प्रति नियुक्ति कर भूला प्रशासन, प्रति नियुक्ति तो समाप्त नहीं, ऊपर से लाद दिये और शिक्षक, कुम्भकर्णी नींद में प्रशासन

*चुन-चुन कर हुई पदस्थापना*


उमरिया 

जिले में प्रति नियुक्ति पदस्थापना कर जन जातीय कार्य विभाग की  सहायक आयुक्त उमरिया यह भूल बैठी है, की जिन शिक्षकों की प्रति नियुक्ति की गयी है, वह महज दो वर्षों के लिए है, और उसकी समयावधि सात साल पूर्व की गयी थी, ऐसा ही एक संवेदनशील मुद्दा इन दिनों शिक्षा जगत में  छाया हुआ है। बताया जाता है कि वर्ष 2019 में शिक्षा विभाग में पदस्थ शिक्षकों ने राज्य शासन के पोर्टल में आन लाइन आवेदन कर शिक्षा विभाग से आदिवासी विकास में जाने का अनुरोध किया था, उन दिनों प्रदेश में कांग्रेस की कमल नाथ सरकार थी और उस दरम्यान प्रतिनियुक्ति के सन्दर्भ में शिक्षा विभाग से अनापत्ति - सहमति के आधार पर उमरिया जिले के 09 शिक्षकों को सशर्त दो वर्ष के लिये आदिवासी विकास विभाग में पदस्थापना संबधित आदेश आयुक्त आदिवासी भोपाल के व्दारा प्रदान किये गए थे। शिक्षा विभाग के इन शिक्षको ने आयुक्त के आदेश के परिपालन में सहायक आयुक्त उमरिया से संपर्क साधते हुए जिले के आदिवासी विकास विभाग के व्दारा अपनी सुविधा अनुसार सडक किनारे के विद्यालयों में चुन चुन कर अपनी पदस्थापना करायी गयी और दो वर्षों के स्थान पर पिछले सात वर्षों से इन विद्यालयों को अपनी जागीर मानकर शिक्षकीय दायित्व निभाते आ रहें हैं। इन सात सालों में कितने सहायक आयुक्त आये और चले गए, लेकिन प्रतिनियुक्ति के इस मामले पर किसी का ध्यान नही गया और न ही शिक्षा विभाग को अपने गयें हुये शिक्षकों की खोज खबर लेने की जरूरत समझ में आयी। 

ध्यान देने योग्य है कि इस बीच संलग्नीकरण पर रोक लगाने और उस को समाप्त करने के लिए समय समय पर शिक्षा विभाग और आदिवासी विकास विभाग के लिये समय सीमा के अंदर वापसी के निर्देश प्रसारित किये गए हैं, परन्तु उमरिया जिले में वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों के पालन में जिला सदैव फिसड्डी बना रहा है, यहाँ पर उन बाबूओं का ही राज कायम है जो दशकों से एक ही कुर्सी पर जमे मलाई छान रहे थे। तत्संबंध में राज्य सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने संलग्नीकरण प्रथा पर रोक लगाते हुए  संलग्न शिक्षकों को मूल स्थान पर भेजने के आदेश जारी किये गए थे, जिसके परिपालन में कार्यालय आयुक्त जन जातीय कार्य मध्यप्रदेश के पत्र क्र - स्था- 4 टी - (27) / 2024/23422 भोपाल दिनांक 10-12-2024 में आदेश जारी करते हुए उल्लेख किया था कि विभाग में सभी तरह के संलग्नीकरण पर रोक लगाई गई है, और जो भी संलग्न शिक्षक है उन्हें 16-12-2024 तक अनिवार्य रूप से मूल पदांकित विद्यालयों में वापस पदांकित विद्यालयों में भेज कर पालन प्रतिवेदन संलग्न प्रपत्र में भेजना सुनिश्चित किया जाये। आयुक्त के इस निर्देशों का भी पालन सहायक आयुक्त उमरिया के व्दारा नहीं किया गया। अगर इसके पालन के लिए नजर घुमायी जाती तो यह मामला भी प्रकाश में जरूर आता, लेकिन जिले में वरिष्ठ कार्यालयों के आदेश का परिपालन तो कतिपय अधिकारियों के लिए तिजोरी भरने का एक जरिया बना हुआ  है। दाद देनी होगी प्रति नियुक्ति पर गयें शिक्षकों की जिन्होंने एक साथ दोनों विभागों को साध कर अपने मन मर्जी का राज कायम कर रखा है। लोक शिक्षण संचालनालय शिक्षकों के तैनाती को लेकर गंभीर हैं, वही पर उमरिया जिले का शिक्षा विभाग कुंभकर्णी नींद में सो रहा है। अभी हाल में जनजातीय कार्य विभाग उमरिया व्दारा तबादला सूची जारी की गयी है, इस सूची में कन्नाबहरा प्राथमिक शाला में अशोक सिंह सहायक शिक्षक की पद स्थापना कर दी गई है। कन्नाबहरा में प्राथमिक में लगभग 28 छात्र दर्ज हैं और वहा पर पहले से दो शिक्षक काफिया हक और रजनी सिंह पदस्थ थी, छात्र संख्या के मान से दो शिक्षक ही पर्याप्त है। इनमें से काफिया हक की पद स्थापना विकलांग कोटे से हैं तो दूसरी रजनी सिंह शिक्षा विभाग से प्रति नियुक्ति में वर्ष 2019 से जमी हुई है। यद्यपि इनकी पद स्थापना दो वर्ष के लिए की गयी थी, नियमत: इनको पहले मूल विभाग को वापस कर नयी पद स्थापना की जानी चाहिए थी, लेकिन विसंगतियों से भरा जन अपेक्षा है लोक शिक्षण संचालनालय इस ओर आवश्यक कब कदम उठायेगा।

नगर परिषद मे गडबड झाला, महिला पार्षदों ने सीएमओ की कार्य शैली पर उठाए सवाल, कार्यवाही की मांग


उमरिया 

जिले की  नगर परिषद नौरोजाबाद जो अपने काले कारनामों के लिए बदनाम मानी जाती है, महिला पार्षदों की उपेक्षा के लिए एक बार फिर चर्चाओं में आ गयी है। बताया जाता है कि नगर परिषद की महिला पार्षदों ने इस बार मुख्य नगर पालिका अधिकारी पर अपने उपेक्षा के तीखे आरोप लगाते हुए कहा है की न तो मुख्य नगर पालिका अधिकारी परिषद में अपनी कुर्सी पर बैठते हैं, न पार्षदों का फोन रिसीव करते हैं, न ही पारित संकल्पों पर कार्यवाही करते हैं,जिससे नगर का विकास समुचित रूप से हो सकें। महिला पार्षदों ने मीडिया से बातचीत करते हुए बताया की मुख्य नगर पालिका अधिकारी  कार्यालय से अनुपस्थित रहने के आदी हैं, वह कभी भी समय पर कार्यालय नहीं पहुचते, जिससे आम नागरिकों के साथ जन प्रतिनिधियों को भी  भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

वार्ड क्रमांक 03 की पार्षद गीता पटेल एवं वार्ड क्रमांक 08 की पार्षद  सावित्री साकेत ने भी सीएमओ की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए जमकर नाराजगी व्यक्त की। दोनों जनप्रतिनिधियों ने कहा कि कई बार वार्डों की समस्याओं और विकास कार्यों को लेकर अधिकारियों के समक्ष मुद्दे रखे जाते हैं, लेकिन उन्होंने जनता के हितों के मुद्दों से सदा दूरी बनाकर रखें हुए हैं, उनके प्रति उनकी उदासीनता बनी रहती है।

पार्षद का कहना है कि नगर परिषद कार्यालय में विभिन्न कार्यों के लिए आने वाले नागरिक  घंटों इंतजार कर वापस चले जाते हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी उपलब्ध नहीं रहते। इतना ही नहीं, कई बार फोन करने पर भी सीएमओ द्वारा कॉल रिसीव नहीं की जाती, जिससे जनप्रतिनिधियों और नागरिकों दोनों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

पार्षद ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि जनता ने हमें चुनकर भेजा है, जिससे हमारी जिम्मेदारी बनती है कि क्षेत्र के समन्वित विकास और उनके हकों के लिए हम संकल्पित होकर काम करें लेकिन नगर पालिका परिषद में हो रही उपेक्षा,मनमानी और नियम विरूद्ध कार्य शैली ने इस संकल्प को पलीता लगा कर रख दिया है।   ऐसे में जब परिषद के  अधिकारियों द्वारा उनकी बातों तवज्जो ज्ञनहीं दिया जाता, तो जनता के बीच असंतोष बढ़ता है और विकास कार्य भी प्रभावित होते हैं।

पार्षदों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की जाए, ताकि नगर परिषद की कार्यप्रणाली में सुधार हो सके और जनता को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।



प्राचार्य व शिक्षक अदिवासी को दे रहे हैं धमकी, कलेक्टर व एसपी कार्यवाही के लिए लगाई न्याय की गुहार


उमरिया

जिले के जनजातीय क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने शिक्षा विभाग, पुलिस जांच प्रक्रिया और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। ग्राम नरवार निवासी आदिवासी छात्र मालिकदीन बैगा ने शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय शाहपुर के प्रभारी प्राचार्य श्री सिंह परस्ते, शिक्षक तोमन यादव तथा जांच प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस अधीक्षक उमरिया एवं कलेक्टर को शिकायत भेजकर न्याय की मांग की है।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि विद्यालय में अनियमितताओं और कथित भ्रष्टाचार की शिकायत करने के बाद उसे लगातार दबाव, धमकी और समझौते के लिए प्रलोभन का सामना करना पड़ा। वहीं, संबंधित मामलों की जांच निष्पक्ष तरीके से नहीं किए जाने के भी आरोप लगाए गए हैं।

मालिकदीन बैगा के अनुसार 18 अक्टूबर 2025 को उन्होंने थाना पाली में लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया था कि विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य श्री सिंह परस्ते एवं शिक्षक तोमन यादव उनके घर पहुंचे और शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस दौरान गाली-गलौज की गई, धमकियां दी गईं तथा कथित रूप से जबरन हस्ताक्षर भी कराए गए।

उनका आरोप है कि शिकायत दर्ज होने के कई माह बाद भी न तो एफआईआर दर्ज की गई और न ही आरोपितों के विरुद्ध कोई ठोस कार्रवाई हुई। आवेदन में आरोप लगाया है कि जांच अधिकारी ने उनका बयान घर पर नहीं लिया और पुलिस जांच अधिकारी द्वारा जबरन विद्यालय शाहपुर ले जाया गया। आरोप है कि विद्यालय परिसर में ही संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की मौजूदगी में बयान देने का दबाव बनाया गया। मालिकदीन बैगा का कहना है कि बयान की प्रति दिखाए बिना तथा उसे पढ़कर सुनाए बिना ही हस्ताक्षर करा लिए गए। 

निर्माणाधीन बस स्टैंड दुकानों की दीवारों में आई दरारें, गुणवत्ता पर उठे सवाल, कार्यवाही की मांग


समाचार

नगर पालिका बिरसिंहपुर पाली द्वारा साईं मंदिर के समीप निर्मित नया बस स्टैंड एक बार फिर चर्चाओं में है। इस बस स्टैंड की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, क्योंकि दुकानों की दीवारों में दरारें आ चुकी हैं। उद्घाटन से पहले ही शुरू हुए मरम्मत कार्य ने नगरवासियों को चिंता में डाल दिया है।

बस स्टैंड परिसर की दुकानों की पिछली दीवारों में दरारें नजर आने लगी थीं। ठेकेदार द्वारा दीवार के हिस्से को तोड़कर मरम्मत का कार्य शुरू कर दिया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य के पूरा होने के कुछ ही समय बाद इस तरह की खामियां सामने आने से निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गए हैं।

बस स्टैंड निर्माण कार्य की शुरुआत से ही गुणवत्ता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। कई लोगों ने निर्माण सामग्री और कार्य की गुणवत्ता को लेकर आपत्तियां भी दर्ज कराई थीं, लेकिन नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारियों और इंजीनियरों ने इन शिकायतों पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया।

नगर पालिका बिरसिंहपुर पाली के नेता प्रतिपक्ष संजीव खंडेलवाल ने निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि बस स्टैंड निर्माण में गुणवत्ता मानकों का पालन नहीं किया गया, जिसके कारण उद्घाटन से पहले ही भवन की स्थिति खराब होने लगी है। उन्होंने पूरे निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

उमरिया जिले के प्रभारी मंत्री नागर सिंह चौहान ने इस स्थिति पर आश्चर्य व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि बिरसिंहपुर पाली में शानदार बस स्टैंड का निर्माण कराया गया है, और अगर उद्घाटन से पहले ही उसमें जर्जरता जैसी स्थिति सामने आती है, तो यह गंभीर विषय है। उन्होंने इस मुद्दे की जानकारी लेने की बात कही है।

कटीली तारो में फंसकर घायल हुए मादा बाइसन इलाज के दौरान हुई मौत


उमरिया

वन मंडल उमरिया के बड़वारा परिक्षेत्र की करेला बीट से लगे ग्राम उटिन मे एक मादा बाइसन की कंटीली तारबंदी मे फंस कर मौत हो गई। जानकारी के अनुसार स्थानीय कृषक गणेश प्रसाद कुशवाहा के खेत मे बाइसन के फंसे होने की सूचना वन विभाग को प्राप्त हुई थी। मौके पर पहुंची टीम ने देखा कि मादा बाइसन घायल अवस्था मे जमीन पर लेटी हुई थी तथा बीच-बीच मे अपने पैर हिला रही थी। ग्रामीणों एवं कटनी वन मंडल के कर्मचारियों ने उसे तारबंदी से बाहर निकाला। इसके बाद बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची और आवश्यक तैयारियां शुरू कीं। वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारी ने घायल बाइसन का प्राथमिक उपचार किया। हालत गंभीर होने के कारण उसे आगे के उपचार के लिए मगधी परिक्षेत्र स्थित बहेरहा बाड़ा ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते मे ही उसकी मृत्यु हो गई। मृत बाइसन का बहेरहा बाड़ा के समीप पोस्टमार्टम कराया गया तथा बाद मे उसका अंतिम निस्तारण कर दिया गया। पोस्टमार्टम के दौरान शरीर की सभी लसीका ग्रंथियां (लिम्फ नोड्स) सामान्य आकार से बड़ी पाई गईं, जिससे किसी पुरानी बीमारी की आशंका व्यक्त की गई है। जांच के लिए विभिन्न अंगों के नमूने लेकर प्रयोगशाला भेजे गए हैं। वन विभाग के अनुसार यह मादा बाइसन इसी वर्ष जनवरी माह मे सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से बांधवगढ़ लाई गई थी। उसकी पहचान के लिए गले मे रेडियो नेक बैंड लगाया गया था। प्रयोगशाला जांच रिपोर्ट आने के बाद मृत्यु के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा।

कन्या शिक्षा परिसर में छात्रवृत्ति घोटाले की जांच शुरू, संभागीय उपायुक्त ने बनाया जांच दल 


उमरिया

जिले के पाली विकास खंड के शबरी माता कन्या शिक्षा परिसर में छात्रवृत्ति घोटाले की जांच के लिए बनायी गयी जांच समिति विद्यालय पहुँच कर दस्तावेजों को खंगालने का काम शुरू कर दिया है। बताया जाता है कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के जिला संयोजक ने पिछले 16 मई को संभागीय उपायुक्त को आवेदन पत्र देकर माता शबरी कन्या शिक्षा परिसर पाली के तत्कालीन प्राचार्य पर छात्रवृत्ति घोटाले का सनसनीखेज आरोप लगाते हुए, उन्हें खंड शिक्षा अधिकारी के पद से हटाते हुए कन्या शिक्षा परिसर की जांच कराने की मांग की गयी थी, जिस पर संभागीय उपायुक्त ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए प्राचार्य के विरूद्ध जांच कमेटी बना कर जांच कराने के निर्देश जारी किये गए हैं। विदित होवे की संभागीय उपायुक्त के व्दारा बनायी गयी जांच समिति में जगदीश प्रसाद नापित सहायक संचालक, अनुराग श्रीवास्तव क्षेत्र संयोजक, और संजय कुमार अवस्थी सहायक ग्रेड 02 लेखाधिकारी की जांच समिति का गठन कर दस दिनों के अंदर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश जारी किये गए हैं, जिसके तारतम्य में आज जांच समिति कन्या शिक्षा परिसर पाली पहुच कर जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है। बताया जाता है कि माता शबरी कन्या शिक्षा परिसर में अध्ययन रत छात्राओं के बैंक खाते में आयी छात्रवृत्ति की राशि का आहरण कराकर तत्कालीन प्राचार्य ने अपने कब्जे में ले लिया था, जिससे छात्राओं में व्यापक आक्रोश व्याप्त था, जिसके लिए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने आवाज उठायी थी, परिणामस्वरूप संभागीय उपायुक्त शहडोल ने जांच दल गठित कर मामले में जांच के आदेश जारी किये गए हैं।

गौर तलब है कि पाली विकास खंड में गत एक वर्ष के अंतराल में तीन आर्थिक घोटाले हुये जिनमें व्यापक स्तर पर जांच हुई, जिनकी गूंज जिला से लेकर राजधानी तक हुई, लेकिन अब तक दो मामले में जिला प्रशासन ने ऐसा क्लीन चिट दे दिया जैसे कुछ हुआ ही नहीं है, जबकि लाखों, करोड़ों का वारा न्यारा हुआ और सभी दोषी आज भी मलाई दार पदो पर आसीन होकर अपना राज कायम किये हुए हैं, इस मामले में भी इसी तरह घोटाले बाजों को अभय दान देकर दोष मुक्त कर दे तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगा।

पीकप में लगी आग, वाहन सहित तेंदूपत्ता जलकर हुआ राख, हाथी से ग्रामीणो में दहशत, वन विभाग एलर्ट


उमरिया

जिले के मानपुर विधानसभा मुख्यालय क्षेत्र अंतर्गत बल्हौड़ समिति के ग्राम परासी ‘अ’ से तेंदूपत्ता लोड कर निकली एक पिकअप वाहन में अचानक भीषण आग लग गई। घटना में वाहन सहित लगभग 60 बोरी तेंदूपत्ता जलकर पूरी तरह राख हो गया। जानकारी के अनुसार पीकप वाहन क्रमांक MP 18 GA 5243 में तेंदूपत्ता लोड कर मुख्य सड़क की ओर ले जाया जा रहा था, जो प्रतिक्षालय एवं स्वागत गेट से लगभग 150 मीटर पहले मोड़ के पास पहुंचा ही था कि अचानक धुआं उठने लगा। चालक कुछ समझ पाता, उससे पहले ही आग ने पूरी गाड़ी को अपनी चपेट में ले लिया और देखते ही देखते पिकअप वाहन धू-धू कर जलने लगा। आग इतनी भयावह थी कि वाहन में रखे सभी जरूरी दस्तावेज भी जलकर नष्ट हो गए, हालांकि राहत की बात यह रही कि चालक एवं वाहन मालिक विजय कुमार पटेल, निवासी नगनौड़ी, तहसील जयसिंहनगर, जिला शहडोल, समय रहते वाहन से बाहर निकल आए और सुरक्षित बच गए। घटना के बाद क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया, स्थानीय लोगों ने आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन तब तक पूरा वाहन जल चुका था, अब इस घटना को लेकर कई बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं, यदि समिति से तेंदूपत्ता लोड कर वाहन भेजा गया था, तो सुरक्षा एवं जवाबदेही किसकी बनती जांच का विषय हैं।

*हाथी से ग्रामीणो में दहशत, वन विभाग एलर्ट*


उमरिया जिले के बांधवगढ़ वन परिक्षेत्र में जंगली हाथी ई-5 की लगातार बदलती लोकेशन ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। बीते सोमवार की रात हाथी का मूवमेंट डबरौंहा,धनवाही,लगवारी,बड़ेरी और कछवार क्षेत्र में देखा गया,जिसके बाद गांवों में दहशत का माहौल बन गया। मंगलवार सुबह हाथी के रोहनिया बीट की ओर बढ़ने की जानकारी सामने आई है,जिस पर वन विभाग लगातार नजर बनाए हुए है। जानकारी के अनुसार ये वही हाथी है जिसने अनूपपुर क्षेत्र में जमकर उत्पात मचाया था। उस दौरान कई मवेशियों को नुकसान पहुंचाने के साथ इंसानों पर भी हमले किए गए थे। बढ़ते खतरे को देखते हुए पार्क प्रबंधन ने हाथी का रेस्क्यू कर उसे बांधवगढ़ के खितौली वन क्षेत्र में निगरानी के बीच रखा था, लेकिन हालिया दिनों में हाथी वहां से निकलकर अलग-अलग क्षेत्रों में विचरण कर रहा है। हालांकि राहत की बात यह है कि हाथी में कॉलर आईडी लगी हुई है, जिससे वन अमला उसकी हर गतिविधि की मॉनिटरिंग कर पा रहा है। आपको बता दे इस जंगली हाथी का नाम ई-5 है। वन विभाग की टीमें लगातार सक्रिय हैं और सोशल मीडिया व मुनादी के जरिए ग्रामीणों को  उक्त हाथी से सजग रहने की सलाह दी जा रही है। अब तक हाथी ने आबादी वाले क्षेत्र में कोई बड़ा नुकसान नहीं पहुंचाया है, लेकिन उसके पुराने रिकॉर्ड को देखते हुए लोगों में भय बना हुआ है। वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि हाथी दिखने पर उसके पास न जाएं, रात में अकेले जंगल या नदी किनारे न निकलें और किसी भी मूवमेंट की सूचना तत्काल वन अमले को दें।

पुलिस अभिरक्षा से आरोपी फरार मामले में थानाप्रभारी सहित तीन पुलिसकर्मियों को आईजी ने किया निलंबित


उमरिया 

जिले के इंदवार थाने से पुलिस अभिरक्षा में रखा गया एक आरोपित फरार हो जाने के मामले में शहडोल रेंज की आईजी एन. चैत्रा ने बड़ी कार्रवाई करते हुए थाना प्रभारी समेत तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। मामले को गंभीर लापरवाही मानते हुए संबंधित पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच भी किया गया है।

एसडीओपी उमरिया पुन्नू सिंह परस्ते ने बताया कि इंदवार थाना क्षेत्र के ग्राम पनपथा में पूर्व में हुई लूट की वारदात के दो आरोपियों को पुलिस रिमांड पर लिया गया था। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि लूटा गया सोना-चांदी कटनी जिले के बरही निवासी बंटी ताम्रकार को बेचा गया है। इसी आधार पर पुलिस ने बंटी ताम्रकार को हिरासत में लेकर पूछताछ की।

पुलिस के अनुसार आरोपी के पास से करीब एक किलो 50 ग्राम चांदी और 15 ग्राम सोना बरामद कर जब्त किया गया। हालांकि जप्ती कार्रवाई के दौरान आरोपी ने दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने से इनकार करते हुए दावा किया कि सामान गिरवी रखा गया था, खरीदा नहीं गया। इसी दौरान वह पुलिस अभिरक्षा से फरार हो गया।

घटना के बाद प्रारंभिक जांच में लापरवाही पाए जाने पर थाना प्रभारी विजय कुमार पटले, सब इंस्पेक्टर सूर्यपाल सिंह और एएसआई अमर बहादुर सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। साथ ही तीनों को लाइन अटैच किया गया है। पुलिस विभाग ने इंदवार थाने की कमान अब इंस्पेक्टर नंदलाल धुर्वे को सौंपी है। वहीं फरार आरोपी की तलाश के लिए विशेष टीम गठित कर दबिश दी जा रही है।

बताया गया है कि टीआई विजय कुमार पटले घटना के समय लॉ एंड ऑर्डर ड्यूटी में तैनात थे, लेकिन केस डायरी उनके पास होने के कारण जवाबदेही तय करते हुए उन पर भी कार्रवाई की गई। घटना के बाद पुलिस व्यवस्था और सुरक्षा प्रबंधन को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

 भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के आंखों से ओझल उमरिया, जिले के दिग्गज   फिसड्डी, अनूपपुर की बल्ले बल्ले, जिताऊ उमरिया को ठेंगा 


उमरिया

मध्यप्रदेश में चल रही निगम, प्रकोष्ठों में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों में उमरिया जिले को स्थान न मिलने से एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी के उच्च आलाकमान और उनकी , मोहन सरकार की  कार्य शैली को लेकर तीखे सवाल खड़े हो रहें हैं। उमरिया जिले की इस उपेक्षा पूर्ण कार्य शैली ने न सिर्फ मोहन सरकार पर सवाल खड़े कर दिये है, इस प्रक्रिया ने भाजपा के आंतरिक लोकतंत्र को लेकर भी गहरे सवाल उठा कर चर्चाओं को सरगर्म कर रखा है, क्योंकि जितनी नियुक्तिया होनी थी वह लगभग हो चुकी , शायद अब  गुंजाइश बची नही, और अगर होगी भी तो उमरिया को स्थान मिले उसकी संभावनाएं कम ही है। यद्यपि  उमरिया को उसका वाजिब हक मिलना चाहिए। शहडोल संभाग के अनूपपुर से रामलाल रौतेल और शहडोल से राजेन्द्र भारती को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी से नवाजा गया है, वही उमरिया के हिस्से में कुछ नहीं आया। जिससे  तुलनात्मक रूप से यह खाई और बढ चली है। आखिर कार उमरिया जिला जो कि 1980 के दशक से भाजपा को पालने -पोषने और वट वृक्ष तैयार करने में सराहनीय भूमिका निभाई, आज उसे दुर्दिन देखने को मिल रहा है , वह हासिये में खड़ा हुआ है। इस दृष्टि से भाजपा का शीर्ष  नेतृत्व उमरिया की उपेक्षा कर प्रदेश भर में क्या  संदेश देना चाहता है। हम शहडोल संभाग के राजनैतिक परिदृश्य पर चर्चा करने पर पता चलता है कि शहडोल संभाग में आठ विधानसभा क्षेत्र आतें है, जिनमें से भाजपा के पास सात विधायक है और जो अभी भी भाजपा के हिस्से में नहीं है वह है अनूपपुर जिले का पुष्पराजगढ़ विधानसभा ही है। पिछले पंचवर्षीय 2018 अनूपपुर जिले की तीनों विधानसभा क्षेत्र से भाजपा ने एक भी विधानसभा नही जीती थी। इस तरह से अनूपपुर जिले ने भाजपा को जब तब लंबी चोट दी है, फिर भी अनूपपुर को भाजपा सदैव उपकृत करने का रिवाज बना लिया है। इस परिपाटी ने  सवाल खड़ा कर दिया  कि अवसर वादियों के लिए भाजपा ऐसे सुनहरे अवसर कब तक देती रहेगी,क्योंकि वर्तमान में अनूपपुर से भाजपा सरकार में मंत्री, सांसद, प्रदेश प्रवक्ता, और अब अनुसूचित जन जाति के अध्यक्ष पद से नवाजा गया है। भाजपा की समीक्षा करने पर पता चलता है कि अनूपपुर जिले में भाजपा सबसे कमजोर है, आज भी घुटने तक ही उठ पायी है, फिर भी वहा  मध्यप्रदेश सरकार में दिलीप जयसवाल जो की दूसरी बार ही विधानसभा की देहरी तक पहुंचे हैं, फिर भी मंत्री जैसे तोहफे से नवाजे गयें है, जबकि दिलीप जयसवाल वर्ष 2008 में पहली बार विधायक बने और इनके विरूद्ध इतना जनाक्रोश बढ़ा की भाजपा आलाकमान ने वर्ष 2013 में प्रत्याशी बदल कर अपनी सीट को बचाने की कवायद की थी, तब इन्होंने भाजपा की जीती हुई बाजी को बदल कर काग्रेस की झोली में डलवाने में सफल हो गयें थे, फिर वर्ष 2018 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के रूप में इन्हें हार मिली थी। वर्तमान में दुबारा चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे कि मंत्री जैसे पद से नवाज दिया गया, जबकि उमरिया से शहडोल से लगातार चुनाव जीतने वाले नेताओं को किनारे कर दिया गया। इस राजनैतिक घटना क्रम में देखा जाये तो उमरिया जिले ने लगातार  भाजपा की शान बढायी है फिर भी इस जिले वासियों को उसका वांछित लाभ नहीं मिल पाया। उनके लिए कभी भी  निगम, मंडलों के  पदों के लिए कभी नाम आगे नहीं बढाया गया । जबकि दो बार के हारे नेता रामलाल रौतेल के लिए सदा भाजपा उपहार में जिम्मेदार पदो पर सुशोभित किया, इस तरह से देखा जाये तो भाजपा में वर्तमान में जिताऊ नेताओं को कमतर आंकना और हारऊ नेताओं को उपकृत करने की रिवाज से उमरिया जिले के भाजपा नेताओं और गोंड समुदाय को व्यथित कर रखा है। अगर आदिवासी नेताओं को इस योग्य नहीं समझा गया था, तो अन्य समुदाय के भाजपा नेताओं में मिथलेश मिश्रा, मनीष सिंह, कमलेश गुप्ता, देवेश शर्मा, धनुषधारी सिंह,दिलीप पांडे  अरविंद बंसल, मान सिंह,राम नारायण पयासी , जैसे कर्मठ और निष्ठावान भाजपा नेताओं की लंबी कतार लगी हुई है । ध्यान देने योग्य है की इन नेताओं में मनीष सिंह वरिष्ठता क्रम और कर्तव्यनिष्ठा में इनका शानी जिले भर में कोई नेता नहीं है। वह खुद चुनाव जीतने और जीताने का,लंबा इतिहास कायम कर रखा है। उनकी पृष्ठभूमि का आकलन करने पर पता चलता है कि उन्होंने ने भाजपा के लिए जो जमीन बनायी, वह उनके लिए और अन्यों के लिये भी समान रूप से फलदायी रही। मनीष सिंह कालरी कर्मचारी उपभोक्ता भंडार में वर्ष  2002 से लेकर 2013 तक तीन पंचवर्षीय अध्यक्ष पद पर सुशोभित रहे, चूंकि संवैधानिक अडचन के कारण उन्हें 2013 से 2018 तक अध्यक्ष का चुनाव नहीं लड सकें तब भी संचालक मंडल में विजयी होकर अपना स्थान सुरक्षित रखा, और वर्ष 2019 से 2024 तक पुनः अध्यक्ष पद पर आसीन होने का गौरव हासिल किया, इस तरह अपनी छबि एक जीताऊ बना रखी है। फिर भी भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने उमरिया जिले को उसका वाजिब हक न देकर उपेक्षा की है, जिसकी चर्चा  वर्तमान में पूरे संभाग भर में बनी हुई  है, देखना लाजिमी होगा कि क्या उमरिया के भी दिल बहुरेंगे ‌की भाजपा को गच्चा देने वाले अनूपपुर की यूँ ही बल्ले बल्ले बनी रहेगी।

बिजली गुल होने पर गलती से लगा काल, नेता ने बेल्ट से कर दी मारपीट, जान से मारने की दी धमकी


उमरिया

जिले के नौरोजाबाद थाना क्षेत्र में बिजली गुल होने पर धोखे से एक नेताजी को आपका फ़ोन लग गया और लाइनमैन समझ कर खरीखोटी सुना दी, और नेता जी बेल्ट से मार-मार कर आपकी पीठ लाल कर दिया। यह प्रकरण नौरोजाबाद नगर में घटित हुआ है।जहां पीड़ित पक्ष की शिकायत उपरांत पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है

मामला बाजारपुरा का है,जहां अतुल सोनी पिता प्रताप सोनी ने नौरोजाबाद थाने में जाकर बताया कि 25 अप्रैल की रात 12:30 के आसपास बिजली गुल होने पर सब स्टेशन नौरोजाबाद फ़ोन लगाने के लिए उठाया लेकिन फ़ोन धोखे से बाजारपुरा निवासी भाजपा नेता अमित गुप्ता को लग गया। फोन लगाकर मैंने इतना कहा कि भईया शादी का कार्यक्रम चल रहा है, आपने लाइट क्यों बन्द कर दी है। इतना सुनते ही अमित गुप्ता आग बबूला हो गए, उन्होंने मुझे अपने घर के पास बुलाकर अमित गुप्ता ने न केवल गंदी-गंदी गाली दी इसके साथ ही बेल्ट निकाल कर ताबड़तोड़ मारपीट कर दी और जान से मारने की धमकी भी दी है।

पुलिस ने मामले की जांच उपरांत पीड़ित अतुल सोनी का मेडिकल करवाने के बाद आरोपी अमित गुप्ता निवासी बाजारपुरा के खिलाफ नौरोजाबाद थाने में बीएनएस की धारा 296(a),115(2),351(2) के तहत मामला दर्ज कर मामले को विवेचना में लिया है।

हाइवा का हुआ ब्रेक डाउन, 4 घंटे ठप्प रहा सड़क मार्ग, जंगल मे गर्मी में यात्री हुए परेशान

उमरिया


जिले के ताला–पनपथा मार्ग पर रविवार सुबह 8 बजे से लगा जाम दोपहर 12:30 बजे तक भी नहीं खुल पाया। एक हाइवा के बीच सड़क खराब होने से शुरू हुई समस्या, सिंगल रोड और अधूरी पटरी के कारण विकराल रूप लेती गई। लेकिन सबसे बड़ा सवाल प्रशासनिक उदासीनता पर खड़ा हो रहा है।

मौके पर न तो पुलिस की सक्रिय मौजूदगी दिखी, न ही वन विभाग का कोई अमला। नतीजा—हजारों की संख्या में फंसे लोग 42 डिग्री की झुलसाती गर्मी में बेहाल रहे। बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं पानी के लिए तरसते नजर आए, कई लोग मजबूरी में जंगल की ओर भटकते दिखे और पेड़ों की छांव में बैठकर राहत तलाशते रहे।

स्थिति और चिंताजनक इसलिए भी है क्योंकि यह पूरा इलाका वन क्षेत्र से सटा हुआ है। ऐसे में जाम में फंसे लोगों का जंगल की ओर जाना, जंगली जानवरों के खतरे को भी बढ़ा रहा है। इसके बावजूद वन विभाग की निष्क्रियता गंभीर सवाल खड़े करती है।

सबसे तीखा सवाल यहीं से उठता है—चार घंटे से ज्यादा समय तक जाम लगा रहा, लेकिन जिम्मेदार महकमा मौके से गायब क्यों रहा? क्या आपात स्थिति से निपटने के लिए कोई पूर्व योजना नहीं? एक सामान्य ब्रेकडाउन ने पूरे सिस्टम की तैयारी की पोल खोल दी। यह सिर्फ चूक नहीं, बल्कि संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है।

जब हालात इतने बिगड़ जाएं कि लोग पानी के लिए जंगल की ओर भटकने लगें, और फिर भी प्रशासन हरकत में न आए तो यह सीधे-सीधे जवाबदेही का मुद्दा बनता है।

नाबालिग बच्चों से करवाई जा रही है मजदूरी, नियमो की उड़ा रहे हैं धज्जियाँ,श्रम विभाग कटघरे में


उमरिया 

जिला मुख्यालय में बाल श्रम का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने प्रशासन और श्रम विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे एक वीडियो में छोटे बच्चों को भारी सामान ट्रक में लोड करते हुए देखा जा सकता है। दावा किया जा रहा है कि यह वीडियो पाली रोड स्थित मंसूरी ट्रेडर्स, अब्दुल कबाड़ी का है।

वीडियो के सामने आने के बाद शहर में चर्चा तेज हो गई है। लोग इसे न सिर्फ अमानवीय बता रहे हैं, बल्कि कानून का खुला उल्लंघन भी मान रहे हैं। भारत में बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम के तहत 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से इस तरह का काम करवाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बावजूद खुलेआम बच्चों से मजदूरी करवाई जा रही है, जो जिम्मेदार विभागों की लापरवाही को उजागर करता है।

इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात लेबर इंस्पेक्टर यश दत्त त्रिपाठी का बयान है। जब उनसे इस वायरल वीडियो को लेकर बात की गई, तो उन्होंने साफ कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। उनका यह जवाब अब सवालों के घेरे में है। जब मामला सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है, तो जिम्मेदार अधिकारी अनजान कैसे रह सकते हैं?

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब शहर में बाल श्रम के मामले सामने आए हों। पहले भी ऐसे आरोप लगते रहे हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर ठोस कदम कम ही देखने को मिले हैं। अब यह वीडियो एक बार फिर पूरे सिस्टम की कार्यशैली पर सवाल खड़ा कर रहा है। चाइल्डलाइन, पुलिस और श्रम विभाग की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। 

पंचायत में कर्मचारियों के रिश्तेदारों के नाम लग रहें लाखों के बिल, बह रही भष्ट्राचार की गंगा


उमरिया

जिले के ग्राम पंचायतों में सामग्री क्रय करने के लिए शासन व्दारा भले ही मापदंडों का निर्धारण कर दिया गया हो लेकिन उसका पालन कही पर भी होता दिखाई नहीं देता, खरीदी तो उन्हीं लोगों से होगी जो कार्य एजेंसी के मन मुताबिक देयक और बढे हुई सामग्री का हिसाब बराबर चुकता करेंगे। उमरिया जिले की ग्राम पंचायतों में इस तरह के कईं वेंडर धारियों की निशाने में आये है, जिनकी  न तो दूकानें है न फर्म और ना ही क्रेसर पर बिल दर्जनों ग्राम पंचायतों में बराबर देखने को मिलता है, न जाने ग्राम पंचायतों के इस धांधली भरे खेल पर कब और कौन रोका लगायेगा।जिले भर में ग्राम पंचायतों के देयको की झलकियाँ देखें तो पता चलता है की जिन लोगों की दुकानो का कही रता पता नहीं है, उनसे भी सामग्री क्रय बताकर लाखों रूपयों के शासकीय धन राशि का दोहन ग्राम पंचायतों के सरपंच और सचिव करते देखें जा रहे हैं। कुल मिलाकर देखा जाये की जिसकी जहाँ पर सेंटिग बैठ गयी उसी के नाम का देयक लगाये जाते हैं। ऐसी ही एक झलकी पाली जनपद पंचायत के मलहदू ग्राम पंचायत में देखने में आयी है। देखने में आया है की मलहदू ग्राम पंचायत में ग्राम रोजगार सचिव ने अपने सगे पिता के नाम का बिल ग्राम पंचायत में लगाकर लाखों रूपये का आहरण किया है। यद्यपि रोजगार सहायक के पास वित्तीय अधिकार तो नहीं है फिर भी इतना अधिकार तो है ही की पिता की दूकानदारी की चमक तो बढ़ा ही सकते हैं। सरपंच - सचिव को उनका कमीशन और बढी हुई सामग्री का बिल और उसकी राशि ईमानदारी से मिल जाये तो वह कोई भी विक्रेता बन सकता है।

ग्राम पंचायत मलहदू में हुई इस अवैध खरीदी की शिकायत अनुविभागीय अधिकारी राजस्व के यहाँ की गयी है, जिसमें बताया गया है कि दुकान दार ने बिना जी एस टी  के बिलों लगभग 18 देयको के माध्यम से  1,84,350  रूपये के सीमेंट के बिल लगाकर शासकीय धन राशि का दोहन किया गया है। 

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघ की हुई मौत, किया गया शव दाह, विभाग की जांच जारी


उमरिया

जिले के विश्वप्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व में फिर बाघ की मौत हुई हैँ। वर्ष 2026 बांधवगढ़ में बाघो के लिए अनुकूल नहीं साबित नहीं हो रहा है। बांधवगढ टाइगर रिजर्व के परिक्षेत्र पनपथा कोर की बीट बघडो में एक बाघ शावक के मृत होने की सूचना प्राप्त हुई। सूचना होने पर तत्काल एनटीसीए प्रोटोकॉल के अनुसार मौके पर वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में डाग स्क्वाड बुलाकर क्षेत्र की सघन सचिग करायी जाकर मेटल डिटेक्टर से जांच करायी गई। उसके उपरांत निर्धारित एसओपी का पालन करते हुए वन्यप्राणी स्वास्थ्य अधिकारी, बांधवगढ टाइगर रिजर्व एवं खंड पशु चिकित्सा अधिकारी, मानपुर की टीम द्वारा शव परीक्षण किया गया। शव परीक्षण उपरांत विभागीय सक्षम अधिकारियों प्रभारी क्षेत्र संचालक एवं उपसंचालक बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व उमरिया , राजस्व अधिकारी, एनटीसीए प्रतिनिधि एवं जनप्रतिनिधि की उपस्थिति में शवदाह किया गया। शव परीक्षण में प्रथम दृष्टया मृत्यु का कारण आपसी संघर्ष में मृत्यु होना पाया गया है। क्षेत्र में विभागीय कैंप हाथियों की सहायता से सर्च कराया जा रहा है तथा विवेचना जारी है।

बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व सहित उमारिया जिले के सामान्य वन मण्डल में अब तक सात बाघ मारे जा चुके हैँ, जिनमे चार की मौत टाइगर रिज़र्व क्षेत्र सीमा पर एवं तीन सामान्य वन मण्डल की सीमा पर मारे गए है।

बाघ के हमले से महिला की मौत


उमरिया 

जिले के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के पनपथा परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम झालावार से सटे जंगल का मामला जहां बाघ के हमले से महिला की मौत की हो गई है, कुछ ग्रामीण मौके पर पहुंचे और पुलिस व पार्क प्रबंधन बांधवगढ़ के कर्मचारी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं, पुलिस मामले की जांच कर रही हैं। मृतक का नाम कुशमी बाई 50 वर्ष जो महुआ बीन रही थी, महिला को बाघ ने दबोचा जिससे उसकी मौके पर मौत हो गयी।

क्रेसर डस्ट से बना दी छात्रावास की बाऊण्डी बाल, चोरी छिपाने तत्काल कर दी प्लास्टर 


उमरिया

जिले के बिरसिंहपुर पाली कन्या छात्रावास की बाउन्ड्री बाल क्रेसर डस्ट से जोडाई का मामला प्रकाश में आया है। बताया जाता है कि लोक निर्माण विभाग ( पी आई यू) के व्दारा कन्या छात्रावास के नव निर्मित भवन में बाऊण्डी बाल बनाने का काम रीवा के किसी ठेकेदार को टेंडर में दिया गया है, जो काम पाली के एक अनाधिकृत ठेकेदार को पेटी कांटेक्ट में कराया जा रहा है। लोक निर्माण विभाग के तय मापदण्डों के अनुरूप यह काम उत्तम किस्म की रेत से कराया जाना था, लेकिन कार्य एजेंसी के व्दारा क्रेसर डस्ट से ही तैयार कर दी गई है। इस बात को जब लोक निर्माण विभाग के समक्ष उठाया गया तो उन्होंने दूरभाष में ही संबंधित कार्य एजेंसी को फटकार लगाते हुए तत्काल कार्य स्थल से डस्ट हटवाने के निर्देश दिए, साथ ही यह भी कहा की जो डस्ट से बाऊण्डी बनायी गयी है उसको गिरा दिया जायेगा। तब तक ठेकेदार अपना काम कर बाऊण्डी बाल की प्लास्टर कर चलते बना। इस तरह मापदंड के विपरीत बनी बाऊण्डी बाल कितनी दिन चलेंगी, कह पाना कठिन हो गया है। ठेकेदार तो अपने तरह से काम कर चलता बना, अब बारी है लोक निर्माण विभाग की वह क्या कदम उठाता है की ठेकेदार के इशारों पर उसे हरी झंडी दे दी जायेगी ‌।

मुक्ति धाम की राशि से पंचायत ने लगवा दी स्ट्रीट लाइट, हुई शिकायत, सीईओं ने जांच के दिए आदेश


उमरिया

उमरिया जिले की 19 ग्राम पंचायतों में कुल 543 एलईडी स्ट्रीट लाइटों के नियम विरुद्ध लगाए जाने की शिकायतों के बाद अब उनके कार्यों की जांच शुरू कर दी गई है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभय सिंह ने मानपुर जनपद पंचायत की 6 ग्राम पंचायतों और करकेली जनपद पंचायत की 13 ग्राम पंचायतों में भौतिक सत्यापन के लिए उपयंत्रियों को जिम्मेदारी सौंपी है।

निर्देश में कहा गया है कि 5वें वित्त आयोग की राशि खर्च करने से पहले ग्राम पंचायत विकास योजना तैयार कर उसे पंचायत दर्पण पोर्टल पर दर्ज करना आवश्यक है। प्राथमिकता अनुसार श्मशान घाट विकास कार्यों पर राशि खर्च की जानी थी, लेकिन कई पंचायतों में इसके विपरीत स्ट्रीट लाइट का कार्य कराया गया।

जांच के दौरान उपयंत्री यह देखेंगे कि नए खंभे लगाए गए हैं या नहीं, वायरिंग जमीन के अंदर की गई है या नहीं, तकनीकी स्वीकृति और प्राक्कलन के अनुसार कार्य हुआ है या नहीं, तथा लाइटें चालू हालत में हैं या नहीं। उपयोगिता के आधार पर विस्तृत प्रतिवेदन जिला पंचायत को सौंपा जाएगा।

करकेली जनपद पंचायत की 13 पंचायतों में 355 स्ट्रीट लाइट लगाई गई हैं। इनमें पठारीकला में 15, बिरुहलिया 22, कॉलोनी 34, महरोई 60, महिमार 30, बिलासपुर 31, अतरिया 22, अखड़ार 22, पथरहटा 45, बरहटा 21, करकेली 10, पिनौरा 18 और नरवार-25 में 25 लाइट शामिल हैं। वहीं मानपुर जनपद पंचायत की 6 पंचायतों में 188 स्ट्रीट लाइट लगाई गई हैं। इनमें दमोय 26, जनकपुरी 26, चितरांव 26, मझोखर 30, सकरिया 14 और गोरड्या में 26 लाइट लगाई गई हैं।

एकलव्य आवासीय विद्यालय में करोड़ों की खरीदी मामले में गुणवत्ता से खिलवाड़, गेंहू से कम दाम पर आटा की आपूर्ति 


उमरिया

जिले के एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय पाली में सामग्री आपूर्ति के लिए आमंत्रित निविदा प्रक्रिया में जिस तरह से संबंधित निविदा कारो ने दर अंकित कर सस्ते दरो में आपूर्ति कर रहे हैं उससे खरीदी प्रक्रिया में संकट के बादल मंडराने लगे हैं। विदित होवे की जिस दर पर कृषक धान बेच कर उसे घाटे का सौदा मान रहा है उस दर पर निविदा कारो ने चावल आपूर्ति करने का अनुबंध करने जा रही है।

ध्यान देने योग्य है कि एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में अध्ययन रत छात्र -छात्राओं को उत्तम सुविधायें उपलब्ध कराने के लिए उच्च गुणवत्ता युक्त सामग्री क्रय करने के लिए विद्यालय के प्राचार्य ने अपने पत्र क्र /इ एम आर एस / निविदा/ 2025-26/809 पाली दिनांक 12-3-26 के माध्यम से निविदा प्रक्रिया आमंत्रित कर 01 अप्रैल 26 से 31 मार्च 27 तक सामग्री प्रदान करने के लिए निविदा बुलाई गई थी , जो नियमत‌: खोली जा चुकी है। निविदा खुलने के बाद आपूर्तिकर्ताओं ने प्रतिस्पर्धा में जो दर डालें है, उससे सप्लाई प्रक्रिया संदेश के दायरे में आ गयी है। जग जाहिर है कि मध्यप्रदेश सरकार के व्दारा मोटी धान का  समर्थन मूल्य 23.69 प्रति किलो रखा गया है और एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में चावल की आपूर्ति 26.00 रूपये प्रति किलो में करने की तैयारी की गयी है। इसी तरह गेहूँ का समर्थन मूल्य किसान के लिए बोनस सहित 26.25 प्रति किलो रखा गया है तब 25.00 प्रति किलो में आटा की उपलब्धता कराना अपने आप में सवाल खड़ा कर रहा है। इसी तरह अरहर दाल 58.00 प्रति किलो सप्लाई करने की तैयारी है। यह वस्तुऐं तो हांडी के दो दाने के समान है। बाजार मूल्य से कम दाम पर आपूर्ति निश्चित ही माप और गुणवत्ता के साथ खिलवाड़ करने को आदर्श आवासीय विद्यालय में धूम मचाने को तैयार है।

उल्लेखनीय है कि जब बाजार में भारी वृद्धि की संभावनायें बनी हुई है, तब एक साल तक कम दर का सौदा करना कही न कहीं खरीदी प्रक्रिया को प्रभावित करने की ओर इशारा करती है। ऐसी स्थिति में विद्यालय के प्रबंध समिति को चाक चौबंद रहने की जरूरत है ।

भारतीय किसान संघ राष्ट्रीय मार्ग पर करेंगा चक्का जाम, प्रशासन पर अनदेखी के आरोप 

*अनिश्चितकालीन ‘घेरा डालो, डेरा डालो’ आंदोलन की चेतावनी*


उमरिया

जिले में किसानों की समस्याओं को लेकर अब किसान शांत बैठने वाला नहीं है, बताया जाता है कि शासन प्रशासन से  बार बार आग्रह कर वह थक चुका है , और अब वह आर पार के लडाई का मन बना लिया है।बताया जाता है कि किसानों की जायज मांगों की उपेक्षा लगातार जिला प्रशासन के व्दारा किया जा रहा है।जिससे  किसानों में व्यापक जनक्रोष बढता जा रहा है और स्थित इतनी बिगड गयी है कि  भारतीय किसान संघ ने प्रशासन की इस अनदेखी से नाराज होकर आंदोलन का रास्ता चुन लिया है। भारतीय किसान संघ ने अब साफ तौर पर उग्र आंदोलन छेडने की तैयारी कर ली है।भारतीय किसान संघ ने इसके लिए विधिवत आंदोलन छेडने की चेतावनी भी दे  दी है कि यदि किसानों की समस्याओं का समाधान समय रहते  नहीं हुआ तो भारतीय किसान संघ अब बिना देर किये ही शहडोल -घुनघुटी हाईवे पर चक्का जाम आंदोलन कर अपने मांगों की लड़ाई लडेगा। 

भारतीय किसान संघ जिला अध्यक्ष अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि  कई बार भारतीय किसान संघ के व्दारा कलेक्टर उमरिया को विभिन्न समस्याओं को लेकर ज्ञापन सौंपा गया है बाबजूद  इसके प्रशासन के व्दारा किसानों की सुविधाओं को लेकर ऐहतियाती कदम नहीं उठाये गये। भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष ने बताया कि इसके बाद प्रथम स्मरण पत्र कलेक्टर को और द्वितीय स्मरण पत्र आयुक्त शहडोल संभाग को दिया गया, लेकिन अब तक किसी भी स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

संघ का आरोप है कि प्रशासन किसानों की समस्याओं को लेकर पूरी तरह उदासीन बना हुआ है। एक ओर जहां प्रदेश सरकार किसानों के हित में योजनाओं और घोषणाओं की बात करती है, वहीं दूसरी ओर उमरिया जिला प्रशासन इन समस्याओं से आंखें मूंदे बैठा है।

किसान संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि कई बार प्रशासन से चर्चा और बैठक के माध्यम से समाधान निकालने का प्रयास किया गया, लेकिन हर बार उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे किसान आंदोलित होने को मजबूर हो गया है। 

भारतीय किसान संघ ने ऐलान किया है कि अब “घेरा डालो, डेरा डालो” आंदोलन के तहत शहडोल-घुनघुटी हाईवे को पूरी तरह बंद किया जाएगा। इस आंदोलन में 42 गांवों के किसान शामिल होंगे, जो सड़क पर ही रहकर खाना-पीना और डेरा डालेंगे। संघ ने साफ कर दिया है कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक किसानों की मांगें पूरी नहीं हो जातीं। आंदोलन के दौरान किसी भी प्रकार की स्थिति के लिए पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

नौकरी दिलाने के नाम पर फर्जी ज्वाइनिंग लेटर देकर 9 लाख की ठगी, आरोपी फरार,  पुलिस कार्यशैली पर सवाल

*बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान का मामला*


उमरिया 

जिले के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में नौकरी दिलाने के नाम पर करीब 9 लाख रुपये की ठगी की गई। हैरानी की बात यह है कि आरोपियों के सामने होने के बावजूद पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की और पीड़ितों को यह कहकर टाल दिया कि मामला उत्तर प्रदेश का है।

उत्तर प्रदेश के दो युवकों को एक युवक ने बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में नौकरी दिलाने का झांसा दिया। आरोप है कि आरोपी ने दोनों से करीब 9 लाख रुपये वसूले और उन्हें फर्जी ज्वाइनिंग लेटर देकर उमरिया बुला लिया। इतना ही नहीं, भरोसा दिलाने के लिए दोनों युवकों को एक महीने तक कथित “प्रशिक्षण” भी कराया गया।

मामला तब उजागर हुआ जब आरोपीयों की जानकारी मकान मालिक ने पुलिस को सूचना दी यह किराएदार मुझे वन विभाग में नौकरी के नाम पर कमरा किराए पर लिया है ना तो यह कभी ड्यूटी जाते हैं ना ही यह वर्दी में रहते हैं। मौके पर पहुंची पुलिस ने पूछताछ तो की, लेकिन न तो आरोपी को हिरासत में लिया और न ही तत्काल कोई ठोस कार्रवाई की।

वही पीड़ितों का आरोप है कि जब उन्होंने पुलिस से मदद मांगी तो उन्हें यह कहकर वापस भेज दिया गया कि वे उत्तर प्रदेश के निवासी हैं, इसलिए अपने राज्य में जाकर शिकायत करें। इस रवैये से पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

जब इस पूरे मामले की जानकारी बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन को लगी, तो उन्होंने साफ तौर पर सभी दस्तावेजों को फर्जी बताया। प्रबंधन का कहना है कि इस तरह की कोई भर्ती प्रक्रिया नहीं हुई है और यह पूरी तरह ठगी का मामला है। उन्होंने पुलिस को धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर सख्त कार्रवाई करने की सलाह भी दी है। आरोपी खुद को करकेली के वन विभाग कार्यालय में कार्यरत बताता था, जिससे पीड़ितों को उस पर भरोसा हो गया। लेकिन अब आरोपी फरार बताया जा रहा है।

प्रबंधन का कहना है कि इस तरह की कोई भर्ती प्रक्रिया नहीं हुई है और यह पूरी तरह ठगी का मामला है। उन्होंने पुलिस को धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर सख्त कार्रवाई करने की सलाह भी दी है।

MKRdezign

,

संपर्क फ़ॉर्म

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget