नर्मदा मंदिर ट्रस्ट पर जवाबदेही का संकट, विधायक का बड़ा हमला, रिकॉर्ड जनता व पत्रकारों के सामने रखे ट्रस्ट

*प्रशासन और ट्रस्ट पर बढ़ा पारदर्शिता का दबाव*


अनूपपुर

अमरकंटक स्थित मां नर्मदा मंदिर ट्रस्ट एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। ट्रस्ट की आय-व्यय, करोड़ों रुपये के चढ़ावे और संपत्तियों का सार्वजनिक लेखा-जोखा मांगने वाले पुष्पराजगढ़ विधायक फुंदेलाल सिंह मार्को ने अब प्रस्तावित ट्रस्ट बैठक को लेकर नया  मोर्चा खोल दिया है। 

मां नर्मदा करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र हैं और इसी आस्था के संरक्षण की जिम्मेदारी मां नर्मदा मंदिर ट्रस्ट पर है।  विधायक फुंदेलाल सिंह मार्को ने ट्रस्ट की वर्षों की आय-व्यय, सोना-चांदी, चल-अचल संपत्तियों और विकास कार्यों का सार्वजनिक विवरण मांगकर बहस को नया आयाम दे दिया है। अब बैठक की तिथि बदलने की मांग और वीडियो संदेश में रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की अपील ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। सवाल यह नहीं कि बैठक कब होगी, बल्कि यह है कि क्या ट्रस्ट जनता के सामने अपने वित्तीय और प्रशासनिक रिकॉर्ड रखने को तैयार है।

मां नर्मदा मंदिर ट्रस्ट की बैठक पहले 15 जुलाई को प्रस्तावित थी, जिसे बाद में 18 जुलाई के लिए निर्धारित किया गया। अब विधायक फुंदेलाल सिंह मार्को ने कलेक्टर को पत्र लिखकर बैठक की तिथि फिर बदलने का अनुरोध किया है। उनका कहना है कि यदि बैठक 18 जुलाई को होती है तो ट्रस्ट का पूरा रिकॉर्ड पत्रकारों और जनता के समक्ष सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

विधायक की सबसे बड़ी मांग ट्रस्ट की वित्तीय पारदर्शिता को लेकर है। उनका कहना है कि ट्रस्ट के गठन से लेकर आज तक मंदिर में आए चढ़ावे, सोना-चांदी, नकद दान, चल-अचल संपत्तियों और विकास कार्यों पर हुए खर्च का पूरा विवरण सार्वजनिक होना चाहिए। 

मामला केवल ट्रस्ट तक सीमित नहीं है बल्कि प्रशासन की भूमिका भी चर्चा का विषय बन गई है। ट्रस्ट की बैठकों का संचालन प्रशासनिक निगरानी में होता है, ऐसे में यह अपेक्षा स्वाभाविक है कि जनता द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब भी प्रशासनिक स्तर पर मिले। यदि रिकॉर्ड उपलब्ध हैं तो उन्हें सार्वजनिक करने में देरी क्यों हो रही है।

विधायक ने कहा की यदि ट्रस्ट आर्थिक रूप से इतना सक्षम है तो अमरकंटक में श्रद्धालुओं को अब भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष क्यों करना पड़ता है। स्वच्छता, पेयजल, पार्किंग, यातायात व्यवस्था, श्रद्धालुओं के ठहरने की सुविधाएं और अन्य विकास कार्य अपेक्षित स्तर पर क्यों नहीं दिखाई देते है।

सरपंच ने जिला सीईओ के खिलाफ, आत्म दाह की दी चेतावनी, कमिश्नर से लगाई न्याय की गुहार, पद से पृथक करने का मामला


उमरिया

जिले के बिरसिंहपुर पाली जनपद पंचायत के गिंजरी ग्राम पंचायत के सरपंच नन्हू सिंह को पद से पृथक करने के मामले में सरपंच ने जिला पंचायत उमरिया के मुख्य कार्य पालन अधिकारी अभय सिंह ओहरिया के पद से नियम विरूद्ध हटाने के विरोध में आयुक्त शहडोल के दरबार में पहुंच कर आत्म दाह की चेतावनी के साथ अपनी फरियाद लगायी है। बताया जाता है कि ग्राम पंचायत के सरपंच नन्हू सिंह ने आयुक्त शहडोल को ज्ञापन देकर बताया की मुख्य कार्य पालन अधिकारी अभय सिंह ओहरिया ने फर्जी जांच प्रतिवेदन के आधार पर सरपंच पद से नियम विरूद्ध पद से पृथक कर दिया है, जो कि न सिर्फ लोकतांत्रिक प्रक्रिया में चुने हुए जन प्रतिनिधियों का सीधा अपमान है, साथ ही जिले भर में प्रशासनिक तंत्र की भष्ट्राचार की जडो को मजबूत और  पल्लवित करने का काम किया है। जिला पंचायत के इस दुर्भावनापूर्ण निर्णय से जिले भर के जन प्रतिनिधियों में भय का वातावरण बना हुआ है। 

मामले के संबंध में बताया जाता है कि गिंजरी में वर्ष 2024-25 में बरबसपुर के जोगी नाला में अमृत तालाब का काम नियमानुसार मापदंडों के अनुरूप सहायक यंत्री और उपयंत्री के आदेशानुसार बनाया गया है। सरपंच ने आरोप लगाया है कि अमृत सरोवर के इस कार्य में उपयंत्री के व्दारा बिना मूल्यांकन, बिना भुगतान के ही स्वीकृति राशि के 10% राशि की मांग की गयी थी और राशि नहीं दिये जाने के कारण कार्य का मूल्यांकन नहीं किया गया, जब मूल्यांकन नहीं करने की शिकायत बार -बार की गयी, तो घर बैठे मनमानी पूर्वक माप -पुस्तिका बिना मूल्यांकन पत्रक के 17-12-25 को जनपद पंचायत में जमा कर  दी गई, मामले को बढते देख मूल्यांकन पर्ची जनवरी 2026 में दी गई, तब सामग्री का बिल मनरेगा पोर्टल में दर्ज किया गया, तब तक राशि उपलब्ध नहीं करायी गयी जिस कारण से देयको का भुगतान नही किया जा सका।

ध्यान देने योग्य है कि सरपंच व्दारा उपयंत्री के व्दारा कार्य के मूल्यांकन न करने की शिकायत जनपद पंचायत पाली और जिला पंचायत उमरिया में समय समय पर की गयी है, उस पर संज्ञान न लेते हुए जिला पंचायत के व्दारा कार्य पालन यंत्री जल संसाधन विभाग उमरिया से मिथ्या कूट रचित जांच प्रतिवेदन तैयार कर सरपंच पद से हटाने की कार्य वाही की गयी है।

सरपंच नन्हू सिंह ने आयुक्त से मांग की है कि मैरी शिकायतों का निष्पक्ष रूप से जांच कराते हुए मेरे विरूद्ध नियम विरूद्ध पद से हटाने की कार्य वाही को निरस्त किया जाये अन्यथा मैं आदिवासी सरपंच आत्म दाह कर लूंगा, जिसकी संपूर्ण जबाबदारी प्रशासन की होगी।

पत्रकारिता को चौथे स्तंभ की मान्यता के लिये लाएं लोकसभा मे प्रस्ताव- शलभ भदौरिया

*जिला मुख्यालय बनेगा पत्रकार भवन, सोशल मीडिया व एआई का प्रयोग कल्याणकारी पत्रकारिता के लिये हो*


अनूपपुर

सोशल मीडिया और वर्तमान पत्रकारिता जैसे सारगर्भित विषय को लेकर अनूपपु्र जिला मुख्यालय स्थित धनश्री पैलेस मे आयोजित मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ के जिला सम्मेलन मे जिले भर से आए लोगो के बीच विद्वान वक्ताओं ने सारगर्भित विचार रखे।

जिला सम्मेलन मे पत्रकारों को संबोधित करते हुए राज्य मंत्री दिलीप जायसवाल ने अपने सारगर्भित उद्बोधन मे कहा कि भले ही मीडिया को संविधान मे चौथे स्तंभ का दर्जा प्राप्त ना हो लेकिन समाज मे आज भी उसे विधायिका, न्यायपालिका, कार्यपालिका की तरह चौथे स्तम्भ की स्वीकार्यता है। उन्होने कहा कि सोशल मीडिया और वर्तमान पत्रकारिता  अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। प्रिंट मीडिया के बाद इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और अब सोशल मीडिया पत्रकारिता का एक और बढता हुआ कदम है। सोशल मीडिया का उपयोग सही , सत्य और तथ्यात्मक पत्रकारिता मे होना चाहिए । उन्होंने कहा कि पत्रकारिता के प्रत्येक बदलाव के बाद भी प्रिंट मीडिया का महत्व आज भी बना हुआ है। उन्होंने कहा कि हमारे पत्रकार भाई प्रतिदिन कडी मेहनत करके खोजपरक खबरे निकालते हैं। उन्होंने कलेक्टर हर्षल पंचोली से कहा कि यह प्रयास हो कि जिला मुख्यालय मे एक पत्रकार भवन बनाया जाए।


कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि  शलभ भदौरिया ने कार्यक्रम की शुरुआत दो लाइनों से करते हुए कहा कि खामोशी तुम्हें जीने नहीं देगी, सच के लिए कोहराम मचा दो।बजिसका सभी ने तालियों के साथ स्वागत किया। उन्होंने कहा कि पहले तीन प्रकार की पत्रकारिता होती रही है । 

आज के दौर मे तीसरे पायदान पर  जनोंमुखी पत्रकारिता है। आज के दौर में जनोंनुखी पत्रकारिता की जरूरत है। उन्होंने कहा की परिवार का मुखिया होने के नाते मेरा यह दायित्व है कि मैं झूठी तारीफ न कर आप सबको आपकी कमियां बताकर उन्हें दूर करूं।श्री भदौरिया ने कहा कि आज कल सरकार नारद जयंती मनाने लगी है , तो नारद भी तो हम पत्रकारों के कुनबे के ही पत्रकार हैं। वे देव ऋषि थे, फिर भी राक्षसों के बीच सम्मान पाते थे।उन्होंने कहा कि यदि नेता लोग हमें वास्तव में लोकतंत्र का चौथा स्तंभ मानते हैं तो लोकसभा में प्रस्ताव पारित करें।


पत्रकारों को संबोधित करते हुए प्रांताध्यक्ष शलभ भदौरिया ने पत्रकारिता की मर्यादा और जिम्मेदारी पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि पत्रकारों में अनुशासन होना सबसे जरूरी है। श्री भदौरिया ने कहा पत्रकार सरस्वती पुत्र हैं  इसलिए उन्हें किसी की चरण वंदना से बचना चाहिए। पत्रकार का काम सच दिखाना है, चापलूसी करना नहीं।शलभ भदौरिया ने कहा कि समाज के प्रति पत्रकारों की बड़ी जिम्मेदारी होती है।आज के दौर में पत्रकारिता पर कई सवाल उठ रहे हैं,ऐसे में अनुशासन और मर्यादा ही पत्रकार की असली ताकत है।     

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