जुगाड़ की राजनीति करने वाले दलबदलू नेता शर्मा विधायकी का सपना संजो रहे हैं क्या ?
*जुगाड़ से चलाते है अपनी राजनीति, इनके कुछ समर्थक आगामी विधायक कर दिए घोषित*
अनूपपुर/बिजुरी
नगर के स्थानीय निकाय में बतौर उपाध्यक्ष के ओहदे पर काबिज शतीस शर्मा ने समर्थ कंस्ट्रक्सन कि आड़ में विकाश के नाम पर जिस तरह से अंधाधुंध भृष्टाचार कर प्रदेश सरकार को लाखों का आर्थिक क्षति पहुंचाने का आरोप लगते रहे है, उन कामों कि उच्च स्तरीय जांच निष्पक्षता से अगर प्रशासन द्वारा किया जाये तो, स्वयं को भाजपा का कर्णधार समझने वाले उपाध्यक्ष अपनी कारगुजारियों के कारण न्याय विधान के दण्ड प्रकिया का पालन करते जल्द ही नजर आयेगा। जिम्मेदारों से सांठ-गांठ कर अनाप-शनाप फर्जी भुगतान कराने का आरोप तो महोदय पर लगता ही रहा हैं। लेकिन इन दिनों मामला कुछ और है, जिससे सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी में ना सिर्फ खलबली मचा हुआ है। बल्कि खुद को भाजपा का स्वयं-भू घोषित कराने कि इनकी हसरत ने विधानसभा क्षेत्र कोतमा में निवासरत सभी वरिष्ठ भाजपा नेताओं कि उपेक्षा कर उनके वरिष्ठता पर भी पूर्णविराम लगा दिया है। आगामी समय में नगरपालिका उपाध्यक्ष से सीधे भावी विधायक बनने का ख्वाब खुली आंखों में संजोकर समाहित जो कर लिया गया है।
*सोशल मीडिया में डाले गये पोष्ट से अटकलों का दौर हुआ शुरू*
गत दिवस नगरपालिका उपाध्यक्ष सतीस शर्मा के जन्मदिवस पर इनके समर्थक मित्र ने सोशल मीडिया में इन्हे कोतमा विधानसभा क्षेत्र कि राजनीति में खलबली मचाने वाला बताकर आगामी समय का विधायक करार दे दिया, जिसे राजनीति के नये दौर कि शुरूवात बताते हुये फेसबुक में पोष्ट भी कर दिया। इसके बाद से भाजपा संगठन में सचमुच खलबली मच गयी। और नगर के चौक-चौराहों से लेकर राजनीतिक गलियारों तक अटकलों का दौर शुरू हो गया। भाजपा के कयी नेताओं ने इस पोष्ट पर आपत्ती जताया तो कईयों ने विरोधा-स्वर भी अपना लिया।
*भाजपा के टिकट से चुनाव जीतकर कांग्रेस के बैनरों कि शोभा बढा़ते थे शर्मा*
वर्ष 2017 के नगरपालिका चुनाव में वार्ड क्रमांक 04 से भारतीय जनता पार्टी का प्रत्यासी बनकर वार्ड पार्षद का चुनाव जीतने के बाद सतीस शर्मा का प्रेम कांग्रेस पार्टी से जरा भी कम नही हुआ। और जैसे ही वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस कि सरकार प्रदेश में काबिज हुयी, शतीस शर्मा कांग्रेसी नेताओं के साथ बैनरों कि शोभा बढा़ने लगे। लेकिन 15 माह बाद जब सत्ता परिवर्तन हुआ और भाजपा कि सरकार पुनः प्रदेश में काबिज हुयी उधर नगरपालिका बिजुरी के कयी असंतुष्ट पार्षदों ने भी लामबंद होकर तत्कालीन नगरपालिका उपाध्यक्ष को पद से पृथक कर दिया, चालबाजी में माहिर शर्मा ने तथाकथित कांग्रेसी नेता के इसारे पर इस अवसर का लाभ उठाते हुये भाजपा कि तरफ झुकाव प्रारम्भ कर दिया, साथ ही पार्षदों को गुमराह कर अपने पाले में ले लिया। और उपाध्यक्ष बनकर नगरपालिका बिजुरी को ना सिर्फ आमदनी का चारागाह बना लिया, बल्की नित नये-नये कारनामों को अंजाम देकर भृष्टाचार कि ईबारतें भी लिख डाली।