मॉडल ट्राइबल स्कूल पर संकट 8वीं के बाद आदिवासी बच्चों का भविष्य, अभिभावक अनिश्चितकालीन हड़ताल पर

मॉडल ट्राइबल स्कूल पर संकट 8वीं के बाद आदिवासी बच्चों का भविष्य, अभिभावक अनिश्चितकालीन हड़ताल पर


*विद्यालय का नही हुआ उन्नयन*

अनूपपुर। 

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (अमरकंटक) परिसर स्थित मॉडल ट्राइबल स्कूल को कक्षा 9वीं से 12वीं तक उन्नत करने की वर्षों पुरानी मांग अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। सोमवार को अभिभावक संघ अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठ गया है। अभिभावकों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन केंद्र सरकार को भ्रामक जानकारी देकर स्कूल के उन्नयन को लगातार टाल रहा है, जिससे आठवीं उत्तीर्ण कर चुके सैकड़ों आदिवासी विद्यार्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है। उनका कहना है कि कई बार आवेदन, ज्ञापन और जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप के बावजूद कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। कई सांसदों द्वारा केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को पत्र लिखे जाने और राष्ट्रपति तक गुहार लगाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। अभिभावकों का कहना है कि यह केवल एक स्कूल के विस्तार का मुद्दा नहीं, बल्कि आदिवासी बच्चों के शिक्षा के अधिकार, समान अवसर और सामाजिक न्याय से जुड़ा संवेदनशील प्रश्न है।

*शिक्षा पर लगा विराम, बच्चों का भविष्य संकट में*

मॉडल ट्राइबल स्कूल की स्थापना आदिवासी विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी, लेकिन विद्यालय आज भी केवल कक्षा 8वीं तक सीमित है। परिणामस्वरूप विद्यार्थियों को अन्य स्कूलों में प्रवेश लेने के लिए मजबूर होना पड़ता है। आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर परिवारों के अनेक बच्चे बीच में ही पढ़ाई छोड़ देते हैं। अभिभावकों का कहना है कि यदि समय रहते 9वीं से 12वीं तक कक्षाओं का संचालन शुरू नहीं हुआ तो अनेक प्रतिभाशाली छात्र शिक्षा से वंचित हो जाएंगे।

*ज्ञापन व सांसदों के पत्र भी नहीं आए काम*

विद्यालय के उन्नयन के लिए अभिभावकों, छात्र संगठनों और सामाजिक संस्थाओं ने कई बार विश्वविद्यालय प्रशासन को ज्ञापन सौंपे। इसके बाद शहडोल सांसद हिमाद्री सिंह, मंडला सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते और खरगोन-बड़वानी सांसद गजेन्द्र सिंह पटेल ने भी केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को अनुशंसा पत्र भेजे। राष्ट्रपति को ज्ञापन और केंद्रीय शिक्षा मंत्री से व्यक्तिगत मुलाकात के बावजूद अब तक कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, जिससे अभिभावकों में गहरा असंतोष है।

*प्रशासन पर गुमराह करने का आरोप*

अभिभावक संघ का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन वास्तविक स्थिति से केंद्र सरकार को अवगत कराने के बजाय भ्रामक जानकारी प्रस्तुत कर रहा है। उनका कहना है कि लगातार उपेक्षा के कारण अब शांतिपूर्ण और अनिश्चितकालीन आंदोलन ही अंतिम विकल्प बचा है। अभिभावकों का स्पष्ट कहना है कि जब तक विद्यालय को कक्षा 12वीं तक उन्नत करने का लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

*धरना से पहले लगा प्रतिबंध*

धरना की अनुमति मांगने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासनिक भवन और मुख्य द्वार के आसपास प्रतिबंधात्मक आदेश लागू कर दिए गए। अभिभावकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर संवाद स्थापित करने के बजाय आंदोलन पर रोक लगाने का प्रयास लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है। उनका मानना है कि प्रशासन को प्रतिबंध लगाने के बजाय समस्या के समाधान के लिए सकारात्मक पहल करनी चाहिए।

*शिक्षा बचाओ आंदोलन बना आदिवासी अधिकारों की आवाज*

अभिभावकों का कहना है कि यह संघर्ष किसी संस्था के विरोध का नहीं, बल्कि आदिवासी बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने का अभियान है। उनका विश्वास है कि शिक्षा ही सामाजिक न्याय, समान अवसर और आत्मनिर्भरता का सबसे मजबूत आधार है। उन्होंने समाज, जनप्रतिनिधियों और सरकार से अपील की है कि मॉडल ट्राइबल स्कूल को शीघ्र कक्षा 12वीं तक उन्नत किया जाए ताकि जनजातीय विद्यार्थियों को अपने ही परिसर में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिल सके।

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