पंचायत का विकास ठप्प, सचिव लापता, राजनैतिक दलो के मंच बन जाते हैं, अधिकारी मौन, ग्रामीण परेशान
*शिकायत के बाद भी जिला पंचायत से अभयदान*
उमरिया
करकेली जनपद पंचायत के देवगवा खुर्द ग्राम पंचायत के सचिव भंडारी सिंह ने इसे अपनी मर्जी का दूसरा नाम दे दिया है। पूरे जिले की नजरें भाजपा के जिला स्तरीय कार्यक्रम पर टिकी थीं, तब मंच की पहली कतार में देवगवा खुर्द के सचिव साहब विराजमान थे और ठीक उसी वक्त उनके गांव में पंचायत भवन के दरवाजे पर सालों से लटका ताला अपनी कहानी खुद कह रहा था। ग्रामीणों का सीधा कहना है कि साहब ने आज तक पंचायत का रुख तक नहीं किया। महीने में एक दिन आना तो दूर, कभी-कभार भी दिखाई नहीं देते।
मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण कहता है की कोई शासकीय सेवक किसी राजनीतिक दल के मंच पर नहीं बैठ सकता, लेकिन सचिव भंडारी सिंह के लिए ये नियम सिर्फ कागजो पर हैं। यह पहला मौका नहीं है जब वे भाजपा और आरएस के कार्यक्रमों में मंचासीन दिखे हों। इससे पहले भी कई बार उनकी तस्वीरें मंचों से सामने आ चुकी हैं। ग्रामीणों ने तंग आकर इसकी लिखित शिकायत जिला पंचायत के मुख्य कार्य पालन अधिकारी तक पहुंचाई थी कि सचिव ड्यूटी नहीं करते और पूरा समय सियासत में देते हैं, लेकिन शिकायत के बाद न कोई जांच हुई, न कोई कार्रवाई। अब गांव में चर्चा है कि आवाज कमजोर है या फिर संरक्षण इतना मजबूत है कि नियम भी झुक जाते हैं।
सचिव को पंचायत के विकास से कोई मतलब नहीं है। उनकी पूरी दिलचस्पी ऊंचेहरा के प्रसिद्ध ज्वाला धाम में है। आरोप है कि वहां रोज लाखों रुपये का चढ़ावा आता है और उसका सीधा संचालन इन्ही के व्दारा किया जाता है, साथ ही उन पर ग्राम पंचायत ऊंचेहरा की सरकारी परिसंपत्तियों पर कब्जे के आरोप भी लगे हैं। जब अधिकारी ही पंचायत में पैर नहीं रखेगा तो आवास, शौचालय, पेंशन और नाली सड़क की फाइलें कौन देखेगा। इसी वजह से गांव के लोग सालों से दफ्तरों के चक्कर काटकर लौट आते हैं।
सरपंच और ग्रामीणों से बयान लेकर यह पता किया जाए कि पिछले एक साल में सचिव कितने दिन पंचायत आए। जनपद और जिला पंचायत की बैठकों का हाजरी रजिस्टर खंगाला जाए और यह भी देखा जाए कि एक सरकारी सेवक सरकारी ड्यूटी छोड़कर धार्मिक स्थल के संचालन में कैसे व्यस्त है। शिकायत हो चुकी है, मंच की तस्वीर सबूत है।
