कार्यालय से गायब रहती है सीएमओ, कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, पार्षद ने कलेक्टर से जांच की मांग
*पार्षद ने जनहित पर आंदोलन की दी चेतावनी*
अनूपपुर। नगर परिषद बरगवां-अमलाई में मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) की कथित अनियमित उपस्थिति और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं। नगर परिषद के वार्ड क्रमांक-02 के पार्षद एवं लोक निर्माण, जल कार्य विभाग, आवास एवं पर्यावरण समिति के सभापति सौरभ दास कोरी ने कलेक्टर अनूपपुर को पत्र देकर मामले की जांच कराने की मांग की है।
पार्षद ने पत्र में आरोप लगाया है कि शासन द्वारा निर्धारित कार्यालयीन समय सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक है, लेकिन सीएमओ द्वारा नियमित रूप से कार्यालय में उपस्थित नहीं रहने की शिकायत सामने आ रही है। नगर परिषद में बायोमेट्रिक/ऑनलाइन उपस्थिति (पंचिंग) की व्यवस्था होने के बावजूद इसका अपेक्षित पालन नहीं किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। पार्षद के अनुसार सीएमओ कई दिनों में कथित तौर पर दोपहर 12 से 1 बजे अथवा 3 से 4 बजे के बीच सीमित समय के लिए कार्यालय आती हैं और इसके बाद चली जाती हैं।
पार्षद ने यह भी आरोप लगाया कि टीएल बैठक के अलावा अन्य दिनों में फील्ड विजिट या बैठकों का हवाला देकर कार्यालय से अनुपस्थित रहने की स्थिति बनी रहती है। उनका कहना है कि इसका सीधा असर नगर परिषद के कामकाज और आम नागरिकों को मिलने वाली सेवाओं पर पड़ रहा है। प्रमाण पत्र, पेंशन और विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से जुड़े कार्यों के लिए लोगों को कथित तौर पर लंबे समय तक कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
पत्र में नगर परिषद की प्रशासनिक एवं निर्माण संबंधी कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। पार्षद ने आरोप लगाया कि समय पर टेंडर जारी नहीं होने, टेंडर प्रक्रिया में विलंब, बिना एफडीआर कार्य शुरू किए जाने तथा समय सीमा समाप्त होने के बावजूद निर्माण कार्य अधूरे पड़े रहने जैसी शिकायतें हैं। संबंधितों को समय पर नोटिस जारी नहीं किए जाने की बात भी पत्र में कही गई है।
पार्षद सौरभ दास कोरी ने कलेक्टर से मांग की है कि पिछले तीन माह की बायोमेट्रिक उपस्थिति और सीसीटीवी फुटेज की निष्पक्ष जांच कराई जाए। इसके साथ ही टीएल बैठक के दिनों को छोड़कर सीएमओ की वास्तविक उपस्थिति, मूवमेंट रजिस्टर और फील्ड विजिट से संबंधित लॉगबुक की भी जांच कराने की मांग की गई है।
उन्होंने शासकीय समय में अधिकारियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित कराने के लिए आवश्यक अनुशासनात्मक निर्देश जारी करने की मांग की है। पार्षद ने चेतावनी दी है कि यदि मामले की जांच नहीं कराई गई तो जनहित में उच्च स्तर पर आंदोलन एवं आवश्यक विधिक प्रक्रिया अपनाने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।
