बच्चों की जान से खिलवाड़, जर्जर भवन, कभी हो सकता है हादसा, कागजो में चमक रहे आंगनबाड़ी केंद्र

*जिम्मेदार महिला बाल विकास विभाग लाचार*


उमरिया

बिरसिंहपुर पाली जनपद में महिला बाल विकास विभाग की लाचारी का सबसे वीभत्स चेहरा आंगनबाड़ी केंद्रों में दिख रहा है। कागजों में ये केंद्र चमक रहे हैं, बाहर से पेंटिंग-पुताई कर दी गई है ताकि फोटो खिंच सके, लेकिन अंदर की हकीकत यह है कि छत से पानी टपक रहा है, प्लास्टर सिर पर गिर रहा है और मासूम बच्चे कीचड़ और पानी के बीच जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं।

यह कोई एक केंद्र की कहानी नहीं है। पाली जनपद के लगभग हर ग्रामीण आंगनबाड़ी का यही हाल है। फर्श टूटी हुई, दीवारों में सीलन, बिजली-पंखे गायब। सावन की रिमझिम बारिश में ये भवन तालाब बन चुके हैं। सबसे शर्मनाक बात यह है कि यह सब जानकारी महिला बाल विकास विभाग की सुपरवाइजर से लेकर जिला अधिकारियों तक को पहले से है, फिर भी विभाग किंकर्तव्यविमूढ़ बना हुआ है।

विभाग के अधिकारी मरम्मत के लिए शासन से राशि न मिलने का रोना रोते हैं। यद्यपि पिछले दिनों आंगनबाड़ी भवनों के रंग-रोगन के लिए एक छोटी राशि उपलब्ध कराई गई थी, वह सिर्फ बाहरी रंगाई में खर्च कर दी गई, अंदर के सुधार के लिए प्रशासनिक अधिकारियों ने जरूरत ही नहीं समझी।

नतीजा यह है कि शासकीय भवन छोड़कर कार्यकर्ता गांव में किराए के कमरों में आंगनबाड़ी चलाने को मजबूर हैं। यानी शासन का अपना भवन जर्जर पड़ा है और विभाग किराए पर पैसा फूंक रहा है।

स्थानीय अभिभावक अब पूछ रहे हैं कि क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार हो रहा है? पिछले साल भी यही स्थिति थी, छत गिर रही थी, पानी भर रहा था, शिकायतें हुईं, पर फाइल नहीं हिली। आज भी वही जर्जर भवन बच्चों के सिर पर लटके हैं। आखिर यह नामुराद व्यवस्था में सुधार कब होगा?

महिला बाल विकास विभाग इन टपकती छतों के नीचे अपने बच्चों को इसी परिस्थिति में संचालित करने के लिए मजबूर है। गरीब आदिवासी और मजदूरों के ही बच्चे अधिकांशतः इन आंगनबाड़ियों में आते हैं, इन नौनिहालों को मौत के साए में पढ़ने के लिए क्यों मजबूर किया जा रहा है? यह बदहाली नहीं, सीधे-सीधे बच्चों की सुरक्षा के साथ आपराधिक लापरवाही है।

सचमुच में पाली विकासखंड तो सिर्फ एक झांकी है, वास्तविक रूप से यह पूरे उमरिया जिले की ही असली तस्वीर है। जिसकी सूरत बदलने के लिए अब जिला प्रशासन को ही ठोस पहल करने की जरूरत है।

200 नल नल योजना पर 4 करोड़ का बिजली बिल बकाया, कुछ जगह काटे गए बिजली कनेक्शन, जलापूर्ति पर पड़ेगा असर


उमरिया 

जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर नल से पानी पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू की गई नल-जल योजनाएं अब बिजली बिल के भारी बकाये के कारण संकट में नजर आ रही हैं। जिले की करीब 200 नल-जल योजनाओं पर लगभग 4 करोड़ रुपये का बिजली बिल बकाया होने की जानकारी सामने आई है। बकाया राशि जमा नहीं होने के कारण कुछ स्थानों पर बिजली कनेक्शन काटे जाने की बात भी सामने आ रही है। इससे ग्रामीण इलाकों में जलापूर्ति व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।

ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल समस्या दूर करने के लिए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा नल-जल योजनाओं का निर्माण कराया गया था। योजना तैयार होने के बाद विभाग कुछ समय तक ट्रायल के रूप में उसका संचालन करता है। इसके बाद योजना संबंधित ग्राम पंचायत को सौंप दी जाती है। योजना हस्तांतरित होने के बाद उसके संचालन, रखरखाव और बिजली बिल सहित अन्य खर्चों की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत की होती है।

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारी एच.एस. धुर्वे ने बताया कि सरकार विभाग को नल-जल योजनाओं के निर्माण की जिम्मेदारी देती है। निर्माण पूरा होने के बाद विभाग कुछ दिनों तक ट्रायल के रूप में योजना का संचालन करता है और इसके बाद उसे ग्राम पंचायत के हवाले कर दिया जाता है। पंचायत को योजना सौंपे जाने के बाद उसके रखरखाव और बिजली बिल सहित अन्य खर्चों का भुगतान पंचायत की जिम्मेदारी होती है।

इसका सीधा असर नल जल योजनाओ पर पड़ेगा, जिनके घरों तक पानी पहुंचाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर ये योजनाएं तैयार की गई हैं।जिला पंचायत सीईओ अभय सिंह ने कहा कि उनके पास अभी तक किसी भी पंचायत से नल-जल योजना का बिजली कनेक्शन काटे जाने की सूचना नहीं आई है। यदि किसी स्थान पर ऐसा हुआ है तो इस संबंध में मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी से चर्चा की जाएगी।

30 साल बाद भी सड़क नही बनी तो कीचड़ भरे रास्ते मे गुस्साए ग्रामीणों ने धान की कर दी रोपाई


उमरिया।

बांधवगढ़ विधानसभा क्षेत्र में एक गांव ऐसा है जो 30 सालों से सड़क के लिए तरस रहा है। ग्राम पंचायत मानिकपुरी के कारीगड़हरी गांव के रहने वाले लोग 30 वर्षों से सड़क के लिए तरस रहे हैं। बारिश के मौसम में बच्चे, बूढ़े, जवान सभी का निकलना दूभर हो जाता है। यहां बच्चों को नदी पार कर स्कूले जाते का वीडियो भी सामने आया था।

अब गांव के युवा , बुजुर्ग, महिलाएं, बच्चियां सभी परेशान होकर हाथ में धान के पौधे लेकर सड़क पर आ गए हैं। ग्रामीणों ने सड़क की मांग को लेकर कीटड़ भरे रास्ते में धान की रोपाई कर विरोध प्रदर्शन किया है।

गांव के ही युवा सुरेश सिंह गोंड ने बताया कि हम जब से पैदा हुए हैं तब से यही कीचड़ देख रहे हैं। बारिश हो जाए तो हम लोगों का निकलना दूभर हो जाता है। हमारे परिजनों और गांव के लोगों ने जिला प्रशासन, सरपंच, सरकार, विधायक से भी गुहार लगाई लेकिन हमारे गांव में अभी तक सड़क नहीं बन पाई। हम गरीब आदिवासियों की सुनने वाला कोई नहीं है।

ग्रामीणों का सड़क की मांग को लेकर हम लोग थक गए हैं। अब हम लोग विरोध स्वरूप इस कीचड़ भरे रास्ते में धान की रोपाई कर रहे हैं। सड़क तो बन नहीं रही है। शायद इस जगह पर कुछ धान हो जाए। सरकार तो हमारे काम आई नहीं इसलिए अब हम धान की रोपाई कर इस जमीन का उपयोग करना चाहते हैं।

इस मामले में करकेली जनपद पंचायत के सीईओ हिमांशु सिंह ने बताया कि हमें मामले की जानकारी हुई है। हम इंजीनियर को भेज कर दिखवाते हैं और स्टीमेट के आधार पर सड़क को जल्द बनवाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास और आदिवासियों के हित की बात की जाती है लेकिन सही मायने में विकास नहीं हो रहा है।

माँ बीरासिनी देवी मंदिर के आय व्यय में पारदर्शिता क्यों नहीं?आस्था के केंद्र में पारदर्शिता भी उतनी ही जरूरी जितनी श्रद्धा

*13 वर्षों के लेखा-जोखा को हो सार्वजनिक, जनहित की मांगें लागू हो*


(आलेख -संतोष कुमार द्विवेदी)

समाज सेवी, कवि कलमकार पत्रकार उमरिया म. प्र )

उमरिया

माँ बीरासिनी देवी मंदिर बीरसिंहपुर पाली जिला उमरिया में लाखों श्रद्धालु अपनी आस्था से दान अर्पित करते हैं, यह दान किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं बल्कि भक्तों की श्रद्धा और जन विश्वास से जुडी सार्वजनिक सम्पदा है।

देश के बड़े और प्रतिष्ठित धार्मिक स्थलों से जुड़े दान, संपत्ति, आभूषणों तथा वित्तीय प्रबंधन में कथित अनियमितताओं और हेराफेरी के मामले समय-समय पर सार्वजनिक चर्चा का विषय बनते रहे हैं। अयोध्या के राम मंदिर सहित विभिन्न बड़े आस्था केंद्रों से जुड़े विवादों ने यह महत्वपूर्ण प्रश्न सामने रखा है कि, जहाँ करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और बड़ी मात्रा में जनसहयोग एवं दान जुड़ा हो, वहाँ पारदर्शिता, जवाबदेही और सार्वजनिक लेखा-जोखा सर्वोच्च प्राथमिकता क्यों न हो।

इसी व्यापक जनहित और श्रद्धालुओं की आस्था को ध्यान में रखते हुए माँ बीरासिनी देवी मंदिर, बिरसिंहपुर पाली, जिला उमरिया की व्यवस्था में भी पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित किया जाना समय की आवश्यकता है।

*13 वर्षों के लेखा-जोखा को हो सार्वजनिक*

मई 2013 से वर्तमान समय तक मंदिर की आय, व्यय, दान, बैंक जमा, FDR, सोने-चाँदी के आभूषणों तथा अन्य चल-अचल संपत्तियों से संबंधित जानकारी नियमित रूप से सार्वजनिक किए जाने की आवश्यकता है।

यदि यह जानकारी अब तक मंदिर के सूचना-पटल, अधिकृत माध्यमों, समाचार पत्रों, समाचार चैनलों अथवा अन्य सार्वजनिक माध्यमों से श्रद्धालुओं और आम नागरिकों के सामने नियमित रूप से उपलब्ध नहीं कराई गई है, तो यह स्वाभाविक जनहित का प्रश्न है कि ऐसा क्यों है और वर्तमान व्यवस्था किस नियम, आदेश अथवा प्राधिकृत अनुमति के आधार पर संचालित हो रही है?

यह सवाल किसी व्यक्ति विशेष पर आरोप लगाने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि मंदिर की व्यवस्था के प्रति जनविश्वास को और मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।

*जनहित मे प्रमुख माँगें*

माँ बीरासिनी देवी मंदिर के श्रद्धालुओं और आम नागरिकों के हित में मई 2013 से वर्तमान समय तक की निम्न जानकारी वर्षवार, प्रमाणित एवं सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराई जाए।

1. आय एवं दान: प्रत्येक वित्तीय वर्ष में प्राप्त कुल दान एवं अन्य आय का पूरा विवरण।

2. व्यय: प्रत्येक वर्ष किए गए व्यय का मदवार एवं प्रमाणित विवरण।

3. दान पेटियाँ: दान पेटियाँ किन-किन तारीखों को खोली गईं, प्रत्येक अवसर पर कितनी नकद राशि तथा सोना, चाँदी अथवा अन्य मूल्यवान सामग्री प्राप्त हुई, इसकी दिनांकवार जानकारी।

4. बैंक में जमा राशि: दान पेटियों एवं अन्य स्रोतों से प्राप्त राशि में से कितनी राशि किस बैंक खाते में, किस तारीख को जमा की गई—इसका विवरण।

5. FDR एवं ब्याज: मंदिर की FDR/सावधि जमा का वर्षवार विवरण तथा उनसे प्राप्त वार्षिक ब्याज की जानकारी।

6. सोना-चाँदी एवं आभूषण: मंदिर में उपलब्ध सोने-चाँदी के आभूषणों एवं अन्य मूल्यवान वस्तुओं की वर्षवार सूची, उनका वजन/मात्रा, उपलब्धता तथा रख-रखाव का अधिकृत अभिलेख।

7. बैंक लॉकर/सुरक्षित भंडारण: यदि सोने-चाँदी अथवा अन्य मूल्यवान वस्तुएँ बैंक लॉकर या किसी अन्य सुरक्षित स्थान पर रखी गई हैं, तो उनके संबंध में उपलब्ध अधिकृत रिकॉर्ड, जमा/निकासी की दिनांक तथा वर्तमान स्थिति की जानकारी।

8. चल-अचल संपत्ति: मंदिर की समस्त चल-अचल संपत्तियों का विवरण, उनके अभिलेख तथा वर्तमान स्थिति सार्वजनिक की जाए।

9. ऑडिट: प्रत्येक वर्ष की आय-व्यय एवं संपत्ति का विधिवत ऑडिट कराया जाए तथा ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।

10. वेबसाइट एवं डिजिटल पारदर्शिता: मंदिर की अधिकृत वेबसाइट बनाई जाए और उस पर वर्षवार आय-व्यय, ऑडिट रिपोर्ट, दान, FDR, संपत्ति एवं अन्य महत्वपूर्ण वित्तीय जानकारी नियमित रूप से अपडेट की जाए।

11. वैधानिक एवं जवाबदेह प्रबंधन: मंदिर की व्यवस्था को स्पष्ट वैधानिक ढाँचे में संचालित करने के लिए पंजीकृत ट्रस्ट अथवा उपयुक्त वैधानिक संस्था के गठन पर गंभीरता से विचार किया जाए।

12. जनसहभागिता: मंदिर की व्यवस्था में नियमसम्मत तरीके से आम नागरिकों, माताओं-बहनों, युवाओं और श्रद्धालुओं की सहभागिता सुनिश्चित की जाए, ताकि मंदिर का संचालन व्यापक जनविश्वास और जवाबदेही के साथ हो।

*पारदर्शिता से आस्था व विश्वास होगा मजबूत*

माँ बीरासिनी देवी मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि लाखों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास का प्रमुख केंद्र है। इसलिए मंदिर की आय, संपत्ति और प्रशासनिक व्यवस्था से संबंधित जानकारी को सार्वजनिक करना किसी व्यक्ति या संस्था के विरुद्ध कार्रवाई नहीं, बल्कि जनविश्वास की रक्षा का माध्यम माना जाना चाहिए।

देश के विभिन्न बड़े मंदिरों में वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर सामने आने वाली चर्चाएँ यह संकेत देती हैं कि किसी भी बड़े आस्था स्थल पर ऐसी व्यवस्था पहले से स्थापित होनी चाहिए, जिसमें न तो संदेह की गुंजाइश रहे और न ही भविष्य में किसी प्रकार की हेराफेरी की संभावना।

अतः माँ बीरासिनी देवी मंदिर की व्यवस्था में पूर्ण पारदर्शिता, नियमित ऑडिट, सार्वजनिक लेखा-जोखा, डिजिटल सूचना प्रणाली और जनसहभागिता सुनिश्चित की जाए।

यह पहल किसी व्यक्ति, अधिकारी अथवा संस्था को कटघरे में खड़ा करने के लिए नहीं, बल्कि माँ बीरासिनी देवी मंदिर की गरिमा, श्रद्धालुओं की आस्था और जनविश्वास को और अधिक मजबूत करने के लिए है। जनहित में स्पष्ट, नियमित और सार्वजनिक लेखा-जोखा—यही पारदर्शिता है और यही मजबूत जनविश्वास का आधार है। 

धनवार पंचायत में एक फर्म को 1.09 लाख का एक ही यू टी आर से दोहरा भुगतान, 9 माह में 4.91 लाख का घोटाला

*ग्रामीणों ने कलेक्टर से कार्यवाही की मांग*


उमरिया

जिले की जनपद पंचायत करकेली की ग्राम पंचायत धनवार में "विकास" के नाम पर शासकीय खजाने की खुली लूट का मामला सामने आया है। पंचायत दर्पण पोर्टल पर दर्ज 66 बिलों ने साबित कर दिया है कि 20 नवम्बर 2024 से 15 अगस्त 2025 तक सिर्फ 9 महीने में ₹4,91,410 का बंदरबांट कर शासन की तिजोरी को लंबी चपत लगाई गई। 

स्थानीय निवासियों ने कलेक्टर उमरिया को 5 पृष्ठीय शिकायत पत्र देकर सरपंच मोलिया कोल, सचिव विनोद कुमार धुर्वे और रोजगार सहायक रीता सिंह पर 166 धुंधले फर्जी बिल लगाकर गबन करने का गंभीर आरोप लगाया है। शिकायत में कहा गया है कि तीनों की मिलीभगत से नियमों को ताक पर रखकर अपने चहेतों को मालामाल किया गया। पंचायत दर्पण के आंकड़े चीख-चीख कर बता रहे हैं कि विकास सिंह को चबूतरा और जनचौपाल निर्माण के नाम पर 9 बार में ₹1,09,625 का भुगतान किया गया। इतना ही नहीं एक ही यू टी आर क्र 3316633 से एक ही दिन में दो बार भुगतान करके सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए गए। 

जिस चबूतरे और जनचौपाल के नाम पर लाखों की राशि उड़ाई गई वह आज तक धरातल पर नहीं दिखे। अगर निर्माण पूरे हो जाते तो माना जाता पैसा लगा, लेकिन यहां न पैसा बचा न काम हुआ। इसी तरह भारत माइनिंग एंड कंस्ट्रक्शन को अर्दर मेंटीनेंस के नाम पर एक ही दिन यू टी आर क्र 3508799 से 2 बार ₹20,000_ का भुगतान किया गया। पंचायत ने तो ऑफिस खर्च को एटीएम मशीन बना रखा है। "ऑफिस एक्सपेंसिव" के नाम पर 8 महीने में 29 बार ₹1,40,159 आहरित किए गए। 08 अगस्त 2024 को _अमित ट्रेडर्स को एकमुश्त ₹35,400 और 06 अप्रैल 2025 को एक ही दिन 3 लोगों को ₹2100-₹2100 के मान से बांट दिए गए। सवाल यह है कि आखिर किस ऑफिस में इतना खर्च होता है। पंचायत दर्पण पर अपलोड किए गए बिल भी किसी काम के नहीं हैं। सभी बिल धुंधले, बिना GST, बिना टेंडर, बिना माप पुस्तिका के हैं। 

शिकायतकर्ता का आरोप है कि जानबूझकर धुंधली कॉपी अपलोड की गई ताकि कोई पकड़ न सके। जिस पंचायत दर्पण पोर्टल को पारदर्शिता के लिए बनाया गया था वह अब धोखे का सबसे बड़ा जरिया बन गया है। मनरेगा योजना में भी परिवारवाद का बोलबाला रहा। आरोप है कि सरपंच पति मंगल कोल, पुत्र सूरज कोल और पूरे परिवार की फर्जी हाजरी लगाकर मनरेगा की राशि डकार ली गई। ग्रामीणों में इस लूट को लेकर भारी आक्रोश है। उनका कहना है "चबूतरा नहीं बना, जनचौपाल कागजों में ही है, लेकिन पैसा निकल गया। यह गरीबों के हक का पैसा है। जिम्मेदारों पर तुरंत एफआईआर होनी चाहिए।" सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह तो सिर्फ इस पंचवर्षीय के 9 महीने का काला चिट्ठा है। अगर पूरे कार्यकाल की बारीकी से जांच की जाए तो यह राशि करोड़ों के वारा-न्यारा को उजागर करेगी। 

9 महीने में साढ़े 4 लाख तो पूरे 5 साल में कितना होगा इसका अंदाजा सहज लगाया जा सकता है। शिकायतकर्ता ने कलेक्टर से मांग की है कि सरपंच पर धारा 40, सचिव पर धारा 92 और रोजगार सहायक पर नरेगा नियम के तहत तुरंत निलंबन की कार्रवाई की जाए। साथ ही भारतीय दण्ड संहिता 409, 420, 467 के तहत एफआईआर दर्ज कर पूरी राशि की वसूली की जाए। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि पंचायत दर्पण पर इतनी बड़ी अनियमितता उजागर होने के बाद भी जनपद और जिला पंचायत के अधिकारी कब तक आंख बंद करके बैठे रहेंगे। क्या जांच सिर्फ कागजों तक सीमित रहेगी या दोषियों पर कठोर कार्रवाई होगी। अब गेंद कलेक्टर उमरिया के पाले में है और ग्रामीणों को न्याय की आस बनी हुई है।

कलेक्टर  से ग्रामीणों ने  मांग की है की मामले की जांच दल गठित कर स्थल सत्यापन, तकनीकी जांच और ऑडिट कराया जाए। दोषियों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई के साथ समस्त राशि की वसूली कर उसे शासकीय खाते में जमा किया जाए, अन्यथा ग्रामीण लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन को मजबूर होंगे।

एक किलो मीटर की सड़क, 5 साल का इंतजार, सड़क में गड्ढे ही गड्ढे, विकास  सिर्फ फाइलों में जिंदा


*उमरिया 

जिले के पाली विकासखंड के अंतर्गत ग्राम घुनघुटी में बस स्टैंड से रेलवे स्टेशन को जोड़ने वाली महज 150 मीटर से आधा किलोमीटर की सड़क पिछले 5 से 6 साल से भगवान भरोसे पड़ी है। बारिश का पानी, कीचड़ और बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। नतीजा - आए दिन दुर्घटनाएं होती है। कुछ माह पहले एक युवक का पैर टूट गया। पैदल चलने वाले गिरते हैं, वाहन चालक कोसते हुए दिन गुजार रहे हैं। सबसे ज्यादा पीडाजनक स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास और निजी विद्यालयों  के नन्हे-मुन्ने बच्चों को होती है, जो सुबह से तैयार होकर स्कूल आते है और कोई भी कीचड़ उछाल कर दिन खराब कर निकल जाता है।

 राष्ट्रीय राजमार्ग से जुडी यह सड़क सिर्फ घुनघुटी की नहीं है, बल्कि यह मार्ग 10- 12 से जोडते  हुए संभागीय कार्यालय शहडोल और बडी तुम्मी होते हुए अमरकंटक से जोडती है।इस मार्ग से  रोज सैकड़ों  वाहनों की आवाजाही देखी जाती है। फिर भी जिम्मेदार अफसरों को इस मार्ग के निर्माण से बेसुध बन लोगों को खून के आंसू रोने के लिए छोड़ दिया है । सड़क पर जगह-जगह उखड़ी और बडे़ बडे़  गड्ढे खुद चीख-चीख कर अपनी बदहाली बयां कर रहे हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि इस सडक के नव निर्माण कराने के मामले में न सिर्फ प्रशासनिक अधिकारियों ने मुंह मोड रखा है, इस क्षेत्र के विधायक - सांसद भी इस दिशा में पहल करते दिखाई नहीं देते। 1 किलोमीटर की यह सड़क जो ग्रामीणों के लिये पिछले एक दशक से  सरदर्द बनी हुई है, अब लोग तंज करते देखे जाते हैं कि अब यह सड़क  कांग्रेस सरकार बनवायेगी।

घर पर चल रहा जुआं फड़ से 9 आरोपी गिरफ्तार, बाइक, मोबाइल सहित 6.5 लाख का मशरूका जब्त


उमरिया

थाना कोतवाली एवं चौकी सिविल लाइन उमरिया पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा रेड कार्यवाही कर जुआ फड़ का खुलासा किया गया। पुलिस को विश्वसनीय मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई कि सोनू नाहर अपने कैम्प उमरिया स्थित मकान के ऊपर बने कमरे में ताश के पत्तों से हार-जीत की बाजी लगवाकर जुआ संचालित कर रहा है। सूचना पर पुलिस टीम गठित कर विधिवत रेड कार्यवाही की गई। मौके पर कुल 09 व्यक्ति ताश के पत्तों से हार-जीत की बाजी लगाकर जुआ खेलते पाए गए। आरोपियों के कब्जे एवं फड़ से 75,205/- रूपये नगद, 09 मोबाइल फोन, 04 दोपहिया वाहन, ताश के पत्ते एवं अन्य सामग्री जप्त की गई। इस संबंध में थाना कोतवाली में अपराध क्रमांक 428/2026, धारा 3/4 पब्लिक गैम्बलिंग एक्ट, 1867 पंजीबद्ध कर विवेचना की जा रही है।

जांच में यह तथ्य सामने आया कि आरोपी केवल नगद राशि से ही नहीं बल्कि मोबाइल फोन में उपलब्ध यूपीआई, फ़ोन पे आदि डिजिटल माध्यम के जरिए भी जुए में हार-जीत की रकम का लेन-देन कर रहे थे। आरोपियों द्वारा डिजिटल ट्रांजैक्शन के माध्यम से भी जुए का संचालन एवं भुगतान किया जाना पाया गया।

जुएं के फड़ से फिरदोस अली, नीरज गुप्ता, उम्र 32 वर्ष, निवासी झिरिया मोहल्ला, उमरिया, नितिन कुमार बजाज, आनंद सिंह लोधी, कमलेश सिंह, अनिल अमरानी, सतेन्द्र सिंह, मोबीन खान, सोनू नाहर सभी निवासी उमरिया को जुआं एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया है।

फड़ एवं आरोपियों से नगद राशि – 75,205 रूपये, 09 मोबाइल फोन लगभग 3,03000 रूपये, 04 दोपहिया वाहन कीमत 272000 रूपये, ताश के 08 गड्डी। कुल बरामद मशरूका 6,50,205 रूपये पुलिस ने जब्त किया गया है।

2 वर्ष की प्रति नियुक्ति, 6 साल बाद जागा प्रशासन, कर्मचारियों की मांगी जानकारी, पूरे संभाग में हुआ है खेल

*आदिवासी विभाग पर उठ रहे हैं सवाल, किस पर होगी कार्यवाही*


उमरिया

आदिवासी विकास विभाग में स्कूल शिक्षा विभाग  के शिक्षकों की 2 साल की प्रतिनियुक्ति को 6 साल तक खींचने का मामला उजागर होते ही संभागीय उपायुक्त आदिवासी विभाग शहडोल हरकत में आ गया  है। संभागीय उपायुक्त ने पूरे शहडोल संभाग से प्रतिनियुक्त कर्मचारियों की कुंडली तलब कर ली है।

*2019 में 2 साल की प्रतिनियुक्ति , 2026 तक वही डेरा*

कार्यालय आयुक्त आदिवासी विकास भोपाल ने आदेश क्रमांक 23262 दिनांक 24.8.2019 से स्कूल शिक्षा विभाग के उमरिया जिले के शिक्षा विभाग के शिक्षकों को 2 वर्ष की प्रतिनियुक्ति कर आदिम जाति कल्याण विभाग में पर भेजा गया  था। 

इसी आदेश के साथ जारी *पत्र क्रमांक 23263* में साफ हिदायत थी - _"2 वर्ष बाद स्थानांतरण नीति के अनुसार मूल विभाग में पदांकन किया जाए।"यानी 2021 में ही इन शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति से वापसी हो जानी थी।लेकिन हकीकत उल्टी है। 2 साल की प्रतिनियुक्ति को मानो सभी ने  "स्थाई सेटिंग" बना कर रख दिया  गया।

*उमरिया की तस्वीर आई सामने*

फिलहाल जो जानकारी मिली है उसके अनुसार उमरिया जिले के 9 शिक्षक आज भी स्कूल शिक्षा विभाग के  स्कूलों में पदस्थ थे, जिनमें निर्मला सिंह- हायर सेकेण्डरी निपनिया, राजेश कुमार मिश्रा- माध्यमिक शाला खालेकठाई, अजीत सिंह उईके - माध्यमिक शाला  सेहरा टोला, जानकी सलाम  माध्यमिक शाला करसरा, आभा सिंह  माध्यमिक शाला सेमरा, जी श्यामा राव माध्यमिक शाला  नौरोजाबाद, नीरज द्विवेदी प्राथमिक शाला  देवगवांखुर्द, जयभान श्याम हायर सेकेण्डरी विद्यालय घोघरी , रजनी सिंह प्राथमिक शाला  डोडगवां से प्रतिनियुक्ति आदेश के माध्यम से आदिम जाति विकास विभाग पाली की संभाग के आसपास की विद्यालयों में प्रतिनियुक्ति आदेश के बहाने पिछले छ: साल से जमी हुई है। प्रतिनियुक्ति में आये सभी शिक्षकों ने  मुख्य मार्ग से लगे स्कूलों में पदस्थ होकर "ड्यूटी पका" रहे हैं। विभाग की वेबसाइट पर इनके पद आज भी "रिक्त" दिख रहे हैं, जिससे नई पदस्थापना में भारी विसंगति पैदा हो रही है। कहीं स्कूल शिक्षक विहीन हैं तो कहीं सरप्लस।

*शहडोल-अनूपपुर का ब्यौरा अभी छिपा*

याद रहे, ये तो सिर्फ उमरिया जिले की तस्वीर है। पूरे संभाग के शहडोल और अनूपपुर जिले में कितने शिक्षक इसी तरह प्रतिनियुक्ति पर जमे हैं, इसका खुलासा अभी होना बाकी है।

इसी को लेकर संभागीय उपायुक्त *जे.पी. यादव* ने पत्र क्रमांक *860 दिनांक 3.8.2026* जारी कर तीनों जिलों के सहायक आयुक्तों से 3 दिन में 13 कॉलम का पूरा ब्यौरा मांगा है। विकासखंड शिक्षा अधिकारियों को भी तत्काल जानकारी भेजने के निर्देश हैं।

*अब तय होगी जिम्मेदारी*

2019 के आदेश में अवधि और वापसी दोनों स्पष्ट थे। बावजूद इसके 6 साल तक किसी ने सुध नहीं ली। अब संभाग स्तरीय जांच के बाद ही पता चलेगा कि कितने शिक्षक नियम विरुद्ध प्रतिनियुक्ति पर हैं और इस लापरवाही के लिए किस पर गाज गिरती है।

छात्राओं पर अनैतिक दबाब बनाने वाला निलंबित शिक्षक की बहाली व पदस्थापना पर उठे सवाल


उमरिया

अमरजीत दुवेदी उच्चतर माध्यमिक शिक्षक प्रभारी प्राचार्य माता शबरी कन्या शिक्षा परिसर मानपुर जिला उमारिया के विरुद्ध करीब 200 रहवासी छात्राओं के द्वारा प्राचार्य द्वारा छात्रावास में आने तथा जबरन अनैतिक दबाव डालने के आरोप में रोड पर जोरदार प्रदर्शन करने की वायरल वीडियो एवं छात्रावास से बच्चो के हक का अनाज चोरी करने के संबंध में गठित जांचदल के द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन के आधार पर अमरजीत दुवेदी को प्रकरण की संवेदनशीलता के दृष्टिगत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया था। 

कार्यालय कमिश्नर संभाग शहडोल द्वारा ऐसे मानसिकता वाले व्यक्ति को शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय चुहुरी में एक बार फिर से बहाल कर पदस्थापना किया गया जहां पे बालिकाएं छात्राएं अध्यनरत है। ऐसे शिक्षक की नियुक्ति खतरा साबित करती हैं। क्या जिम्मेदार अधिकारियों ने यह बिलकुल भी नहीं देखा की द्विवेदी को जिस स्कूल में बहाल कर रहें हैं, वहां मौके का फायदा उठाकर अनैतिक दबाब बना सकता है। ऐसे व्यक्ति को शिक्षक जैसे पवित्र पद से बर्खास्त करना चाहिए। ऐसे व्यक्ति को सिर्फ बालक विद्यालय में भेजना चाहिए। जानकर बताते हैं कि शिक्षक द्विवेदी दुवेदी का एक रिश्तेदार सहायक आयुक्त जनजाति कार्य विभाग कार्यालय शहडोल में पदस्थ है, जिसका पूरा फायदा शिक्षक उठा रहा हैं। ऐसे में छात्राओं के साथ कभी भी अनहोनी हो सकती है। जिसका जिम्मेदार पूरी तरह विभाग होगा।

झपटमारी व चोरी के 2 आरोपी गिरफ्तार, चोरी के आभूषण, बाइक व मोबाइल बरामद


उमरिया

झपटमारी एवं चोरी के प्रकरण का उमरिया पुलिस द्वारा खुलासा किया गया है। पीड़ित रावेन्द्र सिंह निवासी बिजौरा की सूचना पर थाना कोतवाली उमरिया मे अपराध क्र. 404/26 धारा 304(2), बीएनएस का पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया। गठित टीम द्वारा घटनास्थल के आसपास बारीकी से निरीक्षण कर आवश्यक साक्ष्य संकलित किए गए साथ ही पुलिस टीम द्वारा घटनास्थल के आसपास के लोगो से उक्त हुलिया के अज्ञात आरोपी के बारे में पता तलाश की गई संदेह के आधार पर एक महिला, एक पुरुष को पड़कर पूछताछ कार्यवाही के दौरान प्राप्त भौतिक एवं तकनीकि साक्ष्यों का विश्लेषण करने उपरान्त एवं मुखबिर की सूचना के आधार पर प्रकरण मे आरोपीगण की पहचान हो सकी पहचान किए गए आरोपी को त्वरित कार्यवाही कर हिरासत मे लेकर बारीकी से पूछताछ की गई , जिनके द्वारा जुर्म स्वीकार किया गया साथ ही थाना इंदवार अन्तर्गत अन्य स्थानों पर चोरी की घटना कारित करना स्वीकार किया गया। आरोपियों के निशादेही पर घटित घटनाओं मे चोरी गया मशरूका सोने , चांदी के जेवरात व एक मोटरसाइकिल, एक मोबाइल कुल कीमती लगभग 1,44,000/- रुपये जप्त किया जाकर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

दोनो आरोपियों के नाम ललन सिंह गौंड पिता शंभू उम्र 30 निवासी बड़वाही थाना मानपुर जिला उमरिया, निशा रजक पति संजीव कुमार कतलाम उम्र 22 वर्ष निवासी ग्राम बालोद थाना पुरू जिला बालोद छत्तीसगढ़ हाल ग्राम बड़वाही थाना मानपुर जिला उमरिया है। गिरफ्तार हुए आरोपियो से की गई पूछताछ पर थाना इंदवार अन्तर्गत हुई कुछ चोरियों का हुआ खुलासा, मामले मे वैधानिक कार्यवाही की जा रही। 

सामग्री खरीदी पर अनियमितता करने पर प्राचार्य को खंड शिक्षा अधिकारी पद से हटाया


उमरिया 

जिले के बिरसिंहपुर पाली में शासकीय कन्या शिक्षा परिसर की प्राचार्य सरिता जैन को खंड शिक्षा अधिकारी पद से हटा दिया गया है। उन पर छात्राओं के बैंक खातों में भेजी गई व्यक्तिगत सामग्री क्रय की राशि के उपयोग में अनियमितता का आरोप है। इस पद का प्रभार अब रीता पटेल को सौंपा गया है।

यह मामला शैक्षणिक सत्र 2025-26 से संबंधित है। शासन ने छात्राओं को व्यक्तिगत उपयोग की सामग्री खरीदने के लिए उनके बैंक खातों में राशि भेजी थी। आरोप है कि प्राचार्य सरिता जैन ने छात्राओं से यह राशि एकत्र करवा ली, लेकिन निर्धारित सामग्री की खरीद नहीं की गई।

अभिभावकों और अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों ने इस संबंध में अधिकारियों से शिकायत की थी। शिकायत मिलने के बाद विभागीय स्तर पर जांच कराई गई, जिसमें लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए। इसके बाद अधिकारियों ने तत्काल प्रभाव से सरिता जैन को खंड शिक्षा अधिकारी पद से हटाने का आदेश जारी किया।

जांच के उपरांत अधिकारियों ने निर्देश दिए हैं कि छात्राओं से एकत्रित की गई राशि तुरंत उनके बैंक खातों में वापस हस्तांतरित की जाए, ताकि वे अपनी आवश्यकतानुसार सामग्री खरीद सकें। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि छात्राओं के हितों से जुड़े मामलों में किसी भी लापरवाही या वित्तीय अनियमितता को गंभीरता से लिया जाएगा और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय लोगों ने छात्राओं के हितों की रक्षा के लिए दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

17 स्कूल भवनों की फाइल खोलने भाजपा विधायक को प्रमुख सचिव से लगानी पड़ रही है गुहार

*मुख्यमंत्री की घोषणाएं डेढ़ साल से खा रही धूल*


उमरिया

मध्यप्रदेश सरकार विकास के दावे करते थक नहीं रही है, जबकि जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर दिखाई दे रही है। तभी तो मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा जनता के बीच की गई सैकड़ों घोषणाएं आज भी धरी की धरी रह गई हैं।

हम संजय गांधी ताप परियोजना बिरसिंहपुर की 600 मेगावाट की नई विद्युत इकाई की बात नहीं कर रहे। मामला है मानपुर विधानसभा क्षेत्र के मानपुर विकासखण्ड के स्कूल भवनों का। इन भवनों की घोषणा खुद मुख्यमंत्री ने नौरोजाबाद के रामलीला मैदान में जनता के बीच की थी, पर आज डेढ़ साल बाद भी ये घोषणाएं धूल खा रही हैं।

आश्चर्य की बात है कि जिन घोषणाओं से सियासत का बाजार गर्म किया गया था, उन्हीं को लेकर अब आम जनता और विपक्ष भाजपा सरकार और उनके मुखिया का मजाक उड़ा रहे हैं।

जानकारी के अनुसार मानपुर की विधायक सुश्री मीना सिंह की मांग पर मुख्यमंत्री ने 17 स्कूल भवनों के निर्माण की घोषणा मंच से की थी। इसके बाद प्रस्ताव बने। लोक शिक्षण संचालनालय ने 7 नवंबर 2025 को पत्र लिखा और लोक निर्माण विभाग ने 28 जनवरी 2026 को तकनीकी स्वीकृति भी जारी कर दी। 

लेकिन इसके बाद 6 महीने बीत गए। न प्रशासकीय स्वीकृति मिली न बजट का आवंटन। इंतजार कर-कर के थक चुकी विधायक सुश्री मीना सिंह ने 22 जुलाई को प्रमुख सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग को पत्र लिखकर 44.23 करोड़ रुपये लागत वाले इन 17 स्कूल भवनों की फाइल को ठंडे बस्ते से निकालने की मांग की है।

जिन स्कूलों के लिए नए भवन प्रस्तावित हैं उनमें ताला, सरसवाही, बल्हौड़, चिल्हारी, चंसुरा जैसे हायर सेकेण्ड्री और इंदवार, बड़छड़, अमरपुर, परासी जैसे हाई स्कूल शामिल हैं। आज भी इन स्कूलों के बच्चे जर्जर कमरों में अभाव में पढ़ने को मजबूर हैं।

जिस आरोप पर गई सरपंची, उसी मामले पर कमिश्नर ने सचिव को किया दोष मुक्त, जिला पंचायत की दोहरी कार्रवाई कटघरे में

*पूर्व सरपंच को न्याय की जगी आस*


उमरिया

जिले की पाली जनपद पंचायत की आदिवासी ग्राम पंचायत गिजरी में अमृत सरोवर निर्माण में विलंबित भुगतान को लेकर जिला पंचायत की पूरी प्रक्रिया अब कठघरे में है। आयुक्त शहडोल के फैसले ने जिला पंचायत की कार्रवाई की मंशा पर ही सवाल* खड़े कर दिए हैं।

बताया जाता है कि मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत उमरिया ने अमृत सरोवर में भुगतान न करने के मामले में पहले सचिव सुरेन्द्र शुक्ला को निलंबित किया। फिर इतने में भी काम नहीं बना तो सरपंच नन्हू सिंह को भी बलि का बकरा बना दिया। सचिव-सरपंच पर समान रूप से भुगतान न करने के आरोप थे। 

जिला पंचायत उमरिया की इस कार्रवाई से असंतुष्ट सचिव ने आयुक्त शहडोल में अपील कर न्याय की फरियाद लगाई। जिस पर विचारण करते हुए आयुक्त ने जांच प्रतिवेदन और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर पाया कि जिला पंचायत की कार्यवाही विधि संगत नहीं है और सचिव को दोषमुक्त कर निलंबन से बहाल कर दिया।

आयुक्त ने अपने पारित फैसले में पाया कि किसी भी शासकीय निर्माण कार्य के भुगतान के लिये तय मापदंड में उपयंत्री द्वारा कार्य का मूल्यांकन के पश्चात ही भुगतान किये जाने का प्रावधान है। जब संबंधित उपयंत्री ने मूल्यांकन ही नहीं किया तो भुगतान की कार्यवाही नहीं हो सकी।  

आयुक्त ने जनपद पंचायत पाली के खण्ड पंचायत अधिकारी के जांच प्रतिवेदन का आधार लेते हुए कहा कि समय पर उपयंत्री द्वारा कार्य का मूल्यांकन नहीं करने के लिए सचिव-सरपंच को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

जांच प्रतिवेदन में यह बात सामने आई कि सचिव ने उपयंत्री से मूल्यांकन की मांग करने के बाद भी उपयंत्री ने मूल्यांकन क्यों नहीं किया। साथ ही जिला पंचायत में शिकायत के बाद भी मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने मामले में संज्ञान लेते हुए उपयंत्री पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की। उसी समय ग्राम पंचायत गिजरी के सरपंच नन्दू सिंह को पद से मुक्त कर दिया गया था, आयुक्त शहडोल के न्यायालय में फरियाद लगाकर जिला पंचायत उमरिया के आदेश को रद्द करने की मांग की है

विकासखंड में शिक्षा की बदहाली" की तस्वीर, शिक्षा का दोहरा सच बेली, महरोई में अकाल, कन्नाबहरा में शिक्षकों की भरमार 


उमरिया 

बिरसिंहपुर पाली के आदिम जाति कल्याण विभाग के विद्यालयों में शिक्षकों की पद स्थापना में व्यापक भर्रेशाही उजागर होकर सामने आई हैं। पाली विकासखंड में एक ओर बेली माध्यमिक  विद्यालय  जहाँ पर कक्षा 1 से 8 तक 102 छात्र अध्ययन रत है, इस विद्यालय में आज  सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे चल रहा है, वही पर दुसरी तरफ  पाली विकास खंड के ही  कन्नाबहरा विद्यालय में स्वीकृत पद से अधिक  शिक्षको की पद स्थापना ने आदिम जाति विभाग की कार्य शैली पर तीखे सवाल खड़े कर रहा है। बताया जाता है कि एक तरफ शिक्षकों का इस अकाल है कि प्राथमिक और माध्यमिक के लिए सिर्फ एक शिक्षक तो वही , दूसरी ओर अनुपात से अधिक शिक्षक पदस्थ करके रख दिया गया है।पाली विकास खंड के बेली माध्यमिक विद्यालय में कक्षा एक से पांच तक प्राथमिक खंड मु 72 आदिवासी छात्र और माध्यमिक में 30 छात्रों के साथ  हैं, 102 छात्र अध्ययन रत फिर भी अध्यापन के लिए  सिर्फ  एक शिक्षक । उसके ऊपर बी एल ओ,और छात्रावास का काम भी उन्ही शिक्षक के हवाले।  नियम के अनुसार यहां कम से कम  06 शिक्षकों की पद स्थापना   होनी  चाहिए।बिडम्बना ही कहा जाये की इसी आदिम जाति विभाग की कन्नाबहरा विद्यालय में  पहले से ही स्वीकृति पद भरे होने के बाद अतिरिक्त शिक्षक  पदस्थ कर दिया गया है। इसी तरह कन्नाबहरा के बगल के विद्यालय  महरोई आश्रम शाला पूरी तरह शिक्षक विहीन बनी हुई है और उसी से लगी अरहरिया दादर में सिर्फ एक शिक्षक पदस्थ हैं। 

सूत्रों का कहना है कि कन्नाबहरा विद्यालय शहडोल के समीप और मुख्य मार्ग पर होने के कारण शिक्षक वहां पदस्थ होने के लिए विभाग की खुशामद करते हैं। नतीजा ये कि जहां पहले से शिक्षक हैं वहां भी नए भेजे जा रहे हैं। बेली के अभिभावकों का कहना है "एक शिक्षक 8 कक्षाओं को कैसे पढ़ाएगा? आदिवासी बच्चों की पढ़ाई से किसी को मतलब नहीं है।"

स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने कलेक्टर उमरिया से मांग की है कि पूरे विकासखंड में युक्तियुक्तकरण कर शिक्षकों का समान वितरण किया जाए। शिक्षक विहीन स्कूलों में तुरंत पदस्थापना हो, ताकि बच्चों का भविष्य बर्बाद न हो। शिक्षा विभाग के अधिकारी इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं।

मोबाइल के बाद कीटनाशक दवा खरीदी के नाम पर ग्राम पंचायत ने किया गोल माल, सरकारी धन का दुरुपयोग


उमरिया

जिले की जनपद पंचायत करकेली की जरहा ग्राम पंचायत में वित्तीय अनियमितताओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बताया जाता है कि जरहा ग्राम पंचायत में फर्जी बिलों के जरिये तरह तरह के हथकंडे अपना कर ग्राम पंचायत के जिम्मेदारो ने शासकीय धन राशि का व्यापक रूप से दोहन किया है। अभी हाल में ही मोबाइल खरीदी की आग ठंडी भी नहीं हुई थी, कीटनाशक खरीदी का मामला ग्राम पंचायत की भष्ट कार्य शैली को बेपर्दा करके रख दिया है। जरहा ग्राम पंचायत में अब कीटनाशक दवा खरीदी कर यह साबित किया है कि ग्राम पंचायत की राशि पर ग्राम हितों से ज्यादा निजी हित साधने में उपयोग करना कोई अपराध नही है। इसी लिए जब जैसे मन हुआ राशि आहरण कर उसे फर्जी बिलों के सहारे निपटाने की जुगत की जा रही है, मालुम होवे की इस ग्राम पंचायत में  पहले  5वें राज्य वित्त से ₹19,500 का मोबाइल खरीदकर विवादों में आई पंचायत, अब 15 दिन के अंदर ₹10,235 के कीटनाशक खरीद के बिलों को लेकर सवालों के घेरे में है।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के पोर्टल से मिली जानकारी के अनुसार अक्टूबर 2025 में मिश्रा टेडर्स नामक दूकान से 2 बिलों के माध्यम से भुगतान किया गया है। मिश्रा टेडर्स के बिल क्र 37 दिनांक 15-10-25 से राशि 8100.00 व्यय मदो और बिल क्र 98 दिनांक 21-10-25 के जरिये 2135.00 पांचवे राज्य वित्त से व्यय कर खरीदी की गयी है, इस प्रकार कीटनाशक के नाम पर 10,235.00 रूपये की चपत लगायी गई है। जो आफिस एवं अन्य व्यय मदों के नाम पर की गयी है। ग्राम पंचायत में हो रही इस नियम विरूद्ध खरीदी ने ग्राम पंचायत पर बडे सवाल खड़े कर दिये है कि आखिर कार इस कीटनाशक की उपयोगिता क्या थी, क्या यह सामग्री पंचायत आयी भी की नहीं, अगर उपयोग किया गया तो उसके फोटो ग्राप कहा है, क्या खरीदी के मापदंडों का पालन किया गया आदि सवाल आज भी अनुत्तरित बने हुए है।

₹10,235 के कीटनाशक का छिड़काव जरहा की किन गलियों, नालियों या सार्वजनिक स्थानों पर किया गया? इसका स्टॉक रजिस्टर और फोटो कहां है। सरकारी खरीद के लिए टेंडर या कम से कम 3 कोटेशन अनिवार्य हैं। रिटेलर से सीधे भुगतान किस नियम के तहत हुआ?

ग्रामवासियों का कहना है कि "पहले मोबाइल के नाम पर तिजोरी खाली की, अब कीटनाशक के नाम पर। न कहीं कीट नाशक का  छिड़काव दिख रहा है, न सामान।इस तरह पंचायत के व्दारा शासकीय धन राशि का बेहद दुरुपयोग किया गया है।

ग्रामीणों ने कलेक्टर उमरिया और मुख्य कार्य पालन अधिकारी जनपद पंचायत करकेली से मांग की है कि जरहा पंचायत के वर्तमान सचिव  के कार्य काल की विस्तृत जांच जिसमें सभी निर्माण कार्य और  सभी बिलों की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।

जमीन के विवाद पर चचेरे भाई की साइबर साजिश, फर्जी इंस्टाग्राम बनाकर कर रहा था बदनाम


उमरिया

जिले के नौरोजाबाद थाना अंतर्गत ग्राम नरवार में जमीन विवाद ने रिश्तों की कड़वाहट को साइबर अपराध तक पहुंचा दिया। चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी कोई बाहरी व्यक्ति नहीं,बल्कि फरियादी का चचेरा भाई ही निकला। आरोप है कि उसने फरियादी के नाम और फोटो का इस्तेमाल कर फर्जी इंस्टाग्राम आईडी बनाई और उसी की पहचान बनकर लोगों को संदेश भेजने लगा। इस हरकत से फरियादी की सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित हुई और उसके कई व्यक्तिगत व सामाजिक काम भी बिगड़ गए। जानकारी के अनुसार फरियादी आशीष सोनी और आरोपी शिवम सोनी आपस में चचेरे भाई हैं। दोनों परिवारों के बीच लंबे समय से जमीन को लेकर विवाद चल रहा है। विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों परिवार अब गांव में अलग-अलग स्थानों पर घर बनाकर रह रहे हैं।आरोप है कि इसी रंजिश के चलते शिवम ने आशीष के नाम से इंस्टाग्राम पर फर्जी अकाउंट बनाया, प्रोफाइल में आशीष की फोटो लगाई और खुद को आशीष बताकर कई लोगों से बातचीत करने लगा।इससे परिचितों के बीच भ्रम की स्थिति बनी और फरियादी की छवि को नुकसान पहुंचा। फर्जी आईडी की जानकारी मिलने पर आशीष सोनी ने तत्काल नौरोजाबाद थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए डिजिटल साक्ष्यों और तकनीकी जांच के आधार पर आरोपी की पहचान की तथा शनिवार को उसके विरुद्ध अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(C) (पहचान संबंधी जानकारी का दुरुपयोग),66(D) (किसी अन्य का प्रतिरूप बनाकर ऑनलाइन धोखाधड़ी), 67 एवं 67(A) सहित भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं 336(2), 336(4), 318(2) और 319(2) के तहत प्रकरण दर्ज किया है। इन धाराओं का संबंध पहचान का दुरुपयोग,छलपूर्वक प्रतिरूप धारण कर धोखाधड़ी,साइबर माध्यम से अपराध करने और संबंधित दंडनीय कृत्यों से है। पुलिस के अनुसार विवेचना के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर धाराओं की अंतिम प्रयोज्यता तय की जाएगी। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि यदि उनके नाम,फोटो या पहचान का सोशल मीडिया पर कोई फर्जी अकाउंट बनाया जाए तो तुरंत संबंधित प्लेटफॉर्म,स्थानीय पुलिस या साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत करें।किसी अन्य की पहचान का दुरुपयोग कर उसे बदनाम करना या लोगों को गुमराह करना गंभीर साइबर अपराध है,जिसके लिए कानून में कड़ी सजा का प्रावधान है।

सरपंच-सचिव पर ठेकेदारी का आरोप,  निर्माण मे मिट्टी मिली रेत का उपयोग, ग्रामीणों ने रोका काम


उमरिया

जिले के विकासखंड मानपुर की ग्राम पंचायत बड़खेरा के वार्ड क्र. 19 में बन रही पुलिया की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे हैं। ग्रामीणों की शिकायत और मौके के वायरल वीडियो में आरोप है कि पुलिया में अच्छी रेत की जगह नाली की मिट्टी मिली सामग्री का उपयोग किया जा रहा है।

वीडियो में साफ दिख रहा है कि सरिया के ऊपर मशीन से पतला मसाला डाला जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह काम सरपंच पुष्पमनी सिंहबऔर सचिव धीरज लाल की मिलीभगत से उनके करीबी ठेकेदार द्वारा करवाया जा रहा है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि पंचायत में कुआं खनन समेत सभी काम ठेके पर हो रहे हैं।

मौके पर ग्राम पंचायत के जागरूक नागरिक  बड़ी संख्या में जुटे और उन्होंने इस गुणवत्ता हीन काम को  रोकने की मांग की। ग्रामीणों ने कहा कि "इस तरह की पुलिया एक बारिश में बह जाएगी और शासकीय राशि का दुरुपयोग होगा   । बताया जाता है कि इस पुलिया की लागत अनुमानित  दस लाख है इतनी धन राशि में गुणवत्ता युक्त और टिकाऊ पुलिया का निर्माण हो सकता है, जो ग्रामीणों के लिए दशकों का सहारा बनेगी,लेकिन  यह पुलिया बेहद घटिया युक्त सामग्री और गुणवत्ता हीन बनायी जा रही है। ।

ग्रामवासियों ने कलेक्टर उमरिया और  मानपुर के मुख्य कार्य पालन अधिकारी से मांग की है  पुलिया निर्माण की तत्काल जांच और दोषियों पर वैधानिक  कार्रवाई की मांग की गयी है।

विद्यालय में बड़ा खेल? फर्जी आवक रजिस्टर, गायब आवेदन और अतिथि शिक्षक भर्ती में कथित धांधली का खुलासा

*"आवेदन गायब करो, फिर कहो मिला ही नहीं" — अभ्यर्थी का गंभीर आरोप*

*फिर से हुई अतिथि शिक्षक भर्ती में गड़बड़ी तो अन्य कई गंभीर मुद्दों के साथ हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की चेतावनी*


उमरिया

जिले के बिरसिंहपुर पाली क्षेत्र के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय शाहपुर एक बार फिर गंभीर विवादों के केंद्र में है। अतिथि शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के बाद अब विद्यालय में आवेदन प्राप्त करने और अभिलेख संधारण की व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अभ्यर्थी दिलीप कुमार द्विवेदी ने आरोप लगाया है कि विद्यालय में प्राप्त होने वाले आवेदनों को नियमित शासकीय अभिलेख में दर्ज न कर कथित रूप से एक अलग रजिस्टर में दर्ज किया जाता है, ताकि बाद में आवेदन प्राप्त होने से ही इनकार किया जा सके।

आवेदक के अनुसार, 8 जुलाई 2026 को आवेदन जमा करने के बाद पावती देने से मना कर दिया गया। विद्यालय के भृत्य ने कथित रूप से कहा कि विद्यालय की सील और रजिस्टर प्रभारी प्राचार्य के पास हैं, इसलिए उनके आने के बाद ही पावती मिलेगी। वहीं जब प्रभारी प्राचार्य श्री सिंह परस्ते से दूरभाष पर संपर्क किया गया तो उन्होंने कथित रूप से कहा कि सील और आवक-जावक रजिस्टर उनके पास नहीं, बल्कि विद्यालय में ही रहते हैं। दोनों कथनों में विरोधाभास ने पूरे मामले को संदेह के घेरे में ला दिया।

आवेदक का कहना है कि 10 जुलाई 2026 को पावती मांगने पर प्रभारी प्राचार्य की मौजूदगी में कंप्यूटर ऑपरेटर से आवेदन दर्ज कराया गया। इसके बाद जो पावती दी गई, उसमें आवक की सील के स्थान पर जावक की सील लगी थी। इतना ही नहीं, रजिस्टर में आवक क्रमांक 03 दर्ज था, जबकि पावती पर 031 अंकित किया गया था बाद में उसे कंप्यूटर ऑपरेटर द्वारा सुधारा गया इससे अभिलेखों की प्रामाणिकता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि कथित रूप से प्रमाणित रजिस्टर में जनवरी 2025 से जुलाई 2026 तक केवल तीन पत्र ही दर्ज मिले। यदि यह सही है, तो इतने लंबे समय में विद्यालय को क्या  केवल तीन ही पत्र  प्राप्त हुए? अन्य आवेदन कहाँ गए? आवेदक का आरोप है कि पहले भी उसके कई आवेदन गायब कर दिए गए और बाद में अधिकारियों के समक्ष यह कह दिया जाता है कि आवेदन मिला ही नहीं।

आवेदक ने यह भी दावा किया है कि संभागीय जांच समिति की रिपोर्ट में अतिथि शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में नियमों के उल्लंघन, पुराने वैध पैनल की उपेक्षा तथा भर्ती में गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में विद्यार्थियों को होम एग्जाम में कथित रूप से अनियमित तरीके से उत्तीर्ण कराने जैसे मामलों का भी उल्लेख होने का दावा किया गया है।

ग्रामीणों द्वारा प्रभारी प्राचार्य पर पैसे लेकर विद्यार्थियों को पास कराने जैसे आरोप लगाए जाने की बात भी सामने आई है। आवेदक का कहना है कि संभाग स्तरीय गठित जांच के जांच रिपोर्ट में भी कई मामलों में अनियमितताएं उजागर हुई हैं।

दिलीप कुमार द्विवेदी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सत्र 2026-27 की अतिथि शिक्षक भर्ती में फिर से किसी प्रकार की अनियमितता हुई तो प्रभारी प्राचार्य, एसएमडीसी अध्यक्ष, सचिव, संबंधित सदस्यों तथा जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध उच्च न्यायालय में याचिका दायर की जाएगी और संपूर्ण अभिलेख न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे। वरिष्ठ अधिकारियों को इस संबंध में जानकारी दी जा चुकी है।

*अब उठ रहे हैं बड़े सवाल*

क्यों विद्यालय में शासकीय आवक रजिस्टर के स्थान पर कोई अलग बिना प्रमाणित रजिस्टर उपयोग में लाया जाता रहा, आपत्ति करने पर रजिस्टर को केवल पेज संख्या के आधार पर प्रमाणित किया गया।जनवरी 2025 से जुलाई 2026 तक केवल तीन आवेदन दर्ज होने का कारण क्या है। आवेदन की पावती देने में देरी और सील संबंधी विरोधाभास क्यों सामने आया। क्यों आवक की जगह जावक का शील लगाया गया। क्या इतने वर्षों में 3 पत्रों के अलावा विद्यालय में कोई पत्र व्यवहार नहीं हुआ। अतिथि शिक्षक भर्ती में जांच रिपोर्ट में अनियमितताओं का उल्लेख है, तो जिम्मेदारों पर अब तक ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई? प्रभारी प्राचार्य श्री सिंह परस्ते का सिर्फ वेतन वृद्धि भर  रोकना क्या पक्षपात नहीं है।

जांच रिपोर्ट में अतिथि शिक्षक भर्ती में धांधली उजागर हुई है और अन्य कई अनियमिताएं सामने आई है तो उनके पद पर बने रहना क्या न्यायसंगत है जबकि विद्यालय में उनसे दो वरिष्ठ उच्च माध्यमिक शिक्षक है। सहायक आयुक्त उमरिया को इसकी जानकारी दी गई लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं आया।

जिला पंचायत का अजब कारनामा, आखिर एक पखवाड़े में सचिवों मिली पूर्व पंचायत की की चाबी


उमरिया

जिले में तबादला नीति तमाशा बनकर रह गई है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा एक महीने के अंदर जारी किए गए दो आदेशों में 2 सचिवों को 23 दिन के भीतर ही उनकी पूर्व पदस्थ ग्राम पंचायतों में वापस भेज दिया गया है। जिला पंचायत के मुख्य कार्य पालन अधिकारी अभय सिंह ओहरिया के व्दारा जारी आदेश 15 जून 2026 और 8 जुलाई 2026 के आदेशों ने न सिर्फ तबादला नीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि एक जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी की कार्यशैली को भी कठघरे में ला खड़ा किया है। 

जब छोटे-छोटे मसले पर प्रशासनिक अधिकारियों की इस तरह की कार्य शैली ने अपने ही आदेशों को लागू करने और कराने में जिस तरह की ढुल मुल रवैया से जिला पंचायत की साख को दांव पर लगा कर रख दिया है। जब जिला प्रशासन के वरिष्ठ  अधिकारी ही अपने आदेशों को ही कपड़ों की तरह बदलते देखे जाते हैं, तब मातहत अधिकारियों और निचले स्तर के कर्मचारियों के व्दारा किये जा रहे कार्यशैली पर आखिर रोक कौन लगाएगा ?

जिला पंचायत उमरिया के व्दारा जारी 15 जून को जारी आदेश में श्याम लाल विश्वकर्मा को सलैया -13 से चांद पुर किया गया था, जिसे उच्च न्यायालय जबलपुर के पारित आदेश के चलते पुनः सलैया - 13 में पदस्थ किया गया है, जिससे साफ जाहिर होता है कि पहले किया गया तबादला आदेश नियम विरूद्ध था, इससे भी आश्चर्य जनक आदेश कमलेश चौधरी का देखने में आया है, जिसमें पहले आदेश में पठारी ग्राम पंचायत से हटा कर दुलहरी ग्राम पंचायत किया गया है, फिर दुसरे आदेश में दुबारा पठारी ग्राम पंचायत में तैनात कर दिया गया है। पल पल बदलते आदेशों से जिला पंचायत की किरकिरी करके रख दिया है। 

सूत्रों बताते है कि जिला पंचायत में तबादला नीति उद्योग बनकर रह गई है। आप अपनी मर्जी से पसंदीदा ग्राम पंचायत में तबादला करा सकते हैं, बशर्ते "आपकी मुराद के साथ हमारी मुराद पूरी होनी चाहिए"।जिला पंचायत के इस तबादला सूची के प्रकाश में आने के बाद यह साबित हो गया है कि किसी सचिव को दो-दो ग्राम पंचायत का प्रभार, तो किसी को जनपद में तैनाती के आदेशों ने जिला पंचायत की "ढोल की पोल" खोल कर रख दी है। अब देखना होगा कि ऐसे हर पल आदेशों पर  कलेक्टर और प्रदेश स्तरीय  पंचायत विभाग इस "आवागमन" वाले तबादला खेल पर क्या कार्रवाई करते हैं।

गांव में प्रसूता को गोद में उठाकर 2 किलोमीटर पैदल ले गए परिजन, विकास कार्यों पर उठे सवाल


उमरिया

एक ओर पूरी दुनिया चांद पर मानव बस्ती बसाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है, वहीं देश के कई गांव आज भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। यह केवल संसाधनों की कमी का नहीं, बल्कि योजनाओं के कमजोर क्रियान्वयन और निचले स्तर पर व्याप्त भ्रष्टाचार का भी परिणाम माना जा रहा है। ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन कई गांवों की जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है।

ऐसा ही मामला उमरिया जिले की चंदिया तहसील के बैगा बाहुल्य ग्राम देवरा में सामने आया है। यहां सड़क के अभाव में प्रसव पीड़ा से तड़प रही एक गर्भवती महिला को उसके परिजनों ने गोद में उठाकर करीब दो किलोमीटर तक कच्चे और दुर्गम रास्ते से पैदल चलकर मुख्य सड़क तक पहुंचाया। इसके बाद हाईवे से वाहन की व्यवस्था कर महिला को अस्पताल ले जाया गया।

घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार सड़क निर्माण की मांग की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। बरसात के मौसम में हालात और भी बदतर हो जाते हैं, जिससे मरीजों, गर्भवती महिलाओं और स्कूली बच्चों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

यह घटना एक बार फिर ग्रामीण विकास योजनाओं के क्रियान्वयन और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही पर सवाल खड़े करती है। यदि समय रहते गांव तक सड़क जैसी बुनियादी सुविधा उपलब्ध करा दी जाती, तो प्रसूता और उसके परिजनों को इस तरह जान जोखिम में डालकर सफर करने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ता। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल सड़क निर्माण कराने और दोषियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।

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