प्रेमचंद जयंती के आयोजन में गूंजी कलम की आवाज, साहित्यकारों की प्रतिमाएं गिराकर उनके विचारों को नहीं मारा जा सकता

प्रेमचंद जयंती के आयोजन में गूंजी कलम की आवाज, साहित्यकारों की प्रतिमाएं गिराकर उनके विचारों को नहीं मारा जा सकता

*14वां राज्य सम्मेलन होगा इंदौर में*


इंदौर

महान कथाकार प्रेमचंद की जयंती के उपलक्ष में आयोजित गोष्ठी में प्रेमचंद के अलावा विख्यात यायावर लेखक राहुल सांकृत्यायन, जन कवि धूमिल को भी याद किया गया। वक्ताओं ने इन लेखकों की रचनाओं का पाठ करते हुए कहा कि साहित्यकारों की प्रतिमाएं गिराकर उनके विचारों को नहीं मारा जा सकता।

प्रगतिशील लेखक संघ का 14वां राज्य सम्मेलन अक्टूबर माह में इंदौर में आयोजित होगा। इसी कार्यक्रम की पृष्ठभूमि में जारी रचनात्मक बैठकों की श्रृंखला के तहत प्रलेसं इकाई द्वारा अभिनव कला समाज सभागृह में गोष्ठी का आयोजन रखा गया था। बैठक को संबोधित करते हुए हरनाम सिंह ने कहा कि एक ही विचारधारा से संचालित राज्यों में लेखकों, स्वतंत्रता संग्राम के नायकों की प्रतिमाएं सुनियोजित तरीके से तोड़ी जा रही है। उन्होंने राहुल सांकृत्यायन की वैचारिक यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि राहुल ने आंख मूंदकर किसी भी विचार को स्वीकार नहीं किया था। सनातन धर्म से प्रारंभ होकर आर्य समाज, बौद्ध धर्म से होते हुए उनकी जीवन यात्रा मार्क्सवाद पर आकर समाप्त हो गई। फिर वे जीवन पर इसी विचारधारा के साथ बने रहे।

गोष्ठी का संचालन करते हुए आयोजन की समन्वयक सारिका श्रीवास्तव ने जनकवि धूमिल का जीवन परिचय देते हुए कहा कि वे एक विद्रोही कवि थे। उनका गुस्सा किसी व्यक्ति के नहीं अपितु शोषण की व्यवस्था के खिलाफ था। राहुल सांकृत्यायन ने तिब्बत से दुर्लभ बौद्ध साहित्य लाकर भारतीय ज्ञान परंपरा को समृद्ध करने का ऐतिहासिक कार्य किया। हिंदी के लोकप्रिय लेखक प्रेमचंद का अधिकांश लेखन उर्दू में था।

गोष्ठी में युवा लेखक रवि अहिरवार ने धूमिल की कविता के वाचन पश्चात कहा कि अपने प्रगतिशील चिंतन के चलते ये लेखक आज भी प्रासंगिक बने हुए हैं। प्रेमचंद कालीन विसंगतियां वर्तमान समाज में भी मौजूद है। साहित्य केवल मनोरंजन नहीं है वह अपने समय के सवालों को उठाने का माध्यम भी है। विवेक मेहता के अनुसार राहुल सांकृत्यायन ने अपने समय के रूढ़िवादी समाज के अंधविश्वासों को चुनौती दी थी। उनकी पुस्तक तुम्हारी क्षय पढ़ी जानी चाहिए।

चुन्नीलाल वाधवानी ने कहा कि प्रगतिशील लेखक संघ धर्मनिरपेक्ष संगठन है। पाठकों को निरंतर अध्ययन करते रहना चाहिए।

प्रेमचंद का जीवन परिचय गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे इकाई अध्यक्ष डॉक्टर जाकिर हुसैन ने दिया। प्रेमचंद की कहानी "भाई साहब" का वाचन नीपा पंड्या ने किया। अभय लोधी ने राहुल की रचना "जात पात की क्षय" पढ़ी। धूमिल की कविताओं का पाठ विवेक, नेहा दुबे ने किया। राम आसरे पांडे ने प्रेमचंद पर स्वरचित कविता पढ़ी। विजय दलाल ने भी अपने विचार व्यक्त किये। गोष्ठी में प्रमोद बागड़ी, अरविंद पोरवाल, जावेद आलम, आकाश,लेखराज, शबाना पारेख, देशराज, आकाश सिंह राठौड़, अथर्व शिन्त्रें की उपस्थिति महत्वपूर्ण थी।

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