1000 करोड़ के कथित कॉर्पाेरेट फर्जीवाड़े में महेंद्र गोयनका दिल्ली से गिरफ्तार, कोलकाता पुलिस कर रही पूछताछ
*फर्जी हस्ताक्षरों से कंपनियों पर नियंत्रण स्थापित करने का आरोप, कई राज्यों में दर्ज हैं धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले*
इंट्रोः- उद्योगपति एवं विधायक संजय पाठक के परिवार से जुड़ी कंपनियों में कथित रूप से लगभग 1000 करोड़ रुपये के कॉर्पाेरेट फर्जीवाड़े के मामले में कोतमा निवासी महेंद्र गोयनका की गिरफ्तारी के बाद जांच तेज हो गई है। कोलकाता पुलिस ने उन्हें दिल्ली से गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से 10 दिन की पुलिस रिमांड मंजूर की गई है। इस दौरान पुलिस वित्तीय लेनदेन, दस्तावेजी हेराफेरी और कथित धोखाधड़ी से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर पूछताछ करेगी। जांच एजेंसियों के अनुसार, महेंद्र गोयनका पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी हस्ताक्षरों, कूटरचित दस्तावेजों और कथित जालसाजी के माध्यम से पाठक परिवार की कई कंपनियों पर अवैध नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास किया। मामले में कोलकाता में भारतीय न्याय संहिता एवं संबंधित प्रावधानों के तहत धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र, जालसाजी और फर्जी दस्तावेजों के उपयोग से जुड़ी गंभीर धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया था। सूत्रों के मुताबिक, गोयनका पूर्व में पाठक परिवार से जुड़ी कंपनी यूरो प्रतीक इस्पात इंडिया प्राइवेट लिमिटेड में वरिष्ठ प्रबंधकीय पद पर कार्यरत रहे हैं। उन पर कंपनी के वित्तीय लेनदेन में कथित अनियमितताओं, संपत्तियों के दुरुपयोग तथा दस्तावेजों में हेराफेरी के आरोप लगाए गए हैं। जांच एजेंसियां अब कंपनी से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य संबंधित दस्तावेजों की भी जांच कर रही हैं।
अनूपपुर
करीब 1000 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े बहुचर्चित मामले में कोलकाता पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए रायपुर निवासी कारोबारी महेंद्र गोयनका को दिल्ली से गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी पिछले करीब डेढ़ से दो वर्षों से फरार चल रहा था और उसकी तलाश कई राज्यों की जांच एजेंसियां कर रही थीं। बताया जा रहा है कि इस दौरान मध्यप्रदेश पुलिस भी उसे गिरफ्तार नहीं कर सकी थी। गिरफ्तारी के बाद अब उसे न्यायालय में पेश करने और आगे की पूछताछ के लिए आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। जांच एजेंसियों के अनुसार महेंद्र गोयनका पहले मध्यप्रदेश के विधायक संजय पाठक के परिवार से जुड़ी कंपनी यूरो प्रतीक इस्पात इंडिया प्राइवेट लिमिटेड में वरिष्ठ प्रबंधकीय जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। आरोप है कि कंपनी के संचालन के दौरान बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं की गईं और पहले से बेची जा चुकी संपत्तियों एवं माल के लेन-देन में भी कथित गड़बड़ियां की गईं, जिससे करोड़ों रुपये के वित्तीय नुकसान की आशंका जताई गई है।
*फर्जी दस्तावेज व हस्ताक्षरों का आरोप*
जांच के दौरान यह भी आरोप सामने आया है कि महेंद्र गोयनका और उनके कुछ सहयोगियों ने फर्जी हस्ताक्षरों और कथित जाली दस्तावेजों के माध्यम से परिवार से जुड़ी कई कंपनियों के नियंत्रण पर कब्जा करने का प्रयास किया। इसी आधार पर कोलकाता में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश, जालसाजी तथा अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद पुलिस ने आरोपी की तलाश तेज कर दी थी और अंततः दिल्ली से उसे गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की।
*कटनी में भी दर्ज हैं आपराधिक मामले*
जांच एजेंसियों के मुताबिक महेंद्र गोयनका और उनके सहयोगियों के खिलाफ मध्यप्रदेश के कटनी जिले में भी धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और आपराधिक षड्यंत्र से जुड़े दो अलग-अलग मामले दर्ज हैं। बताया जा रहा है कि इस मामले में कुछ सह-आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिकाएं पहले ही सर्वाेच्च न्यायालय द्वारा खारिज की जा चुकी हैं, जिसके बाद जांच और तेज कर दी गई थी।
*एनसीएलटी के आदेश में भी हुई थीं टिप्पणियां*
सूत्रों के अनुसार, मुंबई स्थित राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने 9 मई 2025 को जारी अपने एक आदेश में महेंद्र गोयनका और उनकी पत्नी मीनू गोयनका से जुड़े वित्तीय लेन-देन पर भी महत्वपूर्ण टिप्पणियां दर्ज की थीं। इसके अलावा गोयनका से जुड़ी एक अन्य कंपनी निसर्ग इस्पात के वित्तीय लेन-देन और कथित अनियमितताओं की जांच भी विभिन्न स्तरों पर जारी है।
*पूरे वित्तीय नेटवर्क की होगी पड़ताल*
जांच एजेंसियों का मानना है कि महेंद्र गोयनका की गिरफ्तारी इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकती है। अब जांच का दायरा केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे जुड़े वित्तीय नेटवर्क, कंपनियों के आपसी लेन-देन, बैंकिंग ट्रांजेक्शन, दस्तावेजों की सत्यता और अन्य संदिग्ध व्यक्तियों की भूमिका की भी गहन जांच की जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ के दौरान कई और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं, जिससे इस कथित वित्तीय घोटाले की पूरी परतें खुल सकती हैं।
*जांच जारी, कई और खुलासों की संभावना*
कोलकाता पुलिस सहित संबंधित जांच एजेंसियां अब आरोपी से विस्तृत पूछताछ कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड, कंपनियों के वित्तीय लेन-देन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है। जांच के आधार पर आने वाले दिनों में इस प्रकरण में और गिरफ्तारियां या नए खुलासे होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है। कोलकाता पुलिस की 10 दिन की रिमांड के दौरान मामले में शामिल अन्य व्यक्तियों, कंपनियों और वित्तीय लेनदेन की कड़ियों की जांच की जाएगी। जांच एजेंसियों का मानना है कि पूछताछ के दौरान कथित कॉर्पाेरेट फर्जीवाड़े से जुड़े कई महत्वपूर्ण खुलासे सामने आ सकते हैं।
