पुलिस अधीक्षक राष्ट्रपति वीरता पदक से मुख्यमंत्री ने किया सम्मानित


अनूपपुर

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर राजधानी भोपाल के ऐतिहासिक लाल परेड ग्राउंड में आयोजित स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा अनूपपुर पुलिस अधीक्षक मोती उर्र रहमान को राष्ट्रपति वीरता पदक से सम्मानित किया।

पुलिस अधीक्षक मोती उर्र रहमान को बालाघाट जिले के नक्सल प्रभावित क्षेत्र में बहादुरी और साहसिक कार्रवाई के लिए राष्ट्रपति वीरता पदक से सम्मानित किया जाएगा। इस संबंध में घोषणा 16 अक्टूबर 2023 को की गई थी, जिसमें 18 दिसंबर 2022 और 22 अप्रैल 2023 की घटनाओं में उत्कृष्ट वीरता दिखाने वाले पुलिसकर्मियों को शामिल किया गया है।

जानकारी के अनुसार अप्रैल 2023 में बालाघाट जिले के नक्सल प्रभावित क्षेत्र में नक्सलियों की मौजूदगी की सूचना पर विशेष अभियान चलाया गया। इस दौरान पुलिस की संयुक्त टीम ने नक्सलियों से मुठभेड़ कर बड़ी मात्रा में हथियार, विस्फोटक और अन्य सामग्री बरामद की। कार्रवाई में कई वांछित नक्सली मारे गए और क्षेत्र में नक्सली गतिविधियों को करारा झटका लगा। इसी महीने की एक अन्य घटना में, गोंदिया बॉर्डर के पास पुलिस बल ने विशेष अभियान चलाकर नक्सलियों को घेर लिया। भीषण मुठभेड़ के बाद नक्सलियों के ठिकानों को नष्ट कर भारी मात्रा में हथियार जप्त किये गए थे।

चौपाटी में डोसा व चाट वाले के बीच हुई मारपीट, मचा अफरा-तफरी का माहौल, कार्यवाही की मांग


शहडोल

जिला मुख्यालय की मशहूर चौपाटी शुक्रवार की रात एक मारपीट की घटना से दहशत में आ गई। यहां सबसे कॉर्नर पर लगने वाले एक दोसा स्टॉल के कर्मचारियों ने मिलकर गुप्ता चाट सेंटर के संचालक से हाथापाई कर दी। मामला महज जगह को लेकर शुरू हुआ था, लेकिन दोसा स्टॉल वालों की ओर से आक्रामक रवैया अपनाने के चलते यह विवाद हिंसा में बदल गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, रात करीब 7 बजे चौपाटी पर ग्राहकों की भीड़ लगी हुई थी। इसी बीच दोसा स्टॉल और गुप्ता चाट वाले के बीच दुकान लगाने की जगह को लेकर बहस शुरू हुई। गुप्ता चाट वाले ने शांत तरीके से अपनी बात रखने की कोशिश की, मगर दोसा स्टॉल के कर्मचारियों ने एकजुट होकर धक्का-मुक्की शुरू कर दी। कुछ कर्मचारियों ने मारपीट तक कर दी, जिससे माहौल बिगड़ गया।

घटना का एक वीडियो किसी ने मोबाइल में कैद कर सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया, जो अब तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में स्पष्ट दिख रहा है कि दोसा स्टॉल के 4-5 कर्मचारी एक व्यक्ति को घेरकर मारपीट कर रहे हैं, जबकि गुप्ता चाट वाला खुद को बचाने की कोशिश कर रहा है। इस दौरान आसपास मौजूद लोग खड़े होकर तमाशा देखते रहे, लेकिन किसी ने बीच-बचाव नहीं किया। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस पूरे विवाद में गड़बड़ी की शुरुआत दोसा स्टॉल वालों की ओर से हुई। जगह को लेकर बोलचाल को उन्होंने झगड़े का रूप दे दिया और सामूहिक रूप से हमला किया। इससे न केवल चौपाटी का माहौल खराब हुआ, बल्कि ग्राहकों में भी अफरा-तफरी मच गई।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर लोग पुलिस और प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि दोसा स्टॉल संचालक और उसके कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।  वही भूपेंद्र गुप्ता का आरोप है कि चाकू से हमला सुनील गुप्ता ने किया, जिसमें उनके कपड़े फट गए और हाथ में चोट आई। वहीं, सुनील गुप्ता का कहना है कि हमला पहले भूपेंद्र ने किया और उन्होंने सिर्फ बचाव किया। विवाद के दौरान आसपास के लोगों ने बीच-बचाव कर भूपेंद्र को किसी तरह सुरक्षित कोतवाली पहुंचाया, जहां से उन्हें जिला अस्पताल भेजा गया।

भ्रष्टाचारी अपनी लिप्तता छुपाने के लिए संगठन मंत्री पर करवाया हमला, आंदोलन हुआ और उग्र

*मामला इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय का*


अनूपपुर

जब पूरा देश 15 अगस्त की आज़ादी का जश्न मना रहा था, तब इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (IGNTU) अमरकंटक में आंदोलन कर रहे छात्रों व अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के संगठन मंत्री के साथ बाहरी अपराधी तत्वों को बुलाकर मारपीट करवाकर एक शर्मनाक और निंदनीय घटना को अंजाम दिया गया है।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सैकड़ों कार्यकर्ता इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजाति विश्वविद्यालय अमरकंटक में शोध प्रवेश परीक्षा पीएचडी में कथित धांधली और अनियमितताओं के विरोध में अनिश्चितकालीन आंदोलन पर बैठे हैं। कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय प्रशासनिक भवन का घेराव कर जोरदार नारेबाजी की।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का आरोप है कि पीएचडी प्रवेश परीक्षा में गंभीर गड़बड़ियां हुई हैं, जिसकी शिकायत छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन और मंत्रालयों में की थी, लेकिन उन्हें न्याय नहीं मिला। इस मामले में हाई कोर्ट, जबलपुर में भी याचिका दायर हुई है, जिसे कोर्ट ने स्वीकार करते हुए सभी पक्षों को नोटिस जारी किया है। इस पर अगली सुनवाई अगस्त के अंतिम सप्ताह में होगी।

आंदोलन के बीच, भ्रष्टाचारियों द्वारा अपनी लिप्तता छुपाने के लिए बाहर से अपराधी तत्व जैसे लोगो को बुलाकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद संगठन मंत्री पर हमला किया गया। परिषद का कहना है कि यह हमला सोची-समझी साजिश है, ताकि छात्रों की आवाज दबाई जा सके और जांच को प्रभावित किया जा सके।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने मांग की है कि घटना में शामिल सभी बाहरी व्यक्तियों की पहचान कर तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाए। भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की जाए। राष्ट्रविरोधी एवं छात्र विरोधी गतिविधियों में लिप्त लोगों को सार्वजनिक रूप से बेनकाब किया जाए। शोध प्रवेश परीक्षा तत्काल रद्द हो और पूरे मामले की सीबीआई से जांच कराई जाए। संगठन ने चेतावनी दी है कि जब तक न्याय नहीं मिलता, आंदोलन और तेज होगा और भ्रष्टाचारियों की कोई भी चाल सफल नहीं होने दी जाएगी।


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