पानी के लिए हाहाकार, बूंद बूंद पानी बिजली को तरस रहे गरीब आदिवासी, जिम्मेदार नींद में
अनूपपुर
शासन प्रशासन द्वारा आदिवासी समाज के विकास हेतु चाहे कितने ही योजनाएं बनाकर तरह-तरह के कदम क्यों न उठाया जा रहा हो लेकिन कहीं ना कहीं जिम्मेदार अधिकारी एवं कर्मचारियों की लापरवाही अथवा जनप्रतिनिधियों की मनमानी के कारण आदिवासी समाज आज भी विकट परिस्थितियों को झेलने के लिए मजबूर है।
*यह है मामला*
ऐसा ही यथार्थ चित्रण एक मामला जिले के जनपद पंचायत अनूपपुर बदरा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत खोड़री नंबर 1 के मौहारटोला का जहाँ सैकड़ों आदिवासी निवास करते हैं। महज ग्राम पंचायत मुख्यालय से 2 किलोमीटर की दूरी होने के बावजूद भी आज दिनांक तक ना ही वहां पीने के लिए पानी की कोई व्यवस्था है और ना ही बिजली की व्यवस्था है आज भी इस मोहल्ले में निवासरत आदिवासी समाज के गरीब लोग 2 किलोमीटर की दूरी से पीने के लिए पानी लाने को मजबूर है। यहां निवासरत आदिवासी समाज के महिला पुरुषों के लिए पानी एवं बिजली भारी समस्या का सबब बना हुआ है इनके द्वारा मजदूरी करने के लिए गांव से बाहर कई किलोमीटर अपनी पेट की भूख मिटाने हेतु अनाज एवं रुपए कमाने के लिए जाना पड़ता है और जब घर पहुंचते हैं तो तनिक आराम किए बिना फिर से कई किलोमीटर दूर भोजन पकाने पानी पीने एवं अन्य रोजमर्रा के उपयोगों के लिए कई किलोमीटर पैदल चलकर पानी की व्यवस्था करने जाना पड़ता है। मौहर टोला में लाखों रुपए की लागत से गौशाला का निर्माण कराया गया है परंतु यहां इंसानों को तो पानी की व्यवस्था मिल नहीं रही है तो जानवरों को कहां से मुनासिब होगा।
*पैसे कमाने की होड़ में भूले सब*
पंचायत के जिम्मेदार लोगों के द्वारा मोटी रकम कमाने के लिए मोहल्ले में निर्माण कार्य किए जा रहे हैं परंतु एक हैंडपंप या बोरवेल की व्यवस्था इनके द्वारा नहीं की गई कि जिससे यहां निवासरत आदिवासी समाज के गरीब लोग दो बूंद पानी से अपनी प्यास बुझा सके। आज के इस विकसित तकनीकी युग में भी इस मोहल्ले के आदिवासी समाज के गरीब लोग पानी के बूंद बूंद के साथ बिजली की प्रकाश को तरस रहे हैं। आम आदमी की प्रमुख रोजमर्रा के जीवन में पानी बिजली आवश्यक है और ऐसे में इसकी उपलब्धता ना हो पाना शासन प्रशासन की लाचारी को प्रस्तुत कर रही है। जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारी पैसे कमाने के रोड में सब कुछ भूल चुके हैं।
*आवेदन के बाद भी नहीं हुई सुनवाई*
कोतमा विधानसभा अंतर्गत आने वाली यह गांव इस क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों की निकम्मे पन की दास्तां चीख चीख बयां कर रही है क्या इस क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों को मात्र जनता की याद चुनाव में ही आती है जब इन्हें वोट की आवश्यकता रहती है। ग्राम खोड़री के निवासी पहलाद जयसवाल एवं ग्रामीणों ने बताया कि कई बार प्रशासन एवं पंचायत को इस समस्या से निजात दिलाए जाने हेतु आवेदन दिया गया है लेकिन आज तक किसी के कान में जूं तक नहीं रेंगा और न हीं इन आदिवासियों का दर्द किसी ने समझा। जिला मुख्यालय से लेकर जनपद पंचायत, जिला पंचायत एवं ग्राम पंचायत में बैठे जनप्रतिनिधि एवं आला अधिकारी कर्मचारी द्वारा सिर्फ ऐसे निर्माण कार्यों को कराया जा रहा है जिसमें उनकी स्वार्थ सिद्धि अर्थात जेब गर्म करने का व्यवस्था हो आदिवासी गरीबों के पक्ष में किसी के द्वारा भी ध्यान न दिया जाना महत्वपूर्ण प्रश्न चिन्ह खड़ा करता है।
*इनका कहना है*
1.मुझे जानकारी नहीं है अगर ऐसा है तो मैं व्यवस्था करवाऊंगा। गांव के लोग मुझे जानकारी ना देकर आप तक पहुंचा रहे हैं।
*रामखेलावन साहू (सचिव) ग्राम पंचायत खोडरी नंबर 1*
2.मैं अभी जरूरी मीटिंग में हूं आपसे इस संबंध में बाद में बात करती हूं।
*ऊषा किरण गुप्ता (सीईओ)जनपद पंचायत (अनूपपुर) बदरा*