अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, भाजपा पदाधिकारी व कार्यकर्ता, स्वच्छता अभियान में फ़ोटो खिंचाकर कर दिया पूरा नगर स्वच्छ

अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, भाजपा पदाधिकारी व कार्यकर्ता, स्वच्छता अभियान में फ़ोटो खिंचाकर कर दिया पूरा नगर स्वच्छ

*चारो तरफ दिखा कचरे का ढेर व बजबजाती नलियां, क्या यही है स्वच्छ भारत मिशन अभियान*

अनूपपुर

गांधी जयंती के अवसर पर स्वच्छता को लेकर नगर परिषद बरगवां (अमलाई) द्वारा विशेष सफाई अभियान के नाम पर सिर्फ दिखावा साबित हुआ है। अभियान के दौरान जनप्रतिनिधियों, नगर परिषद के पदाधिकारियों और भाजपा के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताओं ने सफाई गतिविधियों में सहभागिता करने के नाम पर सिर्फ फोटो खिंचवाए। हालांकि, अभियान के बाद नगर के कई प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर दिखाई दे रही गंदगी ने स्वच्छता व्यवस्था और अभियान की पोल खोलते नजर आ रही है, स्वच्छ भारत मिशन पर बड़ा सवाल खड़े कर दिया हैं। कई जगह सफाई करते नगर परिषद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, पार्षद, भाजपा के पदाधिकारी व कार्यकर्ता दिखाई दे रहे हैं, मगर वह केवल कुछ मिनटों के लिए फोटो खिंचवाकर सोशल मीडिया में फ़ोटो डालकर महात्मा गांधी को यह बताना चाह रहे है की पूरा देश स्वच्छ हो गया।

नगर परिषद बरगवां की ओर से सभी वार्डो में सफाई कराई गई और अभियान से संबंधित तस्वीरें सामने आईं। लेकिन स्थानीय स्तर पर लोगों का कहना है कि यदि वास्तव में शहर को स्वच्छ बनाना हैं तो फ़ोटो शेषन से बाहर निकलकर सही रूप से पसीना बहाकर पूरा किया जा सकता है। मगर जनप्रतिनिधियों व भाजपा के पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं में ऐसी क्षमता दूर-दूर तक कही दिखाई नही दे रही है। सफाई अभियान केवल किसी एक स्थान या विशेष दिवस तक सीमित नहीं रहना चाहिए। नगर के ऐसे स्थान, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही होती है, वहां भी नियमित सफाई की जरूरत है।

शहर के बस स्टैंड, बापू चौक, रेलवे स्टेशन चौराहा और दुर्गा मंदिर बाजार सहित कई प्रमुख स्थानों पर कचरा के ढ़ेर व नालियां बजबजाती सामने आ नजर आ रही है। इन इलाकों में जगह-जगह कचरे के ढेर और गंदगी की स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी है। लोगों का सवाल है कि जब गांधी जयंती जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर विशेष सफाई अभियान चलाया के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति है, तो बाकी दिन सफाई कैसी होती होगी यह बताने की जरूरत नही है, सब कुछ साफ-साफ नजर आ रहा है।

स्वच्छता अभियान का उद्देश्य केवल एक दिन सफाई कराकर उसकी तस्वीरें खिंचवाना नहीं, स्वच्छता व्यवस्था कायम नही हो सकती है। करना नगर परिषद  है। नियमित कचरा उठाव, सार्वजनिक स्थलों की सफाई, कचरा निस्तारण और सफाई व्यवस्था की  चारों तरह नदारद दिखाई दे रही है। स्थानीय लोगों का कहना है जनप्रतिनिधि नगर की सफाई व्यवस्था बनाने में खरे नही उतर रहे हैं।

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या स्वच्छता अभियान केवल गांधी जयंती जैसे विशेष अवसरों तक सीमित रह जाएगा? क्या सार्वजनिक स्थानों पर नियमित सफाई सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार व्यवस्था गंभीरता से काम करेगी? यदि अभियान के दौरान जनप्रतिनिधि और नगर परिषद का अमला सक्रिय हो सकता है, तो आम दिनों में वही सक्रियता क्यों दिखाई नहीं देती?

नगरवासियों की अपेक्षा है कि स्वच्छता अभियान को केवल औपचारिक कार्यक्रम न बनाकर उसे नियमित व्यवस्था का हिस्सा बनाया जाए। शहर के प्रमुख बाजारों, चौराहों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और धार्मिक स्थलों के आसपास नियमित सफाई हो तथा जमा कचरे का समय पर उठाव सुनिश्चित किया जाए। तभी स्वच्छता अभियान का उद्देश्य धरातल पर दिखाई देगा और गांधी जयंती पर दिए जाने वाले स्वच्छता के संदेश का वास्तविक अर्थ सामने आएगा।

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