कार अनियंत्रित होकर मकान में घुसी, तीन लोग घायल, गाँजा व शराब जप्त, तीन पर मामला दर्ज


अनूपपुर

जिले के डोला नगर परिषद क्षेत्र में एक बड़ा सड़क हादसा होते-होते टल गया। कोतमा से मनेन्द्रगढ़ जा रही एक तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे स्थित एक मकान में जा घुसी। गनीमत रही कि हादसे के समय घर खाली था, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई। कार क्रमांक CG16CU8927 कोतमा से मनेन्द्रगढ़ की ओर जा रही थी। डोला नगर परिषद के वार्ड क्रमांक-3 में चालक वाहन से नियंत्रण खो बैठा। तेज रफ्तार कार सड़क किनारे नाले को पार करती हुई कुंदन गुप्ता के मकान में जा घुसी।

हादसे के समय मकान में कोई मौजूद नहीं था। इससे किसी तरह की जनहानि नहीं हुई। कार में 8 वर्षीय बच्चे सहित कुल 3 लोग सवार थे, जिन्हें भी गंभीर चोट नहीं आई। कार के मकान में घुसते ही आसपास के लोग मौके पर पहुंच गए। स्थानीय लोगों ने तुरंत कार में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। घटना के बाद इलाके में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल रहा। पुलिस और एंबुलेंस मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है।

*747 ग्राम गांजा व 16 लीटर अवैध शराब जप्त*


अनूपपुर जिले के थाना बिजुरी पुलिस ने गांजा एवं अवैध शराब के विरुद्ध अलग-अलग कार्यवाही करते हुए कुल लगभग ₹12,000 मूल्य का मशरूका जप्त कर आरोपियों के विरुद्ध वैधानिक कार्यवाही की है। मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई कि एक व्यक्ति घनश्याम यादव लोहसरा स्थित ठाकुर बाबा मंदिर के पास अवैध मादक पदार्थ गांजा बिक्री करने की नियत से रखा हुआ है। सूचना पर तत्काल कार्यवाही करते हुए पुलिस टीम द्वारा घेराबंदी कर संदेही घनश्याम यादव पिता ददानी यादव, उम्र 48 वर्ष, निवासी कनईटोला, बिजुरी को पकड़ा गया।

तलाशी लेने पर उसके कब्जे से 747 ग्राम अवैध मादक पदार्थ गांजा बरामद हुआ, जिसे विधिवत जप्त किया गया। आरोपी के विरुद्ध अपराध क्रमांक 231/2026, धारा 8/20 एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया है।

थाना बिजुरी पुलिस द्वारा अवैध शराब के विरुद्ध चलाए गए अभियान के दौरान तीन अलग-अलग प्रकरणों में कार्रवाई करते हुए, रतन सिंह पिता बीर बहादुर सिंह, उम्र 55 वर्ष, निवासी माइनस कॉलोनी, बिजुरी। राकेश सिंह कंवर पिता श्यामलाल सिंह कंवर, उम्र 45 वर्ष, निवासी उमरदा। शीतल प्रसाद पनिका पिता बेसाहू लाल पनिका, उम्र 30 वर्ष, निवासी उमरदा। के कब्जे से कुल 04 लीटर अंग्रेजी शराब एवं 12 लीटर देसी महुआ शराब जप्त कर आबकारी अधिनियम के तहत वैधानिक कार्यवाही की गई।

मॉडल ट्राइबल स्कूल पर संकट 8वीं के बाद आदिवासी बच्चों का भविष्य, अभिभावक अनिश्चितकालीन हड़ताल पर


*विद्यालय का नही हुआ उन्नयन*

अनूपपुर। 

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (अमरकंटक) परिसर स्थित मॉडल ट्राइबल स्कूल को कक्षा 9वीं से 12वीं तक उन्नत करने की वर्षों पुरानी मांग अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। सोमवार को अभिभावक संघ अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठ गया है। अभिभावकों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन केंद्र सरकार को भ्रामक जानकारी देकर स्कूल के उन्नयन को लगातार टाल रहा है, जिससे आठवीं उत्तीर्ण कर चुके सैकड़ों आदिवासी विद्यार्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है। उनका कहना है कि कई बार आवेदन, ज्ञापन और जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप के बावजूद कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। कई सांसदों द्वारा केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को पत्र लिखे जाने और राष्ट्रपति तक गुहार लगाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। अभिभावकों का कहना है कि यह केवल एक स्कूल के विस्तार का मुद्दा नहीं, बल्कि आदिवासी बच्चों के शिक्षा के अधिकार, समान अवसर और सामाजिक न्याय से जुड़ा संवेदनशील प्रश्न है।

*शिक्षा पर लगा विराम, बच्चों का भविष्य संकट में*

मॉडल ट्राइबल स्कूल की स्थापना आदिवासी विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी, लेकिन विद्यालय आज भी केवल कक्षा 8वीं तक सीमित है। परिणामस्वरूप विद्यार्थियों को अन्य स्कूलों में प्रवेश लेने के लिए मजबूर होना पड़ता है। आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर परिवारों के अनेक बच्चे बीच में ही पढ़ाई छोड़ देते हैं। अभिभावकों का कहना है कि यदि समय रहते 9वीं से 12वीं तक कक्षाओं का संचालन शुरू नहीं हुआ तो अनेक प्रतिभाशाली छात्र शिक्षा से वंचित हो जाएंगे।

*ज्ञापन व सांसदों के पत्र भी नहीं आए काम*

विद्यालय के उन्नयन के लिए अभिभावकों, छात्र संगठनों और सामाजिक संस्थाओं ने कई बार विश्वविद्यालय प्रशासन को ज्ञापन सौंपे। इसके बाद शहडोल सांसद हिमाद्री सिंह, मंडला सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते और खरगोन-बड़वानी सांसद गजेन्द्र सिंह पटेल ने भी केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को अनुशंसा पत्र भेजे। राष्ट्रपति को ज्ञापन और केंद्रीय शिक्षा मंत्री से व्यक्तिगत मुलाकात के बावजूद अब तक कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, जिससे अभिभावकों में गहरा असंतोष है।

*प्रशासन पर गुमराह करने का आरोप*

अभिभावक संघ का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन वास्तविक स्थिति से केंद्र सरकार को अवगत कराने के बजाय भ्रामक जानकारी प्रस्तुत कर रहा है। उनका कहना है कि लगातार उपेक्षा के कारण अब शांतिपूर्ण और अनिश्चितकालीन आंदोलन ही अंतिम विकल्प बचा है। अभिभावकों का स्पष्ट कहना है कि जब तक विद्यालय को कक्षा 12वीं तक उन्नत करने का लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

*धरना से पहले लगा प्रतिबंध*

धरना की अनुमति मांगने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासनिक भवन और मुख्य द्वार के आसपास प्रतिबंधात्मक आदेश लागू कर दिए गए। अभिभावकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर संवाद स्थापित करने के बजाय आंदोलन पर रोक लगाने का प्रयास लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है। उनका मानना है कि प्रशासन को प्रतिबंध लगाने के बजाय समस्या के समाधान के लिए सकारात्मक पहल करनी चाहिए।

*शिक्षा बचाओ आंदोलन बना आदिवासी अधिकारों की आवाज*

अभिभावकों का कहना है कि यह संघर्ष किसी संस्था के विरोध का नहीं, बल्कि आदिवासी बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने का अभियान है। उनका विश्वास है कि शिक्षा ही सामाजिक न्याय, समान अवसर और आत्मनिर्भरता का सबसे मजबूत आधार है। उन्होंने समाज, जनप्रतिनिधियों और सरकार से अपील की है कि मॉडल ट्राइबल स्कूल को शीघ्र कक्षा 12वीं तक उन्नत किया जाए ताकि जनजातीय विद्यार्थियों को अपने ही परिसर में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिल सके।

हर्राटोला पंचायत में पत्नी सरपंच पति बना ठेकेदार, घटिया निर्माण और नियमों की अनदेखी के गंभीर आरोप

*आशा कार्यकर्ता पद के साथ सरपंच की सीट भी संभाल रही निर्वाचित सरपंच रामदुलारी*


अनूपपुर

जिले की जनपद पंचायत पुष्पराजगढ़ के ग्राम पंचायत हर्राटोला एक बार फिर गंभीर आरोपों के कारण चर्चा में है। ग्रामीणों द्वारा सौंपे गए शिकायत पत्र में आरोप लगाया गया है कि सरपंच रामदुलारी सिंह के कार्यकाल में पंचायत के अधिकांश विकास कार्य उनके पति द्वारा ठेकेदारी के माध्यम से कराए गए है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता की अनदेखी की गई, फर्जी तरीके से भुगतान निकाला गया तथा ग्राम सभा की स्वीकृति के बिना योजनाओं को क्रियान्वित किया गया है। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि सरपंच रामदुलारी सिंह आशा कार्यकर्ता के रूप में भी कार्यरत हैं और अपने दोनों पदों का उपयोग कर प्रशासन को गुमराह करने का प्रयास किया जा रहा है। शिकायत में पूरे कार्यकाल के विकास कार्यों, भुगतान, गुणवत्ता और नियमों के पालन की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषियों पर कार्यवाही की मांग की गई है।

*सरपंच बनने के बाद पति बना ठेकेदार*

ग्रामीणों का आरोप है कि सरपंच रामदुलारी सिंह के निर्वाचित होने के बाद पंचायत के लगभग सभी निर्माण कार्य उनके पति नत्थू सिंह के माध्यम से कराए गए है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि पंचायत के कार्यों में पारदर्शिता नहीं बरती गई और ठेकेदारी जैसी व्यवस्था अपनाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पंचायत प्रतिनिधि स्वयं या उनके निकट संबंधी पंचायत कार्यों में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष लाभ नहीं ले सकते, लेकिन इस सिद्धांत की अनदेखी की गई है। अब इस पूरे मामले की जांच भगवान भरोसे अधर में लटकते दिखाई पड़ रही है।

*सरपंच है, आशा कार्यकर्ता*

ग्रामीणों का आरोप है यह भी है कि सरपंच रामदुलारी सिंह वर्तमान में आशा कार्यकर्ता के रूप में भी कार्यरत हैं। ग्रामीणों का दावा है कि दोनों भूमिकाओं के कारण प्रशासनिक कार्यों में निष्पक्षता प्रभावित हुई है तथा शासन को भ्रामक जानकारी दी गई है। शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि संबंधित विभाग यह स्पष्ट करे कि दोनों जिम्मेदारियों के निर्वहन में किसी प्रकार के सेवा नियमों या दिशा-निर्देशों का उल्लंघन हुआ है या नहीं। इस संबंध में भी स्वतंत्र जांच की मांग की गई है।

*घटिया निर्माण व लाखों की वित्तीय अनियमितता*

ग्रामीणों के अनुसार पंचायत में सड़क, पुल और अन्य विकास कार्यों में मानकों का पालन नहीं किया गया है। शिकायत में आरोप है कि गिट्टी और बोल्डर के स्थान पर घटिया सामग्री का उपयोग किया गया है कई सड़कों में बिना बेस डाले ही सड़क की ढलाई कर दी है है, जबकि भुगतान उच्च गुणवत्ता वाले कार्यों के नाम पर किया गया है। कुछ कार्यों में वास्तविक लागत से कई गुना अधिक राशि निकालने का भी आरोप लगाया गया है। 

*जांच की मांग*

ग्रामीणों ने सामूहिक हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन देकर सरपंच, सचिव और संबंधित अधिकारियों के पूरे कार्यकाल की जांच की मांग की है।  साथ ही, जांच पूरी होने तक संदिग्ध निर्माण कार्यों के भुगतान और नए कार्यों पर रोक लगाने की मांग भी की गई है।

इनका कहना है।

शिकायत प्राप्त हुई है जल्द ही जांच कर कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी, आशा कार्यकर्ता के संबंध में स्वास्थ्य विभाग को पत्राचार किया गया है जैसे ही दस्तावेज जानकारी प्राप्त होती है कार्यवाही नियमानुसार होगी।

*हरीश चंद्र द्विवेदी, सीईओ पुष्पराजगढ़*

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