सरकार की ई-गवर्नेंस नीतियों एवं ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों की समस्याओं पर एआईएमटीसी ने बुलाई हाई लेवल मीटिंग

*जन विश्वास 2.0 विधेयक में सड़क एवं राजमार्ग मंत्रालय के योगदान के तहत 36 प्रावधानों को अपराधमुक्त करने का प्रस्ताव*

*प्रवर्तन को पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी व निष्पक्ष बनाने पर जोर, ई-चालान के भुगतान 45-30-15 दिन की व्यवस्था प्रस्तावित*


 *न्यू दिल्ली से पत्रकार ऊषा माहना की रिपोर्ट*

दिल्ली

ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (एआईएमटीसी) ने “ई-गवर्नेंस, कनेक्टेड व्हीकल्स और सड़क सुरक्षा तथा परिवहन क्षेत्र पर इनके प्रभाव” विषय पर एक महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की। डॉ. हरीश सभरवाल, राष्ट्रीय अध्यक्ष, एआईएमटीसी के सशक्त नेतृत्व में आयोजित इस बैठक में वरिष्ठ नीति निर्माता, सरकारी अधिकारी, प्रवर्तन एजेंसियों के प्रतिनिधि, तकनीकी विशेषज्ञ, वाहन निर्माता कंपनियां और सड़क परिवहन उद्योग के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में तेजी से बदलते तकनीक आधारित परिवहन क्षेत्र और उससे जुड़ी चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में महमूद अहमद, अपर सचिव (परिवहन), सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय; डॉ. नितिन आर. गोकर्ण, आई.ए.एस., चेयरमैन, राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड; सत्येंद्र गर्ग, आई.पी.एस., निदेशक, राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड; हसीब-उर-रहमान, आई.पी.एस., डी.आई.जी. (ट्रैफिक), जम्मू-कश्मीर; अखिलेश श्रीवास्तव, अध्यक्ष, आई.टी.एस. इंडिया फोरम; अभिजीत सिन्हा, निदेशक, ईज ऑफ डूइंग बिजनस; रामा शंकर पांडेय, चेयरपर्सन, भारत एसोसिएशन ऑफ रोड सैफ्टी वॉलिंटियर्स; राणा प्रताप, विभाग प्रमुख (परिवहन), एन.आई.सी.; विकास नरवाल, जनरल मैनेजर, एच.आर.टी.सी.; डॉ. जी.आर. शनमुगप्पा, चेयरमैन–एआईएमटीसी; एच.एस. बख्शी, अध्यक्ष–दिल्ली कॉन्ट्रैक्ट बस एसोसिएशन (डी.सी.बी.ए.); सतीश शेरावत, अध्यक्ष–इंडियन ट्रक एंड ट्रांसपोर्टर एसोसिएशन (आई.टी.टी.ए.); टाटा मोटर्स, अशोक लेलैंड, नेट्राडाइन, व्हील्सआई तथा अन्य तकनीकी और ऑटोमोबाइल कंपनियों के वरिष्ठ प्रतिनिधि तथा एआईएमटीसी, डी.सी.बी.ए., आई.टी.टी.ए. और अन्य संबंधित संगठनों के वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल रहे। एआईएमटीसी सभी गणमान्य अतिथियों और प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त करता है, जिन्होंने अपना बहुमूल्य समय देकर बैठक को सफल बनाया और विकसित भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में योगदान दिया।

डॉ. हरीश सभरवाल ने जमीनी समस्याओं को उठाते हुए कहा कि इस बैठक का मुख्य उद्देश्य नीति निर्माताओं, प्रवर्तन एजेंसियों और परिवहन उद्योग के बीच की दूरी को कम करना है। उन्होंने कहा, “तकनीक को ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, सड़क सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ाने का माध्यम बनना चाहिए, न कि ईमानदार परिवहन संचालकों पर अतिरिक्त बोझ। परिवहन उद्योग केवल डिजिटल प्रवर्तन का विषय नहीं है, बल्कि नए परिवहन तंत्र के निर्माण में उसका भागीदार होना चाहिए।” एआईएमटीसी के सलाहकार एवं दिल्ली सरकार के पूर्व उप परिवहन आयुक्त अनिल छिकारा द्वारा एक विस्तृत प्रस्तुति के माध्यम से परिवहन क्षेत्र की प्रमुख समस्याओं को रखा गया। प्रमुख समस्याओं में ई-चालान प्रणाली का दुरुपयोग शामिल है, जिससे परिवहन व्यवसाय पर अनुपालन का बोझ और लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ रही है तथा शिकायत निवारण प्रणाली प्रभावी नहीं है। ई-गवर्नेंस से जुड़ी समस्याओं, जैसे ई-ग्रास पोर्टल की खराबी, ऑनलाइन लेनदेन असफल होना, पुलिस सत्यापन की जटिल प्रक्रिया, पलूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट के लिए मालिक का ओ.टी.पी. आवश्यक होना, परमिट डाउनलोड करने में कठिनाई तथा बड़ी फ्लीट कंपनियों के लिए कॉर्पोरेट इंटरफेस का अभाव भी उठाया गया। माल वाहनों में वी.एल.टी.डी. से जुड़ी समस्याओं, जैसे अधिक लागत, सीमित वेंडर, पहले से लगे जी.पी.एस. के बावजूद अलग उपकरण की आवश्यकता, कई एजेंसियों द्वारा अलग-अलग वी.एल.टी.डी. की मांग, वायरिंग और वारंटी संबंधी समस्याएं तथा परमिट एवं फिटनेस नवीनीकरण में देरी पर भी चर्चा हुई। कनेक्टेड व्हीकल्स और तकनीक आधारित प्रवर्तन से संबंधित मुद्दों में वाहन मालिकों के डेटा अधिकार, गोपनीयता, साइबर सुरक्षा, वाहन की तकनीकी जानकारी तक पहुंच, स्वतंत्र मरम्मत की सुविधा तथा ओ.ई.एम. द्वारा अनधिकृत रिमोट कंट्रोल या एकतरफा प्रतिबंध से सुरक्षा जैसे विषय शामिल रहे। कनेक्टेड वाहनों के लिए एक मानक प्रोटोकॉल बनाने की मांग की गई। 

सड़क सुरक्षा को मजबूत करने के लिए माल भेजने वाले और प्राप्त करने वाले को ओवरलोडिंग के लिए जवाबदेह बनाने, बसों में व्यावसायिक सामान ले जाने पर रोक, ट्रक पार्किंग एवं ड्राइवरों के लिए आराम की सुविधाएं बढ़ाने, ओवरस्पीडिंग पर नियंत्रण, स्कूल बच्चों को ले जाने के लिए निजी वाहनों के अवैध उपयोग को रोकने, स्लीपर बसों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा पेशेवर ड्राइवरों को सम्मान और सामाजिक पहचान देने पर जोर दिया गया। महमूद अहमद, अपर सचिव (परिवहन), सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, ने कहा कि मंत्रालय ई-चालान प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए सुधार कर रहा है और हितधारकों के सुझावों के आधार पर कमियों को दूर करने के लिए तैयार है। उन्होंने मंत्रालय द्वारा किए जा रहे कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों और सुधारों की जानकारी दी। माल वाहनों की नई श्रेणियों का प्रस्ताव रखा गया है, जिसमें एल.जी.वी. 12 टन तक, एम.जी.वी. 12 से 18 टन और एच.जी.वी. 18 टन से अधिक होंगे। 12 टन तक के हल्के माल वाहनों को परमिट से छूट देने और मध्यम माल वाहन की श्रेणी 12 से 18 टन करने का प्रस्ताव है। मध्यम और भारी माल वाहनों के लिए ऐसी ऑनलाइन और स्वचालित व्यवस्था विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे आर.टी.ओ. कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से जाने की आवश्यकता कम हो। टूरिस्ट बस ऑपरेटरों के लिए ऑथराइजेशन परमिट की न्यूनतम वैधता पांच वर्ष करने का प्रस्ताव है, जिसे 10 वर्ष तक बढ़ाया जा सके, ताकि हर वर्ष की औपचारिकताओं और भारी अग्रिम वित्तीय बोझ को कम किया जा सके। वाहन का स्वामित्व हस्तांतरण और एन.ओ.सी. जैसी सेवाओं को ऑनलाइन किया जा रहा है। 

जन विश्वास 2.0 विधेयक में सड़क एवं राजमार्ग मंत्रालय के योगदान के तहत 36 प्रावधानों को अपराधमुक्त करने का प्रस्ताव है, ताकि ईज ऑफ लिविंग और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा मिले। किसी वाहन को दूसरे राज्य में बिना पंजीकरण बदले चलाने की अवधि 12 महीने से बढ़ाकर पांच वर्ष करने का प्रस्ताव है। सी.एम.वी.आर. रूल 167 ए में संशोधन कर राज्यों को इलेक्ट्रॉनिक प्रवर्तन की सुविधा दी गई है। ई-चालान के लिए एस.ओ.पी. तैयार कर सुप्रीम कोर्ट कमेटी के माध्यम से प्रस्तुत की गई है तथा प्रवर्तन को पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने पर जोर दिया गया है। ई-चालान के भुगतान के लिए 45-30-15 दिन की व्यवस्था प्रस्तावित है। इसके तहत 45 दिन में चालान का भुगतान या आपत्ति, 30 दिन में संबंधित प्राधिकारी द्वारा निर्णय और चालान सही पाए जाने पर अतिरिक्त 15 दिन में भुगतान किया जाएगा। यदि 30 दिन में निर्णय नहीं होता है तो चालान निरस्त माना जाएगा। लगभग 94 में से 90 से अधिक आर.टी.ओ. सेवाओं को डिजिटल करने का प्रस्ताव है, ताकि मानवीय हस्तक्षेप कम हो। ड्राइवर और वाहन मालिक की जवाबदेही तय करने के लिए उचित व्यवस्था बनाने पर भी विचार किया जा रहा है। बैठक में बताया गया कि ए.आई.एस.-230 कनेक्टेड वाहनों के लिए नियामक ढांचा प्रदान करता है। सड़क एवं राजमार्ग मंत्रालय ने एआईएमटीसी द्वारा सुझाए गए स्टैंडर्डाइज्ड कनेक्टेड व्हीकल प्रोटोकॉल पर विचार करने का आश्वासन दिया, विशेषकर डेटा सुरक्षा, ग्राहक की सहमति और डेटा शेयरिंग पर नियंत्रण के संबंध में। एआईएमटीसी के प्रतिनिधित्व के बाद सड़क एवं राजमार्ग मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि माल वाहनों में वी.एल.टी.डी. के साथ पैनिक बटन आवश्यक नहीं है। राज्यों में वेंडर प्रतिबंधों को समाप्त करने और सभी अनुमोदित वी.एल.टी.डी. वेंडरों को देशभर में प्रतिस्पर्धी कीमतों पर सेवाएं देने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। लगभग 178 ए.आर.ए.आई.-अनुमोदित वी.एल.टी.डी. वेंडरों को ए.आई.एस.-140 मानकों के अनुसार देशभर में समान अवसर देने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। अलग-अलग एजेंसियों द्वारा कई वी.एल.टी.डी. लगाने की मांग से संबंधित उद्योग की चिंता की भी जांच की जाएगी और उसका समाधान जल्द किया जाएगा। 

कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के संबंध में बताया गया कि 16 राज्यों में यह व्यवस्था लागू हो चुकी है, हालांकि कुछ कमियां अभी भी मौजूद हैं। शेष राज्यों में भी इसे लागू करने के प्रयास जारी हैं। सरकार एक राष्ट्रीय कमांड एंड कंट्रोल सेंटर स्थापित करने की दिशा में भी काम कर रही है, जिससे राज्यों की प्रणालियों और उपकरणों को जोड़ा जा सके। सड़क एवं राजमार्ग मंत्रालय वाणिज्यिक वाहन चालकों के लिए उपलब्ध विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी एकत्र कर रहा है और परिवहन संगठनों को ड्राइवरों का ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण कराने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। ड्राइवरों के लिए मेरिट/डिमेरिट पॉइंट सिस्टम पर भी विचार किया जा रहा है। अधिक नकारात्मक अंक जमा होने पर पहले लाइसेंस निलंबित और बाद में रद्द किया जा सकता है। भारी वाहनों में लगभग 8-9 उन्नत सुरक्षा प्रणालियों को लागू करने या उन पर विचार किया जा रहा है, जिनमें ड्राइवर की नींद या थकान पहचानने की प्रणाली, लेन से हटने की चेतावनी, आपातकालीन ब्रेकिंग तथा अन्य ए.डी.ए.एस. सुविधाएं शामिल हैं। 

भारत ने व्हीकल-टू-व्हीकल कम्युनिकेशन के शुरुआती चरण के लिए 30 मेगा हर्ट्ज स्पेक्ट्रम आवंटित किया है। इस तकनीक के माध्यम से वाहन अपनी लोकेशन, दिशा और गति जैसी जानकारी एक-दूसरे से साझा कर सकेंगे। इससे ड्राइवरों को संभावित खतरे की पहले से चेतावनी मिल सकेगी। भारत इस तकनीक को लागू करने वाले विश्व के शुरुआती देशों में शामिल हो सकता है।बैठक में स्लीपर बसों में आग लगने, आपातकालीन निकास बंद होने, छत पर बने इमरजेंसी एग्जिट के सामान से बाधित होने तथा संकरे रास्तों की समस्या पर विशेष चिंता व्यक्त की गई। बसों की संरचनात्मक सुरक्षा बढ़ाने के लिए बस बॉडी कोड लागू किया गया है और इसके नए प्रावधान 1 सितंबर 2025 से प्रभावी हैं। अलग से तैयार की जाने वाली बस बॉडी को निर्धारित सुरक्षा और संरचनात्मक मानकों का पालन करना होगा। बस बॉडी निर्माण में आर.टी.ओ., ओ.ई.एम. और बॉडी बिल्डर की तीन स्तरीय प्रमाणन प्रक्रिया का प्रावधान बताया गया है। ट्रकों में माल को सही ढंग से ढकने और सुरक्षित रूप से बांधने की नई आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। बाहर निकला हुआ माल निर्धारित मापदंडों और सुरक्षा मानकों के अनुसार होना चाहिए। दिल्ली एनसीआर के परिवहन संचालकों को परिवर्तन योजना का लाभ उठाने की सलाह दी गई। साथ ही, प्रधानमंत्री राहत योजना के बारे में जागरूकता बढ़ाने की अपील की गई, जिसमें पुलिस, गृह, स्वास्थ्य और अन्य एजेंसियों को दुर्घटना के बाद त्वरित सहायता के लिए डिजिटल रूप से जोड़ा जा रहा है। बताया गया कि 780 से अधिक जिलों को इस योजना से जोड़ने का कार्य चल रहा है। सड़क एवं राजमार्ग मंत्रालय राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे के किनारे निजी भूमि पर वेसाइड एमिनिटीज विकसित करने की नीति में भी सुधार कर रहा है, ताकि निजी भूमि मालिकों और उद्यमियों की अधिक भागीदारी हो सके। डॉ. नितिन आर. गोकर्ण, चेयरमैन, राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड, ने एआईएमटीसी द्वारा उठाए गए मुद्दों को “आंखें खोलने वाला” बताया और कहा कि इन सभी चिंताओं की गंभीरता से जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा के लक्ष्य सरकार, उद्योग और अन्य हितधारकों के सहयोग से ही प्राप्त किए जा सकते हैं। 

सत्येंद्र गर्ग, निदेशक, राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड, ने निर्देश दिया कि विभिन्न प्रकार के चालानों, संबंधित नियमों और कानूनी प्रावधानों, उद्योग की समस्याओं, मांगों, प्रमाणों और केस स्टडी के साथ एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाए। इसमें कानूनी और नीतिगत समाधान भी शामिल किए जाएंगे। श्री हसीब-उर-रहमान, आईपीएस, डी.आई.जी. (ट्रैफिक), जम्मू-कश्मीर, ने कहा कि कार्रवाई केवल वास्तविक नियम उल्लंघन करने वालों पर होनी चाहिए और ईमानदार परिवहन संचालकों को अनावश्यक परेशान नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से एन.एच.-44 पर खराब मौसम, बारिश और भूस्खलन के कारण ट्रक चालकों और फल उद्योग को होने वाले नुकसान, ड्राइवरों के उत्पीड़न, भ्रष्टाचार और असमान प्रवर्तन का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि पेशेवर ड्राइवरों की कमी को दूर करने के लिए उन्हें सम्मान, बेहतर कार्य परिस्थितियां और उचित सुविधाएं देना आवश्यक है। उन्होंने ड्राइवरों के लिए पर्याप्त विश्राम स्थल, शौचालय, भोजन की सुविधा और नियमित सड़क सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम चलाने पर भी जोर दिया।

अभिजीत सिन्हा, निदेशक, ईज ऑफ डूइंग बिजनस, ने कहा कि तकनीक का उद्देश्य अनुपालन का बोझ बढ़ाना नहीं बल्कि कम करना होना चाहिए। उन्होंने एआईएमटीसी द्वारा उठाए गए मुद्दों को उचित स्तर पर आगे बढ़ाने का आश्वासन दिया। उन्होंने बताया कि वाणिज्यिक वाहन चालकों के लिए लगभग 200 पार्किंग और विश्राम स्थल पहले ही एन.एच.आई.डी.सी.एल. द्वारा विकसित किए जा चुके हैं।

अखिलेश श्रीवास्तव, अध्यक्ष, आई.टी.एस. इंडिया फोरम, ने जी.पी.एस., रिमोट सेंसिंग, कनेक्टेड व्हीकल्स और इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम के अधिक उपयोग की वकालत की। उन्होंने कहा कि इससे मानवीय हस्तक्षेप और भ्रष्टाचार की संभावना कम होगी तथा प्रवर्तन अधिक निष्पक्ष और पारदर्शी बनेगा। यू.पी.आई., फास्टैग और आधार जैसी सफल डिजिटल प्रणालियों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि कनेक्टेड व्हीकल सिस्टम से सड़क सुरक्षा में सुधार, दुर्घटनाओं में कमी और ड्राइवरों की सहायता संभव है। श्री रामा शंकर पांडेय, चेयरपर्सन, बी.ए.आर.एस., ने कहा कि सड़क सुरक्षा की समस्याओं का समाधान जमीनी हकीकत को समझे बिना संभव नहीं है। इसके लिए समाज, सरकार और बाजार—सभी की सामूहिक भागीदारी जरूरी है। उन्होंने वैज्ञानिक और व्यवस्थित दृष्टिकोण, विभिन्न मंत्रालयों के बीच समन्वय, सड़क सुरक्षा संगठनों, स्वयंसेवकों और युवाओं की भागीदारी पर जोर दिया। उन्होंने एआईएमटीसी और राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड के साथ मिलकर राष्ट्रीय स्तर पर सड़क सुरक्षा के लिए कार्य करने की इच्छा व्यक्त की।

राणा प्रताप, विभाग प्रमुख (परिवहन), एन.आई.सी., ने कहा कि एआईएमटीसी द्वारा एन.आई.सी., ई-ग्रास पोर्टल और अन्य तकनीक संबंधित जो व्यावहारिक समस्याएं उठाई गई हैं, उनकी जांच की जाएगी और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इस उच्चस्तरीय बैठक में व्यापक सहमति बनी कि सड़क सुरक्षा, डिजिटल परिवर्तन और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को साथ-साथ आगे बढ़ाना आवश्यक है। डॉ. हरीश सभरवाल, राष्ट्रीय अध्यक्ष–एआईएमटीसी, ने कहा कि भारत का सड़क परिवहन क्षेत्र बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। एआईएमटीसी तकनीक आधारित प्रशासन, कनेक्टेड वाहनों और मजबूत सड़क सुरक्षा का पूरी तरह समर्थन करता है, लेकिन यह परिवर्तन निष्पक्ष, सहयोगात्मक, पारदर्शी और जमीनी वास्तविकताओं पर आधारित होना चाहिए। बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों की सकारात्मक प्रतिक्रिया से यह स्पष्ट हुआ कि सरकार तकनीक और नीतियों को बनाते समय जमीनी हकीकत और परिवहन उद्योग के व्यावहारिक अनुभवों को महत्व दे रही है। ई-चालान, वी.एल.टी.डी., ई-गवर्नेंस, डिजिटल प्रवर्तन, कनेक्टेड व्हीकल्स, ड्राइवर कल्याण और सड़क सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर आगे विचार कर आवश्यक सुधारात्मक और नीतिगत कदम उठाए जाएंगे।

सरदार चरणजीत सिंह मानद डॉक्टरेट उपाधि से हुए सम्मानित, देश-विदेश की 150 विशिष्ट हस्तियां भी हुई सम्मानित

*रुस्तम-ए-हिन्द के नाम से जुड़ा सम्मान, गौरव बढ़ा, विंदु दारा सिंह उपस्थिति में मिला सम्मान*

*न्यू दिल्ली से पत्रकार ऊषा माहना की खास रिपोर्ट*


दिल्ली

नई दिल्ली में आयोजित एक भव्य सम्मान समारोह में अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार कार्यकर्ता, पत्रकार एवं रुस्तम-ए-हिन्द मीडिया समूह के संस्थापक सरदार चरणजीत सिंह को पत्रकारिता, मानवाधिकार, जनसेवा और सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया। यह सम्मान विश्व सांस्कृतिक एवं शैक्षिक संगठन द्वारा आयोजित समारोह में प्रदान किया गया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में अभिनेता एवं प्रसिद्ध पहलवान दारा सिंह के पुत्र विंदु दारा सिंह उपस्थित रहे। विशेष बात यह रही कि दारा सिंह की प्रसिद्ध उपाधि “रुस्तम-ए-हिन्द” से सरदार चरणजीत सिंह के मीडिया समूह का नाम जुड़ा हुआ है, जिसके कारण यह सम्मान उनके लिए और भी विशेष महत्व रखता है।

आयोजकों के अनुसार समारोह में देश और विदेश से आई लगभग 150 विशिष्ट हस्तियों को उनके-अपने क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान के लिए मानद डॉक्टरेट एवं अन्य सम्मानों से अलंकृत किया गया। इस अवसर पर शिक्षा, समाजसेवा, पत्रकारिता, मानवाधिकार और जनहित से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिभाओं को भी सम्मानित किया गया।

सरदार चरणजीत सिंह लंबे समय से पत्रकारिता और जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाते रहे हैं। उनका मानना है कि पत्रकारिता केवल समाचार देने का माध्यम नहीं, बल्कि जनता के अधिकारों की रक्षा करने और व्यवस्था से जवाब मांगने का एक सशक्त लोकतांत्रिक माध्यम भी है।

सम्मान प्राप्त करने के बाद सरदार चरणजीत सिंह ने इसे व्यक्तिगत उपलब्धि के साथ-साथ एक बड़ी सामाजिक जिम्मेदारी बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी सम्मान की वास्तविक सार्थकता तभी है, जब उससे समाज के कमजोर, पीड़ित और अधिकारों से वंचित लोगों की आवाज को और अधिक मजबूती मिले।

मानद डॉक्टरेट की यह उपाधि सरदार चरणजीत सिंह के सार्वजनिक एवं सामाजिक जीवन की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखी जा रही है, जिस पर उनके समर्थकों और शुभचिंतकों ने प्रसन्नता व्यक्त की है।

क्या राहुल गांधी ने अपने पद का गलत इस्तेमाल किया? नेता प्रतिपक्ष के आचरण और कार्य व्यवहार पर गंभीर सवाल- मनोज द्विवेदी


जंतर - मंतर मे काकरोच पार्टी के धरना - प्रदर्शन और काकरोचों के संसद कूच के अराजक व्यवहार के बाद संसद मे नेता विपक्ष राहुल गांधी एक युवक को लेकर सामने आए और पत्रकार वार्ता की कि वह युवक पैलेट गन से घायल हुआ है। बाकायदा युवक के चोटों की नुमाईश की गयी। दिल्ली पुलिस और सरकार ने पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोपों का खंडन किया‌।

 दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जंतर - मंतर मे बल प्रयोग की संपूर्ण जांच के किये एक विशेष टीम का गठन किया गया है। मतलब सम्पूर्ण जांच अब सुप्रीम कोर्ट की निगरानी मे होगी।

   कल शुक्रवार को नेता विपक्ष राहुल गांधी संसद मार्ग स्थित थाने पहुंचे और  पैलेट गन से घायल व्यक्ति को साथ लेकर FIR लिखवाने के लिये दबाव बनाते हुए धरने पर बैठ गये। 

बतलाया जा रहा है कि उन्होंने सात घंटे तक थाने मे बैठ कर पुलिस पर प्रकरण दर्ज करने के लिये दबाव बनाया । राहुल गांधी के दबाव में दिल्ली पुलिस ने अज्ञात लोगों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर लिया।

    किसी एक व्यक्ति के संदिग्ध रुप से घायल होने पर संसद मे नेता विपक्ष द्वारा पुलिस थाने मे प्रकरण दर्ज करवाने के लिये सात घंटे तक दबाव बनाने का यह ऐतिहासिक मामला है। इसके दूरगामी परिणाम देखने को मिल सकते हैं।

  आरोप है कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा जिस मामले मे विशेष जांच दल गठित करके जांच के आदेश दिये हैं , इतने गंभीर मामले मे तुष्टिकरण की राजनीति के लिये अपनी पोजिशन का गलत और नाजायज़ इस्तेमाल करते हुए दिल्ली पुलिस पर दबाव बना कर प्रकरण दर्ज करवाया। उच्च पद पर बैठे इतने महत्वपूर्ण व्यक्ति को ना केवल ऐसे आचरण से बचना चाहिये था बल्कि अब संसद को इसे स्वत: संज्ञान मे लेना चाहिये।

     संसद कूच के बाद अनियंत्रित और अराजक भीड को दिल्ली पुलिस द्वारा नियंत्रित करने और संसद मे घुसने से रोकने के लिये बल प्रयोग किया गया। राहुल गांधी ने पैलेट गन के इस्तेमाल से युवक के घायल होने का आरोप लगाया था।

  लेकिन इससे बहुत से सवाल उठ खडे हुए हैं कि जैसे --

1. महत्वपूर्ण पद पर होने के बावजूद राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी वाले जांच पर भरोसा क्यों नहीं किया ?

2. सुप्रीम कोर्ट मे और सार्वजनिक रुप से दिल्ली पुलिस और सरकार ने पैलेट गन के प्रयोग से मना किया है ।

3.   पैलेट गन से हज़ारों की भीड़ मे सिर्फ एक ही व्यक्ति घायल कैसे हुआ ?

4. पैलेट गन से घायल होने की शिकायत लेकर पुलिस, कोर्ट ना जाकर सीधे राहुल गांधी के पास कैसे पहुंचा ? 

5. भीड मे से अन्य कोई पैलेट गन प्रभावित व्यक्ति आज तक सामने क्यो नही आया ?

6. जंतर - मंतर और संसद कूच की मिनट - मिनट की रिकार्डिंग हजारों लोगों ,यू ट्यूबर , मीडिया, पुलिस की वीडियो रिकॉर्डिंग और लाईव प्रसारण मे करोड़ो जनता के सामने था / है। 

पैलेट गन इस्तेमाल का एक भी फुटेज सामने क्यों नहीं आया ?

 मेरा उद्देश्य केवल इतना है कि यदि सुरक्षा बलों द्वारा पैलेट गन का प्रयोग किया गया है , तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि सच कौन बोल रहा है ?

 सम्पूर्ण मामले की उच्च स्तरीय जांच और उसके परिणाम की प्रतीक्षा पूरे देश को है । फिर राहुल गांधी ने पुलिस पर अतिरिक्त बेजा दबाव क्यों डाला ? देश मे प्रतिदिन ऐसे हजारों बडे -_छोटे मामले सामने आते हैं ,जहाँ पुलिस रिपोर्ट दर्ज तो क्या ...कुछ भी नहीं करती । ऐसे सभी मामलों मे क्या राहुल गांधी पीडितों के साथ खडे दिखते हैं ? 

बहरहाल सम्पूर्ण मामले और राहुल के आचरण पर अब देश भर की नजर रहेगी ।

*मनोज द्विवेदी, अनूपपु्र, म.प्र.*

चर्चित ग़ज़ल संग्रह 'शाम तक लौटा नहीं' के बाद डॉ. सोमनाथ शुक्ल का नया दोहा-संग्रह 'श्रम-साधक' शीघ्र होगा प्रकाशित


​प्रयागराज

शहर के जाने-माने कवि और साहित्यकार डॉ. सोमनाथ शुक्ल एक बार फिर साहित्य प्रेमियों के लिए एक नई और सशक्त रचना लेकर आ रहे हैं। उनके बहुचर्चित ग़ज़ल संग्रह 'शाम तक लौटा नहीं' की अपार सफलता के बाद, अब उनका नवीनतम दोहा-संग्रह 'श्रम-साधक (युग की प्रतिध्वनि)' जल्द ही पाठकों के हाथों में होगा। हाल ही में इस पुस्तक का आकर्षक कवर पेज जारी किया गया है।

​श्वेतवर्णा प्रकाशन द्वारा प्रकाशित की जा रही यह कृति मुख्य रूप से 'श्रमिक-व्यथा' पर केंद्रित है। विकास की चकाचौंध और गगनचुंबी इमारतों के निर्माण में अपना पसीना बहाने वाले, हाशिए पर खड़े 'श्रमवीरों' के अधिकारों और उनकी पीड़ा का यह एक अत्यंत संवेदनशील साहित्यिक दस्तावेज़ है।

​डॉ. शुक्ल ने इस संग्रह में बाल-श्रम की भट्ठियों में झुलसते बचपन, विस्थापित होते बेबस किसान और आधुनिक डिजिटल युग की मशीनी व्यवस्था में उलझे कामगारों की अनकही व्यथा को दोहों के पारंपरिक और कड़े व्याकरणिक मीटर में पूरी करुणा के साथ पिरोया है।

​पुस्तक के आवरण पृष्ठ से यह स्पष्ट होता है कि यह कृति केवल दर्द का गान नहीं है, बल्कि महानगरों की चकाचौंध में गुम हो चुके श्रमजीवी 'मनुष्य' को खोजने की एक बेचैनी और एक न्यायपूर्ण समाज का स्वप्न भी है।

​२९९/- रुपये के मूल्य वाली यह पुस्तक जल्द ही बाज़ार में उपलब्ध होगी। प्रयागराज के साहित्यिक जगत और डॉ. शुक्ल के पाठकों को इस नई पुस्तक के विमोचन का बेसब्री से इंतज़ार है।

गुलाब सलाट एक्शन अभिनेता को मिला राष्ट्रीय कार्य दर्पण गौरव पुरस्कार अवॉर्ड 


मुम्बई

गुजरात के आनंद जिले के एक साधारण परिवार में जन्मे गुलाब सलाट आज भारतीय सिनेमा के उभरते हुए एक्शन एक्टर के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं। गरीबी, संघर्ष और असफलताओं के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उनके जीवन की कहानी हर उस युवा के लिए प्रेरणा है जो बड़े सपने देखता है, लेकिन हालात से हार मान लेता है।

गुलाब को अब तक कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिल चुके हैं —पुरस्कार अभिनंदन पत्र राष्ट्रीय एकता सन्मान महासोळा राज्यस्तरीय लोक सेवा गौरव अवार्ड  दिल्ली बॉलीवुड सिने रिपोर्टर अवार्ड, नागपुर गौरव महाराष्ट्र अवार्ड, मुंबई जन गौरव कार्य दर्पण अवार्ड, वडोदरा सिने मीडिया अवार्ड, और वाइब्रेंट गुजराती फिल्म अवार्ड। ये सम्मान उनके कठिन परिश्रम और प्रतिभा की पहचान हैं।

*संघर्ष की शुरुआत: तंबू से मुंबई तक का सफर*

गुलाब के पिता तम्मा भाई सलाट बेहद गरीब थे और उन्होंने अपना पूरा जीवन एक खाट-तंबू में बिताया। लेकिन उन्होंने अपने बेटे के सपनों को कभी मरने नहीं दिया। बचपन से ही गुलाब फिल्मों की दुनिया से आकर्षित थे। मात्र 8 साल की उम्र में उन्होंने अपने पिता से कहा कि एक दिन वे फिल्मों में काम करेंगे।

पिता ने बेटे के सपनों के लिए दिन-रात मेहनत की और उन्हें ऑल इंडिया वाडो काई कराटे दो अकादमी में दाखिला दिलाया। यहीं से गुलाब ने अपने जीवन की दिशा तय की — एक्शन और मार्शल आर्ट के जरिए फिल्मी दुनिया में नाम कमाना।

*हैदराबाद से मुंबई तक — मेहनत और धोखे की कहानी*

डांस और जिमनास्टिक में माहिर होने के लिए गुलाब हैदराबाद गए, जहां उन्होंने एक साल की डिग्री हासिल की। इसके बाद उनके पिता उन्हें लेकर मुंबई पहुंचे ताकि उन्हें फिल्म में काम मिल सके।

लेकिन किस्मत ने फिर परीक्षा ली — एक डायरेक्टर ने गुलाब के पिता से ₹15,000 ठग लिए और काम देने का वादा पूरा नहीं किया।    निराश होकर पिता-पुत्र वापस आनंद लौट आए। कुछ समय बाद तम्मा भाई का निधन हो गया। यह गुलाब के जीवन का सबसे कठिन दौर था।

*संघर्ष से सफलता तक*

पिता की मृत्यु के बाद गुलाब ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने कराटे सिखाना शुरू किया, छोटे-छोटे शो किए और डांस प्रस्तुतियों से जो भी कमा सकते थे, उससे घर चलाया। उनके परिवार में दो भाई और दो बहनें थीं, और मां की तबीयत भी बिगड़ती जा रही थी।

इन्हीं संघर्षों के बीच गुलाब ने निश्चय किया कि वे अपने पिता का नाम रोशन करेंगे। लगातार प्रयासों के बाद उन्हें टीवी सीरियल ‘जय जय जग जननी दुर्गा मां जय बजरंगबली’ में काम करने का अवसर मिला। इसके बाद फिल्मों में भी उनका सफर शुरू हुआ।

*अब एक्शन ही पहचान है*

गुलाब सलाट आज एक प्रशिक्षित एक्शन एक्टर हैं, जिन्होंने मार्शल आर्ट, कराटे, जिमनास्टिक, योगा, बॉडी स्टंट, ब्रेक डांस, लाठी, ननचाकू, तलवार, राइफल शूटिंग और फिल्मी अभिनय में महारत हासिल की है।    उनका कहना है —“मैं अपने पिता का नाम रोशन करने का सपना जल्द ही पूरा करूंगा।”

गुलाब सलाट की यह यात्रा न सिर्फ एक अभिनेता की कहानी है, बल्कि उस संघर्षशील भारतीय युवा की दास्तान है जो हालात से नहीं, बल्कि अपने हौसलों से लड़ता है।

*“गुलाब सलाट — मेहनत, लगन और आत्मविश्वास की जीवंत मिसाल”*

स्वदेशी जागरण मंच ने टॉवर-चौक पर दीप-प्रज्जवलन कर उत्साह से किया हिन्दू नव वर्ष का स्वागत 


 

देवघर

स्थानीय टॉवर चौक पर स्वदेशी जागरण मंच द्वारा भारतीय सनातन परंपरा, संस्कृति और नव चेतना का प्रतीक हिन्दू नव वर्ष पर दीप प्रज्जवलन कर पूरे उत्साह व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर खूब मिठाइयां बांटी गई। मौके पर मंच के प्रान्त समन्वयक मनोज कु० सिंह ने कहा कि सबों को हिन्दू नव वर्ष नव संवत्सर विक्रम संवत २०८३, युगाबद ५१२८की बहुत-बहुत हार्दिक बधाई व अनंत शुभकामनाएँ । यह दिवस सृष्टि के नव आरंभ, धर्म सत्य और संस्कारों की पुनर्स्थापना  का प्रतीक है। हिन्दू नव वर्ष हमारी काल-गणना, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्र बोध को सुदृढ़ करने वाला दिन है। इस दिन हम सब मिलकर नव-संकल्पों के साथ सशक्त भारत, समृद्ध भारत व विकसित भारत के निर्माण में सहभागी बनें ,और दृढ़ता से सभी लोग स्वदेशी अपनाने का संकल्प ले। इस अवसर पर पूर्व विधायक नारायण दास, स्वदेशी जागरण मंच के जिला संयोजक संजय सिंह, प्रभाष गुप्ता, अमर सिंहा, गिरीश सिंह, आशा झा, जीवेश सिंह, सुप्रिया  गुप्ता, लक्ष्मी देवी चंद्रवंशी, तनुजा सिंह, विपिन अग्रवाल, संजीव सिंह, गुड्डू ब'का , सचिन सुल्तानिया, गौरी शंकर शर्मा, विद्यार्थी परिषद के राजीव इत्यादि  लोग मौजूद थे।

कोयला चोरी में 3 गिरफ्तार, लेकिन एरिया सेल्स मैनेजर अमित सिंह पर मेहरबानी क्यों? जांच पर उठे गंभीर सवाल


राजनांदगांव

जगरन्नाथपुर ओपन कास्ट खदान से ट्रक-ट्राला के माध्यम से कोयला चोरी के सनसनीखेज मामले में पुलिस ने भले ही तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया हो, लेकिन इस पूरे प्रकरण में एरिया सेल्स मैनेजर भटगांव अमित सिंह की संदिग्ध भूमिका सामने आने के बावजूद न तो उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है और न ही किसी प्रकार की विभागीय या कानूनी कार्रवाई हुई है इससे जांच की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं।

अखबार में प्रकाशित खबर एवं न्यूज वेबसाइट में उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जगरन्नाथपुर खुली खदान से कोयला लोड ट्रक-ट्रालों को सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर मुख्य द्वार से बाहर निकाला जा रहा था मामले के उजागर होने के बाद खदान प्रबंधन ने प्राथमिकी दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया।

बताया जा रहा है कि कोयला चोरी का यह खेल लंबे समय से चल रहा था और इसमें खदान प्रबंधन, सुरक्षा कर्मियों तथा रोड सेल से जुड़े कुछ जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है नियमों के अनुसार बिना वैध दस्तावेज, वजन पर्ची और अधिकृत अनुमति के कोयले का परिवहन संभव नहीं है, ऐसे में सवाल उठता है कि यह सब एरिया सेल्स मैनेजर भटगांव अमित सिंह की जानकारी के बिना कैसे होता रहा।

सूत्रों का कहना है कि रोड सेल और कोयला डिस्पैच से जुड़े सभी अहम नियंत्रण एरिया सेल्स मैनेजर के अधीन होते हैं इसके बावजूद अमित सिंह को जांच के दायरे से बाहर रखा जाना संदेह को और गहरा करता है न तो पुलिस रिकॉर्ड में उनका नाम दर्ज है और न ही कंपनी प्रबंधन की ओर से उनके खिलाफ कोई ठोस कदम उठाया गया है।

स्थानीय लोगों और जानकारों का मानना है कि यदि निष्पक्ष जांच हो तो बड़े चेहरे बेनकाब हो सकते हैं केवल छोटे कर्मचारियों और ट्रक चालकों की गिरफ्तारी कर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की जा रही है, जबकि असली सूत्रधार अब भी सुरक्षित हैं।

अब सवाल यह है कि क्या एरिया सेल्स मैनेजर अमित सिंह को किसी का संरक्षण प्राप्त है? या फिर जांच को जानबूझकर एक सीमित दायरे में रखा जा रहा है?

जनता और जिम्मेदार नागरिकों ने मांग की है कि इस पूरे कोयला चोरी प्रकरण की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा एरिया सेल्स मैनेजर भटगांव अमित सिंह सहित सभी जिम्मेदार अधिकारियों पर तत्काल एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लग सके

अनुकरणीय पहल, 125 विद्यार्थियों को निःशुल्क बांटे स्वेटर व 45 विद्यार्थियों को वितरित किए जूते  

*मॉडल संस्कृति सीनियर सेकेंडरी स्कूल के स्टाफ ने अपनी कमाई से दिया उपहार*


झज्जर (हरियाणा)

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में जब अधिकतर लोग अपने लिए जीते हैं वही कुछ लोग दूसरों की खुशियों का जरिया बन जाते हैंI कहते हैं कि अपने कार्य से दूसरों के चेहरों पर मुस्कान लाना ही असली समाज सेवा, सच्ची खुशी व सर्वोतम परोपकार होता है को ध्यान में रखते हुए झज्जर जिला मुख्यालय के अंतिम छोर पर बसे वीरों की देवभूमि कहे जाने वाले गांव धारौली की सामाजिक संस्था मां-मातृभूमि सेवा समिति द्वारा   वस्त्र समर्पण सेवा कार्यक्रम में जिला झज्जर के लड़ायन गांव के पीएम श्री गवर्नमेंट मॉडल संस्कृति सीनियर सेकेंडरी स्कूल के 125 (80+45) विद्यार्थियों को निःशुल्क बांटे स्वेटर और 45 विद्यार्थियों को जूते वितरित किए गए जिसे पाकर विद्यार्थियों के चेहरे खुशी से खिल उठे।

उपरोक्त वस्त्र समर्पण सेवा कार्यक्रम में लड़ायन के पीएम श्री गवर्नमेंट मॉडल संस्कृति सीनियर सेकेंडरी स्कूल के स्टाफ ने अपनी नेक कमाई  से 45 जोड़ी जूते और 45 स्वेटर उपहार स्वरूप भेंट की गई जो अनुकरणनीय है। वस्त्र समर्पण सेवा कार्यक्रम में डॉ. जगविंद्र जाखड़ (सेवानिवृत) वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी,  हरियाणा सरकार ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। मुख्य अतिथि ने बच्चों को अच्छे संस्कार, अनुशासन और मेहनत व लगन से पढ़ाई करने के लिए प्रेरित किया। समाजसेवी एवं शिक्षाविद्  सुखबीर  जाखड़, चेयरमैन, रिलायंस  ग्रुप ऑफ स्कूल्स ने विशिष्ट अतिथि  के रूप में कार्यक्रम में शामिल हुए। अरविंद कुमार दहिया, प्रिंसिपल, पीएम श्री गवर्नमेंट मॉडल संस्कृति सीनियर सेकेंडरी स्कूल ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।


22वी बार रक्तदान कर चुके युद्धवीर सिंह लांबा, अध्यक्ष, मां-मातृभूमि सेवा समिति, वीरों की देवभूमि धारौली ने बताया कि समाजसेवी व शिक्षाविद् सुखबीर जाखड़, चेयरमैन, रिलायंस ग्रुप ऑफ स्कूल्स,  शिक्षा के साथ साथ सामाजिक सरोकार का दायित्व भी बखुबी से निभा रहे मास्टर हरबीर मल्हान गिरिधरपुर, जिला झज्जर, भाकली गांव के समाजसेवी सुधीर कुमार, प्रो. कोमल इलेक्ट्रिक स्टोर, भाकली, शिक्षा व समाजसेवा के लिए सदैव अग्रिम पंक्ति में खड़े रहने वाले सकारात्मक सोच के मास्टर सतीश यादव भाकली, समाजसेवी रणसिंह, यदुवंशी तेल टैंकर, भाकली गाँव, मास्टर इंद्रजीत सिंह, भूरावास गांव, जिला झज्जर, समाजसेवा और शिक्षा को समर्पित मास्टर पवन कुमार, गांव धनीरवास जिला झज्जर, कोसली रेलवे स्टेशन से नाहड रोड पर 'सोनू मोटर वाइंडिंग सेंटर' प्रो. सोनू कुमार धारौली निवासी, पर्यावरण को समर्पित समाजसेवी  मंजीत सिंह, प्रो.श्रीहंस बैग व स्टेशनरी हाउस, कोसली, रक्तदानी मास्टर रोहित यादव, प्रो.लेवी डिस्पोसल हाउस, कोसली, मास्टर कुलवेन्द्र सिंह यादव, गांव मुमताजपुर, जिला रेवाड़ी, समाजसेवी व रक्तदानी नितेश भौरिया  प्रो. अर्बन युवा रेडीमेड स्टोर, कोसली, मास्टर प्रमिंदर सिंह, तुम्बाहेड़ी गांव, जिला झज्जर के साथ साथ दो गुप्त दानियों ने अपनी ईमानदारी व मेहनत से कमाया नेक धन से वस्त्र समर्पण सेवा कार्यक्रम के आयोजन मे सहयोग देकर पुण्य कमाया।

अंत में स्कूल प्रिंसिपल ने कार्यक्रम में आए अतिथियों का आभार व्यक्त किया और बच्चों के लिए इस प्रकार के सहयोगात्मक कार्य के मां-मातृभूमि सेवा समिति, वीरों की देवभूमि धारौली की सराहना की।

साहित्यकार पी. यादव ‘ओज’ को 2025 का मिला प्रेरणा राष्ट्रभाषा गौरव सम्मान


दिल्ली

देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला प्रांगण में आयोजित हिंदी पखवाड़ा–2025 के अवसर पर साहित्यकार,शिक्षाविद एवं समाजसेव पी. यादव ‘ओज’ को उनके हिंदी भाषा,साहित्य और समाज कल्याण के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान हेतु  ' प्रेरणा राष्ट्रभाषा गौरव सम्मान–2025 '  से सम्मानित किया गया।यह प्रतिष्ठित सम्मान राष्ट्रीय प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा,भारत द्वारा प्रदान किया गया। कार्यक्रम का संचालन अत्यंत गरिमामय वातावरण में हुआ,जिसमें देशभर के प्रतिष्ठित साहित्यकार,विद्वान,शिक्षाविद और पत्रकार उपस्थित रहे।संस्था के संस्थापक संगम त्रिपाठी ने ‘ओज’  के हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार और साहित्यिक विकास में दिए गए उल्लेखनीय योगदान की सराहना करते हुए विशेष बधाइयां एवं शुभकामनाएं भी दी।इस गौरवमयी सम्मान को प्राप्त कर ओज ने राष्ट्रीय प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा का हृदय से आभार व्यक्त किया।साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यह सम्मान मेरी नहीं,हिंदी की अस्मिता का सम्मान है। हिंदी हमारी आत्मा की भाषा है,और जब तक यह जीवंत रहेगी,भारत की सांस्कृतिक पहचान अडिग रहेगी। गौरतलब है कि ओज के साहित्यिक संग्रह-‘प्रेरणा-दीप’, ‘अंतर्नाद’,‘नयंश’,‘नव परिमल’ ने हिंदी साहित्य को नई दिशा प्रदान की है।वहीं उनका गद्य-संग्रह ‘इंद्रधनुष’ मानवीय मूल्यों,सामाजिक परिवर्तन और राष्ट्रचेतना का सशक्त दस्तावेज़ माना जाता है।

एक कदम गांधी के साथ, वाराणसी राजघाट से दिल्ली राजघाट तक पदयात्रा

*शामिल होंगे प्रबुद्ध गांधीजन, बुद्धिजीवी, प्रतिनिधि व समाजकर्मी*


अनूपपुर

सर्व सेवा संघ, समस्त गांधीजन और लोकतांत्रिक संगठनो के सहभाग से एक कदम गांधी के साथ - पदयात्रा  गांधी जयंती, 2 अक्टूबर से संविधान दिवस, 26 नवंबर 2025 तक होगी। यात्रा की शुरुआत राजघाट वाराणसी से होगी और 26 नवंबर को सुबह 7:00 बजे राजघाट दिल्ली में सर्वधर्म- प्रार्थना के बाद संविधान मार्च के रूप में जंतर- मंतर तक जाएगी जहां एक सभा के साथ कार्यक्रम संपन्न होगा।

*पदयात्रा का मार्ग*

बनारस राजघाट से शुरू होकर गोपीगंज, प्रयागराज, कुंडा (प्रतापगढ़) रायबरेली, लखनऊ, उन्नाव, कानपुर, अकबरपुर (कानपुर देहात), औरैया, इटावा, फिरोजाबाद, आगरा, मथुरा-वृन्दावन, होडल, पलवल, बल्लभगढ़, फरीदाबाद, बदरपुर बार्डर, निजामुद्दीन, राजघाट, दिल्ली होते हुए जंतर-मंतर पहुंचेगी। 1 हजार किलोमीटर की इस यात्रा में कुल 110 पड़ाव होंगे।

*पुरी यात्रा में शामिल रहेंगे*

सर्व सेवा संघ के अध्यक्ष चंदन पाल, मंत्री अरविंद कुशवाहा एवं अरविंद अंजुम, आंदोलन समिति के संयोजक डॉ विश्वजीत, युवा प्रकोष्ठ के संयोजक भूपेश भूषण, विनोबा आश्रम गागोदा की सरिता बहन के अलावा उत्तर प्रदेश सर्वोदय मंडल अध्यक्ष राम धीरज भाई पूरी यात्रा में रहेंगे।

*शामिल होंगे प्रबुद्ध गांधीजन, बुद्धिजीवी, प्रतिनिधि व समाजकर्मी*

इस यात्रा में जगह-जगह देश के विभिन्न इलाके के प्रबुद्ध गांधीजन, लोकतांत्रिक चेतना से प्रेरित एवं सक्रिय नागरिक, जन आंदोलनों के प्रतिनिधि बुद्धिजीवी, साहित्यकार,नाटककार, पत्रकार, जन आंदोलनो के प्रतिनिधि एवं समाजकर्मी शामिल होंगे। गांधी शांति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष कुमार प्रशांत, राष्ट्रीय गांधी स्मारक निधि के अध्यक्ष रामचंद्र राही, सेवाग्राम आश्रम की अध्यक्ष आशा बोथरा, लोकतांत्रिक राष्ट्र निर्माण अभियान के संयोजक आनंद कुमार समाजवादी जन परिषद के महासचिव अफलातून, जन आंदोलन के राष्ट्रीय समन्वय के प्रफुल्ल सामंतरा, सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता प्रशांत भूषण, भारत जोड़ो अभियान के योगेंद्र यादव, नर्मदा बचाओ आंदोलन की मेधा पाटकर, संयुक्त किसान संघर्ष समन्वय समिति के सुनीलम,सोशलिस्ट पार्टी के संदीप पांडे, जनमुक्ति संघर्ष वाहिनी के जयंत दीवान यात्रा के उद्देश्यों के प्रति एकजुटता प्रदर्शित करने के लिए शामिल होंगे।

*पदयात्रा का उद्देश्य*

सूफी और संतों की उदारवादी परंपरा तथा स्वतंत्रता आंदोलन के आदर्शों की विरासत, सामाजिक सद्भावना, संविधान एवं लोकतंत्र के लिए जागरूक करना और किसानो, मजदूरों, नौजवानों, महिलाओं, दलितों, आदिवसियों एवं समाज के सभी कमजोर वर्गों के संवैधानिक अधिकारों व मानवीय गरिमा को सुनिश्चित करने तथा भयमुक्त वातावरण निर्माण के लिए लोगों से संवाद करना है। यह यात्रा शोषण एवं शासन विहीन शांतिमय-अहिंसक वैश्विक समाज के लिए संकलबद्ध है। ये आदर्श मानवता के आदर्श हैं और उन्हें हासिल करने में एक लंबा समय लगेगा। इसका यह अर्थ नहीं है कि आज की चुनौतियां को नजरअंदाज कर दिया जाए।

बेरोजगारी, खेती-किसानी, गरीबी, शिक्षा  और स्वास्थ्य के व्यापरीकरण,पर्यावरण के मुद्दों पर हस्तक्षेप करना एवं किसानो, मजदूरों व व्यापारियों की समस्याओं को दूर करने की चेतना जागृत करने कोशिश इस यात्रा का महत्वपूर्ण दायित्व है। जिन अधिकारों (वोट देने का अधिकार) को प्राप्त किया है और जो संविधान प्रदत्त है, उसे न केवल मजबूती से कायम रखना है बल्कि  व्यापक जन अधिकारों को भी स्थापित करना है। पदयात्रा के दौरान हम इन विषयों पर भी  लोगों से बातचीत करेंगे।

यात्रा को सफल बनाने में  सक्रिय समूह के प्रतिनिधियों एवं आयोजकों ने सभी सचेत नागरिकों और लोकतांत्रिक संगठनों से  पड़ावों की व्यवस्था में  सहयोग एवं सहभाग का आह्वान किया है। आयोजकों ने साथ ही पदयात्रियों के स्वागत करने और इसके उद्देश्यों को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने में भागीदारी निभाने की भी अपेक्षा की है। मध्य प्रदेश के अनूपपुर शहडोल रीवा सतना भोपाल के साथियों का भी प्रतिनिधित्व हो रहा है सर्व सेवा संघ युवा प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय संयोजक भूपेश भूषण, विवेक यादव, आसमा आदिवासी, सहित सर्वोदय मंडल एवं राष्ट्रीय युवा संगठन के साथी प्रदेश भर से सम्मिलित हो रहे हैं।        

दिल्ली प्रेरणा हिंदी सम्मेलन में ' विश्व पटल पर हिन्दी ' पुस्तक का होगा विमोचन


        जबलपुर -  प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा का राष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन 13 सितंबर 2025 को 18 पूसा रोड करोलबाग नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा। हिंदी सम्मेलन में देश भर से कवि कवयित्री पत्रकार साहित्यकार भाग लेने आ रहे हैं।

इस अवसर पर ' विश्व पटल पर हिन्दी ' पुस्तक का विमोचन किया जाएगा। विश्व पटल पर हिन्दी किताब के संपादक द्वय, डॉ ओम ऋषि भारद्वाज एटा उत्तर प्रदेश व डॉ निधि बोथरा जैन इस्लामपुर पश्चिम बंगाल हैं। यह बहुत ही गौरव का विषय है कि हिंदी दिवस के अवसर पर हिंदी सम्मेलन में विश्व पटल पर हिन्दी पुस्तक का विमोचन किया जाएगा।

          प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा का हिंदी सम्मेलन डॉ धर्म प्रकाश वाजपेई सिविल सेवा गुरु के मार्गदर्शन में संपन्न होगा। प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा के संस्थापक कवि संगम त्रिपाठी ने जारी विज्ञप्ति में बताया कि प्रदीप मिश्र "अजनबी " महासचिव दिल्ली के कुशल निर्देशन में यह बहुआयामी आयोजन किया जा रहा है।

सभी हिन्दी सेवियों से, प्रेरणा हिन्दी प्रचारिणी सभा के ' हिन्दी को राष्ट्रभाषा ' घोषित कराने के संकल्प से, जुड़ने का आवाह्न है।

विश्व क्रांति के प्रेरक फिदेल कास्त्रो जन्म शताब्दी का शुभारंभ, वाम दलों ने याद किया कामरेड कास्त्रों के योगदान को

*कम्युनिस्ट दिल से राजनीति करते हैं, दुनिया में क्यूबा भरोसे और विश्वास का प्रतीक बनकर उभरा*


( नई दिल्ली से लौटकर हरनाम सिंह )


            क्यूबा के दिवंगत राष्ट्रपति, क्रांति के महानायक, साम्राज्यवाद को चुनौती देने वाले फिदेल कास्त्रो की जन्म शताब्दी समारोह में देश के वाम दलों सहित अनेक विद्वजनों ने उन्हें याद किया। वक्ताओं ने उत्पीड़ित मानवता के पक्ष में फिदेल के योगदान को स्मरण करते हुए अपने कई संस्मरण सुनाए। आयोजन में क्यूबा की जनता के साथ एक जुटता व्यक्त करने के लिए बनी कमेटी द्वारा फिदेल कास्त्रों शताब्दी फुटबॉल कप प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया।

                शताब्दी समारोह अंतर्गत भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मुख्यालय अजय भवन में पार्टी महासचिव डी राजा और अनेक सदस्यों ने फिदेल के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित की। परिसर में क्यूबा क्रांति के चित्रों की प्रदर्शनी भी लगाई गई थी। तत्पश्चात हरकिशन सिंह सुरजीत भवन स्थित सभागृह में शताब्दी समारोह का विधिवत उद्घाटन हुआ।

              प्रथम वक्ता क्यूबा के राजदूत एलजान्द्रों सिमकांस मारिन ने अपने संबोधन में कहा की क्रांति के पूर्व क्यूबा पूरी तरह से अमेरिका पर निर्भर था। गोरिल्ला युद्ध के बाद स्वतंत्र क्यूबा न केवल आत्मनिर्भर है, अपितु दुनिया में अपना योगदान भी दे रहा है। क्यूबा विश्व के क्रांतिकारी आंदोलनों का समर्थन करता रहेगा। क्यूबा को नष्ट करने के तमाम प्रयासों के बावजूद वह आज भी जिंदा है।

               राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज कुमार झा ने कहा कि कम्युनिस्ट दिल से राजनीति करते हैं, क्योंकि दिल बांई ओर होता है। दुनिया में क्यूबा भरोसे और विश्वास का प्रतीक बनकर उभरा है। भारत सरकार को क्यूबा के शिक्षा और स्वास्थ्य मॉडल को अपनाना चाहिए। श्री झा ने गाजा में इजरायली दरिंदगी की निंदा करते हुए कहा कि भारत की राजनीति में इजरायल बेजा दखल दे रहा है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने फिलिस्तीन के बच्चों के मारे जाने पर ट्वीट किया तो इजराइली राजदूत ने एतराज जताया।

             सी पी आई के महासचिव डी  राजा ने फिदेल कास्त्रो के साथ हुई अपनी अनेक मुलाकातों को याद किया। उन्होंने बताया कि हरकिशन सिंह सुरजीत, प्रकाश करात के साथ फिदेल कास्त्रो से अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा करने का अवसर मिला था। डी राजा ने कहा कि फिदेल के निधन पर देश के कई राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि हवाना गए थे। उनमें भाजपा के राजनाथ सिंह भी थे। वहां हमने देखा की जनता अपने महानायक से कितना प्यार करती है। भारत की विदेश नीति अब अमेरिकी परस्त होती जा रही है। संयुक्त राष्ट्र संघ में क्यूबा हो अथवा फिलिस्तीन भारत अमेरिका के साथ ही दिखता है। अमेरिका क्यूबा में प्रतिक्रांतिकारी तत्वों की मदद कर उसे अस्थिर बनाने का षड्यंत्र करता है। क्यूबा में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं निशुल्क है। वह समाजवाद का आदर्श प्रतीक है। क्यूबा अकेला नहीं है भारत की जनता उसके साथ है।

                 समाजवादी पार्टी के जावेद अली ने बताया कि उन्हें भी अनेक बार क्यूबा जाने का अवसर मिला है। वहां की जनता का फिदेल के प्रति प्यार दिखता है। फिलिस्तीन और पर भारत सरकार के रुख को देखते हुए क्यूबा के प्रति भी सरकार की नीतियां आश्वस्त नहीं करती। अमेरिका की टेरिफ नीति को लेकर सारा देश परेशान है। पर भारत सरकार मौन है ऐसे में फिदेल याद आते हैं, जिन्होंने सिखाया है कि अमेरिका के बिना भी जीवित रहा जा सकता है और साम्राज्यवाद से लड़ा भी जा सकता है। पीड़ित मानवता के लिए कास्त्रों एक रोशनी है।

               फारवर्ड ब्लाक के जीएस देवराजन ने 1997 में एक विद्यार्थी प्रतिनिधि मंडल के साथ क्यूबा यात्रा का जिक्र करते हुए कहा था कि संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा में फिदेल का लंबा भाषण गिनीज रिकॉर्ड बुक में दर्ज है। उनका भाषण वामपंथियों के दिलों में रहना चाहिए। कास्त्रों ने कहा था कि समाजवाद का आयात नहीं किया जा सकता। वे दूरदर्शी नेता थे उन्होंने सोवियत संघ में पेरोस्त्राइका का विरोध किया था। वे पहले व्यक्ति थे जिन्होंने  इराक के सद्दाम हुसैन को कुवैत पर हमला न करने के लिए सचेत किया था। वे जानते थे कि इससे अमेरिका को उस क्षेत्र में दखल देने का अवसर मिलेगा। कास्त्रों ने चे ग्वेरा को भी बोलीविया में  जाने से मना किया था। क्यूबा में धर्म कोई समस्या नहीं है। 10 अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने 638 बार फिदेल कास्त्रो  की हत्या का षड़यंत्र किया था। क्यूबा ने बता दिया है कि एक छोटा देश भी अपनी समाजवादी नीतियों से अमेरिका का मुकाबला कर सकता है।

             सीपीआई एमएल लिबरेशन के प्रोफेसर गोपाल प्रधान ने अपने संबोधन में कहा कि उन्होंने क्यूबा क्रांति की कहानियां सुनकर ही ऊर्जा प्राप्त की है। दिल्ली से भी कम आबादी वाला देश दुनिया के सबसे ताकतवर देश का मुकाबला कर रहा है। अमेरिका आज पूरी दुनिया को धमका रहा है। ऐसे में अपने आदर्श नायक को याद करना जरूरी है। फिदेल ने अपने देश की परिस्थितियों के अंतर्विरोधों से ही लोकतांत्रिक समाजवादी ढांचा तैयार करना सिखाया है। विपरीत परिस्थितियों में भी वाम आंदोलन में जान फूंकी जा सकती है।

                कार्यक्रम के अंतिम वक्ता सीपीएम के महासचिव एम ए बेबी ने कहा कि हम क्यूबा की जनता के साथ एक जुटता व्यक्त करते हैं, जो मानवता स्वाधीनता, स्वाभिमान, सामानता सिखाता है। अमेरिका दुनिया का सुपर पावर है पर वह भी क्यूबा जैसे छोटे देश को नहीं मिटा पाया। इसके पूर्व होचीमिन्ह के नेतृत्व में वियतनाम भी अमेरिका को पराजित कर चुका है। फुटबॉल कास्त्रों का प्रिय खेल था। उन्हीं की स्मृति में आयोजन समिति ने फुटबॉल प्रतियोगिता आयोजित की थी।

              कार्यक्रम में अल्जीरिया, वेनेजुएला, चीन, होंडूरास, कंबोडिया तिमोर, रिपब्लिक ऑफ़ डोमिनिक  ब्राज़ील आदि देशों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। आयोजन की जानकारी सोनिया गुप्ता ने दी तथा संचालन अरुण कुमार ने किया। समारोह के अंत में फुटबॉल प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया।

तथाकथित आधुनिक भारत में जातिवाद का सच्चा स्वरूप, हिंदू व हिंदुस्तान के अस्तित्व पर घोर संकट 

 *जातिवाद भारतीय राजनीति का मुख्य आधार जिस पर नेता व पार्टी रोटी सेंकती है*


(एक यथार्थ समाजशास्त्रीय अध्ययन) 

~~~~~~~~~~~~~~

सैकड़ों वर्षों से सनातनी,जातिवाद का दंश झेलते आ रहें हैं। आजादी के बाद भी,गांधी और नेहरू की कांग्रेस ने सत्ता पर काबिज रहने और हिंदुओं में द्वेष फैलाने और उनके विनाश हेतु संविधान में जातिगत आरक्षण की कील ठोक दी है। उद्देश्य बताया गया कि आरक्षण से पिछड़े, दलितों, वंचितों को अवसर मिलेगा और वे आर्थिक रूप से विकास के मुख्य धारा में आ जायेंगे। लेकिन आज 10 बर्षो के लिए निर्धारित संवैधानिक आरक्षण, चिरंजीवी हीं नहीं हो गया बल्कि आजादी के 78 साल बाद इसका दायरा और भी बढ़ता जा रहा है। स्पष्ट है आरक्षण का उद्देश्य वंचितों को उपर उठाने का नहीं था। यदि संविधान में आर्थिक आधार पर आरक्षण दिया गया होता तो आज भारत विश्व में सबसे विकसित राष्ट्र होता लेकिन उद्देश्य तो हिंदुओं को बांटकर *"गजवा-ए-हिंद"* करना था।सच पुछिये तो जातिवाद भारतीय राजनीति का मुख्य आधार बन चूका है जिसपर जातिवादी पार्टियां और नेता अपनी रोटी सेंक सेंक कर सत्ता का सुख भोगते हैं। अबतक का इतिहास कहता है कि जातिवादी राजनीति का लाभ सिर्फ और सिर्फ तथाकथित नेता और उसका परिवार हीं उठाता रहा है लेकिन इसका दुष्परिणाम सभी हिन्दू और हिंदुस्तान झेल रहा है।


मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद विपक्षियों के पास सत्ता तक पुनः पहुंच बनाने के टूल्स के रूप में एक मात्र,जातिवादी राजनीति हीं नजर आ रहा है तभी तो हिंदुओं में बहुसंख्यक तबका-- पिछड़े और दलीत को साधने की राजनीति हेतु जातिय जनगणना को मुद्दा बनाया गया  लेकिन मोदी सरकार ने आने वाले जनगणना में जातिगत जनगणना कराने की बात कहकर उन्हें मुद्दा विहीन कर दिया। 

लेकिन यूपी और बिहार में एमवाई अर्थात मुस्लिम और यादव की राजनीति करने वाले सपा के अखिलेश यादव और लालू लाल- तेजस्वी यादव को यूपी के इटावा में घटित यादव जाति के कथावाचकों की जातिय धूर्तता और अभद्र व्यवहार पर ब्राह्मणों द्वारा की गई प्रतिक्रिया, एक अवसर के रूप में दिखने लगा है। ये जातिवादी नेताओं को ये नहीं दिख रहा कि कथावाचन जैसे पवित्र पथपर आसीन व्यक्ति ने महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार क्यों किया! यदि इनकी मंशा ठीक होती तो नकली आधार कार्ड बनाकर अपनी जाति ब्राह्मण क्यों दर्शाया!! अर्थात ये कथावाचक नहीं धूर्त हैं।


जब यह माना जाता है कि सनातन में कथावाचन करने हेतु जातिय बंधन नहीं है तो जाति छुपाने की क्या आवश्यकता थी!!

ब्राम्हणों द्वारा बनाये गये सन्मार्ग पर चलकर अन्य जातियों के भी साध्वी,संत की श्रेणी में आ गये हैं जिनका विरोध ब्राह्मणों ने किया हो, ऐसा तो नहीं सुना जैसे ---

राम रहीम(जाट), रामपाल(जाट), आसाराम(धोबी, सिन्धी), स्वामी नित्यानंद(दलील), स्वामी चिन्मयानंद (दलील),राधे मां(खत्री,सिंधी), साध्वी ऋतम्भरा(लोधी), साध्वी उमा भारती (लोधी), ब्रह्मकुमारी लेखराज बचानी(सिंधी बनिया),संत गणेश्वर (दलील,पाशी), साध्वी प्रभा(यादव), साक्षी महाराज (कुर्मी, पटेल), साध्वी प्रज्ञा (मल्लाह, दलील), साध्वी चिदर्पिता (मोर्य), स्वामी रामदेव (यादव), आदि, आदि।

लेकिन यूपी में हीं इस तरह का वाकया क्या यह सिद्ध नहीं करता कि इसके पीछे हिंदुओं में जातिगत जहर बोने का सुनियोजित षड्यंत्र है!! वैसे भी बिहार में चुनाव सर पर है तो एमवाई समीकरण साधना राजद की मजबूरी है और यूपी में जातिवादी राजनीति के लिए "बांटोगे तो कटोगे" की काट खोजना सपा की मजबुरी है।

खैर आइये *जातिवाद* का समाजशास्त्रीय सच आपके समक्ष रखता हूॅं -------------

हिंदूओं में जातिवाद से सामान्यत: तात्पर्य  "जाति व्यवस्था" में कालांतर एवं परिस्थिति वश उपजे- नियमों, कायदे, कानुनों के नाकारात्मक पक्षों को विशेष अर्थों में संक्षिप्तिकरण से है जिसका उपयोग निहित स्वार्थ के मद्देनजर किया जाता है |यहाँ स्पष्ट कर दूं कि सिक्के के दो पहलू की तरह  हर व्यवस्था के साकारात्मक एवं नाकारात्मक पक्ष होते हैं लेकिन जातिवाद में जातिव्यवस्था के साकारात्मक पक्ष से कोई लेना देना नहीं होता |

वैदिक काल से हीं हिंदू समाज, खुली व्यवस्था के तहत्, चार वर्णों में विभाजित था क्रमशः- ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र |जिससे समाज अपनी चार मूलभूत आवश्यकताओं क्रमशः- ज्ञान, रक्षा, आजीविका एवं श्रम की आपूर्ति करता था |सामाजिक प्रतिस्पर्धा से उत्पन्न, विसंगतियों के चलते ताकि मूलभूत आवश्यकताओं की आपूर्ति में बाधा न हो इसे जन्मना बनाया गया |फिर यही वर्ण समूहों ने भोगोलिक विस्तार, विभिन्न व्यवसायिक क्षेत्र विस्तार, रक्तशुध्दि की अवधारणा, प्रजातिय भेद आदि को समाहित करते हुए विभिन्न जातियों का स्वरूप लेता गया |

लेकिन इन विभिन्न जातियों के बीच मानवीय एवं सामाजिक सहयोगात्मक संबंध परस्पर निर्भरता एवं सामाजिक समरसता को परिलक्षित करता था |पुनः उत्तर वैदिक काल एवं मध्य काल के आरम्भ से ही विदेशी आक्रमणकारियों का आना शुरू हो गया |चूकि समाज की सुरक्षा का भार एक छोटे समूह,सिर्फ क्षत्रियों पर हीं अवलंबित होने के कारण और अन्य वर्ण की उदासीनता के चलते , आक्रमणकारियों को हिंदूस्तान में सत्ता स्थापित करने में आसानी हुई और बहुसंख्यक हिन्दूओं पर शासन करने का अवसर मिला जिसे स्थायित्व देने हेतु विदेशी आक्रमणकारियों ने बहुसंख्यक हिंदूओं में परस्पर फूट और घृणा के संचार हेतु जातिगत घृणा, व्यवसायिक भेदभाव, छूआछूत, सामाजिक दूराव आदि जैसे हिन्दू संगठनात्मक पहलूओं को कमजोर करने के अनेकों साजिश का सहारा लिया और कामयाब भी हुए जिसमें प्रमुख था - असली मनुस्मृति में परस्पर विभिन्न वर्णों के बीच भेद और घृणा उत्पन्न करने वाले श्लोकों की रचना कर ठूसना| असली मनुस्मृति में मात्र 630 श्लोक हीं थे जिसमें मुगलों और बाद में अंग्रेजों ने कृत्रिम घृणात्मक श्लोक भरे जबकि मनुस्मृति में चारों वर्णों को समान महत्व दिया गया था ||आज मनुस्मृति में हजारों श्लोक मिलेंगे| ये कहाँ से आये ❓ये जबरदस्त शाजिस थी जिसका लाभ मुगलों और अंग्रेजों की तरह,आज के जातिवादी राजनितिज्ञ भी उठा रहे हैं |

 आरम्भ में शक आये, हुण आये लेकिन भारतीय संस्कृति ने उनका अलग अस्तित्व नहीं रहने दिया, उन्हें अपने में आत्मसात कर लिया लेकिन अरबों , मुगलों और फिर अंग्रेजों को आत्मसात नहीं कर पाये |इन लोगों ने हीं  भारत में स्थायी शासन एवं सत्ता के क्रम में हिंदूओं के जातिव्यवस्था में परस्पर घृणा, छूआछूत जैसे अमानवीय व्यवहार को षणयंत्र के तहत्, सत्ता से चिपके हिंदूओं को माध्यम बना उल्लू सीधा किये |

जिस तरह अरबों,मुगलों और अंग्रेजों ने "जातिवाद"को हिंदूओं के सामाजिक संगठन को क्षतविक्षत करने हेतु,अपने स्वार्थ में उपयोग किया वही काम आजादी के 78 साल बाद भी राजनीतिक दलों एवं राजनीतिक नेताओं द्वारा किया जा रहा है😡😡 |आजादी के बाद इतने बरसों में जातिव्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन आ चूका है लेकिन जनता को मूर्ख बनाने का सिलसिला आज भी कायम है | आजाद भारत में,जातिव्यवस्था का सहारा लेकर सत्ता सुख भोगने और वोट की राजनीति करने में जातिवाद एक सबसे शसक्त जरिया बन चुका है |

 आइये देखते हैं जातिवाद कहाँ है !!! --

स्कूलों में है❓--नहीं

ट्यूशन में है❓-- नहीं

राशन की दूकान में है- नहीं

बैंक में है❓-- नहीं

होटलों में है❓-- नहीं

थियेटरों में है❓--नहीं

पान की दूकान पर है❓-- नहीं

बस, ट्रेन, हवाईजहाज में है❓-- नहीं

सब्जी मंडी में है❓-- नहीं

विभिन्न राजनीति दलों में है❓-- नहीं

शमशान में है❓-- नहीं

बाजार में है❓-- नहीं

किसी व्यवसाय में है❓-- नहीं

विभिन्न उत्सवों के आयोजन के अवसर पर पार्टी होती है उसमें ❓-- नहीं

चाय की दुकान पर है❓-- नहीं

शहरों, देहातों में छूआछूत आदि दिखता है❓-- नहीं

जब उपरोक्त कहीं जातिवाद दिखता नहीं है तो फिर !!!!!! 

ये कहाँ दिखता है❓--

जी, ये दिखता है ➡️

ये दिखता है संबिधान में, 

ये दिखता है सरकारी नौकरियों में, 

ये दिखता है सरकारी लाभकारी योजनाओं में, 

ये दिखता है शिक्षा के क्षेत्र में, 

ये दिखता है सबर्णों को प्रताड़ित करने में (st/sc act), 

ये दिखता है राजनीतिक दलों एवं नेताओं के मुख में, 

ये दिखता है मिडिया के विभिन्न चैनलों में-- एक दलित या आरक्षित वर्ग की महिला या युवती के साथ बलात्कार हो जाय तो सारे मिडिया वाले और नेताओं का तांता लग जाता है और वहीं सैकड़ों सबर्ण महिला या युवती के साथ हो तो नेता और मिडिया गुंगे हो जाते हैं |

अब जातिवाद के नाम पर इस देश में कितना अमानवीय व्यवहार स्वीकृत है इसको ऐसे समझें--

हरिजन अपने को हरिजन कहे तो सरकारी नौकरी से लेकर सैकड़ों सरकारी सुविधाएं और यदि आप हरिजन को हरिजन कहें तो आपको संभवतः 10 साल के पहले हाईकोर्ट से बेल भी न मिले |

मैं तो राहत की सांस ले रहा हूॅं इस बात को लेकर कि जब इंदिरा गांधी ने 1984 में सोवियत इंटरकाॅसमाॅस कार्यक्रम के तहत सोयुज टी-11 पर यात्रा करने वाले प्रथम भारतीय राकेश शर्मा को चुना,जो एक ब्राह्मण थे तब इस अवसर पर आरक्षण की बात नहीं की गई !! आश्चर्य है, मोदी ने जब एक ब्राह्मण, हिमांशु शुक्ला को अंतरीक्ष सेंटर पर जाने वाले प्रथम भारतीय के रूप में चुना तो ये जातिवादी नेता चुप क्यों थे!! यहां आरक्षण की बात क्यों नहीं किये!!

*आज के भारत का ये है सच्चा जातिवाद*

परिणाम- देश में भ्रष्टाचार से लेकर हर प्रकार की प्रगति में बाधा हीं बाधा|

तो *ये है इस तथाकथित आधुनिक भारत में जातिवाद का सच्चा स्वरूप* जिससे न राष्ट्र का भला संभव है और न जनता का | हाँ अगर इससे किसी के अस्तित्व पर घोर संकट दिख रहा है तो वो है-- *हिंदू और हिंदूस्तान*

----- प्रोफेसर राजेन्द्र पाठक (समाजशास्त्री), बक्सर, बिहार

 *बैठकी*

~~~~~~

रेल जिहाद की तरह,ये हवाई जिहाद तो नहीं- प्रोफेसर राजेंद्र पाठक



बैठकी जमते हीं मास्टर साहब बोल पड़े --"सरजी, हमारे देश में आप्रेशन सिंदूर के बाद लगातार हो रहे विमान, हेलिकॉप्टर हादसे, देश में शांतिदूतों द्वारा चलायें जा रहे रेल जिहाद की तरह हवाई जिहाद तो नहीं चलाया जा रहा!!--मास्टर साहब बैठते हीं मुद्दा रख दिये।

मास्टर साहब! इ त बड़ा गंभीर बात उठवनीं!!--मुखियाजी सोफे पर बैठते हुए।

मुखियाजी,अहमदाबाद प्लेन क्रेश को लेकर मेरे मन में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। एयर इंडिया का ड्रीमलाइनर विमान बोइंग 787, टेकऑफ़ के बाद एक मिनट के अंदर जोरदार धमाके के साथ जमीन पर आ गिरा। ये विमान दुनिया का सबसे सुरक्षित विमान माना जाता रहा है फिर भी इस तरह का हादसा दुनिया ने पहली बार देखा है। इसका दोनों इंजन का एक साथ फेल होना शक पैदा करता है।तब जबकि प्लेन में एक लाख छब्बीस हजार लीटर तेल भरा हो,सुमित सभरवाल जैसा अनुभवी पायलट हो, विमान भी मात्र 11 साल पुराना हो जो कमर्शियल एवियेशन में नया माना जाता है। इतना सब होने के बावजूद, दोनों इंजन का फेल होना वो भी मात्र एक मिनट के भीतर!! पंच नहीं रहा है सरजी!"--मास्टर साहब मायुस दिखे। 

मास्टर साहब,जैसी की सूचना है पायलट ने विमान हादसा के चंद सेकेंड पहले विमान को थ्रस्ट नहीं मिलने की सूचना दी थी अर्थात इंजन द्वारा विमान को हवा में आगे बढ़ाने का बल नहीं मिल रहा। इसके बाद "मेडे" का अंतिम मैसेज दिया और विमान हादसे का शिकार हो गया।--डा. पिंटू दुखी थे।

डा. साहब, एक पक्षी के टकराने से इंजन बंद नहीं हो सकता दुसरी बात की एक साथ दोनों इंजन बंद नहीं हो सकते। विमान उड़ान के 625 फीट के बाद हीं नीचे गिरना क्यों शुरू हुआ!! फ्यूल टैंक के मेन स्विच से इंजन तक के सप्लाई पाइप में जितना फ्यूल समा सकता है वो अधिकतम 40 सेकेंड तक इंजन को चालू रख सकता है जिससे लगभग 625 फीट की उड़ान संभव है जैसा कि मुझे मिडिया से जानकारी मिली है। जांच के दौरान फ्यूल टैंक और मेन स्विच आदि की भी जांच होती है अतः बाहरी आतंकी मकसद की बात नहीं हो सकती। फ्यूल सप्लाई लाइन ग्राउंड स्टाफ का दायित्व होता है। तो कहीं ऐसा तो नहीं कि जांच के दौरान हीं फ्यूल सप्लाई लाइन का मेन स्विच बंद कर दिया गया हो!!--उमाकाका हाथ चमकाये।

ए भाई,जब मेन सप्लाई लाइन बंद रही त इंजनवा,पइपवा में बांचल तेलवे तक नु चली,फेर इंजन बंद होइये जायी!--मुखियाजी समझते हुए।

इसबीच बेटी चाय का ट्रे रख गई और हमसभी एक एक कप उठाकर पुनः वार्ता में.......

मुखियाजी एआई171 का 625 फीट की उंचाई पर क्रैश होना शक तो पैदा करता हीं है। जांच एजेंसियों को फोरेंसिक पड़ताल करनी चाहिए कि ग्राउंड इंजिनियरों में से किसने आखिरी बार उस मेन वाल्व क्षेत्र को छुआ था!! टुल बाक्स का निरीक्षण  किसी अनआथोराइज व्यक्ति ने तो नहीं किया!! फ्लाइट डाटा रिकार्डर से देखा जाय कि क्या टेकऑफ़ से पहले  फ्यूल लाइन प्रेशर "जीरो" था!! क्या पायलट को कोई फ्यूल प्रेशर एलर्ट मिला था!!

जांच एजेंसियों को ब्लैक बाक्स मिल गया है। देखिये क्या क्या जानकारियां मिलती हैं!!--सुरेंद्र भाई मुरझाये से।

सरकार तो इस हादसा के लिए कुल आठ एजेंसियों को लगा दी है लेकिन अमरीका सहित अन्य देशों की जांच एजेंसियां भी लगीं हैं। देखिये क्या निष्कर्ष निकलता है!! सरकार ने तो अपने एजेंसियों को तीन महीनों के भीतर रिपोर्ट देने को कहा है।--उमाकाका शांत लगे। 

काकाजी,इस विमान हादसे को पाकिस्तान के साथ हुए आप्रेशन सिंदूर के समय तुर्की की भूमिका के आलोक में भी देखना महत्वपूर्ण है। भारत सरकार ने तुर्की का पाकिस्तान प्रेम के मद्देनजर राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ग्राउंड हैंडलिंग सर्विस प्रोवाइडर तुर्की की कंपनी सेलेबी एवियशन का सेक्योरिटी क्लियरेंस रद्द कर दिया। ये कंपनी देश के प्रमुख और अतिसंवेदनशील 9 एयरपोर्ट पर ग्राउंड हैंडलिंग सर्विस, कार्गो सेवा और एयरसाइड आप्रेशन जैसे हाइ सेक्योरिटीज वाले कार्य करती रही है। सरकार के इस कदम के खिलाफ  ये कंपनी विभिन्न हाइकोर्टो में चली गई वहां उसे सरकार के विरुद्ध राहत भी मिली है। इस कंपनी के हजारों कर्मचारी हैं जिसमें अधिकांश शांतिदूतों के समुदाय से हैं जिनपर राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर विश्वास करना, आत्महत्या से कम नहीं। मुझे तो अहमदाबाद विमान हादसे में इस कंपनी और इसके कर्मचारियों का हाथ होने की पुरी आशंका नजर आती है।--डा.पिंटु चिंतित लगे।

हां डा.साहब,जब भारत पाकिस्तान के बीच आप्रेशन सिंदूर के दौरान तनाव चल रहा था तो यह मांग उठी थी कि तुर्की की कंपनी सेलेबी जो एयर इंडिया की मेंटेनेंस का काम देखती थी उसे फौरन हटाया जाय।उस वक्त तुर्की के सामानों के बहिष्कार करने का मुद्दा भी गर्म था। सोसल मीडिया के माध्यम से मुझे जानकारी मिली कि कंपनी मुंबई हाईकोर्ट गयी जहां जज ने शायद क्लीन चिट दे दी या स्टे लगा दिया।

लेकिन यहां मुझे एक बात समझ में नहीं आयी की जब मामला राष्ट्रीय सुरक्षा का हो वहां सरकार के निर्णय के विरुद्ध न्यायालय को याचिका स्वीकार करने का क्या औचित्य बनता है!! राष्ट्रीय सुरक्षा सरकार देखेगी या न्यायपालिका!! न्यायालय को तो तुरंत इसे खारिज कर देना चाहिए था। अगर जांचोपरांत इस कंपनी और इसके शांतिदूत कर्मचारियों का हाथ हुआ तो क्या वो जज 275 जिंदगियां और अरबों रुपयों के नुकसान की भरपाई करेगा!!--कुंवरजी अखबार पलटते हुए।

कुंवर जी, भारतीय न्याय-व्यवस्था पर तो अब विश्वास हीं उठ गया है। कौन ऐसा कोर्ट है जहां घुसखोरी नहीं चलती! छोड़िये न!देखा नहीं देश की जनता ने,जिस जज के घर पर नोटों के बंडल से भरी जली बोरियां मिलीं उस पर एक एफआईआर तक नहीं हुआ। हर कोर्ट में जज से दो मीटर दूर बैठा पेशकार हर केस के तारिख पर दो-चार सौ जेब में रखता है।जज जानता नहीं है!! हमारे देश में जजों की तानाशाही चलती है। ये देश, कानून सबसे उपर हैं। भ्रष्ट व्यक्तित्व से देशभक्ति की अपेक्षा भी मूर्खता है।--मास्टर साहब मुंह बनाये।

ए सरजी,रउवो कुछ कहीं!!--मुखियाजी मेरी ओर देखकर।

इसमें दो मत नहीं कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद देश में विमान दुर्घटनाओं की स्थिति नाजुक दिखने लगी है। तकनीकी गड़बड़ी, इमरजेंसी लैंडिंग,इधर दो दिनों के भीतर ही पांच विमानों में खराबी कुछ तो जरूर इशारा करती है।अहमदाबाद विमान हादसा हो या केदारधाम हेलिकॉप्टर हादसा, या अन्य, सरकार को सुरक्षात्मक पहलुओं पर किसी तरह का समझौता नहीं करना चाहिए और जांचोपरांत सख्त से सख्त कदम उठाना चाहिए। इसमें दो मत नहीं कि देश के भीतर बैठे देशद्रोहियों से निपटना बहुत कठीन है तथापि इतना तो अब ध्यान रखना हीं होगा कि सुरक्षा के क्षेत्र में शांतिदूतों की सेवायें लेने में सतर्कता अति आवश्यक हो चला है। हमारे देश में जिस तरह रेल जिहाद की घटनायें दिख रही हैं तो ऐसे में हवाई जिहाद को भी नकारा नहीं जा सकता।--मैं चुप हुआ।

मुखियाजी, अहमदाबाद विमान दुर्घटना में सबकुछ जलकर खत्म हो गया। यहां तक कि लाशों को पहचानने के लिए डीएनए टेस्ट का सहारा लेना पड़ा है लेकिन उसी में जहां धातु भी गर्मी से पिघल गया, एक भागवत गीता की पुस्तक बगैर जले सही सलामत मिली जो हमारे सनातन धर्म की महानता का सूचक है। इसे शांतिदूतों को भी समझना चाहिए। इस हादसे ने  275 लोगों की जान ले ली है जिनकी आत्मा की शांति के लिये मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूॅं।खैर,इतना तो हम सबों को विश्वास है कि इस हादसे में यदि कोई षड्यंत्र होगा तो मोदी सरकार उसे छोड़ेगी नहीं। अच्छा अब चला जाय।--कहकर उमाकाका उठ गये और इसके साथ हीं बैठकी भी....!!!!!

प्रोफेसर राजेंद्र पाठक (समाजशास्त्री)

राष्ट्रीय प्रशासनिक कार्यालय में विश्व मानव अधिकार कानून व अपराध नियंत्रण ट्रस्ट भारत की मासिक बैठक संपन्न


महमूदाबाद, सीतापुर

विश्व मानव अधिकार कानून एवं अपराध नियंत्रण ट्रस्ट भारत की मासिक बैठक महमूदाबाद स्थित राष्ट्रीय प्रशासनिक कार्यालय परिसर (एम.एस.के.डी. पब्लिक स्कूल, मोहल्ला रमुवापुर) में आयोजित की गई। बैठक का शुभारंभ भारत माता, डॉ. भीमराव अंबेडकर एवं महात्मा बुद्ध की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुआ। बैठक की अध्यक्षता मण्डल कार्यालय प्रभारी लखनऊ सुधीर कुमार वर्मा ने की तथा संचालन राष्ट्रीय संरक्षक एस.एस. दिनकर के निर्देशन में हुआ।

मुख्य अतिथि किशन कुमार (तहसील प्रभारी, बिसवाँ) ने मानव अधिकारों पर विचार साझा करते हुए कहा कि संगठन को सक्रिय, समर्पित एवं समाजसेवी प्रवृत्ति के सदस्यों की आवश्यकता है। निष्क्रिय सदस्यों को शीघ्र निष्कासित किया जाना चाहिए। संगठन के सक्रिय पदाधिकारी अनुज कुमार जैन ने आश्वस्त किया कि संगठन द्वारा चलाई जा रही मानवाधिकार जन पहल, चौपाल, गोष्ठी और बैठकों के माध्यम से आमजन की समस्याओं के समाधान हेतु मीडिया और प्रशासनिक स्तर पर ठोस प्रयास किए जाएंगे।

अपने संबोधन में सुधीर कुमार वर्मा ने स्पष्ट कहा कि जो पदाधिकारी बैठक और कार्यक्रमों में लगातार अनुपस्थित रहते हैं, उन्हें संगठन से निष्कासित कर उनकी सदस्यता समाप्त की जाएगी। उन्होंने कहा कि संगठन का उद्देश्य समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलना है — “न कोई बड़ा, न छोटा, न कोई जाति, न कोई धर्म – सिर्फ इंसानियत सर्वोपरि हो। सभी सदस्यों को यह निर्देश भी दिया गया कि सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स जैसे फेसबुक, व्हाट्सएप, ट्विटर आदि पर भड़काऊ या आपत्तिजनक पोस्ट से बचें, जिससे संगठन की गरिमा और व्यक्तिगत सुरक्षा प्रभावित न हो।

बैठक में निर्णय लिया गया कि हर माह के दूसरे रविवार को प्रातः 11 बजे नियमित मासिक बैठक आयोजित की जाएगी। यह भी स्पष्ट किया गया कि जो पदाधिकारी लगातार तीन बैठकों में अनुपस्थित रहेंगे, उन्हें संस्था से निष्कासित कर दिया जाएगा। इस अवसर पर राष्ट्रीय महासचिव रवि लाल रस्तोगी, जिला संरक्षक रामानंद शुक्ला, वरिष्ठ ब्लॉक उपाध्यक्ष महमूदाबाद मुकेश चंद्र वर्मा, ब्लॉक प्रभारी पहला कैलाश वर्मा, रामखेलावन, सूर्य प्रकाश वर्मा (अनिल वर्मा), प्रताप नारायण वर्मा, रामजतन भगत, आशुतोष सिंह, बाबूराम, दुर्गेश सहित अनेक पदाधिकारी व सदस्य उपस्थित रहे। बैठक का समापन सकारात्मक वातावरण और संगठनात्मक एकजुटता के संकल्प के साथ किया गया।

पुस्तक योगी आदित्यनाथ (एक युग नायक) का विमोचन कार्यक्रम सफलता पूर्वक हुआ सम्पन्न


उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जन्मदिन के शुभ अवसर पर श्रीराम सेवा साहित्य संस्थान के मंच पर लेखिका सुशी सक्सेना की पुस्तक योगी आदित्यनाथ (एक युग नायक) का विमोचन कार्यक्रम किया गया। इस कार्यक्रम में लेखिका सुशी सक्सेना और संस्थापिका दिव्यांजली वर्मा के साथ प्रकाशक प्रशांत श्रीवास्तव, डौली झा, सुभांषू शर्मा और इंडियन आइरिस के संस्थापक नारायण सिंह राव 'सैलाब' मौजूद थे। कार्यक्रम में पुस्तक योगी आदित्यनाथ ( एक युग नायक) पर चर्चा की गई।

पाठकों को स्वयं अनुभूत होगा कि पुस्तक पढ़ना प्रारम्भ कर देने के बाद एक रोचक आकर्षण हमें बांध लेता है। और इसमें से लेखक गायब हो जाता है। प्रत्येक पृष्ठ पर योगी आदित्यनाथ छा जाते है। कौतुहल मिश्रित आश्चर्य के साथ पाठक इनके देवीय व्यक्तित्व से चमत्कृत होते चलते हैं। ऐसे भावुक प्रसंग भी जोड़े गए हैं जो योगी जी के संन्यास से संबंधित कठोर नियमों के पालन की गाथा कहते है। अपराध और भ्रष्टाचार में डूबे उत्तर प्रदेश को जिस तरह योगी सरकार की नीतियों ने सुशासन में बदल दिया है, हिंदू राष्ट्र की परिकल्पना का समस्त वैभव, बल और पराक्रम इस युवक राज संन्यासी ने इस तरह दिखा दिया कि अपराधियों में खौंफ पैदा हो गया है। लगभग 30 पृष्ठों पर सिर्फ महिला सशक्तिकरण से संबंधित वे सारे कार्यकलाप हैं जो योगी सरकार की पहचान बन गए है। कुल मिलाकर योगी जी की योजनाएं और सुधार उत्तर प्रदेश के साथ साथ देश के विकास और लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाने के लिए महत्वपूर्ण कदम हैं। अंत में दिव्यांजली वर्मा जी ने कार्यक्रम का समापन करते हुए सभी उपस्थित महानुभावों को विदाई दी। सुशी सक्सेना जी का कहना है कि वे बहुत भाग्यशाली हैं कि उन्हें एक युग नायक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ऊपर कुछ लिखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

मधुबन विधानसभा से कांग्रेस के पुष्कर सिंह ने की दावेदारी


मधुबन

पूर्वी चंपारण- कांग्रेस पार्टी के मीडिया विभाग के प्रदेश उपाध्यक्ष मधुबन विधानसभा के राजेपुर नवादा गांव निवासी पुष्कर सिंह ने पूर्वी चंपारण जिले के मधुबन विधानसभा से कांग्रेस के प्रत्याशी के रूप में दावेदारी पेश की। उक्त बातें पुष्कर सिंह ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर के कहा है। प्रेस विज्ञप्ति में पुष्कर सिंह ने आगे कहा की मधुबन विधानसभा कांग्रेस का परंपरागत सीट रहा है। इस विधानसभा ने बिहार सरकार को स्वास्थ्य मंत्री भी दिया है। पुष्कर सिंह ने कहा कि बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष राजेश कुमार एवं बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावारु ने साफ साफ कहा है कि क्षेत्र में काम करने वाले व्यक्ति को ही कांग्रेस पार्टी टिकट देगी एवं जिस विधानसभा में कांग्रेस पार्टी मजबूत होगी, वहाँ कांग्रेस पार्टी चुनाव जरूर लड़ेगी। ज्ञात हो कि मधुबन विधानसभा सीट शिवहर लोकसभा के अंतर्गत आता है। इस विधानसभा के निवासी पुष्कर सिंह पिछले 13 वर्षों से एनएसयूआई, यूथ कांग्रेस के विभिन्न पदो सहित कांग्रेस के मीडिया डिपार्टमेंट के विभिन्न पदों पर रहकर कार्य कर चुके है। फिलहाल वो मीडिया डिपार्टमेंट में प्रदेश उपाध्यक्ष पद पर है। पुष्कर सिंह का कहना है कि मुझे अपने प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार एवं प्रदेश प्रभारी कृष्णा अल्लावारु पर पूर्ण विश्वास है कि मधुबन विधानसभा सीट गठबंधन में कांग्रेस के खाता में आएगी एवं मुझे पार्टी यहां से टिकट जरूर देगी, इसलिए मैं अपने कार्यकर्ताओं के साथ क्षेत्र में कार्य कर रहा हूँ।

श्री कल्याणिका देवस्थानम डोल आश्रम में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पहुंचे 

*बाबा कल्याण दास से मिलकर लिया आशीर्वाद, अमरकंटक आने का दिया आश्वासन*


अनूपपुर

परम तपस्वी बीतराग बाबा कल्याण दास महाराज के उत्तराखंड स्थित डोल आश्रम में तीन दिनों तक चले वार्षिक उत्सव कार्यक्रम में उत्तराखंड के लोकप्रिय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी आश्रम पहुंचकर पूजन अर्चन धार्मिक विधि विधान के कार्यक्रम में शामिल हुए एवं दर्शन किया । उल्लेखनीय है कि 10 मई 25 शनिवार से  वैशाख शुक्ल त्रयोदशी 12 मई 25 दिन सोमवार वैशाख शुक्ल पूर्णिमा तक तीन दिनों के वार्षिक उत्सव कार्यक्रम में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी श्री कल्याणिका देवस्थानम आश्रम डोल  पहुंचे तथा उन्होंने आश्रम परिसर में आयोजित वार्षिक उत्सव के परंपरागत धार्मिक आयोजन में शामिल होकर दर्शन किया एवं पूजन अर्चन अभिषेक में उपस्थित रहे इस दौरान आश्रम परिसर में जश्न का माहौल रहा तथा कई धार्मिक कार्यक्रम संपन्न हुए कार्यक्रम के अंत में विशाल भंडारा भोजन प्रसादी कराया गया । 

उत्तराखंड के लोकप्रिय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने परम तपस्वी बाबा कल्याण दास जी महाराज से मिलकर उनके कुशल क्षेम जाना। तथा बाबा कल्याण दास जी महाराज से आशीर्वाद लिया बाबा कल्याण दास जी महाराज ने आश्रम के गतिविधियों के विस्तार से जानकारी दी तथा उन्होंने मध्य प्रदेश के प्रमुख पर्यटन एवं धार्मिक तीर्थ स्थल पवित्र नगरी अमरकंटक आने का आमंत्रण दिया जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार कर लिया । मुख्यमंत्री ने कहा कि अमरकंटक में जब भी कार्यक्रम होगा आमंत्रित करेंगे मैं निश्चित तौर पर रहूंगा ।

महाकुंभ 2025 व मकर संक्रांति का एक वैज्ञानिक आधार, एक संक्षिप्त खगोलीय विश्लेषण

*आधुनिक खगोल विज्ञान का वैक्यूम क्लीनर, जो पृथ्वी पर आने वाली धूमकेतुओं से भी बचाता है*


*सुशी सक्सेना इंदौर मध्यप्रदेश*

प्रयागराज

यह बात आज से लगभग हजारों वर्षों पहले की है, जब से मानव सभ्यता का प्रादुर्भाब हुआ है तब से आज तक मानव सभ्यताओं ने जाने या अनजाने में ही सही लेकिन आकाश को अपने अपने नजरियों से निहारा तो है ,चाहें हम बात करें उन प्राचीन कालीन मानव सभ्यताओं की जिन्होने रात्रि के आकाश में टिमटिमाते आकाश दीपों को देख कर और उनसे निर्मित कुछ विशिष्ट आकार प्रकार की आकृतियों  को अपने अपने हिसाब से समय, देश काल और परिस्थितियों में अनेकों कहानियों को भी गढ़ा ,जिस से आगे आने वाली पीढ़ियों को भी निरन्तर इस गूढ़ ज्ञान की धारा का विशेष लाभ ,खगोलीय ज्ञान और भान के रूप में होता रहे और जिस ज्ञान की अविरल धारा को आगे चलकर खगोल विज्ञान कहा गया ,इस प्रकार हम पाते हैं कि तमाम भारतीय प्राचीन कालीन पर्व और त्यौहारों में भी विज्ञान सम्मिलित है जिनमें कुछ प्राचीन तो कुछ आधुनिक वैज्ञानिक आधार भी प्राप्त होते हैं, आज हम एक प्राचीन कालीन पहलू पर बात करेंगे, जैसा कि हम जानते हैं कि परिवर्तन ब्रह्मांडीय नियम है जो होता है ,होता था ,और होता रहेगा, और होना अपरिहार्य है, उसी कड़ी में मानव सभ्यताओं ने भी समय के साथ अपने आप को भी ढाला है और  इस बदलाव रूपी ऊबड़ खाबड़ ढलान से गुजरते हुए प्राचीन कालीन सभ्यताओं से भी समय के साथ में, आगे चल कर केबल कुछेक रीति रिवाजें , संस्कृति ,परंपराएं और रूढ़ी वादियां छूट गईं और कुछ समय विशेष के साथ रूढ़ हो गईं और कुछ समय के साथ परिभाषित होकर परिवर्तित हो गईं और कुछ ख़ास ने मानवीय परंपराओं का रूप ले लिया उनमें से एक विशेष है मकर संक्रांति और महाकुम्भ महोत्सव का संयोजन, खगोल विद अमर पाल सिंह आपको बताने जा रहे हैं इन दोनों से सम्बन्धित कुछ ख़ास बातें , जोकि जनहित में अति महत्वपूर्ण हैं।

महाकुंभ और मकर संक्रांति दोनों का गहरा वैज्ञानिक और खगोलीय महत्व भी है, जो आकाशीय पिंडों की गतिविधियों और पृथ्वी पर उनके प्रभाव में निहित है। इन घटनाओं के पीछे का वैज्ञानिक आधार कुछ इस प्रकार है: खगोल विद अमर पाल सिंह के अनुसार मकर संक्रांति: वैज्ञानिक व्याख्या, यह एक खगोलीय घटना है , खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि मकर संक्रांति के पीछे का विज्ञान_ पृथ्वी का अपने अक्ष पर घूर्णन के कारण हम  दिन ब रात का अनुभव करते हैं, लेकिन ये दिन ब रात सम्पूर्ण पृथ्वी पर सब जगह एक जैसा नहीं होता है , जितनी सूर्य की किरणें प्रथ्वी के जिस भाग पर पड़ रही होती हैं उसी हिसाब से दिन तय होता है, जैसे प्रथ्वी को दो गोलार्धों में बांटा गया है एक उत्तरी गोलार्ध ब दूसरा दक्षिणी गोलार्ध जिनमें जिस पर पड़ने बाली सूर्य की किरणें प्रथ्वी पर दिन तय करती हैं, और इसका अपने अक्ष पर 23.5 अंश झुके होने के कारण दोनो गोलार्धों में मौसम भी अलग अलग होता है, अगर हम बात करें उत्तरायण ब दक्षिणायन की तो हम पाते हैं कि यह एक खगोलीय घटना है, 14/15 जनवरी के बाद सूर्य उत्तर दिशा की ओर अग्रसर या जाता हुआ होता है,जिसमें सूर्य दक्षिणी गोलार्ध से उत्तरी गोलार्ध में प्रवेश ( दक्षिण से उत्तर की ओर गमन प्रतीत ) करता है, इसे उत्तरायण या सूर्य उत्तर की ओर के नाम से भी जाना जाता है, वैज्ञानिकता के आधार पर इस घटना के पीछे का मुख्य कारण है पृथ्वी का छः महीनों के समय अवधि के उपरांत उत्तर से दक्षिण की ओर बलन करना,जो कि एक प्राकृतिक प्रक्रिया है ,जो लोग उत्तरी गोलार्ध में रहते हैं उनके लिए सूर्य की इस राशि परिबर्तन के कारण 14/15 जनवरी का दिन मकर संक्रांति के तौर पर मनाते हैं,और उत्तरी गोलार्ध में निवास करने वाले व्यक्तियों द्वारा ही समय के साथ धीरे धीरे मकर मण्डल के आधार पर ही मकर संक्रांति की संज्ञा अस्तित्व में आई है, मकर संक्रांति का अर्थ है सूर्य का क्रांतिवृत्त के दक्षिणायनांत या उत्तरायनारंभ बिंदु पर पहुंचना,  प्राचीन काल से सूर्य मकर मण्डल में प्रवेश करके जब क्रांतिवृत्त के सबसे दक्षिणी छोर से इस दक्षिणायनांत या उत्तरायनारंभ बिंदु पर पहुंचता था, तब वह दिन ( 21 या 22  दिसंबर) सबसे छोटा होता था, अमर पाल सिंह ने बताया कि मगर अब सूर्य जनवरी के मध्य में मकर मण्डल में प्रवेश करता है, वजह यह है कि अयन चलन के कारण दक्षिणायनांत (या उत्तरायनारंभ) बिंदु अब पश्चिम की ओर के धनु मण्डल में सरक गया है, अब बास्तबिक मकर संक्रांति (दक्षिणायनांत या उत्तरायनारंभ बिंदु) का आकाश के मकर मण्डल से कोई लेना देना नहीं रह गया है, मकर संक्रांति सूर्य के मकर राशि में संक्रमण का प्रतीक होता है जो सूर्य की उत्तर की ओर यात्रा (उत्तरायण) का संकेत देता है, यह परिवर्तन शीतकालीन संक्रांति के बाद होता है जब उत्तरी गोलार्ध में दिन लंबे होने लगते हैं, जो गर्मी और नवीनीकरण की शुरुआत का भी प्रतीक है,

सौर विकिरण में परिवर्तन

सूर्य के कर्क रेखा की ओर बढ़ने से उत्तरी गोलार्ध में सौर ऊर्जा बढ़ती है, जो जलवायु और कृषि चक्र को तो प्रभावित करती ही है और साथ साथ यह संक्रमण जैविक लय को प्रभावित करता है, जोकि इस समय ख़ासकर उत्तरी गोलार्ध में निवास करने वाले लोगों में कायाकल्प और जीवन शक्ति को प्रोत्साहित करता है,

जैसे कि विटामिन डी का अवशोषण आदि 

इस अवधि के दौरान, लोग पारंपरिक रूप से धूप सेंकते हैं या धूप में अधिक समय बिताते हैं, जिससे शरीर को अधिक विटामिन डी का उत्पादन करने में मदद मिलती है, जो हड्डियों के स्वास्थ्य और प्रतिरक्षा के लिए एक हद तक आवश्यक होता है।इसके साथ ही अगर हम बात करें संस्कारों में निहित वैज्ञानिक आधारों की तो हम पाते हैं कि कुछ संस्कारों का वैज्ञानिक आधार भी प्राप्त होता है, खगोल विद अमर पाल सिंह ने बताया कि जैसे कि तिल और गुड़ का सेवन केवल सांस्कृतिक ही नहीं है ,बल्कि ये खाद्य पदार्थ पोषक तत्वों से भी भरपूर होते हैं जो ठंड के महीनों के दौरान शरीर को गर्म और ऊर्जावान बनाए रखने में मदद करते हैं, अब हम बात करते हैं महाकुम्भ और इसमें निहित वैज्ञानिक आधारों की तो हम पाते हैं कि खगोल विद अमर पाल सिंह ने बताया कि महाकुंभ और इसकी वैज्ञानिक व्याख्या में हम पाते हैं कि यह अति प्राचीन एवं बृहद त्यौहार भी खगोलीय संरेखण पर आधारित हैं।

जैसा हम जानते हैं कि आज की अंतर्राष्ट्रीय खगोल वैज्ञानिक संघ की ग्रहीय परिभाषा के अनुसार आज हमारे सौर मंडल में आठ ग्रह हैं , जिनका सूर्य से दूरी के क्रम में नाम निम्नानुसार है बुद्ध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, अरुण और बरुण हैं,उनमें से सबसे बड़ा ग्रह है बृहस्पति, जिसे गुरु भी कहा जाता है,प्राचीन कालीन सभ्यताओं ने भी पांच ग्रहों को अपनी साधारण आंखों से ही पहचान लिया था, जिनमें से बृहस्पति भी एक था, आज के समय में भी अगर आप भी थोड़ा अधिक प्रयास करेंगे तो अलग अलग रात्रि के दौरान दिखाई देने वाले इन पांचों ग्रहों को विभिन्न समय पर आप भी पहचान सकते हैं , बृहस्पति जोकि शुक्र ग्रह के बाद सबसे ज्यादा चमकीला पिण्ड है, यह मुख्य रूप से लगभग 75 प्रतिशत हाइड्रोजन और 24 प्रतिशत हीलियम ब अन्य से बना हुआ है, दूरबीन से देखने पर इस पर बाहरी वातावरण में दृश्य पट्टियां भी दिखाई देती हैं और एक लाल धब्बा भी है जिसे ग्रेट रेड स्पॉट कहा जाता है , जिसे गैलीलियो ने 17वीं सदी में अपनी दूरबीन से देखा था, और सर्व प्रथम 1610 में गैलीलियो गैलिली ने इसके चार बड़े चंद्रमाओं को भी खोजा था, जिनके नाम हैं, गैनिमेड, यूरोपा, आयो, कैलिस्टो, खगोलीय अनुसंधान से प्राप्त जानकारी से यूरोपा पर निकट या दूर भविष्य में ही सही लेकिन इस पर जीवन की प्रबल संभावना है क्योंकि इस पर पानी का भण्डार जो मौजूद है, अगर हम बृहस्पति ग्रह की तुलना अपनी पृथ्वी से करें तो हम पाते हैं कि इसमें लगभग 1331 पृथ्वियां समा सकती हैं, और इसका चुंबकीय क्षेत्र पृथ्वी की तुलना में 14 गुना ज्यादा शक्तिशाली है, और यह सूर्य से लगभग 77 करोड़ 80 लाख किलोमीटर दूर है, और सूर्य का एक चक्कर लगाने में 11.86 वर्ष का समय लगता है जोकि लगभग 12 बर्ष के बराकर होता है, बृहस्पति का अक्षीय झुकाब केबल 3.13 डिग्री है जिस कारण इस पर कोई मौसम परिवर्तन नहीं होता है, यह बहुत तेज़ गति से घूर्णन करता है अपने अक्ष पर 09 घंटा 56 मिनट्स में एक बार घूमता है, इसका मतलब होता है कि इसका दिन लगभग 10 घंटे का ही होता है।

अमर पाल सिंह ने बताया कि इसे आधुनिक खगोल विज्ञान में वैक्यूम क्लीनर भी कहा जाता है, जोकि पृथ्वी पर आने वाली धूमकेतुओं से भी बचाता है,  बृहस्पति ग्रह जिसे गुरु भी कहा जाता है का हमारे देश में एक विशेष स्थान है क्योंकि भारत में कुम्भ मेला आयोजित होता है, कुम्भ का शाब्दिक अर्थ होता है कलश, कलश का मतलब होता है घड़ा, सुराही या पानी रखने वाला बर्तन और मेला का मतलब होता है कि जहां पर मिलन होता है, इस मेला के दौरान शिक्षा, प्रवचन, सामूहिक सभाएं, मनोरंजन और यह सामुदायिक वाणिज्यिक उत्सव भी हैं, बड़ी बात यह है कि यह त्यौहार दुनिया की सबसे बड़ी सभा माना जाता है, इस उत्सव को यूनेस्को की मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में शामिल किया गया है, खगोलीय गणनाओं के हिसाब से यह मेला मकर संक्रांति के दिन प्रारंभ होता है और जब एक ख़ास खगोलीय संयोजन घटित होता है तभी यह मेला घटित होता, महाकुंभ तब आयोजित होता है जब सूर्य मकर राशि में, चंद्रमा मेष राशि में और बृहस्पति कुंभ राशि में होता है, इस बार वर्ष 2025 में प्रयागराज में पूर्ण कुम्भ मेला आयोजित किया जा रहा है, महाकुम्भ मेला प्रयाग में प्रत्येक 144 वर्ष अर्थात 12 पूर्ण कुम्भ मेलों के बाद आयोजित होता है, महाकुम्भ मेला अगली बार 2157 में लगेगा, जब गुरु कुम्भ राशि में सूर्य मेष राशि में और चन्द्रमा धनु राशि में होता है तब कुम्भ मेला हरिद्वार में लगता है, और जब गुरु वृषभ राशि में सूर्य, चन्द्रमा मकर राशि में होते हैं तब प्रयागराज में कुम्भ मेला आयोजित होता है, और जब गुरु सिंह राशि में सूर्य,चन्द्रमा कर्क राशि में होते हैं तो नासिक में कुम्भ मेला आयोजित होता है और जब गुरु सिंह राशि में सूर्य, चन्द्रमा मेष राशि में होते हैं तो कुम्भ मेला उज्जैन में आयोजित होता है जब गुरु सिंह राशि में होते हैं तो त्रांबकेशर नासिक और उज्जैन में आयोजित होता है जिसे सिंहस्थ कुंभ मेला भी कहा जाता है,

निष्कर्ष के तौर पर कह सकते हैं कि दोनों घटनाएँ, मकर संक्रांति और महाकुंभ, महत्वपूर्ण खगोलीय गतिविधियों के साथ संरेखित होती हैं जो मौसमी परिवर्तनों, मानव शरीर विज्ञान और पर्यावरण को प्रभावित करती हैं। जोकि हमारे पूर्वजों के विशिष्ट प्राचीन ज्ञान को भी दर्शाते हैं जो खगोलीय ज्ञान को स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा देने वाली प्रथाओं के साथ एकीकृत भी करता है।

अमेरिका की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के 'नियमन रिपोर्ट्स' में अंकित की साहसिक पत्रकारिता पर लेख प्रकाशित

*हार्वर्ड ने किया अंकित पचौरी की मानवीय पत्रकारिता को सलाम*


भोपाल

मध्यप्रदेश के पत्रकार अंकित पचौरी ने अपनी साहसिक पत्रकारिता से न केवल समाज को जागरूक किया है, बल्कि अब उनकी आवाज़ अंतरराष्ट्रीय मंचों तक गूंज रही है। अमेरिका की प्रतिष्ठित हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के पत्रकारिता प्रकाशन ‘नियमन रिपोर्ट्स’ में उनकी प्रेरणादायक और संघर्षशील पत्रकारिता को स्थान दिया गया है। इस लेख ने न केवल मध्यप्रदेश बल्कि पूरे देश का मान बढ़ाया है।

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के ‘नियमन रिपोर्ट्स’ ने अपने लेख में अंकित पचौरी की उन रिपोर्टों को प्रमुखता से शामिल किया है, जिनमें उन्होंने वंचित और हाशिए पर खड़े समुदायों की समस्याओं को न केवल उजागर किया बल्कि समाधान की दिशा में भी कदम बढ़ाए। रिपोर्ट में विशेष रूप से उस घटना का उल्लेख है जब अंकित ने मध्यप्रदेश की एक दलित महिला और उसकी लिव-इन रिलेशनशिप से जन्मी बच्ची के शिक्षा के अधिकार के लिए अभियान चलाया। यह मुद्दा पहले मुख्यधारा की मीडिया में नजरअंदाज कर दिया गया था, लेकिन अंकित की रिपोर्टिंग ने इसे राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया।

*सामाजिक न्याय के लिए समर्पित पत्रकारिता*

पिछले एक दशक से अंकित पचौरी ‘द मूकनायक’ जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से दलितों, आदिवासियों और अन्य उपेक्षित समुदायों की आवाज़ को बुलंद कर रहे हैं। उनकी रिपोर्टिंग ने न केवल इन समुदायों के अधिकारों को राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बनाया है, बल्कि सरकार और प्रशासन को भी इनके मुद्दों पर ध्यान देने के लिए मजबूर किया है। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने डिजिटल मीडिया को एक ऐसा माध्यम बनाया है, जिसके जरिए वे सामाजिक न्याय के लिए एक मजबूत आवाज़ बन चुके हैं।

*‘नियमन रिपोर्ट्स’ का विशेष उल्लेख*

‘नियमन रिपोर्ट्स’ ने लिखा है कि अंकित की पत्रकारिता एक ऐसा उदाहरण है, जो दिखाती है कि साहस, दृढ़ता और मानवीय संवेदनाएं किस तरह पत्रकारिता को समाज के लिए बदलाव का जरिया बना सकती हैं। लेख में उनके पिछले तीन वर्षों की उन रिपोर्टों का उल्लेख किया गया है, जिनमें उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक असमानता और जातिगत अन्याय जैसे मुद्दों पर गहराई से काम किया।

*अंकित का योगदान और प्रेरणा*

हार्वर्ड के इस लेख में यह भी बताया गया है कि अंकित ने किस तरह डिजिटल मीडिया को सशक्त हथियार बनाकर समाज के कमजोर वर्गों की आवाज़ को मुख्यधारा में लाने का काम किया। उनकी कहानियां न केवल उन वर्गों के संघर्ष को उजागर करती हैं, बल्कि उन्हें सशक्त करने का मार्ग भी दिखाती हैं।

*अंतरराष्ट्रीय पहचान से प्रदेश का मान बढ़ा*

मध्यप्रदेश के एक छोटे से शहर से निकलकर वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाने वाले अंकित पचौरी का नाम आज हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा बन चुका है, जो पत्रकारिता के माध्यम से समाज में बदलाव लाने का सपना देखता है। उनकी इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि सही दृष्टिकोण और अथक परिश्रम से सीमाएं तोड़ी जा सकती हैं।

MKRdezign

,

संपर्क फ़ॉर्म

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget