तहसील कार्यालय में टपक रहा है पानी, फाइलों के साथ दिख रहे हैं प्लास्टिक के डिब्बे, कर्मचारी परेशान


शहडोल

जैतपुर तहसील कार्यालय की जर्जर बिल्डिंग बारिश में इस कदर टपकने लगी कि कर्मचारियों को कार्यालय चलाने के लिए छत से गिरते पानी के नीचे प्लास्टिक के डिब्बे और टब रखने पड़े। जगह-जगह से टपकती छत, दीवारों में रिसता पानी और करंट का खतरा, इन सबके बीच कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डालकर काम करने को मजबूर हैं।

हालात ऐसे हैं कि सरकारी दफ्तर में कामकाज फाइलों और कंप्यूटरों से कम, पानी से बचाव के इंतजामों के बीच ज्यादा होता नजर आ रहा है। तहसील भवन की छत टपकी तो मरम्मत नहीं हुई, बल्कि नीचे प्लास्टिक के टब रख दिए गए,मानो बारिश के पानी को रोकने के लिए सरकारी सिस्टम ने ‘डिब्बा योजना’ शुरू कर दी हो।

जैतपुर तहसील कार्यालय की पुरानी बिल्डिंग भी बारिश का पानी नहीं झेल पा रही, छत के कई हिस्सों से पानी टपक रहा है। दीवारों में भी नमी बढ़ गई है और पानी रिसने की शिकायत सामने आई है।

बारिश से निजात पाने के लिए विभाग ने बाकायदा प्लास्टिक के बड़े-बड़े डिब्बे और टब रख दिए हैं। जहां से पानी टपकता है, उसके ठीक नीचे डिब्बा रख दिया जाता है और उसी में पानी जमा किया जा रहा है। यानी सरकारी दफ्तर में अब बारिश के पानी को रोकने का इंतजाम किसी मरम्मत से नहीं, बल्कि प्लास्टिक के डिब्बों से हो रहा है। सबसे चिंताजनक स्थिति बिजली और कंप्यूटर सिस्टम को लेकर बताई जा रही है। कंप्यूटर ऑपरेटर के अनुसार, दीवारों में पानी रिसने के कारण हल्का बिजली का करंट महसूस हो रहा है। 

जैतपुर नायब तहसीलदार आरके पदमाकर का कहना है कि तहसील भवन पुराना होने के कारण बारिश में पानी टपक रहा है। समस्या की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दे दी गई है और फिलहाल पानी को डिब्बों में एकत्र करने की व्यवस्था की गई है।

लगातार बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त, फसलों पर संकट गहराया, चौकीदार का घर भरभराकर कर गिरा

*24 घंटे जिला आपदा नियंत्रण कक्ष शुरू*


अनूपपुर

जिले में पिछले एक सप्ताह से लगातार हो रही रिमझिम और तेज बारिश ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। 5 दिनों में जिले में 42.2 मिमी औसत बारिश दर्ज की गई। दिन-रात बारिश जारी रही। मंगलवार की रात से लगातार बारिश का दौर जारी हैं। जाे बुधवार काे भी जारी हैं जिससे मौसम में ठंडक बढ़ गई है। वहीं नगर में बारिश से पत्ता गोदाम में चौकीदार निवास भरभरा कर गिर गया। हालांकि इससे जनहानि नहीं हुई।

वहीं फसलों पर संकट के बादल छा सकते हैं। निरंतर बारिश के कारण जिले की प्रमुख नदियाँ सोन, तिपान, जोहिला, केवई, गोहंड्रा और अलान का जलस्तर बढ़ गया है। सड़कों पर लोगों की आवाजाही कम हो गई है, केवल कार्यालयीन और आवश्यक कार्य वाले लोग ही घरों से बाहर निकल रहे हैं। खेतों में पानी भरने से फसलों को नुकसान की आशंका है। पानी भरने के कारण किसान खेतों में खाद भी नहीं डाल पा रहे हैं। धान की पत्तियां पीली पड़ने लगी हैं।

पिछले 24 घंटे में जिले में 10.2 मिमी बारिश हुई। 1 जून से अब तक जिले में 952.6 मिमी बारिश दर्ज हो चुकी है। पिछले साल इसी अवधि में 855.2 मिमी बारिश हुई थी। ।


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लगातार बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त, फसलों पर संकट गहराया, चौकीदार का घर भरभराकर कर गिरा

*24 घंटे जिला आपदा नियंत्रण कक्ष शुरू*

अनूपपुर

जिले में पिछले एक सप्ताह से लगातार हो रही रिमझिम और तेज बारिश ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। 5 दिनों में जिले में 42.2 मिमी औसत बारिश दर्ज की गई। दिन-रात बारिश जारी रही। मंगलवार की रात से लगातार बारिश का दौर जारी हैं। जाे बुधवार काे भी जारी हैं जिससे मौसम में ठंडक बढ़ गई है।

कलेक्टर रत्नाकर झा ने लोगों से उफनते पुल-पुलियों को पार नहीं करने और जलभराव वाले इलाकों में वाहन नहीं चलाने की अपील की है। वहीं नगर में बारिश से पत्ता गोदाम में चौकीदार निवास भरभरा कर गिर गया। हालांकि इससे जनहानि नहीं हुई।

वहीं फसलों पर संकट के बादल छा सकते हैं। निरंतर बारिश के कारण जिले की प्रमुख नदियाँ सोन, तिपान, जोहिला, केवई, गोहंड्रा और अलान का जलस्तर बढ़ गया है। सड़कों पर लोगों की आवाजाही कम हो गई है, केवल कार्यालयीन और आवश्यक कार्य वाले लोग ही घरों से बाहर निकल रहे हैं। खेतों में पानी भरने से फसलों को नुकसान की आशंका है। पानी भरने के कारण किसान खेतों में खाद भी नहीं डाल पा रहे हैं। धान की पत्तियां पीली पड़ने लगी हैं।

पिछले 24 घंटे में जिले में 10.2 मिमी बारिश हुई। सबसे ज्यादा बिजुरी में 27.2 और कोतमा में 25 मिमी बारिश दर्ज की गयी हैं। 1 जून से अब तक जिले में 952.6 मिमी बारिश दर्ज हो चुकी है। पिछले साल इसी अवधि में 855.2 मिमी बारिश हुई थी। जिले की औसत बारिश 896.8 मिमी है। यानी इस बार अब तक औसत से 55.8 मिमी ज्यादा बारिश हो चुकी है।

खेतों में लगी धान की फसलों को भी नुकसान पहुंचना शुरू हो गया है। लगातार बारिश के कारण धान के पत्ते पीले पड़ने लगे हैं और कीड़े का प्रकोप भी देखा जा रहा है। किसानों ने चिंता व्यक्त की है कि यदि मौसम की यही स्थिति बनी रही, तो फसलों को और अधिक क्षति हो सकती है।

कलेक्टर रत्नाकर झा ने लोगों से उफनते पुल-पुलियों को पार नहीं करने और जलभराव वाले इलाकों में वाहन नहीं चलाने की अपील की है। आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए कलेक्टर कार्यालय के कक्ष क्रमांक 56 में 24 घंटे जिला आपदा नियंत्रण कक्ष शुरू किया गया है। यहां तीन शिफ्टों में कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। 

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तहसील कार्यालय में टपक रहा है पानी, फाइलों के साथ दिख रहे हैं प्लास्टिक के डिब्बे, कर्मचारी परेशान

शहडोल

जैतपुर तहसील कार्यालय की जर्जर बिल्डिंग बारिश में इस कदर टपकने लगी कि कर्मचारियों को कार्यालय चलाने के लिए छत से गिरते पानी के नीचे प्लास्टिक के डिब्बे और टब रखने पड़े। जगह-जगह से टपकती छत, दीवारों में रिसता पानी और करंट का खतरा, इन सबके बीच कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डालकर काम करने को मजबूर हैं।

हालात ऐसे हैं कि सरकारी दफ्तर में कामकाज फाइलों और कंप्यूटरों से कम, पानी से बचाव के इंतजामों के बीच ज्यादा होता नजर आ रहा है। तहसील भवन की छत टपकी तो मरम्मत नहीं हुई, बल्कि नीचे प्लास्टिक के टब रख दिए गए,मानो बारिश के पानी को रोकने के लिए सरकारी सिस्टम ने ‘डिब्बा योजना’ शुरू कर दी हो।

जैतपुर तहसील कार्यालय की पुरानी बिल्डिंग भी बारिश का पानी नहीं झेल पा रही, छत के कई हिस्सों से पानी टपक रहा है। दीवारों में भी नमी बढ़ गई है और पानी रिसने की शिकायत सामने आई है।

बारिश से निजात पाने के लिए विभाग ने बाकायदा प्लास्टिक के बड़े-बड़े डिब्बे और टब रख दिए हैं। जहां से पानी टपकता है, उसके ठीक नीचे डिब्बा रख दिया जाता है और उसी में पानी जमा किया जा रहा है। यानी सरकारी दफ्तर में अब बारिश के पानी को रोकने का इंतजाम किसी मरम्मत से नहीं, बल्कि प्लास्टिक के डिब्बों से हो रहा है। सबसे चिंताजनक स्थिति बिजली और कंप्यूटर सिस्टम को लेकर बताई जा रही है। कंप्यूटर ऑपरेटर के अनुसार, दीवारों में पानी रिसने के कारण हल्का बिजली का करंट महसूस हो रहा है। 

जैतपुर नायब तहसीलदार आरके पदमाकर का कहना है कि तहसील भवन पुराना होने के कारण बारिश में पानी टपक रहा है। समस्या की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दे दी गई है और फिलहाल पानी को डिब्बों में एकत्र करने की व्यवस्था की गई है।

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उपवास का सामान लेकर घर लौट था किशोर की हाइवा की टक्कर से हुई मौत, पुलिस ने ट्रक किया जब्त

उमरिया

उमरिया के चिल्हारी में हरछठ के उपवास के लिए दूध लेकर साइकिल से घर लौट रहे 12 वर्षीय मनजीत को रेत से भरे हाईवा ने टक्कर मार दी। हादसे में मासूम की मौके पर ही मौत हो गई। गांव में मातम पसरा है। दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे गांव को झकझोर दिया।

हरछठ के उपवास को लेकर घरों में सुबह से ही तैयारियां चल रही थीं। इसी सिलसिले में चिल्हारी निवासी मनजीत पिता लालमन कोल भी सुबह दूध लेने के लिए साइकिल से बस स्टैंड गया था। दूध लेकर वह अपने घर वापस लौट रहा था। इसके बाद उसे अमलियाई हार स्थित अपने खेत की ओर जाना था। लेकिन घर और खेत पहुंचने से पहले ही रास्ते में हुए हादसे ने परिवार की खुशियां छीन लीं।

हादसे के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने घटना की जानकारी आसपास के ग्रामीणों और पुलिस को दी। हाईवा का नंबर एमपी 19 एचए 7552 बताया गया है। पुलिस ने वाहन को अपने कब्जे में लेकर हादसे के कारणों और पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी है।  अमरपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जरूरी कार्रवाई शुरू की। 

पुलिस ने हादसे में शामिल हाईवा को कब्जे में लिया है। अब हादसा किस तरह हुआ, हाईवा की गति कितनी थी और टक्कर किन परिस्थितियों में हुई, इन सभी बिंदुओं पर जांच की जा रही है। : शहडोल जिले में बीते कुछ दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण नदी-नाले उफान पर हैं। केशवाही और अमलाई क्षेत्र में कई छोटी नदियों और नालों का जलस्तर बढ़ने से पुलों के ऊपर पानी बह रहा है। इसके चलते कई मार्गों पर आवागमन बंद हो गया है और गांवों का मुख्यालय से संपर्क टूट गया है। प्रशासन और पुलिस ने लोगों की सुरक्षा को देखते हुए पानी वाले रास्तों पर आवाजाही रोक दी है।

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झमाझम बारिश से नदी नाले उफान पर, पुल के ऊपर पानी बहने से सड़क मार्ग हुआ बन्द, लोगो परेशानी बढ़ी

शहडोल

केशवाही क्षेत्र में कोटा नदी का पानी पुल के ऊपर से बह रहा है। इसके कारण झींक बिजुरी से केशवाही पहुंच मार्ग बंद हो गया है। वहीं रूपौला-कोटा मार्ग पर भी आवागमन प्रभावित है। हथगला-चेन्नौडी मार्ग के पुल के ऊपर पानी आने से रास्ता बंद कर दिया गया है। इसके अलावा केशवाही-कुम्हारी मार्ग स्थित पुल पर भी पानी बहने के कारण लोगों की आवाजाही रोक दी गई है। अमलाई क्षेत्र के ग्राम बैरिहा, पंचायत पड़रिया में कठना नदी भी उफान पर है। नदी का पानी पुल के ऊपर से बहने के कारण बैरिहा, पड़रिया, भमरहा सहित आसपास के कई गांवों का संपर्क मुख्यालय से टूट गया है। ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

जिले में जगह-जगह नदी-नालों और पुलों के ऊपर पानी बहने की स्थिति बनी हुई है। पुलिस ने संवेदनशील स्थानों पर मार्ग बंद कर फिक्स प्वाइंट लगाए हैं। पुल के ऊपर पानी होने की स्थिति में किसी भी व्यक्ति को वहां से गुजरने नहीं दिया जा रहा है। पुलिसकर्मी लगातार लोगों को नदी-नालों और तेज बहाव वाले स्थानों से दूर रहने की समझाइश दे रहे हैं।

जिले में एक जून से दो सितंबर तक औसत 1024.4 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है। लगातार अधिक बारिश के चलते हाल ही में बाणसागर बांध के आठ गेट भी खोले गए थे। कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने जिलेवासियों से अपील की है कि नदी-नालों में पानी का बहाव तेज होने पर उन्हें पार करने का प्रयास न करें और सुरक्षा के लिए प्रशासन द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों का पालन करें।

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लकड़ी के लट्ठों से भरा ट्रक रेलवे फाटक पास पलटा, गुमटी हुई क्षतिग्रस्त, बड़ा हादसा टला

उमारिया 

जर्जर सड़क मार्ग पर सिंगल टोला रेलवे फाटक के पास बुधवार सुबह लकड़ी के लट्ठों से भरा एक भारी-भरकम वाहन अचानक पलट गया।गनीमत रही कि हादसे के वक्त सड़क की दूसरी ओर कोई दूसरा वाहन मौजूद नहीं था, वरना यह घटना बड़ी जनहानि का कारण बन सकती थी। फिलहाल हादसे में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन घटना ने सड़क की बदहाली और भारी वाहनों के संचालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 

बताया जा रहा है कि रेलवे फाटक के दोनों ओर सड़क पर बड़े-बड़े और गहरे गड्ढे बने हुए हैं। इन्हीं गड्ढों के कारण वाहन का संतुलन बिगड़ने की बात सामने आ रही है। हालांकि हादसे की एक दूसरी वजह वाहन का ओवरलोड होना भी मानी जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अधिक मात्रा में लकड़ी के लट्ठों का परिवहन करने के लिए भारी वाहनों में क्षमता से अधिक वजन लादे जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं।ऐसे में सड़क की खराब स्थिति के साथ ओवरलोडिंग हादसे का कारण बना हो, इससे भी इनकार नहीं किया जा सकता। हादसे के दौरान दुर्घटनाग्रस्त वाहन सड़क किनारे बने चाय-नाश्ते की गुमटी को भी क्षतिग्रस्त किया है। गनीमत यह रही कि घटना के समय वहां कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ।

स्थानीय लोगों के अनुसार,रेलवे फाटक के आसपास सड़क की हालत लंबे समय से खराब है।गहरे गड्ढों के कारण रोजाना गुजरने वाले वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।लोगों का कहना है कि यदि समय रहते गड्ढों की मरम्मत और भारी वाहनों की ओवरलोडिंग पर प्रभावी रोक नहीं लगाई गई,तो आने वाले समय में यह लापरवाही किसी बड़ी घटना का कारण बन सकती है।फिलहाल हादसे ने जिम्मेदार विभागों के सामने सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

समाचार 06 फ़ोटो 06

जमुना-कोतमा ओपन कास्ट विस्तार को लेकर पर्यावरण जनसुनवाई शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न

अनूपपुर

जमुना-कोतमा क्षेत्र एसईसीएल की खुली खदान विस्तार परियोजना के संबंध में पर्यावरण स्वीकृति को लेकर बुधवार को ग्राम निमहा, तहसील कोतमा में पर्यावरण लोक जनसुनवाई का आयोजन किया गया। जनसुनवाई शांतिपूर्ण एवं सहर्ष वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न हुई। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिला-पुरुष, जनप्रतिनिधि एवं मीडिया कर्मी उपस्थित रहे। ग्रामीणों ने खदान विस्तार से जुड़े पर्यावरण, प्रदूषण, सड़क, स्वास्थ्य, रोजगार, पानी, शिक्षा, ब्लास्टिंग एवं सीएसआर सहित विभिन्न मुद्दों पर अपनी बात प्रमुखता से रखी।

परियोजना के तहत कोयला उत्पादन क्षमता को वर्तमान 4 मिलियन टन प्रतिवर्ष से बढ़ाकर 6 मिलियन टन प्रतिवर्ष किए जाने के संबंध में पर्यावरण स्वीकृति प्राप्त करने के उद्देश्य से यह जनसुनवाई आयोजित की गई थी।

जनसुनवाई में एडीएम/डिप्टी कलेक्टर अनूपपुर बलवीर रमन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड शहडोल के रीजनल ऑफिसर डॉ. अशोक तिवारी सहित एसईसीएल प्रबंधन की ओर से महाप्रबंधक प्रभाकर राम त्रिपाठी, सीएसआर से जुड़े अधिकारी डॉ. सतीश एवं पर्यावरण विभाग के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे

जनसुनवाई के दौरान  अनेक ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों ने अपनी समस्याएं और सुझाव अधिकारियों के समक्ष रखे। ग्रामीणों ने भारी वाहनों से सड़कों की खराब स्थिति, धूल एवं प्रदूषण, ब्लास्टिंग से मकानों में दरार, स्थानीय युवाओं को रोजगार, पेयजल व्यवस्था, स्वास्थ्य सुविधाओं, तालाब निर्माण, वृक्षारोपण, स्कूल-आंगनबाड़ी, स्ट्रीट लाइट एवं प्रभावित गांवों की मूलभूत सुविधाओं से जुड़े मुद्दे उठाए।

समाचार 07 फ़ोटो 07

नगर पालिका एवं पंचायत उपनिर्वाचन वाले क्षेत्रों में आदर्श आचरण संहिता लागू

अनूपपुर

राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा नगर पालिका एवं पंचायतों के उपनिर्वाचन वर्ष 2026 पूर्वार्द्ध के लिए जारी निर्वाचन कार्यक्रम के अनुसार जिले में आदर्श आचरण संहिता प्रभावशील हो गई है। जिले में नगर पालिका परिषद कोतमा के वार्ड क्रमांक 13 तथा जनपद पंचायत कोतमा, अनूपपुर, जैतहरी एवं पुष्पराजगढ़ के अंतर्गत रिक्त पंच पदों के लिए निर्वाचन कराया जाना है।

कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी रत्नाकर झा ने संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में आदर्श आचरण संहिता का कड़ाई से पालन सुनश्चित कराने के निर्देश दिए हैं। आदर्श आचरण संहिता निर्वाचन तिथि की घोषणा के साथ प्रभावशील होकर निर्वाचन परिणाम की घोषणा तक लागू रहेगी।

कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी ने संबंधित रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों, जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों तथा नगर पालिका परिषद कोतमा के मुख्य नगर पालिका अधिकारी को अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में आदर्श आचरण संहिता का पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं। आदेश तत्काल प्रभावशील है।

समाचार 08 फ़ोटो 08

छुलहा रेलवे स्टेशन पर कांग्रेस सौंपेगी ज्ञापन, ट्रेन ठहराव बहाल नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी

अनूपपुर

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी जैतहरी के ब्लॉक अध्यक्ष रजन कुमार राठौर ने बताया कि आगामी 5 सितंबर को दोपहर 1 बजे छुलहा रेलवे स्टेशन के स्टेशन अधीक्षक के माध्यम से बिलासपुर रेल मंडल एवं बिलासपुर जोन के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा। ज्ञापन में छुलहा रेलवे स्टेशन एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़ी विभिन्न रेलवे समस्याओं के निराकरण की मांग की जाएगी।

रजन कुमार राठौर ने बताया कि कोरोना काल के दौरान बंद किए गए यात्री ट्रेनों के ठहराव को छुलहा रेलवे स्टेशन पर पुनः बहाल करना ज्ञापन की प्रमुख मांगों में शामिल है। उन्होंने बताया कि कोरोना काल से पहले इंदौर-बिलासपुर एक्सप्रेस गाड़ी संख्या 18234 एवं 18233, भोपाल-बिलासपुर एक्सप्रेस गाड़ी संख्या 18235 एवं 18236, रीवा-बिलासपुर गाड़ी संख्या 18247 एवं 18248, बिलासपुर-चिरमिरी गाड़ी संख्या 18257 एवं 18258 तथा दुर्ग-अंबिकापुर गाड़ी संख्या 18241 एवं 18242 सहित अन्य यात्री ट्रेनों का छुलहा स्टेशन पर ठहराव होता था।

इन ट्रेनों के ठहराव से आसपास के ग्रामीणों, विद्यार्थियों, कर्मचारियों, व्यापारियों एवं आम यात्रियों को आवागमन की सुविधा मिलती थी। कांग्रेस नेता का आरोप है कि कोरोना काल के बाद रेलवे द्वारा इन ट्रेनों के ठहराव को पुनः बहाल नहीं किया गया, जिससे क्षेत्र की बड़ी आबादी को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने दावा किया कि छुलहा, नगदहा, सिन्दुरी, हर्री, बर्री, भगतबांध, मौहरी, अमगवा, बेलिया, बेला, टांकी, कुसमहाई, खिरनाटोला, कांसा, कोड़ा, अगरियानार सहित आसपास के 15 से अधिक गांवों की करीब 30 हजार की आबादी इससे प्रभावित हो रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि छुलहा रेलवे स्टेशन पर पूर्व में रुकने वाली यात्री ट्रेनों का ठहराव जल्द से जल्द पुनः प्रारंभ नहीं किया गया तो कांग्रेस पार्टी ग्रामीणों एवं यात्रियों के साथ मिलकर आंदोलन करेगी।

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