें भी इसी तरह भू-माफियाओं के कब्जे में जा रही हैं और राजस्व अमला सिर्फ कागजी खानापूर्ति तक सीमित है। इसी अनदेखी से आहत होकर ग्रामीणों ने एसडीएम पाली को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि दोनों खसरा नंबरों का तत्काल सीमांकन कर अतिक्रमण हटाया जाए, खसरा 508 पर खेल मैदान विकसित किया जाए और 514/1 पर पार्किंग के साथ फलदार व छायादार पौधों का वनीकरण किया जाए, साथ ही ग्रामीणों ने चेतावनी भी दी है कि यदि समय रहते असरकारी कार्रवाई नहीं की गई तो वह दिन दूर नहीं जब शासन को अपने ही उपयोग के लिए जमीन के लिए जद्दोजहद करनी पड़ेगी।

बच्चों की जान से खिलवाड़, जर्जर भवन, कभी हो सकता है हादसा, कागजो में चमक रहे आंगनबाड़ी केंद्र

*जिम्मेदार महिला बाल विकास विभाग लाचार*


उमरिया

बिरसिंहपुर पाली जनपद में महिला बाल विकास विभाग की लाचारी का सबसे वीभत्स चेहरा आंगनबाड़ी केंद्रों में दिख रहा है। कागजों में ये केंद्र चमक रहे हैं, बाहर से पेंटिंग-पुताई कर दी गई है ताकि फोटो खिंच सके, लेकिन अंदर की हकीकत यह है कि छत से पानी टपक रहा है, प्लास्टर सिर पर गिर रहा है और मासूम बच्चे कीचड़ और पानी के बीच जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं।

यह कोई एक केंद्र की कहानी नहीं है। पाली जनपद के लगभग हर ग्रामीण आंगनबाड़ी का यही हाल है। फर्श टूटी हुई, दीवारों में सीलन, बिजली-पंखे गायब। सावन की रिमझिम बारिश में ये भवन तालाब बन चुके हैं। सबसे शर्मनाक बात यह है कि यह सब जानकारी महिला बाल विकास विभाग की सुपरवाइजर से लेकर जिला अधिकारियों तक को पहले से है, फिर भी विभाग किंकर्तव्यविमूढ़ बना हुआ है।

विभाग के अधिकारी मरम्मत के लिए शासन से राशि न मिलने का रोना रोते हैं। यद्यपि पिछले दिनों आंगनबाड़ी भवनों के रंग-रोगन के लिए एक छोटी राशि उपलब्ध कराई गई थी, वह सिर्फ बाहरी रंगाई में खर्च कर दी गई, अंदर के सुधार के लिए प्रशासनिक अधिकारियों ने जरूरत ही नहीं समझी।

नतीजा यह है कि शासकीय भवन छोड़कर कार्यकर्ता गांव में किराए के कमरों में आंगनबाड़ी चलाने को मजबूर हैं। यानी शासन का अपना भवन जर्जर पड़ा है और विभाग किराए पर पैसा फूंक रहा है।

स्थानीय अभिभावक अब पूछ रहे हैं कि क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार हो रहा है? पिछले साल भी यही स्थिति थी, छत गिर रही थी, पानी भर रहा था, शिकायतें हुईं, पर फाइल नहीं हिली। आज भी वही जर्जर भवन बच्चों के सिर पर लटके हैं। आखिर यह नामुराद व्यवस्था में सुधार कब होगा?

महिला बाल विकास विभाग इन टपकती छतों के नीचे अपने बच्चों को इसी परिस्थिति में संचालित करने के लिए मजबूर है। गरीब आदिवासी और मजदूरों के ही बच्चे अधिकांशतः इन आंगनबाड़ियों में आते हैं, इन नौनिहालों को मौत के साए में पढ़ने के लिए क्यों मजबूर किया जा रहा है? यह बदहाली नहीं, सीधे-सीधे बच्चों की सुरक्षा के साथ आपराधिक लापरवाही है।

सचमुच में पाली विकासखंड तो सिर्फ एक झांकी है, वास्तविक रूप से यह पूरे उमरिया जिले की ही असली तस्वीर है। जिसकी सूरत बदलने के लिए अब जिला प्रशासन को ही ठोस पहल करने की जरूरत है।

200 नल नल योजना पर 4 करोड़ का बिजली बिल बकाया, कुछ जगह काटे गए बिजली कनेक्शन, जलापूर्ति पर पड़ेगा असर


उमरिया 

जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर नल से पानी पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू की गई नल-जल योजनाएं अब बिजली बिल के भारी बकाये के कारण संकट में नजर आ रही हैं। जिले की करीब 200 नल-जल योजनाओं पर लगभग 4 करोड़ रुपये का बिजली बिल बकाया होने की जानकारी सामने आई है। बकाया राशि जमा नहीं होने के कारण कुछ स्थानों पर बिजली कनेक्शन काटे जाने की बात भी सामने आ रही है। इससे ग्रामीण इलाकों में जलापूर्ति व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।

ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल समस्या दूर करने के लिए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा नल-जल योजनाओं का निर्माण कराया गया था। योजना तैयार होने के बाद विभाग कुछ समय तक ट्रायल के रूप में उसका संचालन करता है। इसके बाद योजना संबंधित ग्राम पंचायत को सौंप दी जाती है। योजना हस्तांतरित होने के बाद उसके संचालन, रखरखाव और बिजली बिल सहित अन्य खर्चों की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत की होती है।

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारी एच.एस. धुर्वे ने बताया कि सरकार विभाग को नल-जल योजनाओं के निर्माण की जिम्मेदारी देती है। निर्माण पूरा होने के बाद विभाग कुछ दिनों तक ट्रायल के रूप में योजना का संचालन करता है और इसके बाद उसे ग्राम पंचायत के हवाले कर दिया जाता है। पंचायत को योजना सौंपे जाने के बाद उसके रखरखाव और बिजली बिल सहित अन्य खर्चों का भुगतान पंचायत की जिम्मेदारी होती है।

इसका सीधा असर नल जल योजनाओ पर पड़ेगा, जिनके घरों तक पानी पहुंचाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर ये योजनाएं तैयार की गई हैं।जिला पंचायत सीईओ अभय सिंह ने कहा कि उनके पास अभी तक किसी भी पंचायत से नल-जल योजना का बिजली कनेक्शन काटे जाने की सूचना नहीं आई है। यदि किसी स्थान पर ऐसा हुआ है तो इस संबंध में मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी से चर्चा की जाएगी।

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