अखिल भारतीय सांस्कृतिक प्रतिरोध अभियान ‘हम देखेंगे’ की मांग, मुख्य चुनाव आयुक्त त्यागपत्र दें

 *नागरिकों के मतदान के अधिकार पर उठे सवालों के जवाब मिलने ही चाहिए।*


नई दिल्ली

अखिल भारतीय सांस्कृतिक प्रतिरोध अभियान ‘हम देखेंगे’ निर्वाचन आयोग के हालिया घटनाक्रम को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करता है।

            23 सितंबर को द इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित एक विस्तृत रिपोर्ट में बताया गया कि निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले दस महीनों के दौरान निर्वाचन आयोग के कामकाज से संबंधित कम-से-कम 14 मामलों में औपचारिक आपत्तियाँ दर्ज कीं। रिपोर्ट के अनुसार इन आपत्तियों का संबंध नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता-सूची से नाम हटाने और बहाल करने, निर्वाचन संबंधी सॉफ़्टवेयर तथा मतदाता-सूची के डिजिटल नियंत्रण जैसे महत्वपूर्ण विषयों से था। दोनों निर्वाचन आयुक्तों ने कुछ कार्रवाइयों को “अनधिकृत” और “अवैध” बताया तथा निर्वाचन संबंधी आँकड़ों के केंद्रीकरण और वैधानिक अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी प्रश्न उठाए।

             जनवादी लेखक संघ, जन संस्कृति मंच, प्रगतिशील लेखक संघ, भारतीय जन नाट्य संघ ( इप्टा) अखिल भारतीय दलित लेख का मंच द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि जुलाई 2026 में  फार्म 6 में ऐसा प्रश्न जोड़ा गया, जिसे लेकर निर्वाचन आयुक्त विवेक जोशी ने मई में आपत्ति दर्ज की थी और सुखबीर सिंह संधू ने बाद में इसे अनाधिकृत और गैरकानूनी  बताते हुए हटाने की माँग की थी।

             मतदाता-सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर भी गंभीर प्रश्न उठे हैं। द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार राष्ट्रीय स्तर पर एस आई  आर के मसौदा मतदाता-सूचियों में 13 करोड़ से अधिक नाम प्रभावित हुए हैं। पश्चिम बंगाल में मतदाता-सूची से संबंधित विवादों के बीच सर्वोच्च न्यायालय ने SIR की प्रक्रिया के एक हिस्से में न्यायिक अधिकारियों की भूमिका तय की थी।

           इन घटनाक्रम के बीच 25 सितंबर को दिल्ली के जंतर मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े और गिरफ्तारी की माँग को लेकर प्रदर्शन हुआ, जिसमें दीपांकर भट्टाचार्य, योगेंद्र यादव, नेहा वोरा समेत अनेक नेताओं और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया।

             हमारे लिए इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न है —भारत के प्रत्येक नागरिक के मतदान के अधिकार, मतदाता-सूची की विश्वसनीयता और निर्वाचन आयोग की संस्थागत पारदर्शिता ।

           भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत निर्वाचन आयोग को स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने की जिम्मेदारी दी गई है। 2023 के कानून की धारा 18 के अनुसार आयोग का काम, जहाँ तक संभव हो, सर्वसम्मति से किया जाना है और मतभेद की स्थिति में बहुमत की राय के अनुसार निर्णय होना है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दोनों निर्वाचन आयुक्तों द्वारा इसी व्यवस्था के संदर्भ में आयोग के कामकाज पर आपत्तियाँ दर्ज किए जाने की बात कही गई है।

           इन आरोपों और आपत्तियों की स्वतंत्र, पारदर्शी और सार्वजनिक जाँच आवश्यक है। निर्वाचन आयोग को भी सामने आए प्रत्येक प्रश्न पर स्पष्ट तथ्यात्मक स्पष्टीकरण सार्वजनिक करना चाहिए, ताकि नागरिकों का विश्वास कायम रहे और यह स्पष्ट हो सके कि मतदाता-सूची में नाम जोड़ने, हटाने या बहाल करने से संबंधित प्रत्येक कार्रवाई किस वैधानिक प्रक्रिया के तहत हुई।

            लोकतंत्र में मतदाता-सूची केवल प्रशासनिक दस्तावेज नहीं है। वह नागरिक के मतदान के अधिकार का आधार है। इसलिए उससे जुड़े किसी भी निर्णय की पारदर्शिता और जवाबदेही लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियादी आवश्यकता है।

            ‘हम देखेंगे’ इस पूरे घटनाक्रम में सामने आए तथ्यों, निर्वाचन आयोग के स्पष्टीकरणों, न्यायिक कार्यवाहियों और नागरिक अधिकारों से संबंधित प्रश्नों पर सार्वजनिक संवाद और तथ्यपरक बहस की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

           मुख्य चुनाव आयुक्त पर लगे आप इतने गंभीर हैं कि भारतीय लोकतंत्र में आस्था बनाए रखने के लिए और आरोपी की निष्पक्ष जांच करने के लिए उन्हें तत्काल पद मुक्त किया जाना जरूरी है। हमारी मांग है कि है या तो स्वयं इस्तीफा दें या उन पर महाभियोग की कार्रवाई शुरू की जाए। 

            हम यह भी मांग करते हैं कि हिरासत में लिए गए  प्रदर्शन करने वाले सभी साथियों को अविलंब रिहा किया जाए। 

          हम देश भर के लेखकों- कलाकारों , सचेत नागरिकों और छात्रों से अपील करते हैं कि वे भारतीय लोकतंत्र की रक्षा के इस अभियान में शामिल हों और शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से प्रतिरोध आंदोलन चलाएं।

नदी में कूदा युवक हुआ लापता, एसडीईआरएफ की टीम घटनास्थल पर, नप की कचरा गाड़ी फंसी गड्ढे में


अनूपपुर

राजेंद्रग्राम थाना क्षेत्र के मौहरी गांव में नदी में नहाने गया युवक अचानक नहाने के दौरान कुछ दूरी पर बह रही बमराड़ नदी में छलांग लगा दिया, जहां गहरे पानी में लापता हो गया है। घटना की सूचना युवक के साथ गए साले ने परिजनों को जहां परिजनों ने पुलिस को जानकारी दी। पुलिस ने नदी का मामला देखते जिला मुख्यालय स्थित एसडीईआरएफ की टीम को सूचना देते रेस्क्यू के लिए बुलाया। हालांकि दूरी होने के कारण रेस्क्यू दल शाम मौके स्थल पहुंच कर पानी के तेज बहाव के बीच युवक को ढूंढने सर्चिग अभियान शुरू किया लेकिन पानी के तेज बहाव के कारण हो रहीं परेशानी के कारण ढूढ़ने का कार्य बंद कर दिया गया हैं। सुबह पुनः ढूंढने सर्चिग अभियान शुरू किया जायेंगा। इसके पूर्व शाम को घटना स्थल पहुंची पुलिस स्थानीय ग्रामीणों और परिजनों की मदद से खोजबीन कर रही थी। 

पुलिस ने बताया कि डूबने वाला युवक की पहचान 35 वर्षीय देव सिंह पिता गणेशा सिंह उड़ाली निवासी ग्राम बराँझ थाना करनपठार अनूपपुर के रूप में हुई है। युवक कुछ दिन पूर्व ही राजेंद्रग्राम स्थित अपने ससुराल मौहरी गांव आया था। शनिवार की दोपहर करीब 3 बजे वह ससुराल से ढाई किलोमीटर दूर अपने साले 28 वर्षीय बेल सिंह पिता ललुआ सिंह के साथ बमराड़ नदी के पास पतली नाला के रूप में बह रहे देवरी डवरा में नहा रहा था, साबुन लगाने के उपरांत वह अचानक वहां से उठकर बमराड़ नदी की ओर बढ़ा और नहाने के लिए कूद गया। जिसके बाद वह नदी से वापस नहीं निकला है। नदी में पानी का बहाव तेज है। वहीं अनूपपुर मुख्यालय से सूचना प्राप्ती के बाद तत्काल जिला प्लाटून कमांडर के नेतृत्व में 03 एसडीईआरएफ एवं 04 होमगार्ड जवान घटनास्थल के लिए रवाना हुई। बताया जाता है कि घटनास्थल की दूरी लगभग 80 किमी है। 

*बदहाली की खुली पोल, नप की कचरा गाड़ी गड्ढे में फंसी*

अमरकंटक में सड़क की बदहाल स्थिति अब राहगीरों के साथ नगर की सफाई व्यवस्था के वाहनों के लिए भी परेशानी बनती जा रही है। नर्मदा मंदिर के पीछे सोनमुड़ा तिराहे के समीप नगर परिषद अमरकंटक का कचरा वाहन सड़क किनारे बने गड्ढे में फंस गया। वाहन का पहिया गड्ढे में धंसने के बाद उसे निकालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।

सोनमुड़ा तिराहा नगर के प्रमुख आवागमन वाले क्षेत्रों में है। इसके बावजूद सड़क किनारे बने गड्ढे व्यवस्था की स्थिति पर सवाल खड़े कर रहे हैं। बारिश के दौरान पानी भर जाने से इनकी गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है, जिससे दोपहिया सहित अन्य वाहनों के लिए दुर्घटना का खतरा बना रहता है।

नगर की सफाई व्यवस्था में लगे वाहन का ही गड्ढे में फंसना सड़क की बदहाली का प्रत्यक्ष उदाहरण बनकर सामने आया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि गड्ढों को समय रहते भरवाने और क्षतिग्रस्त सड़क किनारों की मरम्मत कराने की जरूरत है।

शिक्षा के नाम पर मजाक, भाजपा विधायक की मांग, ढेड़ साल बाद भी नही जागी सरकार, नहीं मिला विद्यालय भवन


उमरिया

पीएम श्री का तमगा लिए शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय लोरहा में शिक्षा व्यवस्था मजाक बनकर रह गई है। जहाँ नर्सरी से 12वीं तक लगभग 900 छात्र अध्ययनरत हैं, उनका भविष्य भवन के बिना दांव पर लगा है। विद्यालय में कुल 16 कमरों और टीन के टपरों में बच्चों को कैद कर दिया गया है। जनपद करकेली की ग्राम पंचायत लोरहा में बच्चे जान हथेली पर रखकर जर्जर कमरों में पढ़ने को मजबूर हैं। 50 प्रतिशत कक्षाएं आज भी टीन शेड में लगती हैं। न बाउंड्रीवॉल है, न पर्याप्त शौचालय, न पानी टंकी, न खेल मैदान। कंप्यूटर लैब का सामान धूल खा रहा है क्योंकि उसे रखने तक की जगह नहीं है।

सरपंच रेखा कुशवाहा और प्राचार्य विनोद कुमार मिश्रा कलेक्टर से लेकर जिला शिक्षा अधिकारी तक गुहार लगाते-लगाते थक चुके हैं। तब ग्रामीण बांधवगढ़ भाजपा विधायक से मिले और विद्यालय भवन की समस्या बताई। इस पर विधायक शिवनारायण सिंह लल्लू भैया ने 1 मार्च 2025 को पत्र क्रमांक 181/25 लिखकर कलेक्टर उमरिया से भवन की अनुशंसा की थी। कलेक्टर कार्यालय ने 17 मई 2025 को पत्र क्रमांक 1718/राजस्व/2023 के माध्यम से फाइल जिला शिक्षा अधिकारी को सरका दी और उसके बाद फाइल ठंडे बस्ते में चली गई।

ग्राम पंचायत लोरहा के  द्वारा 4 फरवरी, 21 फरवरी  और 12 मार्च 2025 को लगातार आवेदन दिए गए। प्राचार्य ने 23 जुलाई 2025 को फिर सरपंच को पत्र लिखकर कमियां गिनाईं। 22.6670 हेक्टेयर नजूल भूमि के हस्तांतरण के लिए आरसीएमसी  पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन तक कर दिया गया, लेकिन सिस्टम टस से मस नहीं हुआ।

सवाल सीधा है, जब पीएम श्री स्कूल में ही भवन नहीं है, तो शिक्षा की गुणवत्ता का ढिंढोरा किस बात का है? विधायक की अनुशंसा के बाद भी डेढ़ साल तक भवन स्वीकृत न होना, यह लापरवाही नहीं तो क्या है? अब ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द भवन स्वीकृत नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

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