मुरुम के गड्ढो नया बताकर लाखो का खेल, पुराने तालाबो के नाम पर हुआ राशि का आहरण का लगा आरोप

मुरुम के गड्ढो नया बताकर लाखो का खेल, पुराने तालाबो के नाम पर हुआ राशि का आहरण का लगा आरोप


शहडोल 

जिले में डीएमएफ फंड से तालाब निर्माण के नाम पर लाखों खर्च किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि हाईवे निर्माण के दौरान मुरम निकालने से बने गहरे गड्ढों, पुराने तालाबों और नालों को ही दस्तावेजों में नवीन तालाब निर्माण दर्शाकर 20 से 25 लाख रुपये तक की राशि स्वीकृत और भुगतान कर दिया गया।

मामला जनपद पंचायत जयसिंहनगर के जोरा गांव के पास का बताया जा रहा है। रीवा-शहडोल हाईवे निर्माण के दौरान सड़क किनारे मुरम निकालने से करीब दो से ढाई एकड़ क्षेत्र में बड़ा गड्ढा बन गया था। ग्रामीणों का आरोप है कि इसी गड्ढे को नया तालाब बताकर करीब 25 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई और खर्च भी दर्शा दिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह किसी योजना के तहत बनाया गया जलस्रोत नहीं, बल्कि सड़क निर्माण के दौरान खुदाई से बना गहरा गड्ढा है, जिसमें बारिश के दिनों में पानी भर जाता है।।

जयसिंहनगर ब्लॉक की बरना पंचायत के झिरिया गांव में भी पुराने तालाब को लेकर सवाल उठे हैं। जहां करीब 20 वर्ष पुराना तालाब मौजूद है, जिसकी पाल तीन वर्ष पहले टूट गई थी। आरोप है कि इसकी मरम्मत कराने के बजाय पुराने तालाब को ही नवीन तालाब निर्माण बताकर 20 लाख 56 हजार रुपये की स्वीकृति जारी कर दी गई।

ब्यौहारी ब्लॉक के तेंदुआ गांव में बाणसागर डैम किनारे स्थित दर्री नाले को लेकर भी विवाद है। जानकारी के अनुसार, नाले की पुलिया और पिचिंग का काम पहले ही डीएमएफ मद से करीब 12 लाख रुपये में कराया जा चुका था। इसके बाद उसी स्थान को सांसद प्रस्ताव के माध्यम से करीब 25 लाख रुपये की लागत से नवीन तालाब निर्माण बताकर स्वीकृति दिए जाने का आरोप है। 

इस मामले में कलेक्टर डॉ. केदार सिंह ने कहा है कि डीएमएफ से पुराने तालाब नहीं बनाए जाते। उनके संज्ञान में आए मामलों की जिला स्तर पर टीम गठित कर जांच कराई जाएगी और अनियमितता मिलने पर सख्त कार्रवाई होगी।

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