कोयला चोरी में 3 गिरफ्तार, लेकिन एरिया सेल्स मैनेजर अमित सिंह पर मेहरबानी क्यों? जांच पर उठे गंभीर सवाल
राजनांदगांव
जगरन्नाथपुर ओपन कास्ट खदान से ट्रक-ट्राला के माध्यम से कोयला चोरी के सनसनीखेज मामले में पुलिस ने भले ही तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया हो, लेकिन इस पूरे प्रकरण में एरिया सेल्स मैनेजर भटगांव अमित सिंह की संदिग्ध भूमिका सामने आने के बावजूद न तो उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है और न ही किसी प्रकार की विभागीय या कानूनी कार्रवाई हुई है इससे जांच की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं।
अखबार में प्रकाशित खबर एवं न्यूज वेबसाइट में उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जगरन्नाथपुर खुली खदान से कोयला लोड ट्रक-ट्रालों को सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर मुख्य द्वार से बाहर निकाला जा रहा था मामले के उजागर होने के बाद खदान प्रबंधन ने प्राथमिकी दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया।
बताया जा रहा है कि कोयला चोरी का यह खेल लंबे समय से चल रहा था और इसमें खदान प्रबंधन, सुरक्षा कर्मियों तथा रोड सेल से जुड़े कुछ जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है नियमों के अनुसार बिना वैध दस्तावेज, वजन पर्ची और अधिकृत अनुमति के कोयले का परिवहन संभव नहीं है, ऐसे में सवाल उठता है कि यह सब एरिया सेल्स मैनेजर भटगांव अमित सिंह की जानकारी के बिना कैसे होता रहा।
सूत्रों का कहना है कि रोड सेल और कोयला डिस्पैच से जुड़े सभी अहम नियंत्रण एरिया सेल्स मैनेजर के अधीन होते हैं इसके बावजूद अमित सिंह को जांच के दायरे से बाहर रखा जाना संदेह को और गहरा करता है न तो पुलिस रिकॉर्ड में उनका नाम दर्ज है और न ही कंपनी प्रबंधन की ओर से उनके खिलाफ कोई ठोस कदम उठाया गया है।
स्थानीय लोगों और जानकारों का मानना है कि यदि निष्पक्ष जांच हो तो बड़े चेहरे बेनकाब हो सकते हैं केवल छोटे कर्मचारियों और ट्रक चालकों की गिरफ्तारी कर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की जा रही है, जबकि असली सूत्रधार अब भी सुरक्षित हैं।
अब सवाल यह है कि क्या एरिया सेल्स मैनेजर अमित सिंह को किसी का संरक्षण प्राप्त है? या फिर जांच को जानबूझकर एक सीमित दायरे में रखा जा रहा है?
जनता और जिम्मेदार नागरिकों ने मांग की है कि इस पूरे कोयला चोरी प्रकरण की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा एरिया सेल्स मैनेजर भटगांव अमित सिंह सहित सभी जिम्मेदार अधिकारियों पर तत्काल एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लग सके
