पॉवर प्लांट न्यू जोन इंडिया एवं टोरेंट पावर द्वारा सीएसआर मद से कंबल वितरण कार्यक्रम संपन्न

*महिलाएँ, किसान, बुजुर्ग व ग्राम प्रतिनिधियों की रही उपस्थिति*


अनूपपुर

जिले के रक्सा–कोलमी क्षेत्र में प्रस्तावित 1600 मेगावाट न्यू जोन इंडिया एवं टोरेंट प्राइवेट लिमिटेड विद्युत उत्पादन परियोजना के अंतर्गत आज कंपनी के कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) मद से ग्रामीणों के लिए कंबल वितरण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। खेल मैदान, रक्सा में आयोजित इस जनकल्याणकारी कार्यक्रम में स्थानीय ग्रामीण, महिलाएँ, किसान, बुजुर्ग तथा ग्राम प्रतिनिधियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती की प्रतिमा पूजन एवं वंदना के साथ हुआ। स्थानीय विद्यालय की बालिकाओं ने सरस्वती वंदना व स्वागत गीत प्रस्तुत कर समारोह में सांस्कृतिक गरिमा का संचार किया।

कार्यक्रम में कंपनी के आर. के. सिंह (प्रोजेक्ट हेड), सुधाकर पाण्डेय सीनियर वाइस प्रेसीडेंट सुशील कांत मिश्रा वाइस प्रेसिडेंट जी ओमप्रकाश नैनवाल, ब्रिगेडियर चरण वीर सिंह, लक्ष्मण जी, धीरज सिंह चौहान, कुलदीप सिंह, आकाश श्रीवास्तव, कपिल छेड़ा, अशोक मिश्रा, आदित्य राठौर, अमोल सिंह, हेमलाल सिंह, मुकेश, बाल सिंह, अर्जुन पटेल एवं लोकनाथ सिंह—विशेष रूप से उपस्थित रहे।

ग्रामीण प्रतिनिधियों में चक्रधर मिश्रा, ग्राम रक्सा की सरपंच महोदया, उपसरपंच महोदया, ग्रामचकधर मिश्रा देवधर मिश्रा अमोल सिंह आदित्य राठौर नरेंद्र राठौर अर्जुन पटेल अशोक मिश्रा राजू राठौर कोलमी के सरपंच राजू पनिका—सहित दोनों ग्राम पंचायतों के अनेक सम्मानित नागरिक मौजूद रहे।

CSR विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में ठंड को देखते हुए बुजुर्गों, महिलाओं और जरूरतमंद परिवारों के लिए कंबल वितरण की विशेष व्यवस्था की गई। ग्रामीणों ने कंपनी द्वारा प्रदान की जा रही समय-समय की सामाजिक सहायता—जैसे स्वास्थ्य शिविर, पेयजल व्यवस्था, सामुदायिक समर्थन एवं सामग्री वितरण—के प्रति संतोष व्यक्त किया।

कंपनी प्रतिनिधियों ने कहा कि आने वाले समय में CSR के अंतर्गत शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका संवर्धन, कौशल विकास, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं पर केंद्रित कई नए कार्यक्रम प्रारंभ किए जाएंगे। उन्होंने यह भी आश्वस्त किया कि परियोजना के निर्माण के दौरान स्थानीय लोगों को रोजगार एवं प्रशिक्षण में प्राथमिकता दी जाएगी।

रक्सा–कोलमी में आयोजित यह सामाजिक पहल कंपनी और समुदाय के बीच सहभागिता और विश्वास को सुदृढ़ करने वाली साबित हुई। कार्यक्रम का समापन ग्रामीणों द्वारा कंपनी प्रबंधन के प्रति आभार व्यक्त करने के साथ हुआ।

अवैध रेत परिवहन पर ट्रैक्टर जप्त, मामला दर्ज


अनूपपुर

जिले के थाना बिजुरी पुलिस द्वारा अवैध रेत परिवहन की कार्यवाही की गई । घटना विवरण इस प्रकार है, गश्त के दौरान मुखबिर की सूचना पर बैहाटोला केवई नदी घाट से  एक बिना नंबर स्वराज कंपनी का ट्रेक्टर का चालक ट्राली मे रेत खनिज लोड कर परिवहन कर रहा था, जिसे मौके पर जाकर उक्त ट्रेक्टर मय रेत भरी ट्राली को समक्ष गवाहो के जप्त किया गया, आरोपी चालक मौके से फरार हो गया है, घटना विवरण पर अज्ञात चालक के विरुद्ध अपराध 383/2025 धारा 303(2), 317 (5),बीएनएस. 4/21खनि.अधिनियम का कायम कर अनुसंधान मे लिया गया । जप्त मशरुका में ट्रेक्टर की कीमत 5 लाख रुपयें एवं रेत खनिज की कीमत 5 हज़ार रुपये आंकी गई है।

6 करोड़ की लागत वाली मॉडल सड़क बदहाल, सड़क पर फैली गंदगी, नागरिक परेशान


अनूपपुर/कोतमा

कोतमा नगर में छह करोड़ रुपये की लागत से विकसित की गई मॉडल सड़क आज अपनी पहचान खो चुकी है। कभी जिसे शहर के आधुनिक विकास का प्रतीक कहा जाता था, वह सड़क अब बदहाली, कचरे के ढेर और दुर्गंध का केंद्र बन चुकी है। सड़क के दोनों किनारों और डिवाइडर के पास जगह-जगह कूड़े का जमाव दिखाई देता है, जिससे आने-जाने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण के बाद शुरुआत में नगर पालिका ने कुछ समय तक सफाई पर ध्यान दिया, लेकिन धीरे-धीरे सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। कचरा उठाने वाले वाहन समय पर नहीं पहुंचते और नालियों की सफाई कई-कई महीनों तक नहीं होती। नतीजा यह कि नालियों का गंदा पानी सड़क पर फैलकर लगातार बदबू और गंदगी बढ़ाता जा रहा है। नागरिकों के अनुसार यह पूरी तरह नगर प्रशासन की लापरवाही का परिणाम है।

इस मॉडल सड़क के किनारे बने कई व्यापारिक प्रतिष्ठानों को नुकसान भी झेलना पड़ रहा है। दुकानदारों का कहना है कि गंदगी और बदबू की वजह से ग्राहक दुकान में रुकने से भी कतराने लगे हैं। शाम के समय स्ट्रीट लाइटें भी कई जगह बंद रहती हैं, जिससे अंधेरा और गंदगी मिलकर असुरक्षित माहौल बना देती हैं।

बरसात के मौसम में इस समस्या का स्तर और भी भयावह हो जाता है। नालियों में जमा ठोस कचरा पानी को बहने नहीं देता और सड़क पर जलभराव हो जाता है। जहां से नागरिक गुजरना चाहते हैं, वहां कचरे और गंदे पानी का कीचड़ बड़ा खतरा बना रहता है। लोगों ने बताया कि कई बार स्कूली बच्चों और दोपहिया वाहन चालकों को फिसलकर चोट भी लग चुकी है। गंदगी के बढ़ते ढेर के कारण मच्छरों की तादाद बढ़ गई है, जिससे डेंगू, मलेरिया और संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा मंडराने लगा है। कई परिवारों ने बताया कि छोटे बच्चे बार-बार बीमार पड़ रहे हैं। 

लकवा के मरीज को मिली पीएम श्री एयर एम्बुलेंस की सुविधा, अवैध पशु परिवहन पर पीकप जप्त


अनूपपुर

पीएम श्री एयर एम्बुलेंस सेवा अत्यधिक गंभीर इलाज व आपातकालीन स्थितियों मे त्वरित तथा सुरक्षित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने एवं गंभीर बीमारियों से ग्रसित मरीजों को उच्च स्तरीय उपचार के लिए बड़े शहरों के अस्पतालों में भेजने हेतु लाभकारी सिद्ध हो रही है। कलेक्टर हर्षल पंचोली के मार्गदर्शन में पीएम श्री एयर एम्बुलेंस सेवा के तहत आज सुबह10:30 बजे विवेकनगर अनूपपुर निवासी रविन्द्र साहू उम्र 55 वर्ष को जो जिला चिकित्सालय अनूपपुर में लकवा की गंभीर बीमारी के कारण भर्ती किए गए थे, उनको जिला मुख्यालय स्थित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय हैलीपैड से एयर एम्बुलेंस के माध्यम से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), भोपाल में उच्च स्तरीय ईलाज के लिए भिजवाया गया। मरीज के साथ उनके पुत्र संतोष साहू भी गए है। मरीजो के परिजनों ने आपातकालीन स्थिति में पीएम श्री एयर एंबुलेंस सेवा की  मदद मिलने पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का आभार व्यक्त किया है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अलका तिवारी ने बताया कि रविन्द्र साहू लकवा की बीमारी से ग्रस्त थे। मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए उनहे बेहतर ईलाज के लिए एयर एम्बुलेंस के माध्यम से भोपाल भिजवाया गया है। जिससे उन्हें उच्च स्वास्थ्य सुविधा मिल सके

अवैध पशु परिवहन पर 7 मवेशी पीकप सहित जप्त, मामला दर्ज

समाचार

जिले के जैतहरी पुलिस ने एक पिकअप वाहन जब्त किया, जिसमें 7 पशुओं को क्रूरतापूर्वक ठूंस-ठूंस कर भरा गया था। पुलिस ने वाहन चालक के खिलाफ पशु क्रूरता अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

यह कार्रवाही मुखबिर की सूचना पर की गई। मुखबिर ने बताया था कि एक पिकअप (रजिस्ट्रेशन नंबर एमपी 18 जेड एफ 8176) में पशुओं को क्रूरतापूर्वक बांधकर अनूपपुर से जैतहरी रोड होते हुए पेड्रा रोड की तरफ ले जाया जा रहा है। सूचना मिलते ही जैतहरी थाना पुलिस ने राठौर चौक पर घेराबंदी की। कुछ देर बाद, पिकअप वाहन अनूपपुर की तरफ से आता दिखा। पुलिस को देखते ही चालक वाहन को लहरपुर की तरफ भगाने लगा। पुलिस ने पीछा किया तो चालक ने शासकीय कॉलेज के पीछे वाहन खड़ा कर अंधेरे का फायदा उठाकर जंगल में फरार हो गया।

पुलिस ने पिकअप की तलाशी ली तो उसमें 7 पशु रस्सी से क्रूरतापूर्वक बंधे हुए मिले। पुलिस ने वाहन को जब्त कर लिया और पशुओं को सुरक्षित कांजी हाउस भिजवा दिया। जब्त पिकअप वाहन को थाना परिसर में खड़ा किया गया है। पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ पशु क्रूरता अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

खेल मैदान पर निर्माण कार्य से छात्रों में रोष, वैकल्पिक स्थान होते हुए भी अधिकारियों ने लिया विवादित निर्णय


अनूपपुर/कोतमा

आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में प्रशासन की मनमानी शासकीय माध्यमिक विद्यालय बेसिक कोतमा के खेल मैदान को समाप्त कर वहां नई बिल्डिंग का निर्माण शुरू किए जाने से विद्यार्थियों, अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों में नाराज़गी व्याप्त है। विद्यालय परिसर में ही एक अन्य जर्जर एवं उपयोग में न आने वाला खंडहर भवन मौजूद होने के बावजूद खेल मैदान को तोड़कर नया भवन बनाए जाने का निर्णय लोगों को समझ से परे लग रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुराने खंडहर भवन को ध्वस्त कर अतिरिक्त भवन आसानी से बनाया जा सकता था और बच्चों का खेल मैदान सुरक्षित रखा जा सकता था।

विद्यालय के छात्रों का कहना है कि शिक्षा के साथ-साथ खेल उनके शारीरिक और मानसिक विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। खेल का मैदान समाप्त होने से उनकी नियमित खेल गतिविधियाँ बाधित हो जाएंगी, जिसका असर उनके समग्र विकास पर पड़ेगा। अभिभावकों ने भी इस फैसले पर कड़ा एतराज़ जताते हुए कहा कि बच्चों के हितों को नज़रअंदाज़ कर लिया गया है।

स्थानीय नागरिकों ने सवाल उठाया है कि जब विकल्प मौजूद थे, तो अधिकारी बंद कमरे में बैठकर बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाला यह निर्णय क्यों ले बैठे। नागरिकों ने जिला प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप कर खेल मैदान को संरक्षित करने की मांग की है तथा कलेक्टर से न्यायपूर्ण और संवेदनशील निर्णय लेने की अपील की है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य जारी रहा तो वे जनआंदोलन की राह भी अपना सकते हैं। प्रशासन अब इस मामले को किस प्रकार से सुलझाता है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

अभद्र बयान पर आईएएस का पुतला दहन, 2 दिसंबर को फिर होगा पुतला दहन

*ब्राम्हण समाज ने एफआईआर करने की मांग*


अनूपपुर/​कोतमा

मध्य प्रदेश के आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा द्वारा कथित तौर पर ब्राह्मण समाज के खिलाफ की गई अभद्र बयानबाजी कि ब्रह्मण समाज की बहन बेटियां जब मेरे बेटे के साथ संबंध नहीं बना लेते तब तक आरक्षण खत्म नहीं होना चाहिए ऐसे कुत्सित मानसिकता के बयान से विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसी क्रम में, आज कोतमा इकाई क्षेत्र के समस्त ब्राह्मण समाज एकजुट होकर स्थानीय पुलिस थाने पहुंचकर  संतोष वर्मा के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की मांग की। ब्राह्मण ​समाज  ने कहा कि"एक जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति का इस प्रकार का अमर्यादित बयान अत्यंत निंदनीय है।

आई ए एस संतोष वर्मा के द्वारा ब्राह्मण समाज के खिलाफ अभद्र बयान बाजी करने के बाद समाज के लोगों में रोष एवं आक्रोश व्याप्त था थाने में एफआईआर की मांग करने के ब्राह्मण समाज पुलिस की कार्यवाही से संतुष्ट न होकर सभी लोग एक साथ मिलकर गांधी चौक में संतोष वर्मा का पुतला दहन किया एवं गगनचुंबी नारे भी लगाए गए!!

उक्त कार्यक्रम में ब्राह्मण समाज के संरक्षक के रूप में सभी वरिष्ठ जन युवा वर्ग एवम ग्रामीण क्षेत्रों एवम आसपास से ब्राह्मण समाज के सभी लोग बड़ी संख्या में एकत्रित होकर कार्यक्रम को सफल बनाने में अमूल्य योगदान दिया।

*विप्र समाज व मातृशक्ति 2 दिसंबर को करेगी पुतला दहन*

अनूपपुर

विप्र समाज अनूपपुर एवं एकीकृत ब्राह्मण समाज के संयुक्त तत्वावधान में शनि धाम परिसर में एक विशाल बैठक आयोजित की गई, जिसमें संतोष वर्मा द्वारा दिए गए कथित आपत्तिजनक बयान को लेकर तीव्र असंतोष व्यक्त किया गया। बैठक में मातृशक्ति की उल्लेखनीय एवं सम्माननीय उपस्थिति विशेष रूप से ध्यान आकर्षित कर रही थी, जिन्होंने सामाजिक गरिमा की रक्षा में संगठित समर्थन जताया। विप्र समाज के संयोजक पंडित रामनारायण द्विवेदी ने कहा कि यह बयान किसी व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरे ब्राह्मण एवं सवर्ण समाज की अस्मिता को चोट पहुंचाने वाला है। उन्होंने बताया कि समाज पहले ही कई ज्ञापन प्रशासन को सौंप चुका है और प्रशासन को अपनी भावनाओं से अवगत कराया गया है।

सभा में वक्ताओं ने बताया कि मध्य प्रदेश शासन द्वारा संतोष वर्मा को सात दिवस का नोटिस दिया गया है। यदि नोटिस अवधि पूर्ण होने पर भी उन पर एफआईआर दर्ज नहीं होती है, तो विप्र समाज प्रदेश एवं जिले स्तर पर उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा। सर्वसम्मति से तय किया गया कि 2 दिसंबर, मंगलवार दोपहर 2 बजे शनि धाम में विशाल सभा होगी। उस सभा मेबनिंदा प्रस्ताव पारित किया जाएगा।

इसके बाद अनूपपुर अजाक्स संघ के स्थानीय नेता के निवास का शांतिपूर्ण घेराव किया जाएगा और यह पूछा जाएगा कि उनके प्रांतीय अध्यक्ष के कथन की निंदा अब तक क्यों नहीं की गई। कार्यक्रम के पश्चात संतोष वर्मा का पुतला दहन किया जाएगा। कार्यक्रम में मातृशक्ति की बड़ी संख्या में उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी, ताकि समाज की एकजुटता का सशक्त संदेश प्रशासन तक पहुंचे। संतों और युवाओं का समर्थन का भी पूरा समर्थन रहेगा।

पूर्व पार्षद ने झूठी शिकायत के खिलाफ खोला मोर्चा, कोतवाली में दर्ज कराई शिकायत


अनूपपुर

नगर पालिका परिषद अनूपपुर के वार्ड क्रमांक 02 के पूर्व पार्षद पुरुषोत्तम चौधरी ने अपने खिलाफ लगातार फैलाए जा रहे भ्रामक आरोपों और झूठी शिकायतों के विरुद्ध कोतवाली अनूपपुर में लिखित शिकायत दर्ज कराई है।

शिकायत में उन्होंने उल्लेख किया कि वे पिछले 15 वर्षों से लगातार भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के चुनाव चिन्ह पर तीन बार पार्षद निर्वाचित होकर वार्ड क्रमांक 02 के जनप्रतिनिधि के रूप में सेवाएँ दे चुके हैं। इतना लंबा जनसेवा का अनुभव और प्रतिष्ठा होते हुए भी उनके विरुद्ध जानबूझकर सोशल मीडिया एवं समाचार पत्रों में झूठी खबरें प्रसारित की गई हैं।

पूर्व पार्षद ने बताया कि संजय चौधरी द्वारा 08.10.2025 को अवैध भूमि क्रय के संबंध में अनुविभागीय अधिकारी को झूठी शिकायत की गई थी, जिसकी जांच राजस्व अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा की गई। जांच प्रतिवेदन में स्पष्ट रूप से शिकायत पूरी तरह झूठी पाई गई है। पुरुषोत्तम चौधरी ने कहा कि संजय चौधरी द्वारा निराधार शिकायतें और भ्रामक सूचनाएँ फैलाकर उनकी सामाजिक छवि को नुकसान पहुँचाया जा रहा है। इससे उन्हें मानसिक तनाव और आर्थिक क्षति भी हुई है।

इसी आधार पर पूर्व पार्षद ने थाना प्रभारी से मांग की है कि संजय चौधरी, पार्षद वार्ड क्रमांक 02 के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की जाए, और निराधार, असत्य एवं झूठी शिकायतें करने के लिए उनके खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए। शिकायत के साथ पूर्व पार्षद ने जांच प्रतिवेदन की प्रति भी संलग्न की है, जिससे झूठी शिकायत की पुष्टि होती है और घटना की गंभीरता सामने आती है।

रेलवे स्टेशन बदहाल, टिकट काउंटर से प्लेटफॉर्म तक गंदगी, यात्रियों को बैठना भी मुश्किल

*नही है रोशनी, पानी, शौचालय, चारो तरफ घास*


अनूपपुर

जिले के मौहरी और हरद के बीच स्थित धुरवासिन रेलवे स्टेशन बदहाली की कगार पर है। स्टेशन परिसर में फैल रही गंदगी, दुर्गंध और अव्यवस्थाओं से यात्री बेहद परेशान हैं। प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत अभियान के दावों के विपरीत यहां स्टेशन प्रबंधन की लापरवाही साफ दिखाई देती है। स्टेशन परिसर के चारों ओर बड़ी-बड़ी गाजर घास, झाड़ियाँ और कचरे के ढेर जमा हैं। स्थानीय यात्रियों के अनुसार इन झाड़ियों में सांप-बिच्छू जैसे जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा बना रहता है। साफ-सफाई न होने से यात्रियों को प्लेटफॉर्म पर बैठना तक मुश्किल हो गया है।

कोतमा–बिजुरी–चिरमिरी क्षेत्र से कोयले के माध्यम से सरकार को हर साल करोड़ों का राजस्व मिलता है, लेकिन धुरवासिन स्टेशन को बुनियादी सुविधाएँ तक नहीं मिल रहीं। इस स्टेशन पर दर्जनों गांवों — कोटमी, तितरीपोड़ी, रक्सा, कोलमी, पडोर, देखल, धुरवासिन, फूनगा, बिजौरी, छोहरी आदि के लोग यात्रा के लिए निर्भर हैं, लेकिन सुविधा नाम की कोई व्यवस्था मौजूद नहीं है।

स्टेशन पर लगे दो हैंडपंपों से जंगयुक्त लाल पानी निकल रहा है, जिससे यात्री पीने के पानी के लिए अपने घरों से बोतल लेकर आने को मजबूर हैं। वहीं स्टेशन परिसर में रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। कुछ ही बल्ब जलते हैं, जिससे रात में असुरक्षा का वातावरण बनता है। ग्रामीणों ने बताया कि सुबह कोतमा से आने वाला कर्मचारी टिकट जारी करता है, पर शाम को वह चंदिया–चिरमिरी ट्रेन से वापस लौट जाता है। इसके कारण रात में यात्रा करने वाले यात्रियों को टिकट तक उपलब्ध नहीं हो पाता।

स्टेशन पर शौचालय की सुविधा बिल्कुल नहीं है। मजबूरन यात्रियों को झाड़ियों में ही पेशाब करना पड़ता है, जहाँ सांप-बिच्छू का खतरा रहता है। स्टेशन में यात्री प्रतीक्षालय भी उपलब्ध नहीं है, जिससे बरसात और गर्मी के दिनों में यात्रियों की परेशानी और बढ़ जाती है। ग्रामीणों ने रेलवे प्रबंधन से धुरवासिन स्टेशन की स्थिति सुधारने तथा तत्काल साफ-सफाई, रोशनी और पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।

ऑनलाइन धोखाधड़ी के 2 आरोपी हरियाणा पुलिस ने किया गिरफ्तार


अनूपपुर 

जिले के थाना कोतमा में हरियाणा की रेवाड़ी जिले की पुलिस ने छापा मारते हुए लाखों रुपये के ऑनलाइन धोखाधड़ी की दो अरोपियों को पुलिस अपने साथ ले गई हैं। बताया जाता है कि हरियाणा की रेवाड़ी जिले के साइबर थाना अंतर्गत लाखों रुपये की ठगी ऑनलाइन माध्यम से की गई थी।

मामले की साइबर एवं वैज्ञानिक पद्धति से जांच करते हुए रेवाडी पुलिस कोतमा थाना पहुंची और स्थानीय पुलिस के सहयोग से 21 वर्षीय मोहम्मद इमरान निवासी बनियाटोला एवं आदिल निवासी इस्लामगंज को दबोचते हुए अपने साथ ले गई। कोतमा थाना प्रभारी रत्नांबर शुक्ल ने मंगलवार को इस खबर की पुष्टि करते हुए बताया कि हरियाणा राज्य से पुलिस आई थी जिन्हें कई दिनों से धोखाधड़ी मामले में कोतमा के 2 युवकों तलास थी, पुलिस तलाश करते हुए कोतमा पहुंची और दोनो अरोपियों गिरफ्तार कर अपने  साथ ले गए।

प्रकरण का निराकरण नही करने पर मत्स्य विभाग पर कलेक्टर ने लगाया 5 हजार का जुर्माना


अनूपपुर

जिला स्तरीय जनसुनवाई कार्यक्रम मंगलवार को कलेक्ट्रेट स्थित नर्मदा सभागार में आयोजित किया गया। कलेक्टर हर्षल पंचोली ने 41 आवेदनों पर जनसुनवाई करते हुए संबंधित विभागों के अधिकारियों को निराकरण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी जनसुनवाई में प्राप्त शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए समस्याओं को प्राथमिकता में रखते हुए निराकरण समय-सीमा में करना सुनिश्चित करें। जनसुनवाई में अपर कलेक्टर एवं विभिन्न विभागों के जिला अधिकारीगणों ने भी आवेदकों की समस्याएं सुनी। 

जनसुनवाई में विकासखण्ड जैतहरी के ग्राम अचलपुर निवासी आवेदक गुलजारी लाल माझी शासकीय तालाब में मत्स्य पालन हेतु पट्टा दिलाए जाने के संबंध में शिकायत लेकर कलेक्टर के समक्ष प्रस्तुत हुए। कलेक्टर ने आवेदक की शिकायत को तत्काल संज्ञान में लेते हुए शासकीय कार्य में लापरवाही बरतने पर मछुआ कल्याण तथा मत्स्य विकास विभाग पर 5 हजार रुपये की शास्ति अधिरोपित कर शास्ति की राशि प्रतिकर के रूप में संबंधित आवेदक को उपलब्ध कराया।      

जनसुनवाई में वार्ड नं. 08 कोतमा निवासी मुन्नी बाई केवट ने अनुकम्पा नियुक्ति दिलाए जाने, तहसील अनूपपुर के ग्राम पिपरिया निवासी गिरजा प्रसाद पटेल ने भूमि के नक्शे में सुधार कराए जाने तथा अन्य आवेदकों ने भूमि का सीमांकन एवं बटांकन कराए जाने, समग्र आईडी में सुधार कराए जाने, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना व प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाए जाने आदि के संबंध में आवेदन दिए।

कृषि उपज मंडी में 7 वर्षों से चौकीदार-चपरासी के पद खाली, अव्यवस्था और असुरक्षा से किसान परेशान


अनूपपुर

कृषि प्रधान क्षेत्र की कृषि उपज मंडी में पिछले 7 वर्षों से चौकीदार एवं चपरासी के पद खाली पड़े होने के कारण मंडी परिसर में अव्यवस्था, गंदगी और सुरक्षा संकट लगातार बढ़ता जा रहा है। किसानों का कहना है कि मंडी कार्यालय एवं प्रांगण की देखरेख के लिए आवश्यक कर्मचारी न होने से स्थिति दिनों-दिन बिगड़ती जा रही है।

जानकारी के अनुसार, कृषि उपज मंडी कार्यालय में लंबे समय से चौकीदार और चपरासी नियुक्त न होने के कारण न तो परिसर की नियमित सफाई हो पा रही है और न ही कार्यालय में आवश्यक कार्य समय पर पूरे हो पा रहे हैं। मंडी के चारों ओर गंदगी का ढेर दिखाई देता है, जिससे आने-जाने वाले किसानों व व्यापारियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय किसानों ने बताया कि कृषि उपज मंडी लगभग 5 एकड़ भूमि पर फैली हुई है, जिसमें करोड़ों रुपए की संपत्ति दर्ज है। इसके बावजूद इतने बड़े परिसर की सुरक्षा के लिए आज तक एक भी चौकीदार की नियुक्ति नहीं की गई है। किसानों का कहना है कि यह लापरवाही किसी बड़ी घटना को जन्म दे सकती है, परंतु प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

किसानों ने अधिकारियों को अवगत कराया कि 7 वर्षों से मंडी में न तो चपरासी का पद भरा गया और न ही चौकीदार का। इसके चलते मंडी प्रांगण में आने वाले किसानों को मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहना पड़ता है। वहीं, सुरक्षा प्रबंध न होने के कारण किसान असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

किसान प्रतिनिधियों ने मांग की है कि शीघ्र ही कृषि उपज मंडी में चौकीदार एवं चपरासी के पदों पर नियुक्ति की जाए, ताकि मंडी व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित हो सके और किसानों को सुरक्षित व स्वच्छ वातावरण मिल सके।

“बोनफिस” का ज़हर, युवाओं के भविष्य पर मंडरा रहा खतरा, पुस्तक भंडार से चल रहा नशे का कारोबार


अनूपपुर

जिले के भालूमाड़ा क्षेत्र में युवाओं के बीच एक नए और खतरनाक नशे “बोनफिस सॉल्यूशन” की लत तेजी से फैल रही है। शाम ढलते ही क्लबों के पीछे जुटने वाले युवा इस नशे को कपड़ों में डालकर सूंघते हैं और धीरे-धीरे नशे की गिरफ्त में फंसते जा रहे हैं। प्रशासन और समाजसेवी संगठनों की चुप्पी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।

सूत्रों के अनुसार, भालूमाड़ा के एक पुस्तक भंडार में “बोनफिस सॉल्यूशन” की खाली ट्यूबें खुलकर बेची जा रही हैं। अधिक मुनाफे के लालच में संचालक बिना रोक-टोक युवाओं को यह खतरनाक सामग्री उपलब्ध करा रहे हैं। प्रतिदिन बड़ी संख्या में सॉल्यूशन की ट्यूबें बिक रही हैं, जिन्हें क्लब के पीछे जाकर नशा करने के लिए उपयोग किया जा रहा है।

क्लब के पीछे की जगह अब नशेड़ियों का ठिकाना बन चुकी है। फटे पैकेट, कपड़ों के टुकड़े और सॉल्यूशन की खाली ट्यूबें जगह-जगह बिखरी रहती हैं, जो वहां हो रही गतिविधियों की सच्चाई बयान करती हैं। स्थानीय लोगों ने कई बार प्रशासन को शिकायत की, लेकिन न तो पुलिस द्वारा कोई सख्त कार्रवाई की गई और न ही सामाजिक संगठनों ने कोई ठोस पहल की। स्थानीय लोगों ने सोशल मीडिया पर इस घटना को खूब वायरल कर रहा है।

डॉक्टरों के अनुसार, “बोनफिस सॉल्यूशन” सूंघना दिमाग, फेफड़ों और मानसिक संतुलन पर गहरा दुष्प्रभाव डालता है। लगातार सेवन से याददाश्त कमजोर होने के साथ जान तक जाने का खतरा रहता है।क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि हैं कि पुस्तक भंडार की सीसीटीवी फुटेज जब्त कर जांच की जाए। क्लब क्षेत्र में पुलिस गश्त बढ़ाई जाए। नशा मुक्ति अभियान चलाकर युवाओं को जागरूक किया जाए। भालूमाड़ा की गलियों में “बोनफिस सॉल्यूशन” युवाओं के सपनों को निगल रहा है। यदि समय रहते कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो यह नशा पूरे क्षेत्र की युवा पीढ़ी को बर्बादी की ओर धकेल देगा।

एसआईआर कार्य से पढ़ाई हों रहा प्रभावित, 3 माह बाद वार्षिक परीक्षा होगी शुरू


अनूपपुर

शासकीय विद्यालयों के शिक्षकों को इन दिनों एसआईआर (Social Impact Report / सर्वे आधारित कार्य) में व्यस्त रखा जा रहा है, जिसके कारण विद्यालयों में नियमित शिक्षण कार्य गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है। उल्लेखनीय है कि मात्र दो माह बाद वार्षिक परीक्षाएँ आयोजित की जानी हैं, परंतु पढ़ाई के अभाव में छात्र–छात्राओं का कोर्स पूरा नहीं हो पा रहा है।

जानकारी के अनुसार पिछले कई दिनों से सभी सरकारी शिक्षकों को विभिन्न प्रशासनिक एवं सर्वेक्षण कार्यों में लगाया गया है। परिणामस्वरूप विद्यालयों में बच्चों की कक्षाएँ नियमित रूप से संचालित नहीं हो पा रही हैं। इससे अभिभावकों में चिंता का माहौल है, क्योंकि वार्षिक परीक्षा निकट है और छात्रों की तैयारी अधूरी है।अभिभावकों का कहना है कि “विद्यालयों में पढ़ाई बंद जैसी स्थिति है, जबकि परीक्षा सिर पर है। सरकार को एसआईआर जैसे कार्यों के लिए अलग व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि बच्चों की शिक्षा प्रभावित न हो।”

इधर शिक्षकों का भी कहना है कि वे शिक्षा कार्य को प्राथमिकता देना चाहते हैं, लेकिन अत्यधिक अतिरिक्त कार्यभार के कारण समय निकालना संभव नहीं हो पा रहा है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मामले पर विचार किया जा रहा है और जल्द ही उचित व्यवस्था कर पढ़ाई सुचारू करवाई जाएगी। फिलहाल विद्यार्थियों और अभिभावकों को वार्षिक परीक्षा को लेकर बड़ी चिंता का सामना करना पड़ रहा है।

खेत तालाब निर्माण में श्रेष्ठ कार्य करने पर मिला प्रदेश स्तरीय प्रथम पुरस्कार

*जिला सीईओ, जनपद सीईओ, ईई व सहायक यंत्री सम्मानित*


अनूपपुर

जल गंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत खेत तालाब निर्माण में प्रदेश में श्रेष्ठ कार्य करने वाले जिले एवं जनपद श्रेणी में अनूपपुर जिले तथा जिले की पुष्पराजगढ़ जनपद ने प्रदेश में प्रथम स्थान अर्जित कर उपलब्धि हासिल की है। यह उपलब्धि प्रदेश में चार या कम जनपद वाले जिलों में प्रथम तथा इसी तरह 70 या उससे कम ग्राम पंचायत वाली जनपद श्रेणी में जनपद पंचायत पुष्पराजगढ़ को प्रथम पुरस्कार के लिए चयनित होने पर यह सम्मान प्राप्त हुआ है। इस उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए मध्यप्रदेश शासन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा प्रदेश स्तरीय सम्मान समारोह कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर भोपाल में आयोजित किया गया। 

प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल ने पुरस्कार समारोह में प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर अनूपपुर जिला पंचायत के तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी तथा वर्तमान अपर आयुक्त नगर निगम भोपाल तन्मय वशिष्ठ शर्मा, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा अनूपपुर संभाग के कार्यपालन यंत्री अमर साय तथा प्रदेश स्तर पर प्रथम स्थान अर्जित करने वाली जनपद पंचायत पुष्पराजगढ़ के मुख्य कार्यपालन अधिकारी गणेश पाण्डेय व सहायक यंत्री प्रवेश गौतम को पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया है।  

जल गंगा संवर्धन अभियान अवधि में जिलों द्वारा लक्ष्य के विरुद्ध उपलब्धि के आधार पर जिलों की रैंकिंग नियमित रूप से ऑनलाइन डैशबोर्ड के माध्यम से 30 जून 2025 अभियान समापन के आधार पर पुरस्कारों का चयन किया गया। कलेक्टर हर्षल पंचोली ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की टीम को इस उपलब्धि के लिए बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा है कि भविष्य में भी ग्रामीण विकास की योजनाओं में टीम श्रेष्ठ प्रदर्शन कर उपलब्धि हासिल करेगी।

केंद्रीय प्रभारी हरीश चौधरी ने जाना वरिष्ठ नेता प्रेम कुमार त्रिपाठी का हाल, संगठन मज़बूती पर बनी रणनीति


अनूपपुर

मध्यप्रदेश कांग्रेस के केंद्रीय प्रभारी हरीश चौधरी ने अपने अनूपपुर प्रवास के दौरान वरिष्ठ कांग्रेसी नेता, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष एवं पूर्व प्रदेश सचिव पंडित प्रेम कुमार त्रिपाठी से उनके नगर स्थित निवास पर भेंट कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। हरीश चौधरी का यह सौजन्य मुलाक़ात केवल कुशलक्षेम पूछने तक सीमित नहीं रही बल्कि जिले में कांग्रेस संगठन को नए सिरे से और अधिक मज़बूत बनाने को लेकर हुई महत्वपूर्ण राजनीतिक चर्चा इसका मुख्य केंद्र रही।

इस दौरान हरीश चौधरी ने त्रिपाठी


से कांग्रेस की वर्तमान परिस्थितियों, संगठन की स्थानीय वास्तविकताओं तथा आगामी दिनों की रणनीतियों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया। बैठक में जिला कांग्रेस अध्यक्ष श्याम गुड्डू चौहान, पुष्पराजगढ़ विधायक फुंदेलाल सिंह मार्को, कोतमा के पूर्व विधायक सुनील सराफ, पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष रमेश सिंह, पिछड़ा वर्ग के जिला अध्यक्ष राजन राठौड़ तथा वार्ड क्रमांक 3 के पार्षद रियाज़ अहमद भी उपस्थित रहे।

केंद्रीय प्रभारी हरीश चौधरी का स्वागत कांग्रेस नेता आशीष त्रिपाठी एवं उनकी पुत्र वधू वार्ड क्रमांक 7 की पार्षद डॉ. प्रवीण आशीष त्रिपाठी ने तिलक लगाकर किया। त्रिपाठी परिवार ने हरीश चौधरी के संघर्षों एवं प्रयासों को सफल परिणति मिलने हेतु ईश्वर से प्रार्थना भी की। चर्चा के दौरान कांग्रेस नेताओं ने पंडित त्रिपाठी जी से मार्गदर्शन प्राप्त करते हुए जिले में संगठन को सुदृढ़ बनाने के लिए एकजुट होकर कार्य करने का संकल्प व्यक्त किया। हरीश चौधरी ने भी त्रिपाठी जी से जिला कांग्रेस कमेटी को समय-समय पर दिशा-निर्देश प्रदान करते रहने का अनुरोध किया।

करोड़ों मज़दूरों-कर्मचारियों पर क़हर बरपाने वाले 04 खतरनाक लेबर कोड को मोदी सरकार ने किया लागू

*मज़दूर वर्ग को ग़ुलामी जैसे हालात में काम करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा*


अनूपपुर

भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी मध्य प्रदेश के सहायक सचिव कामरेड विजेंद्र सोनी एडवोकेट ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि देश के करोड़ों मेहनतकशों की बदहाल ज़िन्दगी को और भी तबाह करने वाले चार ख़तरनाक क़ानून यानी चार लेबर कोड को बीते 21 नवम्बर को मोदी सरकार सरकार ने लागू कर दिया है। इन चार लेबर कोड के लागू होने के बाद मज़दूरों के बचे-खुचे अधिकारों को भी छीन लिया गया है, जिन्हें लम्बे  संघर्ष के बाद हासिल किया गया था, ताकि पूँजीपति वर्ग मनमाने तरीक़े से मज़दूरों की हड्डी-हड्डी निचोड़ सकें। यही कारण है कि चुनाव में हज़ारों-करोड़ का ख़र्च उठा कर अम्बानी-अडानी आदि ने मोदी को तीसरी बार सत्ता में पहुँचाया है ताकि मुनाफ़े के रास्ते में आने वाले हर रूकावट को पूरी तरह से हटाया जा सके और मोदी सरकार इस काम को बखूबी अंजाम दे रही है। ज्ञात हो कि मोदी सरकार ने 2019 और सितम्बर 2020 में ही इन क़ानूनों को संसद में पारित किया था, जब जनता कोरोना और मोदी सरकार द्वारा अनियोजित रूप से थोपे गये लॉकडाउन की मार झेल रही थी। संसद में पारित होने के बाद से ही मोदी सरकार इसे लागू करने के लिए उतावली थी, जिससे देश में 60 करोड़ मज़दूरों-मेहनतकशों की लूट को बेहिसाब बढ़ाया जा सके, उनके यूनियन बनाने के अधिकार यानी उनके सामूहिक मोलभाव की क्षमता को कमज़ोर कर सके और उनके संघर्ष को कुचला जा सके। मोदी सरकार के इस क़ानून को लागू करने के लिए तमाम राज्य सरकारों की भी सहमति है। गुजरात, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों में चार लेबर कोड को लागू करने के प्रयोग पहले ही किये जा चुके हैं, जहाँ श्रम क़ानूनों को निष्प्रभावी बनाया जा चुका है। 

ये चार लेबर कोड हैं: मज़दूरी संहिता, व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यस्थल स्थिति संहिता, सामाजिक सुरक्षा व पेशागत सुरक्षा संहिता, औद्योगिक सम्बन्ध संहिता। पहली, 'मज़दूरी श्रम संहिता' के अनुसार मालिक को मज़दूर को न्यूनतम मज़दूरी देने से बचने के तमाम रास्ते दिये गये हैं। यह 8 घण्टे से ज़्यादा काम करवाने के क़ानूनी रास्ते खोलती है और वह भी ओवरटाइम मज़दूरी के भुगतान के बिना। 

दूसरी, 'व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यस्थल स्थिति संहिता’ में तो असंगठित मज़दूरों को कोई जगह ही नहीं दी गयी है। केवल 10 से ज़्यादा मज़दूरों को काम पर रखने वाले कारख़ानों पर ही यह लागू होगा, यानी मज़दूरों की बहुत बड़ी आबादी इस क़ानून के दायरे से बाहर होगी। ये संहिताएँ मालिकों को इस बात का मौक़ा देती हैं कि वह अपने मज़दूरों को मानवीय कार्यस्थितियाँ मुहैया न कराये।

तीसरी, 'सामाजिक सुरक्षा व पेशागत सुरक्षा संहिता' के अनुसार ईएसआई, पीएफ़, ग्रैच्युटी, पेंशन, मातृत्व लाभ व अन्य सभी लाभ मज़दूरों को बाध्यताकारी तौर पर देना सरकार व मालिकों की ज़िम्मेदारी नहीं होगी बल्कि यह केन्द्रीय सरकार व राज्य सरकारों द्वारा जारी किये जाने वाले नोटिफिकेशनों पर निर्भर करेगा। 

चौथी, 'औद्योगिक सम्बन्ध संहिता' ने रोज़गार की सुरक्षा के प्रति मालिक की सारी क़ानूनी ज़िम्मेदारी को ख़त्म करने का रास्ता खोल दिया है; जब चाहे मज़दूरों को काम पर रखो और जब चाहे उन्हें निकाल बाहर करो! साथ ही जिन कारख़ानों में 300 तक मज़दूर हैं, उन्हें लेऑफ़ या छँटनी करने के लिए सरकार की इजाज़त लेने की अब ज़रूरत नहीं होगी (पहले यह संख्या 100 थी)। मैनेजमेंट को 60 दिन का नोटिस दिये बिना मज़दूर हड़ताल पर नहीं जा सकते हैं। ठेका प्रथा को पूरी तरह से क़ानूनी जामा पहना दिया गया है। 

कुल मिलाकर कहें तो, इन श्रम संहिताओं के लागू होने के बाद मज़दूर वर्ग को ग़ुलामी जैसे हालात में काम करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। 90 फ़ीसदी अनौपचारिक मज़दूरों के जीवन व काम के हालात अब और नारकीय हो जायेंगे। पुराने श्रम क़ानून लागू नहीं किये जाते थे, लेकिन कहीं पर अनौपचारिक व औपचारिक, संगठित व असंगठित दोनों ही प्रकार के मज़दूर अगर संगठित होते थे, तो वे लेबर कोर्ट का रुख़ करते थे और कुछ मसलों में आन्दोलन की शक्ति के आधार पर क़ानूनी लड़ाई जीत भी लेते थे। लेकिन अब वे क़ानून ही समाप्त हो चुके हैं और नयी श्रम संहिताओं में वे अधिकार मज़दूरों को हासिल ही नहीं हैं, जो पहले औपचारिक तौर पर हासिल थे। इन चार श्रम संहिताओं का अर्थ है मालिकों और कॉरपोरेट घरानों यानी बड़े पूँजीपति वर्ग को मज़दूरों का भयंकर शोषण करने की खुली छूट देना। मालिकों का वर्ग इस बात के लिये अब पूरी तरह आज़ाद होगा कि वह मज़दूरों को बिना जीवनयापन योग्य मज़दूरी दिये, सामाजिक सुरक्षा और गरिमामय कार्यस्थितियाँ दिये बग़ैर ही काम कराए।

नरेन्द्र मोदी ने सत्ता में आते ही “कारोबार की आसानी” के नाम पर पूँजीपतियों को मज़दूरों की श्रम-शक्ति लूटने की खुली छूट देने का ऐलान कर दिया था ताकि आर्थिक मन्दी की मार से कराहते पूँजीपति वर्ग के मुनाफ़े को बचाया जा सके। कहने के लिए तो श्रम क़ानूनों को "तर्कसंगत और सरल" बनाने के लिए ऐसा किया जा रहा है लेकिन इसका एक ही मक़सद है, देशी-विदेशी कम्पनियों के लिए मज़दूरों के श्रम को सस्ती से सस्ती दरों पर और मनमानी शर्तों पर निचोड़ना व उनके शोषण को आसान बनाना। 

कम रेट विजेंद्र सोनी एडवोकेट ने आगे कहा है कि मजदूरों को अपने हितों की रक्षा के लिए संघर्ष के लिए तैयार रहना चाहिए  और मोदी सरकार को इन श्रम संहिताओं को वापस लेने के लिए मजबूर करने के लिए  राजनीतिक पहल के लिए राजनीतिक आन्दोलन को मजबूत करने के लिए अपनी भूमिका को तय करना चाहिए, आज ज़रूरत है के मज़दूर ख़ुद  इस काले क़ानून के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाएं और सरकार पर यह दवाब डालें कि वह मज़दूर वर्ग पर किये गये इस फ़ासीवादी हमले  को बंद करे।

मजदूरों को अपनी ताक़त पर भरोसा करना होगा और इस बात को भी समझना होगा कि ये हालात हमें एक मौक़ा दे रहे हैं कि हम अपनी स्वतन्त्र चेतना के साथ मजदूर विरोधी सत्ता के खिलाफ एक राजनीतिक आन्दोलन संगठित करें।

हितग्राहियों को दिया जा रहा है मिलावटी राशन


अनूपपुर

जिले के कोतमा जनपद पंचायत कोतमा के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत बेलगांव में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के आरोप सामने आए हैं। ग्राम के हितग्राहियों, जिनमें सरोज यादव ने राशन डीलर (कोटेदार) पर चावल में नमक मिलाकर घोटाला करने का आरोप लगाया है।

मुख्य आरोप हितग्राहियों का कहना है कि 20 किलो के राशन में से 2 किलो तक नमक निकल रहा है राशन डीलर द्वारा चावल के साथ मिलावट करके हितग्राहियों को उनका राशन दिया जा रहा है। 

सरोज यादव के साथ-साथ गांव के कई अन्य लाभार्थियों ने इस अनियमितता की आवाज उठाई है, उनका कहना है कि लंबे समय से ऐसे ही चल रहा है, लेकिन विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के कारण कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

पॉवर प्लांट में टेंडर प्रक्रिया में जमकर भर्रेसाही, ठेकेदार को पहुँचाया जा रहा है फायदा


अनूपपुर

जिले के अमरकंटक ताप विद्युत गृह के द्वारा ऑर्डर 2 करोड़ 45 लाख का एवं दूसरा आर्डर 997 का 59 लाख का कार्य एमके ट्रेडर्स को मिला था, जिसका उन्होंने एग्रीमेंट नहीं किया और ठेकेदार काम नहीं चालू किया, जिस पर पावर प्लांट के द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की। अनूपपुर जिले की चचाई की फर्म एमके ट्रेडर्स को दो कार्य अवॉर्ड हुए थे। तीसरा टेंडर लोको पायलट का टेंडर नंबर 416423 के लिए दूसरे ठेकेदारों ने भी भरा था, जिसमें दो ठेकेदार का काम रिजेक्ट करके एमके ट्रेडर्स को मुख्य अभियंता द्वारा जबलपुर रिकमेंड किया गया है, जबकि यह कार्य पूर्व में एम्स कंपनी को अवार्डेड था और उसने कार्य भी किया था। बिना किसी कारण के इनका कार्य रिजेक्ट करके एमके ट्रेडर्स को फायदा पहुंचाने के लिए इनका कार्य दिया जा रहा है, जबकि उपरोक्त टेंडर नंबर 538 एवं 957 के तहत 3 करोड़ के काम एमके ट्रेडर्स को लोएस्ट के रूप में दिए गए थे, जिसे उसने कार्य चालू नहीं किया एवं मंडल द्वारा इस पर कोई कार्रवाई नहीं करके लोको पायलट टेंडर क्रमांक 416423 को को रिकमेंड कर दिया गया एवं जबलपुर भेजा जा रहा है एवं उनके सपोर्ट के दोनों टेंडर को रिजेक्ट करके सिंगल टेंडर पास किया गया है जबकि दो टेंडर अवार्ड होने के बाद भी ठेकेदार द्वारा एमके ट्रेडर्स जिसने कार्य चालू नहीं किया, उन पर ब्लैक लिस्ट या एमडी फॉर फिट की कार्रवाई होनी चाहिए थी, क्या कारण है नियम विरोध कार्यवाही करके एमके ट्रेडर्स का सपोर्ट किया जा रहा है। जिस प्रकार से भरेशाही का इन दोनों पावर प्लांट चचाई में बना हुआ है और मुख्य अभियंता सहित उनके अधीनस्थ अधिकारियों द्वारा भी मनमानी तरीके से कार्य कराया जा रहा है, इसकी जांच कराई जाने की आवश्यकता है। और दोषी पाए जाने पर अधिकारियों एवं संबंधित ठेकेदार को भी नियम के अनुसार कार्यवाही किए जाने की आवश्यकता है।

अवैध कारोबार में थाना प्रभारी व राज्यमंत्री पर ‘कथित संरक्षण’ की चर्चाएँ तेज, निष्पक्ष जांच की मांग हुई उग्र

*कोतमा में बढ़ते अवैध कारोबार से आम जनता परेशान*


कोतमा/अनूपपुर। 

जिले के कोतमा नगर इस समय अवैध कारोबारों की तेजी से बढ़ती सक्रियता, प्रशासन की कथित निष्क्रियता और राजनीतिक हस्तक्षेप की चर्चाओं के कारण भारी उथल-पुथल के माहौल से गुजर रहा है। नगर में अवैध खनन, जुआ-सट्टा संचालन, शराब की अवैध बिक्री, तस्करी और विभिन्न संदिग्ध गतिविधियों में जिस तरह वृद्धि देखी गई है, उसने नागरिकों में भय, असुरक्षा और असंतोष को चरम पर पहुँचा दिया है। कई नागरिकों का कहना है कि लगातार शिकायतों के बावजूद जमीन पर किसी बड़े बदलाव का न दिखना गंभीर सवाल खड़े करता है।

अवैध खनन का सामान ले जाने वाले ट्रकों की गतिविधियाँ, गुप्त जुआ-सट्टा अड्डों की सक्रियता और शराब की अवैध बिक्री जैसी घटनाएँ लगातार सामने आ रही हैं। इन गतिविधियों के चलते लोगों में यह धारणा बनी है कि इन अवैध नेटवर्कों को किसी न किसी स्तर पर मजबूत संरक्षण प्राप्त है, क्योंकि इतने खुले रूप में गैरकानूनी गतिविधियाँ सामान्य परिस्थितियों में संभव नहीं होतीं।

नगर में यह चर्चाएँ भी तेज हैं कि इन अवैध कारोबारों के संचालन में स्थानीय थाना प्रभारी और क्षेत्र के राज्यमंत्री दिलीप जायसवाल की कथित सहमति या संभावित मौन समर्थन की बातें नागरिकों और सामाजिक संगठनों की चर्चाओं में बार-बार सामने आ रही हैं। हालांकि इन आरोपों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है, और न ही कोई प्रमाण सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत हुआ है, लेकिन नगर में इन चर्चाओं ने अविश्वास और तनाव के वातावरण को और गहरा कर दिया है।सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि अवैध गतिविधियों पर सच में कार्रवाई होती, तो अवैध कारोबारी इतने निडर होकर अपनी गतिविधियाँ नहीं चला पाते। कहीं न कहीं कोई शक्तिशाली संरक्षण मौजूद है।

प्रशासन पर बढ़ते दबाव को देखते हुए विभिन्न सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों, युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर इस पूरे मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग को दोहराया है। उधर पुलिस विभाग का कहना है कि क्षेत्र में लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं और अवैध गतिविधियों में शामिल पाए गए लोगों पर कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने दावा किया है कि पिछले दिनों कई छापेमार कार्रवाइयाँ की गईं और कई व्यक्तियों पर मामले दर्ज भी किए गए। 

राज्यमंत्री दिलीप जायसवाल के कार्यालय ने इस मामले पर जारी बयान में आरोपों को पूरी तरह निराधार, झूठा और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है। उनका कहना है कि मंत्री स्वयं कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने के पक्षधर हैं और किसी भी अवैध गतिविधि या उसके संचालन का समर्थन नहीं करते। 

*इनका कहना है।

इन सभी अवैध कारोबार पर रोक लगाइए जाएगी।

*रत्नाबर शुक्ला, थाना प्रभारी, कोतमा*

 जज के घर पर पत्थरबाजी, व जान से मारने की धमकी के बाद हाईकोर्ट ने पुलिस प्रशासन को किया तलब

*4 दिसंबर को होगी अगली सुनवाई*


अनूपपुर

अनूपपुर में प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट अमनदीप सिंह छाबड़ा के सरकारी आवास पर हुए हमले ने प्रदेश की न्यायिक सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गम्भीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जमानत आवेदन निरस्त करने के बाद हुए इस हमले को जबलपुर हाईकोर्ट ने अत्यंत गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार, पुलिस व प्रशासन से विस्तृत जवाब तलब किया है। हाईकोर्ट ने पुलिस-प्रशासन से तलब किया जवाब, 4 दिसंबर अगली सुनवाई होंगी।

चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ के समक्ष न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा से संबंधित संज्ञान याचिका पर सुनवाई के दौरान बताया गया कि हाल ही में न्यायाधीशों के साथ कई आपराधिक घटनाएँ हुई हैं। अनूपपुर की घटना का उल्लेख करते हुए अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायाधीशों के निर्णयों से असंतुष्ट होकर उन पर हमला करना न्याय व्यवस्था पर हमला है, जिसे किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

उप महाधिवक्ता ने अदालत को बताया कि संबंधित पुलिस अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही उन्होंने सरकार से आवश्यक दिशा-निर्देश प्राप्त करने के लिए समय मांगा, जिसे अदालत ने स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई 4 दिसंबर निर्धारित की है।

हाईकोर्ट को बताया गया कि इससे पहले भी न्यायाधीशों पर हमले और चोरी की घटनाएँ हो चुकी हैं। इस घटना पर हाईकोर्ट ने तत्कालीन रजिस्ट्रार जनरल मनोहर ममतानी से जाँच करवाई थी और रिपोर्ट के आधार पर न्यायाधीशों की सुरक्षा पर जनहित याचिका की सुनवाई शुरू करने के निर्देश दिए थे। हाईकोर्ट के पूर्व निर्देश फिर केंद्र में हाईकोर्ट ने पहले भी प्रदेश सरकार को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए थे, कोर्ट परिसरों के चारों ओर पर्याप्त ऊँचाई की बाउंड्री वॉल, परिसरों में पुलिस चौकियां, और जजों के आवासीय क्षेत्रों में मजबूत सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के आदेश। जबलपुर हाईकोर्ट ने साफ संकेत दिए हैं कि न्यायाधीशों और उनके परिवारों की सुरक्षा से किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। अनूपपुर प्रकरण पर साझा की गई जानकारी को रिकॉर्ड पर लेते हुए अदालत ने कहा कि सरकार को अब ठोस और व्यापक कार्रवाई की दिशा में जवाब देना होगा।

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