माई की बगिया मार्ग की हालत अति दयनीय, मार्ग विस्तारीकरण के बाद बना दलदल, हो रही दुर्घटनाएं, जिम्मेदार मौन
अनूपपुर
प्रमुख धार्मिक एवं आध्यात्मिक तीर्थ स्थल पवित्र नगरी अमरकंटक के प्रमुख धार्मिक स्थल माई की बगिया जाने वाले मार्ग की हालत वर्षाकाल में अत्यंत दयनीय हो गई है। मार्ग के विस्तारीकरण के दौरान किए गए कार्य के कारण जगह-जगह जलभराव होने से विस्तारित हिस्सा दलदल में तब्दील हो गया है। इससे पर्यटक, तीर्थयात्री तथा स्थानीय वाहन चालक भारी परेशानी का सामना कर रहे हैं। मार्ग पर आए दिन दोपहिया वाहन चालक फिसलकर गिर रहे हैं और चोटिल हो रहे हैं।
जानकारी के अनुसार ग्रीष्मकाल में माई की बगिया मार्ग के विस्तारीकरण का कार्य प्रारंभ किया गया था, लेकिन लंबे समय बाद भी कार्य पूर्ण नहीं हो सका। लगभग 500 मीटर से अधिक हिस्से में मार्ग को विस्तारित करने के लिए मिट्टी हटाई गई है, जबकि सावित्री नदी पुल के पास से लगभग 800 मीटर मार्ग की स्थिति भी अत्यंत खराब बताई जा रही है। वर्षा के चलते विस्तारित हिस्से में पानी भरने से कीचड़ और दलदल की स्थिति निर्मित हो गई है।
मार्ग संकरा होने के कारण जब सामने से चार पहिया वाहन आते हैं तो उन्हें साइड देने के दौरान वाहन चालकों को विस्तारित हिस्से में उतरना पड़ता है। दलदली जमीन और गहरे गड्ढों के कारण कई बार वाहन फंस जाते हैं। इससे मार्ग पर जाम जैसी स्थिति भी निर्मित हो जाती है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए स्थिति और अधिक जोखिमपूर्ण बनी हुई है।
विस्तारित मार्ग के दोनों ओर लंबे-लंबे घास उग आने के कारण वाहन चालकों को यह भी स्पष्ट दिखाई नहीं देता कि सड़क के किनारे कितना गहरा गड्ढा या दलदल है। ऐसे में वाहन का पहिया अचानक गड्ढे में चले जाने से दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
श्रावण मास के दौरान माई की बगिया पहुंचने वाले पर्यटकों, तीर्थयात्रियों, दोपहिया एवं चार पहिया वाहन चालकों को इस खराब मार्ग के कारण काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। धार्मिक एवं पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण इस मार्ग की दुर्दशा के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है।
स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों एवं पर्यटक-तीर्थयात्रियों ने प्रशासन से मांग की है कि माई की बगिया मार्ग की वर्तमान स्थिति को देखते हुए तत्काल आवश्यक सुधार कार्य कराया जाए। मार्ग के विस्तारित हिस्से को समतल कर जल निकासी की उचित व्यवस्था की जाए तथा आवागमन योग्य बनाने के लिए शीघ्र स्थायी समाधान किया जाए, ताकि श्रद्धालुओं और पर्यटकों को दुर्घटना एवं परेशानी से राहत मिल सके।
