अमरकंटक में आस्था भी ‘शुल्क’ के घेरे में, अलग-अलग स्थानों पर शुल्क वसूली पर पर्यटकों का सवाल
अनूपपुर
मां नर्मदा की उद्गम भूमि, प्रमुख धार्मिक एवं आध्यात्मिक तीर्थस्थल तथा प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण पवित्र नगरी अमरकंटक में देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु और पर्यटक आस्था, अध्यात्म एवं प्रकृति का आनंद लेने पहुंचते हैं। लेकिन वर्तमान समय में अमरकंटक के विभिन्न दर्शनीय एवं पर्यटन स्थलों पर अलग-अलग मदों में लिए जा रहे शुल्क को लेकर पर्यटकों के बीच चर्चा और सवाल उठने लगे हैं।
पर्यटकों के अनुसार वर्तमान में अमरकंटक में करीब सात अलग-अलग स्थानों अथवा सुविधाओं के नाम पर शुल्क लिया जा रहा है। इनमें रामघाट एवं इंद्रदमन तालाब के पास पार्किंग शुल्क, दिगंबर जैन सर्वोदय तीर्थ क्षेत्र में पार्किंग शुल्क, सोनमुड़ा में ग्लास व्यू-प्वाइंट शुल्क, रामघाट में रामसेतु झूला पुल का शुल्क, कपिलधारा में पार्किंग शुल्क, कपिलधारा ग्लास व्यू-प्वाइंट का शुल्क तथा कपिलधारा पार्किंग से ग्लास व्यू-प्वाइंट की ओर जाने वाले मार्ग पर बैरियर पर लिया जाने वाला शुल्क शामिल बताया जा रहा है।
इन विभिन्न स्थानों पर लिए जा रहे शुल्क को लेकर पर्यटकों के बीच एक अहम सवाल यह भी है कि इनमें से कौन-कौन से शुल्क शासकीय हैं, कौन से अधिकृत संस्थाओं द्वारा लिए जा रहे हैं और किस शुल्क के बदले कौन-कौन सी सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी हैं? कई स्थानों पर शुल्क की अधिकृतता और उसके उपयोग को लेकर आम पर्यटकों के बीच स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं होने से पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
पर्यटकों का कहना है कि शुल्क लेने से उन्हें मूलतः कोई आपत्ति नहीं है। यदि पर्यटन स्थलों के रखरखाव, स्वच्छता, सुरक्षा, पार्किंग और सुविधाओं के विकास के लिए शुल्क आवश्यक है तो इसे व्यवस्थित एवं पारदर्शी तरीके से लिया जाना चाहिए। अमरकंटक के विभिन्न पर्यटन स्थलों पर अलग-अलग शुल्क लेने के बजाय एक ही निर्धारित स्थान पर एकीकृत पर्यटन शुल्क लिया जाए।
