नप के निर्माण कार्यों के खिलाफ जनहित याचिका खारिज, हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता पर लगाया 50 हजार का जुर्माना
*हाईकोर्ट ने कहा की तालाब भूमि पर नही हो रहा है निर्माण*
अनूपपुर
जैतहरी नगर के वार्ड क्रमांक 3 में बस स्टैंड के सामने गौरव पथ के पास नगर परिषद द्वारा कराए जा रहे छह दुकानों के निर्माण को तालाब की जमीन पर किए जाने का आरोप लगाकर दायर जनहित याचिका को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ ने खारिज कर दिया है। न्यायालय ने याचिकाकर्ता पर 50 हजार की जुर्माना लगाते हुए यह राशि प्रतिवादी क्रमांक 3 को दिए जाने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट के आदेश के बाद निर्माण कार्य को लेकर लगाए गए तालाब की जमीन संबंधी आरोपों को लेकर भी स्थिति स्पष्ट हुई है।
हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने रिट याचिका क्रमांक WP-34297-2025, विनय सिंह विरुद्ध मध्यप्रदेश राज्य एवं अन्य में सुनाया।
याचिकाकर्ता विनय सिंह की ओर से आरोप लगाया गया था कि जैतहरी के वार्ड क्रमांक 3 में खसरा नंबर 335, रकबा 0.955 हेक्टेयर की भूमि राजस्व रिकॉर्ड में तालाब के रूप में दर्ज है और इसी भूमि पर छह व्यावसायिक दुकानों का निर्माण कराया जा रहा है।
याचिका में दुकानों के निर्माण पर रोक लगाने के साथ 23 फरवरी 2024 की स्वीकृति और 14 अक्टूबर 2024 की तकनीकी स्वीकृति को निरस्त करने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया था कि तालाब की भूमि पर निर्माण से जल निकासी, स्वच्छता, पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
प्रतिवादी क्रमांक 3 की ओर से याचिकाकर्ता के आरोपों का विरोध करते हुए कहा गया कि छह दुकानों का निर्माण तालाब वाले खसरा नंबर 335 पर नहीं, बल्कि खसरा नंबर 314 की भूमि पर किया जा रहा है।
प्रतिवादी के अनुसार दुकानों के निर्माण के लिए करीब 5.50 मीटर × 20 मीटर क्षेत्र का उपयोग किया जा रहा है। खसरा नंबर 314 पर पहले से 33 दुकानें मौजूद हैं और वर्तमान निर्माण के लिए प्रेसिडेंट-इन-काउंसिल के प्रस्ताव के साथ सक्षम प्राधिकारी से तकनीकी स्वीकृति भी प्राप्त की गई है। राजस्व निरीक्षक की रिपोर्ट में निर्माण खसरा नंबर 314 पर होना पाया गया। रिपोर्ट में यह नहीं पाया गया कि छह दुकानों का निर्माण तालाब के रूप में दर्ज खसरा नंबर 335 पर किया जा रहा है।
