सगरा तालाब के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण का बहुप्रतीक्षित कार्य पर मंडराया संकट, अफसरशाही हावी

*एसईसीएल के सीएसआर फंड से साढ़े चार करोड़ हुए थे स्वीकृत*


उमरिया

नगर पालिका परिषद पाली के ऐतिहासिक सगरा तालाब के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण का बहुप्रतीक्षित कार्य एक बार फिर खटाई में पड़ता नजर आ रहा है। नगर की पहचान और आस्था के केंद्र रहे इस तालाब के लिए लंबे समय से जीर्णोद्धार की मांग हो रही थी, जिसके लिए बड़ी धनराशि की आवश्यकता थी। नगर पालिका परिषद पाली की अध्यक्ष शकुंतला प्रधान, क्षेत्रीय विधायक मीना सिंह और क्षेत्रीय सांसद हिमाद्री सिंह के अथक और संयुक्त प्रयासों के बाद आखिरकार दो वर्ष पूर्व एसईसीएल के सीएसआर फंड से कोल इंडिया द्वारा लगभग साढ़े चार करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत कराई गई, जिससे पाली वासियों में विकास की एक नई उम्मीद जगी थी।

राशि स्वीकृत होने के बाद विधिवत निविदा प्रक्रिया पूरी की गई और कार्य का शुभारंभ भी करा दिया गया, लेकिन जिला प्रशासन की कुत्सित और उदासीन कार्यप्रणाली के कारण यह महत्वपूर्ण कार्य अपनी निर्बाध गति से चल नहीं पा रहा है। जानकार सूत्रों के अनुसार सीएसआर की यह पूरी राशि एसईसीएल द्वारा कलेक्टर कार्यालय उमरिया के खाते में जमा कर दी गई है, जबकि इस कार्य की कार्य एजेंसी नगर पालिका परिषद पाली है। नगर पालिका का दायित्व है कि वह निविदा प्राप्त ठेकेदार से निविदा के अनुरूप कार्य कराए, उसकी देखरेख और निरीक्षण करे, दस्तावेजों का संधारण करे और किए गए कार्य के अनुरूप देयक तैयार कर कलेक्टर कार्यालय में प्रस्तुत करे। इसके बाद कलेक्टर कार्यालय का दायित्व है कि वह प्रस्तुत देयकों और दस्तावेजों का परीक्षण कराए और यदि देयक किए गए कार्य के अनुरूप पाए जाते हैं तो भुगतान कर दे, और यदि कोई भिन्नता पाई जाती है तो नियमानुसार आपत्ति लगाकर सुधार हेतु नगर पालिका को वापस कर दे।

परंतु इस स्पष्ट प्रक्रिया से इतर जिला प्रशासन द्वारा एक अजीबोगरीब रवैया अपनाया जा रहा है। न तो देयकों पर आपत्ति लगाई जा रही है और न ही उनका भुगतान किया जा रहा है, बल्कि पिछले चार महीनों से सगरा तालाब के देयक कलेक्टर कार्यालय में धूल खा रहे हैं और फाइलों को लटकाकर रखा गया है। ठेकेदार द्वारा कार्य कराए जाने के बाद भी भुगतान न होने से मजदूरों की मजदूरी अटकी हुई है और पूरा निर्माण कार्य ठप होने की कगार पर पहुंच गया है।

यह स्थिति तब है जब केंद्र में, प्रदेश में और नगर पालिका में भाजपा की ही सरकार है और ट्रिपल इंजन की सरकार में विकास की रफ्तार तेज होने के दावे किए जा रहे हैं। सवाल यह उठता है कि जब जनप्रतिनिधियों के प्रयास से राशि आ गई, टेंडर हो गया और काम शुरू भी हो गया तो फिर विकास के पहिये को अफसरशाही क्यों रोक रही है। क्या यह जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच साख की लड़ाई बन गई है या फिर निर्वाचित निकाय की अहमियत को कम आंकने की कोशिश है। कोल इंडिया जैसी महारत्न कंपनी द्वारा जनहित में दिया गया पैसा सरकारी खाते में कैद पड़ा है और इधर तालाब अतिक्रमण, गंदगी और जलकुंभी से पट रहा है। यदि देयक गलत हैं तो उन्हें वापस किया जाए और यदि सही हैं तो भुगतान किया जाए, लेकिन चार महीने तक फाइलों को मौन रखकर लटकाए रखना प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि कर्तव्य के प्रति उदासीनता है।

यह कहानी सिर्फ विकास के अवरुद्ध होने की नहीं, बल्कि फाइलों में उलझी कार्यपद्धति की है। यह बेहद चिंताजनक है कि भारतीय जनता पार्टी की ट्रिपल इंजन की सरकार में अफसरशाही इतनी हावी हो गई है कि शहडोल संसदीय क्षेत्र की तीन ओहदेदार महिला जनप्रतिनिधियों - सांसद, विधायक और नगर पालिका अध्यक्ष के संयुक्त प्रयासों पर पानी फेरते हुए अपने मनमर्जी का राज कायम कर विकास कार्यों को पलीता लगा दिया गया है। पाली की जनता अब यही पूछ रही है कि आखिर इस ऐतिहासिक धरोहर का उद्धार कब होगा और ट्रिपल इंजन का लाभ उसे कब मिलेगा।

ग्राहक बनकर आई महिला व दो लड़कियां, दुकान से साड़ियां की चोरी, सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई वारदात


अनूपपुर

कोतमा नगर में चोरी की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। पूर्व में स्कूल तिराहे के पास रस्तोगी डेली नीड्स और हार्डवेयर दुकान में चोरी की घटना के अलावा दो दिन पूर्व रेलवे फाटक के पास इलेक्ट्रिक वाइंडिंग की दुकान में पेट्रोल डालकर चोरी का असफल प्रयास भी सामने आया था। अब चोरी का नया मामला सामने आया, जहां कपड़े की दुकान में ग्राहक बनकर पहुंची एक महिला और दो लड़कियां दुकान के बाहर टंगी साड़ियां चोरी कर ले गईं। चोरी की पूरी वारदात दुकान में लगे कैमरे में कैद हो गई।

महावीर मार्ग में सुधीर जैन की कपड़े की दुकान पर मंगलवार को एक महिला और दो लड़कियां ग्राहक बनकर पहुंचीं। उन्होंने कपड़े देखने के बहाने दुकान में मौजूद साड़ियों को देखा। इसी दौरान मौका पाकर दुकान के बाहर टंगी दो साड़ियां झोले में रखकर गईं।

पूरी घटना दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। दुकान संचालक ने महिला और दोनों लड़कियों की आसपास तलाश की, लेकिन उनका कोई पता नहीं चल सका। इसके बाद कोतमा थाने पहुंचकर चोरी की शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर महिला और दोनों लड़कियों की पहचान तथा तलाश की जा रही है।

25 लाख खर्च के बाद भी संजीवनी क्लिनिक की छत से टपक रहा पानी, मरीजों और स्टाफ की बढ़ी परेशानी


अनूपपुर 

कोतमा नगर के वार्ड क्रमांक 3 बाजार क्षेत्र स्थित संजीवनी क्लिनिक भवन में करीब 25 लाख रुपए खर्च किए जाने के बावजूद निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। भवन जीर्णोद्धार एवं शेड निर्माण के कुछ समय बाद ही अस्पताल की छत से पानी टपकने लगा है। पिछले कई दिनों से बारिश के दौरान अस्पताल के लगभग सभी कमरों में पानी का रिसाव होने से मरीजों और अस्पताल स्टाफ को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

बताया जाता है कि नगर पालिका द्वारा संजीवनी क्लिनिक को शुरू करने से पूर्व भवन के जीर्णोद्धार, मरम्मत एवं शेड निर्माण के लिए करीब 25 लाख रुपए खर्च किए गए थे। लेकिन अब बारिश के दौरान भवन की छत से लगातार पानी टपकने से निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

अस्पताल के कमरों में जगह-जगह पानी गिरने के कारण स्वास्थ्य उपकरण, महत्वपूर्ण दस्तावेज और जीवन रक्षक दवाइयों को सुरक्षित रखने के लिए कर्मचारियों को प्लास्टिक के टब और अन्य बर्तनों का सहारा लेना पड़ रहा है। अस्पताल स्टाफ का कहना है कि मरीजों के उपचार के साथ-साथ पूरा दिन पानी से उपकरणों और जरूरी सामान को बचाने में निकल रहा है। नागरिकों ने नगर पालिका द्वारा कराए गए निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर नाराजगी जताते हुए पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। 

इनका कहना है।

नगरपालिका द्वारा निर्माण कराया गया था। उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। 

*के एल दीवान, बीएमओ, कोतमा*

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