नगरपालिका बाजार क्षेत्र के 294 परिवारों ने भू-अधिकार के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया
अनूपपुर
नगरपालिका परिषद कोतमा के बाजार एरिया स्थित नजूल भूमि पर वर्षों से निवास और व्यवसाय कर रहे 294 परिवारों ने स्थायी भू-अधिकार एवं ऋण पुस्तिका (भूमि स्वामित्व अधिकार) की मांग को लेकर मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर में याचिका दायर की है।
याचिका में बताया गया है कि बाजार क्षेत्र के निवासी रीवा रियासत के महाराजा गुलाब सिंह के शासनकाल तथा मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता, 1959 लागू होने से पहले से इस भूमि पर काबिज हैं। उनका कहना है कि वर्ष 1946-47 में इस क्षेत्र की व्यवस्थित प्लॉटिंग कर बाजार बसाया गया था और तब से लोग अपने मकान एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठान बनाकर लगातार रह रहे हैं।
याचिका के अनुसार वर्तमान में बाजार क्षेत्र में 294 आवासीय एवं व्यावसायिक भवन स्थित हैं। राजस्व अभिलेखों में यह भूमि नजूल के रूप में दर्ज है, जबकि नागरिक लंबे समय से यहां रहकर नगरपालिका को कर एवं अन्य शुल्क भी अदा करते रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें आज तक भूमि का स्वामित्व अधिकार नहीं मिल सका है।
याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि उन्हें केवल लीज पर भूमि देने के बजाय स्थायी भू-अधिकार एवं ऋण पुस्तिका प्रदान कर मालिकाना हक दिया जाए, ताकि भविष्य में उन्हें किसी प्रकार की कानूनी या प्रशासनिक परेशानी का सामना न करना पड़े।
इस मामले में बाजार क्षेत्र के कई नागरिक याचिकाकर्ता हैं। उच्च न्यायालय ने मामले की प्रारंभिक सुनवाई करते हुए राज्य शासन से जवाब तलब किया है। अब स्थानीय नागरिकों को उम्मीद है कि न्यायालय के हस्तक्षेप से वर्षों पुरानी भू-अधिकार की मांग का समाधान निकल सकेगा।
