चार लोगों को सांप के को डसा,  दो की हुई मौत, दो की हालत गंभीर, अस्पताल में चल रहा इलाज


अनूपपुर/शहडोल

जिले के भालूमाड़ा थाना अंतर्गत ग्राम पंचायत बाड़ीखार के भेड़वाटोला निवासी भानु प्रताप सिंह रात खाना-पीना खाने बाद घर के अंदर तखत में पत्नी रेखा सिंह पुत्री माधवी उम्र 6 वर्ष के साथ सो रहे थी, तभी अत्यंत जहरीले करैत प्रजाति के डंडा करायल सर्प के घर के अंदर तखत में चढ़कर 6 वर्षीय बालिका एवं भानु प्रताप व उनकी पत्नी को डस दिया,  जानकारी मिलने पर परिजनों द्वारा उपचार हेतु सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोतमा लाकर प्रारंभिक उपचार कराने बाद रेफर किए जाने से जिला चिकित्सालय अनूपपुर लाने पर डॉक्टरों द्वारा परीक्षण के दौरान 6 वर्षीय बालिका जिसके पैर में सर्प ने काटा था की अस्पताल पहुंचने के पूर्व मृत्यु होना चिकित्सकों ने बताया, इस बीच पिता भानु प्रताप सिंह मां रेखा सिंह को भी सांप के काटने के कारण चिकित्सकों द्वारा भर्ती रख कर उपचार किया जा रहा है। 

*किशोरी को सांप ने डसा इलाज में दौरान हुई मौत*

जिले के शहडोल सोहागपुर नगर के इंदिरा वार्ड में एक दर्दनाक हादसे में 15 वर्षीय छात्रा की जहरीले कोबरा के डसने से मौत हो गई। घटना बुधवार और गुरुवार की दरमियानी रात की है। छात्रा अपने घर में सो रही थी, तभी जहरीले सांप ने उसे काट लिया। परिजन उसे तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन इलाज के दौरान उसकी जान नहीं बच सकी। घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है।

मृतक छात्रा की पहचान रितिका सूर्यवंशी के रूप में हुई है, जो नगर के इंदिरा वार्ड निवासी जितेंद्र सूर्यवंशी की बेटी थी। परिजनों के मुताबिक, रात करीब 3:30 बजे रितिका की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। जब घरवालों ने देखा तो उसके शरीर पर सर्पदंश के निशान मिले। इसके बाद सुबह करीब 4 बजे उसे तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, सोहागपुर ले जाया गया। डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर हालत को देखते हुए जिला अस्पताल रेफर कर दिया, लेकिन वहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

उपाध्यक्ष ले रहे झूठी वाह-वाही, पार्षद की पहल से रंजीत यादव दफाई के लोगों को मिली पेयजल समस्या से राहत 


अनूपपुर

जिले के नगर परिषद बरगवां-अमलाई अंतर्गत वार्ड क्रमांक 09 स्थित रंजीत दफाई में लंबे समय से पेयजल संकट बना हुआ था। गर्मी के मौसम सहित पूरे वर्ष वार्ड़ के लोगों को पानी के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। कई बार संबंधित अधिकारियों के समक्ष शिकायतें की गईं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका।

इसी बीच वार्ड के नागरिकों ने अपनी समस्या वार्ड क्रमांक 09 की पार्षद अर्चना अजय यादव के समक्ष रखी। समस्या की गंभीरता को देखते हुए पार्षद ने नगर परिषद की सीएमओ शिवांगी सिंह बघेल से चर्चा कर तकनीकी विकल्पों पर काम शुरू कराया। इसके बाद वार्ड़ में स्थायी जलापूर्ति सुनिश्चित करने की योजना तैयार की गई। नगर परिषद क्षेत्र में हाल ही में कराए गए लगभग एक दर्जन नए बोरवेलों में से वार्ड क्रमांक 09 अमलाई मोहाड़ा में किए गए बोरवेल को इस योजना से जोड़ा गया। यहां 3 एचपी क्षमता का पंप स्थापित कर पाइपलाइन के माध्यम से रंजीत दफाई तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था की गई। कार्य के दौरान आई तकनीकी एवं व्यवस्थागत चुनौतियों के बावजूद पार्षद अर्चना अजय यादव ने लगातार निगरानी रखी और आवश्यक समन्वय कर कार्य को पूरा कराया। अब पाइपलाइन के माध्यम से रंजीत दफाई में नियमित पेयजल आपूर्ति का मार्ग प्रशस्त हो गया है। वार्डवासियों का कहना है कि यह केवल पाइपलाइन बिछाने का कार्य नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही गंभीर पेयजल समस्या का स्थायी समाधान है, जिससे सैकड़ों लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। जलापूर्ति शुरू होने की जानकारी मिलते ही वार्ड में खुशी का माहौल है। स्थानीय लोगों ने पार्षद अर्चना अजय यादव का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने बिना किसी विलंब के समस्या का समाधान कराने के लिए गंभीर प्रयास किए। उनका कहना है कि पहले कई स्तरों पर शिकायतें करने के बावजूद समाधान नहीं मिला था, लेकिन पार्षद ने पहल कर कार्य पूरा कराया।इधर क्षेत्र में यह चर्चा भी है कि नगर परिषद के उपाध्यक्ष द्वारा वार्ड क्रमांक 09 में कराए गए इस कार्य का श्रेय स्वयं लेने का प्रयास किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि उपाध्यक्ष ने लोगों से कहा कि नईम अंसारी के घर के सामने कराए गए बोरवेल के माध्यम से रंजीत दफाई में पानी की व्यवस्था उनके प्रयासों से की जा रही है, जबकि वार्डवासियों का दावा है कि इस पूरी प्रक्रिया में पार्षद अर्चना अजय यादव लगातार सक्रिय रहीं और उनकी पहल से ही यह कार्य पूरा हो सका। जिसको लेकर रंजीत दफाई के लोग वार्ड कि पार्षद अर्चना अजय यादव को धन्यवाद ज्ञापित कर रहे हैं।

शिक्षा का उजाला करने वाला अंधकार के आगोश में, शिक्षा का विशाल वटवृक्ष धराशाई होने की कगार पर, शिक्षकों ने दिया त्यागपत्र

प्रबंधन की भूमिका सवालों के घेरे में, लापरवाही या साजिश, जिम्मेदार मौन


  

अनूपपुर

बचपन में हम सभी ने अपने बड़े बुजुर्गों से अक्सर किस्से कहानियों में यह कहते सुना होगा की अंधेरा कितना भी घना क्यों ना हो रोशनी की एक छोटी सी किरण ही काफी होती है। घने अंधेरे को चीरने के लिए लेकिन आज इन मुहावरों के माइने ही बदल गए हैं, चारो ओर अपनी चमक और रोशनी बिखरने वाली प्रकाश की नगरी चचाई अब अशिक्षा के अंधकार में डूबने की कगार पर है। स्कूल में बच्चों की घटती संख्या, लगातार शिक्षा का गिरता स्तर शिक्षा का एक विशाल वटवृक्ष आरसी इंग्लिश मीडियम स्कूल कुप्रबंधन का शिकार होकर धराशाई होने को है।

*शिक्षकों ने दिया त्यागपत्र*

स्कूल प्रबंधन के दुर्व्यवहार एवं अपनी उचित वेतन न मिलने से परेशान आठ शिक्षकों ने त्यागपत्र देकर विद्यालय छोड़ना ही उचित समझा, एक लंबे समय से विद्यालय में अपनी सेवा दे रहे, शिक्षकों ने न जाने कितनी बार प्रबंधन को विद्यालय की समस्याओं से अवगत कराया होगा, लेकिन कुप्रबंधन की मनमानी से मजबूर होकर शिक्षकों ने बाहर का रास्ता अपनाया है। शिक्षकों के इस्तीफों और भवन की जर्जर स्थिति के कारण चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों और अभिभावकों के बीच विद्यालय के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है।

*बदहाली के बहा रहा आंसू*

ऊर्जा नगरी के जिस आरसी स्कूल में पढ़ कर हजारों बच्चों ने अपना भविष्य सवारा, समाज में सम्मान से जीने की राह मिली, आज वही विद्यालय अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है, ऊर्जा नगरी में शिक्षा की अलख बुझने को है और प्रबंधन हाथ पर हाथ धर कर बैठा हुआ है। आखिर इसे क्या कहेंगे लापरवाही या साजिश हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि एक ही दिन में स्कूल का भवन जर्जर नहीं हुआ, एक लंबे अरसे से सही रखरखाव न होने की वजह से आज यह जर्जर हालात में है, आखिरकार प्रबंधन ने भवन का रख रखाव क्यों नहीं किया, लापरवाही साफ नजर आ रही हैं।

*सुनियोजित साजिश का खेल*

स्कूल प्रबंधन के इस सारे खेल में एक बात तो साफ है की स्वच्छ भारत मिशन के तहत सफाई तो होना निश्चित है, इस बात में भी कोई अचरज नहीं नहीं है की यह सारा खेल पूर्व नियोजित है, प्रबंधन के दो चेहरों अखिलेश सिंह और दत्ता सर ने बकायदे साजिश के तहत योजना बनाकर अपने काम को अंजाम तक पहुंचने का काम किया जा रहा है। सफाई के प्रथम चरण में विद्यार्थियों की संख्या में तेजी से कमी लाना, दूसरे चरण में शिक्षकों को बाहर का रास्ता दिखाना, तीसरे चरण में विद्यालय को जर्जर हालत में दिखाकर उसे बंद होने की कर तक पहुंचाना और उसके बाद चतुर्थ और अंतिम चरण पूरी चतुराई के साथ समिति के खाते में जमा एक बड़ी राशि का आपस में बंदर बट करना शामिल हैं।

*विद्यालय का लाखो रुपए असुरक्षित*

सूत्रों की माने तो आरसी इंग्लिश मीडियम स्कूल प्रबंधन समिति के अकाउंट में एक बड़ी राशि 80 लाख रुपए के लगभग असुरक्षित है, यदि विद्यालय प्रबंधन चाहता तो इस राशि का उपयोग कर विद्यालय भवन का बेहतर रखरखाव मरम्मत आदि कार्य करवाया जा सकता था। शिक्षकों को समय पर उचित वेतन देकर विद्यालय के गिरते शिक्षा स्तर को नियंत्रण किया जा सकता था। लेकिन प्रबंधन ने तो इसके विपरीत मनमानी करते हुए कक्षा 9वी से 12वीं का प्रवेश से बंद करवा दिया। विद्यालय को बदहाल होने दिया और शिक्षकों को इस्तीफा देने के लिए मजबूर कर दिया।


आरसी इंग्लिश मीडियम स्कूल का भविष्य संकट में, प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

उपशीर्षक:

शिक्षकों के इस्तीफे, जर्जर भवन और घटती छात्र संख्या ने बढ़ाई चिंता, प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप


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