भवन आलीशान  लेकिन डॉक्टर नहीं, बेलिया बड़ी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खुद 'बीमार',  ग्रामीण परेशान

*झाड़ियों से घिरा स्वास्थ्य केंद्र, 


अनूपपुर

ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के सरकारी दावों के बीच कोतमा विधानसभा के बेलिया बड़ी स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की हकीकत कुछ और ही तस्वीर बयां कर रही है। भवन तो तैयार है, लेकिन वर्षों से नियमित डॉक्टर की उपलब्धता नहीं होने और स्टाफ की कमी के कारण हजारों ग्रामीणों को इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है।

बेलिया‌ बड़ी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र  से लेदरा, पकरिहा, राजाकछार सहित आसपास के 8 से 10 गांवों की करीब 10 से 15 हजार आबादी निर्भर है। यह क्षेत्र आदिवासी बहुल और दूरस्थ होने के कारण यहां प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की अहम भूमिका है, लेकिन डॉक्टर के अभाव में मरीजों को मामूली इलाज के बाद भी कोतमा या जिला अस्पताल रेफर किया जाता है।

ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र में डॉ. गणेश प्रजापति पदस्थ हैं, लेकिन उन्हें लंबे समय से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोतमा में अटैच कर दिया गया है। इसके चलते बेलिया बड़ी अस्पताल डॉक्टर विहीन हो गया है। , जिससे मरीजों को प्राथमिक उपचार तक के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है।

अस्पताल परिसर में बड़ी-बड़ी झाड़ियां और खरपतवार उग आए हैं। साफ-सफाई और रखरखाव के अभाव में परिसर में जहरीले जीव-जंतुओं और मच्छरों का खतरा बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति लंबे समय से बदहाल है, लेकिन जिम्मेदार विभाग ध्यान नहीं दे रहा।

एक ओर शासन बड़े अस्पतालों के निर्माण और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की घोषणाएं कर रहा है, वहीं दूसरी ओर बेलिया बड़ी जैसे ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र मूलभूत सुविधाओं और चिकित्सकीय स्टाफ के अभाव से जूझ रहे हैं। इससे ग्रामीणों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है। सूत्रों का कहना है कि जो स्टाफ है भी तो ना समय से आते हैं और ना समय से जाते हैं इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र किस तरह चल रही है

*क्या कहते हैं अधिकारी*

खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. के.एल. दीवान ने बताया कि डॉक्टरों की कमी के कारण वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर बेलिया बड़ी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के पदस्थ डॉक्टर को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोतमा में अटैच किया गया है। वहीं ड्रेसर के सेवानिवृत्त होने के बाद उसका पद भी वर्तमान में रिक्त है। लेकिन डॉक्टर नहीं हैं।

शिक्षा से दूर बच्चे, नौनिहालों से कराया जा रहा टीका-चंदन,  मंदिर परिसर में संदिग्ध लोगों की सक्रियता पर उठे सवाल


अनूपपुर

पवित्र नगरी अमरकंटक स्थित मां नर्मदा मंदिर परिसर, कोटितीर्थ कुंड एवं रामघाट क्षेत्र में इन दिनों एक चिंताजनक स्थिति देखने को मिल रही है। यहां मासूम बच्चों से बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के माथे पर चंदन-टीका लगवाकर उनसे राशि लेने का कार्य कराया जा रहा है। बच्चों के हाथों में चंदन के डिब्बे, ब्रश तथा 'नर्मदे हर', 'ॐ' और 'महाकाल' अंकित सांचे दिखाई देते हैं। श्रद्धालुओं को रोककर उनके माथे पर टीका लगाया जाता है और इसके बाद उनसे स्वेच्छा अथवा अपेक्षित रूप से धनराशि ली जाती है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जिन नन्हे हाथों में इस उम्र में किताबें, कॉपियां और स्कूल का बस्ता होना चाहिए, वे हाथ दिनभर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के बीच टीका-चंदन लगाने के कार्य में व्यस्त नजर आते हैं। उनका आरोप है कि कुछ अभिभावक तात्कालिक आर्थिक लाभ के लालच में बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेजने के बजाय इस कार्य में लगा देते हैं। परिणामस्वरूप उनकी शिक्षा प्रभावित हो रही है और उनका भविष्य भी संकट में पड़ता दिखाई दे रहा है।

जानकारी के अनुसार, इस कार्य से प्रतिदिन लगभग 200 से 300 रुपये तक की आय हो जाती है। इसी कारण कई बच्चे सुबह से शाम तक मंदिर परिसर में इसी गतिविधि में लगे रहते हैं। सामाजिक रूप से यह स्थिति न केवल बाल शिक्षा के अधिकार पर प्रश्नचिह्न लगाती है, बल्कि बाल संरक्षण और बाल श्रम जैसे गंभीर मुद्दों की ओर भी संकेत करती है।

स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि मंदिर परिसर में कुछ बाहरी एवं संदिग्ध व्यक्ति भी इसी प्रकार की गतिविधियों में संलिप्त हैं। इनकी पहचान, सत्यापन और उद्देश्य को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। श्रद्धालुओं की बढ़ती आवाजाही को देखते हुए यह स्थिति सुरक्षा की दृष्टि से भी चिंता का विषय मानी जा रही है।

करोड़ों का कोयला उत्पादन, बदहाल हुई सड़के बनी जानलेवा, एसईसीएल व लोक निर्माण विभाग मौन

*जनता परेशान, जनप्रतिनिधि पर उठे सवाल*


अनूपपुर

देश को ऊर्जा देने वाले कोयलांचल की तस्वीर एक बार फिर विकास के दावों की पोल खोल रही है। एसईसीएल जमुना-कोतमा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत बदरा-कुशियारा का मुख्य मार्ग पहली ही बारिश में दलदल और तालाब में तब्दील हो गया है। सड़क पर जगह-जगह जलभराव, गहरे गड्ढे और कीचड़ के कारण राहगीरों का निकलना मुश्किल हो गया है। दोपहिया वाहन चालक आए दिन फिसलकर घायल हो रहे हैं, जबकि महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग जान जोखिम में डालकर आवागमन करने को मजबूर हैं।

विडंबना यह है कि इसी क्षेत्र से वर्षों से करोड़ों रुपये का कोयला उत्पादन हो रहा है। प्रतिदिन सैकड़ों भारी वाहन इसी मार्ग से गुजरते हैं और सरकार को करोड़ों रुपये का राजस्व मिलता है, लेकिन जिस सड़क से यह संपदा निकलती है, उसकी बदहाली पर किसी का ध्यान नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह स्थिति "दिया तले अंधेरा" कहावत को पूरी तरह चरितार्थ करती है।

ग्रामीणों का आरोप है कि एसईसीएल और मोजर बेयर विद्युत उत्पादन कंपनी, जैतहरी के बीच हुए समझौते के बाद राखड़ से भरे भारी-भरकम हाईवा वाहनों की लगातार आवाजाही ने सड़क को पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया है। इसके बावजूद न तो एसईसीएल, न लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) और न ही जनप्रतिनिधियों ने सड़क की मरम्मत के लिए कोई ठोस पहल की है।

ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय विकास के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन हकीकत में करोड़ों का राजस्व देने वाला यह क्षेत्र आज मूलभूत सड़क सुविधा के लिए तरस रहा है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र सड़क का निर्माण एवं मरम्मत नहीं कराई गई तो जनआंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और संबंधित विभागों की होगी।

ग्रामीणों ने एसईसीएल के महाप्रबंधक, ग्राम पंचायत, पीडब्ल्यूडी तथा क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से तत्काल सड़क का स्थायी निर्माण कराने, जलनिकासी की समुचित व्यवस्था करने और भारी वाहनों के कारण हुई क्षति की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। उनका कहना है कि देश को ऊर्जा देने वाले इस क्षेत्र के लोगों को बदले में बदहाल सड़कें और उपेक्षा नहीं, बल्कि सुरक्षित और बेहतर बुनियादी सुविधाएं मिलनी चाहिए।

दो दिवसीय आयोजित दंगल का हुआ समापन, देश-विदेश के पहलवानों ने आजमाया दांव पेंच, रहा रोमांचक मुकाबला


अनूपपुर

जिले के कोयलांचल क्षेत्र नगर पालिका पसान के जमुना कालरी के मेन दुर्गा पंडाल में आयोजित दो दिवसीय भव्य दंगल (कुश्ती) प्रतियोगिता का शनिवार को भव्य समापन हुआ। दो दिनों तक चले इस आयोजन में देश के विभिन्न राज्यों एवं पड़ोसी देश नेपाल से आए पहलवानों ने अपने दमदार दांव-पेंच और शानदार खेल कौशल का प्रदर्शन कर हजारों दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। प्रतियोगिता का सबसे बड़ा आकर्षण महिला पहलवानों का शानदार प्रदर्शन रहा। दूसरे दिन भी महिला पहलवानों ने पुरुष पहलवानों को रोमांचक मुकाबलों में पराजित कर अपनी प्रतिभा और ताकत का लोहा मनवाया।

इस प्रतिष्ठित दंगल प्रतियोगिता में राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली तथा नेपाल से आए 7 महिला और 18 पुरुष, कुल 25 राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के पहलवानों ने भाग लिया। प्रत्येक मुकाबले में पहलवानों ने बेहतरीन तकनीक, फुर्ती और दमखम का परिचय दिया। कई मुकाबले इतने रोमांचक रहे कि अंतिम क्षण तक जीत-हार का फैसला नहीं हो पाया और निर्णायक दांव लगते ही पूरा अखाड़ा तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

प्रतियोगिता को देखने के लिए अनूपपुर जिले के आसपास के क्षेत्रों से हजारों खेल प्रेमी पहुंचे। महिलाओं, युवाओं और बच्चों की भारी भीड़ ने पूरे उत्साह के साथ मुकाबलों का आनंद लिया। आयोजन स्थल पर पूरे समय मेले जैसा माहौल बना रहा।

दो दिवसीय इस भव्य दंगल ने खेल प्रेमियों के दिलों में अपनी अलग छाप छोड़ी। विशेष रूप से महिला पहलवानों के शानदार प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया कि आज वे किसी भी चुनौती का सामना करने में पूरी तरह सक्षम हैं।

30 साल बाद साल वनों पर फिर साल बोरर का संकट, 22 हजार पेड़ प्रभावित, देहरादून का वैज्ञानिक दल करेगा जांच

*वर्ष 1995-96 में साल बोरर का आया था बड़ा प्रकोप*


अनूपपुर

मां नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक के साल वनों पर लगभग तीन दशक बाद एक बार फिर साल बोरर (हार्टवुड बोरर) का प्रकोप बढ़ने लगा है। अमरकंटक वन परिक्षेत्र में वर्ष 2026-27 के सर्वे में साल के वृक्षों में कीट का संक्रमण सामने आया है। वन विभाग के अनुसार 8,584 हेक्टेयर वन क्षेत्र के 18 कक्षों में लगभग 40 लाख साल के वृक्ष हैं, जिनमें करीब  लगभग 22 हजार वृक्ष साल बोरर से प्रभावित पाए गए हैं जिसमें अभी तक 15000 से अधिक संख्या में कीट पकड़े जा चुके है । 

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार अमरकंटक क्षेत्र में इससे पहले वर्ष 1995-96 के दौरान साल बोरर का बड़ा प्रकोप सामने आया था। शुरुआती स्तर पर संक्रमण पर नियंत्रण नहीं होने के कारण उस समय बड़ी संख्या में साल के वृक्ष संक्रमित हुए थे और प्रभावित पेड़ों को काटकर जंगल से हटाना पड़ा था। वर्तमान में संक्रमण स्थानीय स्तर पर है और विभाग इसे नियंत्रित करने के लिए विशेष अभियान चला रहा है।

साल बोरर की इल्ली पेड़ की छाल को भेदकर तने के भीतर प्रवेश करती है और सैपवुड व हार्टवुड को नुकसान पहुंचाते हुए सुरंगें बनाती है। इससे पेड़ धीरे-धीरे कमजोर होकर सूखने लगता है। मानसून के दौरान वयस्क कीट बाहर निकलकर अन्य स्वस्थ वृक्षों को संक्रमित करते हैं, जिससे इस मौसम में संक्रमण फैलने का खतरा अधिक रहता है।

वन विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में विशेष "ट्रैप ट्री ऑपरेशन" शुरू किया है। इसके तहत रस छोड़ रहे संक्रमित वृक्षों को छह से सात टुकड़ों में काटकर जंगल में ही रखा जाता है। इनसे निकलने वाली गंध से आकर्षित होकर साल बोरर कीट बड़ी संख्या में उन पर एकत्र हो जाते हैं। इसके बाद शाम से सुबह तक वनकर्मी और स्थानीय ग्रामीण इन कीटों को एकत्र कर संग्रहण केंद्र में जमा करते हैं। निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद उनका नष्टीकरण किया जाता है।

भारतीय वानिकी अनुसंधान संस्थान देहरादून से वैज्ञानिकों का दल अमरकंटक पहुंचकर प्रभावित क्षेत्रों का अध्ययन करेगा। विशेषज्ञ कीट के व्यवहार, संक्रमण के कारणों तथा प्रभावी नियंत्रण के उपायों पर वैज्ञानिक अध्ययन करेंगे, जिससे भविष्य में इसके स्थायी प्रबंधन की रणनीति तैयार की जा सके।

छत्तीसगढ़ को जोड़ने वाली कबीर चबूतरा मार्ग जर्जर, माधव सरोवर पुल भी बना हादसे का कारण, मरम्मत की उठी मांग


अनूपपुर

मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ को जोड़ने वाले अमरकंटक–कबीर चबूतरा मार्ग की बदहाल स्थिति यात्रियों और स्थानीय लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। लगातार हो रही बारिश के बीच सड़क पर जगह-जगह बने गहरे गड्ढों के कारण वाहनों का आवागमन जोखिम भरा हो गया है। प्रतिदिन इस मार्ग से गुजरने वाले पर्यटक, श्रद्धालु और स्थानीय नागरिकों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

लंबे समय से मरम्मत की बाट जोह रही है। बारिश के दौरान गड्ढों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता, जिससे दोपहिया और चारपहिया वाहनों के दुर्घटनाग्रस्त होने की आशंका बनी रहती है। यह मार्ग दो राज्यों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग होने के बावजूद इसकी दुर्दशा पर संबंधित विभाग का पर्याप्त ध्यान नहीं है।

अफरोज रोड से बांधा पुल तक सड़क की चौड़ाई भी काफी कम है। सड़क सिंगल लेन होने के कारण आमने-सामने से आने वाले दो बड़े वाहनों की क्रॉसिंग के दौरान जाम और दुर्घटना की स्थिति बन जाती है। सड़क किनारे पर्याप्त पिचिंग और सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने से बरसात के मौसम में खतरा और बढ़ गया है।

इसी मार्ग पर नर्मदा नदी के बांधा क्षेत्र स्थित माधव सरोवर पुल की स्थिति भी चिंताजनक बताई जा रही है। पुल के दोनों ओर लगी लोहे की रेलिंग क्षतिग्रस्त होकर नदी की ओर झुक गई है और कई स्थानों पर अस्थिर दिखाई दे रही है। वहीं पुल की कंक्रीट सतह टूट चुकी है तथा नीचे की मिट्टी वर्षा के कारण कटाव होने से खोखली हो गई है। ऐसे में भारी वाहनों के गुजरने पर पुल की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगो की मांग है की प्रसाशन ध्यान दे नही तो कभी भी कोई बड़ी घटना घट सकतीं हैं।

रात से सुबह तक बजता रहा बैंक का हूटर, जिम्मेदारों की नींद नहीं टूटी, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल


अनूपपुर

जिला मुख्यालय की सुरक्षा व्यवस्था पर शुक्रवार की रात उस समय बड़ा सवाल खड़ा हो गया, जब कोतवाली थाना से महज लगभग 150 मीटर की दूरी पर स्थित पंजाब नेशनल बैंक का सुरक्षा हूटर रात करीब 2:00 बजे से लगातार बजता रहा। हैरानी की बात यह रही कि घंटों तक सायरन गूंजता रहा, लेकिन न तो बैंक प्रबंधन का कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचा और न ही सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े जिम्मेदारों ने कोई तत्परता दिखाई।

लगातार बजते हूटर से आसपास के रहवासियों में दहशत का माहौल बना रहा। चोरी या किसी अन्य अप्रिय घटना की आशंका को देखते हुए स्थानीय लोगों ने स्वयं रातभर बैंक के आसपास निगरानी की। वहीं दूसरी ओर, तेज आवाज के कारण क्षेत्र के बुजुर्ग, बीमार, छोटे बच्चों वाले परिवार तथा उच्च रक्तचाप के मरीज पूरी रात सो नहीं सके।

सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब बैंक शहर के सबसे संवेदनशील क्षेत्र में स्थित है और कोतवाली की दूरी महज डेढ़ सौ मीटर है, तब भी घंटों तक बजते सुरक्षा अलार्म पर किसी की नजर क्यों नहीं पड़ी? क्या रात्रिकालीन गश्ती दल ने इस मार्ग से गुजरना भी उचित नहीं समझा, या फिर सुरक्षा व्यवस्था केवल कागजों तक ही सीमित रह गई है?

यदि यह केवल तकनीकी खराबी थी, तब भी तत्काल मौके पर पहुंचकर स्थिति स्पष्ट करना बैंक प्रबंधन और सुरक्षा एजेंसी की जिम्मेदारी थी। लेकिन यदि किसी वास्तविक आपराधिक घटना के दौरान भी यही स्थिति रहती, तो उसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते थे। यह घटना सुरक्षा तंत्र की संवेदनशीलता और जवाबदेही दोनों पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है।

जंगल मे अज्ञात लोगों ने दो ट्रक ड्राइवर को बनाया बंधक, नही हुआ मामला दर्ज, एसपी से हुई शिकायत


अनूपपुर

जिले के ग्राम पाटन, थाना जैतहरी निवासी ट्रांसपोर्टर दिग्विजय सिंह के अनुसार उनके दो हाइवा वाहन क्रमांक CG 31B 1632 (16 चक्का) एवं CG 31C 1309 (12 चक्का) जैतहरी स्थित मोजर बेयर पावर प्लांट में राखड़ परिवहन कार्य में लगे हुए थे।

दिग्विजय सिंह द्वारा पुलिस अधीक्षक अनूपपुर को दिए गए आवेदन में उल्लेख किया गया है कि 4 जुलाई 2026 की तड़के लगभग 4 बजे हरद ओसीएम से राखड़ खाली कर लौटते समय भालूमाड़ा साइडिंग जंगल के पास काले रंग की फोर व्हीलर में सवार 6 से 10 अज्ञात व्यक्तियों ने दोनों हाइवा वाहनों को रोक लिया।

आवेदन के अनुसार आरोपियों ने दोनों ड्राइवरों के साथ गाली-गलौज की, जान से मारने की धमकी दी, मोबाइल फोन एवं वाहन की चाबियां छीन लीं और उन्हें जबरन अपने वाहन में बैठाकर मनेंद्रगढ़ की ओर ले गए। बाद में ड्राइवरों को चिरमिरी क्षेत्र में छोड़ दिया गया, जबकि दोनों हाइवा वाहन अपने कब्जे में लेकर चले गए।

शिकायतकर्ता के अनुसार सुबह भोर में जब उन्होंने वाहनों की जीपीएस लोकेशन देखी तो दोनों वाहन अपने निर्धारित मार्ग पर न होकर राजनगर क्षेत्र में दिखाई दिए। ड्राइवरों से लगातार संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन मोबाइल बंद या संपर्क से बाहर मिला। बाद में ड्राइवरों ने मनेंन्द्रगढ पहुंच कर फोन मिलने पर फोन कर कथित पूरी घटना क्रम की जानकारी दी।

दिग्विजय सिंह का आरोप है कि घटना की सूचना तत्काल थाना भालूमाड़ा को दी गई, लेकिन पुलिस द्वारा अपराध दर्ज नहीं किया गया। इसके बाद उन्होंने पुलिस अधीक्षक अनूपपुर को विस्तृत शिकायत सौंपते हुए अज्ञात व्यक्तियों के विरुद्ध अपहरण, लूट एवं वाहन चोरी सहित अन्य धाराओं में आपराधिक प्रकरण दर्ज करने तथा दोनों वाहनों की बरामदगी की मांग की।

मामले में चोला मंडलम फाइनेंस कंपनी के प्रतिनिधि अमित त्रिपाठी ने थाना भालूमाड़ा में प्रस्तुत अपने लिखित जवाब में दावा किया है कि दोनों वाहन लंबे समय से ऋण की किस्तें बकाया होने के कारण कंपनी के अधिकार के तहत कब्जे में लिए गए। उन्होंने लूट, अपहरण अथवा अवैध कब्जे के आरोपों से इंकार करते हुए इसे वैधानिक रिकवरी की कार्रवाई बताया। 

मामले की गंभीरता और सामने आए दस्तावेजों को देखते हुए पुलिस अधीक्षक अनूपपुर ने पूरे प्रकरण की जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।

यातायात कार्यालय से महज़ 100 मीटर दूर उड़ रही नियमों की धज्जियाँ, नाबालिगों की बाइक चलाने पर मौन हैं विभाग


अनूपपुर

सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के पालन को लेकर लगातार जागरूकता अभियान चलाए जाने के बावजूद जिला मुख्यालय स्थित अशासकीय भारत ज्योति उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के बाहर एक गंभीर स्थिति देखने को मिल रही है। विद्यालय, जो यातायात विभाग कार्यालय से लगभग 100 मीटर की दूरी पर संचालित है, वहां प्रतिदिन अनेक छात्र-छात्राएं बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस के बुलेट, मोटरसाइकिल और स्कूटर जैसे दोपहिया वाहनों से विद्यालय पहुंच रहे हैं।

विद्यालय के प्राचार्य अलेक्जेंडर ने इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट व्यवस्था लागू की है कि केवल वही वाहन विद्यालय परिसर की पार्किंग में प्रवेश करेंगे, जिनके चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस होगा तथा जो यातायात नियमों का पालन करेंगे। बिना लाइसेंस वाहन चलाकर आने वाले विद्यार्थियों के दोपहिया वाहनों को विद्यालय की बाउंड्री वॉल के बाहर ही खड़ा कराया जाता है। यह कदम विद्यालय प्रशासन की जिम्मेदार और अनुशासित सोच को दर्शाता है।

हालांकि प्रश्न यह उठता है कि जब प्रतिदिन बिना लाइसेंस चलने वाले वाहनों की जानकारी खुले तौर पर सामने है और यह स्थान स्वयं यातायात विभाग कार्यालय के बेहद निकट है, तब भी विभाग द्वारा न तो चालानी कार्रवाई की जा रही है, न वाहन जब्त किए जा रहे हैं और न ही मोटर वाहन अधिनियम के तहत वाहन स्वामियों अथवा अभिभावकों के विरुद्ध कोई प्रभावी कार्रवाई की जा रही है।

जनहित में अपेक्षा है कि यातायात विभाग इस मामले का तत्काल संज्ञान लेकर विद्यालय के बाहर नियमित जांच अभियान चलाए, बिना लाइसेंस वाहन चला रहे विद्यार्थियों एवं संबंधित वाहन स्वामियों के विरुद्ध मोटर वाहन अधिनियम के अनुसार कार्रवाई करे तथा अभिभावकों को भी जागरूक बनाए, ताकि सड़क सुरक्षा के नियम केवल कागजों तक सीमित न रह जाएं, बल्कि धरातल पर भी प्रभावी रूप से लागू हों।

नर्मदा मंदिर ट्रस्ट पर जवाबदेही का संकट, विधायक का बड़ा हमला, रिकॉर्ड जनता व पत्रकारों के सामने रखे ट्रस्ट

*प्रशासन और ट्रस्ट पर बढ़ा पारदर्शिता का दबाव*


अनूपपुर

अमरकंटक स्थित मां नर्मदा मंदिर ट्रस्ट एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। ट्रस्ट की आय-व्यय, करोड़ों रुपये के चढ़ावे और संपत्तियों का सार्वजनिक लेखा-जोखा मांगने वाले पुष्पराजगढ़ विधायक फुंदेलाल सिंह मार्को ने अब प्रस्तावित ट्रस्ट बैठक को लेकर नया  मोर्चा खोल दिया है। 

मां नर्मदा करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र हैं और इसी आस्था के संरक्षण की जिम्मेदारी मां नर्मदा मंदिर ट्रस्ट पर है।  विधायक फुंदेलाल सिंह मार्को ने ट्रस्ट की वर्षों की आय-व्यय, सोना-चांदी, चल-अचल संपत्तियों और विकास कार्यों का सार्वजनिक विवरण मांगकर बहस को नया आयाम दे दिया है। अब बैठक की तिथि बदलने की मांग और वीडियो संदेश में रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की अपील ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। सवाल यह नहीं कि बैठक कब होगी, बल्कि यह है कि क्या ट्रस्ट जनता के सामने अपने वित्तीय और प्रशासनिक रिकॉर्ड रखने को तैयार है।

मां नर्मदा मंदिर ट्रस्ट की बैठक पहले 15 जुलाई को प्रस्तावित थी, जिसे बाद में 18 जुलाई के लिए निर्धारित किया गया। अब विधायक फुंदेलाल सिंह मार्को ने कलेक्टर को पत्र लिखकर बैठक की तिथि फिर बदलने का अनुरोध किया है। उनका कहना है कि यदि बैठक 18 जुलाई को होती है तो ट्रस्ट का पूरा रिकॉर्ड पत्रकारों और जनता के समक्ष सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

विधायक की सबसे बड़ी मांग ट्रस्ट की वित्तीय पारदर्शिता को लेकर है। उनका कहना है कि ट्रस्ट के गठन से लेकर आज तक मंदिर में आए चढ़ावे, सोना-चांदी, नकद दान, चल-अचल संपत्तियों और विकास कार्यों पर हुए खर्च का पूरा विवरण सार्वजनिक होना चाहिए। 

मामला केवल ट्रस्ट तक सीमित नहीं है बल्कि प्रशासन की भूमिका भी चर्चा का विषय बन गई है। ट्रस्ट की बैठकों का संचालन प्रशासनिक निगरानी में होता है, ऐसे में यह अपेक्षा स्वाभाविक है कि जनता द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब भी प्रशासनिक स्तर पर मिले। यदि रिकॉर्ड उपलब्ध हैं तो उन्हें सार्वजनिक करने में देरी क्यों हो रही है।

विधायक ने कहा की यदि ट्रस्ट आर्थिक रूप से इतना सक्षम है तो अमरकंटक में श्रद्धालुओं को अब भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष क्यों करना पड़ता है। स्वच्छता, पेयजल, पार्किंग, यातायात व्यवस्था, श्रद्धालुओं के ठहरने की सुविधाएं और अन्य विकास कार्य अपेक्षित स्तर पर क्यों नहीं दिखाई देते है।

पत्रकारिता को चौथे स्तंभ की मान्यता के लिये लाएं लोकसभा मे प्रस्ताव- शलभ भदौरिया

*जिला मुख्यालय बनेगा पत्रकार भवन, सोशल मीडिया व एआई का प्रयोग कल्याणकारी पत्रकारिता के लिये हो*


अनूपपुर

सोशल मीडिया और वर्तमान पत्रकारिता जैसे सारगर्भित विषय को लेकर अनूपपु्र जिला मुख्यालय स्थित धनश्री पैलेस मे आयोजित मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ के जिला सम्मेलन मे जिले भर से आए लोगो के बीच विद्वान वक्ताओं ने सारगर्भित विचार रखे।

जिला सम्मेलन मे पत्रकारों को संबोधित करते हुए राज्य मंत्री दिलीप जायसवाल ने अपने सारगर्भित उद्बोधन मे कहा कि भले ही मीडिया को संविधान मे चौथे स्तंभ का दर्जा प्राप्त ना हो लेकिन समाज मे आज भी उसे विधायिका, न्यायपालिका, कार्यपालिका की तरह चौथे स्तम्भ की स्वीकार्यता है। उन्होने कहा कि सोशल मीडिया और वर्तमान पत्रकारिता  अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। प्रिंट मीडिया के बाद इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और अब सोशल मीडिया पत्रकारिता का एक और बढता हुआ कदम है। सोशल मीडिया का उपयोग सही , सत्य और तथ्यात्मक पत्रकारिता मे होना चाहिए । उन्होंने कहा कि पत्रकारिता के प्रत्येक बदलाव के बाद भी प्रिंट मीडिया का महत्व आज भी बना हुआ है। उन्होंने कहा कि हमारे पत्रकार भाई प्रतिदिन कडी मेहनत करके खोजपरक खबरे निकालते हैं। उन्होंने कलेक्टर हर्षल पंचोली से कहा कि यह प्रयास हो कि जिला मुख्यालय मे एक पत्रकार भवन बनाया जाए।


कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि  शलभ भदौरिया ने कार्यक्रम की शुरुआत दो लाइनों से करते हुए कहा कि खामोशी तुम्हें जीने नहीं देगी, सच के लिए कोहराम मचा दो।बजिसका सभी ने तालियों के साथ स्वागत किया। उन्होंने कहा कि पहले तीन प्रकार की पत्रकारिता होती रही है । 

आज के दौर मे तीसरे पायदान पर  जनोंमुखी पत्रकारिता है। आज के दौर में जनोंनुखी पत्रकारिता की जरूरत है। उन्होंने कहा की परिवार का मुखिया होने के नाते मेरा यह दायित्व है कि मैं झूठी तारीफ न कर आप सबको आपकी कमियां बताकर उन्हें दूर करूं।श्री भदौरिया ने कहा कि आज कल सरकार नारद जयंती मनाने लगी है , तो नारद भी तो हम पत्रकारों के कुनबे के ही पत्रकार हैं। वे देव ऋषि थे, फिर भी राक्षसों के बीच सम्मान पाते थे।उन्होंने कहा कि यदि नेता लोग हमें वास्तव में लोकतंत्र का चौथा स्तंभ मानते हैं तो लोकसभा में प्रस्ताव पारित करें।


पत्रकारों को संबोधित करते हुए प्रांताध्यक्ष शलभ भदौरिया ने पत्रकारिता की मर्यादा और जिम्मेदारी पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि पत्रकारों में अनुशासन होना सबसे जरूरी है। श्री भदौरिया ने कहा पत्रकार सरस्वती पुत्र हैं  इसलिए उन्हें किसी की चरण वंदना से बचना चाहिए। पत्रकार का काम सच दिखाना है, चापलूसी करना नहीं।शलभ भदौरिया ने कहा कि समाज के प्रति पत्रकारों की बड़ी जिम्मेदारी होती है।आज के दौर में पत्रकारिता पर कई सवाल उठ रहे हैं,ऐसे में अनुशासन और मर्यादा ही पत्रकार की असली ताकत है।     

नशे के खिलाफ पुलिस की कार्यवाही, गाँजा व अवैध शराब जप्त, मामला दर्ज


अनूपपुर

थाना बिजुरी पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अवैध गांजा और देशी शराब जब्त किया हैं। पुलिस द्वारा क्षेत्र में जहां एक ओर लोगों को नशे के खिलाफ जागरूक किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर नशे के अवैध कारोबार में लिप्त अपराधियों पर लगातार शिकंजा कसा जा रहा है। इसी कड़ी में पुलिस ने दो अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी कर अवैध शराब और गांजा बरामद किया है।

मुखबिर से सूचना के आधार पर बिजुरी पुलिस ने ग्राम उमरदा में दबिश दी। आरोपी महिला चौरसिया बाई साहू (पति तुलाराम साहू) के घर के पास बने फूटे हुए (खंडहर) मकान में छापेमारी की गई। तलाशी के दौरान दो पीले रंग के डिब्बों में कुल 21 लीटर अवैध कच्ची महुआ शराब बरामद हुई, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 2,520 रुपये है। पुलिस ने गवाहों के समक्ष शराब को विधिवत जब्त कर आरोपिया के खिलाफ आबकारी एक्ट की धारा 34(ए) के तहत मामला दर्ज कर विवेचना में लिया है।

​थाना बिजुरी का स्टाफ जब कस्बा पेट्रोलिंग और भ्रमण पर था, तभी न्यू बस स्टैंड के पास एक संदिग्ध व्यक्ति पुलिस वाहन को देखकर भागने लगा। पुलिस टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए घेराबंदी कर उसे दबोच लिया। पूछताछ में व्यक्ति ने अपना नाम श्यामलाल सिंह कंवर (पिता स्व. छोटेलाल सिंह कंवर, उम्र 70 वर्ष) निवासी ग्राम उमरदा बताया। तलाशी लेने पर उसके पास मौजूद झोले से 675 ग्राम मादक पदार्थ गांजा बरामद हुआ। आरोपी के विरुद्ध एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/20 के तहत अपराध पंजीबद्ध कर मामला जांच में लिया गया है।

पुलिस दो अलग-अलग स्थानों से अवैध शराब किया जप्त, मामला हुआ दर्ज          


अनूपपुर

थाना करनपठार चौकी सरई पुलिस द्वारा आरोपी विजय सिंह गोंड निवासी ग्राम बड़ीतुम्मी चौकी सरई के किराना दुकान में अवैध अंग्रेजी व देशी मदिरा शराब बिक्री करते पाये जाने पर अपराध दर्ज की गई। आरोपी के कब्जे से एक खाकी रंग के कार्टून में 48 पाव मदिरा मसाला, देशी 8.64 ली. कीमती 4800 रूपये , 10 बोटल वियर प्रत्येक में 500 एमएल 5 लीटर कीमती 2000/- रूपये, एक खाकी कार्टून के अन्दर 25 पाव देशी शराब प्रत्येक में 180 एमएल 4.5 लीटर कीमती 2030/- रूपये, एक खाकी कार्टून के अन्दर 25 पाव देशी मदिरा कीमती 1750/- रूपये, एक खाकी रंग के कार्टून के अन्दर 24 पाव अंग्रेजी गोवा कीमती 3000/-, एक खाकी रंग के कार्टून के अन्दर 22 पाव सफेद मदिरा कीमती 1540/- कुल 32 लीटर कुल कीमती 15720/-  जप्त कर आबकारी एक्ट के तहत मामला पंजीबद्ध कर कार्यवाही की गयी है। 

चौकी सरई पुलिस द्वारा आरोपी साहिल सिंह गोंड निवासी ग्राम छीरपानी चौकी सरई के घर से अवैध अंग्रेजी व देशी मदिरा शराब बिक्री करते पाये जाने पर अपराध दर्ज की गई।आरोपी के कब्जे से अवैध शराब 50 पाव अग्रेंजी गोवा शराब 09 लीटर कीमती 7500/-, 50 पाव अग्रेंजी गोवा 09 लीटर कीमती 7500/- , 50 पाव मसाला कुल 09 लीटर कीमती 5000/-रू. , 50 पाव प्लेन देशी शराब 09 लीटर कीमती 3500/- रूपये, 25 पाव प्लेन देशी शराब 4.5 लीटर कीमती 1750/- रू. कुल 40.5 लीटर कुल कीमती 25250/- रूपये जप्त कर आबकारी एक्ट के तहत मामला पंजीबद्ध कर कार्यवाही की गयी है।

चेक बाउंस मामले में आरोपी को न्यायालय ने 4.12 लाख देने का सुनाया फैसला, न देने पर 3 माह की कैद


अनूपपुर

न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, राजेन्द्रग्राम, सुनील कुमार खरे द्वारा परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 (चेक अनादरण) के एक महत्वपूर्ण प्रकरण में निर्णय पारित करते हुए अभियुक्त को दोषसिद्ध किया गया है।

यह प्रकरण सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, शाखा लालपुर द्वारा शाखा प्रबंधक के माध्यम से प्रस्तुत किया गया था, जिसमें बैंक की ओर से अधिवक्ता श्री विजेन्द्र सोनी ने प्रभावी पैरवी की।

प्रकरण में न्यायालय ने पाया कि अभियुक्त द्वारा जारी किया गया चेक अनादृत (बाउंस) हुआ था तथा परक्राम्य लिखत अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन सिद्ध हुआ। इसके फलस्वरूप न्यायालय ने अभियुक्त को दोषसिद्ध करते हुए बैंक को चेक राशि, उस पर देय ब्याज सहित कुल ₹4,12,221/- प्रतिकर अदा करने का आदेश पारित किया है। साथ ही वाद व्यय के रूप में ₹16,968/- की अतिरिक्त राशि अदा करने के भी निर्देश दिए गए हैं।

न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि अभियुक्त निर्धारित प्रतिकर राशि का भुगतान नहीं करता है, तो उसे 03 माह का साधारण कारावास भुगतना होगा। इसके अतिरिक्त वाद व्यय का भुगतान न करने की स्थिति में 01 माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भी भुगतना होगा।

बैंक की ओर से प्रकरण का संचालन कर रहे अधिवक्ता विजेन्द्र सोनी ने कहा कि यह निर्णय वित्तीय अनुशासन एवं बैंकिंग लेन-देन में चेक की विश्वसनीयता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण है। यह फैसला उन व्यक्तियों के लिए भी एक स्पष्ट संदेश है जो चेक जारी करने के बाद अपने वैधानिक दायित्वों का पालन नहीं करते।

मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ का जिला सम्मेलन में पत्रकारों का होगा जमावड़ा, पत्रकारिता विषय पर होगी चर्चा


अनूपपुर

16 जुलाई 2026 दिन गुरुवार को अनूपपुर जिला मुख्यालय स्थित धनश्री पैलेस मे प्रात: 11 बजे से मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ के प्रदेश अध्यक्ष श्री शलभ भदौरिया , मध्यप्रदेश शासन के स्वतंत्र प्रभार मंत्री दिलीप जायसवाल, शहडोल सांसद हिमाद्री सिंह, अजजा आयोग के अध्यक्ष रामलाल रौतेल, मध्यप्रदेश शासन के पूर्व मंत्री बिसाहूलाल सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष प्रीति रमेश सिंह , पुष्पराजगढ विधायक फुन्देलाल सिंह, कलेक्टर हर्षल पंचोली, पुलिस अधीक्षक विक्रांत मुराब, सीईओ जिला पंचायत अर्चना कुमारी, पूर्व विधायक मनोज अग्रवाल, भाजपा जिलाध्यक्ष हीरासिंह श्याम, नगरपालिका अध्यक्ष के साथ गणमान्य नागरिक और श्रमजीवी पत्रकार गणों की उपस्थिति मे  जिला स्तरीय सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है।

संघ के  जिलाध्यक्ष राजेश पयासी ने बतलाया कि अतिथियों , विशिष्ट आतिथियों , गणमान्य नागरिकों , पत्रकारों की गरिमामयी उपस्थिति मे जिला स्तरीय पत्रकार सम्मेलन सोशल मीडिया और वर्तमान पत्रकारिता जैसे ज्वलंत और गंभीर विषय पर  विचार गोष्ठी का आयोजन भी किया जा रहा है।

इस विचारगोष्ठी मे मंचासीन अतिथियों के सार गर्भित विचारों को सुनने, समझने का महत्वपूर्ण अवसर जिले के पत्रकारों के सामने होगा। राजेश पयासी ने बतलाया कि प्रदेश अध्यक्ष शलभ भदौरिया  15 जुलाई की प्रात: नर्मदा एक्सप्रेस से अनूपपु्र आ चुके हैं। 

राजकुमार दुबे, मो अली,प्रदेश उपाध्यक्ष मनोज द्विवेदी, मेंहदी हसन , शहडोल संभाग अध्यक्ष अजीत मिश्रा के साथ जिला मुख्यालय के वरिष्ठ पत्रकारों के साथ सर्किट हाऊस मे दोपहर भोजन उपरांत कार्यक्रम की तैयारियाँ की समीक्षा किए तथा रात्रि विश्राम उपरांत अगले दिन गुरुवार 16 जुलाई को जिला सम्मेलन मे शामिल होंगे। जिले के सभी श्रमजीवी पत्रकारों से अपील की है कि इस महत्वपूर्ण आयोजन मे शामिल होकर अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें।

अखिल भारतीय क्षत्रिय महासंघ, महिला शाखा का निर्वाचन सम्पन्न, किया बृक्षारोपण


अनूपपुर

अखिल भारतीय क्षत्रिय महासंघ, महिला शाखा, अनूपपुर का मनोनयन निर्वाचन अध्यक्ष एवं सभी पदों हेतु सम्पन्न हो गया है। मनोनीत अध्यक्ष पद हेतु कुमकुम सिंह बघेल को चुना गया। उपाध्यक्ष पद पर क्रमशः मनोरमा सिंह, पुष्पा सिंह, शिखा सिंह तथा सचिव पद पर प्रवेश सिंह, महासचिव पद पर आँचल सिंह, कोषाध्यक्ष मनीषा राजपूत मीडिया प्रभारी के पद पर रीना सिंह, रश्मि सिंह,जिला संरक्षिका के पद पर निशा सिंह को चुना गया। सभी बहनों में अत्यंत हर्ष व्याप्त है। उनके साथ-साथ सभी मनोनीत पदाधिकारी को भी बहुत-बहुत बधाइयां प्रेषित की गई। समस्त बहनों ने अखिल भारतीय महासंघ में रहकर अपने समाज के हित में नेक कार्य करने के लिए संकल्प लिए। पूर्व अध्यक्ष श्रीमती मीना सिंह ने सभी को हार्दिक शुभकामनाएं दी।

अखिल भारतीय क्षत्रिय महिला महासंघ अनूपपुर की बहनों ने प्रथम कार्यक्रम वृक्षारोपण नेता सुभाष चन्द्र बोस शासकीय बालक छात्रावासमे बच्चों को प्रकृति से जुड़ने का पर्यावरण बचाने का तथा पेड़ लगाओ जीवन पाओ का संदेश भी दिया। अखिल भारतीय क्षत्रिय महासंघ महिला शाखा अनूपपुर के सौजन्य से वृक्षारोपण का कार्यक्रम बहुत अच्छे से सम्पन्न हुआ। जिसमें सभी बहनों ने शासकीय बालक,  छात्रावास में आम, नींबू, अमरूद आदि के पौधे लगाये गए।

और अंत में  पूर्व अध्यक्षा मीना सिंह के बड़े भाई साहब जेठ, अरविंद सिंह, पूर्व शिक्षक, अनूपपुर को स्मरण करते हुए दो मिनिट का मौन धारण किया गया। जिनका इलाज के दौरान वेल्लोर में निधन हो गया था। आज उन्हें अंतिम विदाई दी गई।

बैल के हमले से किसान की आंत आई पेट से बाहर, घायल का डॉक्टर ने उपचार करके बचाई जान


अनूपपुर

कहते हैं डॉक्टर भगवान होते हैं कहावत जिला चिकित्सालय में प्रत्यक्ष रूप से देखने को मिली, जहां घर में बैल बांधते समय एक अधेड़ पर बैल ने हमला कर दिया, गंभीर रूप से घायल पेट फटने से शरीर के अंदर की पूरी आंते बाहर आ गई सूचना पर सर्जन साकेत कौशिक ने देर रात अस्पताल पहुंचकर पीड़ित का उपचार किए जाने से जान बच सकी।

जैतहरी तहसील एवं थाना अंतर्गत ग्राम पंचायत एवं ग्राम गौरेला निवासी 50 वर्षीय बहादुर पिता लाल्ला सिंह गोंड अपने घर के गौशाला में पालतू बैल को रस्सी से बांध रहे थे, तभी अचानक बैल ने बहादुर पर हमला कर दिया, जिससे बैल की सींग बहादुर के पेट में घुसने से पेट के अंदर की पूरी आंत बाहर आ गई, घटना की जानकारी मिलने पर क्षेत्र के पूर्व जनपद सदस्य फुंदेलाल सिंह ने जिला मुख्यालय अनूपपुर के सामाजिक कार्यकर्ता शशिधर अग्रवाल एवं जैतहरी बीएमओ डॉक्टर मोहन सिंह श्याम को घटना की जानकारी देते हुए मरीज को एंबुलेंस से जिला चिकित्सालय मरीज को लाया गया, ड्यूटी डॉक्टर हिमांशु पांडेय एवं शशिधर अग्रवाल की सूचना पर सर्जन डां. कौशिक साकेत सूचना मिलने पर जिला चिकित्सालय पहुंचकर 2 घंटे की निरंतर मेहनत करते हुए मरीज के पेट से बाहर निकले आंतो को पूरी तरह अंदर करते हुए कई टांके लगाकर उपचार किया। समय पर उपचार किए जाने से एक गरीब मजदूर एवं कृषक की जान बच सकी, जो जिला चिकित्सालय में उपचाररत भर्ती है।

राम मंदिर चंदा चोरी के बाद नर्मदा मंदिर ट्रस्ट पर विधायक ने खड़ा किया बड़ा प्रश्न चिन्ह 

*आखिर ट्रस्ट का पैसा कहां हो रहा खर्च?*


अनूपपुर

राम मंदिर चंदा चोरी मामले के बाद अब पुष्पराजगढ़ विधायक फुंदेलाल सिंह मार्को ने नर्मदा मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। विधायक ने कहा कि ट्रस्ट को मिलने वाली राशि का उपयोग किस प्रकार किया जा रहा है, इसकी पूरी पारदर्शिता जनता के सामने आनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि ट्रस्ट के पास पर्याप्त धनराशि है तो अमरकंटक में श्रद्धालुओं के लिए मूलभूत सुविधाओं का अब भी अभाव क्यों बना हुआ है। विधायक का कहना है कि क्या ट्रस्ट का कार्य केवल नर्मदा जयंती के आयोजन और दिखावे की रंगाई-पुताई तक सीमित है, या फिर विकास कार्यों पर भी प्रभावी ढंग से राशि खर्च की जा रही है? उन्होंने ट्रस्ट की आय-व्यय का सार्वजनिक लेखा-जोखा जारी करने और पारदर्शी व्यवस्था लागू करने की मांग की है। विधायक के इन बयानों के बाद अमरकंटक की धार्मिक और राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। अब सभी की निगाहें ट्रस्ट प्रबंधन के जवाब पर टिकी हुई हैं।

उपाध्यक्ष ले रहे झूठी वाह-वाही, पार्षद की पहल से रंजीत यादव दफाई के लोगों को मिली पेयजल समस्या से राहत 


अनूपपुर

जिले के नगर परिषद बरगवां-अमलाई अंतर्गत वार्ड क्रमांक 09 स्थित रंजीत दफाई में लंबे समय से पेयजल संकट बना हुआ था। गर्मी के मौसम सहित पूरे वर्ष वार्ड़ के लोगों को पानी के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। कई बार संबंधित अधिकारियों के समक्ष शिकायतें की गईं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका।

इसी बीच वार्ड के नागरिकों ने अपनी समस्या वार्ड क्रमांक 09 की पार्षद अर्चना अजय यादव के समक्ष रखी। समस्या की गंभीरता को देखते हुए पार्षद ने नगर परिषद की सीएमओ शिवांगी सिंह बघेल से चर्चा कर तकनीकी विकल्पों पर काम शुरू कराया। इसके बाद वार्ड़ में स्थायी जलापूर्ति सुनिश्चित करने की योजना तैयार की गई। नगर परिषद क्षेत्र में हाल ही में कराए गए लगभग एक दर्जन नए बोरवेलों में से वार्ड क्रमांक 09 अमलाई मोहाड़ा में किए गए बोरवेल को इस योजना से जोड़ा गया। यहां 3 एचपी क्षमता का पंप स्थापित कर पाइपलाइन के माध्यम से रंजीत दफाई तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था की गई। कार्य के दौरान आई तकनीकी एवं व्यवस्थागत चुनौतियों के बावजूद पार्षद अर्चना अजय यादव ने लगातार निगरानी रखी और आवश्यक समन्वय कर कार्य को पूरा कराया। अब पाइपलाइन के माध्यम से रंजीत दफाई में नियमित पेयजल आपूर्ति का मार्ग प्रशस्त हो गया है। वार्डवासियों का कहना है कि यह केवल पाइपलाइन बिछाने का कार्य नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही गंभीर पेयजल समस्या का स्थायी समाधान है, जिससे सैकड़ों लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। जलापूर्ति शुरू होने की जानकारी मिलते ही वार्ड में खुशी का माहौल है। स्थानीय लोगों ने पार्षद अर्चना अजय यादव का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने बिना किसी विलंब के समस्या का समाधान कराने के लिए गंभीर प्रयास किए। उनका कहना है कि पहले कई स्तरों पर शिकायतें करने के बावजूद समाधान नहीं मिला था, लेकिन पार्षद ने पहल कर कार्य पूरा कराया।इधर क्षेत्र में यह चर्चा भी है कि नगर परिषद के उपाध्यक्ष द्वारा वार्ड क्रमांक 09 में कराए गए इस कार्य का श्रेय स्वयं लेने का प्रयास किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि उपाध्यक्ष ने लोगों से कहा कि नईम अंसारी के घर के सामने कराए गए बोरवेल के माध्यम से रंजीत दफाई में पानी की व्यवस्था उनके प्रयासों से की जा रही है, जबकि वार्डवासियों का दावा है कि इस पूरी प्रक्रिया में पार्षद अर्चना अजय यादव लगातार सक्रिय रहीं और उनकी पहल से ही यह कार्य पूरा हो सका। जिसको लेकर रंजीत दफाई के लोग वार्ड कि पार्षद अर्चना अजय यादव को धन्यवाद ज्ञापित कर रहे हैं।

शिक्षा का उजाला करने वाला अंधकार के आगोश में, शिक्षा का विशाल वटवृक्ष धराशाई होने की कगार पर, शिक्षकों ने दिया त्यागपत्र

प्रबंधन की भूमिका सवालों के घेरे में, लापरवाही या साजिश, जिम्मेदार मौन


  

अनूपपुर

बचपन में हम सभी ने अपने बड़े बुजुर्गों से अक्सर किस्से कहानियों में यह कहते सुना होगा की अंधेरा कितना भी घना क्यों ना हो रोशनी की एक छोटी सी किरण ही काफी होती है। घने अंधेरे को चीरने के लिए लेकिन आज इन मुहावरों के माइने ही बदल गए हैं, चारो ओर अपनी चमक और रोशनी बिखरने वाली प्रकाश की नगरी चचाई अब अशिक्षा के अंधकार में डूबने की कगार पर है। स्कूल में बच्चों की घटती संख्या, लगातार शिक्षा का गिरता स्तर शिक्षा का एक विशाल वटवृक्ष आरसी इंग्लिश मीडियम स्कूल कुप्रबंधन का शिकार होकर धराशाई होने को है।

*शिक्षकों ने दिया त्यागपत्र*

स्कूल प्रबंधन के दुर्व्यवहार एवं अपनी उचित वेतन न मिलने से परेशान आठ शिक्षकों ने त्यागपत्र देकर विद्यालय छोड़ना ही उचित समझा, एक लंबे समय से विद्यालय में अपनी सेवा दे रहे, शिक्षकों ने न जाने कितनी बार प्रबंधन को विद्यालय की समस्याओं से अवगत कराया होगा, लेकिन कुप्रबंधन की मनमानी से मजबूर होकर शिक्षकों ने बाहर का रास्ता अपनाया है। शिक्षकों के इस्तीफों और भवन की जर्जर स्थिति के कारण चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों और अभिभावकों के बीच विद्यालय के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है।

*बदहाली के बहा रहा आंसू*

ऊर्जा नगरी के जिस आरसी स्कूल में पढ़ कर हजारों बच्चों ने अपना भविष्य सवारा, समाज में सम्मान से जीने की राह मिली, आज वही विद्यालय अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है, ऊर्जा नगरी में शिक्षा की अलख बुझने को है और प्रबंधन हाथ पर हाथ धर कर बैठा हुआ है। आखिर इसे क्या कहेंगे लापरवाही या साजिश हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि एक ही दिन में स्कूल का भवन जर्जर नहीं हुआ, एक लंबे अरसे से सही रखरखाव न होने की वजह से आज यह जर्जर हालात में है, आखिरकार प्रबंधन ने भवन का रख रखाव क्यों नहीं किया, लापरवाही साफ नजर आ रही हैं।

*सुनियोजित साजिश का खेल*

स्कूल प्रबंधन के इस सारे खेल में एक बात तो साफ है की स्वच्छ भारत मिशन के तहत सफाई तो होना निश्चित है, इस बात में भी कोई अचरज नहीं नहीं है की यह सारा खेल पूर्व नियोजित है, प्रबंधन के दो चेहरों अखिलेश सिंह और दत्ता सर ने बकायदे साजिश के तहत योजना बनाकर अपने काम को अंजाम तक पहुंचने का काम किया जा रहा है। सफाई के प्रथम चरण में विद्यार्थियों की संख्या में तेजी से कमी लाना, दूसरे चरण में शिक्षकों को बाहर का रास्ता दिखाना, तीसरे चरण में विद्यालय को जर्जर हालत में दिखाकर उसे बंद होने की कर तक पहुंचाना और उसके बाद चतुर्थ और अंतिम चरण पूरी चतुराई के साथ समिति के खाते में जमा एक बड़ी राशि का आपस में बंदर बट करना शामिल हैं।

*विद्यालय का लाखो रुपए असुरक्षित*

सूत्रों की माने तो आरसी इंग्लिश मीडियम स्कूल प्रबंधन समिति के अकाउंट में एक बड़ी राशि 80 लाख रुपए के लगभग असुरक्षित है, यदि विद्यालय प्रबंधन चाहता तो इस राशि का उपयोग कर विद्यालय भवन का बेहतर रखरखाव मरम्मत आदि कार्य करवाया जा सकता था। शिक्षकों को समय पर उचित वेतन देकर विद्यालय के गिरते शिक्षा स्तर को नियंत्रण किया जा सकता था। लेकिन प्रबंधन ने तो इसके विपरीत मनमानी करते हुए कक्षा 9वी से 12वीं का प्रवेश से बंद करवा दिया। विद्यालय को बदहाल होने दिया और शिक्षकों को इस्तीफा देने के लिए मजबूर कर दिया।

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