उत्पाती बंदरों ने रामसेतु की विद्युत सज्जा की उजाड़ी चमक, करोड़ों की लाइटिंग व्यवस्था हुई क्षतिग्रस्त
*शाम ढलते ही फीका पड़ने लगा रामसेतु का सौंदर्य, विद्युत व्यवस्था के नवीनीकरण की उठी मांग*
अनूपपुर
मध्य प्रदेश के प्रमुख पर्यटन केंद्र एवं धार्मिक-आध्यात्मिक तीर्थस्थल पवित्र नगरी अमरकंटक में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बने रामघाट स्थित रामसेतु (झूला पुल) की भव्य विद्युत सज्जा उत्पाती बंदरों के कारण बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई है। नगर परिषद अमरकंटक के वार्ड क्रमांक 10 में स्थित इस पुल का निर्माण मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम द्वारा लगभग 12 करोड़ रुपये की लागत से कराया गया था। पुल को आकर्षक स्वरूप प्रदान करने के लिए अत्याधुनिक रंगीन विद्युत झालरों एवं प्रकाश व्यवस्था से सजाया गया था, जिसकी लागत भी लाखों से लेकर करोड़ों रुपये तक आंकी जा रही है।
बताया जाता है कि पिछले कुछ समय से बंदरों के लगातार उत्पात के कारण रामसेतु पर लगी विद्युत झालरों, केबलों एवं सजावटी लाइटों को जगह-जगह से कुतर दिया गया है। परिणामस्वरूप पूरी प्रकाश व्यवस्था अस्त-व्यस्त हो गई है। स्थिति यह है कि संध्या होते ही पुल पर केवल इक्का-दुक्का लाइटें ही जलती दिखाई देती हैं, जबकि कुछ सप्ताह पूर्व तक यह सेतु रंग-बिरंगी रोशनी से जगमगाता था और श्रद्धालुओं व पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ था।
स्थानीय लोगों के अनुसार विद्युत सज्जा मुश्किल से एक माह तक ही अपनी पूर्ण चमक बिखेर सकी, इसके बाद बंदरों ने उसे लगभग पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। इससे शाम और रात्रि के समय रामसेतु का मनोहारी दृश्य देखने आने वाले पर्यटकों तथा तीर्थयात्रियों को निराशा का सामना करना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम ने निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद रामसेतु को नगर परिषद अमरकंटक के सुपुर्द कर दिया है। वर्तमान में नगर परिषद ही इसके संचालन एवं रखरखाव की जिम्मेदारी निभा रही है। हालांकि क्षतिग्रस्त विद्युत तारों और उपकरणों के कारण सुरक्षा की दृष्टि से भी चिंता बढ़ गई है। यदि समय रहते मरम्मत एवं आवश्यक सुरक्षा उपाय नहीं किए गए तो किसी अप्रिय दुर्घटना की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
नगरवासियों एवं श्रद्धालुओं ने जिला प्रशासन, मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम तथा नगर परिषद अमरकंटक से मांग की है कि रामसेतु की विद्युत व्यवस्था का शीघ्र नवीनीकरण कर उसे पुनः आकर्षक स्वरूप प्रदान किया जाए, ताकि यह धार्मिक एवं पर्यटन स्थल अपनी पूर्व की भव्यता के साथ पुनः पर्यटकों और श्रद्धालुओं का स्वागत कर सके।
