नौनिहालों के उंजाले नाम पर अंधेरा, 6 आंगनबाड़ियों में लगें 12 ट्यूबलाइट, 6 पंखे, 6 बोर्ड, बिल में उड़ा दिए 81 हजार

नौनिहालों के उंजाले नाम पर अंधेरा, 6 आंगनबाड़ियों में लगें 12  ट्यूबलाइट, 6 पंखे, 6 बोर्ड, बिल में उड़ा दिए 81 हजार

जिम्मेदारों की आंख ने बंधी पट्टी, ग्रामीणों ने की जांच की मांग


उमरिया

सरकार कहती है - आंगनबाड़ी को सशक्त बनाओ, बच्चों को रोशनी दो, लेकिन पाली जनपद की घुनघुटी ग्राम पंचायत में इसी रोशनी को बेच दिया गया। कागजों पर ऐसा उजाला दिखाया कि पोर्टल चमक उठा, लेकिन धरातल पर 6 आंगनबाड़ी केंद्र आज भी टिमटिमाती ट्यूबलाइट और टेढ़े लटके पंखे की गवाही दे रहे हैं।

मामला  15 वां वित्त आयोग की अनटाइड राशि का है। 21 जनवरी 2026 को वाउचर नंबर  एक्स व्ही एफ सी /2025-26/पी/ 10 से रामकरण लोधी के खाते में 81 हजार रुपये बिजली फिटिंग कार्य के नाम पर डाले गए हैं जो कि वास्तविक बिल से ढाई गुना से भी ज्यादा का देयक लगा कर चूना लगाने की बात उजागर हुई है , भुगतान के मद पर लिखा है  की - 4801 कैपिटल आउटले ऑन रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन, एक्टिविटी कोड 127318791 इलेक्ट्रिक कनेक्शन। नाम इतना भारी-भरकम कि कोई आम ग्रामीण समझ ही न पाए और इसी समझ के अंधेरे का फायदा उठाकर पूरा खेल कर दिया गया।

हकीकत यह है कि प्रत्येक आंगनबाड़ी में सिर्फ 2 ट्यूबलाइट, 1 पंखा और 1 बोर्ड टांगा गया है। वही बाजारू, हल्की क्वालिटी वाला सामान। एक केंद्र में 3 हजार से ज्यादा का सामान नहीं उपयोग किया गया , इस तरह घुनघुटी की 6 आंगनबाड़ी  केंद्रों के मान से  हिसाब लगाया जाये  तो वास्तविक व्यय भी अधिकतम 18 हजार रुपये व्यय बताया जाता है इस पर भी अन्य व्यय का हिसाब भी जोड लिया जाये जैसे मिस्त्री-मजदूरी सहित 25-30 हजार रूपये से अधिक किसी भी कीमत व्यय नहीं हो सकती, फिर 81 हजार का आंकड़ा कहां से आया? इस मामले में जानकर सूत्रों का कहना है कि इस पूरे मामले में  सीधा 50 हजार से ज्यादा की राशि कागजों में ही हजम कर ली गई।

यह विकास नहीं, बच्चों के भविष्य के साथ मजाक है। जिस आंगनबाड़ी में 3 से 6 साल के बच्चे पढ़ते हैं, जहां गर्भवती महिलाओं को पोषण मिलना है, वहां बिजली के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति। वाउचर में चस्पा की गई फोटो 176899281819∼81000 एच टी टी पी / 16 जे पी जी में भी वही एक-दो बोर्ड दिख रहे हैं, लेकिन पोर्टल पर अपलोड होते ही वह फोटो सरकारी ईमानदारी का प्रमाण बन गई।

सवाल सरपंच-सचिव से ही नहीं, उस पूरी निगरानी व्यवस्था से है जो ई-ग्राम स्वराज के नाम पर सिर्फ पीडीएफ अपलोड को ही विकास मान लेती है। बिना भौतिक सत्यापन के पैसा जारी कैसे हो गया? बिना बाजार दर मिलान के 81 हजार का भुगतान किसने पास किया? क्या जनपद और जिला पंचायत के तकनीकी अमले ने कभी घुनघुटी की आंगनबाड़ियों में जाकर स्विच ऑन करके देखा है?

यह घुनघुटी का अकेला किस्सा नहीं है, यह पूरे सिस्टम की सोच है - जहां आंगनबाड़ी की रोशनी से ज्यादा वाउचर की चमक जरूरी है। जहां ट्यूबलाइट की रोशनी नहीं, कमीशन की चकाचौंध देखी जाती है।

अब ग्रामीणों ने कलेक्टर उमरिया से सीधी मांग की है, की घुनघुटी ग्राम पंचायत में आयोजित होने वाली जन विश्वास कार्यक्रम में कम से कम इन आंगनवाड़ी केन्द्रो का एक बार अपने  सामने तकनीकी जांच  कराते हुए  81 हजार के वाउचर का भौतिक सत्यापन कराने की मांग की है। ग्रामीण ने कलेक्टर उमरिया से मांग की है कि सभी  6 आंगनबाड़ियों में लगी सामग्री जब्त कर उनका बाजार मूल्यांकन से तुलनात्मक परीक्षण करते हुए अधिक भुगतान की राशि और वास्तविक बाजार मूल्य के अन्तर की राशि  वसूली के साथ एफआईआर दर्ज हो। वरना यही मान लिया जाएगा कि घुनघुटी में उजाला बांटने के नाम पर अंधेरा परोसा जा रहा है और अधिकारी उसी अंधेरे में आंख बंद किए बैठे हैं।

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