शिक्षा का उजाला करने वाला अंधकार के आगोश में, शिक्षा का विशाल वटवृक्ष धराशाई होने की कगार पर, शिक्षकों ने दिया त्यागपत्र

शिक्षा का उजाला करने वाला अंधकार के आगोश में, शिक्षा का विशाल वटवृक्ष धराशाई होने की कगार पर, शिक्षकों ने दिया त्यागपत्र

प्रबंधन की भूमिका सवालों के घेरे में, लापरवाही या साजिश, जिम्मेदार मौन


  

अनूपपुर

बचपन में हम सभी ने अपने बड़े बुजुर्गों से अक्सर किस्से कहानियों में यह कहते सुना होगा की अंधेरा कितना भी घना क्यों ना हो रोशनी की एक छोटी सी किरण ही काफी होती है। घने अंधेरे को चीरने के लिए लेकिन आज इन मुहावरों के माइने ही बदल गए हैं, चारो ओर अपनी चमक और रोशनी बिखरने वाली प्रकाश की नगरी चचाई अब अशिक्षा के अंधकार में डूबने की कगार पर है। स्कूल में बच्चों की घटती संख्या, लगातार शिक्षा का गिरता स्तर शिक्षा का एक विशाल वटवृक्ष आरसी इंग्लिश मीडियम स्कूल कुप्रबंधन का शिकार होकर धराशाई होने को है।

*शिक्षकों ने दिया त्यागपत्र*

स्कूल प्रबंधन के दुर्व्यवहार एवं अपनी उचित वेतन न मिलने से परेशान आठ शिक्षकों ने त्यागपत्र देकर विद्यालय छोड़ना ही उचित समझा, एक लंबे समय से विद्यालय में अपनी सेवा दे रहे, शिक्षकों ने न जाने कितनी बार प्रबंधन को विद्यालय की समस्याओं से अवगत कराया होगा, लेकिन कुप्रबंधन की मनमानी से मजबूर होकर शिक्षकों ने बाहर का रास्ता अपनाया है। शिक्षकों के इस्तीफों और भवन की जर्जर स्थिति के कारण चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों और अभिभावकों के बीच विद्यालय के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है।

*बदहाली के बहा रहा आंसू*

ऊर्जा नगरी के जिस आरसी स्कूल में पढ़ कर हजारों बच्चों ने अपना भविष्य सवारा, समाज में सम्मान से जीने की राह मिली, आज वही विद्यालय अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है, ऊर्जा नगरी में शिक्षा की अलख बुझने को है और प्रबंधन हाथ पर हाथ धर कर बैठा हुआ है। आखिर इसे क्या कहेंगे लापरवाही या साजिश हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि एक ही दिन में स्कूल का भवन जर्जर नहीं हुआ, एक लंबे अरसे से सही रखरखाव न होने की वजह से आज यह जर्जर हालात में है, आखिरकार प्रबंधन ने भवन का रख रखाव क्यों नहीं किया, लापरवाही साफ नजर आ रही हैं।

*सुनियोजित साजिश का खेल*

स्कूल प्रबंधन के इस सारे खेल में एक बात तो साफ है की स्वच्छ भारत मिशन के तहत सफाई तो होना निश्चित है, इस बात में भी कोई अचरज नहीं नहीं है की यह सारा खेल पूर्व नियोजित है, प्रबंधन के दो चेहरों अखिलेश सिंह और दत्ता सर ने बकायदे साजिश के तहत योजना बनाकर अपने काम को अंजाम तक पहुंचने का काम किया जा रहा है। सफाई के प्रथम चरण में विद्यार्थियों की संख्या में तेजी से कमी लाना, दूसरे चरण में शिक्षकों को बाहर का रास्ता दिखाना, तीसरे चरण में विद्यालय को जर्जर हालत में दिखाकर उसे बंद होने की कर तक पहुंचाना और उसके बाद चतुर्थ और अंतिम चरण पूरी चतुराई के साथ समिति के खाते में जमा एक बड़ी राशि का आपस में बंदर बट करना शामिल हैं।

*विद्यालय का लाखो रुपए असुरक्षित*

सूत्रों की माने तो आरसी इंग्लिश मीडियम स्कूल प्रबंधन समिति के अकाउंट में एक बड़ी राशि 80 लाख रुपए के लगभग असुरक्षित है, यदि विद्यालय प्रबंधन चाहता तो इस राशि का उपयोग कर विद्यालय भवन का बेहतर रखरखाव मरम्मत आदि कार्य करवाया जा सकता था। शिक्षकों को समय पर उचित वेतन देकर विद्यालय के गिरते शिक्षा स्तर को नियंत्रण किया जा सकता था। लेकिन प्रबंधन ने तो इसके विपरीत मनमानी करते हुए कक्षा 9वी से 12वीं का प्रवेश से बंद करवा दिया। विद्यालय को बदहाल होने दिया और शिक्षकों को इस्तीफा देने के लिए मजबूर कर दिया।


आरसी इंग्लिश मीडियम स्कूल का भविष्य संकट में, प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

उपशीर्षक:

शिक्षकों के इस्तीफे, जर्जर भवन और घटती छात्र संख्या ने बढ़ाई चिंता, प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप


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