रेलवे कोल यार्ड के नाम पर खेतों का सीना छलनी, हजारों डंपर अवैध उत्खनन का आरोप, 15 फीट के खोद दिए गड्ढे

रेलवे कोल यार्ड के नाम पर खेतों का सीना छलनी, हजारों डंपर अवैध उत्खनन का आरोप, 15 फीट के खोद दिए गड्ढे

*शासन को लाखों का नुकसान, खनिज, राजस्व व रेलवे की भूमिका पर भी सवाल*


उमरिया

जनपद पंचायत पाली के ग्राम पंचायत खोलखम्हरा की छाती पर जेसीबी और पोकलेन मशीनें दिन-रात चलाकर हजारों डंपर मिट्टी निकालकर बांधवबारा रेलवे स्टेशन में बन रहे कोल यार्ड में खपाए जाने का गंभीर आरोप सामने आया है। स्थानीय ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि बिना वैध अनुमति, बिना रॉयल्टी और बिना ट्रांजिट परमिट के यह पूरा कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है, जिससे शासन को लाखों रुपये के राजस्व का सीधा नुकसान हो रहा है।

आरोप है कि ठेकेदारों ने निजी खेतों के साथ-साथ शासकीय जमीन को भी नहीं बख्शा। लालच में आकर कुछ खातेदारों की जमीन से मिट्टी इस कदर निकाली गई है कि खेतों में 10 से 15 फीट तक गहरे गड्ढे बन गए हैं, जो अब तालाब जैसे दिखते हैं। एक बार गहरी खुदाई के बाद वह जमीन हमेशा के लिए बंजर और खेती के अयोग्य हो जाएगी। यह सिर्फ राजस्व चोरी नहीं, बल्कि अन्नदाता की जमीन और पर्यावरण पर सीधा हमला है।

मिट्टी कहाँ से आ रही है, इसका वैध स्रोत, खदान की अनुमति, रॉयल्टी पर्ची, टीपी और परिवहन दस्तावेज कहाँ हैं? रेलवे के टेंडर अनुबंध में साफ लिखा है कि ठेकेदार को हर ट्रिप मिट्टी का वैध रॉयल्टी पेड दस्तावेज DRM कार्यालय में जमा करना होगा, बिना रॉयल्टी के एक भी डंपर साइट में खाली नहीं हो सकता। फिर सवाल है कि बिलासपुर मंडल के इंजीनियरिंग विभाग और आरपीएफ की नाक के नीचे हजारों अवैध डंपर कैसे खप गए? क्या रेलवे के इंजीनियरों ने आंख मूंदकर बिल पास कर दिए? यदि ठेकेदार के पास एक भी वैध कागज नहीं है तो यह मिट्टी नहीं, बल्कि शासन का खजाना लूटकर रेलवे यार्ड में पाटा जा रहा है और रेलवे भी इस लूट में बराबर का भागीदार है।।

इस पूरे मामले में खनिज, राजस्व और रेलवे निर्माण एजेंसी की मिलीभगत या घोर लापरवाही से इनकार नहीं किया जा सकता। आखिर बिना प्रशासन की आंख मूंदे इतने बड़े पैमाने पर हजारों डंपरों का काफिला दिनदहाड़े कैसे चल सकता है? क्यों आज तक मौके का पंचनामा नहीं बनाया गया, कितनी घन मीटर मिट्टी निकली, जमीन किसकी है, अनुमति किसके नाम है - इसकी जांच क्यों नहीं हुई?

ग्रामीणों की मांग है कि कलेक्टर उमरिया और रेल महाप्रबंधक दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर,  तत्काल खनिज, राजस्व और रेलवे विजिलेंस की संयुक्त टीम से खोलखम्हरा और बांधवबारा साइड का मौका मुआयना कराएं, सैटेलाइट इमेज, मशीनों के जीपीएस और डंपरों की गिनती से वास्तविक मात्रा निकालें और अवैध पाए जाने पर न सिर्फ लाखों की रॉयल्टी वसूली और जुर्माना करें, बल्कि मिट्टी चोरी में लगी जेसीबी, पोकलेन और डंपरों को जब्त कर ठेकेदार और सप्लायर पर FIR दर्ज कर रेलवे ठेके को ब्लैकलिस्ट किया जाए।

Labels:

Post a Comment

MKRdezign

,

संपर्क फ़ॉर्म

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget