लोको पायलट की विधवा की संदेहात्मक मौत; करोड़ों की पैतृक संपत्ति, आभूषण व 81 लाख की पेंशन हड़पने का आरोप

लोको पायलट की विधवा की संदेहात्मक मौत; करोड़ों की पैतृक संपत्ति, आभूषण व 81 लाख की पेंशन हड़पने का आरोप

*परिजनों ने सीएम, डीजीपी व आई जी से न्याय की मांग, प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उठाए गंभीर सवाल*


शहडोल

शहडोल के पुरानी बस्ती क्षेत्र में रेलवे के सेवानिवृत्त लोको पायलट स्वर्गीय देवी सिंह की 75 वर्षीय बेबस, अनपढ़ और निःसंतान विधवा श्रीमती शांति बाई की संदेहात्मक परिस्थितियों में हुई मृत्यु के मामले में एक सनसनीखेज खुलासा हुआ है। मृतका के सगे परिजनों—उनकी सगी देवरानी सुशीला हरी सिंह और पुत्रवधू हरूना विक्रम सिंह द्वारा एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस आहूत की गई। इस दौरान परिजनों ने दस्तावेजी साक्ष्यों के साथ जिला व पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए।

परिजनों ने स्पष्ट किया कि स्व. देवी सिंह और स्व. हरी सिंह सगे भाई थे। पुरानी बस्ती में एक ही परिसर में दोनों के घर थे, जिसमें एक तरफ हरी सिंह का घर मुख्य गेट से लगा हुआ है और दूसरी ओर पीछे की तरफ स्वर्गीय देवी सिंह का सर्वसुविधायुक्त पक्का मकान है। देवी सिंह की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी शांति बाई इस करोड़ों रुपए मूल्य की अचल संपत्ति की एकमात्र स्वामिनी बची थीं।

आभूषण गायब, खड़ी की चार पहिया गाड़ियों की फौज: परिजनों ने आरोप लगाया कि मृतका के सोने-चांदी के सभी आभूषण और घर-गृहस्थी का पूरा सामान नदारद है। आशंका है कि मृतका की इस गाढ़ी कमाई को ठिकाने लगाकर उससे अपनी बच्चियों की पढ़ाई, शादियां और चार पहिया वाहनों का काफिला खड़ा कर लिया गया। इस संपत्ति का उपभोग करने वाले सभी लोगों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

सालाना ₹5 लाख की पेंशन के बावजूद बदतर स्थिति में जीवन: स्वर्गीय देवी सिंह की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी शांति बाई को लगभग 30 से 40 हजार रुपए प्रति माह (सालाना करीब ₹5 लाख) पेंशन मिल रही थी। इसके बावजूद बुजुर्ग महिला को दो कमरों के घर में बेहद बदतर स्थिति में रखा गया। एक कमरे में जहां भगवान शंकर की पूजा होती थी, वहीं शांति बाई रहती थीं और उससे लगे दूसरे कमरे में शकीला और सबीर खान रहते थे। सेवा का ढोंग करते-करते कब हिंदू परिवार को ठग लिया गया, पता ही नहीं चला।

देखरेख के नाम पर ₹81 लाख की मोटी वसूली: सुशीला हरी सिंह ने आरोप लगाया कि आरोपियों ने बुजुर्ग महिला के अकेलेपन का फायदा उठाकर उनकी देखरेख के ऐवज में लगभग ₹4,48,000 प्रतिवर्ष की मोटी रकम वसूली। यदि आरोपियों द्वारा पेश किए गए वर्ष 2009 के कथित वसीयतनामा को ही आधार मान लिया जाए, तो बीते 17 वर्षों में इन लोगों ने बुजुर्ग महिला से करीब 81 लाख रुपए वसूल कर लिए।

करोड़ों की संपत्ति हड़पने के लिए हत्या का ताना-बाना: परिजनों का सीधा आरोप है कि इसी मोटी पेंशन और करोड़ों की अचल संपत्ति को हड़पने की फिराक में बुजुर्ग महिला की हत्या का यह खौफनाक ताना-बाना बुना गया।

मौत सामान्य थी तो अंतिम संस्कार की जल्दबाजी क्यों?: परिजनों ने तीखा सवाल उठाया कि यदि कथित वसीयतनामा वैध था और मौत सामान्य थी, तो आरोपियों को बिना पोस्टमार्टम कराए, बिना परिजनों को बताए अत्यंत गोपनीय तरीके से अंतिम संस्कार करने की इतनी व्याकुलता क्यों थी? परिजनों द्वारा महाराष्ट्र से फोन पर मिन्नतें करने के बावजूद अंतिम दर्शन क्यों नहीं करने दिए गए।

11 अक्टूबर को ही एसपी-सीएसपी को दी गई थी सूचना: इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी 11 अक्टूबर 2026 को ही स्थानीय समाजसेवियों और पत्रकारों द्वारा फोन पर एसपी व सीएसपी शहडोल को दे दी गई थी। चूंकि महाराष्ट्र से शहडोल के लिए कोई सीधी ट्रेन सुविधा नहीं है, इसलिए परिजनों को वाया कटनी होकर पहुँचने में 2 से 3 दिन का समय लग गया, जिसका फायदा उठाकर आरोपियों ने साक्ष्य मिटाने का पूरा खेल रच दिया।

कोतवाली पुलिस द्वारा मात्र एनसीआर काटना न्याय का गला घोंटना: परिजनों ने भारी आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि हत्या की आशंका और साक्ष्य छुपाने के स्पष्ट प्रयासों के बावजूद थाना कोतवाली पुलिस ने गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज करने के बजाय महज एक मामूली एनसीआर काटकर आरोपियों को खुला छोड़ दिया है।

धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ और सामाजिक सौहार्द्र बिगाड़ने का प्रयास: परिजनों ने आरोप लगाया कि मुस्लिम परिवार होते हुए भी आरोपियों ने अति उत्साह और लोभ-लालच में जानबूझकर मृतका का अंतिम संस्कार कर अक्षम्य अपराध कारित किया है, जिससे दो समुदायों के बीच अविश्वास पैदा कर सामाजिक सौहार्द्र बिगाड़ने की कोशिश की गई। शकीला व सबीर खान का परिवार जिले की शांति व्यवस्था के लिए खतरा है, जिस पर जिला प्रशासन को चिंतन करना चाहिए।

सुशीला हरी सिंह और हरूना विक्रम सिंह ने मुख्यमंत्री, डीजीपी व आईजी शहडोल से मांग की है कि मामले को तत्काल संज्ञान में लेते हुए कोतवाली पुलिस द्वारा काटी गई एनसीआर को हत्या, फर्जी दस्तावेज तैयार करने (कूटरचना) और साक्ष्य विलोपन की संगीन धाराओं के तहत एफआईआर में बदला जाए तथा शकीला, सबीर खान और अंतिम संस्कार की जल्दबाजी में शामिल सभी संदिग्धों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जाए।

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