गर्भवती को नही मिला एम्बुलेंस, चली गई महिला की जान, एंबुलेंस के जिला कोऑर्डिनेटर को नोटिस जारी


शहडोल

जिले के जैतपुर क्षेत्र में एक गर्भवती महिला की मौत की आवाज अभी तक गूंज ही रही थी, 108 एंबुलेंस व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। आरोप है कि प्रसव पीड़ा से तड़प रही महिला को समय पर 108 एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई गई, जिसके चलते परिजनों को ऑटो से अस्पताल ले जाना पड़ा। लेकिन जैतपुर अस्पताल में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। मामले को खबर प्रकाशित हुई, जिसके बाद सांसद हिमाद्री सिंह ने कलेक्टर से फोन पर बात कर जवाब मांगा। सांसद और कलेक्टर के बीच हुई बातचीत का वीडियो भी सामने आया है। लेकिन कार्यवाही केवल नोटिस तक सीमित रह गई है।

मृतका की पहचान जैतपुर थाना क्षेत्र के गलहथा गांव के मौहार टोला निवासी 22 वर्षीय जयमंती पाण्डो, पत्नी रामकुमार पाण्डो के रूप में हुई है। परिजनों का आरोप है कि 12 जुलाई की सुबह प्रसव पीड़ा शुरू होने पर उन्होंने 108 एंबुलेंस को चार से अधिक बार फोन किया। हर बार यही जवाब मिला कि एंबुलेंस शहडोल में है और आने में समय लगेगा। काफी देर इंतजार के बाद परिजन गांव से ऑटो किराए पर लेकर महिला को अस्पताल ले गए।

बताया गया कि ऑटो से अस्पताल ले जाते समय जयमंती ने रास्ते में ही बच्ची को जन्म दे दिया। किसी तरह उसे जैतपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।

घटना की खबर के बाद शहडोल संसदीय क्षेत्र की सांसद हिमाद्री सिंह ने मामले को गंभीरता से लिया और कलेक्टर को फोन कर पूरी जानकारी ली। बातचीत के दौरान सांसद ने कहा कि यदि जिले में एंबुलेंस की कमी है तो इसकी जानकारी दी जाए, जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त एंबुलेंस उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने 108 एंबुलेंस के जिला कोऑर्डिनेटर को नोटिस जारी किया है। 

भवन आलीशान  लेकिन डॉक्टर नहीं, बेलिया बड़ी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खुद 'बीमार',  ग्रामीण परेशान

*झाड़ियों से घिरा स्वास्थ्य केंद्र, 


अनूपपुर

ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के सरकारी दावों के बीच कोतमा विधानसभा के बेलिया बड़ी स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की हकीकत कुछ और ही तस्वीर बयां कर रही है। भवन तो तैयार है, लेकिन वर्षों से नियमित डॉक्टर की उपलब्धता नहीं होने और स्टाफ की कमी के कारण हजारों ग्रामीणों को इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है।

बेलिया‌ बड़ी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र  से लेदरा, पकरिहा, राजाकछार सहित आसपास के 8 से 10 गांवों की करीब 10 से 15 हजार आबादी निर्भर है। यह क्षेत्र आदिवासी बहुल और दूरस्थ होने के कारण यहां प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की अहम भूमिका है, लेकिन डॉक्टर के अभाव में मरीजों को मामूली इलाज के बाद भी कोतमा या जिला अस्पताल रेफर किया जाता है।

ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र में डॉ. गणेश प्रजापति पदस्थ हैं, लेकिन उन्हें लंबे समय से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोतमा में अटैच कर दिया गया है। इसके चलते बेलिया बड़ी अस्पताल डॉक्टर विहीन हो गया है। , जिससे मरीजों को प्राथमिक उपचार तक के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है।

अस्पताल परिसर में बड़ी-बड़ी झाड़ियां और खरपतवार उग आए हैं। साफ-सफाई और रखरखाव के अभाव में परिसर में जहरीले जीव-जंतुओं और मच्छरों का खतरा बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति लंबे समय से बदहाल है, लेकिन जिम्मेदार विभाग ध्यान नहीं दे रहा।

एक ओर शासन बड़े अस्पतालों के निर्माण और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की घोषणाएं कर रहा है, वहीं दूसरी ओर बेलिया बड़ी जैसे ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र मूलभूत सुविधाओं और चिकित्सकीय स्टाफ के अभाव से जूझ रहे हैं। इससे ग्रामीणों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है। सूत्रों का कहना है कि जो स्टाफ है भी तो ना समय से आते हैं और ना समय से जाते हैं इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र किस तरह चल रही है

*क्या कहते हैं अधिकारी*

खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. के.एल. दीवान ने बताया कि डॉक्टरों की कमी के कारण वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर बेलिया बड़ी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के पदस्थ डॉक्टर को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोतमा में अटैच किया गया है। वहीं ड्रेसर के सेवानिवृत्त होने के बाद उसका पद भी वर्तमान में रिक्त है। लेकिन डॉक्टर नहीं हैं।

समाचार 01 फ़ोटो 01

भवन आलीशान  लेकिन डॉक्टर नहीं, बेलिया बड़ी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खुद 'बीमार',  ग्रामीण परेशान

*झाड़ियों से घिरा स्वास्थ्य केंद्र, 

अनूपपुर

ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के सरकारी दावों के बीच कोतमा विधानसभा के बेलिया बड़ी स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की हकीकत कुछ और ही तस्वीर बयां कर रही है। भवन तो तैयार है, लेकिन वर्षों से नियमित डॉक्टर की उपलब्धता नहीं होने और स्टाफ की कमी के कारण हजारों ग्रामीणों को इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है।

बेलिया‌ बड़ी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र  से लेदरा, पकरिहा, राजाकछार सहित आसपास के 8 से 10 गांवों की करीब 10 से 15 हजार आबादी निर्भर है। यह क्षेत्र आदिवासी बहुल और दूरस्थ होने के कारण यहां प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की अहम भूमिका है, लेकिन डॉक्टर के अभाव में मरीजों को मामूली इलाज के बाद भी कोतमा या जिला अस्पताल रेफर किया जाता है।

ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र में डॉ. गणेश प्रजापति पदस्थ हैं, लेकिन उन्हें लंबे समय से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोतमा में अटैच कर दिया गया है। इसके चलते बेलिया बड़ी अस्पताल डॉक्टर विहीन हो गया है। , जिससे मरीजों को प्राथमिक उपचार तक के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है।

अस्पताल परिसर में बड़ी-बड़ी झाड़ियां और खरपतवार उग आए हैं। साफ-सफाई और रखरखाव के अभाव में परिसर में जहरीले जीव-जंतुओं और मच्छरों का खतरा बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति लंबे समय से बदहाल है, लेकिन जिम्मेदार विभाग ध्यान नहीं दे रहा।

एक ओर शासन बड़े अस्पतालों के निर्माण और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की घोषणाएं कर रहा है, वहीं दूसरी ओर बेलिया बड़ी जैसे ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र मूलभूत सुविधाओं और चिकित्सकीय स्टाफ के अभाव से जूझ रहे हैं। इससे ग्रामीणों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है। सूत्रों का कहना है कि जो स्टाफ है भी तो ना समय से आते हैं और ना समय से जाते हैं इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र किस तरह चल रही है

*क्या कहते हैं अधिकारी*

खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. के.एल. दीवान ने बताया कि डॉक्टरों की कमी के कारण वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर बेलिया बड़ी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के पदस्थ डॉक्टर को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोतमा में अटैच किया गया है। वहीं ड्रेसर के सेवानिवृत्त होने के बाद उसका पद भी वर्तमान में रिक्त है। लेकिन डॉक्टर नहीं हैं।

समाचार 02 फ़ोटो 02

गर्भवती को नही मिला एम्बुलेंस, चली गई महिला की जान, एंबुलेंस के जिला कोऑर्डिनेटर को नोटिस जारी

शहडोल

जिले के जैतपुर क्षेत्र में एक गर्भवती महिला की मौत की आवाज अभी तक गूंज ही रही थी, 108 एंबुलेंस व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। आरोप है कि प्रसव पीड़ा से तड़प रही महिला को समय पर 108 एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई गई, जिसके चलते परिजनों को ऑटो से अस्पताल ले जाना पड़ा। लेकिन जैतपुर अस्पताल में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। मामले को खबर प्रकाशित हुई, जिसके बाद सांसद हिमाद्री सिंह ने कलेक्टर से फोन पर बात कर जवाब मांगा। सांसद और कलेक्टर के बीच हुई बातचीत का वीडियो भी सामने आया है। लेकिन कार्यवाही केवल नोटिस तक सीमित रह गई है।

मृतका की पहचान जैतपुर थाना क्षेत्र के गलहथा गांव के मौहार टोला निवासी 22 वर्षीय जयमंती पाण्डो, पत्नी रामकुमार पाण्डो के रूप में हुई है। परिजनों का आरोप है कि 12 जुलाई की सुबह प्रसव पीड़ा शुरू होने पर उन्होंने 108 एंबुलेंस को चार से अधिक बार फोन किया। हर बार यही जवाब मिला कि एंबुलेंस शहडोल में है और आने में समय लगेगा। काफी देर इंतजार के बाद परिजन गांव से ऑटो किराए पर लेकर महिला को अस्पताल ले गए।

बताया गया कि ऑटो से अस्पताल ले जाते समय जयमंती ने रास्ते में ही बच्ची को जन्म दे दिया। किसी तरह उसे जैतपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।

घटना की खबर के बाद शहडोल संसदीय क्षेत्र की सांसद हिमाद्री सिंह ने मामले को गंभीरता से लिया और कलेक्टर को फोन कर पूरी जानकारी ली। बातचीत के दौरान सांसद ने कहा कि यदि जिले में एंबुलेंस की कमी है तो इसकी जानकारी दी जाए, जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त एंबुलेंस उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने 108 एंबुलेंस के जिला कोऑर्डिनेटर को नोटिस जारी किया है। 

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ट्रेलर की चपेट मे आने से बाइक सवार की हुई मौत, परिजनों व ग्रामीणों में आक्रोश

शहडोल

धनपुरी थाना क्षेत्र में हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे में ट्रेलर की चपेट में आने से एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद स्थानीय लोगों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिला।

मृतक की पहचान राजेंद्र कोल (उम्र लगभग 35 वर्ष), पिता प्रेमलाल कोल, निवासी ग्राम बेमौरी, सागवाटोला, ग्राम पंचायत डोगराटोला, तहसील अनूपपुर के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि राजेंद्र कोल मोटरसाइकिल से जा रहे थे, तभी क्रमांक CG 10 BL 9095 दामिनी कोल माइंस से कोयला लेकर संगमा कोल साइडिंग जा रही थी। बेम्हौरी हनुमान मंदिर के सामने बाइक सवार राजेंद्र कोल उसकी चपेट में आ गया। टक्कर इतनी भीषण थी कि युवक की मौके पर ही मौत हो गई और शव हाइवा के नीचे फंस गया।

घटना की सूचना मिलते ही धनपुरी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कार्रवाई शुरू की। हादसे के बाद ग्रामीणों ने नाराजगी जताते हुए विरोध प्रदर्शन किया तथा दोषी चालक के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की।

पुलिस ने मामला दर्ज कर ट्रेलर चालक की तलाश शुरू कर दी है। घटना के कारणों की जांच की जा रही है। ग्रामीणों ने जताया आक्रोश, कार्रवाई की मांग पुलिस ने जांच शुरू की, चालक की तलाश जारी।

समाचार 04 फ़ोटो 04

शासकीय कन्या विद्यालय के प्राचार्य व उप प्राचार्य की राजनीतिक गतिविधियों में संलिप्तता,  जांच की मांग

उमरिया

भारतीय राष्ट्रीय छात्र संघ (एनएसयूआई) ने शासकीय कन्या विद्यालय पाली के प्राचार्य रामशरण द्विवेदी एवं उप प्राचार्य ममिता विलखरे सहित कुछ शिक्षकों की कथित राजनीतिक गतिविधियों में संलिप्तता को लेकर गंभीर आपत्ति दर्ज कराते हुए अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) बिरसिंहपुर पाली को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच एवं आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।

एनएसयूआई के प्रदेश सचिव हर्ष अवधिया ने बताया कि सोशल मीडिया पर प्रसारित फोटो एवं अन्य जानकारियों में शासकीय कन्या विद्यालय पाली के प्राचार्य रामशरण द्विवेदी एवं उप प्राचार्य ममता विलखरे कथित रूप से अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के स्थापना दिवस कार्यक्रम में सक्रिय रूप से उपस्थित दिखाई दे रहे हैं। यदि जांच में यह तथ्य सही पाए जाते हैं कि उन्होंने शासकीय पद पर रहते हुए किसी राजनीतिक या राजनीतिक रूप से संबद्ध छात्र संगठन की गतिविधियों में भाग लिया, तो यह शासकीय सेवा आचरण नियमों का गंभीर उल्लंघन होगा। विद्यालय के प्राचार्य एवं उप प्राचार्य स्वयं किसी राजनीतिक कार्यक्रम में सक्रिय भूमिका निभाते पाए जाते हैं, तो इससे शिक्षा व्यवस्था की निष्पक्षता, विद्यार्थियों का विश्वास तथा शासकीय सेवा की गरिमा पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं।

ज्ञापन में मांग की गई है कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए, कार्यक्रम में प्राचार्य रामशरण द्विवेदी, उप प्राचार्य ममता विलखरे एवं अन्य संबंधित शिक्षकों की भूमिका की जांच की जाए तथा यदि सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन सिद्ध होता है तो उनके विरुद्ध नियमानुसार कठोर विभागीय कार्रवाई की जाए। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।

समाचार 05 फ़ोटो 05

पाइप लाइन बिछाने के नाम पर ठेकेदार ने खोद दी सड़क, दलदल बना मार्ग स्कूली बच्चे व ग्रामीण परेशान

अनूपपुर

जैतहरी विकासखंड के ग्राम पंचायत जमुडी ग्राम बैरीबांध, वार्ड क्रमांक 15 (पटेल मोहल्ला) कहते हैं, विकास कागजों पर सबसे तेज दौड़ता है, और बैरीबांध गांव के वार्ड क्रमांक 15 में यही होता दिख रहा है। पानी सप्लाई पाइपलाइन बिछाने के नाम पर सड़क खोदी गई, लेकिन उसके बाद जो "मरम्मत" हुई, वह सिर्फ कागजों और जुबानी दावों तक सिमट कर रह गई।

ठेकेदार राकेश तिवारी ने ग्रामीणों से वादा किया था कि खुदाई के बाद पूरी सड़क पर मुरूम बिछा दी जाएगी। महीनों बीत गए, बरसात आ गई, कीचड़ ने सड़क को निगल लिया लेकिन मुरूम का कहीं अता-पता नहीं। जब ग्रामीणों ने सवाल उठाया तो ठेकेदार साहब का जवाब भी गजब निकला "हमने तो सरपंच संतोष कुमार को तीन गाड़ी मुरूम का पैसा दे दिया है, और मुरूम बिछवा भी दी गई है।" यानी पैसा दिया, मुरूम बिछी बताई जा रही, मगर सड़क पर सिर्फ कीचड़ का साम्राज्य है। आखिर वह मुरूम गई कहां यह सवाल अब पूरे गांव का बन गया है।

ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि इस पूरे खेल में सरपंच पति संतोष सिंह उइके और सचिव राम नरेश पटेल की भूमिका बेहद संदिग्ध रही। बरसात के इस मौसम में सबसे ज्यादा मुसीबत उन मासूम बच्चों की है जो रोज सुबह स्कूल जाते हैं। मुरूम न बिछने से सड़क पूरी तरह कीचड़ में तब्दील हो चुकी है, और बाइक से उछलते कीचड़ के छींटे बच्चों की यूनिफॉर्म बर्बाद कर देते हैं। मजबूरन कई बच्चे स्कूल तक नहीं पहुंच पाते, और अभिभावक रोज सुबह इसी उलझन में उलझे रहते हैं।

हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि कई लोगों की स्कूटी और बाइक तक इस कीचड़ में फंसकर रह जाती हैं। ज्यादा कीचड़ होने की वजह से गाड़ियों के पहियों और उनके ऊपरी हिस्सों में कीचड़ इस कदर जम जाता है कि गाड़ी आगे बढ़ना ही बंद कर देती है। कई बार लोगों को बीच रास्ते में उतरकर पहियों से कीचड़ साफ करना पड़ता है, तो कई बार गाड़ी धकेलकर निकालनी पड़ती है इतना ही नहीं, फिसलन इतनी ज्यादा है कि कई लोगों की बाइक स्लिप होकर सीधे गिर ही जाती है, जिससे चोट लगने का खतरा भी बना रहता है यानी रोजमर्रा का सफर अब एक जंग बन चुका है। सब्जी लेकर मंडी जाने वाले किसान भी कम परेशान नहीं। 

समाचार 06 फ़ोटो 06

फरवरी में खुलनी वाली निविदा ठण्डे बस्ते में, 12.73 करोड़ के 5 छात्रावास भवन लटके, आदिवासी छात्रों का भविष्य अधर में

उमरिया

जनजातीय कार्य विभाग की लापरवाही से जिले में 12 करोड़ 73 लाख रुपए की 5 छात्रावास भवन परियोजनाएं 4 महीने से अटकी पड़ी हैं। विभाग ने टेंडर खोलने की तारीख फरवरी  तय की गयी थी, लेकिन आज तक निविदाएं नहीं खोली गईं।

कार्यालय कलेक्टर, जनजातीय कार्य विभाग द्वारा 03.01.2026 को निविदा क्रमांक टेंडर/निर्माण/2025-26/123 जारी की गई थी। इसमें स्पष्ट लिखा था कि ऑनलाइन निविदाएं 06.02.2026 को खोली जाएंगी। आवेदन की अंतिम तिथि 04.02.2026 रखी गयी थी। विदित होवे की उमरिया जिले के छात्रावास भवनों के निर्माण कराने के लिए पाली विकास खंड के बकेली छात्रावास के लिए  327.63 लाख, मालाचुआ और बन्नौदा छात्रावास के लिए -67.15 लाख रूपये और मानपुर विकास खंड के मानपुर छात्रावास के लिए 327.67 लाख हरदी छात्रावास - 223.36 लाख।

कुल: 12.73 करोड़ रूपये की निविदा आन लाइन निकाला गया था, सभी भवनों को 18 माह में पूरा करना था, लेकिन आदिम जाति विभाग की उदासीनता के चलते फरवरी में खुलने वाले निविदा आज भी ठण्डे बस्ते में कैद होकर रह गयें है। 

आदिवासी छात्रों के शिक्षण व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित करने और उन्हें सुविधा युक्त आवासीय शिक्षा प्रदान करने के लिए छात्रावास भवनों के निर्माण कराने की मंशा पर आदिम जाति विभाग पानी फेरते नजर आ रही है। बताया जाता है कि इन भवनों के अधर में लटक जाने से छात्रों का भविष्य अंधकार में फंस कर रह गया है। 

जनवरी में हुई इस निविदा प्रक्रिया में जो दर पर ठेकेदार काम करने के लिए निविदा डाली गयी थी, बढती महंगाई और हर छ:माह में बढी मजदूरी प्रक्रिया के तहत जो टेंडर डाले गयें है, उन पर अब काम करने के लिए ठेकेदारों की बाध्यता समाप्त हो गयी है। अनावश्यक विभागीय विलंबता के कारण इन कार्यों की  टेंडर राशि में वृद्धि होने की आशंका बन गयी है। 

इस संबंध में सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग उमरिया से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उनके शासकीय मोबाइल नंबर 7049855242 पर संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव करना उचित नहीं समझा।

समाचार 07 फ़ोटो 07

एक ही भूमि का अलग-अलग व्यक्तियों से सौदा कर 4 लाख की धोखाधड़ी करने वाला फरार आरोपी गिरफ्तार

उमरिया 

थाना कोतवाली उमरिया पुलिस द्वारा धोखाधड़ी के प्रकरण में फरार आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। थाना कोतवाली उमरिया में अपराध क्रमांक 263/2026, धारा 318(4), 316(2) भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया गया था । यह प्रकरण आवेदक नीरज अंकेश निवासी शहडोल की शिकायत पर दर्ज हुआ । जांच के दौरान यह तथ्य सामने आए कि आरोपी कमलेश कुमार साहू ने विकटगंज जिला उमरिया स्थित अपनी भूमि के विक्रय के संबंध में दिनांक 07.06.2024 को शिकायतकर्ता से विधिवत पंजीकृत अनुबंध (एग्रीमेंट) किया तथा कुल विक्रय मूल्य ₹10,00,000 तय कर शिकायतकर्ता से ₹4,00,000 अग्रिम राशि ऑनलाइन माध्यम से प्राप्त कर ली । शेष राशि विक्रय विलेख के समय दी जानी थी ।

विवेचना में यह भी पाया गया कि आरोपी उक्त भूमि के संबंध में पहले ही एक अन्य व्यक्ति से धनराशि प्राप्त कर चुका था, जिसकी जानकारी उसने शिकायतकर्ता से जानबूझकर छिपाई । इसके बाद अनुबंध की अवधि प्रभावी रहते हुए उसी भूमि को अन्य व्यक्तियों के पक्ष में विक्रय विलेख निष्पादित कर दिया । इस प्रकार आरोपी ने एक ही भूमि के संबंध में अलग-अलग व्यक्तियों से धनराशि प्राप्त कर छलपूर्वक धोखाधड़ी की तथा शिकायतकर्ता की ₹4,00,000 की राशि वापस नहीं की, जिससे उसे आर्थिक क्षति हुई ।

प्रकरण में पर्याप्त तथ्य प्राप्त होने पर थाना कोतवाली उमरिया में अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की गई। विवेचना के दौरान आरोपी की तलाश की जा रही थी। इसी क्रम में को आरोपी कमलेश कुमार साहू पिता गणेश प्रसाद साहू उम्र 33 वर्ष निवासी ग्राम बेलमना थाना चंदिया जिला उमरिया, हाल निवासी दूरसंचार कॉलोनी थाना मकरोनिया जिला सागर को मकरोनिया, जिला सागर से गिरफ्तार किया गया।

समाचार 08 फ़ोटो 08

नाबालिग चालक, ड्रिंक एंड ड्राइव, बिना परमिट पर कार्यवाही, 47 चालान, 1.32 लाख का जुर्माना

अनूपपुर

यातायात पुलिस ने जिलेभर में स्कूली वाहनों के विरुद्ध विशेष सघन जांच अभियान चलाकर नियमों की अनदेखी करने वालों पर बड़ा प्रहार किया है।  इस अभियान के दौरान कई स्कूली वाहन सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करते पाए गए, जबकि नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने और शराब के नशे में वाहन चलाने जैसे गंभीर मामलों में भी कड़ी कार्यवाही की गई।

महज दो दिनों में हुई इस कार्यवाही ने वाहन संचालकों में हड़कंप मचा दिया। 20 जुलाई को 17 चालानों पर ₹66,000 तथा 21 जुलाई की दोपहर तक 30 चालानों पर ₹66,600 का जुर्माना लगाया गया। इस प्रकार 47 चालानों के माध्यम से कुल ₹1,32,600 (एक लाख बत्तीस हजार छह सौ रुपये) का शमन शुल्क अधिरोपित किया गया।

जांच के दौरान 12 नाबालिग वाहन चालक वाहन चलाते पाए गए, जिनके विरुद्ध मोटरयान अधिनियम के तहत कार्यवाही की गई। इसके अलावा 5 कमर्शियल वाहन चालक शराब के नशे में वाहन चलाते पाए गए, जिन्हें वाहन जब्त कर न्यायालय भेजने की कार्रवाई की गई। वहीं 13 मामलों में परमिट शर्तों का उल्लंघन, 2 वाहन बिना फिटनेस प्रमाणपत्र, 1 चालक बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस तथा 1 वाहन बिना बीमा संचालित होता मिला, जिन पर भी नियमानुसार कार्यवाही की गई।

समाचार 09

मंदिर मे चोरी का सामान जप्त आरोपी गिरफ्तार

उमरिया

थाना मानपुर पुलिस टीम द्वारा मंदिर मे चोरी करने वाले आरोपी को गिरफ्तार कर चोरी का मशरूका बरामद किया है । 20 जुलाई 2026 को अक्षत पाण्डेय निवासी ग्राम ताला द्वारा रिपोर्ट दर्ज कराई गई कि ग्राम ताला स्थित हनुमान मंदिर से 10 किलोग्राम पीतल का घंटा एवं 03 किलोग्राम तांबे का शेषनाग किसी अज्ञात आरोपी द्वारा चोरी कर ले गया है। फरियादी की रिपोर्ट पर थाना मानपुर मे अपराध क्रमांक 232/2026 धारा 331(4), 305(क) बी.एन.एस. कायम कर विवेचना मे लिया गया । विवेचना के दौरान मुखबिर की सूचना एवं साक्ष्यों के आधार पर आरोपी राजाराम बैगा पिता रामगरीब बैगा, उम्र 20 वर्ष, निवासी ग्राम ताला को हिरासत मे लेकर पूछताछ की गई, जिसके द्वारा जुर्म स्वीकार करने पर गिरफ्तार किया गया । आरोपी की निशानदेही पर चोरी गया  सम्पूर्ण मशरूका बरामद कर जप्त किया गया तथा आरोपी के विरुद्ध वैधानिक कार्यवाही की गई।

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