प्राथमिक विद्यालय में समय से पहले स्कूल में ताला जड़कर गायब हुए शिक्षक, शिक्षा व्यवस्था का बुरा हाल

प्राथमिक विद्यालय में समय से पहले स्कूल में ताला जड़कर गायब हुए शिक्षक, शिक्षा व्यवस्था का बुरा हाल    

*छात्रों ने खोली स्कूल की सच्चाई*     


 

अनूपपुर

जिले के जनपद अनूपपुर के शासकीय प्राथमिक विद्यालय दलदल में शिक्षा विभाग के दावों की पोल खुलती नजर आ रही है। जहाँ एक ओर सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए बड़े-बड़े प्रयास कर रही है, वहीं दूसरी ओर जिम्मेदार शिक्षक ही निर्धारित समय से पहले विद्यालय बंद कर अपने कर्तव्यों से पल्ला झाड़ रहे हैं। इस लापरवाही के कारण न केवल बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है, बल्कि सरकारी नियमों की धज्जियाँ भी उड़ाई जा रही हैं।

*निर्धारित समय से डेढ़ घंटे पहले ही लगा ताला*

शिक्षा विभाग के नियमानुसार शासकीय प्राथमिक विद्यालयों का संचालन सुबह 10:00 बजे से शाम 4:30 बजे तक होना अनिवार्य है। लेकिन दलदल प्राथमिक विद्यालय का हाल कुछ और ही है। विद्यालय का समय समाप्त होने के काफी पहले ही दोपहर 3:00 बजे स्कूल के मुख्य गेट पर ताला लटका हुआ मिला और शिक्षक परिसर से नदारद थे। अपनी जिम्मेदारी छोड़कर समय से पहले स्कूल बंद करने की यह घटना पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।

*शिक्षक का अजीब तर्क, बीएलओ कार्य का बहाना*

जब स्थानीय लोगों और जागरूक नागरिकों ने वहां मौजूद शिक्षक से समय से पूर्व विद्यालय बंद करने का कारण पूछा, तो उनका जवाब बेहद गैर-जिम्मेदाराना था। शिक्षक ने अपनी लापरवाही छिपाने के लिए सारा दोष बीएलओ कार्य पर मढ़ दिया। उनका कहना था कि उन्हें चुनाव संबंधी कार्य करना है, इसलिए उन्होंने स्कूल जल्दी बंद कर दिया। हालांकि, शिक्षण कार्य के दौरान अन्य प्रशासनिक कार्यों को प्राथमिकता देना शिक्षा नियमों के विरुद्ध है।

*शिक्षक का दावा हुआ खारिज*

मामले की गंभीरता को देखते हुए जब संकुल प्रभारी से संपर्क कर इस संबंध में जानकारी चाही गई, तो उन्होंने भी शिक्षक के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया। संकुल प्रभारी ने स्पष्ट किया कि शिक्षक द्वारा उन्हें स्कूल जल्दी बंद करने के संबंध में कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई थी। प्रभारी ने माना कि शिक्षक का यह कदम नियमों के खिलाफ है और उन्होंने विद्यालय समय से पूर्व बंद करके बड़ी गलती की है।

*छात्रों ने खोली सच्चाई, रोज की है मनमानी*

विद्यालय में अध्ययनरत मासूम बच्चों से जब इस संबंध में पूछा गया, तो उन्होंने जो बताया वह बेहद चौंकाने वाला था। बच्चों के अनुसार, विद्यालय का 3:00 बजे बंद हो जाना कोई इकलौती घटना नहीं है, बल्कि यहां की एक नियमित प्रक्रिया बन चुकी है। छात्रों का कहना है कि रोज ही स्कूल समय से पहले बंद कर दिया जाता है, जिससे उनकी शिक्षा प्रभावित हो रही है।

*शिक्षा विभाग से कार्रवाई की मांग*

जिले के इस प्राथमिक विद्यालय में शिक्षकों की इस घोर लापरवाही ने बच्चों के भविष्य को अधर में डाल दिया है। स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों ने जिला प्रशासन से मांग की है, इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। वही ग्रामीणों ने कहा है की जो शिक्षक अपने कर्तव्य के प्रति इतने उदासीन हैं और बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं, उनके खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई अन्य शिक्षक ऐसी गलती करने की हिम्मत न जुटा सके। अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग इस मामले में क्या कदम उठाता है और लापरवाह शिक्षक पर क्या कार्रवाई होती है।

इनका कहना है।

विद्यालय का समय 10 से शाम 4:30 बजे तक है अगर शिक्षक ने समय से पूर्व  विद्यालय बंद किया है तो कार्रवाई की जाएगी।

*रघुवंश प्रसाद नागेश, संकुल प्रभारी*

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