जीने की आरजू छीन क्या खुश न हुआ मन तेरा, तू ने मेरी हँसी छीन ली रूप चुराया मेरा




*रूप चुराया मेरा*


जीने की आरजू छीन क्या खुश न हुआ मन तेरा,

तू ने मेरी हँसी छीन ली रूप चुराया मेरा।


तेरे सुंदर से सुंदर 

मनमोहक चित्र बनाए,

पूजा तुझे उम्र भर तुझ पर 

गीत लिखे फिर गाए।


होटों से बंसी ‌धुन छीन मधुर सुर छीना मेरा,

तू ने मेरी हँसी छीन ली रूप चुराया मेरा।


कर्क रोग जीने की मोहलत 

कम से कम देता है,

दे कर कई कष्ट जिंदगी 

घायल कर देता है।


सांसें रोईं धड़कन रोई हृदय रुलाया मेरा,

तू ने मेरी हँसी छीन ली रूप चुराया मेरा।


ये विनम्र विनती है 

अपने भक्त को क्षमा करना,

जीवन के आखिरी छोर पर 

अपने दर्शन देना। 


क्यों इतने दुख लिखे भाग्य में दोष बताना मेरा,

तू ने मेरी हंसी छीन ली रूप चुराया मेरा।


गीतकार अनिल भारद्वाज एडवोकेट हाईकोर्ट ग्वालियर

जिला पंचायत का अजब कारनामा, आखिर एक पखवाड़े में सचिवों मिली पूर्व पंचायत की की चाबी


उमरिया

जिले में तबादला नीति तमाशा बनकर रह गई है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा एक महीने के अंदर जारी किए गए दो आदेशों में 2 सचिवों को 23 दिन के भीतर ही उनकी पूर्व पदस्थ ग्राम पंचायतों में वापस भेज दिया गया है। जिला पंचायत के मुख्य कार्य पालन अधिकारी अभय सिंह ओहरिया के व्दारा जारी आदेश 15 जून 2026 और 8 जुलाई 2026 के आदेशों ने न सिर्फ तबादला नीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि एक जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी की कार्यशैली को भी कठघरे में ला खड़ा किया है। 

जब छोटे-छोटे मसले पर प्रशासनिक अधिकारियों की इस तरह की कार्य शैली ने अपने ही आदेशों को लागू करने और कराने में जिस तरह की ढुल मुल रवैया से जिला पंचायत की साख को दांव पर लगा कर रख दिया है। जब जिला प्रशासन के वरिष्ठ  अधिकारी ही अपने आदेशों को ही कपड़ों की तरह बदलते देखे जाते हैं, तब मातहत अधिकारियों और निचले स्तर के कर्मचारियों के व्दारा किये जा रहे कार्यशैली पर आखिर रोक कौन लगाएगा ?

जिला पंचायत उमरिया के व्दारा जारी 15 जून को जारी आदेश में श्याम लाल विश्वकर्मा को सलैया -13 से चांद पुर किया गया था, जिसे उच्च न्यायालय जबलपुर के पारित आदेश के चलते पुनः सलैया - 13 में पदस्थ किया गया है, जिससे साफ जाहिर होता है कि पहले किया गया तबादला आदेश नियम विरूद्ध था, इससे भी आश्चर्य जनक आदेश कमलेश चौधरी का देखने में आया है, जिसमें पहले आदेश में पठारी ग्राम पंचायत से हटा कर दुलहरी ग्राम पंचायत किया गया है, फिर दुसरे आदेश में दुबारा पठारी ग्राम पंचायत में तैनात कर दिया गया है। पल पल बदलते आदेशों से जिला पंचायत की किरकिरी करके रख दिया है। 

सूत्रों बताते है कि जिला पंचायत में तबादला नीति उद्योग बनकर रह गई है। आप अपनी मर्जी से पसंदीदा ग्राम पंचायत में तबादला करा सकते हैं, बशर्ते "आपकी मुराद के साथ हमारी मुराद पूरी होनी चाहिए"।जिला पंचायत के इस तबादला सूची के प्रकाश में आने के बाद यह साबित हो गया है कि किसी सचिव को दो-दो ग्राम पंचायत का प्रभार, तो किसी को जनपद में तैनाती के आदेशों ने जिला पंचायत की "ढोल की पोल" खोल कर रख दी है। अब देखना होगा कि ऐसे हर पल आदेशों पर  कलेक्टर और प्रदेश स्तरीय  पंचायत विभाग इस "आवागमन" वाले तबादला खेल पर क्या कार्रवाई करते हैं।

उत्पाती बंदरों ने रामसेतु की विद्युत सज्जा की उजाड़ी चमक, करोड़ों की लाइटिंग व्यवस्था हुई क्षतिग्रस्त

*शाम ढलते ही फीका पड़ने लगा रामसेतु का सौंदर्य, विद्युत व्यवस्था के नवीनीकरण की उठी मांग*


अनूपपुर

मध्य प्रदेश के प्रमुख पर्यटन केंद्र एवं धार्मिक-आध्यात्मिक तीर्थस्थल पवित्र नगरी अमरकंटक में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बने रामघाट स्थित रामसेतु (झूला पुल) की भव्य विद्युत सज्जा उत्पाती बंदरों के कारण बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई है। नगर परिषद अमरकंटक के वार्ड क्रमांक 10 में स्थित इस पुल का निर्माण मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम द्वारा लगभग 12 करोड़ रुपये की लागत से कराया गया था। पुल को आकर्षक स्वरूप प्रदान करने के लिए अत्याधुनिक रंगीन विद्युत झालरों एवं प्रकाश व्यवस्था से सजाया गया था, जिसकी लागत भी लाखों से लेकर करोड़ों रुपये तक आंकी जा रही है।

बताया जाता है कि पिछले कुछ समय से बंदरों के लगातार उत्पात के कारण रामसेतु पर लगी विद्युत झालरों, केबलों एवं सजावटी लाइटों को जगह-जगह से कुतर दिया गया है। परिणामस्वरूप पूरी प्रकाश व्यवस्था अस्त-व्यस्त हो गई है। स्थिति यह है कि संध्या होते ही पुल पर केवल इक्का-दुक्का लाइटें ही जलती दिखाई देती हैं, जबकि कुछ सप्ताह पूर्व तक यह सेतु रंग-बिरंगी रोशनी से जगमगाता था और श्रद्धालुओं व पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ था।

स्थानीय लोगों के अनुसार विद्युत सज्जा मुश्किल से एक माह तक ही अपनी पूर्ण चमक बिखेर सकी, इसके बाद बंदरों ने उसे लगभग पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। इससे शाम और रात्रि के समय रामसेतु का मनोहारी दृश्य देखने आने वाले पर्यटकों तथा तीर्थयात्रियों को निराशा का सामना करना पड़ रहा है।

जानकारी के अनुसार मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम ने निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद रामसेतु को नगर परिषद अमरकंटक के सुपुर्द कर दिया है। वर्तमान में नगर परिषद ही इसके संचालन एवं रखरखाव की जिम्मेदारी निभा रही है। हालांकि क्षतिग्रस्त विद्युत तारों और उपकरणों के कारण सुरक्षा की दृष्टि से भी चिंता बढ़ गई है। यदि समय रहते मरम्मत एवं आवश्यक सुरक्षा उपाय नहीं किए गए तो किसी अप्रिय दुर्घटना की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

नगरवासियों एवं श्रद्धालुओं ने जिला प्रशासन, मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम तथा नगर परिषद अमरकंटक से मांग की है कि रामसेतु की विद्युत व्यवस्था का शीघ्र नवीनीकरण कर उसे पुनः आकर्षक स्वरूप प्रदान किया जाए, ताकि यह धार्मिक एवं पर्यटन स्थल अपनी पूर्व की भव्यता के साथ पुनः पर्यटकों और श्रद्धालुओं का स्वागत कर सके।

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