स्कूल को सात साल से नहीं मिली, इको क्लब, स्पोर्ट्स व शाला रखरखाव की राशि, अव्यवस्थाओं से जुझते छात्र- छात्राएं
उमरिया
सरकार भले ही आदिवासी बच्चों के लिये समग्र शिक्षा अभियान, पीएम श्री, स्वच्छ भारत मिशन, इको क्लब फॉर मिशन लाइफ और खेलो इंडिया जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं का ढिंढोरा पीट रही हो, लेकिन उमरिया जिले के सुदूर आदिवासी बाहुल्य प्राथमिक शाला चंगेरा (डाइस कोड 23150706501) में इन योजनाओं की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
यह शाला 2019 तक एक शाला एक परिसर के तहत हाई स्कूल चंगेरा के साथ कक्षा 1 से 10 तक एक ही परिसर में संचालित होती थी। तब डीपीआई मद से इको क्लब, स्पोर्ट्स और शाला भवन रखरखाव की संयुक्त राशि संकुल प्राचार्य के माध्यम से आती थी। 2019 में जब हाई स्कूल अलग भवन में शिफ्ट हो गया, तब से प्राथमिक शाला के हिस्से की राशि गायब हो गई। वर्तमान में यहां 77 बच्चे दर्ज हैं, जिनमें 90% आदिवासी समाज के हैं। यही बच्चे सरकार की इन योजनाओं के असली हकदार हैं।
इको क्लब फॉर मिशन लाइफ योजना के तहत हर साल 2500 से 5000 रुपये का प्रावधान है। लेकिन चंगेरा में 2019 से एक भी पौधा इस मद से नहीं लगा। शाला की बगिया उजड़ी पड़ी है। खेलो इंडिया और समग्र शिक्षा का स्पोर्ट्स ग्रांट के तहत प्राथमिक शाला को 5000 से 10000 रुपये खेल सामग्री के लिए मिलते हैं ताकि आदिवासी अंचल की प्रतिभा निखर सके।
शाला भवन रखरखाव और समग्र शिक्षा का कंपोजिट ग्रांट के तहत हर साल 25000 से 75000 तक का कंपोजिट स्कूल ग्रांट शाला की रंगाई-पुताई, शौचालय मरम्मत, पेयजल और फर्नीचर सुधार के लिए दिया जाता है। लेकिन तीनो मदो से 7 वर्ष से एक रुपया नही आया जिससे बच्चो का व स्कूल का विकास पूरी तरह रुक गया है। ग्रामीणों ने कलेक्टर से मांग की है कि 7 साल की लंबित राशि ब्याज सहित शाला को जारी की जाए।
