तीसरी रेल लाइन की मिट्टी बही, एक मानसून भी नहीं झेल सकी मिट्टी की भराई, रेल सुरक्षा व गुणवत्ता पर सवाल
*उच्चस्तरीय जांच की मांग*
उमरिया
मुदरिया–घुंघुटी रेलखंड के बीच अमोला पुल के समीप तीसरी रेल लाइन के किनारे किए गए मिट्टी भराई कार्य में कथित अनियमितताओं का मामला सामने आया है। *रेलवे खंभा क्रमांक 939/29A से 941/9A के बीच मानसून से पूर्व कराए गए मिट्टी भराई कार्य में बरती गई लापरवाही के कारण बारिश के दौरान कई स्थानों पर बड़े-बड़े कटाव हो गए तथा अनेक जगहों से मिट्टी बह गई।
स्थानीय स्तर पर सामने आई इस स्थिति ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जाता है कि मानसून से पहले रेलवे अधिकारियों एवं संबंधित ठेकेदार द्वारा पटरी किनारे मिट्टी भराई का कार्य कराया गया था, लेकिन पहली ही बारिश में मिट्टी का बह जाना कार्य में उचित कॉम्पेक्शन (मिट्टी का निर्धारित मानकों के अनुसार घनीकरण) और आवश्यक सुरक्षा उपायों की गुणवत्ता की जांच की मांग करता है।
*एक मानसून में मिट्टी का बहना, गुणवत्ता जांच की जरूरत*
रेलवे की आधारभूत संरचनाओं में निर्माण की गुणवत्ता और संरक्षा सर्वोपरि होती है। ऐसे में यदि मिट्टी भराई के बाद पर्याप्त कॉम्पेक्शन, ढलान की सुरक्षा नहीं की गई, तो बारिश के दौरान कटाव की समस्या गंभीर रूप ले सकती है। संबंधित स्थल पर हुए कटाव से यह स्पष्ट है कि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों एवं स्वीकृत तकनीकी प्रावधानों के अनुरूप नहीं किया गया।
*समय रहते सुधार नहीं हुआ तो बढ़ सकता है खतरा*
अमोला पुल के समीप प्रभावित रेलखंड में मिट्टी के कटाव को देखते हुए आगामी मानसून से पहले आवश्यक मरम्मत एवं सुरक्षा कार्य कराए जाने की मांग उठ रही है। यदि समय रहते प्रभावित स्थानों का निरीक्षण कर कटाव रोकने के उपाय नहीं किए गए, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। ट्रेनों के परिचालन पर भी खतरे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
*उच्चस्तरीय विजिलेंस जांच की मांग*
नागरिकों ने रेल प्रशासन से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित स्थल का तकनीकी निरीक्षण कराया जाए। साथ ही, कार्य की माप पुस्तिका, गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट, कॉम्पेक्शन टेस्ट, भुगतान संबंधी अभिलेख तथा ठेकेदार द्वारा किए गए कार्यों की जांच की जाए। अनियमितता अथवा लापरवाही प्रमाणित होने पर जिम्मेदार अधिकारियों एवं ठेकेदार के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए।
अब देखना यह है कि रेल प्रशासन इस मामले में समय रहते आवश्यक कदम उठाता है या नहीं, ताकि रेलवे की महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और भविष्य में किसी संभावित दुर्घटना की आशंका को टाला जा सके।
