विकास महिला के रूप में कर चुकी घोषित मगर जनता की समस्याएं परेशानियां विकराल
अनूपपुर/बिजुरी
स्वयं को विकास महिला के रूप में घोषित कर चुकी मुख्य नगरपालिका अधिकारी बिजुरी महीने भर में महज 04 से 05 दिन ही रहती हैं उपस्थित तो कौन सुने लोगों कि समस्यायें। वार्ड क्रमांक 09 में नाली का पानी लोगों के घरो में घुस रहा है तो राजस्व विभाग के कर्मचारियों को 03 माह से वेतन नही मिल पा रहा है, कार्यालय में जरूरत का कोई भी समान उपलब्ध नही हैं। नगर कि मूलभूत समस्यायें विकराल रूप धारण कर चुकी है। तदपर भी विकाश का दावा कर रही महिला अधिकारी लापता हैं। और इनके कार्यालय कक्ष में प्रतिदिन ताला लटका रहता हैं, ऐसे में मूलभूत सुविधाओं से वंचित हो रहे लोगों कि सस्यायें कौन सुने, सबका साथ सबका विकाश का दम्भ भरने वाले सत्ता संगठन के जिम्मेदार भी लोगों कि समस्यायों से मुंह मोड़कर उनको उनकी दुर्दशा पर ऐसे ही छोड़कर आगामी चुनाव में भाजपा प्रत्यासी को स्थानीय निकाय में पुनः बैठाने का सपना संजोये बैठे हैं।
नगरपालिका बिजुरी इन दिनों अपनी दुर्दशा पर आंशू बहा रहा है, मूलभूत सुविधाओं के नाम पर लोगों कि समस्याये इन दिनों विकराल रूप धारण कर चुकी है, नालियों का पानी सड़कों पर अनवरत बहकर लोगों के घरों में घुस रहा है, स्ट्रीट लाईटें खराब पडी़ हुयी हैं, पानी टैंकरों से काला पानी लोगों को प्रदाय किया जा रहा है, राजस्व कर्मचारियों को 03 माह से वेतन नही दिया जा रहा है, बावजूद इसके विकाश का दावा करने वाली नगर पालिका बिजुरी कि मुख्य अधिकारी कागजों में विकाश कर दनादन सरकारी रूपयों का भुगतान चहेते लोगों को कर रही हैं, जो निश्चित तौर पर जांच का विषय है।
*चहेतों को लगातार हो रहा है भुगतान*
मिली जानकारी अनुसार फर्जी तरीके से टायर के नाम पर, टैंकर खरीदी के नाम पर, मुक्तीधाम कि सफाई के नाम पर, गमला खरीदी के नाम पर, वार्ड क्रमांक 08 में वार्डवासियों द्वारा श्रमदान किये गये तलाब पर भी परिसद से फर्जी भुगतान जैसे भिन्न-भिन्न कामों को कागजों पर दर्शाकर दनादन चहेतों को भुगतान कर सुश्री द्वारा उपकृत किया गया है। वहीं अपने चहेते अग्रवाल इलेक्ट्रानिक्स को भी लाभ पहुंचाने के एवज से कार्यालय में पदस्थ एक सहायक वर्ग 03 के कर्मचारी से फाईलें बनवाया जा रहा है। इस तरह से नगर का सर्वांगीण विकाश करने पर अमादा हुयी हैं जिम्मेदार अधिकारी। जानकारों कि मानें तो नगरपालिका परिषद में 08 वर्ष के कार्यकाल में जितनी राशी विकाश के नाम पर खर्च हुयी है, उतनी राशी महज एक वर्ष के कार्यकाल में खर्च कर दिया गया है नगरपालिका बिजुरी द्वारा। फर्क बस इतना है कि पहले वास्तविक विकाश में राशी खर्च हुयी है लेकिन अब कागजी विकाश में राशी खर्च की जा रही है। शासन प्रशासन को नगर में फैले भृष्टाचार कि निष्पक्षता से जांच करने कि आवश्यक्ता है। ताकी शासकीय राशियों के लगातार हो रहे दोहन पर अंकुश लग सके।