नल जल योजना के आपरेटरो की बैठक सम्पन्न, जेल भरो आंदोलन में होंगे शामिल


अनूपपुर

नल जल योजना में कार्यरत आपरेटरो की बैठक सम्पन्न हुआ। बैठक को संबोधित करते हुए सीटू नेता कामरेड जुगुल किशोर राठौर ने कहा कि, आदिवासी के नाम से बनीं योजना का लाभ आदिवासियों को नहीं मिल पा रहा है, इसका मुख्य कारण यह है कि आदिवासी के नाम से वोट लेकर निर्वाचित प्रतिनिधि दर असल में कार्पोरेट घरानों की दलाली करने में लीन हैं, जिसके कारण आदिवासियों की लूट बेरोकटोक एवं बेखौफ होकर की जा रही है। यही वजह है कि  जनप्रतिनिधियों के प्रति जनता का विस्वास कम हो रही है और लोकतंत्र पर विस्वास भी कमजोर होती जा रही है। 

उन्होंने कहा कि जिला एवं सम्भाग का नेतृत्व करने वाले बड़े नेता पुष्पराजगढ़ के निवासी हैं, लेकिन विगत 7-8 वर्षों से मध्यप्रदेश शासन का उपक्रम मध्यप्रदेश जल निगम मर्यादित परियोजना क्रियान्वयन इकाई शहडोल के ठेकेदार सीएम आर इंफ्रास्ट्रक्चर प्राईवेट लिमिटेड के द्वारा मध्यप्रदेश शासन श्रम विभाग द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन से आधे से भी कम वेतन पर काम करवाया जाकर शोषण किया जा रहा है, जिस पर हमारे जनप्रतिनिधियों का कोई सकारात्मक हस्ताक्षेप नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि ठेकेदार की इस लूट की जानकारी सांसद हिमाद्री सिंह और पुष्पराजगढ़ विधानसभा क्षेत्र के विधायक फुन्देलाल सिंह मार्कों को नहीं है लेकिन आदिवासियों की इस तरह के शोषण ठेकेदार द्वारा किया जाना इन जनप्रतिनिधियों की भूमिका सवाल के घेरे में आना स्वाभाविक है।

कामरेड जुगुल राठौर ने कहा कि मजदूरों को ठेकेदार के शोषण से बचने का एक मात्र रास्ता संघर्ष है। उन्होंने अपील किया कि 10 अगस्त को जिला मुख्यालय अनूपपुर में जेल भरो आंदोलन में शामिल होकर अपनी हक़ की लड़ाई को मजबूत बनाएं।

45 लाख के मंगल भवन घटिया सामग्री से कराया जा रहा है निर्माण,  गुणवत्ता को लेकर उठे सवाल, जांच में उठी मांग

*दुर्घटना की आशंका*


अनूपपुर

नगर पालिका परिषद कोतमा के वार्ड नंबर 12, गोविंदा कालरी में करीब 45 लाख रुपये की लागत से बन रहे मंगल भवन का निर्माण कार्य गुणवत्ता को लेकर विवादों में घिर गया है। स्थानीय निवासियों ने निर्माण में घटिया सामग्री व मानकों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है।

*भारी लागत पर सवाल* 

करीब 45 लाख रुपये की स्वीकृत लागत से बन रहे इस भवन के लिए स्थानी लोगों का कहना है कि सरकारी धन का सही उपयोग नहीं हो रहा है। उनका आरोप है कि इस बड़ी राशि के अनुरूप निर्माण की गुणवत्तायुक्त नहीं है।

*घटिया निर्माण सामग्री के आरोप*

स्थानीय लोगों का दावा है कि निर्माण स्थल पर इस्तेमाल हो रही ईंट, सीमेंट और रेत की गुणवत्ता मानक से कम है। उनका कहना है कि सरकारी गाइडलाइन और तकनीकी मापदंडों का पालन नहीं किया जा रहा है।

*नींव और मजबूती पर चिंता*

स्थानी निवासियों ने आशंका जताई है कि भवन की नींव और दीवारें कमजोर बनाई जा रही हैं, जिससे आने वाले समय में भवन की सुरक्षा पर खतरा पैदा हो सकता है। उन्होंने भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना को लेकर आशंका जताई है ।

*प्रशासन से जांच की मांग*

मामले को गंभीरता से लेते हुए ग्रामीणों ने नगर पालिका प्रशासन और जिला कलेक्टर से तत्काल निष्पक्ष जांच की मांग की है। साथ ही, गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर संबंधित ठेकेदार व निर्माण कराने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई है।

*इनका कहना है* 

आपके द्वारा हमको जानकारी प्राप्त हुई है, इंजीनियर को भेज कर दिखवा लेते हैं

*अजय सराफ नगर पालिका अध्यक्ष कोतमा*

उच्च न्यायालय का फर्जी आदेश देकर आरोपी को दिलाई जमानत, एफआईआर दर्ज

*15 दिन में जांच कर न्यायालय में पेश करने का आदेश*


अनूपपुर 

जिले में पिता की जमानत कराने के लिए पुत्र के द्वारा उच्च न्यायालय का एक कूट रचित आदेश प्रस्तुत करते हुए पुत्र के द्वारा जालसाजी किए जाने के मामले में अपर सत्र न्यायालय के निर्देश पर रामनगर पुलिस ने कूट रचना का आरोपी ओमप्रकाश नामदेव एवं अन्य अज्ञात व्यक्तियों के विरुद्ध धारा 336(2), 337, 338, 339 एवं 340(2) के तहत प्रकरण कायम कर विवेचना प्रारंभ कर दी है। 15 दिन में मामले की जांच कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करना भी अनिवार्य किया गया है।

रामनगर थाना प्रभारी सुमित कौशिक ने बताया कि तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश के न्यायालय के द्वारा रामनगर पुलिस को अपराध दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे। मामले के बारे में बताया गया कि न्यायालय में लंबित एस.सी.ए.टी.आर. प्रकरण क्रमांक 50/24 (शासन बनाम शिवविशाल नामदेव) की सुनवाई के दौरान 16 दिसंबर 2024 को अभियुक्त शिव विशाल नामदेव के पुत्र ओमप्रकाश नामदेव के द्वारा एक आदेश उच्च न्यायालय का बताकर प्रस्तुत किया गया था। जब इस आदेश की सत्यता के संबंध में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय से जानकारी मांगी गई, तब सहायक रजिस्ट्रार, जबलपुर द्वारा स्पष्ट किया गया कि संबंधित आदेश उच्च न्यायालय द्वारा पारित ही नहीं किया गया था। इसके बाद न्यायालय ने पूरे मामले की अलग से जांच कराई।

जांच के दौरान शासकीय कन्या प्राथमिक पाठशाला फुनगा के प्रभारी प्राचार्य सुखदेव सिंह तथा मलगा विद्यालय की प्रधानाध्यापक शकुन्तला सिंह मार्को के बयान दर्ज किए गए। जांच में सुखदेव सिंह ने फर्जी आदेश की मूल प्रति न्यायालय में प्रस्तुत करते हुए बताया कि यह दस्तावेज दो व्यक्तियों द्वारा स्कूल में लाकर दिया गया था। उन्होंने यह भी बताया कि आरोपी ओमप्रकाश नामदेव ने आदेश मिलने से दो-तीन दिन पहले ही उन्हें कहा था कि हाईकोर्ट से पुनः जांच का आदेश आने वाला है, जिसे प्राप्त कर लेना।

न्यायालय ने जांच के आधार पर माना कि ओमप्रकाश नामदेव एवं अन्य अज्ञात व्यक्तियों द्वारा कथित रूप से उच्च न्यायालय का कूटरचित आदेश तैयार कर उसका उपयोग किया गया। आदेश में शासकीय शिक्षकों के अवकाश एवं सेवा संबंधी अधिकारों को प्रभावित करने वाले निर्देश भी शामिल थे।

MKRdezign

,

संपर्क फ़ॉर्म

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget