सर्वोच्च न्यायालय के दिवाली के पटाखों पर रोक लगाने वाले भ्रष्ट जजों के खिलाफ लोकपाल को की गई शिकायत
*हिन्दू संगठन जजों के घर जाकर उन्हें समझाकर पटाखों के लाइसेंस जारी कराने का करेंगे अनुरोध*
*धर्म रक्षक श्री दारा सेना न्यू दिल्ली*
नई दिल्ली
अखिल भरत हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मुन्ना कुमार शर्मा की अध्यक्षता में हुई हिन्दू संगठनों की बैठक में दिल्ली पुलिस द्वारा अभी तक भी पटाखा विक्रेता दुकानदारों को लाइसेंस जारी न करने पर चिन्ता व्यक्त की गई। जबकि ंविस्फोटक नियम 2008 की धारा 113 के तहत दिवाली के 1 महीना पहले यें लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया प्रारम्भ हो जाती है। दिल्ली पूुलिस यह कहकर कि सर्वोच्च न्यायालय के जजों ने पटाखों के लाइसेंस जारी करने पर रोक लगा रखी है। इस लिए वो लाइसेंस नहीं दे रही है। दिल्ली पुलिस द्वारा महामहिम राष्ट्रपति और भारत सरकार के कानून की अवज्ञा करना किसी भी प्रकार से उचित नहीं हें और भारत में जजों सहित कोई भी कानून से उपर नहीं है।
हिन्दू संगठनों ने जजों द्वारा कानून की अवज्ञा करके अवैध पटाखों की बिक्री को बढ़ावा देकर दिल्ली सरकार के राजस्व को क्षति पहुंचाने की शिकायत लोकपाल के यहां दर्ज कर दी गई है। हिन्दू संगठनों द्वारा शिकायत करने की जिममेदारी आई आई टी रूड़की से शिक्षा प्राप्त एक मेटलर्जीकल इंजीनियर और पर्यावरण विद् श्री मुकेश जैन को दी गई।
लोकपाल को की गई शिकायत में शिकायतकर्ता श्री मुकेश जैन ने लिखा कि याचिकाकर्ता ने 2024 में सर्वोच्च न्यायालय में एक आई ए नं. 282141 रिट पेटिशन सिविल नं़ 13029/1985 में लगाई थी। जिसमें याचिकाकर्ता ने 3 अप्रैल 2025 को न्यायमूर्ति श्री अभय श्री निवास ओका और उज्जल भुयां के समक्ष बताया था कि दिवाली के पटाखों में कोई प्रदूषण नहीं होता बल्कि पटाखों से उत्पन्न सल्फर डाई आक्साइड गैस वायुमण्डल से उसी प्रकार से जीवाणु-कीटाणु मार कर वायुमण्डल शुद्ध करती है, जैसे फोग मशीन से नगर पालिकाऐं मच्छर समाप्त करती हैं। याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में एम सी मेहता को सी आई ए का ऐजेन्ट बताया था, जो पटाखों पर रोक लगवाकर 142 करोड़ हिन्दुस्तानियों को महामारी फैलाकर मारने की सी आई ए की साजिश में शामिल है। याचिकाकर्ता ने एस सम्बन्ध में दिल्ली प्रदूषण नियन्त्रण समिति की 1 नवम्बर 2024 की रिपोर्ट भी सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष रखी थी, जिसमें कहा गया था कि दिल्ली में भरपूर पटाखें छुडाये जाने के बाद भी वायु गुणवत्ता सूचकांक में कोई परिवर्तन नहीं हुआ।
उसके बावजूद भी इन न्यायधीशों ने दिवाली के पटाखों पर रोक लगाकर विस्फोटक कानून 2008 का उल्लंघन करके पटाखों की बिक्री निर्माण और भन्डारण पर रोक लगाई। जिसका हिन्दू संगठनों और पटाखा विक्रेताओं ने भारी विरोध किया और इस रोक को न केवल हिन्दू धर्म पर हमला बताया बल्कि इसे 142 करोड़ हिन्दुस्तानियों को महामारी फैलाकर मारने की वकील एम सी मेहता की साजिश बताया। जिसमें एम सी मेहता ने हिन्दू विरोधी न्यायमूर्ति अभय श्री निवास ओका, ईसाई न्यायमूर्ति आगस्टीन जार्ज मसीह, उज्जल भुयां और न्याय मित्र अपराजिता सिंह को भी शामिल करके पटाखों पर रोक लगवाई। जिसके लिए न्यायमित्र अपराजिता सिंह ने सी आई ए की फंडखोर सी एस ई के झूठे और भ्रामक आंकड़े टीाय श्री निवास ओका की मिली भगत से पेश किये। आषंका हे कि इसके लिए अपराजिता सिंह को भारी फीस देने के साथ - साथ एम सी मेहता द्वारा भी फंड दिया गया। बाद में मुख्य न्यायधीश श्री बी आर गवई की पीठ ने दीपावली 2025 में केवल 3 दिन के लिए पटाखों पर से रोक हटाई। किन्तु 3 अप्रैल 2025 का प्रतिबन्ध आज भी लागू है।
इस मामले में जजोें अभय श्री निवास ओका, आंगस्टीन जोर्ज मसीह और उज्जल भुईयां ने स्वतः संज्ञान लेकर रिट पेटिशन सिविल 728/2015 में दिये सर्वोच्च न्यायालय के ग्रीन पटाखों को बनाने, बेचने और छु़डाने के आदेशों का भी सरासर अवज्ञा और उल्लंघन किया।
याचिका में लिखा गया कि दिवाली इस साल 7-8 नवम्बर में है। किन्तु सर्वोच्च न्यायालय के जज विस्फोटक कानून और ग्रीन पटाखोें को छुड़ाने के अपने ही आदेश का उल्लंघन करके दिल्ली एन सी आर में दिवाली पर पटाखों को बनाने, बेचने और छुट़ाने पर रोक लगाये बैठे है। यह सब एक साजिश के तहत हो रहा है। इस साजिश के तहत सरसों जैसी तेल तिलहन की फसलों को भी कमजोर किया जा रहा है। जिसके लिए पटाखों से निकली सल्फर डाई आक्साईड गैस और मैग्नीशियम बहुत अच्छी पौषक खाद का काम करके पैदावार को बढ़ाते हैं।
शिकायत में लोकपाल से अनुरोध किया गया कि पटाखों में किसी भी प्रकार का प्रदूषण न होने के बावजूद भी प्रायोजित मीडिया सी आई ए का पैसा खाकर प्रदूषण का झूठ फैला कर पटाखा उद्योग को बर्बाद करके देश की अर्थव्यवस्था को तबाह करने वाले और महामारी फैलाकर 142 करोड़ हिन्दुस्तानियों को मारने की सी आई ए की साजिश में शामिल कानून का उल्लंघन कर रहे इन भ्रष्ट जजों और इस साजिश में शामिल वकीलों के खिलाफ कार्यवाही करके याचिकाकर्ता को न्याय प्रदान करने की कृपा करे। हिन्दू संगठन जजों के घर जाकर उन्हें समझाकर पटाखों के लाइसेंस जारी कराने का अनुरोध भी करेंगे।
*न्यू दिल्ली से पत्रकार ऊषा माहना*
