सरकार की ई-गवर्नेंस नीतियों एवं ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों की समस्याओं पर एआईएमटीसी ने बुलाई हाई लेवल मीटिंग
*जन विश्वास 2.0 विधेयक में सड़क एवं राजमार्ग मंत्रालय के योगदान के तहत 36 प्रावधानों को अपराधमुक्त करने का प्रस्ताव*
*प्रवर्तन को पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी व निष्पक्ष बनाने पर जोर, ई-चालान के भुगतान 45-30-15 दिन की व्यवस्था प्रस्तावित*
*न्यू दिल्ली से पत्रकार ऊषा माहना की रिपोर्ट*
दिल्ली
ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (एआईएमटीसी) ने “ई-गवर्नेंस, कनेक्टेड व्हीकल्स और सड़क सुरक्षा तथा परिवहन क्षेत्र पर इनके प्रभाव” विषय पर एक महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की। डॉ. हरीश सभरवाल, राष्ट्रीय अध्यक्ष, एआईएमटीसी के सशक्त नेतृत्व में आयोजित इस बैठक में वरिष्ठ नीति निर्माता, सरकारी अधिकारी, प्रवर्तन एजेंसियों के प्रतिनिधि, तकनीकी विशेषज्ञ, वाहन निर्माता कंपनियां और सड़क परिवहन उद्योग के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में तेजी से बदलते तकनीक आधारित परिवहन क्षेत्र और उससे जुड़ी चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में महमूद अहमद, अपर सचिव (परिवहन), सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय; डॉ. नितिन आर. गोकर्ण, आई.ए.एस., चेयरमैन, राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड; सत्येंद्र गर्ग, आई.पी.एस., निदेशक, राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड; हसीब-उर-रहमान, आई.पी.एस., डी.आई.जी. (ट्रैफिक), जम्मू-कश्मीर; अखिलेश श्रीवास्तव, अध्यक्ष, आई.टी.एस. इंडिया फोरम; अभिजीत सिन्हा, निदेशक, ईज ऑफ डूइंग बिजनस; रामा शंकर पांडेय, चेयरपर्सन, भारत एसोसिएशन ऑफ रोड सैफ्टी वॉलिंटियर्स; राणा प्रताप, विभाग प्रमुख (परिवहन), एन.आई.सी.; विकास नरवाल, जनरल मैनेजर, एच.आर.टी.सी.; डॉ. जी.आर. शनमुगप्पा, चेयरमैन–एआईएमटीसी; एच.एस. बख्शी, अध्यक्ष–दिल्ली कॉन्ट्रैक्ट बस एसोसिएशन (डी.सी.बी.ए.); सतीश शेरावत, अध्यक्ष–इंडियन ट्रक एंड ट्रांसपोर्टर एसोसिएशन (आई.टी.टी.ए.); टाटा मोटर्स, अशोक लेलैंड, नेट्राडाइन, व्हील्सआई तथा अन्य तकनीकी और ऑटोमोबाइल कंपनियों के वरिष्ठ प्रतिनिधि तथा एआईएमटीसी, डी.सी.बी.ए., आई.टी.टी.ए. और अन्य संबंधित संगठनों के वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल रहे। एआईएमटीसी सभी गणमान्य अतिथियों और प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त करता है, जिन्होंने अपना बहुमूल्य समय देकर बैठक को सफल बनाया और विकसित भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में योगदान दिया।
डॉ. हरीश सभरवाल ने जमीनी समस्याओं को उठाते हुए कहा कि इस बैठक का मुख्य उद्देश्य नीति निर्माताओं, प्रवर्तन एजेंसियों और परिवहन उद्योग के बीच की दूरी को कम करना है। उन्होंने कहा, “तकनीक को ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, सड़क सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ाने का माध्यम बनना चाहिए, न कि ईमानदार परिवहन संचालकों पर अतिरिक्त बोझ। परिवहन उद्योग केवल डिजिटल प्रवर्तन का विषय नहीं है, बल्कि नए परिवहन तंत्र के निर्माण में उसका भागीदार होना चाहिए।” एआईएमटीसी के सलाहकार एवं दिल्ली सरकार के पूर्व उप परिवहन आयुक्त अनिल छिकारा द्वारा एक विस्तृत प्रस्तुति के माध्यम से परिवहन क्षेत्र की प्रमुख समस्याओं को रखा गया। प्रमुख समस्याओं में ई-चालान प्रणाली का दुरुपयोग शामिल है, जिससे परिवहन व्यवसाय पर अनुपालन का बोझ और लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ रही है तथा शिकायत निवारण प्रणाली प्रभावी नहीं है। ई-गवर्नेंस से जुड़ी समस्याओं, जैसे ई-ग्रास पोर्टल की खराबी, ऑनलाइन लेनदेन असफल होना, पुलिस सत्यापन की जटिल प्रक्रिया, पलूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट के लिए मालिक का ओ.टी.पी. आवश्यक होना, परमिट डाउनलोड करने में कठिनाई तथा बड़ी फ्लीट कंपनियों के लिए कॉर्पोरेट इंटरफेस का अभाव भी उठाया गया। माल वाहनों में वी.एल.टी.डी. से जुड़ी समस्याओं, जैसे अधिक लागत, सीमित वेंडर, पहले से लगे जी.पी.एस. के बावजूद अलग उपकरण की आवश्यकता, कई एजेंसियों द्वारा अलग-अलग वी.एल.टी.डी. की मांग, वायरिंग और वारंटी संबंधी समस्याएं तथा परमिट एवं फिटनेस नवीनीकरण में देरी पर भी चर्चा हुई। कनेक्टेड व्हीकल्स और तकनीक आधारित प्रवर्तन से संबंधित मुद्दों में वाहन मालिकों के डेटा अधिकार, गोपनीयता, साइबर सुरक्षा, वाहन की तकनीकी जानकारी तक पहुंच, स्वतंत्र मरम्मत की सुविधा तथा ओ.ई.एम. द्वारा अनधिकृत रिमोट कंट्रोल या एकतरफा प्रतिबंध से सुरक्षा जैसे विषय शामिल रहे। कनेक्टेड वाहनों के लिए एक मानक प्रोटोकॉल बनाने की मांग की गई।
सड़क सुरक्षा को मजबूत करने के लिए माल भेजने वाले और प्राप्त करने वाले को ओवरलोडिंग के लिए जवाबदेह बनाने, बसों में व्यावसायिक सामान ले जाने पर रोक, ट्रक पार्किंग एवं ड्राइवरों के लिए आराम की सुविधाएं बढ़ाने, ओवरस्पीडिंग पर नियंत्रण, स्कूल बच्चों को ले जाने के लिए निजी वाहनों के अवैध उपयोग को रोकने, स्लीपर बसों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा पेशेवर ड्राइवरों को सम्मान और सामाजिक पहचान देने पर जोर दिया गया। महमूद अहमद, अपर सचिव (परिवहन), सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, ने कहा कि मंत्रालय ई-चालान प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए सुधार कर रहा है और हितधारकों के सुझावों के आधार पर कमियों को दूर करने के लिए तैयार है। उन्होंने मंत्रालय द्वारा किए जा रहे कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों और सुधारों की जानकारी दी। माल वाहनों की नई श्रेणियों का प्रस्ताव रखा गया है, जिसमें एल.जी.वी. 12 टन तक, एम.जी.वी. 12 से 18 टन और एच.जी.वी. 18 टन से अधिक होंगे। 12 टन तक के हल्के माल वाहनों को परमिट से छूट देने और मध्यम माल वाहन की श्रेणी 12 से 18 टन करने का प्रस्ताव है। मध्यम और भारी माल वाहनों के लिए ऐसी ऑनलाइन और स्वचालित व्यवस्था विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे आर.टी.ओ. कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से जाने की आवश्यकता कम हो। टूरिस्ट बस ऑपरेटरों के लिए ऑथराइजेशन परमिट की न्यूनतम वैधता पांच वर्ष करने का प्रस्ताव है, जिसे 10 वर्ष तक बढ़ाया जा सके, ताकि हर वर्ष की औपचारिकताओं और भारी अग्रिम वित्तीय बोझ को कम किया जा सके। वाहन का स्वामित्व हस्तांतरण और एन.ओ.सी. जैसी सेवाओं को ऑनलाइन किया जा रहा है।
जन विश्वास 2.0 विधेयक में सड़क एवं राजमार्ग मंत्रालय के योगदान के तहत 36 प्रावधानों को अपराधमुक्त करने का प्रस्ताव है, ताकि ईज ऑफ लिविंग और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा मिले। किसी वाहन को दूसरे राज्य में बिना पंजीकरण बदले चलाने की अवधि 12 महीने से बढ़ाकर पांच वर्ष करने का प्रस्ताव है। सी.एम.वी.आर. रूल 167 ए में संशोधन कर राज्यों को इलेक्ट्रॉनिक प्रवर्तन की सुविधा दी गई है। ई-चालान के लिए एस.ओ.पी. तैयार कर सुप्रीम कोर्ट कमेटी के माध्यम से प्रस्तुत की गई है तथा प्रवर्तन को पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने पर जोर दिया गया है। ई-चालान के भुगतान के लिए 45-30-15 दिन की व्यवस्था प्रस्तावित है। इसके तहत 45 दिन में चालान का भुगतान या आपत्ति, 30 दिन में संबंधित प्राधिकारी द्वारा निर्णय और चालान सही पाए जाने पर अतिरिक्त 15 दिन में भुगतान किया जाएगा। यदि 30 दिन में निर्णय नहीं होता है तो चालान निरस्त माना जाएगा। लगभग 94 में से 90 से अधिक आर.टी.ओ. सेवाओं को डिजिटल करने का प्रस्ताव है, ताकि मानवीय हस्तक्षेप कम हो। ड्राइवर और वाहन मालिक की जवाबदेही तय करने के लिए उचित व्यवस्था बनाने पर भी विचार किया जा रहा है। बैठक में बताया गया कि ए.आई.एस.-230 कनेक्टेड वाहनों के लिए नियामक ढांचा प्रदान करता है। सड़क एवं राजमार्ग मंत्रालय ने एआईएमटीसी द्वारा सुझाए गए स्टैंडर्डाइज्ड कनेक्टेड व्हीकल प्रोटोकॉल पर विचार करने का आश्वासन दिया, विशेषकर डेटा सुरक्षा, ग्राहक की सहमति और डेटा शेयरिंग पर नियंत्रण के संबंध में। एआईएमटीसी के प्रतिनिधित्व के बाद सड़क एवं राजमार्ग मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि माल वाहनों में वी.एल.टी.डी. के साथ पैनिक बटन आवश्यक नहीं है। राज्यों में वेंडर प्रतिबंधों को समाप्त करने और सभी अनुमोदित वी.एल.टी.डी. वेंडरों को देशभर में प्रतिस्पर्धी कीमतों पर सेवाएं देने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। लगभग 178 ए.आर.ए.आई.-अनुमोदित वी.एल.टी.डी. वेंडरों को ए.आई.एस.-140 मानकों के अनुसार देशभर में समान अवसर देने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। अलग-अलग एजेंसियों द्वारा कई वी.एल.टी.डी. लगाने की मांग से संबंधित उद्योग की चिंता की भी जांच की जाएगी और उसका समाधान जल्द किया जाएगा।
कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के संबंध में बताया गया कि 16 राज्यों में यह व्यवस्था लागू हो चुकी है, हालांकि कुछ कमियां अभी भी मौजूद हैं। शेष राज्यों में भी इसे लागू करने के प्रयास जारी हैं। सरकार एक राष्ट्रीय कमांड एंड कंट्रोल सेंटर स्थापित करने की दिशा में भी काम कर रही है, जिससे राज्यों की प्रणालियों और उपकरणों को जोड़ा जा सके। सड़क एवं राजमार्ग मंत्रालय वाणिज्यिक वाहन चालकों के लिए उपलब्ध विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी एकत्र कर रहा है और परिवहन संगठनों को ड्राइवरों का ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण कराने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। ड्राइवरों के लिए मेरिट/डिमेरिट पॉइंट सिस्टम पर भी विचार किया जा रहा है। अधिक नकारात्मक अंक जमा होने पर पहले लाइसेंस निलंबित और बाद में रद्द किया जा सकता है। भारी वाहनों में लगभग 8-9 उन्नत सुरक्षा प्रणालियों को लागू करने या उन पर विचार किया जा रहा है, जिनमें ड्राइवर की नींद या थकान पहचानने की प्रणाली, लेन से हटने की चेतावनी, आपातकालीन ब्रेकिंग तथा अन्य ए.डी.ए.एस. सुविधाएं शामिल हैं।
भारत ने व्हीकल-टू-व्हीकल कम्युनिकेशन के शुरुआती चरण के लिए 30 मेगा हर्ट्ज स्पेक्ट्रम आवंटित किया है। इस तकनीक के माध्यम से वाहन अपनी लोकेशन, दिशा और गति जैसी जानकारी एक-दूसरे से साझा कर सकेंगे। इससे ड्राइवरों को संभावित खतरे की पहले से चेतावनी मिल सकेगी। भारत इस तकनीक को लागू करने वाले विश्व के शुरुआती देशों में शामिल हो सकता है।बैठक में स्लीपर बसों में आग लगने, आपातकालीन निकास बंद होने, छत पर बने इमरजेंसी एग्जिट के सामान से बाधित होने तथा संकरे रास्तों की समस्या पर विशेष चिंता व्यक्त की गई। बसों की संरचनात्मक सुरक्षा बढ़ाने के लिए बस बॉडी कोड लागू किया गया है और इसके नए प्रावधान 1 सितंबर 2025 से प्रभावी हैं। अलग से तैयार की जाने वाली बस बॉडी को निर्धारित सुरक्षा और संरचनात्मक मानकों का पालन करना होगा। बस बॉडी निर्माण में आर.टी.ओ., ओ.ई.एम. और बॉडी बिल्डर की तीन स्तरीय प्रमाणन प्रक्रिया का प्रावधान बताया गया है। ट्रकों में माल को सही ढंग से ढकने और सुरक्षित रूप से बांधने की नई आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। बाहर निकला हुआ माल निर्धारित मापदंडों और सुरक्षा मानकों के अनुसार होना चाहिए। दिल्ली एनसीआर के परिवहन संचालकों को परिवर्तन योजना का लाभ उठाने की सलाह दी गई। साथ ही, प्रधानमंत्री राहत योजना के बारे में जागरूकता बढ़ाने की अपील की गई, जिसमें पुलिस, गृह, स्वास्थ्य और अन्य एजेंसियों को दुर्घटना के बाद त्वरित सहायता के लिए डिजिटल रूप से जोड़ा जा रहा है। बताया गया कि 780 से अधिक जिलों को इस योजना से जोड़ने का कार्य चल रहा है। सड़क एवं राजमार्ग मंत्रालय राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे के किनारे निजी भूमि पर वेसाइड एमिनिटीज विकसित करने की नीति में भी सुधार कर रहा है, ताकि निजी भूमि मालिकों और उद्यमियों की अधिक भागीदारी हो सके। डॉ. नितिन आर. गोकर्ण, चेयरमैन, राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड, ने एआईएमटीसी द्वारा उठाए गए मुद्दों को “आंखें खोलने वाला” बताया और कहा कि इन सभी चिंताओं की गंभीरता से जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा के लक्ष्य सरकार, उद्योग और अन्य हितधारकों के सहयोग से ही प्राप्त किए जा सकते हैं।
सत्येंद्र गर्ग, निदेशक, राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड, ने निर्देश दिया कि विभिन्न प्रकार के चालानों, संबंधित नियमों और कानूनी प्रावधानों, उद्योग की समस्याओं, मांगों, प्रमाणों और केस स्टडी के साथ एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाए। इसमें कानूनी और नीतिगत समाधान भी शामिल किए जाएंगे। श्री हसीब-उर-रहमान, आईपीएस, डी.आई.जी. (ट्रैफिक), जम्मू-कश्मीर, ने कहा कि कार्रवाई केवल वास्तविक नियम उल्लंघन करने वालों पर होनी चाहिए और ईमानदार परिवहन संचालकों को अनावश्यक परेशान नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से एन.एच.-44 पर खराब मौसम, बारिश और भूस्खलन के कारण ट्रक चालकों और फल उद्योग को होने वाले नुकसान, ड्राइवरों के उत्पीड़न, भ्रष्टाचार और असमान प्रवर्तन का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि पेशेवर ड्राइवरों की कमी को दूर करने के लिए उन्हें सम्मान, बेहतर कार्य परिस्थितियां और उचित सुविधाएं देना आवश्यक है। उन्होंने ड्राइवरों के लिए पर्याप्त विश्राम स्थल, शौचालय, भोजन की सुविधा और नियमित सड़क सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम चलाने पर भी जोर दिया।
अभिजीत सिन्हा, निदेशक, ईज ऑफ डूइंग बिजनस, ने कहा कि तकनीक का उद्देश्य अनुपालन का बोझ बढ़ाना नहीं बल्कि कम करना होना चाहिए। उन्होंने एआईएमटीसी द्वारा उठाए गए मुद्दों को उचित स्तर पर आगे बढ़ाने का आश्वासन दिया। उन्होंने बताया कि वाणिज्यिक वाहन चालकों के लिए लगभग 200 पार्किंग और विश्राम स्थल पहले ही एन.एच.आई.डी.सी.एल. द्वारा विकसित किए जा चुके हैं।
अखिलेश श्रीवास्तव, अध्यक्ष, आई.टी.एस. इंडिया फोरम, ने जी.पी.एस., रिमोट सेंसिंग, कनेक्टेड व्हीकल्स और इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम के अधिक उपयोग की वकालत की। उन्होंने कहा कि इससे मानवीय हस्तक्षेप और भ्रष्टाचार की संभावना कम होगी तथा प्रवर्तन अधिक निष्पक्ष और पारदर्शी बनेगा। यू.पी.आई., फास्टैग और आधार जैसी सफल डिजिटल प्रणालियों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि कनेक्टेड व्हीकल सिस्टम से सड़क सुरक्षा में सुधार, दुर्घटनाओं में कमी और ड्राइवरों की सहायता संभव है। श्री रामा शंकर पांडेय, चेयरपर्सन, बी.ए.आर.एस., ने कहा कि सड़क सुरक्षा की समस्याओं का समाधान जमीनी हकीकत को समझे बिना संभव नहीं है। इसके लिए समाज, सरकार और बाजार—सभी की सामूहिक भागीदारी जरूरी है। उन्होंने वैज्ञानिक और व्यवस्थित दृष्टिकोण, विभिन्न मंत्रालयों के बीच समन्वय, सड़क सुरक्षा संगठनों, स्वयंसेवकों और युवाओं की भागीदारी पर जोर दिया। उन्होंने एआईएमटीसी और राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड के साथ मिलकर राष्ट्रीय स्तर पर सड़क सुरक्षा के लिए कार्य करने की इच्छा व्यक्त की।
राणा प्रताप, विभाग प्रमुख (परिवहन), एन.आई.सी., ने कहा कि एआईएमटीसी द्वारा एन.आई.सी., ई-ग्रास पोर्टल और अन्य तकनीक संबंधित जो व्यावहारिक समस्याएं उठाई गई हैं, उनकी जांच की जाएगी और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इस उच्चस्तरीय बैठक में व्यापक सहमति बनी कि सड़क सुरक्षा, डिजिटल परिवर्तन और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को साथ-साथ आगे बढ़ाना आवश्यक है। डॉ. हरीश सभरवाल, राष्ट्रीय अध्यक्ष–एआईएमटीसी, ने कहा कि भारत का सड़क परिवहन क्षेत्र बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। एआईएमटीसी तकनीक आधारित प्रशासन, कनेक्टेड वाहनों और मजबूत सड़क सुरक्षा का पूरी तरह समर्थन करता है, लेकिन यह परिवर्तन निष्पक्ष, सहयोगात्मक, पारदर्शी और जमीनी वास्तविकताओं पर आधारित होना चाहिए। बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों की सकारात्मक प्रतिक्रिया से यह स्पष्ट हुआ कि सरकार तकनीक और नीतियों को बनाते समय जमीनी हकीकत और परिवहन उद्योग के व्यावहारिक अनुभवों को महत्व दे रही है। ई-चालान, वी.एल.टी.डी., ई-गवर्नेंस, डिजिटल प्रवर्तन, कनेक्टेड व्हीकल्स, ड्राइवर कल्याण और सड़क सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर आगे विचार कर आवश्यक सुधारात्मक और नीतिगत कदम उठाए जाएंगे।
