बालिका की अस्पताल में हुई मौत, मिठाई खाने के बाद बिगड़ी थी तबियत, पुलिस जांच में जुटी


शहडोल

जिले ब्यौहारी के चरखरी गांव में मिठाई खाने के बाद बालिका की तबीयत बिगड़ी और उपचार के दौरान उसकी अस्पताल में मौत हो गई है।घटना की सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने अपनी जांच शुरू कर दी है। डॉक्टर ने कहा की पीलिया बीमारी से ग्रसित थी बालिका।

ब्यौहारी थाना क्षेत्र के चरखरी गांव की रहने वाली ईशानी कहार पिता पप्पू कहार (10) की अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई है। पुलिस ने बताया कि परिजनों के बयान दर्ज किए गए हैं, जिसमें यह बात आई है कि बालिका ने रविवार सुबह 9:00 बजे मिठाई खाई थी, और उसके बाद से बालिका के पेट में तेज दर्द शुरू हुआ ।जिसके बाद परिजन उसे अस्पताल ले कर पहुंचे।जहां रविवार शाम बालिका ने दम के तोड़ दिया।

बालिका की मौत के बाद अस्पताल से पुलिस को सूचना दी गई,सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने परिजनों के बयान लिए तो बयान में यह बात आई की बालिका ने परिवार के अन्य सदस्यों के साथ घर में आई रक्षाबंधन की मिठाई को खाया था, बालिका मिठाई खाने के बाद से पेट में दर्द की शिकायत करने लगी। जिसके बाद उसे अस्पताल लेकर परिजन पहुंचे थे, कुछ घंटे चले इलाज के बाद उसने अस्पताल में दम तोड़ दिया।परिजनों के अनुसार मिठाई घर के अन्य बच्चे भी खाए थे,लेकिन उन्हें कोई भी दिक्कत नहीं हुई।पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर राजेश मिश्रा से जब इस मामले में बात की गई तो उन्होंने कहा कि मिठाई खाने के बाद बालिका की तबीयत बिगड़ी थी, उसके पेट में दर्द होने से परिजन उसे अस्पताल लेकर पहुंचे थे,उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई है। डॉ मिश्रा ने कहा ब्यौहारी ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर से इस संबंध में मेरी बात हुई है। उन्होंने यह भी बताया है कि बालिका पिछले कुछ दिनों से पीलिया की बीमारी से ग्रसित थी, और इस बीमारी में तेल और मिठाई खतरनाक हो सकती है। पीएम रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा।

तेज रफ्तार स्कोर्पियो ने बाइक को मारी जोरदार टक्कर, 5 की हुई मौत, 3 गंभीर घायल


अनूपपुर

जिले के बिजुरी के पास बेंलिया गांव की सड़क पर दिल दहला देने वाला हादसा हुआ। झिरिया टोला से बेंलिया की ओर तेज रफ्तार में आ रही एक स्कॉर्पियो ने सामने से आ रहे बाइक सवार को इतनी बेरहमी से कुचला कि उसका चेहरा पहचानना तक मुश्किल हो गया। टक्कर के बाद वाहन करीब 100 मीटर तक बेकाबू दौड़ता हुआ एक घर में घुसकर पलट गया। इस हादसे में स्कॉर्पियो सवार सात में से 5 लोगो की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि तीन गंभीर रूप से घायल हैं।

बाइक चालक की पहचान गाड़ी के नंबर से निगवानी निवासी अमृत लाल चौधरी के रूप में हुई। वह बैंड बजाने के काम से मरवाही जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही काल के गाल में समा गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टक्कर इतनी भयावह थी कि बाइक के परखच्चे चारों ओर बिखर गए और सड़क पर अफरा-तफरी मच गई।

हादसे के बाद पूरे बेंलिया गांव में मातम पसर गया। चीख-पुकार और रोने-बिलखने की आवाजों से माहौल गमगीन हो गया। सूचना मिलते ही पुलिस व एंबुलेंस मौके पर पहुँची और घायलों को तत्काल निकटतम अस्पताल रवाना किया गया।

पुलिस ने मृतकों के शव को कोतमा व बिजुरी अस्पताल भेजा, जहाँ पोस्टमार्टम उपरांत उन्हें परिजनों को सौंपा जाएगा। हादसे की सूचना मिलते ही नगर परिषद डोला के सफाई मित्र भी घटनास्थल पर पहुंचे और पुलिस के साथ मिलकर घायलों को अस्पताल पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह दर्दनाक मंजर बेंलिया ही नहीं, आसपास के क्षेत्रों को भी झकझोर गया है। लोग अब भी सवाल कर रहे हैं, अगर रफ्तार पर लगाम होती, तो शायद पांच जिंदगियाँ बच जातीं।

झांकी निकालकर परम्परागत व धूमधाम से मनाया गया मित्रता का त्योहार कजलिया पर्व


अनूपपुर 

जिले में धूमधाम के साथ कजलियां (भोजली) तिहार मनाया गया, इस दौरान बालिकाओं ने एक दूसरे को सखी बनना कर आजीवन मित्रता निभाने का संकल्प लिया, भोजली के उपज से आने वाले धान के उपज का आंकलन कर किसान भी खुश दिख रहे हैं। प्रकृति प्रेम और खुशहाली जुड़ा है, भोजली तिहार पर्व रक्षाबंधन के दूसरे दिन मनाया जाता है, इस बार 10 अगस्त को भोजली त्यौहार हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। भोजली तिहार को मित्रता दिवस के रूप में मनाया जाता है, इस त्यौहार को अच्छी वर्षा, फसल और सुख-समृद्धि की कामना के लिए भी मनाया जाता है. यह त्यौहार प्रकृति प्रेम और खुशहाली से जुड़ा है।

भोजली को सोन मौहरी मे फ़्रेंडशिप व मितान तिहार के रुप मे भी जाना जाता है, अनूपपुर जिले मे भोजली उत्सव के अवसर पर गांव-गांव में भोजली विसर्जन का आयोजन किया गया, सोन मौहरी गांव में बेटियों के साथ महिला-पुरुष व सामाजिक कार्यकर्ता दिलीप कुमार बैगा, रविंद्र राठौर, अशोक कुमार राठौर, मनोज कुमार राठौर, जगन्नाथ राठौर, रंजन गोंड, श्रीकांत यादव, मनोज राठौर, विजय राठौर, मिथिलेश राठौर, लालू मिस्त्री, सूरज राठौर अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओ ने गाजा बाजा के साथ भोजली विसर्जन किया गया। स्थानीय कलाकारों ने आल्हा और उदल राजा की कहानी से जुड़ी झांकी निकाली और भोजली को देवी गंगा के सामान पवित्र बताते हुए गुणगान किया।

भोजली यानी गेहूं या चांवल को अंकुरित कर नाग पंचमी के दिन अंधेरे कमरे में रख कर उगाया जाता है, महिलाएं इसे देवी-देवता की तरह पूजा करती हैं और सुबह शाम हल्दी पानी का छोड़ काव कर धूप-दीप दिखाती हैं, भजन भी करती हैं। भोजली देकर बड़ों का सम्मान करते हैं, बेटियां एक दूसरे से मित्रता बनाती है और किसान भोजली के ऊंचाई और उसके रंग को देखकर अपने धान की फसल का अंदाजा लगा लेते हैं। सोन मौहरी का पारम्परिक त्यौहार भोजली गांव के एकता और बेटियों के सम्मान के लिए पुराने समय से आयोजित किया जाता रहा है, इस दौरान आल्हा-उदल द्वारा अपनी बहनों के सम्मान की रक्षा के लिए किए गए उपाय को प्रदर्शित करती है, इस परम्परा को आगे भी चलाने के लिए युवा वर्ग को बुजुर्ग जानकारी देते हैं।

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