तहसील में प्रशासनिक अव्यवस्था, रीडर के अभाव में राजस्व न्यायालय का कामकाज प्रभावित, जनता परेशान
*तहसीलदार ने कमिश्नर को पत्र लिखकर अभिषेक अवस्थी की वापसी का किया अनुरोध, अब प्रशासनिक निर्णय पर टिकी निगाहें*
रीवा
तहसील रायपुर कर्चुलियान में प्रवाचक (रीडर) लिपिक की अनुपलब्धता से राजस्व न्यायालय की कार्यप्रणाली प्रभावित होने का मामला सामने आया है। कार्यालय में लिपिकीय व्यवस्था की कमी का सीधा असर अब आम नागरिकों, किसानों, पक्षकारों और अधिवक्ताओं पर पड़ रहा है। राजस्व प्रकरणों की सुनवाई से लेकर नए मामलों की फाइलिंग और कार्यालयीन प्रक्रियाओं तक में परेशानियों की शिकायतें सामने आ रही हैं।
प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, कमिश्नर रीवा संभाग कार्यालय द्वारा 13 सितंबर 2026 को जारी आदेश के माध्यम से तहसील रायपुर कर्चुलियान में पदस्थ सहायक ग्रेड-3 अभिषेक अवस्थी को आगामी आदेश तक अस्थायी रूप से कमिश्नर कार्यालय में कार्य करने हेतु संलग्न किया गया था। इसके बाद तहसील कार्यालय में लिपिकीय व्यवस्था को लेकर संकट की स्थिति निर्मित हो गई।
मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि तहसीलदार रायपुर कर्चुलियान ने स्वयं 15 अक्टूबर 2026 को कमिश्नर रीवा संभाग को पत्र क्रमांक 219/स्था./रायपुर कर्चु./2026 प्रेषित कर उक्त आदेश निरस्त करने तथा अभिषेक अवस्थी को पुनः तहसील में पदस्थ किए जाने का अनुरोध किया।
तहसीलदार ने अपने पत्र में तहसील के अंतर्गत संचालित तीनों सर्किलों में लिपिकीय व्यवस्था का उल्लेख करते हुए बताया है कि उपलब्ध कर्मचारियों पर पहले से ही कार्यभार है। ऐसे में अभिषेक अवस्थी के कमिश्नर कार्यालय में संलग्नीकरण से तहसील के महत्वपूर्ण कार्यालयीन एवं राजस्व संबंधी कार्य प्रभावित हो रहे हैं। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि उनके स्थान पर कार्य सौंपने के लिए कार्यालय में कोई अन्य लिपिक उपलब्ध नहीं है।
सवाल यह है कि जब तहसील का जिम्मेदार अधिकारी स्वयं लिपिक की कमी और कामकाज प्रभावित होने की स्थिति से कमिश्नर को अवगत करा चुका है, तब भी इस समस्या के निराकरण में देरी क्यों हो रही है?
स्थानीय अधिवक्ताओं एवं आम पक्षकारों के अनुसार, रीडर के अभाव में प्रकरणों में नियमित कार्यवाही प्रभावित हो रही है। कई पक्षकारों को अगली पेशी मिल रही है, वहीं नए प्रकरणों की फाइलिंग एवं अन्य प्रक्रियाओं के लिए भी भटकना पड़ रहा है। इसका सबसे अधिक खामियाजा उन आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है, जो अपनी जमीन, बंटवारे, नामांतरण एवं अन्य राजस्व संबंधी विवादों के निराकरण के लिए तहसील न्यायालय पहुंचते हैं।
इस संबंध में तहसील न्यायालय में कार्यरत अधिवक्ताओं एवं आम नागरिकों ने कमिश्नर रीवा संभाग और कलेक्टर रीवा का ध्यान आकृष्ट कराते हुए मांग की है कि अभिषेक अवस्थी का संलग्नीकरण तत्काल समाप्त कर उन्हें पुनः तहसील रायपुर कर्चुलियान में पदस्थ किया जाए अथवा रीडर के पद पर तत्काल वैकल्पिक कर्मचारी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
अब निगाहें कमिश्नर रीवा संभाग एवं जिला प्रशासन के निर्णय पर हैं। महत्वपूर्ण सवाल यह नहीं कि एक कर्मचारी कहां पदस्थ है, बल्कि यह है कि उसके कारण प्रभावित हो रही जनसेवा और राजस्व न्यायालय की व्यवस्था को सुचारु बनाने के लिए प्रशासन कब ठोस कदम उठाता है।
