भारतीय किसान संघ राष्ट्रीय मार्ग पर करेंगा चक्का जाम, प्रशासन पर अनदेखी के आरोप
*अनिश्चितकालीन ‘घेरा डालो, डेरा डालो’ आंदोलन की चेतावनी*
उमरिया
जिले में किसानों की समस्याओं को लेकर अब किसान शांत बैठने वाला नहीं है, बताया जाता है कि शासन प्रशासन से बार बार आग्रह कर वह थक चुका है , और अब वह आर पार के लडाई का मन बना लिया है।बताया जाता है कि किसानों की जायज मांगों की उपेक्षा लगातार जिला प्रशासन के व्दारा किया जा रहा है।जिससे किसानों में व्यापक जनक्रोष बढता जा रहा है और स्थित इतनी बिगड गयी है कि भारतीय किसान संघ ने प्रशासन की इस अनदेखी से नाराज होकर आंदोलन का रास्ता चुन लिया है। भारतीय किसान संघ ने अब साफ तौर पर उग्र आंदोलन छेडने की तैयारी कर ली है।भारतीय किसान संघ ने इसके लिए विधिवत आंदोलन छेडने की चेतावनी भी दे दी है कि यदि किसानों की समस्याओं का समाधान समय रहते नहीं हुआ तो भारतीय किसान संघ अब बिना देर किये ही शहडोल -घुनघुटी हाईवे पर चक्का जाम आंदोलन कर अपने मांगों की लड़ाई लडेगा।
भारतीय किसान संघ जिला अध्यक्ष अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि कई बार भारतीय किसान संघ के व्दारा कलेक्टर उमरिया को विभिन्न समस्याओं को लेकर ज्ञापन सौंपा गया है बाबजूद इसके प्रशासन के व्दारा किसानों की सुविधाओं को लेकर ऐहतियाती कदम नहीं उठाये गये। भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष ने बताया कि इसके बाद प्रथम स्मरण पत्र कलेक्टर को और द्वितीय स्मरण पत्र आयुक्त शहडोल संभाग को दिया गया, लेकिन अब तक किसी भी स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
संघ का आरोप है कि प्रशासन किसानों की समस्याओं को लेकर पूरी तरह उदासीन बना हुआ है। एक ओर जहां प्रदेश सरकार किसानों के हित में योजनाओं और घोषणाओं की बात करती है, वहीं दूसरी ओर उमरिया जिला प्रशासन इन समस्याओं से आंखें मूंदे बैठा है।
किसान संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि कई बार प्रशासन से चर्चा और बैठक के माध्यम से समाधान निकालने का प्रयास किया गया, लेकिन हर बार उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे किसान आंदोलित होने को मजबूर हो गया है।
भारतीय किसान संघ ने ऐलान किया है कि अब “घेरा डालो, डेरा डालो” आंदोलन के तहत शहडोल-घुनघुटी हाईवे को पूरी तरह बंद किया जाएगा। इस आंदोलन में 42 गांवों के किसान शामिल होंगे, जो सड़क पर ही रहकर खाना-पीना और डेरा डालेंगे। संघ ने साफ कर दिया है कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक किसानों की मांगें पूरी नहीं हो जातीं। आंदोलन के दौरान किसी भी प्रकार की स्थिति के लिए पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
