लाखों रुपए की लागत से बनी ध्यान कुटियां धराशायी, देखरेख के अभाव में उजड़ी पर्यटन योजना
अनूपपुर
पवित्र नगरी अमरकंटक के शंभूधारा स्थित आरक्षित वन क्षेत्र में पर्यटकों और साधकों को प्राकृतिक वातावरण में ध्यान-साधना की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाई गई ध्यान कुटियां बदहाली का शिकार हो गई हैं। जलाशय के किनारे प्राकृतिक संसाधनों से निर्मित ये कुटियां उचित देखरेख के अभाव में जर्जर होकर धराशायी हो चुकी हैं। पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विकसित इस परियोजना की दुर्दशा को लेकर अब जिम्मेदार विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार, मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा 21 जनवरी 2022 को घोषित इस परियोजना को मध्यप्रदेश ईको टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड के माध्यम से विकसित किया गया था। इन कुटियों के निर्माण में मिट्टी, पत्थर, बांस, लकड़ी और मोवा घास जैसी प्राकृतिक सामग्रियों का उपयोग किया गया था, ताकि जंगल के प्राकृतिक स्वरूप को बनाए रखते हुए पर्यटकों को शांत वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।
बारिश और रखरखाव की कमी से बिगड़ी स्थिति परियोजना का उद्देश्य पर्यटकों को प्रकृति के बीच एकांत में समय बिताने, योग-ध्यान करने और मानसिक शांति प्राप्त करने का अवसर देना था। लेकिन नियमित रखरखाव और समय पर मरम्मत नहीं होने से इन संरचनाओं की स्थिति लगातार बिगड़ती गई। बारिश और मौसम की मार के बीच कुटियां जर्जर होकर गिर गईं। ऐसे में जिस योजना से क्षेत्र में प्राकृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद थी, उसकी उपयोगिता पर ही सवाल खड़े हो गए हैं। बताया जाता है कि इन कुटियों की देखरेख की जिम्मेदारी वन विभाग, अमरकंटक की है। इसके बावजूद संरचनाओं को सुरक्षित रखने के लिए समय रहते आवश्यक कदम क्यों नहीं उठाए गए, यह जांच का विषय है। परियोजना पर खर्च की गई राशि और रखरखाव के लिए किए गए प्रयासों की जानकारी भी सामने आनी चाहिए, ताकि जिम्मेदारी तय हो सके। अमरकंटक धार्मिक पर्यटन के साथ प्राकृतिक पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
