धनवार पंचायत में एक फर्म को 1.09 लाख का एक ही यू टी आर से दोहरा भुगतान, 9 माह में 4.91 लाख का घोटाला

धनवार पंचायत में एक फर्म को 1.09 लाख का एक ही यू टी आर से दोहरा भुगतान, 9 माह में 4.91 लाख का घोटाला

*ग्रामीणों ने कलेक्टर से कार्यवाही की मांग*


उमरिया

जिले की जनपद पंचायत करकेली की ग्राम पंचायत धनवार में "विकास" के नाम पर शासकीय खजाने की खुली लूट का मामला सामने आया है। पंचायत दर्पण पोर्टल पर दर्ज 66 बिलों ने साबित कर दिया है कि 20 नवम्बर 2024 से 15 अगस्त 2025 तक सिर्फ 9 महीने में ₹4,91,410 का बंदरबांट कर शासन की तिजोरी को लंबी चपत लगाई गई। 

स्थानीय निवासियों ने कलेक्टर उमरिया को 5 पृष्ठीय शिकायत पत्र देकर सरपंच मोलिया कोल, सचिव विनोद कुमार धुर्वे और रोजगार सहायक रीता सिंह पर 166 धुंधले फर्जी बिल लगाकर गबन करने का गंभीर आरोप लगाया है। शिकायत में कहा गया है कि तीनों की मिलीभगत से नियमों को ताक पर रखकर अपने चहेतों को मालामाल किया गया। पंचायत दर्पण के आंकड़े चीख-चीख कर बता रहे हैं कि विकास सिंह को चबूतरा और जनचौपाल निर्माण के नाम पर 9 बार में ₹1,09,625 का भुगतान किया गया। इतना ही नहीं एक ही यू टी आर क्र 3316633 से एक ही दिन में दो बार भुगतान करके सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए गए। 

जिस चबूतरे और जनचौपाल के नाम पर लाखों की राशि उड़ाई गई वह आज तक धरातल पर नहीं दिखे। अगर निर्माण पूरे हो जाते तो माना जाता पैसा लगा, लेकिन यहां न पैसा बचा न काम हुआ। इसी तरह भारत माइनिंग एंड कंस्ट्रक्शन को अर्दर मेंटीनेंस के नाम पर एक ही दिन यू टी आर क्र 3508799 से 2 बार ₹20,000_ का भुगतान किया गया। पंचायत ने तो ऑफिस खर्च को एटीएम मशीन बना रखा है। "ऑफिस एक्सपेंसिव" के नाम पर 8 महीने में 29 बार ₹1,40,159 आहरित किए गए। 08 अगस्त 2024 को _अमित ट्रेडर्स को एकमुश्त ₹35,400 और 06 अप्रैल 2025 को एक ही दिन 3 लोगों को ₹2100-₹2100 के मान से बांट दिए गए। सवाल यह है कि आखिर किस ऑफिस में इतना खर्च होता है। पंचायत दर्पण पर अपलोड किए गए बिल भी किसी काम के नहीं हैं। सभी बिल धुंधले, बिना GST, बिना टेंडर, बिना माप पुस्तिका के हैं। 

शिकायतकर्ता का आरोप है कि जानबूझकर धुंधली कॉपी अपलोड की गई ताकि कोई पकड़ न सके। जिस पंचायत दर्पण पोर्टल को पारदर्शिता के लिए बनाया गया था वह अब धोखे का सबसे बड़ा जरिया बन गया है। मनरेगा योजना में भी परिवारवाद का बोलबाला रहा। आरोप है कि सरपंच पति मंगल कोल, पुत्र सूरज कोल और पूरे परिवार की फर्जी हाजरी लगाकर मनरेगा की राशि डकार ली गई। ग्रामीणों में इस लूट को लेकर भारी आक्रोश है। उनका कहना है "चबूतरा नहीं बना, जनचौपाल कागजों में ही है, लेकिन पैसा निकल गया। यह गरीबों के हक का पैसा है। जिम्मेदारों पर तुरंत एफआईआर होनी चाहिए।" सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह तो सिर्फ इस पंचवर्षीय के 9 महीने का काला चिट्ठा है। अगर पूरे कार्यकाल की बारीकी से जांच की जाए तो यह राशि करोड़ों के वारा-न्यारा को उजागर करेगी। 

9 महीने में साढ़े 4 लाख तो पूरे 5 साल में कितना होगा इसका अंदाजा सहज लगाया जा सकता है। शिकायतकर्ता ने कलेक्टर से मांग की है कि सरपंच पर धारा 40, सचिव पर धारा 92 और रोजगार सहायक पर नरेगा नियम के तहत तुरंत निलंबन की कार्रवाई की जाए। साथ ही भारतीय दण्ड संहिता 409, 420, 467 के तहत एफआईआर दर्ज कर पूरी राशि की वसूली की जाए। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि पंचायत दर्पण पर इतनी बड़ी अनियमितता उजागर होने के बाद भी जनपद और जिला पंचायत के अधिकारी कब तक आंख बंद करके बैठे रहेंगे। क्या जांच सिर्फ कागजों तक सीमित रहेगी या दोषियों पर कठोर कार्रवाई होगी। अब गेंद कलेक्टर उमरिया के पाले में है और ग्रामीणों को न्याय की आस बनी हुई है।

कलेक्टर  से ग्रामीणों ने  मांग की है की मामले की जांच दल गठित कर स्थल सत्यापन, तकनीकी जांच और ऑडिट कराया जाए। दोषियों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई के साथ समस्त राशि की वसूली कर उसे शासकीय खाते में जमा किया जाए, अन्यथा ग्रामीण लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन को मजबूर होंगे।

Labels:

Post a Comment

MKRdezign

,

संपर्क फ़ॉर्म

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget