लूट, शोषण, अत्याचार और भ्रष्टाचार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई, विशाल जुलूस के साथ प्रदर्शन, सभा कर सौंपा ज्ञापन

*मांगें पूरी नहीं हुईं तो 11 दिसंबर से अनिश्चितकालीन धरना*


अनूपपुर

लूट, शोषण, अत्याचार, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अव्यवस्थाओं के खिलाफ अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति, संयुक्त ठेकेदारी मजदूर यूनियन सीटू एवं मध्यप्रदेश किसान सभा के संयुक्त आह्वान पर जैतहरी में विशाल जुलूस, प्रदर्शन एवं जनसभा का आयोजन किया गया। बस स्टैंड जैतहरी से निकला जुलूस नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए एसडीएम कार्यालय पहुंचा, जहां प्रदर्शन के बाद सभा आयोजित कर विभिन्न जनसमस्याओं एवं श्रमिकों की मांगों से संबंधित ज्ञापन तहसीलदार को सौंपा गया।

संयुक्त ठेकेदारी मजदूर यूनियन सीटू के नेता जुगुल किशोर राठौर ने कहा कि मजदूरों के बीच भेदभाव और शोषण अपनी चरम सीमा पर पहुंच चुका है। इसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मजदूर, किसान, महिलाएं और आम जनता अपने अधिकारों के लिए एकजुट होकर संघर्ष को और तेज करेंगे।

सभा को मुख्य वक्ता के रूप में भोपाल से पहुंचीं अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की राज्य उपाध्यक्ष नीना शर्मा ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आज देश की आम जनता महंगाई, बेरोजगारी, शोषण और भ्रष्टाचार से त्रस्त है। 

केंद्र और मध्यप्रदेश सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदेश पर लगातार कर्ज बढ़ रहा है। विधवा एवं वृद्धावस्था पेंशन जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए धन की कमी बताई जाती है, लेकिन महंगे विमानों और सरकारी आयोजनों पर खर्च करने में कोई कमी नहीं दिखाई देती। 

1 से 3 दिसंबर तक सीटू के आह्वान पर दिल्ली में मजदूरों का तीन दिवसीय आंदोलन आयोजित होगा। वहीं अखिल भारतीय किसान सभा का राष्ट्रीय सम्मेलन 15 से 18 नवंबर तक तेलंगाना में आयोजित किया जाएगा, जिसमें किसान आंदोलन की आगामी रणनीति तय होगी। मांगों का समय-सीमा के भीतर निराकरण नहीं किया गया तो आगामी 11 दिसंबर से सोन नदी में बने बैराज के पहुंच मार्ग पर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू किया जाएगा।

तहसील में प्रशासनिक अव्यवस्था, रीडर के अभाव में राजस्व न्यायालय का कामकाज प्रभावित, जनता परेशान

*तहसीलदार ने कमिश्नर को पत्र लिखकर अभिषेक अवस्थी की वापसी का किया अनुरोध, अब प्रशासनिक निर्णय पर टिकी निगाहें*


रीवा

तहसील रायपुर कर्चुलियान में प्रवाचक (रीडर) लिपिक की अनुपलब्धता से राजस्व न्यायालय की कार्यप्रणाली प्रभावित होने का मामला सामने आया है। कार्यालय में लिपिकीय व्यवस्था की कमी का सीधा असर अब आम नागरिकों, किसानों, पक्षकारों और अधिवक्ताओं पर पड़ रहा है। राजस्व प्रकरणों की सुनवाई से लेकर नए मामलों की फाइलिंग और कार्यालयीन प्रक्रियाओं तक में परेशानियों की शिकायतें सामने आ रही हैं।

प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, कमिश्नर रीवा संभाग कार्यालय द्वारा 13 सितंबर 2026 को जारी आदेश के माध्यम से तहसील रायपुर कर्चुलियान में पदस्थ सहायक ग्रेड-3 अभिषेक अवस्थी को आगामी आदेश तक अस्थायी रूप से कमिश्नर कार्यालय में कार्य करने हेतु संलग्न किया गया था। इसके बाद तहसील कार्यालय में लिपिकीय व्यवस्था को लेकर संकट की स्थिति निर्मित हो गई।

मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि तहसीलदार रायपुर कर्चुलियान ने स्वयं 15 अक्टूबर 2026 को कमिश्नर रीवा संभाग को पत्र क्रमांक 219/स्था./रायपुर कर्चु./2026 प्रेषित कर उक्त आदेश निरस्त करने तथा अभिषेक अवस्थी को पुनः तहसील में पदस्थ किए जाने का अनुरोध किया।

तहसीलदार ने अपने पत्र में तहसील के अंतर्गत संचालित तीनों सर्किलों में लिपिकीय व्यवस्था का उल्लेख करते हुए बताया है कि उपलब्ध कर्मचारियों पर पहले से ही कार्यभार है। ऐसे में अभिषेक अवस्थी के कमिश्नर कार्यालय में संलग्नीकरण से तहसील के महत्वपूर्ण कार्यालयीन एवं राजस्व संबंधी कार्य प्रभावित हो रहे हैं। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि उनके स्थान पर कार्य सौंपने के लिए कार्यालय में कोई अन्य लिपिक उपलब्ध नहीं है।

सवाल यह है कि जब तहसील का जिम्मेदार अधिकारी स्वयं लिपिक की कमी और कामकाज प्रभावित होने की स्थिति से कमिश्नर को अवगत करा चुका है, तब भी इस समस्या के निराकरण में देरी क्यों हो रही है?

स्थानीय अधिवक्ताओं एवं आम पक्षकारों के अनुसार, रीडर के अभाव में प्रकरणों में नियमित कार्यवाही प्रभावित हो रही है। कई पक्षकारों को अगली पेशी मिल रही है, वहीं नए प्रकरणों की फाइलिंग एवं अन्य प्रक्रियाओं के लिए भी भटकना पड़ रहा है। इसका सबसे अधिक खामियाजा उन आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है, जो अपनी जमीन, बंटवारे, नामांतरण एवं अन्य राजस्व संबंधी विवादों के निराकरण के लिए तहसील न्यायालय पहुंचते हैं।

इस संबंध में तहसील न्यायालय में कार्यरत अधिवक्ताओं एवं आम नागरिकों ने कमिश्नर रीवा संभाग और कलेक्टर रीवा का ध्यान आकृष्ट कराते हुए मांग की है कि अभिषेक अवस्थी का संलग्नीकरण तत्काल समाप्त कर उन्हें पुनः तहसील रायपुर कर्चुलियान में पदस्थ किया जाए अथवा रीडर के पद पर तत्काल वैकल्पिक कर्मचारी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

अब निगाहें कमिश्नर रीवा संभाग एवं जिला प्रशासन के निर्णय पर हैं। महत्वपूर्ण सवाल यह नहीं कि एक कर्मचारी कहां पदस्थ है, बल्कि यह है कि उसके कारण प्रभावित हो रही जनसेवा और राजस्व न्यायालय की व्यवस्था को सुचारु बनाने के लिए प्रशासन कब ठोस कदम उठाता है।

जेल में दर्द से तड़प रहे, आशाराम बापू ने कहा की इलाज नही करा सकते तो मुझे मुझे जहर का इंजेक्शन दे दो

*निजी डॉक्टर भोला ने जेल प्रशासन पर लगाए हत्या की साजिश के गंभीर आरोप*


 *न्यू दिल्ली से पत्रकार ऊषा माहना*

नई दिल्ली

दिल्ली सेंट्रल जेल में बंद 87 वर्षीय बापू आशाराम के स्वास्थ्य को लेकर एक बेहद चौंकाने वाली और गंभीर खबर सामने आई है। उनके निजी डॉक्टर भोला ने जेल प्रशासन पर लापरवाही और एक गहरी साजिश रचने का आरोप लगाया है। डॉक्टर भोला का दावा है कि बापू आशाराम जेल में एक गंभीर और जानलेवा बीमारी से तड़प रहे हैं, लेकिन उन्हें न्यायालय के आदेशों के बावजूद उचित आयुर्वेदिक इलाज नहीं दिया जा रहा है। दर्द से बेहाल होकर बापू आशाराम ने यहाँ तक कह दिया है कि "अगर मेरा इलाज नहीं करवा सकते, तो मुझे यहीं जहर का इंजेक्शन दे दो।"

*रात 10 बजे की मेडिकल इमरजेंसी और जेल की बदहाली*

डॉक्टर भोला ने घटना का विवरण देते हुए बताया कि रात करीब 10 बजे उनके पास जेल से एक इमरजेंसी कॉल आई। बापू आशाराम को 'ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया' (Trigeminal Neuralgia) का भयंकर अटैक आया था। आयुर्वेद में इसे 'त्रिनाड़ी शूल' कहा जाता है, जो दुनिया के सबसे भयंकर दर्दों में से एक है, जिसे मेडिकल साइंस में 'सुसाइड डिसीज' (Suicide Disease) भी कहते हैं।

डॉक्टर भोला जब भागे-भागे सेंट्रल जेल पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि बापू आशाराम दर्द से तड़प रहे थे, उनके हाथ-पैर चल रहे थे, पसीना आ रहा था और ब्लड प्रेशर (BP) खतरनाक स्तर तक बढ़ चुका था। डॉक्टर भोला का आरोप है कि इतनी बड़ी इमरजेंसी के वक्त जेल के अस्पताल में न तो कोई ड्यूटी डॉक्टर मौजूद था और न ही कोई नर्सिंग स्टाफ।

*एलोपैथिक दर्द निवारक पर रोक, फिर भी आयुर्वेदिक इलाज से इनकार*

डॉक्टर भोला ने बताया कि दिल्ली एम्स (AIIMS) के गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट ने बापू आशाराम को एलोपैथिक दर्द निवारक (Painkillers) देने से सख्त मना किया है, क्योंकि इससे उनके हाथों और पेट में रक्तस्राव (Internal Bleeding) का खतरा है। ऐसे में इस असहनीय दर्द को केवल आयुर्वेदिक 'शिरोधारा' और पंचकर्म के जरिए ही नियंत्रित किया जा सकता है, जिसकी सुविधा 'आरोग्यम' अस्पताल में उपलब्ध है।

सुप्रीम कोर्ट और राजस्थान हाईकोर्ट ने भी अपने आदेशों में स्पष्ट किया है कि उन्हें अपनी पसंद के मेडिकल केयरगिवर से इलाज लेने का अधिकार है। इसके बावजूद, जेल अधीक्षक और जेल के डॉक्टर उन्हें आरोग्यम अस्पताल शिफ्ट करने से साफ इनकार कर रहे हैं और जबरन एम्स भेजने की बात कर रहे हैं। एसपी स्तर के अधिकारियों ने तो इस इमरजेंसी के वक्त फोन तक उठाने से मना कर दिया।

*"यह कोई सामान्य लापरवाही नहीं, बल्कि गहरी साजिश है"*

बापू आशाराम के निजी चिकित्सक ने जेल प्रशासन, विशेषकर डीजी जेल और सुपरिंटेंडेंट की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। डॉक्टर भोला ने सीधा आरोप लगाते हुए कहा, "यह निरा अत्याचार और तानाशाही है। ऐसा लगता है कि यह एक सोची-समझी गहरी साजिश है। जेल प्रशासन जानबूझकर उन पर इतना दबाव और प्रताड़ना डाल रहा है ताकि दर्द और तनाव के कारण उन्हें हार्ट अटैक आ जाए और जेल के अंदर ही उनकी जान चली जाए।"

*दर्द से आहत संत के मार्मिक शब्द*

जेल प्रशासन की इस अमानवीयता और अपने असहनीय दर्द से टूट चुके 87 वर्षीय बापू आशाराम ने बीती रात निराशा में जो कहा, वह किसी को भी विचलित कर सकता है। डॉक्टर भोला के मुताबिक, तड़पते हुए बापू जी ने तीन-चार बार कहा, "यार, अगर तुम लोग मेरा इलाज नहीं करवा सकते हो, मुझे आरोग्यम नहीं भेज सकते, तो एक काम करो, मुझे जहर का इंजेक्शन लगा दो। मुझे यहीं मार दो, मैं तैयार हूँ।"

डॉक्टर भोला की इन सनसनीखेज चेतावनियों के बाद अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या देश की जेलों में बुजुर्ग और बीमार कैदियों के मानवाधिकारों का कोई मोल नहीं है? और क्या न्यायपालिका के आदेशों की इस तरह खुलेआम अवमानना करने वाले जेल अधिकारियों पर कोई कार्रवाई होगी?

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