जमीन पर बैठे किसान, कुर्सियां पर जमे रहे कंपनी के अधिकारी, रक्सा-कोलमी की तस्वीर ने खड़े किए सम्मान पर सवाल
जमीन पर बैठे किसान, कुर्सियां पर जमे रहे कंपनी के अधिकारी, रक्सा-कोलमी की तस्वीर ने खड़े किए सम्मान पर सवाल
अनूपपुर
पावर प्लांट के लिए अपनी जमीन देने वाले किसान दरी पर बैठे नजर आए, जबकि कंपनी के अधिकारी कुर्सियों पर बैठे दिखाई दिए। अनूपपुर जिले के रक्सा-कोलमी क्षेत्र की इस तस्वीर ने किसानों के सम्मान और बैठक में उनके साथ किए जा रहे व्यवहार को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। तस्वीर सामने आने के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर अन्नदाताओं के स्वाभिमान और सम्मान को कितनी प्राथमिकता दी जा रही है।
किसान अपनी जमीन देकर विकास परियोजनाओं के लिए महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। ऐसे में उनसे जुड़े कार्यक्रमों में बैठने की व्यवस्था और व्यवहार में सम्मानजनक समानता का ध्यान रखना भी जरूरी है। लेकिन रक्सा-कोलमी की सामने आई तस्वीर में किसानों और कंपनी के अधिकारियों के बैठने की व्यवस्था में अंतर दिखाई देने से असहज स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं।
इस तस्वीर को लेकर लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि जब जमीन देने वाले किसान ही दरी पर बैठने को मजबूर हों और कंपनी के अधिकारी कुर्सियों पर नजर आएं, तो किसानों को मिलने वाले सम्मान की वास्तविक तस्वीर क्या है? यह दृश्य कई लोगों को ब्रिटिश हुकूमत के दौर की याद दिला रहा है, जब सत्ता और आम जनता के बीच भेदभाव की छवि देखने को मिलती थी।
हालांकि, केवल तस्वीर के आधार पर बैठक की पूरी परिस्थितियों या व्यवस्था के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं होती। ऐसे में कंपनी प्रबंधन का पक्ष सामने आना भी जरूरी है।
पावर प्लांट जैसी परियोजनाओं में किसानों की भूमिका और उनके हितों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जमीन देने वाले किसानों के साथ सम्मानजनक व्यवहार, उचित संवाद और समान सुविधाएं सुनिश्चित करना कंपनी प्रबंधन की सामाजिक जिम्मेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा है।




