प्रति नियुक्ति कर भूला प्रशासन, प्रति नियुक्ति तो समाप्त नहीं, ऊपर से लाद दिये और शिक्षक, कुम्भकर्णी नींद में प्रशासन
*चुन-चुन कर हुई पदस्थापना*
उमरिया
जिले में प्रति नियुक्ति पदस्थापना कर जन जातीय कार्य विभाग की सहायक आयुक्त उमरिया यह भूल बैठी है, की जिन शिक्षकों की प्रति नियुक्ति की गयी है, वह महज दो वर्षों के लिए है, और उसकी समयावधि सात साल पूर्व की गयी थी, ऐसा ही एक संवेदनशील मुद्दा इन दिनों शिक्षा जगत में छाया हुआ है। बताया जाता है कि वर्ष 2019 में शिक्षा विभाग में पदस्थ शिक्षकों ने राज्य शासन के पोर्टल में आन लाइन आवेदन कर शिक्षा विभाग से आदिवासी विकास में जाने का अनुरोध किया था, उन दिनों प्रदेश में कांग्रेस की कमल नाथ सरकार थी और उस दरम्यान प्रतिनियुक्ति के सन्दर्भ में शिक्षा विभाग से अनापत्ति - सहमति के आधार पर उमरिया जिले के 09 शिक्षकों को सशर्त दो वर्ष के लिये आदिवासी विकास विभाग में पदस्थापना संबधित आदेश आयुक्त आदिवासी भोपाल के व्दारा प्रदान किये गए थे। शिक्षा विभाग के इन शिक्षको ने आयुक्त के आदेश के परिपालन में सहायक आयुक्त उमरिया से संपर्क साधते हुए जिले के आदिवासी विकास विभाग के व्दारा अपनी सुविधा अनुसार सडक किनारे के विद्यालयों में चुन चुन कर अपनी पदस्थापना करायी गयी और दो वर्षों के स्थान पर पिछले सात वर्षों से इन विद्यालयों को अपनी जागीर मानकर शिक्षकीय दायित्व निभाते आ रहें हैं। इन सात सालों में कितने सहायक आयुक्त आये और चले गए, लेकिन प्रतिनियुक्ति के इस मामले पर किसी का ध्यान नही गया और न ही शिक्षा विभाग को अपने गयें हुये शिक्षकों की खोज खबर लेने की जरूरत समझ में आयी।
ध्यान देने योग्य है कि इस बीच संलग्नीकरण पर रोक लगाने और उस को समाप्त करने के लिए समय समय पर शिक्षा विभाग और आदिवासी विकास विभाग के लिये समय सीमा के अंदर वापसी के निर्देश प्रसारित किये गए हैं, परन्तु उमरिया जिले में वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों के पालन में जिला सदैव फिसड्डी बना रहा है, यहाँ पर उन बाबूओं का ही राज कायम है जो दशकों से एक ही कुर्सी पर जमे मलाई छान रहे थे। तत्संबंध में राज्य सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने संलग्नीकरण प्रथा पर रोक लगाते हुए संलग्न शिक्षकों को मूल स्थान पर भेजने के आदेश जारी किये गए थे, जिसके परिपालन में कार्यालय आयुक्त जन जातीय कार्य मध्यप्रदेश के पत्र क्र - स्था- 4 टी - (27) / 2024/23422 भोपाल दिनांक 10-12-2024 में आदेश जारी करते हुए उल्लेख किया था कि विभाग में सभी तरह के संलग्नीकरण पर रोक लगाई गई है, और जो भी संलग्न शिक्षक है उन्हें 16-12-2024 तक अनिवार्य रूप से मूल पदांकित विद्यालयों में वापस पदांकित विद्यालयों में भेज कर पालन प्रतिवेदन संलग्न प्रपत्र में भेजना सुनिश्चित किया जाये। आयुक्त के इस निर्देशों का भी पालन सहायक आयुक्त उमरिया के व्दारा नहीं किया गया। अगर इसके पालन के लिए नजर घुमायी जाती तो यह मामला भी प्रकाश में जरूर आता, लेकिन जिले में वरिष्ठ कार्यालयों के आदेश का परिपालन तो कतिपय अधिकारियों के लिए तिजोरी भरने का एक जरिया बना हुआ है। दाद देनी होगी प्रति नियुक्ति पर गयें शिक्षकों की जिन्होंने एक साथ दोनों विभागों को साध कर अपने मन मर्जी का राज कायम कर रखा है। लोक शिक्षण संचालनालय शिक्षकों के तैनाती को लेकर गंभीर हैं, वही पर उमरिया जिले का शिक्षा विभाग कुंभकर्णी नींद में सो रहा है। अभी हाल में जनजातीय कार्य विभाग उमरिया व्दारा तबादला सूची जारी की गयी है, इस सूची में कन्नाबहरा प्राथमिक शाला में अशोक सिंह सहायक शिक्षक की पद स्थापना कर दी गई है। कन्नाबहरा में प्राथमिक में लगभग 28 छात्र दर्ज हैं और वहा पर पहले से दो शिक्षक काफिया हक और रजनी सिंह पदस्थ थी, छात्र संख्या के मान से दो शिक्षक ही पर्याप्त है। इनमें से काफिया हक की पद स्थापना विकलांग कोटे से हैं तो दूसरी रजनी सिंह शिक्षा विभाग से प्रति नियुक्ति में वर्ष 2019 से जमी हुई है। यद्यपि इनकी पद स्थापना दो वर्ष के लिए की गयी थी, नियमत: इनको पहले मूल विभाग को वापस कर नयी पद स्थापना की जानी चाहिए थी, लेकिन विसंगतियों से भरा जन अपेक्षा है लोक शिक्षण संचालनालय इस ओर आवश्यक कब कदम उठायेगा।
